कैनवास और रंगों से बनने वाली पेंटिंग लाख से बनाई:देश की पहली लाख आर्टिस्ट द्रोपदी मीणा की अनूठी कला प्रदर्शनी शुरू, 60 से अधिक कलाकृतियां चर्चा में

राजस्थान की पारंपरिक कला को आधुनिक अभिव्यक्ति देने वाली देश की पहली लाख आर्टिस्ट द्रोपदी मीणा की दो दिवसीय कला प्रदर्शनी ‘द पावर 2.0’ का शुभारंभ गुरुवार को जवाहर कला केंद्र की परिजात आर्ट गैलरी में हुआ। प्रदर्शनी में द्रोपदी मीणा की ओर से तैयार की गई करीब 100 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें राजस्थान की संस्कृति, प्रकृति, जनजातीय जीवन, देवी-देवताओं, सामाजिक विषयों और समकालीन चिंताओं को लाख के माध्यम से बेहद आकर्षक ढंग से उकेरा गया है। प्रदर्शनी का उद्घाटन फिक्की फ्लो जयपुर चैप्टर की फाउंडर चेयरपर्सन नीता बूचरा ने किया। इस अवसर पर कला प्रेमियों, कलाकारों और शहर के लोगों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर द्रोपदी की अनूठी कला की सराहना की। गैस चूल्हे पर पिघलाकर तैयार करती हैं लाख की पेंटिंग्स द्रोपदी मीणा ने बताया कि लाख कला को नए रूप में प्रस्तुत करने का विचार उनका अपना था। बचपन से ही उन्हें लाख के साथ काम करने का शौक था और इसी जुनून ने उन्हें एक नई कला शैली विकसित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि मैं लाख को गैस चूल्हे पर पिघलाती हूं, फिर उसे अलग-अलग आकार देकर पेंटिंग तैयार करती हूं। कई बार कलाकृति में नग भी लगाती हूं और चेहरे या आकृतियां बनाने के लिए भी लाख को पिघलाकर ही आकार देती हूं। उन्होंने बताया कि उनकी कई कलाकृतियों को तैयार करने में महीनों का समय लगता है। प्रदर्शनी में लगी एक विशेष पेंटिंग को बनाने में उन्हें दो महीने से अधिक समय लगा।

उल्लेखनीय है कि द्रोपदी मीना भारत की पहली लाख आर्टिस्ट हैं, जो लाख को पेंटिंग, मूर्तियों व अन्य माध्यमों के जरिए विभिन्न रूप प्रदान करती हैं। उन्होंने पारंपरिक लाख कला को आधुनिक स्वरूप प्रदान करते हुए कैनवास पर कई अनोखी कलाकृतियां बनाई है। सुहागिनों के लिए चूड़ी बनाने में उपयोग किए जाने वाले लाख को विशेष तकनी से पिघलाकर एवं मोल्ड कर ये खूबसूरत पेंटिंग्स तैयार की गई हैं। जेकेके में लगाई गई इस प्रदर्शनी में उन्होंने लाख पेंटिंग के जरिए भगवान कृष्ण के विविध स्वरूपों को बखूबी प्रदर्शित किया है। पहली बार लाख से बनाई मधुबनी, गोंड और वरली पेंटिंग्स द्रोपदी ने बताया कि प्रदर्शनी में 60 से अधिक प्रमुख पेंटिंग्स शामिल हैं, जिनमें मधुबनी, वरली, गोंड और मंडला आर्ट जैसी पारंपरिक कला शैलियों को लाख के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि अब तक ये कलाएं कैनवास पर रंगों से बनाई जाती थीं, लेकिन मैंने पहली बार इन्हें लाख के माध्यम से कैनवास पर तैयार किया है। यह एक नया प्रयोग है, जिसे लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। लगन चौक कलाकृति के माध्यम से आर्टिस्ट ने बताया कि शादियों के दौरान घरों की दीवारों पर लगन चौक बनाया जाता है। द्रोपदी ने दीवारों को लाल करके लाख से इसे बनाया है। देवी के आशीर्वाद की प्रतीक इस रचना में पालघाट देवी का चित्र है। इसी प्रकार विवाह व अनुष्ठानों के समय बनाए जाने वाले देव चौक की लाख कलाकृति में पालघाट देवी के साथ-साथ घोड़े व योद्धा भी बनाए गए हैं। नव विवाह जोड़ी की सुरक्षा व बुरी नजर से बचाने के लिए और यह ब्रह्मांड के संतुलन को दर्शाता है। इनके अलावा मातृत्व, राजस्थानी संस्कृति, प्रकृति, महापुरुषों, धार्मिंक व ऐतिहासिक स्थलों तथा समाज में महिलाओं की भूमिका पर आधारित पेंटिंग्स को भी कलाप्रेमियों द्वारा काफी सराहा गया। प्रकृति से लेकर संस्कृति और सामाजिक सरोकार तक प्रदर्शनी में शामिल कलाकृतियों में राजस्थान की लोक संस्कृति, जनजातीय जीवन, अफ्रीकी ट्राइबल आर्ट, देवी-देवताओं के चित्र, सामाजिक संदेश और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को प्रमुखता से दर्शाया गया है। द्रोपदी ने बताया कि उनकी एक विशेष कलाकृति पृथ्वी पर बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरण संकट को दर्शाती है। इस पेंटिंग के माध्यम से मैंने दिखाने का प्रयास किया है कि बढ़ता प्रदूषण हमारे जीवन और प्रकृति को किस तरह प्रभावित कर रहा है। यदि हम पर्यावरण का ध्यान नहीं रखेंगे तो भविष्य में ऑक्सीजन जैसी मूलभूत चीजों की भी कमी हो सकती है। परंपरा और नवाचार का अनूठा संगम द्रोपदी मीणा की कला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने राजस्थान की पारंपरिक लाख कला को केवल आभूषणों और सजावटी वस्तुओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे आधुनिक कला के कैनवास पर नई पहचान दी। उनकी कलाकृतियां पारंपरिक तकनीक और समकालीन विषयों का सुंदर संगम प्रस्तुत करती हैं। प्रदर्शनी में आने वाले कला प्रेमी न केवल लाख कला की बारीकियों को समझ रहे हैं, बल्कि एक ऐसी कलाकार की रचनात्मक यात्रा से भी रूबरू हो रहे हैं, जिसने अपनी कल्पनाशक्ति और मेहनत के दम पर एक नई कला शैली को पहचान दिलाई है। दो दिवसीय यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है और बड़ी संख्या में दर्शक द्रोपदी मीणा की अनूठी रचनाओं को देखने पहुंच रहे हैं।

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