सरलाई जमीन विवाद में सामने आया दूसरा पक्ष:जमीनी विवाद में राजपूत समाज को घसीटने का आरोप, एसपी से की शिकायत
चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर थाना क्षेत्र के सरलाई गांव में जमीन और ट्यूबवेल को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सामाजिक और कानूनी दोनों स्तर पर तूल पकड़ता दिख रहा है। बुधवार को कुमावत समाज के कुछ लोगों ने मरूधर होटल मालिक प्रहलाद सिंह मेड़तिया और अधिवक्ता महेंद्र सिंह मेड़तिया पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसके अगले ही दिन आज गुरुवार को जौहर स्मृति संस्थान, मेवाड़ क्षत्रिय महासभा, श्री महाराणा भूपाल शिक्षा समिति और अन्य प्रतिनिधि पुलिस अधीक्षक से मिले और पूरे मामले में अपना पक्ष रखा। इन संगठनों का कहना है कि प्रहलाद सिंह और महेंद्र सिंह को जानबूझकर विवाद में घसीटा जा रहा है, जबकि जमीन और ट्यूबवेल का मामला राजस्व रिकॉर्ड और नपती से जुड़ा है। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और समाज को बदनाम करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। आरोपों के बाद सामने आया दूसरा पक्ष जौहर स्मृति संस्थान के अध्यक्ष नारायण सिंह बड़ौली ने बताया कि सरलाई गांव का यह मामला दो पक्षों के बीच जमीन और ट्यूबवेल से जुड़ा विवाद है। उनके अनुसार इस जमीन की कई बार पत्थरगड़ी हो चुकी है और तहसीलदार खुद मौके पर जाकर सीमांकन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि तहसीलदार की रिपोर्ट सेटलमेंट विभाग को भेजी गई है और वहां से जो भी फैसला आएगा, वह दोनों पक्षों को मंजूर होना चाहिए। बड़ौली का कहना है कि इस विवाद को जरूरत से ज्यादा राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और महेंद्र सिंह मेड़तिया को बेवजह इसमें शामिल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले में राजपूत समाज को घसीटना गलत है, जबकि समाज का इससे सीधा कोई लेना-देना नहीं है। इसी बात को लेकर समाज और संस्थाओं के प्रतिनिधि एसपी कार्यालय पहुंचे और निष्पक्ष जांच की मांग की। फायरिंग, धमकी और मारपीट के आरोपों को बताया गलत नारायण सिंह बड़ौली ने साफ कहा कि एक दिन पहले लगाए गए फायरिंग, मारपीट, धमकी, फसल खराब करने और तोड़फोड़ जैसे आरोप पूरी तरह गलत हैं। उनका कहना है कि न तो कोई फायरिंग हुई और न ही इस तरह की कोई घटना हुई है। उन्होंने दावा किया कि राजस्व रिकॉर्ड और तहसीलदार की नपती के आधार पर संबंधित जमीन और ट्यूबवेल कैलाश सिंह के पक्ष में बताए गए हैं, और उसी आधार पर स्थिति स्पष्ट की गई है। संगठनों का कहना है कि प्रहलाद सिंह और महेंद्र सिंह ने किसी को धमकाया नहीं, न ही किसी की फसल खराब की और न ही किसी तरह की जबरन कार्रवाई की। उनका आरोप है कि कुछ लोग निजी और राजनीतिक कारणों से इस मामले को बढ़ा रहे हैं और इसमें समाज की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। इसलिए उन्होंने पुलिस से मांग की है कि सिर्फ शिकायतों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय राजस्व रिकॉर्ड, मौके की रिपोर्ट और सभी पक्षों के बयान देखकर जांच की जाए। भू-माफिया बोलना गलत, निष्पक्ष जांच की गुहार एसपी को समाज जनों ने बताया कि जौहर स्मृति संस्थान, मेवाड़ क्षत्रिय महासभा, श्री महाराणा भूपाल शिक्षा समिति और अन्य प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रहलाद सिंह मेड़तिया और अधिवक्ता महेंद्र सिंह मेड़तिया को भू-माफिया बताना गलत है। यह भी कहा गया कि करीब चार साल पहले खरीदी गई कृषि भूमि और ट्यूबवेल पर उनका कब्जा और उपयोग लगातार चल रहा है। संस्थाओं का कहना है कि तहसीलदार भदेसर 8 जून 2026 को मौके पर जाकर पत्थरगड़ी कर चुके हैं और आगे की कार्रवाई के लिए मामला उपखंड अधिकारी और संबंधित विभाग को भेजा गया है। ऐसे में इस विवाद को सामाजिक टकराव या दबंगई के रूप में पेश करना सही नहीं है। प्रतिनिधियों ने एसपी से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और झूठे आरोप लगाकर समाज की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ भी उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। इस दौरान नरपत सिंह भाटी, महाराज सहदेव सिंह नरेला, एस.पी. सिंह सठौड़ सहित कई लोग मौजूद रहे।

