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सुपारी व्यापारी ने की 10 करोड़ की GST चोरी:मजदूरों के खातों में मंगवाता था पैसे, 56 करोड़ का कारोबार को 2.5 करोड़ का दिखाया

भरतपुर में राहुल ब्रांड की फ्लेवर्ड सुपारी बनाने वाली मैसर्स किशन फूड प्रोडक्ट्स बिना टैक्स इनवॉइस करोड़ों रुपए की सुपारी बेच रही थी। बिक्री का पैसा कंपनी मालिक द्वारका मतलानी अपने यहां काम करने वाले मजदूरों के नाम से खुलवाए गए बैंक खातों और यूपीआई आईडी में मंगवाता था। जांच में अब तक 10.52 करोड़ रुपए की GST चोरी सामने आई है। कंपनी पिछले पांच वर्षों से यह तरीका अपनाकर कारोबार कर रही थी। इस दौरान उसने 56.51 करोड़ रुपए का वास्तविक कारोबार किया, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में केवल करीब 2.5 करोड़ रुपए का कारोबार दिखाया। 18 जुलाई को मुखबिर की सूचना पर जीजीएसटी कमिश्नरेट की एंटी-इवेजन शाखा ने कंपनी में छापा मारकर 4 मोबाइल, 23-24 मशीनें, हजारों कच्ची पर्चियां, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए। विभाग ने मजदूरों के बैंक खाते फ्रीज कर कंपनी मालिक को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है। 5 साल तक छिपाया करोड़ों का कारोबार एडवोकेट विवेक हथैनी ने बताया कि राहुल ब्रांड की फ्लेवर्ड सुपारी बनाने वाली मैसर्स किशन फूड प्रोडक्ट्स ने पिछले पांच वर्षों में सरकारी रिकॉर्ड में केवल करीब 2.5 करोड़ रुपए का कारोबार दिखाया, जबकि जांच में 56.51 करोड़ रुपए की फ्लेवर्ड सुपारी बिना टैक्स इनवॉइस के बेचना सामने आया। विभाग को इसकी भनक लगने के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें अब तक 10.52 करोड़ रुपए की GST चोरी सामने आई है। कंपनी पिछले पांच वर्षों से कम्पोजीशन स्कीम में रजिस्टर्ड थी। मजदूरों के नाम से यूपीआई और बैंक खाते खोलकर छिपाया नेटवर्क जांच में सामने आया कि कंपनी के मालिक द्वारका मतलानी ने टैक्स चोरी के लिए समानांतर नेटवर्क तैयार कर रखा था। इसके लिए कंपनी में काम करने वाले करीब 13 मजदूरों के नाम से यूपीआई आईडी और बैंक खाते खुलवाए गए। बिना बिल बेची गई सुपारी का भुगतान इन्हीं खातों में मंगवाया जाता था, जिससे असली कारोबार और कारोबारी की पहचान विभाग की नजर से छिपी रही। अब विभाग ने सभी संबंधित खातों को फ्रीज कर उनके लेन-देन की जांच शुरू कर दी है। सूचना पर फैक्ट्री में छापा, बिना बिल बिक्री का खुलासा जीजीएसटी कमिश्नरेट की एंटी-इवेजन शाखा ने 17 जुलाई को मुखबिर की सूचना पर जीजीएसटी एक्ट की धारा 67(2) के तहत कंपनी परिसर में तलाशी ली। जांच में सामने आया कि कंपनी कम्पोजीशन स्कीम में पंजीकृत रहते हुए गुप्त रूप से ब्रांडेड फ्लेवर्ड सुपारी का निर्माण और सप्लाई कर रही थी। पूरा कारोबार बिना टैक्स इनवॉइस, कच्ची पर्चियों और समानांतर रिकॉर्ड के जरिए संचालित किया जा रहा था। टीम ने मजदूरों के खातों को भी फ्रीज करा दिया। 4 मोबाइल, मशीनें और हजारों पर्चियों से मिले GST चोरी के सबूत तलाशी के दौरान विभाग ने 4 मोबाइल, 23-24 मशीनें, हजारों कच्ची पर्चियों के फोटो, व्हाट्सएप चैट, समानांतर हिसाब-किताब, बैंक लेन-देन का रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए। अधिकारियों के अनुसार मोबाइलों में बिना बिल बिक्री, ऑर्डर, सप्लाई, भुगतान और कच्चे कारोबार से जुड़ी हजारों प्रविष्टियां मिली हैं। व्हाट्सएप चैट और डिजिटल रिकॉर्ड से पूरे नेटवर्क की पुष्टि हुई है। हरियाणा से आता था मेंथॉल, कई राज्यों तक सप्लाई की जांच जारी जांच के दौरान फ्लेवर्ड सुपारी बनाने में इस्तेमाल होने वाला मेंथॉल भी मिला, जो प्रारंभिक तौर पर हरियाणा से मंगाया गया प्रतीत हो रहा है। विभाग अब इसकी भी जांच कर रहा है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि बिना बिल तैयार किया गया माल किन-किन राज्यों में सप्लाई किया गया। फिलहाल GST विभाग पूरे नेटवर्क और टैक्स चोरी के दायरे की विस्तृत जांच में जुटा हुआ है।

राजस्थान के सरकारी टीचर्स और स्टूडेंट्स को AI सिखाया जाएगा:छात्र को किस सब्जेक्ट में ज्यादा मेहनत की जरूरत इसका भी पता लगाया जा सकेगा

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित पढ़ाई की शुरुआत होने जा रही है। इसके जरिए टीचर्स और स्टूडेंट्स दोनों को AI तकनीक से जोड़ना है। इसके लिए टीचर्स AI टूल्स का इस्तेमाल सीखेंगे। वहीं, स्टूडेंट्स को AI के काम करने के तरीके, उसके सही और गलत उपयोग तथा डिजिटल सुरक्षा के बारे में जानकारी दी जाएगी। शिक्षा विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में राजस्थान के 10 जिलों में करीब एक लाख शिक्षकों को AI का प्रशिक्षण देने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके बाद यह मॉडल प्रदेश के अन्य जिलों तक विस्तार किया जाएगा। शिक्षा विभाग इस पर काम कर रहा है। इसकी शुरुआत उदयपुर में राज्य स्तरीय प्रशिक्षण के जरिए की गई। इसमें प्रदेश की 34 डाइट की फैकल्टी को सबसे पहले समझाते हुए ट्रेनिंग दी गई। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बताया जा रहा है कि AI की मदद से कुछ ही मिनटों में लैसन प्लान (शिक्षण योजना) कैसे तैयार किया जा सकता है। स्टूडेंट के स्तर के अनुसार गतिविधियां कैसे बनाई जा सकती हैं। मूल्यांकन कैसे तैयार होगा और किस छात्र को किस सब्जेक्ट में अतिरिक्त सहायता की जरूरत है, इसका विश्लेषण कैसे किया जा सकता है। इससे पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। स्टूडेंट्स को भी AI के प्रति जागरूक किया जाएगा। उन्हें समझाया जाएगा कि AI कैसे काम करता है। वह जानकारी किस आधार पर तैयार करता है। उसकी सीमाएं क्या हैं। किसी जानकारी की सत्यता कैसे परखी जाए। साथ ही साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल लिटरेसी और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े विषय भी ट्रेनिंग का हिस्सा होंगे। ये कार्यक्रम राजस्थान के साल 2047 के विजन डॉक्यूमेंट के अनुसार शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में कदम है। एक्सपर्ट का मानना है कि जिन कार्यों में पहले शिक्षकों को एक घंटे तक का समय लगता था। वे AI की मदद से कुछ ही मिनटों में पूरे किए जा सकेंगे। इससे टीचर्स को स्टूडेंट्स के साथ अधिक गुणवत्तापूर्ण समय देने का अवसर मिलेगा। ऊपर से नीचे तक सबको ट्रेनिंग देंगे सबसे पहले प्रदेश के 34 जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) के फैकल्टी सदस्यों और चयनित 10 फोकस जिलों के स्टेट रिसोर्स ग्रुप को ट्रेनिंग दी जाएी। यह ट्रेनिंग उदयपुर के राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (RSCERT) में शुक्रवार को दिया गया। अब आगे ये मास्टर ट्रेनर (MT) तैयार करेंगे। मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जिलों के डाइट के माध्यम से शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। इसी चरणबद्ध प्रक्रिया से प्रशिक्षण पंचायत स्तर तक और सरकारी स्कूलों तक पहुंचाया जाएगा। करीब एक लाख शिक्षकों को AI आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। आगे बनेगा राजस्थान का अपना AI पाठ्यक्रम पीरामल फाउंडेशन के प्रोग्राम मैनेजर राहुल शर्मा ने बताया- एनसीईआरटी और सीबीएसई पहले ही AI से जुड़े पाठ्यक्रम तैयार कर चुके हैं। इसी आधार पर इस साल पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा। भविष्य में राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (RSCERT) भी राज्य की जरूरतों के अनुरूप AI का अपना प्रशिक्षण मॉड्यूल और पाठ्यक्रम तैयार करेगी। इसे प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में लागू करने की योजना है। RSCERT की निदेशक श्वेता फगेड़िया ने कहा कि एआई के माध्यम से समय की बचत करते हुए शिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से शिक्षकों को एआई आधारित तकनीकों और उनके प्रभावी उपयोग की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे कक्षा शिक्षण को अधिक रोचक, प्रभावी परिणाम बना सकें। उन्होंने कहा- यह एक शुरुआत है। भविष्य में शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली नई तकनीकों व नवाचारों को भी चरणबद्ध तरीके से अपनाया जाएगा। पहले किसी विषय को गहराई से समझने के लिए विशेषज्ञ या शिक्षक पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता था। अब कई एआई आधारित टूल्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से स्टूडेंट्स अपनी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। यही उपयोग शिक्षक कर सकें, इस सोच से आगे बढ़ रहे हैं। इन सभी तकनीकों के बावजूद शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहेगी, क्योंकि वही स्टूडेंट्स को सही दिशा, मार्गदर्शन और मानवीय मूल्यों के साथ सीखने की प्रेरणा देते हैं। क्यों शुरू किया जा रहा AI कार्यक्रम राजस्थान सरकार स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, विकसित राजस्थान-2047 विजन और राज्य की AI-ML नीति-2026 के अनुरूप यह पहल की जा रही है। इसका उद्देश्य तकनीक के जरिए शिक्षण को अधिक प्रभावी, स्टूडेंट् के अनुरूप और डेटा आधारित बनाना है। शिक्षकों को AI टूल्स के उपयोग में काबिल बनाना है, ताकि वे AI-सक्षम क्लासों का संचालन कर सकें। इस कार्यक्रम में माइक्रोसॉफ्ट तकनीकी सहयोगी होगा। कंपनी 80 हजार से अधिक शिक्षकों के प्रशिक्षण और सर्टिफिकेशन में सहयोग करेगी। इससे शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों की टीचिंग-लर्निंग प्रक्रिया को तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाएगा। RSCERT, DIET और पिरामल फाउंडेशन की साझेदारी इसे पूरे प्रदेश में लागू किए जा सकने वाला स्थायी मॉडल बनाने पर काम करेगी।

अमेरिका से लौटी इंजीनियर की पत्नी, बेटी की कस्टडी मांगी:पति से बात करना किया बंद; पीहर वाले घर आकर ले गए थे गहने

जयपुर में सॉफ्टेवयर इंजीनियर की पत्नी शादी के 8 साल बाद अचानक पीहर चली गई। उसके कुछ समय बाद रिश्तेदार की शादी में जाने के बहाने ससुराल से गहने भी मंगवा लिए। इसके बाद पत्नी (सॉफ्टवेयर इंजीनियर) जॉब के लिए अमेरिका चली गई। करीब 2 साल बाद इंडिया लौटी, लेकिन ससुराल नहीं आई। पति से बात करना भी बंद कर दिया। फिर 8 साल की बेटी की कस्टडी के लिए केस कर ससुराल पक्ष को नोटिस भिजवा दिया। यही नहीं, जिन गहनों को उसके मायके वाले हड़प चुके थे, उनको मांगने का भी नोटिस में जिक्र कर दिया। नोटिस मिलने के बाद 17 जुलाई को ससुर (पति के पिता) ने बिंदायका पुलिस थाने में बहू के पिता और उसके चाचा के खिलाफ गहने हड़पने की FIR दर्ज करवाई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब सिलसिलेवार पढ़िए पूरा मामला… सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे की 2014 में कराई थी शादी बिंदायका थाने के ASI बाबूलाल ने बताया- 65 वर्षीय बुजुर्ग ने थाने में FIR दर्ज करवाई है। रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि उनके सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे की शादी बेंगलुरु (कर्नाटक) निवासी युवती से साल 2014 में हुई थी। वह भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। शादी के करीब 8 साल बाद उनकी बहू अचानक पीहर चली गई। 8 दिसंबर 2023 को बहू के पिता और चाचा जयपुर आए। विद्याधर नगर में एक शादी में शामिल होने की कहकर उनके घर पर ही रुक गए। उस दौरान उनकी बहू बेंगलुरु में पीहर में ही थी। बहू के गहने लेने जयपुर आए थे पिता और चाचा ससुर ने रिपोर्ट में बताया कि जयपुर स्थित उनके घर पर बातचीत के दौरान बहू के पिता और चाचा ने 21 जनवरी 2024 को सिकंदराबाद (तेलंगाना) में परिवार में शादी होना बताया। शादी में बहू के भी जाने की बात बताई। दोनों ने अलमारी में रखी बहू की ज्वेलरी के साथ-साथ हमारे पैतृक गहने भी शादी में पहनने के लिए मांगे। उन्होंने बहू के अच्छे व्यवहार और संबंधों के चलते रिश्तेदार की शादी में पहनने के लिए गहने निकालकर उन्हें दे दिए। बाद में पता चला कि सिकंदराबाद में हुई शादी में बहू की मम्मी ने उन गहनों को पहना था। अमेरिका से लौटने पर भेजा नोटिस इसके बाद जॉब के सिलसिले में बहू मासूम बेटी के साथ अमेरिका चली गई। करीब 2 साल अमेरिका में रहने के बाद मार्च 2026 में बहू के इंडिया लौटने का पता चला। रिपोर्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि 25 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु कोर्ट से उन्हें एक नोटिस मिला। नोटिस से पता चला कि बहू ने बेटी की कस्टडी के लिए बेंगलुरु कोर्ट में केस फाइल कर रखा है। मायके वाले ने जो गहने लिए थे, उसका भी झूठा हवाला दिया है कि वह अभी भी उनके (ससुराल वालों के) पास है। गहने मांगे तो लौटाने से किया इनकार इसका पता चलने पर पीड़ित परिवार ने बहू के मायके वालों से कॉन्टैक्ट कर गहने मांगे, तो उन्होंने गहने लौटाने से मना कर दिया। इन गहनों में सोने का रानीहार, मंगलसूत्र, कमरबंद, बाजूबंद, हथफूल, सात अंगूठी, दो कड़े, दो चूड़ी, चेन-पेंडेंट सेट, कान की जोड़ियां, टीका और अन्य सोने के गहने शामिल हैं। इसके बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया।

गोगुंद-पिंडवाड़ा हाईवे पर ट्रक में घुसी कार, युवक-युवती की मौत:कार का आगे का हिस्सा चकनाचूर हो गया, दोनों के शवों की नहीं हुई पहचान

उदयपुर जिले के गोगुंदा-पिंडवाड़ा हाईवे पर सड़क हादसे में युवक-युवती की मौके पर ही मौत हो गई। जेलानी के पास एक तेज रफ्तार कार आगे चल रहे ट्रक में घुस गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। कार का आगे का पूरा हिस्सा चकनाचूर हो गया। हादसे की खबर मिलते ही गोगुंदा थाना पुलिस और हाईवे पेट्रोलिंग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। कार की हालत इतनी खराब थी कि दोनों के शव अंदर बुरी तरह फंस गए थे। पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद ली और काफी मशक्कत करने के बाद दोनों शवों को कार को काटकर बाहर निकाला। इसके बाद पुलिस ने दोनों के शवों को गोगुंदा सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। पिंडवाड़ा की तरफ जा रही थी कार गोगुंदा थानाधिकारी प्रवीण सिंह ने बताया कि कार में सवार युवक और युवती गोगुंदा से पिंडवाड़ा की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान जेलानी के पास यह हादसा हो गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आगे चल रहे ट्रेलर के चालक को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ शुरू कर दी है। दोनों के शवों की नहीं हुई पहचान इस हादसे में जान गंवाने वाले युवक और युवती की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस उनके पास मिले सामान और कार के नंबर के आधार पर उनके परिजनों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। गोगुंदा थाना पुलिस ने इस पूरे मामले को दर्ज कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। हाईवे पर दूर लगे सीसीटीवी कैमरों और चश्मदीदों से भी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि हादसे की सही वजह का पता चल सके। इनपुट – गोपाल लोढ़ा, गोगुंदा।

जयपुर- 250 साल पुरानी हवेली से निकली खजाने वाली तिजोरियां:एक ठेकेदार लेकर भागा; परिवार का दावा- दादी ने कहा था यहां है सोने-चांदी का भंडार

जयपुर में करीब 250 साल पुरानी बंबई वालों की हवेली की दीवार से खजाने वाली दो तिजोरी निकलने का दावा किया गया है। परिवार का आरोप है कि इनमें से एक छोटी तिजोरी खुदाई करने वाला ठेकेदार चोरी-छिपे ले गया। इधर, हवेली के मालिक का कहना है कि उसने ये हवेली दो और पार्टनर के साथ इसी साल अप्रैल में खरीदी थी। शुक्रवार (17 जुलाई) को पुराने निर्माण को तोड़ने के दौरान तिजोरी निकली हैं, लेकिन उसमें केवल कचरा निकला है। वहीं, माणक चौक थाना पुलिस का कहना है कि उन्हें ऐसे किसी मामले की जानकारी नहीं है। इसी थाने में ही 15 जुलाई को एक और हवेली में खजाना निकलने और चोरी का केस दर्ज हुआ था। दोनों ही हवेली में खुदाई एक ही ठेकेदार ने की है। उसी पर चोरी के आरोप भी हैं। वहीं, बंबई वालों की हवेली से जुड़े परिवार का आरोप है कि उनकी दादी ने कहा था कि यहां खजाना गढ़ा है। सबसे पहले देखिए- बंबई वालों की हवेली में खुदाई की PHOTOS… अब पढ़िए- खजाने और चोरी को लेकर क्या हैं दावे ठेकेदार को ले जाते हुए देखा: हवेली के पीछे रहने वाले युवक का दावा है कि शुक्रवार सुबह वह अपने चाचा के साथ छत पर था। जेसीबी से हवेली के अंतिम हिस्से की दीवार तोड़ने के दौरान मलबे के साथ एक बड़ी और एक छोटी तिजोरी निकली। छोटी तिजोरी को ठेकेदार और जेसीबी ड्राइवर तुरंत एक्टिवा पर रखकर ले गए, जबकि बड़ी तिजोरी वहीं छोड़ दी गई। खजाना होने की बात दादी बताती थी: हवेली से जुड़े राकेश अग्रवाल ने बताया कि यह पुश्तैनी हवेली लगभग 250 साल पुरानी है। हवेली को 1925 में उनके दादा सूरजमल ने खरीदा था। वे ज्वेलर थे। अग्रवाल का दावा है कि उनकी दादी अक्सर हवेली में गुप्त तहखाने और सोने-चांदी के भंडार की चर्चा करती थीं। यहां तहखाने होने की भी पूरी संभावना है। परिवार का दावा पुलिस ले गई तिजोरी: राकेश अग्रवाल का कहना है कि एक तिजोरी को पुलिस थाने गई, लेकिन बताया गया कि उसमें कुछ नहीं मिला। हमें विश्वास है कि हवेली में अब भी खजाना हो सकता है। वहीं, माणक चौक थाने के SHO का कहना है ऐसा कोई मामला नहीं है। पुलिस कोई तिजोरी थाने में नहीं लाई है। मालिक बोला- खजाना नहीं मिला, अफवाह है हवेली के खरीदार रमेश नारनोली ने खजाना मिलने के दावों को अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी जानकारी नहीं है कि हवेली को कौन तोड़ रहा है? इस हवेली को उन्होंने रामवतार अग्रवाल और कमल रूपानी के साथ मिलकर खरीदा है। इस हवेली में 13 हिस्सेदारों थे। इसे तोड़कर फिर से बनाया जाना है। उन्होंने बताया कि यहां से निकली तिजोरी को माणकचौक थाने ले गए थे। करीब 400 रुपये देकर उसे खुलवाया गया, लेकिन उसमें केवल कचरा मिला। दोनों केस में एक ही ठेकेदार पर आरोप हवेली से जुड़े परिवार का आरोप है कि इस हवेली को भी महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू खटीक ने ही तोड़ा है। उनका दावा है कि छह महीने पहले विद्याधर के रास्ते स्थित हवेली को भी इसी ठेकेदार ने तोड़ा था। वहां से 45 किलो चांदी, सोने से भरे 15 कलश निकले थे। उन्हें भी इसी ठेकेदार ने गायब कर दिया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि जयपुर के परकोटा क्षेत्र की अधिकांश पुरानी हवेलियों को तोड़ने का ठेका छोटू खटीक ही लेता है। उसने पिछले कुछ वर्षों में कई हवेलियां तोड़ी हैं। इन सभी हवेलियां से निकले सामान की जांच होनी चाहिए। …. खजाने से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… 1. जमीन खुदाई में मिला खजाना किसका, मालिक या सरकार का?:जयपुर में घर में मिले सोने से भरे 15 कलश; 8 सवालों से समझें नियम कानूनन गड़े मिले खजाने पर सरकार का ही हक माना जाएगा। पूरे देश में ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ लागू है। राजस्थान में ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव रूल्स 1961’ भी काम करता है। पूरी खबर पढ़िए… 2. जयपुर-हवेली की नींव से निकले सोने से भरे 15 कलश:45 किलो चांदी की सिल्लियां, 10 हजार सिक्के भी; मालिक का दावा- मजदूरों ने आपस में बांटे ठेकेदार और उसके साथियों ने करीब 40-45 किलो चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे 14-15 कलश और 8 से 10 हजार पुराने चांदी के सिक्के आपस में बांट लिए। पूरी खबर पढ़िए…

भिड़ंत से कार में फंसी बाइक, जलकर कबाड़:20 फीट उछलकर गिरे युवक की मौत, गाड़ी के गेट ऑटोमैटिक लॉक हुए, ज्वेलर जीजा-साले बचे

जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ थाना क्षेत्र में कार से भिड़ंत में 20 फीट तक हवा में उछलकर गिरे बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर के तुरंत बाद कार के अगले हिस्से में बाइक फंसने से शॉर्ट सर्किट हुआ और आग लग गई। कार के दरवाजे ऑटोमैटिक लॉक हो गए, लेकिन पीछे का एक दरवाजा खुलने से ज्वेलर समेत तीन की जान बच गई। बाइक सवार युवक के पास पड़े मोबाइल से सूचना के बाद परिजन मौके पर पहुंचे। पुलिस की मदद से हॉस्पिटल पहुंचाया गया। हादसा 18 जुलाई की रात करीब 9 बजे जैसलमेर-नेहड़ाई रोड पर बोहा और नेहड़ाई गांव के बीच हुआ। हादसे से जुड़ी ये तस्वीरें भी देखें … पढ़िए… सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम गहने देकर लौट रहे थे कार सवार, एक गेट खुलने से बची जान जानकारी के अनुसार रामगढ़ निवासी पंकज सोनी (28) पुत्र पुखराज सोनी स्विफ्ट कार चला रहे थे। उनके साथ आगे की सीट पर उनके साले मोतीलाल सोनी (22) पुत्र कमल किशोर सोनी और पीछे की सीट पर महेंद्र सोनी (27) पुत्र देवीलाल सोनी, जो पंकज के काकी ससुर का बेटा है, बैठे थे। तीनों जैसलमेर से बोहा गांव में एक ग्राहक को सोने का गहना देकर रामगढ़ लौट रहे थे। शनिवार रात करीब 9 बजे बोहा और नेहड़ाई गांव के बीच सामने से आ रही एक बाइक से उनकी कार की टक्कर हो गई। पंकज सोनी के अनुसार बाइक सवार तेज रफ्तार में रॉन्ग साइड से आया और सीधे उनकी कार से टकरा गया। टक्कर के बाद बाइक कार के बोनट में फंस गई, जिससे शॉर्ट सर्किट हुआ और कार में आग लग गई। आग लगते ही कार के तीन गेट लॉक हो गए। काफी कोशिश के बाद एक गेट का लॉक मुश्किल से खुला, जिसके बाद तीनों युवक जान बचाकर बाहर निकलने में सफल रहे। हादसे में एक कार सवार घायल हादसे में कार सवार मोतीलाल सोनी पुत्र कमल किशोर सोनी के सिर पर चोट आई। वहीं कार से बाहर निकलने के बाद युवकों ने घायल बाइक सवार की मदद करने की कोशिश की। इसी दौरान मृतक के पास गिरे मोबाइल पर उसके परिजनों का फोन आया तो उन्होंने कॉल उठाकर हादसे की जानकारी दी। सूचना मिलने पर नेहड़ाई गांव से परिजन मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक युवक की मौत हो चुकी थी। मृतक की पहचान फकीरा राम भील (28) निवासी नेहड़ाई के रूप में हुई। परिजनों ने पुलिस की मदद से पहुंचाया हॉस्पिटल घटना की सूचना मिलते ही नेहड़ाई चौकी प्रभारी देवी सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस और परिजनों की मदद से शव को जैसलमेर के राजकीय जवाहिर अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद युवक को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवा दिया गया। कार पूरी तरह जलकर हुई कबाड़ मोहनगढ़ थाना पुलिस ने दुर्घटना का मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के कारणों की गहनता से जांच शुरू कर दी है। हादसे में स्विफ्ट कार पूरी तरह जलकर कबाड़ बन गई। पुलिस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है।

जयपुर में पुलिस की गाड़ी डिवाइडर फांद कार से टकराई:भीड़ ने स्कॉर्पियो पर पत्थर फेंके, शीशे तोड़कर बीयर की कैन और बोतल निकाल बोनट पर रखी

जयपुर में शनिवार रात करीब साढ़े 10 बजे एक तेज रफ्तार राजस्थान लिखी स्कॉर्पियो डिवाइडर फांदकर रॉन्ग साइड में जाकर कार से टकरा गई। हादसे में कार क्षतिग्रस्त हो गई, वहीं स्कॉर्पियो का एक टायर भी फट गया। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और स्कॉर्पियो को घेर लिया। लोगों ने स्कॉर्पियो पर पत्थर फेंके। जिससे स्कॉर्पियो के शीशे टूट गए। अंदर रखी बीयर की कैन और बोतल बाहर निकालकर बोनट पर रख दी। घटना एयरपोर्ट रोड स्थित 6 नंबर बस स्टैंड के पास की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्कॉर्पियो ने सांगानेर की ओर जा रही वरना कार को जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और देखते ही देखते हंगामा शुरू हो गया। प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने स्कॉर्पियों पर पत्थर फेंककर उसके शीशे तोड़ दिए। डिवाइडर फांदकर रॉन्ग साइड में पहुंची स्कॉर्पियो प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्कॉर्पियो RJ 14 CB TF 5022 सांगानेर से तेज गति से कोचिंग हब की ओर आ रही थी। वह अनियंत्रित डिवाइडर पार कर रॉन्ग साइड में पहुंच गई और एयरपोर्ट रोड से सांगानेर की ओर जा रही वरना कार से टकरा गई। वरना कार में तीन लोग सवार थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कॉर्पियो का दाहिना अगला टायर फट गया और अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि दुर्घटना के तुरंत बाद वरना कार को मौके से हटा दिया गया, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई। भीड़ ने पुलिस वाहन पर पत्थर फेंके हादसे के बाद करीब 150 से ज्यादा लोग मौके पर एकत्र हो गए। लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी और गुस्साई भीड़ ने राजस्थान पुलिस लिखी स्कॉर्पियो पर फेंककर उसके शीशे तोड़ दिए। मौके पर पीसीआर और डायल-112 की टीम पहुंची। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस वाहन के शीशे तोड़ने के बाद भीड़ ने उसमें से बीयर के कैन और बोतलें निकालकर वाहन के बोनट पर रख दीं। इस घटनाक्रम को लेकर मौके पर काफी देर तक चर्चा होती रही। डेढ़ घंटे बाद क्रेन से हटाई गई स्कॉर्पियो हंगामे के दौरान एक बाइक सवार युवक ने भीड़ को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन गुस्साई भीड़ ने उसके साथ मारपीट कर दी। युवक किसी तरह वहां से जान बचाकर निकल सका। पुलिस ने लोगों को समझाइश कर स्थिति को नियंत्रित किया। करीब डेढ़ घंटे बाद क्रेन बुलाकर क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो को मौके से हटवाया गया और यातायात सुचारू कराया गया। दो थानों की सीमा, फिर भी नहीं पहुंचे थानाधिकारी हादसे का स्थान प्रतापनगर और सांगानेर थाना क्षेत्रों की सीमा पर बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक हंगामा चलता रहा, लेकिन दोनों थानों के थानाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। लोगों का कहना था कि समय पर वरिष्ठ अधिकारी पहुंचते तो स्थिति और अधिक तनावपूर्ण नहीं होती। स्कॉर्पियो पर ‘राजस्थान पुलिस’ लिखा, पुलिस बत्ती भी लगी प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे में शामिल स्कॉर्पियो पर टैक्सी नंबर होने के बावजूद सफेद प्लेट लगी हुई थी। वाहन पर “राजस्थान पुलिस” लिखा हुआ था और पुलिस की फ्लैश लाइट (बीकन) भी लगी हुई थी। बताया गया कि वाहन में कॉन्स्टेबल सुंदरम और ड्राइवर मौजूद थे। आरपीएस अधिकारी से वाहन जुड़े होने की चर्चा मौके पर मौजूद लोगों के बीच यह भी चर्चा रही कि उक्त स्कॉर्पियो जेडीए में कार्यरत एक आरपीएस अधिकारी को आवंटित है। हालांकि इस संबंध में पुलिस या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस जांच जारी फिलहाल पुलिस हादसे के कारणों, वाहन की स्थिति, उससे जुड़े तथ्यों और हंगामे और पुलिस वाहन में हुई तोड़फोड़ की घटना की जांच कर रही है। हादसे में घायल लोगों की स्थिति और हंगामे में शामिल लोगों की पहचान को लेकर भी कार्रवाई की जा रही है।

जमीन खुदाई में मिला खजाना किसका, मालिक या सरकार का?:जयपुर में घर में मिले सोने से भरे 15 कलश; 8 सवालों से समझें नियम

हाल ही जयपुर में एक हवेली की खुदाई में खजाना मिलने का दावा किया गया। मालिक का आरोप है कि ठेकेदार और उसके साथियों ने करीब 40-45 किलो चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे 14-15 कलश और 8 से 10 हजार चांदी के पुराने सिक्के आपस में बांट लिए। मामला पुलिस तक पहुंच गया है। इस घटना के बाद कई सवाल उठ रहे हैं… इस रिपोर्ट में आपके मन में उठ रहे सवालों के जवाब मिल जाएंगे… सवाल : आपकी पुश्तैनी जमीन या घर में खजाना मिलता है तो क्या आपका हो जाता है? जवाब : आपके पूर्वजों ने घर में 100 साल पहले या सैकड़ों साल पहले भी जमीन के भीतर खजाना छिपाया हो और एक दिन अचानक आपको मिल जाए तो आपको ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ के तहत सरकार को इसकी जानकारी देनी होगी। जमीन के ऊपर या खुदाई में आपको मिलने पर भी खजाना कानूनी रूप से आपका नहीं हो जाता है। सवाल : फिर इस खजाने पर किसका हक माना जाएगा? जवाब : कानूनन गड़े मिले खजाने पर सरकार का ही हक माना जाएगा। पूरे देश में ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ लागू है। वहीं राजस्थान में ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव रूल्स 1961’ भी काम करता है। गड़ा हुआ खजाना मिलने की स्थिति में ये नियम ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ के प्रावधानों को राज्य में लागू करने के लिए बनाए गए हैं। कानूनी प्रवधानों के तहत ही गड़े खजाने पर सबसे पहला हक राज्य सरकार का है। सवाल : क्या गड़ा खजाना जिसका हक हो, उसका हो सकता है? जवाब : हां, कानून के तहत हो सकता है। शर्त यह है कि व्यक्ति साबित कर दे कि ये खजाना उसके पूर्वजों का है, भले ही 100 साल से कम पुराना हो। खजाना किसी और को मिला हो, लेकिन कोई और यदि खजाना अपने बुजुर्गों का होने के तथ्य ले आए और कानूनी जांच में साबित कर दे तो सरकार उसे सौंप सकती है। सवाल : खजाने के दावेदारों की जांच कैसे की जाती है, दावेदार नहीं मिले तो…? जवाब : जांच के दौरान खजाना सरकारी ट्रेजरी में सरकार की निगरानी में रहता है। जिसे खजाना मिला हो और वह खुद की संपत्ति होने का दावा करता है तो भी जांच प्रक्रिया पूरी करनी होती है। कलेक्टर को खजाने की अनुमानित कीमत बताते हुए एक सार्वजनिक नोटिस जारी करना होता है। इसमें वह कहता है कि इस खजाने का कोई दावेदार हो या उसके वंशज हों तो दस्तावेज सहित हाजिर हो जाएं। इस नोटिस के बाद कलेक्टर चाहे तो 4 से 6 महीने का समय दे सकते हैं। दावेदार के हाजिर होने पर कलेक्टर चाहें तो दावा साबित करने के लिए उसे सालभर का समय भी दे सकते हैं। पूरी जांच कलेक्टर की अंडर में चलती है। यदि कलेक्टर की जांच में कोई अपने दावे को साबित कर देता है कि खजाना उसके बुजुर्गों का है, तो कलेक्टर मूल मालिक को खजाना सौंप सकता है। यदि कोई दावेदार इस दौरान नहीं आता, तो ये खजाना लावारिस घोषित हो जाता है और पूरी तरह सरकार के अंडर आ जाता है। सवाल : यदि खजाना 100 साल पुराना हो तो… जवाब : जांच के दौरान यदि खजाना ऐतिहासिक महत्व का लगता है तो कलेक्टर पुरातत्व विभाग से रिपोर्ट मांग सकते हैं। यदि खजाने में शामिल चीजें 100 साल से ज्यादा पुरानी निकलती हैं, तो एंटीक्विटी एंड आर्ट वैल्यूएबल्स एक्ट 1972 के तहत उन्हें ‘पुरातत्व’ या ‘ऐतिहासिक धरोहर’ माना जाता है। ऐसे में संबंधित खजाना किसी निजी व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ के प्रावधानों के तहत ऐसा खजाना सीधे राज्य की संपत्ति माना जाता है। सवाल : क्या गड़ा खजाना खोजने वालों या जमीन मालिक के बीच बांटा जा सकता है? जवाब : कानूनी धाराओं के तहत यदि खजाना सौ साल से ज्यादा पुराना है तो खोजने वाले का इस पर कोई अधिकार नहीं होता है। ये सरकार की संपत्ति माना जाएगा। वहीं यदि गड़ा खजाना 100 साल से कम पुराना हो तो कानूनी प्रावधानों के तहत खोजकर्ता और जमीन के मालिक के बीच साझा किया जा सकता है। प्रशासन की जांच में यदि कोई खजाने का दावेदार नहीं मिलता है तो उसे खोजने वाले को 75% और जमीन मालिक को 25% हिस्सा मिल सकता है। सवाल : सरकार को जानकारी देना क्यों जरूरी है? जवाब : कानून के अनुसार तो 10 रुपए से अधिक की कीमत का भी धन या वस्तु, सोना-चांदी आदि आपको मिलता है, तो तत्काल लिखित सूचना कलेक्टर या स्थानीय प्रशासन को देनी होती है। सवाल : यदि खजाना सार्वजनिक जगह या सरकारी कब्जे वाली जमीन पर मिले तो…? जवाब : तो ये खजाना सरकार के ही अधीन माना जाएगा। सरकार के कब्जा लेने से पहले यदि कोई इसमें से कुछ भी ले जाएगा तो उसे सरकार को ही जमा करवाना होगा। यदि खजाने में कुछ भी ले जाने वाला व्यक्ति खुद अपने स्तर पर प्रशासन को सौंपता है तो वह सजा से बच सकता है, लेकिन यदि प्रशासन अपने स्तर पर जांच कर तलाशी से कुछ वसूली करेगी तो सजा भी मिल सकती है। … ये खबर भी पढ़िए… 1. जयपुर-हवेली की नींव से निकले सोने से भरे 15 कलश:45 किलो चांदी की सिल्लियां, 10 हजार सिक्के भी; मालिक का दावा- मजदूरों ने आपस में बांटे जयपुर में एक हवेली की खुदाई में खजाना मिलने का दावा है। मालिक का आरोप है कि ठेकेदार और उसके साथियों ने पूरा खजाना गायब कर दिया। पूरी खबर पढ़िए… 2. जयपुर की एक और हवेली से निकली खजाने वाली तिजोरियां:एक ठेकेदार लेकर भागा; परिवार का दावा- दादी ने कहा था यहां है सोने-चांदी का भंडार जयपुर में करीब 250 साल पुरानी बंबई वालों की हवेली की खुदाई में खजाने वाली दो तिजोरी निकलने का दावा किया गया है। परिवार का आरोप है कि इनमें से एक छोटी तिजोरी खुदाई करने वाला ठेकेदार चोरी-छिपे ले गया। पूरी खबर पढ़िए…

कॉन्स्टेबल की हत्या का आरोपी कोर्ट से भागा:सरेंडर करने आया था, जमानत न मिलने की आशंका पर फरार हुआ

दौसा में 5 साल पहले पुलिस कॉन्स्टेबल हत्याकांड में वांटेड बदमाश कोर्ट में सरेंडर करने के बाद भाग निकला। उसे अंदेशा था कि उसकी जमानत नहीं हो पाएगी। ऐसे में, मौका पाकर बदमाश कोर्ट में रफूचक्कर हो गया। मामला दौसा के सिकराय कोर्ट का शनिवार का है। कोर्ट की रिपोर्ट पर मानपुर थाने में मामला दर्ज किया गया है और पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। लोक अदालत में भीड़ का फायदा उठा कर भागा मानपुर थाना इंचार्ज सतीश कुमार ने बताया- आरोपी विजय मीणा को 2024 में कॉन्स्टेबल संजय गुर्जर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। केस ट्रायल के दौरान आरोपी बेल पर चल रहा था। 2026 जून में इसी मामले में पेशी थी। आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। इसके बाद 16 को विजय मीणा के खिलाफ सिकराय कोर्ट ने अरेस्ट वारंट जारी किया था। शनिवार को यह कोर्ट में सरेंडर करने आया था। इस दौरान आरोपी विजय मीणा की पेशी होनी थी। जेल भेजने की आशंका के चलते यह भीड़ का फायदा उठा कर भाग निकला। इसी दिन कोर्ट में लोक अदालत भी चल रही थी। ऐसे में भीड़ का फायदा उठा कर भाग निकला। 2021 में जमीन विवाद में हुई थी कॉन्स्टेबल की हत्या कोर्ट की रिपोर्ट पर दर्ज हुआ मामला आरोपी के फरार होने के बाद कोर्ट की ओर से मानपुर थाने को रिपोर्ट भेजी गई। इसके आधार पर देर शाम आरोपी के कोर्ट परिसर से फरार होने का मामला दर्ज किया गया। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विजय मीणा की गिरफ्तारी के लिए उसके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।

मंत्री किरोड़ी की राह में बिछाए फूल:IPS अफसर के लिए कवि बना ASI; सरिस्का में हिचकोले खाते हुए सफर

नमस्कार IPS शरत कविराज पर लिखी एक कविता सोशल मीडिया पर खूब घूम रही है। कवि हैं- ASI हरसहाय। करौली में पांचना का पानी पहुंचा तो जयपुर में कृषि मंत्रीजी के लिए गुलाब की पंखुड़ियों का कारपेट बिछा दिया और सरिस्का में सड़कों की हालत खराब है। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. किरोड़ी बाबा की राह में बिछाए फूल किरोड़ी बाबा अपने मिशन पर लगे रहते हैं। बीते दिनों कृषि विभाग में बहुत कुछ चला। मामला शांत होता आया। फिर पांचना के पानी को लेकर तीन पक्षों के किसान हो-हल्ला करने लगे। इनमें एक कमांड एरिया के किसान भी थे। उनकी नहर भी 20 साल से सूखी थी। किरोड़ीलाल मीणा ने ही उन्हें आश्वासन दिया था कि पानी आ जाएगा। लंबे इंतजार के बाद नहर में दग-दग करते हुए पानी बहा तो लोगों की भीड़ जमा हो गई। मोबाइल कैमरों में धारा को कैद किया गया। यह पानी टेस्टिंग के लिए छोड़ा गया था। टेस्टिंग सफल रही। पानी आने से किसान इतने खुश हुए कि किरोड़ी बाबा को जयपुर में उनके सरकारी आवास पर सरप्राइज दे दिया। रात में ही किरोड़ी बाबा की सीढ़ियों के पास से लेकर खुले अहाते तक गुलाब की पंखुड़ियों का कारपेट बिछा दिया। जिस प्रकार सूखी नजर में पानी आया था, उसी तरह गुलाब के कारपेट पर सुबह किरोड़ी बाबा चलते हुए मॉर्निंग वॉक करने मैदान में पहुंचे। 2. क्राइम ब्रांच में गए ‘कविराज’ जोधपुर को कमिश्नर सूट नहीं कर रहे या कमिश्नरों को जोधपुर सूट नहीं कर रहा। भगवान जाने क्या मैटर है कि एक साल में तीन कमिश्नर बदल गए। IPS कविराज तो यहां 138 दिन ही रह पाए। अब जयपुर जाकर क्राइम ब्रांच में IG हो गए हैं। यूं तो सुरा और कविता का पुराना गठजोड़ रहा है। लेकिन जोधपुर में कविराज का नियम के खिलाफ चलने वाले शराब कारोबारियों से छत्तीस का आंकड़ा रहा। रात को 8 बजे बाद कमिश्नर साहब एक्टिव हो जाते थे। सादा कपड़ों में बाजारों में घूमते। कहीं 8 बजे बाद शटर के ऊपर से, नीचे से, इधर से, उधर से, खिड़की से, झरोखे से, कहीं से भी शराब बिकती देखते तो दूसरे दिन पूरा अमला पहुंच जाता। कार्रवाइयों से हड़कंप मच गया। साहब ने अपना सिक्का जमा दिया था। एक ASI हरसहाय मीणा तो कविराज की कार्यशैली देख क्रिएटिव हो गए और कल्पना कर-करके कमाल की कविता क्रिएट कर दी। ASI की कविता के कुछ अंश इस प्रकार हैं- मैं कमिश्नरेट की रज हूं
आप कमिश्नरेट के ताज हैं
अल्प सा एहसास हूं मैं
आप बुलंद आवाज हैं

मैं अदना सा कवि हूं
आप स्वयं कविराज हैं कवि ने अपनी कल्पना से शब्द गढ़े तो नेतागण ने अपने हिसाब से ट्रांसफर का अर्थ गढ़ना शुरू कर दिया। पूर्व मुखियाजी ने एक्स पर लिखा-शराब माफिया के दवाब में कमिश्नर साहब की बदली कर दी गई। नजाकत अपनी जगह और सियासत अपनी जगह। साहब तो ट्रांसफर ऑर्डर लेकर निकल चुके क्राइम ब्रांच। 3. चलते-चलते.. जयपुर से अलवर जाने के सड़क मार्ग में सरिस्का का जंगल आता है। रिजर्व फोरेस्ट का इलाका होने के कारण वन विभाग यहां सड़क सुधारने से बचता है। सड़क पर जंगली जानवरों का आना-जाना होता है। ऐसे में करीब ढाई साल पहले एक प्लान की बड़ी चर्चा हुई। कहा गया कि सरिस्का के जंगल में थानागाजी से कुशालगढ़ तक एलिवेटेड रोड बना दी जाएगी। ऊपर से गाड़ियां गुजरेंगी और नीचे जंगली जानवर स्वच्छंद विचरण करेंगे। जंगल भी डिस्टर्ब नहीं होगा और रास्ता भी बंद नहीं होगा। इस प्लान पर चर्चा तो खूब हुई, लेकिन यह ठंड बस्ते में चला गया। अब इलाके के दर्जनों गांवों के लोग जयपुर या अलवर जाते वक्त इस रोड पर हिचकोले खाने को मजबूर हैं। अपनी परेशानी बयान करने के लिए क्षेत्र के युवाओं ने AI वीडियो बनाया जिसमें बस टूटी सड़क से होती हुई अलवर जा रही है। परेशान यात्री प्रार्थना करते हैं- हे भर्तृहरि बाबा ये रोड तो मार ही डालेगा। बचा ले। सवारियां कमर-गर्दन सहलाते बस से उतरती हैं। एक बुजुर्ग मन्नत मांगता है- अगर ये सड़क बन गई तो सवा-मणी कर दूंगा। इनपुट सहयोग- जयदीप पुरोहित (जोधपुर), धर्मेंद्र शर्मा (करौली)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मंगलवार 7 बजे मुलाकात होगी।