डोटासरा ने किरोड़ीलाल के पैर पकड़े!:DG साहब ने क्यों लिखा- डांट पड़ी; ये क्या… पिस्ता के भाव में मूंगफली मिल रही

नमस्कार किरोड़ीलालजी और डोटासराजी का झगड़ा ऑडियो-वीडियो सबूत तक पहुंच गया है। एसीबी के डीजीपी साहब ने पोस्ट क्या डाली, हंगामा हो गया और पुष्कर वाला ‘पिस्ता’ चाहिए क्या? राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. किसने पकड़े, किसके पैर? राजनीति में कोई न कोई किसी न किसी के पैर पकड़ता है। वक्त देख माई-बाप बनाना पड़ता है। इसमें कुछ गलत नहीं। लेकिन ‘पैर पकड़ने’ को लेकर राजस्थान में भयंकर आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है। चीफ साहब ने चिल्ला-चिल्लाकर कहा कि जब गहलोत सत्ता में थे, तब किरोड़ी लाल जी ने अशोक गहलोत जी के पैर पकड़े थे। कहा था कि मुकदमे छुड़वा दो। चीफ साहब का बयान आने के बाद खोजकर्ताओं ने 2019 का किरोड़ीजी का ट्वीट भी निकाल लिया। जिसमें उन्होंने गहलोत से मुलाकात का जिक्र किया था। बात बढ़ती देख दूसरे पक्ष के खोजकर्ता भी एक्टिव हुए और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल का ऑडियो निकाल लाए। जिसमें बेनीवाल कह रहे हैं- डोटासरा को भी देखा है मैंने। पेपरलीक के मामले में किरोड़ीलाल के घर जाकर उनके पैर पकड़ लिए थे। आरोप-प्रत्यारोप में किरोड़ी बाबा ऐसे उलझे कि 160 किलोमीटर दूर गंगापुर पहुंचने में 20 दिन लगा दिए। पहुंचते ही पानी का मसला भी हल। 2. ACB के DG की पोस्ट राजस्थान में ACB जोरदार काम कर रही है। हवा में भ्रष्टाचार सूंघ लेती है। कई को लपेट लिया। लेकिन उस समय खुद घिर गई जब भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे कृषि मंत्रीजी एसीबी के मुख्यालय पहुंच गए। बोले- FIR की कॉपी लीक कैसे हुई। इसमें डॉक्टर और मंत्री का जिक्र है। अगर ये मैं हूं तो गिरफ्तार करो। नहीं तो मामला क्लियर करो। जनता में भ्रम पैदा हो रहा है। इस घटना के बाद अब एसीबी के डीजी साहब की एक पोस्ट की अचानक चर्चा हो गई। पोस्ट में उन्होंने लिखा- डांट पड़ी, एक कान से सुनी, दूसरे कान से निकाल दी। पूछने पर बताया कि बच्चों-युवाओं के लिए यह प्रेरक सलाह है। बच्चों को प्रेरक सलाह देने की टाइमिंग गड़बड़ हो गई। बाकी मामला ज्यादा बढ़ जाए तो फरवरी वाली पोस्ट दोबारा डाली जा सकती है। फरवरी में साहब ने पोस्ट में लिखा था- किसी ने मेरे प्रोफाइल से मिलता-जुलता फेसबुक अकाउंट बना लिया है। जो कि मेरा नहीं है। 3. चलते-चलते..

बड़े-बूढे़ कह गए हैं- नकल में भी अक्ल की जरूरत होती है। बड़े-बड़े ठग अक्सर घुमंतू होते हैं। पीतल को सोना बताकर बेचते हैं और वारदात करके चंपत। लेकिन अजमेर के पुष्कर में तो एक व्यापारी बाकायदा दुकान सजाकर लोगों को ठग रहा था। आटे में नमक जितनी गड़बड़ तो दुकानदार की भी चल जाती है। लेकिन ये भाई मूंगफली को हरा रंगकर पिस्ता के भाव बेच रहा था। 200 ग्राम मूंगफली एक तीर्थयात्री को 520 रुपए की बेच दी। यह अक्ल तो लगाता कि खाने की चीज है, खाते ही पकड़ा जाएगा। तीर्थयात्री ने लोगों को इकट्‌ठा कर लिया। सभी दुकान पर पहुंच गए। वीडियो बनाया। धमकाया। दुकानदार पर कोई असर नहीं। बल्कि अकड़ने लगा। पैसे लौटाते हुए बोला- असली माल कहां मिलता है आजकल। एक बुजुर्ग को इस बात पर गुस्सा आया। बोले- तो क्या असली के भाव नकली बेचोगे? इनपुट सहयोग- राघवेंद्र गुर्जर (दौसा), महेंद्र सैनी (जयपुर), अभिषेक शर्मा (पुष्कर, अजमेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

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