महासम्मेलन में उठी जनगणना में ओबीसी कॉलम जोड़ने की मांग:पूर्व पीएम वीपी सिंह जयंती पर सामाजिक-राजनीतिक जागरूकता पर जोर

चूरू में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की जयंती पर गुरुवार को टाउन हॉल में आयोजित ओबीसी महासम्मेलन में वर्ष 2027 की जनगणना में ओबीसी का अलग कॉलम जोड़ने और उप-वर्गीकरण लागू करने की मांग प्रमुखता से उठी। सम्मेलन में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और युवाओं ने भाग लेते हुए सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए एकजुटता का संदेश दिया। ‘ओबीसी के अधिकार अब और नहीं रोके जा सकते’ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरियाणा के पूर्व लोकसभा सांसद राजकुमार सैनी ने कहा कि देशभर में ओबीसी वर्ग तेजी से जागरूक हो रहा है, लेकिन आज भी उसके साथ बड़े स्तर पर अन्याय और शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों को अब और अधिक समय तक रोका नहीं जा सकता। सैनी ने वर्ष 2027 की जनगणना में अनुसूचित जाति एवं जनजाति की तर्ज पर बिंदु संख्या 12 में ओबीसी का अलग कॉलम जोड़ने तथा ओबीसी वर्गीकरण लागू करने की मांग की। उन्होंने इस मुद्दे पर देशभर में चल रहे आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान भी किया। संगठन और संघर्ष को बताया अधिकारों की कुंजी नेशनल ओबीसी वेलफेयर सोसाइटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष गिरधारीलाल तंवर ने सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि मूल ओबीसी समाज को अपने अधिकारों की रक्षा और हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए संगठित होकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने समाज की एकजुटता को उसकी सबसे बड़ी ताकत बताया। सोसाइटी के संरक्षक डॉ. अशोक जांगिड़ ने संगठन के उद्देश्यों और समाजहित में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। वहीं संरक्षक एवं सेवानिवृत्त तहसीलदार राधेश्याम स्वामी ने 2027 की जनगणना में ओबीसी कॉलम जोड़ने और उप-वर्गीकरण की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। शिक्षा और राजनीतिक जागरूकता पर जोर जिलाध्यक्ष एडवोकेट रामेश्वर प्रजापति ने संगठन की गतिविधियों और सामाजिक जागरूकता अभियानों की जानकारी दी। डिंपल मेड़तिया ने पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के जीवन, संघर्ष और सामाजिक न्याय के लिए उनके योगदान को याद किया। सुनीता कंवर चारण ने ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण की मांग उठाई। कामगार समाज के जिलाध्यक्ष हरिप्रसाद हर्षवाल ने कहा कि ओबीसी समाज में राजनीतिक चेतना का विस्तार समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। दौलतराम पेंशिया और चानणमल सैनी ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का आधार बताते हुए महिलाओं की शिक्षा पर विशेष जोर दिया। कई समाज प्रतिनिधियों ने रखे विचार सम्मेलन में एडवोकेट आशाराम सैनी, घड़सीराम स्वामी, प्रेम सिंह पंवार और मूलचंद सैनी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर हरिकिशन जांगिड़, गुमानीराम प्रजापत, महावीर स्वामी, बैजाराम जांगिड़, भागीरथ सैनी, ओमप्रकाश इंदौरिया, योगिता प्रजापत, भंवर सिंह परिहार, ओमप्रकाश प्रजापत, बनवारीलाल सैनी, राधेश्याम सैनी, नारायणदान चारण, भंवरलाल सैनी, सुभाष सैनी कड़वासर और कन्हैयालाल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन रिछपाल सिंह चारण और चंद्रमोहन सैनी ने किया।

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