विकसित पंचायत की कहानी:कभी अरंडी की झाड़ियां थीं पहचान, अब बगीचों से महकता है गांव नगला अंडडुआ, यहां के अमरूद-बेर की कई राज्यों में होते हैं निर्यात
बयाना पंचायत समिति की सीदपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला नगला अंडडुआ गांव कभी अरंडी के पेड़ों की बहुतायत के कारण अपनी पहचान रखता था। इसका नाम भी इसी के कारण नगला अंडडुआ पड़ा। यह गांव गंभीर नदी के किनारे बसा हुआ है, ऐसे में रेतीली मिट्टी अरंडी के लिए उपयुक्त थी, लेकिन समय बदला, किसानों की सोच बदली और अब यही गांव बागवानी की बदौलत पूरे क्षेत्र में “बगीचों के गांव” के रूप में जाना जाता है। करीब 5 हजार आबादी और लगभग 70 प्रतिशत साक्षरता वाले इस गांव में आज करीब 800 बीघा भूमि पर बागवानी की जा रही है। गांव के खेतों में नींबू, बेर, अमरूद, करौंदा, चीकू, मौसमी और मिर्च की फसलें लहलहा रही हैं। यहां उत्पादित अमरूद और बेर की मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ दिल्ली, मथुरा और आगरा की मंडियों तक है। बागवानी को बढ़ावा देने में लुपिन संस्था की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्था ने गांव को बागवानी गांव घोषित कर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया। सरकारी संरक्षण की दरकार गांव के किसान बताते हैं कि बागवानी में किसानों के रुझान को देखते हुए इसे अब सरकारी मदद और संरक्षण की जरूरत है। सरकारी स्तर पर बागवानी के लिए किसानों को प्रोत्साहित और आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाना चाहिए। इसके साथियों उन्हें बागवानी की नई तकनीक से भी अपडेट करना चाहिए। ग्राम पंचायत का लेखा जोखा गांव बना प्रेरणा सीदपुर ग्राम पंचायत के सरपंच उदयराम कहते हैं, “नगला अंडडुआ आज क्षेत्र के लिए प्रेरणा बना हुआ है। यहां के किसानों ने मेहनत और नवाचार से गांव की तस्वीर बदली है। पंचायत भी सिंचाई, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए लगातार प्रयासरत है, ताकि बागवानी को बढ़ावा मिल सके।

