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पेड़ से लटका मिला कॉलेज स्टूडेंट का शव:छोटे भाई के साथ नाना के घर रहकर कर रहा था पढ़ाई

डूंगरपुर जिले के चौरासी थाना क्षेत्र में एक 18 वर्षीय युवक का शव महुए के पेड़ से लटका हुआ मिला है। छात्र 5 जुलाई से अपने नाना के घर से लापता था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एएसआई गजराज सिंह ने बताया कि मृतक की पहचान वीरवाड़ा गांव निवासी राहुल कटारा (18) के रूप में हुई है। राहुल अपने छोटे भाई विश्वास के साथ झोंथरी फला कंथार में अपने नाना के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसने हाल ही में 12वीं कक्षा पास की थी और कॉलेज में दाखिला भी ले चुका था। घर से 500 मीटर पेड़ से लटका मिला शव
राहुल 5 जुलाई की शाम को अचानक अपने नाना के घर से चला गया था। वह अपना मोबाइल फोन भी घर पर ही छोड़ गया था। काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।
मंगलवार सुबह राहुल का छोटा भाई विश्वास घर से करीब 500 मीटर दूर महुए के पेड़ पर राहुल का शव लटका हुआ देखकर चौंक गया। उसने तुरंत परिवार और आसपास के ग्रामीणों को सूचना दी। सूचना मिलते ही चौरासी थाना पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतरवाकर अस्पताल के मुर्दाघर पहुंचाया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सलूंबर में मानसून तैयारियों की समीक्षा,कंट्रोल रूम बनेंगे:बिजली विभाग की फॉल्ट टीम रहेगी 24 घंटे सक्रिय, स्कूल भवनों की होगी सुरक्षा जांच

सलूंबर जिला प्रशासन मानसून की सक्रियता को देखते हुए अलर्ट मोड पर आ गया है। जिला कलेक्टर मुहम्मद जुनैद ने वर्चुअल समीक्षा बैठक की। बैठक में सभी उपखंड अधिकारी और विभागीय अधिकारी शामिल हुए। कलेक्टर ने मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि तैयारियों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर उपखंड स्तर पर बनेगा कंट्रोल रूम
कलेक्टर ने हर उपखंड अधिकारी को निर्देश दिए। उन्हें तहसीलदार, पटवारी, सरपंच, जनप्रतिनिधियों और विद्यालय प्रतिनिधियों के साथ बैठक करनी होगी। क्षेत्रवार तैयारियों की रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेजनी होगी। असुरक्षित भवनों, स्कूलों और अन्य जोखिम वाले स्थलों का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। हर उपखंड स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित कर उसकी जानकारी आमजन तक पहुंचानी होगी। जयसमंद में SDRF सर्वे की भी हुई समीक्षा
बैठक में जयसमंद क्षेत्र में एसडीआरएफ के सर्वे की समीक्षा हुई। सर्वे में सामने आई कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए। सराड़ा प्रशासन को पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के इंतजाम समय पर सुनिश्चित करने को कहा गया।
बिजली विभाग को फॉल्ट रेक्टिफिकेशन टीम 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए। झुके हुए बिजली के तारों और विद्युत आपूर्ति की समस्याओं का तत्काल समाधान करना होगा। स्वास्थ्य विभाग को मौसमी बीमारियों से बचाव के निर्देश
वहीं जिला कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को मलेरिया, डेंगू और अन्य मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाने को कहा गया। एंटी वेनम दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए गए। नियमित फॉगिंग कराने और सर्पदंश के प्रति लोगों को जागरूक करने को भी कहा गया। स्कूल भवनों की सुरक्षा जांच के भी निर्देश
शिक्षा विभाग को स्कूल भवनों और छतों की सुरक्षा जांच कराने के निर्देश दिए गए। ‘हरियालो राजस्थान’ अभियान के तहत शुरुआती बारिश में व्यापक पौधारोपण करने को भी कहा गया। इसके अलावा ग्रामीण सेवा शिविरों, फ्लैगशिप योजनाओं और पंच गौरव कार्यक्रमों की प्रगति की भी समीक्षा हुई। पिछड़ रहे विभागों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। इस बैठक में जिले के सभी उपखंड अधिकारी, विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी तथा एसडीआरएफ के प्रतिनिधि वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।

अब मौके पर ही होगी मिलावटी खाद्य पदार्थों की जांच:गांव-गांव जाएगी मोबाइल लैब, सुरक्षित खाद्य सामग्री के प्रति किया जाएगा जागरूक

हनुमानगढ़ में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा मिलावटी खाद्य पदार्थों की जांच के लिए मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब (एमएफटीएल) अभियान चलाया जा रहा है। इस पहल के तहत 8 से 10 जुलाई तक एमएफटीएल जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचेगी, जहां मौके पर ही खाद्य एवं पेय पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। विभाग ने आमजन से इस सुविधा का लाभ उठाने और विशेष रूप से दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच कराने की अपील की है। सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि यह अत्याधुनिक उपकरणों से लैस लैब निर्धारित रूट प्लान के अनुसार शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच रही है। यह मौके पर ही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच कर प्राथमिक रिपोर्ट प्रदान करती है। इसका उद्देश्य संभावित मिलावट की पहचान करने के साथ-साथ लोगों को सुरक्षित खाद्य सामग्री के प्रति जागरूक करना भी है। दूध, घी, पनीर, मावा, मिठाइयों की होगी जांच
डॉ. शर्मा के अनुसार एमएफटीएल वाहन 8 जुलाई को फतेहगढ़, 9 जुलाई को माणकसर और 10 जुलाई को बंशीर क्षेत्र में पहुंचेगा। इन स्थानों पर दूध, घी, पनीर, मावा, मिठाइयों सहित अन्य खाद्य एवं पेय पदार्थों की जांच की जाएगी। विभाग की टीम जांच के दौरान खाद्य पदार्थों की खरीद, भंडारण और उपयोग से संबंधित आवश्यक सावधानियों की जानकारी भी आमजन को उपलब्ध कराएगी। सीएमएचओ ने बताया कि बरसात के मौसम में खाद्य पदार्थों में मिलावट और खराब होने की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए उपभोक्ताओं को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एमएफटीएल के गांव में पहुंचने पर अपने दूध एवं दुग्ध उत्पादों सहित अन्य खाद्य सामग्री की जांच अवश्य कराएं। विभाग का लक्ष्य खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और मिलावटखोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है, ताकि आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

रजई खुर्द गांव में करंट से युवक की मौत:खेत में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से हादसा

धौलपुर जिले के बसई डांग थाना क्षेत्र के रजई खुर्द गांव में सोमवार देर रात एक युवक की करंट लगने से मौत हो गई। युवक खेत की रखवाली कर रहा था, तभी वह टूटकर गिरी हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आ गया।
मृतक की पहचान रजई खुर्द निवासी 45 वर्षीय राम लखन पुत्र विशंभर के रूप में हुई है। घटना के बाद परिजन गंभीर हालत में राम लखन को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार, राम लखन रात में अपने खेत की रखवाली कर रहा था। इसी दौरान वह शौच के लिए खेत से बाहर निकला। रास्ते में पहले से टूटकर गिरी हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आने से उसे करंट लग गया।
करंट लगने से उसके शरीर में आग लग गई। ग्रामीणों ने युवक के शरीर को जलता हुआ देखा, जिसके बाद उन्हें करंट लगने की जानकारी मिली और तत्काल परिजनों को सूचित किया गया।
घटना की सूचना मिलने पर वन विहार चौकी प्रभारी जयदेव सिंह जिला अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

पिकअप की टक्कर से घायल युवक की मौत:पुलिस ने वाहन को किया जब्त, मौके से फरार ड्राइवर की तलाश

चूरू जिले के दूधवाखारा थाना क्षेत्र में एक सड़क हादसे में घायल हुए बाइक सवार युवक की जयपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। सहजूसर गांव के पास पिकअप की टक्कर से यह हादसा हुआ था। दूधवाखारा पुलिस ने मृतक के मामा की रिपोर्ट पर पिकअप ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार रणवां की ढाणी निवासी यशपाल रणवां ने मामला दर्ज कराया। रिपोर्ट में बताया कि उनका भांजा प्रदीप कुमार (32) तीन जुलाई को गिनड़ी गांव से सहजूसर आ रहा था। इसी दौरान सहजूसर से गिनड़ी की ओर जा रही एक तेज रफ्तार पिकअप के ड्राइवर ने लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए प्रदीप की बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में बाइक सवार प्रदीप कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजनों ने उन्हें तुरंत डीबी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुंचाया। वहां हालत गंभीर होने पर प्राथमिक उपचार के बाद युवक को जयपुर रेफर कर दिया गया था। जयपुर के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान प्रदीप कुमार की मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद युवक के शव को परिजनों को सौंप दिया। मामले की जांच कर रहे दूधवाखारा थाना के हेड कॉन्स्टेबल विजय सिंह ने बताया कि पुलिस ने हादसे के बाद पिकअप को जब्त कर लिया है। हालांकि, ड्राइवर मौके से फरार हो गया। पुलिस पिकअप के चेसिस नंबरों के आधार पर मालिक का पता लगाने में जुटी हुई है।

'सपनों को भी खत्म कर देता है नशा':पीएम श्री स्कूल में नशे के खिलाफ किया जागरूक, स्टूडेंट्स को गिनाए नुकसान

झालावाड़ में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं को नशे की लत से दूर रहने और अपने भविष्य को संवारने के प्रति जागरूक करना था। इसका मुख्य विषय ‘‘ड्रग्स को कहें ना, अपने सपनों को कहें हाँ’’ रखा गया। कार्यशाला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक सुरोलिया और अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र कुमार मीणा मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरोलिया ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में लक्ष्य और सपने बेहद कीमती होते हैं। उन्होंने बताया कि नशा न केवल शरीर को नष्ट करता है, बल्कि व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता और उसके सपनों को भी खत्म कर देता है। उन्होंने छात्रों से किसी भी प्रकार के बहकावे में न आने और अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाने का आग्रह किया।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र कुमार मीणा ने छात्रों को नशीले पदार्थों के सेवन और तस्करी से जुड़े कड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके अलावा जिले में पदस्थापित सभी न्यायिक अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्राधिकार के स्कूलों में ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे’ अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों में ‘नशे को कहें ना, अपने सपनों को कहो हाँ’, ‘नशा कोई स्टाइल नहीं’, और ‘अपने मन, शरीर और भविष्य की रक्षा करें’ जैसे विषयों पर चर्चा कर बच्चों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया गया। 11 से 18 जुलाई तक चलेगा विशेष जागरूकता अभियान
इधर विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर एक विशेष अभियान संचालित किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य योग्य दंपत्तियों में सीमित परिवार, मां एवं शिशु कल्याण, अनियोजित गर्भधारण की रोकथाम और बच्चों के जन्म में स्वस्थ अंतराल बनाए रखने के लिए व्यापक जन-जागरूकता पैदा करना है। उपमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविन्द कुमार नागर ने बताया कि इस वर्ष आयोजित होने वाली विश्व जनसंख्या दिवस कार्यक्रम के लिए समस्त प्रचार-प्रसार गतिविधियां मुख्य रूप से ‘‘जब बच्चों में सही अंतराल, परिवार बने स्वस्थ और खुशहाल’’ के मूल स्लोगन (थीम) पर आधारित होंगी।

पालना गृह में मिले नवजात के ब्लड-किडनी में इंफेक्शन:वजन महज 1.38 किलो; गंभीर हालत में नागौर से जोधपुर रेफर

डीडवाना-कुचामन जिले के कुचामन सिटी के राजकीय अस्पताल के पालना गृह में छोड़े गए 3-4 दिन के नवजात की हालत लगातार गंभीर बनी हुई है। जन्म के समय करीब 3 किलो वजन होना चाहिए, लेकिन इस बच्चे का वजन सिर्फ 1.380 किलोग्राम है। खून और किडनी में संक्रमण के चलते पहले उसे नागौर के जेएलएन अस्पताल के एमसीएच विंग में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर अब जोधपुर रेफर किया गया है। फिलहाल मेडिकल टीम बच्चे की जान बचाने के लिए लगातार इलाज और निगरानी में जुटी हुई है। पढ़िए… सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम 1. पालना गृह में छोड़ा गया नवजात, तुरंत शुरू हुआ इलाज 5 जुलाई की शाम करीब पांच बजे एक अज्ञात महिला अपने 3-4 दिन के नवजात को कुचामन के राजकीय अस्पताल के पालना गृह में छोड़कर चली गई। पालना गृह की घंटी बजते ही अस्पताल प्रशासन और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और बच्चे को तुरंत अपने संरक्षण में लेकर प्राथमिक उपचार शुरू किया। बच्चे की हालत गंभीर होने के कारण बाल कल्याण समिति के निर्देश पर सोमवार(6 जुलाई) को उसे नागौर के जेएलएन अस्पताल के एमसीएच विंग रेफर किया गया। 2. नागौर में रातभर चला इलाज, रिपोर्ट आने के बाद जोधपुर रेफर नागौर के एमसीएच विंग में चार डॉक्टरों की टीम पूरी रात बच्चे के इलाज में जुटी रही। शुरुआत में उसकी हालत में थोड़ा सुधार दिखाई दिया, लेकिन बाद में आई मेडिकल रिपोर्ट में उसके खून में गंभीर संक्रमण और किडनी पर संक्रमण की पुष्टि हुई। हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए नवजात को जोधपुर रेफर कर दिया। 3. वजन सिर्फ 1.380 किलो, ऑक्सीजन के सहारे चल रहा इलाज डॉक्टरों के अनुसार सामान्य नवजात का वजन करीब तीन किलोग्राम होता है, लेकिन इस बच्चे का वजन सिर्फ 1.380 किलोग्राम है। कम वजन होने से उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर है। उसे सांस लेने में दिक्कत होने के कारण लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। ब्लड रिपोर्ट में संक्रमण मिलने के बाद इलाज का तरीका बदला गया और विशेष दवाइयां शुरू की गईं। डॉक्टरों का कहना है कि कम वजन और संक्रमण के कारण बच्चे की हालत अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है। 4. पालना गृह में मिले नवजात का इलाज जारी, डॉक्टर लगातार निगरानी में अस्पताल प्रशासन ने पालना गृह में मिले नवजात को तुरंत संरक्षण में लेकर इलाज शुरू किया था। हालत गंभीर होने पर उसे पहले नागौर रेफर किया गया और वहां इलाज के दौरान स्थिति और बिगड़ने पर अब जोधपुर भेजा गया है। फिलहाल डॉक्टरों की टीम बच्चे की जान बचाने के लिए लगातार निगरानी रख रही है और हर जरूरी इलाज किया जा रहा है। 5. दो साल में पालना गृह में मिले करीब आधा दर्जन नवजात बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मनोज सोनी ने बताया – पालना गृह में मिलने वाले, किसी माता द्वारा सरेंडर किए गए या लावारिस मिले नवजातों को तय कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले समिति के सामने पेश किया जाता है। इसके बाद उन्हें सुरक्षित देखभाल के लिए राजकीय शिशु गृह में रखा जाता है। समिति 60 दिन तक बच्चे के परिजनों के सामने आने का इंतजार करती है। यदि कोई दावा करता है तो पूरी कानूनी प्रक्रिया के बाद ही बच्चे को सुपुर्द किया जाता है। फिलहाल इस नवजात के मामले में सबसे बड़ी प्राथमिकता उसकी जान बचाना है।

मानसून सीजन में राजस्थान में जैसलमेर सबसे गर्म:पारा 44.5 डिग्री पहुंचा; धूलभरी आंधी और बादलों की आवाजाही जारी

जैसलमेर में मौसम विभाग ने आगामी 9 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी से अतिभारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है, लेकिन इस सूची से केवल जैसलमेर को बाहर रखा गया है। सीमांत जिले में बादलों की आवाजाही के बीच केवल तेज अंधड़ चल रहा है और बारिश नहीं है। दिन के समय सूरज के तीखे तेवरों से अधिकतम तापमान 44.5 और न्यूनतम 30.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज होने से लोग भीषण गर्मी व उमस से बेहाल हैं। प्रदेश में सबसे गर्म रहा जैसलमेर, उमस ने छुड़ाए पसीने जैसलमेर इस समय पूरे प्रदेश में सबसे गर्म जिला बना हुआ है। सीमांत क्षेत्र में आसमान में हल्के बादलों की आवाजाही तो बनी हुई है, लेकिन ये बादल बरसने के बजाय उमस को और बढ़ा रहे हैं। शाम होते ही धूलभरी हवाएं (अंधड़) जरूर चल रही हैं, जिससे विजिबिलिटी कम हो रही है, लेकिन सूखी हवाएं गर्मी से कोई खास राहत नहीं दे पा रही हैं।

मनोहरथाना क्षेत्र में टन-टोकरी बालाजी मार्ग पर मिला नवजात बालक:बाल कल्याण समिति ने लिया संरक्षण में, होगी नियमित जांच

जिले के मनोहरथाना क्षेत्र में टन-टोकरी बालाजी मार्ग पर एक नवजात बालक मिला। अज्ञात व्यक्ति द्वारा छोड़े गए इस बालक को मंगलवार को जिला बाल कल्याण समिति, झालावाड़ ने अपने संरक्षण में ले लिया। नवजात को अब गवर्नमेंट विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण एजेंसी में सुरक्षित रखा गया है, जहां उसकी नियमित देखभाल और स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष शिवराज सिंह हाड़ा और सदस्य गजेंद्र सेन मंगलवार को झालावाड़ के जनाना अस्पताल पहुंचे। उन्होंने उप अधीक्षक राधेश्याम बैरवा की उपस्थिति में सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं और नवजात को समिति के संरक्षण में लिया। इसके बाद बालक को नियमानुसार गवर्नमेंट विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण एजेंसी में प्रवेश दिलाया गया। समिति अध्यक्ष शिवराज सिंह हाड़ा ने बताया कि नवजात बालक के संबंध में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। संबंधित विभागों की जांच और आवश्यक औपचारिकताओं के बाद जब बच्चे को कानूनी रूप से ‘लीगल फ्री’ घोषित किया जाएगा, तब केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण (सीएआरए) के दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र एवं इच्छुक दंपती को विधिवत गोद दिया जाएगा। उन्होंने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों पर जोर दिया। बाल कल्याण समिति के सदस्य गजेंद्र सेन ने जानकारी दी कि नवजात बालक पूरी तरह स्वस्थ है। चिकित्सकों की निगरानी में उसका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा और पोषण, चिकित्सा व अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। शिशु गृह में प्रशिक्षित कर्मचारियों की देखरेख में उसकी समुचित देखभाल की जाएगी ताकि उसे सुरक्षित एवं पारिवारिक वातावरण मिल सके। उल्लेखनीय है कि मनोहरथाना क्षेत्र के टन-टोकरी बालाजी मार्ग पर नवजात को छोड़े जाने की सूचना मिलने पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की थी। बच्चे को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उसकी स्थिति सामान्य पाई गई। इसके बाद बाल संरक्षण से जुड़े सभी वैधानिक प्रावधानों का पालन करते हुए बाल कल्याण समिति ने उसे अपने संरक्षण में लिया। इस दौरान शिशु गृह समन्वयक दीपक गौतम, मेल नर्स शारिक बेग, एनआईसीयू इंचार्ज परमेश्वर गुप्ता, ड्यूटी डॉक्टर सहित जनाना अस्पताल का चिकित्सा एवं नर्सिंग स्टाफ भी मौजूद रहा। समिति ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी भी परित्यक्त अथवा जरूरतमंद बच्चे की जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस अथवा बाल संरक्षण विभाग को सूचित करें, ताकि समय पर उसकी सुरक्षा और उचित देखभाल की जा सके।

स्कूलों में नशामुक्ति जागरूकता अभियान शुरू:न्यायिक अधिकारी बच्चों को 'नशे को कहें ना' का पाठ पढ़ाएंगे

बारां जिले के सरकारी और निजी विद्यालयों में मंगलवार से नशामुक्ति विषयक विशेष जागरूकता अभियान शुरू हो गया है। इस अभियान का शुभारंभ जिला एवं सेशन न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष सत्यनारायण टेलर ने शहर के मेलखेड़ी रोड स्थित मॉर्डन स्कूल से किया। उन्होंने इस अवसर पर विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई और इसके दुष्प्रभावों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत जिले के सभी न्यायिक अधिकारी सरकारी और निजी विद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों को नशे के प्रति जागरूक करेंगे।
अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ उन्हें साइबर सुरक्षा, संवैधानिक अधिकारों और सुरक्षित भविष्य के प्रति भी जागरूक करना है। जीवन, परिवार और भविष्य को तबाह कर देता है नशा
मॉर्डन स्कूल में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला एवं सेशन न्यायाधीश सत्यनारायण टेलर ने कहा कि नशा किसी भी व्यक्ति के जीवन, परिवार और भविष्य को तबाह कर देता है। उन्होंने जोर दिया कि विद्यार्थियों को शुरुआत से ही इसके दुष्प्रभावों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। स्टूडेंट्स को नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई
न्यायाधीश टेलर ने बताया कि सभी न्यायिक अधिकारी विद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों को यह संदेश देंगे कि “नशा कभी भी कूल नहीं होता, अपने मन, शरीर और भविष्य की रक्षा करें।”
उन्होंने विद्यार्थियों को शपथ दिलाते हुए कहा, “हम नशे को नहीं चुनेंगे, हम आत्मसम्मान को चुनेंगे।” न्यायाधीश ने विद्यार्थियों से जीवन में अच्छे संस्कार अपनाने, नशे से दूर रहने और अपने साथियों को भी इस गंभीर मुद्दे के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
अभियान के दौरान प्रत्येक विद्यालय में सुझाव एवं शिकायत पेटी भी स्थापित की जाएगी, ताकि विद्यार्थी अपनी समस्याएं और सुझाव गोपनीय रूप से साझा कर सकें।