आमज माताजी से पाती आने के बाद सजा मेला:निर्जला एकादशी पर गोराजी कालाजी मंदिर में चढ़ाई ध्वजा
राजसमंद में निर्जला एकादशी के अवसर पर शहर के प्रसिद्ध गोराजी कालाजी मंदिर में आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। सुबह से शुरू हुआ श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। वार्षिक मेले के चलते मंदिर परिसर आकर्षक विद्युत सजावट से जगमगा उठा और पूरे दिन भक्तों की आवाजाही बनी रही। विशेष श्रृंगार के बाद हुई पूजा-अर्चना, जयकारों के बीच चढ़ी ध्वजा निर्जला एकादशी पर मंदिर की ओर से वर्ष में एक बार आयोजित होने वाला पारंपरिक मेला देर रात तक चला। मंदिर के पुजारियों ने गोराजी कालाजी का विशेष श्रृंगार कर विधिवत पूजा-अर्चना की और भोग अर्पित किया। दोपहर में मंदिर शिखर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ध्वजा चढ़ाई गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। ध्वजारोहण के दौरान पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। मेले में खिलौनों से लेकर खान-पान तक की दुकानों पर रही रौनक मंदिर के बाहर कलालवाटी में लगे मेले में आसपास के दर्जनों गांवों से श्रद्धालु पहुंचे। मेले में बच्चों के खिलौने, कपड़े, घरेलू सामान, मनिहारी सामग्री और खान-पान की दुकानों पर दिनभर भीड़ रही। बच्चों ने झूलों का आनंद लिया, जबकि महिलाओं ने खरीदारी कर मेले की रौनक बढ़ाई। आमज माताजी से पाती आने के बाद निभाई जाती है परंपरा मंदिर पुजारियों ने बताया कि रिछेड़ स्थित आमज माताजी मंदिर से पाती आने के बाद ही निर्जला एकादशी के मेले की परंपरा निभाई जाती है। इसी क्रम में दोपहर में ध्वजा चढ़ाने के साथ मंदिर परिसर में भोजन प्रसादी का आयोजन भी किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समिति की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। मांगलिक कार्यों से पहले भेरू पूजन की है परंपरा गोराजी कालाजी मंदिर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और क्षेत्र में इसकी विशेष मान्यता है। 12 खेड़ा क्षेत्र के सर्वसमाज के लोग घरों में होने वाले मांगलिक और विवाह आयोजनों से पहले मंदिर पहुंचकर भेरू पूजन करते हैं। इसके बाद ही शुभ कार्यों की शुरुआत करने की परंपरा आज भी निभाई जाती है।

