सिस्टम शहर ले डूबेगा:प्री- मानसून में फेल, शहर डूबा, वाहन धंसे, गोपालपुरा बाईपास पर टैंकर पलटा-ट्रैक्टर धंसा, खातीपुरा में ड्रेनेज के लिए खोदे गड्ढे में कटाव

राजधानी में हर साल जून अंत तक मानसून दस्तक दे देता है। यह जेडीए, निगम, जिला प्रशासन सबको पता है। इसके बावजूद हर साल इसी दौरान शहरभर की सड़कें खुदी मिलती हैं। कहीं ड्रेनेज लाइन डाली जा रही होती है तो कहीं सीवर प्रोजेक्ट अधूरा होता है। गड्ढों को मिट्टी से भर दिया जाता है। नतीजा- पहली तेज बारिश में सड़कें धंस जाती हैं, कॉलोनियां डूब जाती हैं और कई हादसे सामने आते हैं। गुरुवार को प्री-मानसून की पहली तेज बारिश ने यही सच फिर सामने रख दिया। एक घंटे में 50 मिमी (करीब 2 इंच) पानी बरसा, जिसने मानसून की तैयारियों की पोल खोल दी। अधूरे ड्रेनेज प्रोजेक्ट, सीवर लाइन के कटाव और मिट्टी से भरे गड्ढे लोगों के लिए खतरा बन गए। कहीं पूरा ट्रैक्टर समा गया तो कहीं टैंकर धंस गया। पुराने पेड़ और बिजली के खंभे धराशायी हो गए। गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ। भास्कर सवाल… मानसून से पहले काम पूरे क्यों नहीं होते?
जून में बारिश सामान्य बात है। इसके बावजूद शहर में मानसून से ठीक पहले या उसी दौरान ड्रेनेज, सीवर और सड़क खुदाई के काम चलते रहते हैं। बारिश होते ही मिट्टी बैठती है, कटाव होता है और सड़कें धंस जाती हैं। {गोपालपुरा बाईपास पर यही हुआ। 10 दिन पहले सड़क पर गड्ढा हुआ तो मिट्टी डालकर काम पूरा मान लिया गया। गुरुवार दोपहर हुई तेज बारिश में मिट्टी बैठ गई और वहां से गुजर रहा सीवर टैंकर धंसकर पलट गया।
सवाल- गड्ढा पहले से चिह्नित था, फिर भी नहीं सुधारा, हमेशा हादसे का इंतजार क्यों रहता है? खातीपुरा-झोटवाड़ा में ड्रेनेज लाइन का कटाव, 20 फीट चौड़ा गड्ढा बना
खातीपुरा-झोटवाड़ा में ड्रेनेज लाइन के लिए बॉक्स डाले जा रहे थे। खातीपुरा के पास सड़क खोदी गई थी। तेज बारिश के बाद इसमें पानी भर गया और 20 फीट चौड़ा कटाव हो गया। सूचना पर जेडीए टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी से मिट्टी डालकर कटाव भरा। इस प्रोजेक्ट का अभी करीब 100 मीटर का काम बाकी है।
सवाल- मानसून से पहले प्रोजेक्ट पूरे क्यों नहीं किए जाते, डेडलाइन की मॉनिटरिंग क्यों नहीं होती? सीकर रोड पर 40 करोड़ का ड्रेनेज फेल
तेज बारिश से सीकर रोड पर जलभराव से लोगों को परेशानी हुई। यहां हाल ही में 40 करोड़ रुपए खर्च कर नया ड्रेनेज सिस्टम डाला गया है।
सवाल- प्री-मानसून की तेज बारिश का पानी ही नहीं निकला, तो मानसून में क्या होगा? SMS में ट्रॉमा लीक, ECG रूम दूसरी जगह शिफ्ट… माइनर ओटी भी टपक रही एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी की माइनर ओटी व ईसीजी रूम में पानी भर गया। दोनों जगह छत टपक रही है। ईसीजी को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा। बताया जा रहा है कि सार्वजनिक निर्माण विभाग ट्रॉमा की छत पर काम कर रहा है। एसएमएस ट्रॉमा के नोडल अधिकारी डॉ. राजेन्द्र मांडिया का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए ईसीजी रूम को एक्स-रे रूम के पास स्थित रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास शिफ्ट किया है।

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