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पत्थर से सिर कुचलकर नाबालिग स्टूडेंट की हत्या:जंगल में प्लास्टिक के कट्टों से ढका मिला शव, ग्रामीणों ने स्टेट हाईवे किया जाम

धौलपुर जिले के बाड़ी में 16 साल के नाबालिग छात्र की पत्थर से सिर कुचलकर हत्या कर दी। नाबालिग का शव जंगल में प्लास्टिक के कट्टों से ढका हुआ मिला। घटना रविवार रात करीब 9 बजे की है। इसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने रात में ही बाड़ी-बसेड़ी स्टेट हाईवे जाम कर दिया। ट्रैक्टर में शव रखकर सोमवार को भी स्टेट हाईवे पर प्रदर्शन किया। परिजनों ने मुआवजे और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। इस दौरान मौके पर तीन थानों की पुलिस मौजूद रही। कलेक्टर और एसपी के आश्वासन के बाद परिजन और ग्रामीण माने। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। देखें घटना से जुड़ी PHOTOS… पशु चराने गया था, जंगल में मिली लाश मृतक के चचेरे भाई ने बताया- नाबालिग रविवार दोपहर करीब 2 बजे पशु चराने गया था। शाम 7 बजे तक वह घर नहीं लौटा तो तलाश शुरू की। परिजन सहित ग्रामीण जंगल में उसे ढूंढने निकले। रात 9 बजे जंगल में उसका शव प्लास्टिक के कट्टों से ढका हुआ मिला। उसके सिर पर पत्थरों से वार किए गए थे। पत्थरों से बेरहमी से हमला कर उसकी हत्या कर दी गई। पिता ने बताया- मेरे हाथ में फ्रैक्चर हुआ था। पत्नी और छोटा बेटा मुझे धौलपुर के हॉस्पिटल में इलाज के लिए लेकर गए थे। बड़ा बेटा घर पर अकेला था। मेरी पत्नी रोज पशु चराने जाती थी। पत्नी घर पर नहीं थी, इसलिए बेटा पशु लेकर गया था। मुझे हॉस्पिटल में घटना का पता चला। वह ग्रेजुएशन कर रहा था। ग्रामीणों ने स्टेट हाईवे पर लगाया जाम ग्रामीण बाड़ी-बसेड़ी स्टेट हाईवे पर रविवार रात धरने पर बैठे गए। एसपी और कलेक्टर को मौके पर बुलाने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए। सूचना मिलते ही एडिशनल एसपी श्रवण कुमार, बाड़ी सीओ महेंद्र कुमार, एसडीएम अमित कुमार वर्मा और तहसीलदार जगवीर सिंह बेनीवाल मौके पर पहुंचे। इधर, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष रामेंद्र मीणा भी ग्रामीणों के समर्थन में घटनास्थल पर पहुंचे। सोमवार सुबह बाड़ी के पूर्व विधायक गिर्राज मलिंगा भी पहुंचे और उन्होंने आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की। कलेक्टर ने 10 दिन में खुलासा करने का दिया भरोसा 11 घंटे चले प्रदर्शन के बाद धौलपुर जिला कलेक्टर श्रीनिधी बीटी और एसपी विकास सांगवान सोमवार सुबह करीब 10 बजे बाड़ी पहुंचे। एडिशनल एसपी कार्यालय में उन्होंने ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की। कलेक्टर श्रीनिधि बीटी ने बताया- परिजनों ने परिवार के सदस्य को संविदा पर नौकरी, मुआवजा राशि और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर, मृतक की बहन की शादी में सहायता राशि दिलाए जाने और घटनाक्रम का खुलासा किए जाने की मांग की। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि घटनाक्रम का 10 दिन में खुलासा कर दिया जाएगा। साथ ही नियमानुसार विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता राशि दी जाएगी। ग्रामीण और प्रशासन के बीच हुई वार्ता में सहमति के बाद शव को बाड़ी अस्पताल की मॉर्च्युरी लाया गया। यहां मेडिकल बोर्ड से पोस्टमाॅर्टम करवाया गया।

पानी के लिए 74 गांवों में 20-साल तक रहा विवाद:ग्रामीणों की बीच पहुंची भास्कर टीम; लोग बोले- राजनीति ने लड़ाई बड़ी बनाई, नेता भड़काते हैं

राजस्थान की 5 नदियों से मिलकर बना पांचना बांध, जिसके पानी के लिए 74 गांवों के बीच 20 साल लंबा संघर्ष चला। जब भी पानी छोड़ने की बारी आती 39 गांव उसके हक में तो 35 गांव विरोध में खड़े हो जाते। एक दूसरे के खिलाफ धरने पर बैठ जाते, लेकिन अब ये ‘जंग’ खत्म हो गई है। हाल ही में बांध के सभी 7 गेट खुलने के बाद सबसे पहले दैनिक भास्कर टीम उस जगह पहुंची, जहां से ये विवाद शुरू हुआ था। आमने-सामने होने वाले दोनों पक्ष के किसानों से बात कर जाना कैसे एक बांध से पानी की जंग इतनी लंबी चली? कैसे पानी को तरसते हजारों किसान कर्ज में डूब गए? पढ़िए ये ग्राउंड रिपोर्ट… ‘जीने लायक पानी को लेकर थी जंग’ करौली जिले के गुड़ला गांव में बने पांचना बांध को मिट्टी का सबसे बड़ा डैम कहा जाता है। डैम से निकलते पानी की तेज आवाज दूर तक सुनाई दे रही थी। वर्षों बाद बहती इस धारा को देखने के लिए सैकड़ों लोग भी बांध के आसपास पहुंच रहे थे। यहीं हमारी मुलाकात डैम के सबसे करीब गांव गुड़ला के निवासी और गुड़ला संघर्ष समिति के सदस्य भानूप्रताप से हुई। उन्होंने बताया- 35 गांव पांचना बांध के कमांड एरिया में आते हैं। हमारे 39 गांव बांध के बेहद नजदीक हैं। हमने बांध के पास होकर भी पानी की कमी उतनी ही झेली है, जितनी कमांड एरिया के किसानों ने झेली है। हमारे यहां ऐसे किसान हैं जिनकी तीन-तीन पीढ़ियां पानी के अभाव में कर्ज में डूब गईं। पानी का मारा इंसान क्या नहीं करता। हमने कभी किसी से लड़ाई नहीं चाही। हमारी मांग सिर्फ इतनी थी कि पहले हमें भी जीने लायक पानी मिल जाए। भानूप्रताप बताते हैं कि वर्षों तक सरकारों ने चंबल का पानी डैम तक लाने और लिफ्ट परियोजना पूरी करने के वादे किए। 39 गांवों को पानी देने की बात हुई। लेकिन लाभ सिर्फ 13 गांवों तक सीमित रह गया। डैम के आसपास के गांवों को पानी की सप्लाई के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर नहर बनाई गई थी। वह नहर ऐसी थी कि उससे बड़ी तो नाली होती है। खेतों तक पानी ही नहीं पहुंचता था। अब सरकार ने कहा है कि सितंबर तक लिफ्ट परियोजना का वर्क ऑर्डर जारी कर देंगे। अगर अगले 18 महीने में लिफ्ट परियोजना पूरी हो गई तो किसी को पानी देने से हमें कोई आपत्ति नहीं होगी। ग्रामीण बोले- नेता आते हैं, लोगों को भड़काते हैं बांध से कुछ दूरी पर स्थित गुड़ला गांव में एक सामाजिक कार्यक्रम चल रहा था। कई लोग चौपाल में बैठे थे। हमने पांचना विवाद की बात छेड़ी। बुजुर्ग भरत सिंह ने बताया- पानी की इस जंग को गुर्जर वर्सेस मीणा का रूप दिया गया। क्योंकि कमांड एरिया में आने वाले 35 गांव मीणा बहुल हैं। बांध के नजदीक 39 गांव हम गुर्जरों के हैं। हमारी लड़ाई कभी मीणा किसानों से नहीं थी। हम तो सिर्फ इतना चाहते थे कि सरकार हमारी लिफ्ट योजना पूरी कर दे। भाईचारा पहले भी था, आज भी है। राजनीति ने विवाद को बड़ा बना दिया। नेता आते हैं, लोगों को भड़काते हैं और फिर वही समझौता कराने भी पहुंच जाते हैं। भरत सिंह बताते हैं कि वर्षों तक बांध का पानी रोके जाने से इलाके में भूजल स्तर जरूर बढ़ा और कई कुओं में पानी आया। लेकिन इसका दूसरा पक्ष ये भी था कि बांध बनने के कारण कई गांवों के किसानों की जमीन चली गई। हजारों लोग विस्थापित हुए। फिर भी उन्हें सिंचाई का पूरा लाभ नहीं मिला। अगर चंबल का पानी पांचना डैम तक आ जाए तो नहर भी चले, नदी भी बहे और दोनों पक्षों के किसानों को फायदा मिले। तब विवाद की जरूरत ही नहीं रहेगी। किसान बोले- धरना मजबूरी थी गुड़ला गांव के सूबेदार श्याम सिंह बताते हैं कि आंदोलन किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का हिस्सा नहीं था। वे कहते हैं- दो साल से बारिश अच्छी हुई है, इसलिए हालात कुछ संभले हैं। इससे पहले डैम में पानी का स्तर लगातार गिर रहा था। हमारी बात कोई सुन नहीं रहा था, इसलिए धरना देना पड़ा। अब सरकार ने लिफ्ट परियोजना का भरोसा दिया है। अगर यह सही तरीके से लागू हो जाती है तो कमांड एरिया के किसानों तक पानी छोड़े जाने पर हमें कोई आपत्ति नहीं होगी। हां, अगर भविष्य में कम बारिश हुई और बांध में पानी की कम आवक हुई तो फिर सभी को पानी चाहिए होगा। इसलिए स्थायी समाधान यही है कि चंबल का पानी पांचना बांध तक लाया जाए। इसके लिए सर्वे शुरू हो गया है, ये एक अच्छा संकेत है। हमने सिर्फ आंदोलन देखे हैं- युवा किसान गांव के युवा पिंटू गुर्जर बताते हैं- हमने बचपन से गांव में पानी को लेकर संघर्ष और आंदोलन ही देखे हैं। बुजुर्ग बताते थे कि पहले नहर बनी थी। लेकिन उससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता था। पानी की कमी से खेती कमजोर होती चली गई। रोजगार के लिए युवाओं को बाहर जाना पड़ा। अब अगर सच में पानी मिलेगा तो गांव भी बदलेगा। एक अन्य किसान जितेंद्र सिंह ने बताया- हमारा पुराना गांव इस बांध के डूब क्षेत्र में आ गया था। इसलिए जमीन छोड़नी पड़ी… पूरा गांव उजड़ गया और हम दूसरी जगह बस गए। बचपन से सुनते आए थे कि यह बांध किसानों के लिए बना है, लेकिन हमें उसका लाभ नहीं मिला। हम तो कुएं के पास रहकर भी प्यासे रहे। सरकारी सौगात के नाम पर मिली नाली जैसी नहर गुड़ला गांव में किसानों से बात कर हम उस लिफ्ट नहर पर पहुंचे, जिसे बांध क्षेत्र के किसानों के लिए बनाया गया था। कागजों में यह योजना पानी पहुंचाने का समाधान थी, लेकिन जमीन पर तस्वीर बिल्कुल अलग मिली। कई जगहों पर नहर गांव के बीच से गुजरती है। कई जगह नहर का लेवल खेतों से भी नीचे है। यही कारण है कि नहर से पानी का फ्लो नहीं बन पाता। किसानों ने बताया- हमने शुरुआत से ही इसकी शिकायत की, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। युवा किसान सुदामा गुर्जर नहर की ओर इशारा करते हुए कहते हैं- इसे नहर मत कहिए, यह तो नाली जैसी है। सिर्फ यह दिखाने के लिए बना दी गई कि सरकार ने काम कर दिया। हमारे खेत तक इसका कोई फायदा नहीं पहुंचता। एक-दो बार पानी छोड़ा गया, लेकिन खेती के लिए यह कभी उपयोगी नहीं रही। अब खुद सरकार ने इसे गलत मानते हुए रिजेक्ट कर दिया है। कमांड एरिया में 20 साल बाद लौटी उम्मीद, किसान बोले- अब खेती कर सकेंगे कमांड एरिया में आने वाले 35 गांव सवाई माधोपुर जिले के हैं। यहां के हजारों किसानों को भी सिंचाई के लिए पानी का रास्ता अब साफ हो गया है। इन गांवों से जुड़े करीब 11 अन्य गांवों को भी इस पानी का फायदा मिलेगा। करीब दो दशक से कमांड क्षेत्र के किसान नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे थे। पानी नहीं मिलने के कारण हजारों बीघा जमीन पर खेती प्रभावित होती रही। कई किसान कर्ज में डूब गए। खंडीप गांव निवासी किसान बृजभूषण मीणा कहते हैं- करीब 20 साल से यह मुद्दा चला आ रहा था। अब नहरों में पानी आने से बड़ी राहत मिलेगी। कमांड एरिया में खेती बढ़ेगी, पैदावार अच्छी होगी और किसानों को पलायन नहीं करना पड़ेगा। युवा भी खेती की ओर लौटेंगे। इस इलाके के किसानों को पानी की कमी के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जमीन बंजर हो गई थी। कहां से शुरू हुआ पांचना जल विवाद? पांचना जल विवाद की शुरुआत 2006 में हुई। हालांकि इसकी पृष्ठभूमि पहले ही बन चुकी थी। 1987 से पांचना बांध की नहरों में नियमित पानी छोड़ा जा रहा था। 2006 में बांध के आसपास के 39 गांवों ने विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि नहरों में लगातार पानी छोड़ने से बांध का जलस्तर घटेगा और उनके कुएं, ट्यूबवेल व पेयजल स्रोत प्रभावित होंगे। उन्होंने पहले गुड़ला लिफ्ट सिंचाई योजना से आसपास के गांवों को पानी देने की मांग की। वहीं, कमांड एरिया के 35 गांवों के किसानों का कहना था कि बांध सिंचाई के लिए बना है, इसलिए नहरों में नियमित पानी छोड़ना उनका अधिकार है। यही विवाद आगे चलकर करीब 20 साल लंबे सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी संघर्ष में बदल गया। कल पार्ट-2 में पढ़िए- कैसे पानी की जंग ने छेड़ा आंदोलन, अदालत और राजनीति के 20 साल क्या होगा भविष्य

कार पर लटककर ग्रामीण ने बदमाश को पकड़वाया:आरोपी की गाड़ी के आगे बाइक लगाई; टक्कर मार भागने लगा तो स्टेयरिंग मोड़कर कार रोकी

अलवर की सदर थाना पुलिस ने सेल्समैन पर फायरिंग के मामले में अवैध हथियार सप्लाई करने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कार रोकी और आरोपी को नीचे उतरने के लिए कहा, लेकिन आरोपी ने गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी और भागने लगा। इसी दौरान सामने से आए एक ग्रामीण ने अपनी बाइक आरोपी की कार के आगे लगा दी। बदमाश ने बाइक को टक्कर मारकर भागने की कोशिश की तो ग्रामीण कार का दरवाजा पकड़कर लटक गया और करीब 100 मीटर घिसटता रहा। इसके बाद ग्रामीण ने स्टेयरिंग मोड़ दी, जिसके कारण कार का बैलेंस बिगड़ा और आरोपी ने ब्रेक लगा दिए। इसी दौरान पुलिस ने उसे दबोच लिया। मामला चिकानी गांव के पास रविवार का है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है। पुलिस को देखकर दौड़ाई कार थानाधिकारी विजेंद्र सिंह ने बताया- 11 जुलाई को बुर्जा बाइपास स्थित नायरा पेट्रोल पंप के सेल्समैन सचिन पर जगत सिंह गुर्जर निवासी बलदेपुरा-बहड़िया, कठूमर ने फायरिंग की थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर एक देशी पिस्टल और आठ कारतूस बरामद किए थे। पूछताछ में जगत सिंह ने बताया कि हथियार डीग जिले के पेंडका निवासी जितेंद्र उर्फ जीतू उर्फ मनोज ने उपलब्ध कराया था। इसके बाद से ही पुलिस टीम उसकी तलाश में थी। कुछ पुलिसकर्मी सादा कपड़ों में उसे ढूंढ रहे थे। रविवार को चिकानी गांव के पास पुलिसकर्मियों ने मनोज की कार रोक ली और उसे नीचे उतरने के लिए कहा, लेकिन उसने कार के दरवाजे लॉक कर दिए और तेज रफ्तार में भागने लगा। इसी दौरान एक ग्रामीण ने जान जोखिम में डालकर बदमाश की कार रोकी और आरोपी को पकड़वाया। आरोपी के खिलाफ 24 मामले दर्ज थानाधिकारी विजेंद्र सिंह ने बताया- बृजनगर थाने का हिस्ट्रीशीटर जितेंद्र लूट, डकैती, आर्म्स एक्ट, चोरी और मारपीट समेत करीब 24 आपराधिक मामलों में आरोपी है। सेल्समैन पर फायरिंग करने वाले जगत सिंह और जितेंद्र के बीच पुरानी दोस्ती और पैसों का लेनदेन था। जगत ने अपनी प्रेमिका को फोन और मैसेज कर परेशान करने वाले युवक को सबक सिखाने की बात कही थी। इस पर जितेंद्र ने उसे अवैध हथियार और कारतूस मुहैया कराए थे। ग्रामीण बोला- मेरी बाइक को टक्कर मारी तो मुझे गुस्सा आ गया हथियार सप्लायर को पकड़वाने वाले ग्रामीण ने बताया- कुछ पुलिसवाले कार को रुकवाकर आरोपी से कह रहे थे कि बाहर आ जा, लेकिन आरोपी बाहर नहीं आया और कार भगाने लगा। मुझे लगा कि यह बदमाश है और पुलिस से भाग रहा है, तो मैंने कार के आगे मेरी बाइक लगा दी। ग्रामीण ने बताया- आरोपी ने मेरी बाइक को टक्कर मार दी। मेरी बाइक में नुकसान हो गया तो मुझे गुस्सा आ गया। मैंने कार का दरवाजा पकड़ लिया। मैं करीब 100 मीटर तक कार से लटका रहा ौर फिर कार की स्टेयरिंग पकड़कर मोड़ दी, जिसके बाद आरोपी ने गाड़ी के ब्रेक लगा दिए। इसी दौरान पुलिसवालों ने उसे पकड़ लिया। — ये खबर भी पढ़ें… प्रेमिका को फोन करने पर युवक को गोली मारी; VIDEO:चोरी की बाइक लेकर पहुंचा; पेट्रोल भरवाया और सेल्समैन पर कर दिया फायर अलवर में बाइक में पेट्रोल भरवाने के बाद नकाबपोश युवक ने सेल्समैन को गोली मार दी। सेल्समैन ने पेट्रोल भरने के बाद 898 रुपए मांगे थे। युवक ने रुपए देने से मना कर दिया। सेल्समैन ने दोबारा रुपए मांगे तो जेब से कट्टा निकाला और गोली मारकर भाग गया। पुलिस ने नाकाबंदी कर एक घंटे में युवक को गिरफ्तार कर लिया। (पूरी खबर पढ़ें)

राजस्थान में अटकी कर्मचारियों की एक पॉलिसी?:सरकार के सामने क्या परेशानी, किस विभाग पर पड़ रहा सबसे ज्यादा असर, जानें- एक्सपर्ट क्या बोले

राजस्थान में नई ट्रांसफर पॉलिसी बनाने का वादा अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। सरकार बनने के 5 महीने बाद ही मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे। तत्कालीन मुख्य सचिव ने तबादलों के कुछ नियम भी तय कर लिए थे। लेकिन दो साल बीतने के बाद भी किसी विभाग ने रिपोर्ट नहीं भेजी। न विभागों के जिम्मेदार मंत्रियों ने रुचि दिखाई और न ही अधिकारियों ने। इस बीच हर साल तबादले होते रहे। हाल ही में 10 जुलाई तक हुए तबादलों को लेकर खूब विवाद हुए। पिछले 8-9 साल से तबादलों की मांग कर रहे ग्रेड थर्ड टीचर फिर से वंचित रह गए। विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए ‘तबादला उद्योग’ चलाने का आरोप लगाया है। आखिर प्रदेश में ट्रांसफर पॉलिसी क्यों नहीं बन पा रही है? मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए पूरी रिपोर्ट.. CM के निर्देश पर विभागों को भेजी गई थी पॉलिसी की गाइडलाइन मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्कालीन मुख्य सचिव सुधांश पंत ने 9 अप्रैल 2024 को प्रशासनिक सुधार विभाग के जरिए सभी विभागों को ट्रांसफर पॉलिसी तैयार करने के दिशा-निर्देश जारी किए थे। विभागों से कहा गया था कि कर्मचारी संगठनों से चर्चा कर 30 मई 2024 तक अपनी ट्रांसफर पॉलिसी का मसौदा (ड्राफ्ट) प्रशासनिक सुधार विभाग को भेजें, ताकि जल्द से जल्द ट्रांसफर पॉलिसी का ड्राफ्ट फाइनल हो सके। लेकिन विभागों के मंत्री तथा विभागाध्यक्षों ने सरकार के दिशा-निर्देशों पर कोई रुचि नहीं दिखाई। एक भी विभाग ने तय समय बीतने के 2 साल तक तबादलों का मसौदा तैयार करके नहीं भेजा। विभाग ने तय किए थे तबादलों के ये महत्वपूर्ण बिंदु एक स्थान पर 3 साल रहना होगा बीजेपी शासित यूपी-एमपी में पॉलिसी, राजस्थान में क्यों नहीं? घोषणा पत्र के वादों के अनुसार बीजेपी शासित यूपी, एमपी और हरियाणा में पूर्ण पारदर्शी पॉलिसी बनकर लागू भी हो चुकी है। लेकिन राजस्थान में अब तक इस पर कोई प्रगति नहीं है। पॉलिसी मामलों के एक्सपर्ट का मानना है कि राज्य सरकार ने निर्देशों की अवहेलना करने वाले विभागाध्यक्षों पर एक्शन नहीं लिया गया। यही वजह रही ट्रांसफर पॉलिसी संबंधी निर्देशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। पॉलिसी बनने से पहले क्या-क्या औपचारिकताएं होती हैं? जिस तरह राज्य का बजट तैयार करने से पहले हर राज्य में सरकार विभिन्न संगठनों से सुझाव लेती रही है। उसी तरह ट्रांसफर पॉलिसी बनाने के लिए सभी विभागों और उनसे जुड़े कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाते हैं। सुझावों के आधार पर ही प्रशासनिक सुधार विभाग मसौदा यानी ड्राफ्ट तैयार करता है। मुख्य सचिव स्तर पर ड्राफ्ट फाइनल होने के बाद उसे मुख्यमंत्री के पास फाइनल अप्रूवल के लिए भेजा जाता है। मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलने के बाद पॉलिसी के ड्राफ्ट को कैबिनेट की बैठक में रखा जाता है। मंत्री उस पर चर्चा करते हैं। अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री का होता है। मुख्यमंत्री की सहमति और फिर कैबिनेट की मंजूरी के बाद पॉलिसी लागू हो जाती है। यदि कैबिनेट में अनुमोदन नहीं होता है तो पॉलिसी अमल में नहीं आ पाती है। ट्रांसफर पॉलिसी बनने के क्या हैं फायदे? विभिन्न विभागों में तबादलों की प्रक्रिया एक समान, पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुरूप होगी। कर्मचारियों के तबादलों से जुड़े विवादों और अनावश्यक हस्तक्षेप की संभावनाएं समाप्त हो जाती हैं। तबादलों के लिए विभागों के मंत्रियों और अफसरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर मंत्री अविनाश गहलोत से बातचीत… सवाल : ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर विभागों ने रुचि नहीं दिखाई, सीएम के निर्देशों की अवहेलना क्यों? जवाब : मुख्यमंत्री का जैसा आदेश है, उसी भावना से काम कर रहे हैं। तबादले जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं की भावनाओं के अनुरूप होते हैं। प्रशासनिक दृष्टि से तबादले होते हैं। प्रदेश में साल-डेढ़ साल और दो साल में तबादले होते हैं। ये आवश्यकता और समय के अनुसार होते हैं। सवाल : आप सरकार में मंत्री हैं, क्या आप भी चाहते हैं कि ट्रांसफर पॉलिसी बने? जवाब : आगे हमारा प्रयास रहेगा कि पॉलिसी बने। पॉलिसी के अनुसार ही तबादले हों। ताकि जिस तरीके से ट्रांसफर के बारे में लोगों की गलत धारणा बनती है, उस पर विराम लगे। मुख्यमंत्री की जैसी अपेक्षा होगी, हम उसी मंशा से काम करेंगे। सवाल : बीजेपी शासित राज्यों में ट्रांसफर पॉलिसी बन चुकी है, राजस्थान में क्यों नहीं? जवाब : हम अलग-अलग राज्यों की पॉलिसी की स्टडी कर रहे हैं। उसके बाद नई ट्रांसफर पालिसी लागू करेंगे। एक्सपर्ट क्या बोले- कई सरकारें बदली, नहीं बन पाई ट्रांसफर पॉलिसी वरिष्ठ पत्रकार महेश चंद्र शर्मा का कहना है कि प्रदेश में हर सरकार पारदर्शिता के लिए ट्रांसफर पॉलिसी बनाने की बात कहती है। पिछली सरकार के समय भी ट्रांसफर पॉलिसी बनाने की बात कही गई थी, लेकिन सरकार चली गई। पॉलिसी नहीं बन पाई। इस सरकार ने भी आधा कार्यकाल पूरा कर लिया है, लेकिन अभी तक पॉलिसी नहीं बन पाई है। ऐसा लगता है कि जनप्रतिनिधि नहीं चाहते हैं कि तबादलों में किसी तरह का दखल हो। यही वजह है कि ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर सिर्फ बातें ही होती हैं। पॉलिसी नहीं बनने का असर ग्रेड थर्ड टीचर पर, बैन नहीं हटा ट्रांसफर पॉलिसी नहीं बनने का सीधा असर ग्रेड थर्ड टीचर्स पर पड़ रहा है। पिछली गहलोत सरकार हो या फिर वर्तमान सरकार ग्रेड थर्ड शिक्षकों के तबादलों से बैन नहीं हटाया। पिछली गहलोत सरकार में शिक्षकों ने बैन हटाने के लिए प्रदर्शन भी किए थे। लेकिन शिक्षकों को सिर्फ आश्वासन ही मिला। प्रदेश में करीब एक लाख से ज्यादा ग्रेड थर्ड टीचर हैं। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि सरकार ने ट्रांसफर पॉलिसी के जो निर्देश जारी किए थे, उनके संबंध में हमसे किसी ने चर्चा नहीं की। उनका संगठन चाहता है कि ट्रांसफर पॉलिसी बने। लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देशों की पालना नहीं की जा रही है।

रेगिस्तान में काक नदी के किनारे था मूमल का महल:पाकिस्तान के राजा और जैसलमेर की राजकुमारी का प्रेम; 4 एपिसोड में मूमल-महेंद्र की कहानी

जैसलमेर के लौद्रवा की राजकुमारी मूमल और अमरकोट (वर्तमान पाकिस्तान) के राणा महेंद्र की प्रेम कहानी सदियों पुरानी है। इस कहानी को जानने के लिए दैनिक भास्कर जैसलमेर से 14 किलोमीटर दूर लौद्रवा गांव पहुंचा, जहां मूमल के महल के खंडहर आज भी मौजूद हैं। लौद्रवा गांव में जब चौदहवीं शताब्दी के राजपूताने में घटी इस कहानी के निशान मिले तो थार की रेतीली हवाएं किसी गहरे राज की तरह दिखने लगीं। धोरों में गूंजती मूमल-महेंद्र की इस प्रेम कहानी के विरह और बलिदान को पीढ़ियां याद करती आई हैं। जानिए इस जोड़े की अमर प्रेम कहानी- लौद्रवा की राजकुमारी मूमल इतनी खूबसूरत थी कि उसकी एक झलक पाने के लिए लोग तरसते थे। मूमल जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही दिमागी पहेलियों की शौकीन भी थी। उसने अपने महल को रहस्यों से भर दिया था। मूमल के इस रहस्यमयी महल को दुनिया काक महल के नाम से जानती थी। मूमल चाहती थी कि इस महल की सीढ़ियां वही चढ़े जिसकी आंखों में मूमल के सौंदर्य से ज्यादा उसकी पहेलियों को सुलझाने का जुनून हो। राजकुमारी ने यह काक महल अपनी सहेलियों और बहनों के साथ मिलकर काक नदी के किनारे बनवाया था। काक महल का तिलिस्म लौद्रवा के इस महल की ख्याति दूर-दूर तक फैली थी। अलग-अलग राज्यों से राजकुमार मूमल का हाथ थामने की चाह में वहां आते, लेकिन महल के द्वार पर ही हार मान लेते। मूमल ने महल के चारों ओर दृष्टि-भ्रम का जाल बिछा रखा था। महल के सामने का आंगन नीले चमकदार संगमरमर से बना था, जो चिलचिलाती धूप में ऐसा दिखता मानो गहरा अथाह पानी लहरा रहा हो। कई शूरवीर यह सोचकर लौट जाते कि वे डूब जाएंगे। कहीं सूखी जमीन पर पानी का भ्रम था, तो कहीं फूलों की सेज के नीचे गहरा कुआं। झरोखे पर बैठी मूमल की नजरें दूर तक जाकर वापस लौट आतीं। अक्सर वह मन ही मन मुस्कुराती और खुद से बातें करती- काक महल को पार करने के लिए साहस नहीं, समझ और दिल की आंखें चाहिए। एक दिन… राजकुमारी मूमल उस दिन झरोखे पर खड़ी थी। आंखों में बुद्धिमानी की चमक लिए वह दूर क्षितिज पर आते हुए राजकुमार के काफिले को देख रही थी – एक और मुसाफिर,जो सुंदरता के मोह में बुद्धि को भूल बैठा है, मूमल मन ही मन मुस्कुरायी, उसे यकीन था कि बाकी राजकुमारों की तरह यह भी असफल होने वाला है। हुकुम, ये मारवाड़ के राजकुमार हैं। सुना है बड़े पराक्रमी हैं, मूमल के मन को पढ़ते हुए दासी ने पूरे विश्वास के साथ कहा। पराक्रम तलवारों के लिए होता है,सखी। काक महल को पार करने के लिए साहस नहीं समझ चाहिए, कहते हुए मूमल की नजर वापस उस काफिले की ओर घूम गई। महल के सामने एक राजकुमार अपने घोड़े से उतरा। उसके सामने एक पारदर्शी सा दिखने वाला आंगन था। एक मामूली महल मेरा रास्ता क्या रोकेगा! राजकुमार की भारी आवाज में आत्मविश्वास की गूंज थी। जैसे ही राजकुमार ने कदम बढ़ाया, उसे सामने गहरा पानी दिखाई दिया। इसे देख वह घबराकर पीछे हट गया। वास्तव में वहां पानी नहीं, नीले संगमरमर का ऐसा फर्श था जो पानी का भ्रम पैदा कर रहा था। राजकुमार महल के गलियारे में फंस गया। चारों तरफ शीशे लगे थे और उसे अपनी ही परछाइयां दुश्मन की तरह दिखाई दे रही थीं। उसने अपनी तलवार निकाली और भ्रम में हवा में हाथ मारने लगा। जो दिखता है वो सत्य नहीं और जो सत्य है वो इन आंखों को स्वीकार नहीं। राजकुमार, क्या आप परछाइयों से युद्ध करेंगे? मूमल की आवाज महल में गूंज उठी। लड़ते-लड़ते शाम हो चुकी थी। भूल भुलैया और पहेलियों से जूझते हुए राजकुमार पसीने से लथपथ होकर घुटनों पर बैठ गया। वह हार मान चुका था। आखिर में दासी ने राजकुमार की हार की सूचना मूमल को दी- हुकुम, ये भी असफल रहे। क्या कोई कभी इस तिलिस्म को तोड़ पाएगा? वह परेशान हो उठी। इंतजार उसी का है, जिसकी नजर मेरी खूबसूरती से ज्यादा मेरी पहेलियों की गहराई को देख सके। जिस दिन कोई बिना डरे इस काक नदी को पार करेगा, लौद्रवा का यह महल उसका स्वागत करेगा, मूमल ने चांद की ओर देखा,जैसे अपने राजकुमार के आने की मन्नत मांग रही हो। ….और फिर शुरू हुआ अमरकोट के राणा का इंतजार…एक ऐसी प्रेम कहानी का आगाज जो इतिहास के पन्नों में अमर होने वाली थी। क्या कोई राजकुमार इस तिलिस्म को पार कर मूमल तक पहुंचने में कामयाब हो सकेगा? जानिए कल के एपिसोड में- (कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किया गया है। सोर्स : राजस्थानी साहित्य, लोक कथाएं व स्थानीय लोगों से बातचीत ) … राजस्थानी प्रेम कहानी की ये खबरें भी पढ़िए… 1. प्रेम कहानी जिसे शब्दों ने लिखा, रंगों ने जिंदा रखा:’बणी-ठणी’ क्या सिर्फ एक कल्पना है या वाकई कोई महिला थी? पार्ट- 1 बणी- ठणी कौन थी? ऐसा क्या था उस तस्वीर में जो राजस्थान की धरोहर बनी, जिसने किशनगढ़ शैली को दुनिया भर के कला जगत में पहचान दिलाई। जानते हैं राजा सावंत सिंह और बणी- ठणी की कहानी, जिनके प्रेम और भक्ति को कलाकार निहाल चंद ने अमर कर दिया। पूरा पढ़ने के लिए यहां CLICK करिए 2. खुद को कृष्ण मानते थे राजा, ‘बणी-ठणी’ को राधा:विदेशियों ने माना था भारत की मोनालिसा, ऐसा प्रेम जिसने किशनगढ़ को वृंदावन बना दिया; पार्ट–2 राजा सावंत सिंह के जीवन को भक्ति और कविता पूर्णता प्रदान करते थे, लेकिन उस दिन बणी-ठणी को सुनने के बाद उनकी साधना में अध्यात्म का एक नया और गहरा आयाम जुड़ गया था। धीरे- धीरे राजा और बणी- ठणी का रिश्ता जैसे राधा और कृष्ण के आध्यात्मिक प्रेम का रूपक बन गया था। पूरा पढ़ने के लिए यहां CLICK करिए 3- राजा ने किस महिला की बनवाई रहस्यमयी पेंटिंग:पहचान पर आज भी बहस; प्यार और सुंदरता का अद्भुत संगम, पार्ट-3 राजा सावंत सिंह और बणी-ठणी की कहानी में दोनों के श्रीकृष्ण और अध्यात्म की ओर झुकाव की विशेष भूमिका थी, जिसके चलते राजा ने बणी-ठणी में राधा की छवि को देखा था। एक शाम राजा सावंत सिंह ने निहाल चंद को बुलाया और बोले – मुझे खास चित्र बनाना है निहाल चंद। पूरा पढ़ने के लिए यहां CLICK करिए 4. कई दिनों बाद राजा दरबार पहुंचे तो क्या हुआ?:उन्होंने राज पाट क्यों छोड़ दिया? बणी-ठणी की अनसुनी कहानी का अंतिम अध्याय -एपिसोड 4 अब राजा सावंत सिंह का अधिकांश समय संगीत और भक्ति के आनंद में बीतने लगा था। जिसके चलते वे राजकाज, दरबार और रियासत को कम समय देने लगे। इसको लेकर दरबार में चिंता गहराने लगी। मंत्री बेचैन थे, क्योंकि राजा अब एक शासक कम, भक्त अधिक हो गए थे। पूरा पढ़ने के लिए यहां CLICK करिए

पंजाब में पहली बार ब्लूटूथ से नकल की पूरी कहानी:परीक्षार्थी ने पेन से पेपर स्कैन कर हरियाणा भेजा; राजस्थान के सॉल्वर ने सॉल्व किया

पंजाब हेल्थ विभाग में रविवार (19 जुलाई) को हुई फार्मेसी अफसर परीक्षा के दौरान ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल कराई गई। बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के लिए कराए 454 फार्मेसी अफसरों के एग्जाम के लिए फरीदकोट, कोटकपूरा व फिरोजपुर में सेंटर बनाए गए थे। फरीदकोट रेंज, फिरोजपुर रेंज और काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने संयुक्त कार्रवाई कर 7 मुख्य आरोपियों और परीक्षा में शामिल 28 उम्मीदवारों को हिरासत में लिया है। आरोपियों के कब्जे से 27 अत्याधुनिक बैटरी संचालित वायरलेस माइक्रो डिवाइस, पेन कैमरे और अन्य उपकरण बरामद किए हैं। जांच में सामने आया है कि एक परीक्षार्थी ने पेन से प्रश्न पत्र स्कैन कर हरियाणा में भेजा। वहां से पेपर राजस्थान के पेपर सॉल्वर को भेजा गया। इसके बाद फरीदकोट में बनाए गए कंट्रोल रूम से ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए यह नकल कराई गई। इस गिरोह ने परीक्षा पास करवाने के नाम पर 3.5 लाख रुपए से लेकर 13 लाख रुपए तक की रकम तय की थी। जांच में पता चला है कि गिरोह ने नकल कराने के लिए किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तरह पूरी लॉजिस्टिक्स और तकनीकी व्यवस्था तैयार की थी। पंजाब में हाइटेक नकल का यह इस तरह का पहला मामला है। गिरफ्तार किए 7 मुख्य आरोपियों में से 3 राजस्थान और 2 हरियाणा के रहने वाले हैं। बाबा फरीद पब्लिक स्कूल में फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा खत्म होने के बाद परीक्षार्थी करीब ढाई घंटे तक बाहर नहीं आए थे। इससे बाहर इंतजार कर रहे अभिभावक भड़क गए। गुस्साए परिजनों ने स्कूल के गेट पर हंगामा किया और गेट तोड़ने की भी कोशिश की। कैसे करवाई नकल, सिलसिलेवार जानिए… कैसे पकड़े गए, सिलसिलेवार जानिए… स्टूडेंट्स ने क्या कहा, जानिए… क्रिकेट अकादमी के परिचित ने नेटवर्क से जोड़ा: हरियाणा के झज्जर के रहने वाले परीक्षार्थी का कहना है कि मुझे एक क्रिकेट अकादमी के परिचित के जरिए इस नेटवर्क से जोड़ा गया था। परीक्षा से दो दिन पहले मुझे जींद रेलवे स्टेशन से ब्लूटूथ डिवाइस लेने के निर्देश दिए गए थे। डील के मुताबिक, नौकरी लगने के बाद 8 लाख रुपए दिए जाने तय हुए थे। हालांकि, परीक्षा के दौरान ही मेरा ईयरपीस गिर गया, जिसकी वजह से मैं उत्तर नहीं सुन सका। ईयरपीस से 20 सवालों के जवाब सुनाए गए
पंजाब के फाजिल्का के रहने वाले परीक्षार्थी का कहना है कि मेरी मुलाकात एक पूर्व सहपाठी के जरिए इन दलालों से हुई थी। सरकारी नौकरी में चयन के बदले मुझसे 13 लाख रुपए मांगे गए और गारंटी/सुरक्षा के तौर पर 2 कोरे चेक जमा करवा लिए गए। परीक्षा के दिन सुबह मुझे एक होटल में बुलाकर ब्लूटूथ डिवाइस दी गई। परीक्षा शुरू होने के लगभग 1 घंटे बाद मुझे ईयरपीस के जरिए करीब 20 सवालों के जवाब सुनाए गए। निजी कॉलेज संचालक ने नौकरी का भरोसा दिया
तरनतारन और सिरसा के 2 परीक्षार्थियों का कहना है कि फाजिल्का के एक निजी कॉलेज संचालक ने सरकारी नौकरी पक्की कराने का भरोसा दिया था। उसने चयन के एवज में लाखों रुपए की मांग की और हमसे हस्ताक्षरित (साइन किए हुए) और कोरे चेक ऐंठ लिए। पुलिस ने इस मामले में क्या कहा, जानिए…

अलवर-भरतपुर में तेज बारिश, धौलपुर में सड़कों पर पानी भरा:डूंगरपुर में बरसात के लिए महिलाओं ने पुरुष वेश में निकाला जुलूस; आज 24 जिलों में अलर्ट

भरतपुर, धौलपुर और कोटपूतली-बहरोड़ जिले में मानसून के लंबे ब्रेक के बाद सोमवार सुबह तेज बारिश हुई। धौलपुर में बाजार की सड़कों पर पानी भर गया। अलवर में भी दोपहर में बरसात हुई। मौसम विभाग ने आज 24 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। जो अगले तीन दिन तक जारी रहेगा। इस दौरान तेज हवा के साथ बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की गई है। इससे पहले रविवार शाम जयपुर, अलवर और दौसा जिले में बारिश हुई। माउंट आबू में रविवार को 2.5 एमएम बरसात हुई। डूंगरपुर जिले के गांवों में रविवार को अच्छी बारिश की कामना को लेकर अनूठी परंपरा ‘धाड़’ निभाई गई। इसके तहत महिलाओं ने पुरुषों का वेश धारण कर गांव की गलियों में जुलूस निकाला और इंद्रदेव से अच्छी वर्षा की कामना की। पिछले 24 घंटे में झुंझुनूं, सीकर, अलवर, कोटपूतली-बहरोड़, करौली, बूंदी और अजमेर में बादलों की आवाजाही रही। इधर, बीकानेर संभाग के तीन जिलों में रविवार को पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार रहा। अब तक बारिश की स्थिति राजस्थान में मौसम की तस्वीर ये जिले सबसे गर्म रहे आगे क्या… प्रदेश में मौसम से जुड़ी अन्य PHOTOS… … मौसम के पल-पल के अपडेट के लिए ब्लॉग पढ़िए…

मॉडिफाइड साइलेंसर/हॉर्न वाली बाइक्स होगी सीज:ऑटो का रजिस्ट्रेशन चेक होगा,शहर में पार्किंग व्यवस्था में भी हो सकता है बदलाव

सीकर में अब बाइक्स पर मोडिफाइड साइलेंसर या हॉर्न लगाने पर बाइक सीज होगी। पुलिस इसके लिए अभियान चलाएगी। इतना ही नहीं शहर में चलने वाले ऑटो का रजिस्ट्रेशन भी चेक होगा। इसके साथ ही शहर में कई जगह पार्किंग व्यवस्था में बदलाव हो सकता है। यह बात सीकर एसपी प्रवीण नायक नूनावत ने कही। जो आज शाम को सीकर के कोतवाली थाने में सीएलजी सदस्यों की मीटिंग लेने के लिए पहुंचे थे। मीटिंग के दौरान लोगों ने सुझाव दिया कि शहर में मोडिफाइड साइलेंसर और होने लगाने वाले लोगों पर कार्रवाई हो। इसके साथ ही शहर में कई जगह सड़क के बीच जो टू व्हीलर पार्किंग की जगह बनाई गई है। उसे भी हटाकर बीच में बैरिकेड लगा दिया जाए। इसके अलावा ऑटो स्टैंड भी फिक्स हो। इसके बाद एसपी प्रवीण नायक नूनावत ने कहा कि आज की मीटिंग में सामने आया कि शहर में ट्रैफिक का बड़ा इशू है। इसको लेकर जल्द ही शहर में चलने वाले ऑटो का रजिस्ट्रेशन चेक किया जाएगा और उनकी पार्किंग का पॉइंट भी डिसाइड किया जाएगा। इसके अलावा शहर में जो हाथ ठेले लगे हुए हैं उन पर भी प्लान बनाया जाएगा। एसपी ने कहा कि जो लोग शहर में अपनी बाइक्स पर मोडिफाइड साइलेंसर या हॉर्न लगाकर घूमते हैं। उनके खिलाफ विशेष अभियान चलाकर बाइक्स को सीज किया जाएगा। एसपी ने कहा की बावड़ी गेट सहित तबेला बाजार के सामने सड़क के बीच जो बाइक की पार्किंग बनाई गई है लोगों ने सुझाव दिया कि उसे हटाकर बेरिकेड्स लगा दिए जाए। इस पर भी विचार करके सॉल्यूशन निकालेंगे।

जोधपुर में कल चार घंटे तक नहीं आएगी बिजली:मेंटेनेंस के चलते सुबह 7:30 से 11:30 बजे तक कई इलाकों में रहेगा शटडाउन

जोधपुर शहर में बिजली लाइनों के रखरखाव के चलते कई कॉलोनी में सोमवार को बिजली बंद रहेगी। चौपासनी हाउसिंग बोर्ड सहित कई बडे़ इलाकों में 4 घंटे तक बिजली नहीं आएगी। इसके बाद बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। सुबह 7:30 से 11:30 बजे तक यहां बंद रहेगी बिजली
सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक यहां रहेगा पावरकट गुटखा फैक्ट्री के पास, चुन्नीलाल जी की प्याऊ, देवलिया गांव, बावरला गांव, सारण नगर (बावरला), प्रताप नगर (बावरला), शगुन रिसॉर्ट, राज इंजीनियरिंग कॉलेज, एसएलबीएस कॉलेज और 16 मील के आसपास के सभी क्षेत्र। सुबह 8 बजे से 11 बजे तक यहां बंद रहेगी बिजली बंद शिव विहार, जम्भेश्वर कॉलोनी, माउंट कार्मेल स्कूलएवं आस-पास का संपूर्ण क्षेत्र 7:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक यहां बंद रहेगी बिजली गुटखा फैक्ट्री के पास, चुन्नीलाल जी की प्याऊ, देवलिया गांव, बावरला गांव, सारण नगर (बावरला), प्रताप नगर (बावरला), शगुन रिसॉर्ट, राज इंजीनियरिंग कॉलेज, एसएलबीएस कॉलेज तथा 16 मील के आसपास के सभी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बंद रहेगी। शाम 4 बजे से 7 बजे तक राजेंद्र नगर, प्रेम नगर, विष्णु नगर, बालाजी नगर एवं आस-पास का संपूर्ण क्षेत्र

मुंबई जाने वाली फ्लाइट में आई तकनीकी खराबी:एसी नहीं चलने पर यात्रियों का हंगामा; स्टाफ पर लगाया दुर्व्यवहार का आरोप

जोधपुर से मुंबई जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E-6259 में तकनीकी खराबी के बाद यात्रियों और एयरलाइन स्टाफ के बीच नोक-झोंक हो गई। इसका वीडियो भी सामने आया है। फ्लाइट बाद में करीब तय समय से एक घंटा देरी से रवाना हुई। इस फ्लाइट में यात्रा कर रहे यात्रियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी परेशानी जाहिर की। इसमें आरोप लगाया कि विमान के एयर कंडीशनिंग (AC) और केबिन प्रेशराइजेशन सिस्टम में खराबी आने के बाद जब कुछ यात्रियों ने सुरक्षा कारणों से उड़ान में यात्रा करने से इनकार किया, तब उन्हें विमान से उतरने पर 5 हजार का शुल्क देने के लिए कहा गया। 5 हजार शुल्क की चेतावनी यात्री अजय ने एक्स पर पोस्ट किया- बोर्डिंग के बाद फ्लाइट में एसी नहीं चल रहा था, जबकि बाहर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस था। केबिन में यात्री पसीने से बेहाल हो गए। पहले क्रू ने कहा- इंजन स्टार्ट होने के बाद एसी चालू होगा, लेकिन बाद में पायलट ने घोषणा की कि विमान के एसी और एयर प्रेशराइजेशन सिस्टम में तकनीकी समस्या है। अजय ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद यात्रियों को पहले से इसकी जानकारी नहीं दी गई और विमान के दरवाजे बंद कर दिए गए। जब कुछ यात्रियों ने सुरक्षा का हवाला देते हुए विमान से उतरने की इच्छा जताई, तब उन्हें 5 हजार का जुर्माना लगाने की चेतावनी दी गई। यात्रियों ने एयरलाइन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए अजय ने आरोप लगाया- केबिन क्रू ने यात्रियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और समस्या स्वीकार करने के बजाय यात्रियों को ही दोषी ठहराया। वहीं फ्लाइट में मौजूद यात्री अनंता ने दावा किया- विमान में लंबे समय तक एसी बंद रहा और तकनीकी खराबी की जानकारी बाद में दी गई। उन्होंने यात्रियों की परेशानी और विमान के वापस टर्मिनल लाए जाने का उल्लेख करते हुए एयरलाइन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। एक घंटे बाद हुई फ्लाइट रवाना जानकारी के अनुसार- फ्लाइट को दोपहर 2:20 बजे तय समय पर उड़ान भरनी थी, लेकिन यह दोपहर सवा तीन बजे रवाना हुई। वहीं, एयरपोर्ट टर्मिनल मैनेजर शुभम ने बताया- हमारे पास इसे लेकर कोई आधिकारिक शिकायत नहीं आई है। इसके बारे में संबंधित एयरलाइन कंपनी ही बता सकती है। फ्लाइट एक घंटा देरी से रवाना हुई थी। देरी को लेकर कंपनी की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई।