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हिमाचल के 11 स्केटर एशियन ट्रॉफी के लिए सिलेक्ट:6 खिलाड़ी चियोग के रहने वाले; ग्रामीणों ने बिना सरकारी मदद खुद बनाया आइस स्केटिंग रिंक

हिमाचल प्रदेश के 11 खिलाड़ी ‘एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी-2026’ के लिए चयनित हुए हैं। इनमें से छह खिलाड़ी शिमला जिला के चियोग व आसपास के है, जहां के ग्रामीणों ने खुद बिना सरकारी मदद के दो साल पहले आइस ‘स्केटिंग रिंक’ तैयार किया। अब यहां तैयार बच्चे इंडियन टीम के लिए चयनित हुए है। आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने टीम देहरादून में आयोजित ट्रॉयल के दौरान टीम का चयन किया। भारतीय टीम में सिलेक्ट 11 में से 7 खिलाड़ी चियोग में ही अभ्यास करते है। अब यही बच्चे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। ये खिलाड़ी करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व चयनित खिलाड़ियों में तेजस्वी कुठियाला, रुद्रवीर गांगटा, समर्थ अत्री, दिव्यांश ठाकुर, आभास वर्मा, आद्विक जगटा, आराध्या शर्मा, अनिरुद्ध चंदेल, शुभम ठाकुर, विख्यात कंवर और मोक्षा शर्मा शामिल हैं। इनमें से आभास वर्मा, आद्विक जगटा, आराध्या शर्मा, अनिरुद्ध चंदेल, शुभम ठाकुर और विख्यात कंवर चियोग के रहने वाले हैं। शिमला जिला के ही जुब्बल के रहने वाले रुद्रवीर गांगटा भी चियोग के ही आइस स्केटिंग रिंक में अभ्यास करते हैं। देहरादून में होगी एशियन चैम्पियनशिप एशियन चैम्पियनशिप 17 से 20 अगस्त तक उत्तराखंड के देहरादून स्थित हिमाद्रि आइस रिंक में आयोजित होगी। इसमें भारत समेत 11 एशियाई देशों के 200 से अधिक खिलाड़ी भाग लेंगे। इससे पहले इंडियन टीम के लिए चयनित खिलाड़ी 21 जुलाई से देहरादून में होने वाले कैंप में शामिल होंगे। ग्रामीणों ने खुद पहाड़ काटकर बनाया रिंक आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट प्रदीप कंवर और कोच रविंद्र ठाकुर ने इसका श्रेय क्षेत्र की जनता को दिया है, जिन्होंने खुद आइस स्केटिंग रिंक तैयार किया। उन्होंने बताया कि बिना सरकारी मदद के आइस स्केटिंग रिंक तैयार करना सपने देखने जैसा है। ग्रामीणों ने पहाड़ को काटकर पहले समतल मैदान तैयार किया। इसके बाद यहां रिंक तैयार किया गया। उन्होंने बच्चों और उनके अभिभावकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि छोटे से चियोग गांव व आसपास के छह बच्चों का चयन भारतीय टीम में होना पूरे हिमाचल के लिए गौरव की बात है। चियोग स्थित आइस स्केटिंग रिंक में स्केटिंग के PHOTOS.. —————————- इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़ें:- हिमाचल में ग्रामीणों ने बनाया ‘आइस स्केटिंग रिंक’:सरकार 10 साल में नहीं बना सकी, 84 बच्चे ट्रेनिंग ले रहे, नेशनल से एशियन तक चमके
हिमाचल की राजधानी में एक दशक से ऑल वेदर आइस स्केटिंग रिंक बनाने के सरकारी दावे आज तक कागजों में सीमित हैं, लेकिन शिमला से सटे चियोग के स्थानीय लोगों ने अपने दम पर वह कर दिखाया, जो सरकार नहीं कर सकी। यहां ग्रामीणों ने अपने आराध्य देवता सोगू की जमीन पर पहाड़ी को समतल कर एक शानदार ‘आइस स्केटिंग रिंक’ तैयार किया है। यह भी पढ़ें:-

रोहित लॉर्ड्स पर वनडे शतक लगाने वाले पहले भारतीय:इंग्लैंड में सबसे ज्यादा सेंचुरी लगाने वाले विदेशी बैटर; कोहली के साथ 21वीं शतकीय साझेदारी

इंग्लैंड ने तीसरे वनडे में भारत को 27 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। लॉर्ड्स में रोहित शर्मा ने 138 रन की पारी खेली। वे लॉर्ड्स के मैदान पर वनडे शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। रोहित का यह इंग्लैंड की धरती पर आठवां वनडे शतक रहा। इसके साथ ही वे किसी एक विदेशी देश में सबसे ज्यादा वनडे शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने अपने नाम एक और उपलब्धि जोड़ते हुए सबसे ज्यादा उम्र में वनडे शतक लगाने वाले भारतीय खिलाड़ी का रिकॉर्ड भी बनाया। रोहित ने विराट कोहली के साथ दूसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की। दोनों ने वनडे क्रिकेट में 21वीं बार 100 या उससे ज्यादा रन की साझेदारी की। मैच के दौरान एक दिलचस्प नजारा भी देखने को मिला। रोहित अपनी पारी खेलने के लिए शार्दूल ठाकुर का बैट लेकर मैदान में उतरे। उनकी यह तस्वीर वायरल हो रही है। IND Vs ENG मैच के टॉप रिकॉर्ड्स-मोमेंट्स… 1. रोहित-कोहली ने एकसाथ 400 इंटरनेशनल मैच खेले विराट-रोहित ने एक साथ सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेलने का भारतीय रिकॉर्ड बनाया। एक साथ 400 इंटरनेशनल मैच खेलने वाली यह पहली भारतीय जोड़ी बनी। दोनों ने इंटरनेशनल खेलते हुए साझेदारी में 8 हजार रन से ज्यादा जोड़े हैं। 2. रोहित-कोहली के बीच 21वीं शतकीय साझेदारी रोहित और कोहली ने 21वीं शतकीय साझेदारी की। इसके साथ ही वनडे में सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारी करने वाली यह दूसरी जोड़ी बन गई। उन्होंने श्रीलंका के दिलशान-संगकारा के 20 शतक के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। पहले स्थान पर सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली की जोड़ी है। उनके बीच वनडे में 26 शतकीय साझेदारियां हुई हैं। 3. रोहित ने इंग्लैंड में आठवां शतक लगाया रोहित शर्मा ने घर से बाहर किसी एक देश में सबसे ज्यादा वनडे शतक लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। उन्होंने 138 रन की पारी के दौरान इंग्लैंड में अपना आठवां वनडे शतक लगाया। इसके साथ ही उन्होंने सचिन तेंदुलकर और पाकिस्तान के सईद अनवर के 7-7 शतकों का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। दोनों ने UAE में 7-7 शतक लगाए हैं। 4. रोहित लॉर्ड्स में वनडे शतक लगाने वाले पहले भारतीय रोहित ने 110 गेंद पर 138 रन की पारी खेली। वे लॉर्ड्स के मैदान पर वनडे शतक लगाने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। उन्होंने सौरव गांगुली के 90 रन के स्कोर को पीछे छोड़ा। इसके साथ ही रोहित भारत के लिए किसी फॉर्मेट में शतक लगाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी भी बने। उन्होंने 39 साल 80 दिन की उम्र में शतक लगाया। सचिन तेंदुलकर ने 38 साल 327 दिन की उम्र में शतक बनाया था। 5. विराट 87 और रोहित 73 शतकीय साझेदारियों में शामिल रहे कोहली और रोहित ने शतकीय साझेदारियों का नया रिकॉर्ड बनाया। वनडे में सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारी के मामले में विराट दूसरे और रोहित तीसरे स्थान पर हैं। कोहली 87 बार और रोहित 73 बार शतकीय साझेदारी का हिस्सा रहे। सचिन तेंदुलकर 99 बार के साथ पहले स्थान पर हैं। 6. रोहित ने लॉर्ड्स का तीसरा सबसे तेज वनडे शतक लगाया रोहित ने 84 गेंद पर शतक लगाया। उन्होंने लॉर्ड्स पर वनडे क्रिकेट का तीसरा सबसे तेज वनडे शतक लगाया। पहले स्थान पर इंग्लैंड के जोस बटलर हैं। उन्होंने 2014 में श्रीलंका के खिलाफ 61 गेंद में शतक पूरा किया था। 7. ओपनर्स ने सबसे ज्यादा 447 रन बनाए तीसरे वनडे में दोनों टीमों के ओपनर्स ने मिलकर कुल 447 रन बनाए। यह वनडे के किसी एक मैच में ओपनर्स द्वारा बनाए गए सबसे ज्यादा रन हैं। इससे पहले 2009 में भारत और श्रीलंका के बीच राजकोट में ओपनर्स ने 442 रन बनाए थे। 8. रूट ने बिना आउट हुए सीरीज में 249 रन बनाए जो रूट बाइलेटरल सीरीज में बिना आउट हुए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए है। उन्होंने नाबाद 74 रन बनाए। रूट ने इस सीरीज के तीन मैचों में बिना आउट हुए 249 रन बनाए। उन्होंने जोस बटलर का रिकॉर्ड तोड़ा। बटलर ने नीदरलैंड के खिलाफ 2022 में 248 रन बनाए थे। 9. डकेट ने लॉर्ड्स का सबसे बड़ा इंडिविजुअल स्कोर बनाया बेन डकेट ने 141 रन की पारी खेली। उन्होंने लॉर्ड्स के मैदान पर वनडे का सबसे बड़ा इंडिविजुअल बनाया। डकेट ने विवियन रिचर्ड्स का 47 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा। रिचर्ड्स ने 1979 में इंग्लैंड के खिलाफ नाबाद 138 रन बनाए थे। 10. लॉर्ड्स पर वनडे में सबसे बड़ा टीम स्कोर इंग्लैंड ने 50 ओवर में 3 विकेट खोकर 387 रन बनाए। यह लॉर्ड्स पर वनडे का सबसे बड़ा टीम टोटल है। साथ ही भारत के खिलाफ सबसे बड़ा स्कोर भी है। टीम ने 51 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा। इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ ही 1975 में 4 विकेट पर 334 रन बनाए थे। 11. भारत के खिलाफ इंग्लैंड बैटर्स की सबसे बड़ी साझेदारी बेन डकेट और जैकब बेथेल ने पहले विकेट के लिए 192 रन रन जोड़े। यह भारत के खिलाफ इंग्लैंड की ओर से किसी भी विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी है। उन्होंने रूट और इयोन मॉर्गन का रिकॉर्ड तोड़ा। दोनों ने 2018 में भारत के खिलाफ नाबाद 186 रन की साझेदारी की थी। 12. प्रसिद्ध कृष्णा के वनडे में 50 विकेट पूरे प्रसिद्ध कृष्णा वनडे में सबसे तेज 50 विकेट लेने के मामले तीसरे भारतीय बने। उन्होंने इस मामले में जसप्रीत बुमराह की बराबरी की। दोनों ने 28 पारियों में यह मुकाम हासिल किया। भारत के लिए सबसे तेज 50 विकेट लेने का रिकॉर्ड अजीत अगरकर के नाम है। उन्होंने 23 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की। 13. बेन डकेट ने लॉर्ड्स पर टेस्ट और वनडे में शतक लगाए बेन डकेट लॉर्ड्स पर टेस्ट और वनडे में शतक लगाने वाले दुनिया के छठवें बल्लेबाज बने। उन्होंने 141 रन की पारी खेली। उनसे पहले डेनिस एमिस, ग्राहम गूच, मार्कस ट्रेस्कोथिक, एलेस्टेयर कुक और ग्रीम वुड यह कारनामा कर चुके हैं। 14. बरार ने वनडे में भारत का तीसरा महंगा स्पेल डाला गुरनूर बरार ने 10 ओवर में बिना विकेट खोए 97 रन दिए। उन्होंने वनडे में भारत के लिए तीसरा सबसे महंगा स्पेल डाला। इस मामले में भुवनेश्वर पहले स्थान पर हैं। उन्होंने 2015 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 106 रन दिए थे। यहां से टॉप मोमेंट्स… 1. गैरी सोबर्स को खिलाड़ियों ने श्रद्धांजलि दी मैच शुरू होने से पहले खिलाड़ियों और ऑफिशियल्स ने वेस्टइंडीज के पूर्व ऑलराउंडर सर गैरी सोबर्स को श्रद्धांजलि दी। सभी ने लाइन में खड़े होकर एक मिनट का मौन रखा। इस दौरान वेस्टइंडीज के दिग्गज खिलाड़ी ब्रायन लारा और क्लाइव लॉयड भी स्टेडियम में मौजूद रहे। खिलाड़ियों ने ब्लैक पट्टी बांधकर मैच खेला। सोबर्स 17 जुलाई को 89 साल की उम्र में निधन हो गया था। उन्होंने वेस्टइंडीज के लिए 93 टेस्ट में 8,032 रन बनाए और 235 विकेट लिए। वहीं 383 फर्स्ट-क्लास मैचों में 28 हजार से ज्यादा रन बनाए और हजार से ज्यादा विकेट चटकाए। 2. युवराज सिंह ने बेल बजाकर मैच की शुरुआत की युवराज सिंह ने लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर मैच शुरू होने से पहले पारंपरिक बेल बजाया। लॉर्ड्स में खेल शुरु होने से 5 मिनट पहले बेल बजाया जाता है। इसके लिए किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को इनवाइट किया जाता है। रविवार को युवराज के घंटी बजाने के बाद खेल शुरु हुआ। 3. शार्दूल ठाकुर की बैट से खेले रोहित रोहित मुंबई के साथी खिलाड़ी शार्दूल ठाकुर का बैट लेकर उतरे थे। रोहित के बैट के निचले हिस्से पर शार्दूल ठाकुर का नाम लिखा था। इसकी तस्वीर टीवी स्क्रीन पर दिखाई गई, जबकि शार्दूल कमेंट्री में बैठे थे। इस दौरान शार्दुल ने मजाकिया अंदाज में कहा कि आप मुझे टीम से बाहर नहीं रख सकते। उन्होंने बताया की रोहित ने उनसे कई बैट लिए हैं। ———————————————— भारत-इंग्लैंड तीसरे वनडे की मैच रिपोर्ट पढ़िए… रोहित शर्मा के शतक के बावजूद हारा भारत, इंग्लैंड ने तीसरे वनडे में 27 रन से हराया इंग्लैंड ने तीसरे वनडे में भारत को 27 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। लॉर्ड्स में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 387/3 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम 50 ओवर में 360 रन ही बना सकी। रोहित शर्मा ने 138 रन की पारी खेली, लेकिन जीत नहीं दिला सके। पढ़ें पूरी खबर

स्पेन ने 16 साल बाद फुटबॉल वर्ल्ड कप जीता:फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराया, फेरन टोरेस ने एक्स्ट्रा टाइम में गोल दागा

स्पेन ने 16 साल बाद फुटबॉल वर्ल्ड कप का खिताब जीत लिया। टीम ने न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में 2022 की चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराया। स्पेन के लिए एक्स्ट्रा टाइम में फेरन टोरेस ने गोल किया। इसी के साथ स्पेन ने 2010 के बाद दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की। तब टीम ने नीदरलैंड को 1-0 से हराया था। मुकाबले के निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें गोल नहीं कर सकीं। पहले हाफ में स्पेन के लामिन यमाल और अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी को गोल करने के मौके मिले, लेकिन दोनों उन्हें भुना नहीं सके। पूरे मैच में स्पेन ने लगातार अटैकिंग खेल दिखाया, जबकि अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने कई शानदार बचाव कर टीम को मुकाबले में बनाए रखा। अर्जेंटीना को 90+2वें मिनट में बड़ा झटका लगा। मिडफील्डर एंजो फर्नांडीज ने स्पेन के डिफेंडर पाउ क्यूबार्सी पर टैकल किया, जिसके बाद रेफरी ने उन्हें सीधे रेड कार्ड दिखा दिया। इसके बाद अर्जेंटीना को पूरे एक्स्ट्रा टाइम में 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। स्पेन के युवा प्लेयर लामिन यमाल ने पूरे मुकाबले में अर्जेंटीना की डिफेंस पर लगातार दबाव बनाए रखा। वहीं मेसी ने भी कई बार स्पेन के बॉक्स में घुसने की कोशिश की, लेकिन वे गोल नहीं कर सके। 41वें मिनट में अर्जेंटीना के लिसांद्रो मार्टिनेज और दूसरे हाफ के 52वें मिनट में लिएंड्रो पारेदेस को भी येलो कार्ड दिखाया गया। गोल करने के बाद फेरन टोरेस के सेलिब्रेशन की तस्वीर… क्लोजिंग सेरेमनी की 7 फोटोज… यहां से मैच की रिपोर्ट पढ़िए… पहले हाफ में स्पेन का दबदबा मैच की शुरुआत से ही स्पेन ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा। पहले हाफ में उसके पास 64% बॉल पजेशन रहा। टीम ने कई हमले किए। दूसरी ओर अर्जेंटीना पहले हाफ में एक भी शॉट नहीं लगा सकी। हालांकि स्पेन को कोई गोल नहीं मिला। 90 मिनट तक नहीं निकला नतीजा दूसरे हाफ में भी स्पेन ने लगातार दबाव बनाया। अर्जेंटीना ने डिफेंस मजबूत रखा और गोल होने से रोका। इसका सबसे बड़ा क्रेडिट अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने लगातार बचाव किया। इस हाफ में भी गोल नहीं हुआ और मैच एक्स्ट्रा टाइम में पहुंच गया। मेरिनो ने गंवाया आसान मौका एक्स्ट्रा टाइम के पहले हाफ में भी स्पेन ने अटैक जारी रखा। 103वें मिनट में निको विलियम्स के शानदार क्रॉस पर मिकेल मेरिनो को आसान हेडर मिला। हालांकि उन्होंने गेंद गोलपोस्ट के बाहर मार दी। यह स्पेन के लिए बढ़त बनाने का बेहतरीन मौका था। टोरेस ने गोल कर स्पेन को जिताया इसके 3 मिनट बाद ही स्पेन के लिए पहला गोल आया। निको विलियम्स ने बैक पोस्ट पर पहुंचकर हेडर से गेंद नीचे गिराई। फेरान टोरेस ने बिना गलती किए दाएं पैर से शॉट लगाया और गेंद गोल में भेज दी। यह गोल स्पेन को दूसरा खिताब जीता गया। अर्जेंटीना अटैक की कोशिश की गोल खाने के बाद अर्जेंटीना ने पूरी ताकत झोंकी। 120वें मिनट में लियोनेल मेसी के क्रॉस पर स्पेनिश डिफेंडर ने गोल लाइन के सामने शानदार ब्लॉक किया। इंजरी टाइम में मेसी के कॉर्नर पर जियोवानी सिमियोने का शॉट भी गोलपोस्ट के ऊपर निकल गया। आखिरी फ्री-किक भी नहीं बचा सकी 120+5वें मिनट में अर्जेंटीना को आखिरी फ्री-किक मिली। गेंद बॉक्स में पहुंचाई गई, लेकिन स्पेनिश गोलकीपर उनाई सिमोन ने आसानी से उसे पकड़ लिया। इसके तुरंत बाद रेफरी ने अंतिम सीटी बजा दी और स्पेन दूसरी बार विश्व चैंपियन बन गया। मैच के बाद हल्की नोकझोंक अंतिम सीटी के बाद स्पेनिश खिलाड़ी जश्न में डूब गए। इसी दौरान मैदान के बीच दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच कुछ देर बहस हुई। लिएंड्रो परेडेस के रिएक्शन के बाद थोड़ी बहस हुई। हालांकि दूसरे खिलाड़ियों ने मामले को शांत कराया। दोनों टीमों की स्टार्टिंग-11 स्पेन: उनाई सिमोन (गोलकीपर), पेड्रो पोरो, एमेरिक लापोर्टे, पाउ क्यूबार्सी, मार्क कुकुरेला, फाबियान रुइज, एलेक्स बाएना, रोड्री (कप्तान), दानी ओल्मो, लामिन यामाल, मिकेल ओयारजाबाल। अर्जेंटीना: एमिलियानो मार्टिनेज (गोलकीपर), निकोलस टैग्लियाफिको, गोंजालो मोंटिएल, लिसांद्रो मार्टिनेज, क्रिस्टियन रोमेरो, रोड्रिगो डी पॉल, निको गोंजालेज, एलेक्सिस मैक एलिस्टर, एंजो फर्नांडेज, जूलियन अल्वारेज, लियोनेल मेसी (कप्तान)।

स्पेन ने 16 साल बाद फुटबॉल वर्ल्ड कप जीता:फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराया, फेरन टोरेस ने एक्स्ट्रा टाइम में गोल दागा

स्पेन ने 16 साल बाद फुटबॉल वर्ल्ड कप का खिताब जीत लिया। उसने न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में 2022 की चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराया। स्पेन के लिए फेरन टोरेस ने एक्स्ट्रा टाइम में गोल किया। स्पेन दूसरी बार फीफा वर्ल्ड चैंपियन बना है। उसने पहली बार 2010 में नीदरलैंड को हराकर यह ट्रॉफी जीती थी। मार्टिनेज ने 105 मिनट तक अकेले लड़ाई लड़ी अगर यह मुकाबला 105 मिनट तक बराबरी पर रहा तो इसकी सबसे बड़ी वजह अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज थे। स्पेन पूरे मैच में लगातार अटैक करता रहा। कभी लामिन यमाल ने बॉक्स के बाहर से शॉट लगाया, कभी ओयारजबाल ने मौका बनाया तो कभी पेड्री और निको विलियम्स गोल के करीब पहुंचे। हर बार मार्टिनेज ने खुद को गेंद और गोलपोस्ट के बीच खड़ा कर दिया। लगभग अकेले लड़ रहे मार्टिनेज की दीवार आखिरकार 106ठे मिनट में ढह गई। निको विलियम्स का हेडर फेरन टोरेस तक पहुंचा, जिन्होंने बॉल गोलपोस्ट में डाल दिया। इस तरह स्पेन 1-0 से आगे हो गया। एंजो का रेड कार्ड… और यहीं पलट गया फाइनल अर्जेंटीना 90 मिनट तक किसी तरह मुकाबले में बनी रही। ऐसा लगा कि टीम मैच को पेनल्टी शूटआउट तक ले जाना चाहती थी, लेकिन इंजरी टाइम में एंजो फर्नांडिज ने ऐसी गलती कर दी, जिसने पूरी बाजी पलट दी। पाउ क्यूबार्सी पर टैकल के बाद रेफरी ने एंजो को दूसरा यलो कार्ड दिखाया। यह उनका मैच का दूसरा यलो कार्ड था। इस तरह उनके दो यलो कार्ड, रेड कार्ड में कन्वर्ट हो गए। उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा और अर्जेंटीना 10 खिलाड़ियों के साथ रह गई। इसके बाद स्पेन ने गेंद पर और ज्यादा कब्जा जमा लिया। मेरिनो चूके… टोरेस ने इतिहास लिख दिया 103वें मिनट में निको विलियम्स ने ऐसा क्रॉस डाला, जिसे देखकर स्पेनिश फैंस जश्न मनाने को तैयार हो गए थे। मिकेल मेरिनो को लगभग खाली गोल मिला, लेकिन उनका हेडर बाहर चला गया। तीन मिनट बाद वही निको विलियम्स फिर बाएं फ्लैंक से पहुंचे। इस बार उन्होंने बैक पोस्ट पर हेडर से गेंद फेरन टोरेस के सामने गिराई। फेरन टोरेस ने बिना एक पल गंवाए दाएं पैर से ऐसा शॉट लगाया कि गेंद सीधे नेट में जा समाई। यमाल ने मेसी की चमक फीकी कर दी यह फाइनल एक तरह से दो पीढ़ियों का मुकाबला भी था। एक तरफ 39 साल के लियोनेल मेसी थे, दूसरी ओर 20 साल के लामिन यमाल। मेसी से उम्मीद थी कि वे एक बार फिर बड़े मैच में कमाल कर दिखाएंगे, लेकिन स्पेन की मिडफील्ड और डिफेंस ने उन्हें कभी खुलकर खेलने का मौका ही नहीं दिया। दूसरी ओर यमाल लगातार अर्जेंटीना के डिफेंस पर हमला करते रहे। स्पेन की पहचान फिर बनी बॉल पजेशन स्पेन की पहचान हमेशा से गेंद पर नियंत्रण रखने वाली टीम की रही है। इस फाइनल में भी वही अंदाज दिखा। रोड्री ने मिडफील्ड में पूरे मैच की रफ्तार तय की। अर्जेंटीना को काउंटर अटैक का मौका ही नहीं मिला। स्पेन ने करीब 65% समय गेंद अपने पास रखी। आखिरी सीटी के बाद जश्न… और फिर लड़ाई रेफरी की अंतिम सीटी बजते ही स्पेनिश खिलाड़ी मैदान पर दौड़ पड़े। कोई घुटनों के बल बैठ गया, कोई आसमान की ओर देखने लगा, तो कोई अपने साथी खिलाड़ियों से लिपट गया। 16 साल का इंतजार खत्म हो चुका था। दूसरी ओर अर्जेंटीना के खिलाड़ियों की निराशा साफ दिखाई दे रही थी। कुछ देर बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच नोकझोंक भी हुई, लेकिन मामला जल्द शांत हो गया। इसके बाद ट्रॉफी स्पेन के कप्तान के हाथों में पहुंची और पूरा स्टेडियम ‘वीवा एस्पाना’ (स्पेन जिंदाबाद) के नारों से गूंज उठा। एम्बाप्पे ने जीता गोल्डन बूट, मेसी दूसरे नंबर पर रहे फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में सबसे ज्यादा गोल फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे ने किए। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 10 गोल और 4 असिस्ट के साथ गोल्डन बूट अपने नाम किया। अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी 8 गोल और 4 असिस्ट के साथ दूसरे स्थान पर रहे। ड्रॉ से शुरुआत, जीत के साथ खत्म हुआ स्पेन का सफर स्पेन ने वर्ल्ड कप की शुरुआत केप वर्डे के खिलाफ ड्रॉ से की थी, लेकिन इसके बाद टीम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। ग्रुप स्टेज में सऊदी अरब को 4-0 और उरुग्वे को 1-0 से हराकर नॉकआउट में जगह बनाई। इसके बाद स्पेन ने लगातार ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, बेल्जियम और फ्रांस जैसी मजबूत टीमों को हराया। एम्बाप्पे के नाम सबसे ज्यादा वर्ल्ड कप गोल फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 ने सबसे बड़ा रिकॉर्ड गोल स्कोरिंग लिस्ट में देखा। फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे ने 10 गोल के साथ अपना कुल वर्ल्ड कप गोल आंकड़ा 22 तक पहुंचाया और जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोजे (16) का रिकॉर्ड पीछे छोड़ते हुए इतिहास के सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी भी 21 गोल के साथ क्लोजे से आगे निकलकर दूसरे स्थान पर पहुंच गए। फुटबॉल वर्ल्ड कप के सभी चैंपियन दोनों टीमों की स्टार्टिंग-11 स्पेन: उनाई सिमोन (गोलकीपर), पेड्रो पोरो, एमेरिक लापोर्टे, पाउ क्यूबार्सी, मार्क कुकुरेला, फेबियन रुइज, एलेक्स बाएना, रोड्री (कप्तान), दानी ओल्मो, लामिन यामाल, मिकेल ओयारजाबाल। अर्जेंटीना: एमिलियानो मार्टिनेज (गोलकीपर), निकोलस टैग्लियाफिको, गोंजालो मोंटिएल, लिसांद्रो मार्टिनेज, क्रिस्टियन रोमेरो, रोड्रिगो डी पॉल, निको गोंजालेज, एलेक्सिस मैक एलिस्टर, एंजो फर्नांडेज, जूलियन अल्वारेज, लियोनेल मेसी (कप्तान)। भास्कर नॉलेजः स्पेन का फुटबॉल मॉडल बना जीत की फैक्ट्री 1. जीत की शुरुआत बचपन से: स्पेन में 6–7 साल की उम्र से बच्चों को क्लब अकादमियों में ट्रेनिंग मिलनी शुरू हो जाती है। देशभर में हजारों कोच एक तय तकनीकी मॉडल पर खिलाड़ियों को तैयार करते हैं।
हर उम्र वर्ग (U-12, U-15, U-17, U-19, U-21) की राष्ट्रीय टीम एक जैसी खेलने की शैली अपनाती है, इसलिए सीनियर टीम में पहुंचने पर खिलाड़ियों को अलग ढंग से ढलना नहीं पड़ता। 2. अकादमियां, जो सुपरस्टार बनाती हैं: बार्सिलोना की ला मासिया और रियल मैड्रिड की ला फाब्रिका दुनिया की सबसे सफल फुटबॉल अकादमियों में गिनी जाती हैं। इन्हीं अकादमियों से जावी, इनिएस्ता, बुस्केट्स, कार्लेस पुयोल, इकर कैसियास, राउल जैसे दिग्गज निकले। यही मॉडल स्पेन की राष्ट्रीय टीम की रीढ़ माना जाता है। 3. दुनिया की सबसे मजबूत लीग में शामिल: ला लीगा दुनिया की सबसे लोकप्रिय फुटबॉल लीग में गिनी जाती है। रियल मैड्रिड और बार्सिलोना जैसे क्लबों ने मिलकर दर्जनों यूरोपीय खिताब जीते हैं। लियोनेल मेसी ने अपने क्लब करियर का अधिकांश हिस्सा बार्सिलोना के साथ इसी लीग में खेला और 474 गोल कर लीग के सर्वकालिक शीर्ष स्कोरर बने। स्पेन की पहचान: टिकी-टका फुटबॉल स्पेन की पहचान टिकी-टका शैली से है। इसमें छोटे-छोटे पास, गेंद पर लंबे समय तक कब्जा और अटैक करना शामिल है। इसी शैली की बदौलत स्पेन ने 2008 यूरो, 2010 फीफा वर्ल्ड कप और 2012 यूरो लगातार जीते।
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स्पोर्ट्स अपडेट:कपिल देव बोले- रोहित-विराट टीम में परमानेंट नहीं, प्रदर्शन के दम पर ही मिलनी चाहिए जगह

1983 वर्ल्ड कप विजेता कप्तान कपिल देव ने कहा कि टीम इंडिया में किसी भी खिलाड़ी की जगह पक्की नहीं होती। उन्होंने कहा कि रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे सीनियर खिलाड़ियों को भी जब तक प्रदर्शन कर रहे हैं, तब तक खेलना चाहिए। साथ ही टीम मैनेजमेंट को भविष्य के लिए नए खिलाड़ियों को भी तैयार रखना चाहिए। कपिल देव ने कहा कि इंटरनेशनल क्रिकेट में टीम में बने रहने का एकमात्र पैमाना प्रदर्शन है। उन्होंने रोहित और विराट के अनुभव की तारीफ करते हुए कहा कि जब तक वे टीम के लिए रन बना रहे हैं और मैच जिता रहे हैं, तब तक उन्हें खेलने का मौका मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई सीनियर खिलाड़ी फॉर्म से बाहर होता है, तो टीम के पास मजबूत बैकअप तैयार होना चाहिए। रोहित शर्मा और विराट कोहली 2024 टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद टी-20 इंटरनेशनल से संन्यास ले चुके हैं। फिलहाल दोनों वनडे और टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए खेल रहे हैं।

पीवी सिंधु जापान ओपन जीतने वाली पहली भारतीय बनीं:2 साल बाद कोई टाइटल जीता, यामागुची को 21-17, 21-17 से हराया

भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने जापान ओपन सुपर-750 बैडमिंटन टूर्नामेंट जीत लिया है। वे यह टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय बनी हैं। 31 साल की सिंधु ने रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में जापान की अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से हराया। यह मैच 50 मिनट तक चला। सिंधु 4 साल बाद यामागुची को किसी फुल मैच में हरा सकी हैं। उन्हें पिछली जीत थाईलैंड ओपन में 2022 में मिली थी। पिछले साल मलेशिया ओपन में यामागुची रिटायर हर्ट हो गई थीं। 2019 के बाद पहला बड़ा खिताब जीतीं आगे जानिए क्या है सुपर-750 बैडमिंटन टूर्नामेंट… सेमीफाइनल में चेन यू फेई चोटिल होकर बाहर हुईं सेमीफाइनल में चीन की चेन यू फेई हैम्स्ट्रिंग चोट के कारण रिटायर्ड हर्ट हो गईं। उस समय सिंधु 21-19, 15-10 से आगे थीं। इससे पहले सिंधु ने जापान की पूर्व वर्ल्ड चैंपियन नोजोमी ओकुहारा चोट के कारण नहीं उतरीं, जिससे सिंधु को वॉकओवर मिला। इससे पहले दूसरे दौर में सिंधु ने चीन की हान यू को 35 मिनट में 21-16, 21-14 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। ————————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़िए… कॉमनवेल्थ गेम्स में चानू और लवलीना होंगी भारत की ध्वजवाहक, IOA ने ऐलान किया ओलंपिक मेडलिस्ट मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन समारोह में भारत की ध्वजवाहक होंगी। भारतीय ओलंपिक संघ ने शनिवार को इसकी घोषणा की। इस मल्टी-स्पोर्ट इवेंट का उद्घाटन समारोह 23 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर

फुटबॉल वर्ल्डकप फाइनल का क्रेज:कोलकाता में परीक्षा टली; बेंगलुरु में होटल-रेस्टोरेंट देर तक खुलेंगे, गुवाहाटी में स्पेशल डिश

दुनिया के सबसे बड़े स्पोर्ट्स इवेंट फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल मैच आज रात 12:30 बजे से खेला जाएगा। इसमें अर्जेंटीना और स्पेन की टीमें वर्ल्ड चैंपियन के ट्रैग के लिए आमने-सामने होंगी। लियोनेल मेसी की टीम लगातार दूसरा खिताब जीतना होगी, जबकि लामिल यमाल की टीम को दूसरे टाइटल की तलाश है। फाइनल का क्रेज भारत में भी देखने को मिल रहा है। सबसे ज्यादा दीवानगी कोलकाता में है। यहां स्पोर्ट्स बार, मल्टीप्लेक्स, क्लब और मोहल्लों के मैदानों पर बड़ी स्क्रीन लग चुकी है। जुनून इस हद तक है कि स्कूलों ने 20-21 जुलाई की परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। बेंगलुरु पुलिस और असम सरकार ने होटल, रेस्तरां और क्लबों को सुबह 3:30 बजे तक खुला रखने की अनुमति दी है। प्रसेनजीत- अर्जेंटीना के सबसे ज्यादा फैंस कोलकाता में हैं
मोहन बागान क्लब के सदस्य प्रसेनजीत सरकार ने बताया, ‘बंगाल में कोई कहे कि उसे फुटबॉल पसंद नहीं है, तो उसके बंगाली होने पर ही सवाल उठ सकता है। कोलकाता में अर्जेंटीना के समर्थक सबसे ज्यादा हैं। अर्जेंटीना जीता तो जश्न वैसा ही होगा, जैसा भारत के क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने पर होता है।’ गुवाहाटी के फाइव स्टार होटल्स में वर्ल्डकप थीम पर डिश गुवाहाटी के एलीट क्लब्स और फाइव-स्टार होटल्स के ‘वर्ल्ड कप थीम’ में ‘मेसी किक बर्गर’ और ‘स्पेनिश ट्रॉफी मॉकटेल’ जैसे व्यंजन शामिल हैं। कई नामचीन पब्स और लाउंज ने ‘जर्सी ड्रेस कोड’ अनिवार्य किया है। रेस्तरां के फर्श पर आर्टिफिशियल टर्फ बिछाई है। स्टाफ भी हाथों में व्हिसल और जर्सी पहनकर सर्व कर रहे हैं। रात में फैंस के झगड़े नहीं हों, इसलिए पुलिस की तैनाती कोच्चि के ईगल एफसी फुटबॉल क्लब ने बड़ी स्क्रीन पर लाइव स्ट्रीमिंग के लिए टिकट की कीमत 90 से 500 रुपए रखी है। फाइनल मैच की बुकिंग पूरी हो चुकी है। जीत के बाद फैंस झगड़ न पड़ें, इसलिए भारी पुलिस बल भी तैनात रहेगा। कई स्कूलों ने सोमवार को छुट्टी की घोषणा कर दी है। केरल के स्कूलों में छुट्‌टी घोषित की गई केरल के सामान्य शिक्षा विभाग ने सोमवार (20 जुलाई) को अपने अधीन आने वाले सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। यह फैसला उन छात्रों की मांग पर लिया गया, जो देर रात होने वाले फाइनल मुकाबले को देखना चाहते थे। सामान्य शिक्षा मंत्री एन. समसुद्दीन ने सोशल मीडिया पर छुट्टी की घोषणा करते हुए लिखा, ‘अब खुश हो बच्चे?’ उन्होंने कहा कि छात्रों के अनुरोध को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। ————————————————– फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल आज, टूर्नामेंट में 60 साल बाद भिड़ेंगे स्पेन और अर्जेंटीना फीफा वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला आज स्पेन और अर्जेंटीना के बीच होगा। टूर्नामेंट में दोनों टीमें 60 साल बाद आमने-सामने हो रही हैं। न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में रात 12:30 बजे से मुकाबला खेला जाएगा। पढ़ें पूरी खबर

फुटबॉल वर्ल्ड कप:96 साल बाद फाइनल दो स्पेनिश भाषी देशों के बीच, स्पेन-अर्जेंटीना की भाषाएं-कल्चर एक जैसे

फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल सिर्फ स्पेन और अर्जेंटीना की दो टीमों के बीच नहीं होगा, बल्कि दो ऐसे देशों के बीच भी होगा, जिनके रिश्ते सदियों पुराने हैं। दोनों की भाषा एक है, संस्कृति में कई समानताएं हैं और लाखों परिवार ऐसे हैं जिनकी जड़ें दोनों देशों से जुड़ी हैं। ऐसे में मैच कई लोगों के लिए भावनात्मक परीक्षा बन गया है। सवाल यही है कि दिल की सुनी जाए या जन्मभूमि की। अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में रहने वाले 75 वर्षीय जुआन मैनुएल पोसादा इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। उनका जन्म स्पेन में हुआ था, लेकिन 1968 में वे अर्जेंटीना आकर बस गए। वे कहते हैं, ‘मेरा दिल स्पेन के साथ है, लेकिन अगर अर्जेंटीना जीत गया तो भी मुझे दुख नहीं होगा।’ उनके परिवार में भी यही दुविधा है। उनका पोता अर्जेंटीना का समर्थक है और उसने दादा से वादा लिया है कि अगर अर्जेंटीना जीता तो वे उसकी टीम की जर्सी पहनकर जश्न मनाएंगे। 81 वर्षीय मैनुएल फर्नांडीज असेवेडो भी बचपन में स्पेन छोड़कर अर्जेंटीना आ गए थे। उनकी बेटी और पोती यहीं पैदा हुईं। वे कहते हैं कि दोनों देशों से उनका समान लगाव है और वे सिर्फ यही चाहते हैं कि बेहतर टीम जीते। स्पेन और अर्जेंटीना का रिश्ता सिर्फ भाषा तक सीमित नहीं है। 16वीं सदी में स्पेन के ही एक खोजकर्ता पेड्रो डी मेंडोसा ने ब्यूनस आयर्स की स्थापना की थी। बाद में बड़ी संख्या में स्पेनिश नागरिक अर्जेंटीना जाकर बस गए। इसी कारण दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध लगातार मजबूत होते गए। साहित्य, संगीत और खानपान के साथ-साथ फुटबॉल ने भी इस रिश्ते को नई पहचान दी। रियल मैड्रिड के लिए अल्फ्रेडो डी स्टेफानो और बार्सिलोना के लिए लियोनेल मेसी जैसे महान खिलाड़ियों ने दोनों देशों को भावनात्मक रूप से और करीब ला दिया। वर्ल्ड कप के इतिहास में स्पेन और अर्जेंटीना की टक्कर सिर्फ एक बार हुई है। 1966 वर्ल्ड कप के ग्रुप चरण में अर्जेंटीना ने स्पेन को हराया था। अब पहली बार दोनों टीमें फाइनल में आमने-सामने हैं। यह वर्ल्ड कप इतिहास का दूसरा ऐसा फाइनल होगा, जिसमें दो स्पेनिश भाषी देश खिताब के लिए भिड़ेंगे। इससे पहले 1930 में उरुग्वे और अर्जेंटीना भिड़े थे। पिछले कुछ दशकों में आर्थिक संकट और सैन्य शासन के बाद हजारों अर्जेंटीनी बेहतर भविष्य के लिए स्पेन जाकर बस गए। स्पेन में अर्जेंटीना में जन्मे करीब 4.5 लाख लोग रह रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए यह मुकाबला किसी पारिवारिक उत्सव जैसा है। सोशल मीडिया पर अर्जेंटीना-स्पेन के परिवारों के मजेदार वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें बच्चे किस टीम का समर्थन करेंगे, इसे लेकर घरों में हल्की-फुल्की नोकझोंक दिखाई दे रही है। यही वजह है कि फाइनल सिर्फ चैम्पियन तय नहीं करेगा, बल्कि उन लाखों परिवारों की भावनाओं को भी मैदान पर ले आएगा, जिनके दिल में स्पेन व अर्जेंटीना दोनों के लिए बराबर जगह है।

इंग्लैंड ने फुटबॉल वर्ल्डकप में ब्रॉन्ज जीता, साका की हैट्रिक:फ्रांस हारा; एम्बाप्पे गोल्डन बूट की रेस में मेसी से आगे, टूर्नामेंट में 10 गोल

इंग्लैंड ने फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 के तीसरे स्थान के मैच में फ्रांस को 6-4 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इंग्लैंड ने वर्ल्ड कप इतिहास में अपना दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। टीम 1966 में चैंपियन बनी थी। इंग्लैंड की जीत के हीरो बुकायो साका रहे, जिन्होंने हैट्रिक लगाई। वहीं, फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने दो गोल करके गोल्डन बूट की रेस में मेसी को पीछे छोड़ दिया। उनके 10 गोल हो गए हैं, जबकि मेसी के 8 गोल हैं। इतना ही नहीं, एमबाप्पे वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने। उनके नाम अब 22 विश्व कप गोल हो गए हैं, जबकि लियोनेल मेसी के 21 गोल हैं। हालांकि, आज देर रात होने वाले वर्ल्ड कप फाइनल में मेसी के पास वापसी करने का मौका है। मैच में खास तीसरे मिनट में पहला गोल आया इंग्लैंड ने मुकाबले की शुरुआत से ही दबदबा बनाया। तीसरे मिनट में डेक्लान राइस ने पहला गोल किया, जबकि 18वें मिनट में एजरी कॉन्सा ने बढ़त 2-0 कर दी। साका ने 37वें मिनट और पहले हाफ के इंजरी टाइम में गोल कर इंग्लैंड को हाफ टाइम तक 4-0 की मजबूत बढ़त दिला दी। एम्बाप्पे ने दूसरे हाफ में 2 गोल दागे दूसरे हाफ में फ्रांस ने वापसी की कोशिश की। एम्बाप्पे ने 48वें मिनट में पहला गोल किया। 54वें मिनट में ब्रैडली बारकोला ने स्कोर 4-2 किया और 66वें मिनट में एम्बाप्पे ने अपना दूसरा गोल कर अंतर सिर्फ एक गोल का कर दिया। पेनल्टी पर गोल से साका की हैट्रिक 87वें मिनट में मिले पेनल्टी को गोल में बदलकर साका ने अपनी हैट्रिक पूरी की और इंग्लैंड को राहत दिलाई। इंजरी टाइम में उस्मान डेम्बेले ने फ्रांस के लिए गोल किया, लेकिन इसके तुरंत बाद जूड बेलिंगहम ने गोल कर इंग्लैंड की 6-4 की जीत तय कर दी। ——————————————– फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… अर्जेंटीना और स्पेन में फाइनल मैच आज रात को, मेसी के पास टॉप स्कोरर बनने का मौका फीफा वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला आज स्पेन और अर्जेंटीना के बीच होगा। टूर्नामेंट में दोनों टीमें 60 साल बाद आमने-सामने हो रही हैं। न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में रात 12:30 बजे से मुकाबला खेला जाएगा। पढ़ें पूरी खबर

वर्ल्ड कप फाइनल में 12वीं बार यूरोप Vs लैटिन अमेरिका:अर्जेंटीना जीता तो 64 साल बाद कोई टीम लगातार दो खिताब जीतेगी

फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला देर रात स्पेन और अर्जेंटीना के बीच खेला जाएगा। टूर्नामेंट के 96 साल के इतिहास में यह 23वां फाइनल होगा। 12वीं बार फाइनल मुकाबला यूरोप और लैटिन अमेरिका की टीम के बीच होने जा रहा है। इससे पहले इन दोनों महाद्वीपों की टीमों के बीच हुए 11 फाइनल में 8 बार लैटिन अमेरिकी टीमों ने खिताब जीता। यूरोप की टीम 3 बार ही टाइटल जीत पाई। इतिहास का एक और पहलू अर्जेंटीना के फेवर में है। इससे पहले यूरोप के बाहर 11 वर्ल्ड कप हुए। इनमें से 9 बार लैटिन अमेरिकी टीम चैंपियन बनी। यूरोप की टीमें सिर्फ दो बार ही खिताब जीत पाई। हालांकि, इससे स्पेन का दावा कमजोर नहीं होता। यूरोप की जिन दो टीमों ने यूरोप से बाहर वर्ल्ड कप जीता, उसमें एक स्पेन भी है। स्पेन ने 2010 में साउथ अफ्रीका में हुए वर्ल्ड कप में खिताब जीता था। वर्ल्ड कप फाइनल से जुड़े 5 रोचक फैक्ट्स 1. वर्ल्ड कप की ट्रॉफी सिर्फ दो महाद्वीपों में बंटी 1930 से 2022 तक खेले गए 22 वर्ल्ड कप में सिर्फ यूरोप और लैटिन अमेरिका की टीमें ही चैंपियन बनी हैं। यूरोप ने पांच देशों के दम पर 12 और लैटिन अमेरिका ने तीन देशों के दम पर 10 खिताब जीते हैं। यानी 96 साल में कोई एशियाई, अफ्रीकी या उत्तरी अमेरिकी टीम वर्ल्ड चैंपियन नहीं बन सकी। 2. यूरोप के बाहर वर्ल्ड कप… तो लैटिन अमेरिका का दबदबा यूरोप के बाहर अब तक 11 वर्ल्ड कप हुए हैं। इनमें 9 बार लैटिन अमेरिकी और सिर्फ 2 बार यूरोपीय टीम चैंपियन बनी है। स्पेन (2010) और जर्मनी (2014) ही यूरोप की ऐसी टीमें हैं, जिन्होंने यूरोप के बाहर हुए वर्ल्ड कप में खिताब जीता है। 3. अर्जेंटीना के पास 64 साल पुराना रिकॉर्ड दोहराने का मौका अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतने से सिर्फ एक कदम दूर है। टीम ने 2022 में कतर में तीसरा वर्ल्ड कप जीता था। अगर वह न्यू जर्सी में स्पेन को हराकर खिताब बचाने में सफल रहती है, तो 1962 के बाद लगातार दो वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम बन जाएगी। अब तक सिर्फ दो देशों ने अपने विश्व कप खिताब का सफल बचाव किया है। इटली ने 1934 और 1938, जबकि ब्राजील ने 1958 और 1962 में लगातार दो बार ट्रॉफी जीती थी। 4. स्पेन ने पहला वर्ल्ड कप यूरोप के बाहर ही जीता था स्पेन ने अपना इकलौता वर्ल्ड कप 2010 में साउथ अफ्रीका में जीता था। अब उसके सामने दूसरी ट्रॉफी जीतने के साथ-साथ गैर-यूरोपीय धरती पर लैटिन अमेरिका के लंबे वर्चस्व को चुनौती देने का मौका है। स्पेन का वर्ल्ड कप सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2010 के खिताब के बाद टीम 2014, 2018 और 2022 में नॉकआउट से आगे नहीं बढ़ सकी। वहीं अर्जेंटीना पिछले चार वर्ल्ड कप में तीन बार सेमीफाइनल और दो बार फाइनल खेल चुका है। 5. फाइनल के आंकड़े किसके पक्ष में? वर्ल्ड कप इतिहास में यूरोप और लैटिन अमेरिका की टीमें 11 बार फाइनल में आमने-सामने आई हैं। इनमें लैटिन अमेरिका ने 8 और यूरोप ने 3 बार जीत दर्ज की है। जर्मनी सबसे ज्यादा 8 फाइनल खेलने वाली टीम है, लेकिन सबसे सफल टीम ब्राजील है, जिसने सात फाइनल में पांच बार ट्रॉफी जीती। अर्जेंटीना 2026 का फाइनल खेलते ही सातवीं बार खिताबी मुकाबले में उतरेगा। भास्कर नॉलेज 1. भारत ने 1950 में खुद छोड़ दिया फीफा वर्ल्ड कप खेलने का मौका 1950 में भारत बिना कोई क्वालिफाइंग मैच खेले फीफा वर्ल्ड कप के लिए चुन लिया गया था। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि एशिया की कई टीमों ने टूर्नामेंट से अपना नाम वापस ले लिया था, लेकिन ब्राजील तक लंबी यात्रा, ज्यादा खर्च, टीम की पूरी तैयारी न होना और उस समय ओलंपिक को ज्यादा महत्व दिए जाने के कारण अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) ने टीम को वर्ल्ड कप में नहीं भेजा। इसके बाद से आज तक भारत फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाया है। 2. 1982 से हर फीफा वर्ल्ड कप की फुटबॉल पाकिस्तान में बन रही 1982 के स्पेन वर्ल्ड कप से लेकर 2026 वर्ल्ड कप तक लगभग हर आधिकारिक मैच बॉल पाकिस्तान के सियालकोट शहर में तैयार की गई है। 2026 वर्ल्ड कप की आधिकारिक गेंद ‘Trionda’ भी सियालकोट की फॉरवर्ड स्पोर्ट्स कंपनी ने एडिडास के लिए बनाई है। —————————————————- फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल आज, टूर्नामेंट में 60 साल बाद भिड़ेंगे स्पेन और अर्जेंटीना फीफा वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला आज स्पेन और अर्जेंटीना के बीच होगा। टूर्नामेंट में दोनों टीमें 60 साल बाद आमने-सामने हो रही हैं। न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में रात 12:30 बजे से मुकाबला खेला जाएगा। पढ़ें पूरी खबर