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ICICI बैंक का मुनाफा 16% बढ़कर ₹14,805 करोड़:पहली तिमाही में अनुमान से बेहतर रहे नतीजे, बैंक की एसेट क्वालिटी भी सुधरी

ICICI बैंक लिमिटेड ने अप्रैल-जून तिमाही के लिए अपने स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 15.95% की बढ़त दर्ज की है। यह बढ़कर 14,804.5 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। बैंक का यह मुनाफा बाजार के अनुमानों से काफी बेहतर रहा। इस निजी क्षेत्र के बड़े बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी उम्मीद से ज्यादा तेजी से बढ़ते हुए 12.7% की एनुअल ग्रोथ के साथ 24,384.35 करोड़ रुपए रही। बाजार के अनुमानों को पीछे छोड़ा CNBC-TV18 के एनालिस्ट पोल के अनुसार, बाजार को उम्मीद थी कि इस तिमाही में ICICI बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 9% की बढ़त के साथ 23,689 करोड़ रुपए रह सकती है। वहीं, नेट प्रॉफिट में पिछले साल के मुकाबले 7% की ग्रोथ का अनुमान था, जिसके तहत इसके 13,616 करोड़ रुपए रहने की उम्मीद जताई गई थी। बैंक ने मुनाफे और इंटरेस्ट इनकम दोनों ही मामलों में इन अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। मार्जिन और एसेट क्वालिटी में सुधार जून तिमाही के दौरान बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में तिमाही और सालाना दोनों आधार पर सुधार देखने को मिला है। इस तिमाही में NIM 4.36% दर्ज किया गया। हालांकि, मार्च तिमाही में यह 4.32% और पिछले साल की समान अवधि में 4.34% के स्तर पर था। इसके साथ ही बैंक की एसेट क्वालिटी को भी और मजबूती मिली है। लोन बुक और डिपॉजिट में 14% की ग्रोथ 30 जून 2026 तक बैंक का कुल लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 19.6% की रफ्तार से बढ़कर 16,31,260 करोड़ रुपए हो गया। वहीं कुल डिपॉजिट में भी 14% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 18,33,586 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। इसी तरह औसत डिपॉजिट भी 14% बढ़कर 17,48,028 करोड़ रुपए रहा है, जबकि बैंक का एवरेज कासा (CASA) रेशियो 38.1% दर्ज किया गया है। बैंक को एनपीए के मोर्चे पर राहत मिली 30 जून 2026 तक बैंक का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) रेशियो घटकर 1.38% पर आ गया है, जो मार्च के अंत में 1.40% और पिछले साल की समान अवधि में 1.67% था। वहीं बैंक का नेट एनपीए रेशियो की बात करें तो यह 0.35% रहा, जो पिछली तिमाही में 0.33% और एक साल पहले 0.41% के स्तर पर था। बैंक ने 2026 में अब तक 8.7% रिटर्न दिया शुक्रवार को ICICI बैंक के शेयर 1.84% की बढ़त के साथ 1,444.3 रुपए पर बंद हुए थे। साल 2026 में अब तक इस स्टॉक ने निवेशकों को 8.7% का रिटर्न दिया है। इसकी तुलना में देखें तो इसी अवधि के दौरान शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 में 6.9% की गिरावट दर्ज की गई है, यानी बैंक ने मार्केट के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। क्या होती है नेट इंटरेस्ट इनकम और नेट इंटरेस्ट मार्जिन? नेट इंटरेस्ट इनकम (NII): बैंक मुख्य रूप से दो काम करता है- जमा यानी डिपॉजिट स्वीकार करना और लोन देना। लोन देने पर बैंक को जो ब्याज मिलता है, उसमें से जमाकर्ताओं को दिए जाने वाले ब्याज को घटाने के बाद बची रकम को नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) कहते हैं। यह बैंक की मुख्य कमाई होती है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM): यह किसी बैंक की वित्तीय सेहत को मापने का एक पैमाना है। बैंक अपनी कुल ब्याज कमाने वाली संपत्तियों (जैसे लोन) पर जितना ब्याज कमाता है और जमा राशि पर जितना ब्याज चुकाता है, उसके अंतर को प्रतिशत में व्यक्त करने पर इसे नेट इंटरेस्ट मार्जिन कहा जाता है। नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA क्या है? जब कोई व्यक्ति या संस्था किसी बैंक से लोन लेकर उसे वापस नहीं करती, तो उसे बैड लोन या नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA कहा जाता है। यानी इन लोन्स की रिकवरी की उम्मीद काफी कम होती है। नतीजतन बैंकों का पैसा डूब जाता है और बैंक घाटे में चला जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, अगर किसी बैंक लोन की किस्त 90 दिनों तक यानी तीन महीने तक नहीं चुकाई जाती है, तो उस लोन को NPA घोषित कर दिया जाता है। अन्य वित्तीय संस्थाओं के मामले में यह सीमा 120 दिन की होती है। बुक को क्लियर करने के लिए बैंकों को ऐसा करना होता है। ये खबर भी पढ़ें… HDFC बैंक का मुनाफा 5% बढ़कर ₹19,060 करोड़: नेट इंटरेस्ट इनकम 6.7% बढ़ी; बैंक के नतीजे एक्सपर्ट्स के अनुमान से कम रहे HDFC बैंक लिमिटेड ने शनिवार को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही (Q1 FY27) में बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.98% बढ़कर 19,059.72 करोड़ रुपए रहा। हालांकि, यह मुनाफा CNBC-TV18 पोल के 19,332 करोड़ रुपए के अनुमान से कम रहा। पूरी खबर पढ़ें…

जोधपुर-हड़पसर एक्सप्रेस 25 जुलाई तक रद्द:श्री भादरिया लाठी स्टेशन पर रुकेगी 'लीलण' और 'बांद्रा' सुपरफास्ट एक्सप्रेस

मध्य रेलवे के मुंबई मंडल में भारी बारिश के बाद हुए भूस्खल के कारण रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके चलते हड़पसर-जोधपुर-हड़पसर सुपरफास्ट एक्सप्रेस का संचालन अब 25 जुलाई तक प्रभावित रहेगा। यह ट्रेन गत 10 जुलाई से ही अस्थायी रूप से रद्द चल रही थी, जिसकी अवधि को अब रेलवे प्रशासन ने आगे बढ़ाते हुए 25 जुलाई तक कर दिया है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (Sr. DCM) हितेश यादव ने बताया- ट्रैक बाधित होने के कारण (ट्रेन संख्या 20495) जोधपुर-हड़पसर सुपरफास्ट एक्सप्रेस की 18 से 24 जुलाई के बीच की सात ट्रिप (फेरे) रद्द की गई हैं। इसी प्रकार, वापसी में (ट्रेन संख्या 20496) हड़पसर-जोधपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस की भी 19 से 25 जुलाई के बीच की सात ट्रिप रद्द रहेंगी। यात्रियों के लिए रेलवे की सलाह ट्रेनों के अचानक रद्द होने से यात्रियों को होने वाली असुविधा को देखते हुए रेलवे ने विशेष अपील जारी की है। प्रशासन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे घर से निकलने या अपनी यात्रा शुरू करने से पहले रेलवे के हेल्पलाइन नंबरों या आधिकारिक वेबसाइट/ऐप के जरिए अपनी ट्रेन की वर्तमान स्थिति (लाइव स्टेटस) की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। श्री भादरिया लाठी स्टेशन पर रुकेगी ‘लीलण’ और ‘बांद्रा’ सुपरफास्ट एक्सप्रेस जैसलमेर रूट पर यात्रा करने वाले रेल यात्रियों की सुविधा के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे ने एक बड़ा फैसला लिया है। जोधपुर मंडल के ‘श्री भादरिया लाठी’ स्टेशन पर अब दो प्रमुख सुपरफास्ट ट्रेनों का ठहराव (Halt) शुरू किया जा रहा है। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने हाल ही में जैसलमेर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्य के लोकार्पण समारोह में स्थानीय लोगों की मांग पर इसकी घोषणा की थी। प्रायोगिक आधार पर आगामी आदेशों तक ठहराव मंजूर जोधपुर के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि यात्रियों की लंबे समय से चल रही मांग को देखते हुए राईका बाग-जैसलमेर रेलखंड पर स्थित श्री भादरिया लाठी स्टेशन पर दो ट्रेनों के ठहराव को मंजूरी दी गई है। इनमें जैसलमेर-जयपुर-जैसलमेर लीलण सुपरफास्ट एक्सप्रेस (दैनिक) और बांद्रा टर्मिनस-जैसलमेर-बांद्रा टर्मिनस सुपरफास्ट एक्सप्रेस (साप्ताहिक) शामिल हैं। यह ठहराव फिलहाल प्रायोगिक आधार पर आगामी आदेशों तक रहेगा। जानें दोनों ट्रेनों के ठहराव का समय (Time-Table): 1. जैसलमेर-जयपुर-जैसलमेर लीलण एक्सप्रेस (प्रतिदिन): ट्रेन संख्या 12467 (जैसलमेर से जयपुर): 19 जुलाई से इस ट्रेन का श्री भादरिया लाठी स्टेशन पर प्रतिदिन रात्रि 1:14 बजे आगमन और 1:16 बजे प्रस्थान होगा (2 मिनट का ठहराव)। ट्रेन संख्या 12468 (जयपुर से जैसलमेर): यह ट्रेन प्रतिदिन सुबह 4:00 बजे स्टेशन पहुंचेगी और 4:02 बजे जैसलमेर के लिए रवाना होगी। 2. बांद्रा टर्मिनस-जैसलमेर-बांद्रा एक्सप्रेस (साप्ताहिक): ट्रेन संख्या 22931 (बांद्रा टर्मिनस से जैसलमेर): 25 जुलाई से प्रत्येक शनिवार सुबह 8:08 बजे इस स्टेशन पर पहुंचेगी और 8:10 बजे रवाना होगी। ट्रेन संख्या 22932 (जैसलमेर से बांद्रा टर्मिनस): 18 जुलाई से प्रत्येक शनिवार शाम 6:54 बजे इस स्टेशन पर पहुंचेगी और 6:56 बजे प्रस्थान करेगी। शुक्रवार को जैसलमेर रेलवे स्टेशन के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से देश को संबोधित किया था। इसी भव्य समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों की मांग को तुरंत स्वीकार करते हुए श्री भादरिया लाठी स्टेशन पर इन दोनों सुपरफास्ट ट्रेनों के ठहराव की घोषणा कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी थी।

पूर्व NSG कमांडो ड्यूटी पर ड्रग्स की तस्करी करता था:छुट्‌टी पर घर आते समय लाता था खेप; जेल भी जा चुका, बना रखी थी कई कंपनियां

ड्रग्स तस्करी के मामले में गिरफ्तार किए गए पूर्व NSG कमांडो ने पुलिस पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। आरोपी ड्यूटी पर रहते हुए भी नशीले पदार्थों की तस्करी करता था। ड्यूटी से छुट्टी लेकर घर आते समय नशे की खेप लेकर आता था। इसके कारण कोई शक नहीं करता था। पुलिस ने आरोपी को शनिवार को कोर्ट में पेश कर 12 दिन की रिमांड पर लिया है। डीसीपी ईस्ट मनीष चौधरी ने बताया-आरोपी रतनसिंह ने कई फर्में भी बना रखी थीं। अंदेशा है कि अवैध तस्करी की कमाई के पैसों को इधर-उधर करने के लिए उसने कंपनियां बना रखी थीं। सूत्रों के मुताबिक आरोपी सोलर से लेकर जल जीवन मिशन में भी पाइप का ठेका ले रखा था। असम राइफल्स में रहने के दौरान हुआ तस्कर से संपर्क डीसीपी ईस्ट मनीष चौधरी ने बताया- आरोपी की ड्यूटी असम राइफल्स में थी। इसके चलते वह नॉर्थ ईस्ट के तस्करों के संपर्क में आ गया। जब ड्यूटी से छुट्टी लेकर घर आता था तो थोड़ी बहुत खेप अपने साथ भी लेकर आ जाता था। ड्रग्स के साथ पकड़ा गया था डीसीपी ने बताया- आरोपी रतनसिंह साल 2008 में असम राइफल्स में भर्ती हुआ था। इसके बाद साल 2017 में एनएसजी में चला गया। 2021 में नागालैंड में ब्राउन शुगर पकड़े जाने के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे एनएसजी ने निकाल दिया था। खास बात यह कि आरोपी 40 दिन तक जेल में रहा। जेल से बाहर आते ही फिर से मादक पदार्थ तस्करी शुरू कर दी थी। मादक पदार्थ की खेप आरोपी मणिपुर की तरफ से ही लेकर आता था। पूछताछ में आरोपी ने बताया- आमतौर पर नशीले पदार्थ की खेप ट्रेन के जरिए लेकर आता था। यहां लाने के बाद उसे लोकल नेटवर्क के जरिए सप्लाई कर देता था। एजेंसियां पूछताछ में जुटी इधर, आरोपी के पास से 1 करोड़ 60 लाख 50 हजार रुपए कैश मिलने के चलते इनकम टैक्स और अन्य एजेंसियों भी अब उससे पूछताछ करेगी। लग्जरी बना रखा था मकान जोधपुर पुलिस ने 16 जुलाई को देर रात बनाड़ स्थित पूर्व NSG कमांडो के घर पर कार्रवाई की थी। कार्रवाई में सामने आया कि आरोपी लग्जरी लाइफ जी रहा था। बंगले में कई आलीशान निर्माण भी करवाए हुए थे। लेकिन मकान बाहर से साधारण नजर आता है। छापेमारी के दौरान आरोपी के घर से 1 करोड़ 60 लाख 50 हजार रुपए की नकदी और 8 किलो अफीम का दूध भी बरामद हुआ था। …. ये भी पढ़ें… पूर्व NSG कमांडो के घर से 1.06 करोड़ कैश मिला:जोधपुर में 6 करोड़ का मकान बना रखा; छापे में 8 किलो अफीम का दूध भी बरामद जोधपुर पुलिस ने NSG में कमांडो रहे रतनसिंह को ड्रग तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया है। बनाड़ थाना पुलिस टीम ने गुरुवार देर रात पूर्व NSG कमांडो के घर पर छापा मारा। पुलिस को देख रतनसिंह ने भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया। (पूरी खबर पढ़ें)

ट्रांसपोर्टर से बना तस्कर, एक साल बाद गिरफ्तार:घर आने की सूचना पर ANTF ने पकड़ा; 10 हजार का इनाम था

मध्यप्रदेश के नीमच जिले में NDPS एक्ट के मामले में पिछले एक साल से फरार चल रहे 10 हजार रुपए के इनामी आरोपी को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने चित्तौड़गढ़ से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान गंगरार थाना क्षेत्र के सुवाणिया गांव निवासी किशनलाल (27) पुत्र भगवानालाल गाडरी के रूप में हुई। पुलिस को सूचना मिली थी कि फरार आरोपी अपने घर आया हुआ है। इसके बाद एएनटीएफ ने पहले उसकी मौजूदगी की पुष्टि की और फिर उसके घर पर घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। आरोपी लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। उसकी तलाश मध्यप्रदेश पुलिस लगातार कर रही थी। गिरफ्तारी के बाद अब उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है कि पूछताछ में डोडा-पोस्त की तस्करी से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं। उसके साथ काम करने वाले अन्य लोगों तक भी पहुंचा जा सकता है। नीमच पुलिस ने घोषित कर रखा था इनाम महानिरीक्षक पुलिस विकास कुमार ने बताया- किशनलाल के खिलाफ मध्यप्रदेश के नीमच जिले में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज है। कार्रवाई के दौरान वह फरार हो गया था और करीब एक साल तक पुलिस के हाथ नहीं लगा। लगातार फरार रहने के कारण नीमच पुलिस अधीक्षक ने उस पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। एएनटीएफ को हाल ही में सूचना मिली कि आरोपी अपने गांव स्थित घर आया है। टीम ने सूचना की पुष्टि करने के बाद उसके घर और आसपास निगरानी रखी। सही समय मिलने पर पुलिस ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को पकड़ने के दौरान उसे भागने का कोई मौका नहीं मिला। ट्रांसपोर्ट के काम से शुरू हुआ अपराध का सफर पुलिस जांच के अनुसार- किशनलाल पहले चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट का काम करता था। वह माल लेकर जाने वाले ट्रकों को गुजरात भेजता था। आरोप है कि वहां कुछ दलालों के साथ मिलकर ट्रकों को कटवा देता था और बाद में ट्रक मालिकों को यह कहता था कि ट्रक चोरी हो गया है। शुरुआत में किसी को उस पर शक नहीं हुआ, लेकिन जब कई ट्रकों के साथ एक जैसी घटनाएं होने लगीं तो ट्रक मालिकों ने अपने स्तर पर जानकारी जुटाई। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और अलग-अलग ट्रक मालिकों ने उसके खिलाफ ट्रकों की हेराफेरी और खुर्द-बुर्द करने के करीब आठ मामले दर्ज कराए। इन मामलों में कार्रवाई के बाद उसे जेल जाना पड़ा। जेल से बाहर आते ही तस्करी में उतर गया पुलिस के मुताबिक किशनलाल के अपराध की दिशा जेल जाने के बाद बदल गई। जेल में उसकी पहचान ऐसे लोगों से हुई जो लंबे समय से अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल थे। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने ट्रांसपोर्ट का पुराना काम छोड़ दिया और डोडा-पोस्त की तस्करी शुरू कर दी। पहले उसने दूसरे तस्करों के साथ मिलकर काम किया और फिर धीरे-धीरे अपना अलग नेटवर्क तैयार कर लिया। पुलिस का कहना है कि उसने राजस्थान, मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों के तस्करों से संपर्क बढ़ाए और अवैध मादक पदार्थों की खरीद, परिवहन और सप्लाई का काम शुरू कर दिया। राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच बनाया सप्लाई नेटवर्क जांच में सामने आया है कि आरोपी मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से डोडा-पोस्त की खेप मंगवाकर राजस्थान के अलग-अलग जिलों में सप्लाई करता था। इस पूरे काम में उसके साथ कई अन्य तस्कर भी जुड़े हुए थे, जो माल की ढुलाई और वितरण में मदद करते थे। पुलिस के अनुसार इस अवैध कारोबार से आरोपी ने लाखों रुपए कमाए। इसी दौरान उसके खिलाफ नीमच जिले में एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज हुआ। पुलिस कार्रवाई तेज होने के बाद वह फरार हो गया और लगातार ठिकाने बदलता रहा। पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश में पुलिस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किशनलाल की गिरफ्तारी सिर्फ एक फरार आरोपी को पकड़ने तक सीमित नहीं है। अब जांच एजेंसियों का फोकस उसके पूरे नेटवर्क पर है। उससे यह जानकारी जुटाई जा रही है कि वह किन लोगों के संपर्क में था, डोडा-पोस्त की खेप कहां से आती थी, किन रास्तों से राजस्थान पहुंचाई जाती थी और किन जिलों में इसकी सप्लाई होती थी।

मनियां सीएचसी पर 134 गर्भवती महिलाओं की जांच:पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत लगा शिविर, हाई रिस्क प्रेगनेंसी की स्क्रीनिंग

धौलपुर जिले के मनियां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत एक विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर में कुल 134 गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की गई, जिसमें दवा वितरण और हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) की स्क्रीनिंग भी शामिल थी। मरीजों को पौष्टिक आहार भी वितरित किया गया। चिकित्सा प्रभारी डॉ. आर. के. यादव ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना है। इसी लक्ष्य के साथ शिविर में सामान्य प्रसव पूर्व जांचों के अलावा जटिल गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) की पहचान के लिए विशेष स्क्रीनिंग की गई, ताकि समय पर उचित उपचार सुनिश्चित किया जा सके। शिविर के दौरान कुल 134 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) की गई। इनमें से 54 महिलाओं को ‘मां वाउचर’ योजना का लाभ प्रदान किया गया, जबकि 37 महिलाओं की हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) के लिए स्क्रीनिंग की गई। स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ शिविर में पोषण जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। अस्पताल स्टाफ और स्थानीय समाजसेवियों ने मिलकर गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को फल, दूध और बिस्किट वितरित किए। इस दौरान उन्हें संतुलित आहार के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। इस शिविर को सफल बनाने में चिकित्सा प्रभारी डॉ. आर. के. यादव, डॉ. विनीत गर्ग, डॉ. मयंक मित्तल, नर्सिंग ऑफिसर रामावतार कुशवाह, नीरज कुमारी सहित सीएचसी के समस्त चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

दावा-खामेनेई के अंतिम संस्कार में विदेश मंत्री को पत्थर मारे:ईरानी राष्ट्रपति को गालियां दीं; कट्टरपंथियों का आरोप- सरकार अमेरिका के सामने झुकी

अमेरिका के साथ युद्धविराम समझौते के बाद ईरान के भीतर राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पर अब ईरान के कट्टरपंथी धड़े ‘सॉफ्ट कूप’ यानी बिना हथियारों के सत्तापलट करने का आरोप लगा रहे हैं। कट्टरपंथियों का कहना है कि इन नेताओं ने अमेरिका से समझौता करके ईरान के सिद्धांतों से समझौता किया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह तेहरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान यह नाराजगी खुलकर दिखाई दी। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान जब खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब काले कपड़े पहने कुछ लोगों ने राष्ट्रपति के खिलाफ नारे लगाए। वहीं, अंतिम संस्कार स्थल से कुछ दूरी पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थर फेंके गए और उन्हें देश बेचने वाला गद्दार कहा गया। हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें वहां से भागना पड़ा। कट्टरपंथियों का आरोप- अमेरिका के सामने सरकार झुक गई CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों का मानना है कि अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने के बजाय सरकार ने अमेरिका के सामने झुककर समझौता कर लिया। उनका कहना है कि यह समझौता नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के आदेशों के खिलाफ किया गया। मुजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही खुलकर अपनी सत्ता का प्रदर्शन किया है, जबकि उनके नाम पर सरकार बातचीत भी कर रही है और देश भी चला रही है। कट्टरपंथियों का आरोप है कि मुजतबा की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर मौजूदा सरकार अपनी ताकत बढ़ाने में लगी है। उनका दावा है कि वे संसद को कमजोर करना चाहती है। मुजतबा खामेनेई के लगातार सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने के कारण राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची युद्ध के बाद ईरान के सबसे प्रमुख चेहरे बन गए हैं। कट्टरपंथियों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यही है। अंतिम संस्कार में जंग का संदेश, कुछ दिन बाद ही टूट गया युद्धविराम ईरान में युद्ध के दौरान राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की लगातार अपील की जा रही थी, लेकिन अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में कट्टरपंथी गुटों का दबदबा साफ दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों ने इस मौके का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ फिर से युद्ध छेड़ने की मांग उठाने और ट्रम्प सरकार के साथ हुए किसी भी समझौते को पूरी तरह खारिज करने के लिए किया। कट्टरपंथियों की यह इच्छा कुछ ही दिनों बाद पूरी होती नजर आई। इस सप्ताह ईरान और अमेरिका के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम लगभग टूट गया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाकर इस समुद्री मार्ग पर अपना कंट्रोल दिखाने की कोशिश की। इसके जवाब में अमेरिका ने जवाबी हमले किए। राष्ट्रपति को खुलेआम दी गई थी जान से मारने की धमकी युद्ध दोबारा शुरू होने से पहले भी कट्टरपंथी नेता अमेरिका से समझौता करने वाले अधिकारियों पर लगातार हमला बोल रहे थे। ईरानी शासन से जुड़े धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को खुलेआम धमकी दी थी। उन्होंने कहा- राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे। राष्ट्रपति को जान से मारने की इस धमकी की ईरान में काफी आलोचना हुई, लेकिन बख्शी के खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। गालिबाफ भी कट्टरपंथियों के निशाने पर कट्टरपंथियों के निशाने पर सिर्फ राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ही नहीं हैं। अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी उनके निशाने पर हैं। गालिबाफ पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में कमांडर रह चुके हैं और लंबे समय से ईरान की राजनीति में सक्रिय हैं। कट्टरपंथी सांसद कमरान गजनफारी ने जुलाई की शुरुआत में जारी एक वीडियो मैसेज में आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व सर्वोच्च नेता और संसद की भूमिका कमजोर कर रहा है। कट्टरपंथियों को किनारे करने की कोशिश तेज ईरान में करीब चार महीने बाद 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। इसमें सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आया और अमेरिका के साथ हुए समझौते का विरोध करने वाले दो प्रमुख कट्टरपंथी सांसदों को अहम संसदीय पदों से हटा दिया गया। सबसे पहले अमेरिका से समझौते का सबसे ज्यादा विरोध करने वाले कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (नेशनल सिक्योरिटी कमीशन) से हटा दिया गया। इसके अलावा इसके प्रवक्ता रहे इब्राहिम रेजाई को भी हटा दिया गया। नबावियन पहले अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन बाद में उन्होंने वार्ता का विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने पिछले महीने समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले उसका मसौदा मीडिया में लीक कर दिया था, ताकि समझौता रुक सके। विशेषज्ञ बोले- सरकार कट्टरपंथियों का असर कम करना चाहती है एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की मौजूदा सरकार अब इन कट्टरपंथी गुटों का प्रभाव कम करने की कोशिश कर रही है। हामिदरेजा अजीजी ने CNN से कहा- हम देख रहे हैं कि गालिबाफ इन कट्टरपंथी नेताओं को धीरे-धीरे किनारे कर रहे हैं। ये लोग अब व्यवस्था के लिए बोझ बन चुके हैं और देश में अस्थिरता बढ़ने के साथ अपनी आपसी लड़ाई भी खुलकर सामने ला रहे हैं। हालांकि इन कट्टरपंथियों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन संसद और सरकारी न्यूज एजेंसीज आईआरआईबी (IRIB) जैसे कई प्रभावशाली संस्थानों में उनकी मजबूत पकड़ है। इनकी वास्तविक राजनीतिक ताकत कितनी है, यह साफ नहीं है। इस धड़े के प्रमुख नेता और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख सईद जलीली को 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में 1.3 करोड़ से ज्यादा वोट मिले थे। वे चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे। ईरान की कुल आबादी करीब 9.3 करोड़ है। ट्रम्प ने कहा था- ईरान भीतर से बंटा हुआ है युद्ध और कूटनीतिक बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि ईरान का नेतृत्व गंभीर अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है और यही किसी समझौते में सबसे बड़ी बाधा है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार और कट्टरपंथियों के बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन पूरे शासन की प्राथमिकता अब भी एक जैसी है। उनका लक्ष्य ऐसा समझौता करना है जिससे युद्ध खत्म हो, ईरान को प्रतिबंधों से राहत मिले और होर्मुज स्ट्रेट पर उसका प्रभाव भी बना रहे। अमेरिका से फिर जंग चाहते हैं कट्टरपंथी CNN के अनुसार, मुजतबा खामेनेई का लगातार सार्वजनिक रूप से सामने न आना, युद्धविराम को लेकर उनका सीमित समर्थन, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का बढ़ता प्रभाव और अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में जुटी भारी भीड़ ने कट्टरपंथियों का मनोबल बढ़ा दिया है। अब वे अमेरिका और इजराइल के खिलाफ युद्ध जारी रखने की खुलकर मांग कर रहे हैं। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और कट्टरपंथी नेता मनूचेहर मुत्ताकी ने बुधवार को एक टीवी इंटरव्यू में कहा, मेरा सुझाव है कि हम क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के किसी सैन्य अड्डे पर जाएं, जहां सैकड़ों या शायद हजारों अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। अगर हम उनमें से 100 सैनिकों को पकड़कर ईरान ले आएं, तो इतना ही काफी होगा। यह बयान दिखाता है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के बावजूद ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। एक तरफ सरकार कूटनीतिक रास्ते से प्रतिबंधों में राहत और युद्ध खत्म करने की कोशिश कर रही है, वहीं कट्टरपंथी धड़े अब भी अमेरिका और इजराइल के खिलाफ टकराव की नीति पर अड़े हुए हैं। इससे आने वाले समय में ईरान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है। —————————– ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका का लगातार सातवीं रात ईरान पर हमला:भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर अटैक; ईरान ने कतर-कुवैत पर दागीं मिसाइलें अमेरिका ने शनिवार को लगातार सातवीं रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की। इन हमलों में पुल, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट का एक कंट्रोल (निगरानी) टावर निशाना बना। जवाब में ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन की ओर मिसाइलें दागीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

सोलर पैनल होंगे सस्ते:प्रति किलोवाट 12 हजार रुपए तक कम होगी रेट, जानें- सरकार ने क्यों लिया फैसला

सोलर लगवाने वाले उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर हैं। केंद्र सरकार ने डीसीआर मॉड्यूल की अनिवार्यता लागू करने के आदेश को 6 महीने के लिए वापस ले लिया है। इससे प्रति किलोवाट लागत 12 हजार रुपए तक कम हो जाएगी। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने शनिवार शाम को एक नया आदेश जारी किया है। इसके तहत अब 31 दिसंबर 2026 तक नेट मीटरिंग और ओपन एक्सेस प्रोजेक्ट्स को नॉन-डीसीआर (Non-DCR) मॉड्यूल के जरिए भी कमीशन (चालू) करने की अनुमति दे दी गई है। सरकार के इस फैसले से अब अगले छह महीनों तक कंपनियां और उपभोक्ता अपने पुराने स्टॉक में रखे मॉड्यूल का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे अटके हुए प्रोजेक्ट्स पूरे सकेंगे। देशभर में अटक गए थे हजारों प्रोजेक्ट्स सरकार ने 1 जून से यह नियम लागू किया था कि बिना ALMM (अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स) वाले सोलर मॉड्यूल से बने प्रोजेक्ट्स को ग्रिड कनेक्शन नहीं दिया जाएगा। इसके कारण देशभर में हजारों रूफटॉप और ओपन एक्सेस सोलर प्रोजेक्ट्स का काम बीच में ही अटक गया था, जिससे उपभोक्ताओं और वेंडर्स दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।
3 किलोवाट का सोलर सिस्टम 40 हजार रुपए तक हुआ था महंगा डीसीआर मॉड्यूल की अनिवार्यता लागू होने के बाद बाजार में इनकी भारी किल्लत हो गई थी, जिससे कीमतें बढ़ गई थीं। पहले जहां नॉन-डीसीआर मॉड्यूल 15 से 16 रुपए प्रति वाट की दर से मिल रहे थे, वहीं डीसीआर मॉड्यूल के दाम बढ़कर सीधे 30 से 32 रुपए प्रति वॉट तक पहुंच गए थे। इसका सीधा असर ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के लाभार्थियों पर पड़ा। इसके चलते 3 किलोवॉट का घरेलू रूफटॉप सोलर सिस्टम 35 से 40 हजार रुपए तक महंगा हो गया, यानी प्रति किलोवाट लागत में करीब 12 हजार रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस खर्च के कारण कई उपभोक्ताओं ने अपने नए प्रोजेक्ट टाल दिए और वेंडर्स के पुराने ऑर्डर भी बीच में ही अटक गए। घरों पर ढांचे तैयार, पर पैनल गायब राजस्थान में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत 2200 से ज्यादा वेंडर्स पंजीकृत हैं, जिनमें से करीब 800 वेंडर्स अकेले जयपुर डिस्कॉम क्षेत्र में कार्यरत हैं। डीसीआर मॉड्यूल की कमी के कारण प्रदेश में हजारों घरेलू और कमर्शियल सोलर प्रोजेक्ट्स बुरी तरह प्रभावित हुए। स्थिति यह हो गई थी कि कई घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए लोहे के स्ट्रक्चर (ढांचे) तो तैयार हो गए, लेकिन मॉड्यूल की सप्लाई न होने से पैनल नहीं लग पाए। वेंडर्स का कहना है कि सप्लाई रुकने से ग्राहकों के साथ उनके विवाद बढ़ने लगे, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में भी हजारों मेगावाट के रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट अधर में लटक गए। लंबे समय के लिए चाहिए स्थायी समाधान राजस्थान सोलर एसोसिएशन के सीईओ नितिन अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने इंडस्ट्री की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए छह महीने की जो राहत दी है, उससे पहले से रुके हुए कई सोलर प्रोजेक्ट्स अब पूरे हो सकेंगे। इससे वेंडर्स और उपभोक्ताओं दोनों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश में अभी भी सोलर सेल का घरेलू उत्पादन मांग के अनुरूप बहुत कम है। इसलिए, सोलर इंडस्ट्री को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार को लंबे समय के लिए कोई व्यावहारिक और स्थायी समाधान निकालने की जरूरत है।

झालावाड़ में 1 घंटे चला 'आदर्श ट्रैफिक जोन':नियम तोड़ने वालों पर पुलिस ने की सख्त कार्रवाई, एक बाइक जब्त

झालावाड़ शहर में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए शनिवार शाम को पुलिस ने ‘आदर्श ट्रैफिक जोन’ अभियान चलाया। मामा-भांजा सर्किल से मूर्ति तिराहे तक एक घंटे चले इस अभियान के दौरान पुलिस ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन ड्राइवरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। अभियान में बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने, तेज गति से वाहन चलाने, मोबाइल पर बात करने और सीट बेल्ट नहीं लगाने सहित यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले ड्राइवरों के चालान काटे गए। इस कार्रवाई से कई वाहन ड्राइवरों में हड़कंप मच गया और कुछ लोग पुलिस से बचने के लिए रास्ता बदलते भी दिखे। ट्रैफिक एएसआई आशीष ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और आमजन में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में शनिवार शाम 5 से 6 बजे तक एक घंटे का यह विशेष ‘आदर्श ट्रैफिक जोन’ अभियान चलाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि अभियान के दौरान एक बाइक सवार के पास ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन की आरसी नहीं मिलने पर उसकी बाइक जब्त कर ली गई। पुलिस ने आमजन से अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए यातायात नियमों का पालन करने और हेलमेट का उपयोग करने की अपील की है। पुलिस ने चेतावनी दी कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस अभियान के दौरान ट्रैफिक एसआई हरीश कुमार, एएसआई कुंदन, राधेश्याम मालव, भीम सिंह सहित कई ट्रैफिक पुलिसकर्मी मौजूद थे।

उदयपुर में रक्तदान शिविर सहित कई सेवा कार्य होंगे:प्रो. विजय श्रीमाली की पुण्यतिथि पर 21 जुलाई को होंगे सेवा कार्य, पोस्टर का विमोचन

शिक्षाविद्, समाजसेवी एवं महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के पूर्व कुलपति प्रो. विजय श्रीमाली की आठवीं पुण्यतिथि पर 21 जुलाई को प्रोफेसर विजय श्रीमाली फाउंडेशन की ओर से रक्तदान, पौधारोपण और भोजन सेवा सहित विभिन्न सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शनिवार को टाइगर हिल स्थित संस्कार भवन में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर के पोस्टर का विमोचन किया गया। इसके साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोगों से इस सेवा अभियान में भागीदारी की अपील की गई। रक्तदान शिविर में जुड़ने का किया आह्वान फाउंडेशन के जतिन श्रीमाली ने बताया कि पुण्यतिथि के अवसर पर कार्यक्रमों की शुरुआत 21 जुलाई को सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक संस्कार भवन, टाइगर हिल में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर से होगी। इसके बाद बड़गांव स्थित नटराज किड्स प्लेनेट में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। वहीं शाम को महाराणा भूपाल हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों के परिजनों के लिए भोजन सेवा का आयोजन कर प्रो. श्रीमाली को पुष्पांजलि दी जाएगी। पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में फाउंडेशन के जतिन श्रीमाली, ओमशंकर श्रीमाली, डॉ. देवेंद्र श्रीमाली, गणेश श्रीमाली, जमनालाल ओझा, भूपेंद्र श्रीमाली, ललित त्रिवेदी, भावप्रकाश दशोत्तर, दिनेश श्रीमाली, निशांत श्रीमाली सहित कई सदस्य मौजूद रहे। सभी ने आमजन से रक्तदान शिविर में भाग लेकर मानव सेवा के इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। फाउंडेशन पदाधिकारियों ने बताया कि प्रो. विजय श्रीमाली का जीवन शिक्षा, सामाजिक सरोकार और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित रहा। उनकी स्मृति में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले सेवा कार्य समाज में परोपकार, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने का संदेश देते हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन खत्म:सोमवार से काम पर लौटेंगी, 6 मांगों पर बनी लिखित सहमति

राजस्थान के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को जयपुर निदेशालय में शासन सचिव के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। शासन सचिव और प्रतिनिधिमंडल के बीच लिखित समझौता होने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी है। सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सोमवार से अपने काम पर लौटेंगी। बैठक में अलवर जिला अध्यक्ष लतेश कुमारी और तहसील महामंत्री आशा शर्मा सहित प्रतिनिधिमंडल के कई सदस्य शामिल हुए। लतेश कुमारी ने कहा- लंबे संघर्ष के बाद प्रशासन के साथ लिखित समझौता हुआ है। हमारी लगभग सभी जायज मांगें मान ली गई हैं। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही हम अपनी हड़ताल समाप्त करने की घोषणा करते हैं। सोमवार से सभी कार्यकर्ता पूरी निष्ठा के साथ अपना कार्यभार संभाल लेंगे।