नशे की तस्करी भी ऑनलाइन:महज 26 हजार रुपए में यूएस से आपके घर तक तीन दिन में कुकीज-गमी के रूप में पहुंचेंगी जानलेवा ड्रग्स

अब कारोबार, पढ़ाई, शॉपिंग ही नहीं नशे की तस्करी भी ऑनलाइन हो गई है। पैडलर्स के पकड़े जाने के डर से अब ड्रग्स का कारोबार भी डिजिटल होता जा रहा है। अब युवा सस्ता नशा करने के लिए ऑनलाइन नशीली दवाएं मंगवा रहे हैं। इंटरनेट की डार्क और एन्क्रिप्टेड दुनिया में अब सीधे मोबाइल ही पैडलर्स बन गए हैं। ड्रग्स तस्कर अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिए युवाओं तक ड्रग्स पहुंचा रहे हैं। टेलीग्राम पर एक ऐसा ही बड़ा इंटरनेशनल ड्रग नेटवर्क चल रहा है। एक चैनल/ग्रुप के जरिए प्रतिबंधित साइकोट्रोपिक दवाइयों से लेकर विदेशों से तस्करी कर लाए गए घातक सिंथेटिक ड्रग्स की खुली मंडी चलाई जा रही है। सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बना ड्रग चैनल्स से संपर्क किया तो माफिया ने दे दिया ड्रग्स का मेन्यू कार्ड भास्कर रिपोर्टर ने अपना नाम और नंबर छिपाकर बात की, ड्रग्स माफिया ने मेनू कार्ड की तरह ड्रग्स की लिस्ट शेयर कर दी। तस्कर ने दावा किया कि वह महज 26 हजार रुपए में भारत की किसी भी जगह पर तीन दिन में ड्रग्स पहुंचा देगा। कुकीज और गमी के पैकेटों में छिपाकर प्रतिबंधित पेनकिलर्स, मैजिक मशरूम और वेप्स भेजे जा रहे हैं। उन्होंने ट्रामाडोल, अल्प्राजोलम और कोडीन के फोटो भी भेजे। तस्कर ने बिटकॉइन एप पर भुगतान करने को कहा। थोक में ड्रग्स लो तो डिस्काउंट, रीसेल ऑफर भी दे रहे तस्कर
इस नेटवर्क को अलग-अलग देशों से तीन लोग संचालित करते हैं। वह पहचान छिपाकर इस नेटवर्क को चला रहे हैं। वे अपने टेलीग्राम वाले ग्रुप में ग्राहकों को बाकायदा पूरे स्टॉक का ‘मेन्यू कार्ड’ भेज रहे हैं। थोक में माल खरीदने पर डिस्काउंट और रीसेल का ऑफर भी दिया जा रहा है। तस्करी के लिए प्रायोरिटी कूरियर बॉक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। टेलीग्राम से ऑर्डर होता है और विदेश से कुरिअर होता है। तस्कर इसके लिए ‘अज्ञात पार्सल’ या ‘डॉक्यूमेंट्स’ लिखकर डिलीवरी करवा रहे हैं।

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