ब्रेकिंग न्यूज़
जून में खाने-पीने और रोजाना जरूरत के सामान महंगे हुए:हुरून रियल एस्टेट रिच लिस्ट में गौतम अडाणी नंबर-1, IDBI बैंक में 61% हिस्सेदारी बेचेगी सरकार

कल की बड़ी खबर महंगाई से जुड़ी रही। जून में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई, ये 44 महीने में सबसे ज्यादा है। पिछले महीने 9.68% पर थी। वहीं, ग्रोहे-हुरून इंडिया रियल एस्टेट रिच लिस्ट में गौतम अडाणी और उनका परिवार पहली बार नंबर-1 पोजीशन पर पहुंच गया। अडाणी प्रॉपर्टीज की वैल्यू में इस साल 38,000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. खाने-पीने और रोजाना जरूरत के सामान महंगे: जून में थोक महंगाई 9.81%, 44 महीने में सबसे ज्यादा; रिटेल महंगाई भी 6 महीने से लगातार बढ़ रही जून में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई है। यह पिछले महीने 9.68% पर थी। जून में महंगाई 44 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 14 जुलाई को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। महंगाई बढ़ने की वजह रोजमर्रा की जरूरत के सामान और खाने-पीने की चीजों का महंगा होना है। अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी से चल रहा तनाव कम नहीं हुआ तो इसके दामों में और इजाफा हो सकता है। इससे पहले कल रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी हुए थे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. हुरून रियल एस्टेट रिच लिस्ट में गौतम अडाणी नंबर-1: अडाणी प्रॉपर्टीज की वैल्यू ₹38,000 करोड़ बढ़ी, राजीव सिंह की DLF को पीछे छोड़ा भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में साल 2026 में बड़ा उलटफेर हुआ है। ग्रोहे-हुरून इंडिया रियल एस्टेट रिच लिस्ट में गौतम अडाणी और उनका परिवार पहली बार नंबर-1 पोजीशन पर पहुंच गया। अडाणी प्रॉपर्टीज की वैल्यू में इस साल 38,000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही उन्होंने इस मामले में डीएलएफ के राजीव सिंह को पीछे छोड़ दिया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. IDBI बैंक में 61% हिस्सेदारी बेचेगी सरकार और LIC: कनाडा की फेयरफैक्स और दुबई की एमिरेट्स NBD के साथ एक महीने में हो सकती है डील भारत सरकार और लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया मिलकर IDBI बैंक में अपनी 60.7% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं। इस स्ट्रैटेजिक डिसइनवेस्टमेंट यानी विनिवेश के लिए कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और दुबई की एमिरेट्स NBD ने बोलियां लगाई हैं, जो अभी वैल्यूएशन के दौर में हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह पूरी डील अगले एक महीने के भीतर फाइनल हो सकती है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. सोना ₹306 घटकर ₹1.42 लाख पर आया: चांदी ₹1,253 बढ़कर ₹2.20 लाख किलो पर पहुंची, इस साल ₹2.80 लाख तक जा सकती है सोने के दाम में आज यानी 14 जुलाई को गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 306 रुपए घटकर 1.42 लाख रुपए पर आ गया है। वहीं एक किलो चांदी 1,253 रुपए बढ़कर 2.20 लाख रुपए पर पहुंच गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. सेंसेक्स 561 अंक गिरकर 77,055 पर बंद: निफ्टी भी 159 अंक टूटकर 24,052 पर आया; ऑटो, IT और रियल्टी शेयर्स में ज्यादा बिकवाली शेयर बाजार में आज यानी 14 जुलाई को गिरावट रही। सेंसेक्स 561 अंक गिरकर 77,055 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 159 अंक की गिरावट रही, ये 24,052 पर बंद हुआ। ऑटो, IT, रियल्टी और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली रही। वहीं फार्मा, हेल्थ केयर और मेटल में ज्यादा खरीदारी रही। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए…

भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू:व्हिस्की, कारें और कपड़े सस्ते मिलेंगे; जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे

भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर आज से सस्ते मिलेंगे। आज से भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हो गया है। यानी अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। इससे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 120 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। करीब 3 साल में 14 राउंड की बातचीत के बाद 24 जुलाई 2025 को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने पीएम नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर की मौजूदगी में इस समझौते पर साइन किए थे। ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने कहा- ‘ऐतिहासिक पल’ इस व्यापार समझौते के लागू होने से पहले भारत में UK की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘उल्टी गिनती शुरू हो गई है! UK और भारत इस बात पर सहमत हैं कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू हो जाएगा। यह आधुनिक यूके-भारत पार्टनरशिप के लिए ऐतिहासिक पल है। यह दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए ग्रोथ के नए युग की शुरुआत करेगा।’ सवाल जवाब में समझिए, इस एग्रीमेंट से क्या-क्या फायदा होगा… सवाल 1: भारत में कौन सी चीजें सस्ती होंगी? जवाब: UK से आयात होने वाले सामानों पर औसत टैरिफ 15% से घटकर 3% होगा। 85% सामान 10 साल में पूरी तरह टैरिफ-मुक्त होंगे। इससे कई चीजें सस्ती होंगी: सवाल 2: भारत के किन-किन सेक्टर्स को फायदा होगा? जवाब: टेक्सटाइल से लेकर इंजीनियरिंग, मेडिकल और केमिकल जैसे सेक्टर्स को फायदा होगा। 1. टेक्सटाइल सेक्टर यूके में भारतीय कपड़ों और होम टेक्सटाइल्स जैसे चादर, परदे पर 8-12% टैक्स लगता था, वो अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इससे हमारे कपड़े बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले सस्ते और ज्यादा कॉम्पिटीटिव हो जाएंगे। तिरुप्पुर, सूरत और लुधियाना जैसे एक्सपोर्ट हब में अगले तीन साल में 40% तक की ग्रोथ हो सकती है। 2. गहने और चमड़े का सामान भारत से यूके जाने वाली ज्वेलरी और चमड़े के सामान जैसे बैग, जूतों पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे छोटे बिजनेस (MSME) और लग्जरी ब्रांड्स को बड़ा फायदा होगा। साथ ही यूके के रास्ते यूरोप में भारत का दबदबा और बढ़ेगा। 3. इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पार्ट्स यूके ने भारतीय मशीनरी, इंजीनियरिंग टूल्स और ऑटो पार्ट्स जैसे कार के पुर्जे पर लगने वाला इम्पोर्ट टैक्स खत्म कर दिया है। इससे भारत, यूके और यूरोप की इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन और मजबूत होगी। पुणे, चेन्नई और गुड़गांव जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब को फायदा होगा। 4. दवाइयां और मेडिकल डिवाइस भारतीय फार्मा कंपनियों को यूके में जेनेरिक दवाइयों के लिए आसान रजिस्ट्रेशन प्रोसेस मिलेगी। इससे भारत की दवाइयां यूके की हेल्थ सर्विस (NHS) में आसानी से पहुंचेंगी और दवाओं का अप्रूवल भी जल्दी मिलेगा। 6. खाने-पीने का सामान, चाय, मसाले और समुद्री प्रोडक्ट्स बासमती चावल, झींगा जैसे समुद्री प्रोडक्ट, प्रीमियम चाय और मसालों पर यूके का इम्पोर्ट टैक्स खत्म हो जाएगा। इससे असम, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे इलाकों की एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को बड़ा बूस्ट मिलेगा। 7. केमिकल्स और स्पेशलिटी मटेरियल्स एग्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक और स्पेशल केमिकल्स पर टैक्स कम होने से गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख हब से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इस डील के तहत भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक यूके में अपने केमिकल निर्यात को दोगुना कर दे। 8. ग्रीन एनर्जी और क्लीनटेक ये समझौता रिन्यूएबल एनर्जी में जॉइंट वेंचर्स का रास्ता खोलेगा, जिसमें सोलर, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। यूके भारत के क्लीन एनर्जी सेक्टर में और निवेश करेगा, जिससे नई टेक्नोलॉजीज का को-डेवलपमेंट होगा। सवाल 3: इस डील से भारत की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा? जवाब: FTA भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कई तरह से फायदेमंद है: सवाल 4: भारत-UK के बीच एग्रीमेंट को लेकर बातचीत कब शुरू हुई थी? जवाब: भारत और UK के बीच एग्रीमेंट को लेकर बातचीत 13 जनवरी 2022 को शुरू हुई थी, जो करीब 3.5 साल बाद पूरी हुई। 2014 से भारत ने मॉरीशस, UAE, ऑस्ट्रेलिया और EFTA (यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन) के साथ 3 ऐसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ इसी तरह के समझौतों पर एक्टिवली बातचीत कर रहा है। सवाल 5: ट्रेड एग्रीमेंट्स कितने टाइप के होते हैं? जवाब: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को उसके नेचर के हिसाब से अलग-अलग नाम दिए जाते हैं। इनमें PTA (प्रेफरेंशियल), RTA (रीजनल) और BTA (बाइलेटरल) शामिल हैं। WTO इस तरह के सभी इकोनॉमिक इंगेजमेंट्स को RTA नाम देता है। सवाल 7: भारत ने किन देशों के साथ इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं? जवाब: भारत ने श्रीलंका, भूटान, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, मॉरीशस, ASEAN और EFTA ब्लॉक्स के साथ ट्रेड एग्रीमेंट्स किए हैं। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ डील हासिल करने के बाद भारत ने अपना FTA फोकस ईस्ट (ASEAN, जापान, कोरिया) से वेस्टर्न पार्टनर्स की ओर शिफ्ट कर दिया है। भारत अब एक्सपोर्ट्स का विस्तार करने और वेस्ट की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए EU और US के साथ FTA को प्राथमिकता दे रहा है।

हुरून रियल एस्टेट रिच लिस्ट में गौतम अडाणी नंबर-1:अडाणी प्रॉपर्टीज की वैल्यू ₹38,000 करोड़ बढ़ी, राजीव सिंह की DLF को पीछे छोड़ा

भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में साल 2026 में बड़ा उलटफेर हुआ है। ग्रोहे-हुरून इंडिया रियल एस्टेट रिच लिस्ट में गौतम अडाणी और उनका परिवार पहली बार नंबर-1 पोजीशन पर पहुंच गया। अडाणी प्रॉपर्टीज की वैल्यू में इस साल 38,000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही उन्होंने इस मामले में डीएलएफ के राजीव सिंह को पीछे छोड़ दिया है। अडाणी प्रॉपर्टीज बनी सबसे बड़ी वैल्यू क्रिएटर 2026 की ग्रोहे-हुरून इंडिया रियल एस्टेट 150 रिपोर्ट के मुताबिक, अडाणी प्रॉपर्टीज इस साल भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में सबसे ज्यादा वैल्यू जोड़ने वाली कंपनी बनकर उभरी है। सालाना आधार पर कंपनी की वैल्यूएशन 72.5% बढ़कर 90,400 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। अहमदाबाद बेस्ड यह कंपनी चार पायदान की छलांग लगाकर देश की चौथी सबसे वैल्युएबल रियल एस्टेट कंपनी बन गई है। इसके साथ ही यह भारत की सबसे वैल्यूएबल अनलिस्टेड रियल एस्टेट डेवलपर भी बनी हुई है। पहली बार रिच लिस्ट के टॉप पर अडाणी फैमिली वैल्यूएशन में आए इस तेज उछाल के कारण गौतम अडाणी और उनकी फैमिली हुरून इंडिया रियल एस्टेट रिच लिस्ट में पहले नंबर पर आ गई है। अडाणी फैमिली की रियल एस्टेट वेल्थ सालाना आधार पर 73% बढ़कर 90,400 करोड़ रुपए हो गई है। यह रैंकिंग अडाणी प्रॉपर्टीज में इस फैमिली की पूरी 100% ओनरशिप को दर्शाती है। हुरून ने बताया- क्यों आई इतनी बड़ी तेजी हुरून के मुताबिक, अडाणी प्रॉपर्टीज की वैल्यू में इस बड़े उछाल की मुख्य वजह अडाणी ग्रुप का एक स्ट्रैटेजिक फैसला है। ग्रुप ने अपने पूरे रियल एस्टेट ऑपरेशंस को एक करके अडाणी प्रॉपर्टीज के तहत शामिल कर दिया है। रिसर्च फर्म ने नोट किया है कि भारत के सबसे अमीर व्यक्ति इस इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म के जरिए देश का सबसे बड़ा रियल एस्टेट बिजनेस खड़ा कर रहे हैं। DLF भारत की सबसे वैल्यूएबल रियल एस्टेट कंपनी एक तरफ जहां अडाणी प्रॉपर्टीज ने लंबी छलांग लगाई, वहीं दूसरी तरफ लिस्टेड डेवलपर्स के लिए यह साल काफी मुश्किलों भरा रहा। गुरुग्राम बेस्ड डेवलपर DLF की वैल्यूएशन में सालाना आधार पर 29.3% की गिरावट आई और यह घटकर 1.46 लाख करोड़ रुपए रह गई। हालांकि, इस बड़ी गिरावट के बावजूद DLF ने रैंकिंग में अपनी टॉप पोजीशन बरकरार रखी है और यह भारत की सबसे वैल्यूएबल रियल एस्टेट कंपनी बनी हुई है। लोढ़ा डेवलपर्स दूसरे और इंडियन होटल्स तीसरे नंबर पर रैंकिंग में दूसरे नंबर पर लोढ़ा डेवलपर्स है। हालांकि, इसकी वैल्यूएशन में 32.2% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद इसकी वैल्यू 93,700 करोड़ रुपए रह गई है। वहीं इंडियन होटल्स कंपनी 13.9% की गिरावट के साथ 93,300 करोड़ रुपए की वैल्यूएशन के साथ तीसरे नंबर पर है। ओयो (प्रिज्म) 106.8% की भारी बढ़त के साथ 67,200 करोड़ रुपए की वैल्यू लेकर 5वें नंबर पर आ गई है। रियल एस्टेट सेक्टर में सुस्ती के संकेत हुरून की इस रिपोर्ट ने देश के ओवरऑल रियल एस्टेट सेक्टर की सुस्ती को भी उजागर किया है। लिस्ट में शामिल सभी 151 कंपनियों की कुल वैल्यूएशन सिर्फ 2% बढ़कर 16.5 लाख करोड़ रुपए ही हो सकी है। यह पिछले 9 साल (जब से ये रैंकिंग शुरू हुई है) में सबसे धीमी ग्रोथ रेट है। इसके मुकाबले पिछले साल की लिस्ट में 14% की मजबूत ग्रोथ देखी गई थी। रियल एस्टेट सेक्टर में सुस्ती की मुख्य वजहें हुरून के मुताबिक, इस सुस्ती के पीछे शेयर बाजार के BSE रियलिटी इंडेक्स में आई 20% की गिरावट है। जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बनी चिंताओं ने निवेशकों के सेंटिमेंट को कमजोर किया है, जिसका सबसे ज्यादा असर रेजिडेंशियल रियल एस्टेट पर पड़ा है। इस साल लिस्ट में शामिल सिर्फ 31 कंपनियों की वैल्यू में बढ़ोतरी हुई, जबकि 74 कंपनियों को गिरावट का सामना करना पड़ा। इस दौरान सभी कंपनियों की कुल वैल्यू सिर्फ ₹34,300 करोड़ रही, जो पिछली बार के ₹1.4 लाख करोड़ के मुकाबले बहुत कम है। गौर करने वाली बात यह है कि इस कुल वैल्यू क्रिएशन का करीब दो-तिहाई (2/3) हिस्सा अकेले अडाणी प्रॉपर्टीज और प्रिज्म (ओयो) ने मिलकर बनाया है, जो दिखाता है कि मुनाफा सिर्फ गिने-चुने प्लेयर्स के पास ही सिमट कर रह गया है। क्या होती है अनलिस्टेड कंपनी? कंपनियां जो शेयर बाजार (BSE/NSE) पर लिस्टेड नहीं होतीं और जिनके शेयर आम लोग नहीं खरीद सकते, उन्हें अनलिस्टेड कंपनी कहते हैं। जैसे- अडाणी प्रॉपर्टीज। क्या होती है एंटरप्राइज वैल्यू? किसी कंपनी की कुल वित्तीय कीमत आंकने का पैमाना, जिसमें कंपनी का मार्केट कैप, कर्ज और उसके पास मौजूद कैश को मिलाकर असल वैल्यू निकाली जाती है। ये खबर भी पढ़ें… खाने-पीने और रोजाना जरूरत के सामान महंगे: जून में थोक महंगाई 9.81%, 44 महीने में सबसे ज्यादा; रिटेल महंगाई भी 6 महीने से लगातार बढ़ रही जून में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई है। यह पिछले महीने 9.68% पर थी। जून में महंगाई 44 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 14 जुलाई को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

IDBI बैंक में 61% हिस्सेदारी बेचेगी सरकार और LIC:कनाडा की फेयरफैक्स और दुबई की एमिरेट्स NBD के साथ एक महीने में हो सकती है डील

भारत सरकार और लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया मिलकर IDBI बैंक में अपनी 60.7% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं। इस स्ट्रैटेजिक डिसइनवेस्टमेंट यानी विनिवेश के लिए कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और दुबई की एमिरेट्स NBD ने बोलियां लगाई हैं, जो अभी वैल्यूएशन के दौर में हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह पूरी डील अगले एक महीने के भीतर फाइनल हो सकती है। डील के रिव्यू के लिए ब्यूरोक्रेट्स की मीटिंग बैंक में हिस्सेदारी बिक्री की प्रोसेस तेजी से आगे बढ़ रही है। सूत्रों ने बताया कि सोमवार को ब्यूरोक्रेट्स के एक पैनल ने एक मीटिंग की थी, जिसमें इस ट्रांजैक्शन को आगे बढ़ाने के लिए रिव्यू किया गया था। अभी कंपनियों की रिवाइज बोलियों की जांच की जा रही है। सरकार और LIC के पास है 94.72% शेयर यह प्रस्तावित ट्रांजैक्शन केंद्र सरकार के स्ट्रैटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट प्रोग्राम का एक अहम हिस्सा है। वर्तमान शेयरहोल्डिंग पैटर्न की बात करें तो IDBI बैंक में भारत सरकार की हिस्सेदारी 45.48% है। वहीं सरकारी बीमा कंपनी LIC के पास बैंक के 49.24% शेयर हैं। दोनों मिलकर अपनी कुल हिस्सेदारी में से 60.7% हिस्सा बेच रहे हैं। रेस में शामिल हैं दो बड़ी विदेशी कंपनियां IDBI बैंक में कंट्रोलिंग स्टेक खरीदने के लिए दो मुख्य दावेदार मैदान में हैं। इनमें पहला नाम भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्सा की कंपनी ‘फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स’ का है। वहीं दूसरा दावेदार दुबई का प्रमुख बैंकिंग ग्रुप एमिरेट्स NBD है। भारत के बैंकिंग सेक्टर में सबसे बड़ा विदेशी निवेश मौजूदा मार्केट प्राइज के हिसाब से इस प्रस्तावित अधिग्रहण की कुल वैल्यू लगभग 5.7 बिलियन डॉलर आंकी गई है। जानकारों के मुताबिक, यदि यह डील पूरी हो जाती है, तो यह भारत के बैंकिंग सेक्टर के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े विदेशी निवेशों में से एक होगा। महीने भर में पूरी हो सकती हैं प्रक्रियाएं सरकारी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि वैल्यूएशन की प्रोसेस लगातार आगे बढ़ रही है। सभी जरूरी और निर्धारित प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद अगले एक महीने के भीतर हिस्सेदारी बिक्री की प्रोसेस को फाइनल किए जाने की पूरी उम्मीद है। खबर के बीच IDBI बैंक के शेयर 3% चढ़े इस विनिवेश प्रक्रिया से जुड़ी खबरों के बीच IDBI बैंक के शेयरों में आज तेजी देखी गई। बैंक का शेयर 3% की बढ़त के साथ 86.48 रुपए प्रति शेयर के स्तर पर बंद हुआ। स्ट्रैटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट क्या होता है? जब सरकार किसी सरकारी कंपनी या बैंक में अपनी हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा (50% या उससे ज्यादा) किसी निजी या बाहरी कंपनी को बेच देती है और इसके साथ ही उस कंपनी का मैनेजमेंट कंट्रोल भी खरीदार को सौंप देती है, तो इसे रणनीतिक विनिवेश या स्ट्रैटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट कहा जाता है। इसका उद्देश्य सरकारी कंपनियों में निजी निवेश और ‌वर्क एफिशिएंसी को बढ़ावा देना होता है। ये खबर भी पढ़ें… खाने-पीने और रोजाना जरूरत के सामान महंगे: जून में थोक महंगाई 9.81%, 44 महीने में सबसे ज्यादा; रिटेल महंगाई भी 6 महीने से लगातार बढ़ रही जून में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई है। यह पिछले महीने 9.68% पर थी। जून में महंगाई 44 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 14 जुलाई को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

लिस्टिंग के बाद मस्क ने की लाखों करोड़ की डील:देर से समझ आई रॉकेट-एआई की कहानी; लिस्ट होने के पहले ही महीने 35% गिरे शेयर

12 जून की वो शाम याद कीजिए, जब एलन मस्क की स्पेसएक्स पहली बार शेयर बाजार में उतरी थी। कंपनी ने शेयर का दाम 135 डॉलर तय किया था। लेकिन बाजार खुलते ही भाव 150 डॉलर तक पहुंच गया। दिन भर में यह 176 डॉलर तक चढ़ा और आखिर में 160.95 डॉलर पर बंद हुआ। यह इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बन चुका था। अगले हफ्ते तो हद ही हो गई- शेयर 225 डॉलर तक पहुंच गया। इसके साथ ही स्पेसएक्स मार्केट कैप के मामले में अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट को भी पीछे छोड़ चुकी थी। बीबीसी वर्ल्ड की एक रिपोर्ट में निवेश रिसर्च कंपनी सीएफआरए के विश्लेषक कीथ स्नाइडर ने कहा है, ‘मस्क जिस भी कंपनी को छूते हैं, लोग उत्साहित हो जाते हैं। लेकिन यह पहला मौका था जब लोगों को लगा कि वे किसी ऐसी चीज में निवेश कर रहे हैं जिसे एआई प्रोजेक्ट के तौर पर पेश किया जा रहा था।’ दरअसल, इसी साल स्पेसएक्स ने मस्क की ही एआई कंपनी एक्सएआई को खरीदा था, जिसे अब स्पेसएक्स एआई नाम दिया गया है और जो चैटबॉट ग्रोक के लिए जानी जाती है। लेकिन असलियत सामने आते ही तस्वीर बदलने लगी। स्पेसएक्स की असली कमाई तो रॉकेट बनाने, उन्हें लॉन्च करने और स्टारलिंक सैटेलाइट सर्विस से होती है। जैसे ही स्टारलिंक ने अमेरिका के मेम्फिस इलाके में डेटा सेंटर को लेकर स्थानीय विरोध के बीच कीमतें घटाने का ऐलान किया, उस दिन शेयर 8% तक गिर गया। 7 जुलाई को जब स्पेसएक्स को नैस्डैक-100 इंडेक्स में शामिल किया गया, तब भी पूरा इंडेक्स 1.7% गिरा, लेकिन स्पेसएक्स का शेयर 4.4% टूटा। पहले महीने के आखिर तक शेयर का भाव करीब 145 डॉलर रह गया। यानी पहले दिन के उच्चतम स्तर से 18% और अब तक के सबसे ऊंचे स्तर से 35% नीचे। मतलब जिन रिटेल निवेशकों ने लिस्टिंग के शुरुआती पांच दिनों में शेयर खरीदे, वे अभी भारी घाटे पर बैठे हैं। स्नाइडर तो यहां तक कहते हैं कि यह गेमस्टॉप और वेंडीज जैसे ‘मीम स्टॉक’ की तरह व्यवहार करने लगा था, जहां सिर्फ ऑनलाइन उत्साह से कीमतें उछलती हैं। यह एक हद तक सही भी है। पिछले साल स्पेसएक्स ने 18 अरब डॉलर (1.7 लाख करोड़) की कमाई की थी और अब भी यह घाटे में चल रही है। बिना कैश चुकाए खरीदी 5.7 लाख करोड़ की कोडिंग कंपनी 16 जून को जब स्पेसएक्स का शेयर उछाल पर था, ठीक उसी दिन कंपनी ने कोड लिखने वाले एआई बॉट स्टार्टअप कर्सर को 60 अरब डॉलर (5.7 लाख करोड़) में स्पेसएक्स के शेयर चुकाकर खरीद लिया। चूंकि उस वक्त स्पेसएक्स के शेयर की कीमत आसमान पर थी, मस्क ने असल में बिना नकद खर्च किए ही यह कंपनी हासिल कर ली। विश्लेषक सैमुअल कर इसे बाजार की ऐसी समझ बताते हैं जो शायद ही किसी अन्य कंपनी के पास हो।

देश में 60 करोड़ गेमर:कैजुअल, फ्री गेम्स छोड़कर शूटर, स्ट्रैटजी जैसे गेम्स की तरफ भारतीयों का रुझान; सालाना 14.5% बढ़ रहा बाजार

मोबाइल गेमिंग मार्केट करवट ले रहा है। ‘मिक्सी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गेमर अब कैजुअल, फ्री गेम्स छोड़कर शूटर, स्ट्रैटजी जैसे प्रतिस्पर्धी गेम्स खेल रहे हैं। इससे इन-एप खरीदारी तेजी से बढ़ रही है। रियल मनी गेमिंग यानी सट्टा आधारित गेम्स पर सख्ती के बाद गेमर का रुख गैर-सट्टा गेमिंग की तरफ मुड़ गया है। नॉन-आरएमजी गेमिंग बाजार 2025 में 10,527 करोड़ का रहा, जो इस साल 14,350 करोड़ और 2029 तक 23,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। देश में 60 करोड़ सक्रिय गेमर हैं। मुफ्त गेम पसंद, पर पिछले 5 साल में इन-एप खरीदारी से कमाई दोगुनी से भी ज्यादा 7,656 करोड़ हुई सबसे तेज ग्रोथ – 2025 में देश में 795 करोड़ मोबाइल गेम डाउनलोड हुए, जो पूरे एशिया में सबसे ज्यादा है। गेमर भी सालभर में 9% बढ़कर 60 करोड़ हो गए। कीमत पर जोर- भारत मुनाफे के लिहाज से पीछे है। बीते साल इन-एप खरीदारी से 7,656 करोड़ कमाई हुई। इस मामले में हम एशिया में छठे स्थान पर रहे। दाम को लेकर संवेदनशीलता इसकी वजह बताई गई है। फ्री गेम्स पसंद – भारतीय गेमर ज्यादातर मुफ्त गेम्स पसंद करते हैं। विज्ञापन कमाई का बड़ा जरिया है। 2025 में इन-गेम विज्ञापन से कंपनियों को 2,871 करोड़ की कमाई हुई। खर्च बढ़ा रहे गेमर- पिछले पांच साल में मोबाइल गेमिंग आय सालाना 17 फीसदी से भी ज्यादा दर से बढ़ी है, जबकि इसी दौरान इन-एप खरीद से कमाई दोगुनी से ज्यादा हो गई। यानी गेमर अब धीरे-धीरे खर्च करना शुरू तो कर रहे हैं। तेज ग्रोथ – हर साल ढाई गुना तक बढ़ रही गेमिंग से कमाई
गेम कैटेगरी आय वृद्धि
एमओबीए 234%
कार्ड बैटलर 92%
4X स्ट्रैटजी 77%
(स्रोत: मिक्सी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स) देश का पूरा गेमिंग मार्केट इस साल 48,000 करोड़ तक 2026 – 48,000 करोड़ का बाजार (RMG मिलाकर) 2031 – 94,000 करोड़ से ऊपर जाने का अनुमान सालाना बढ़ोतरी- 14.52%
गेमिंग स्टार्टअप्स -2,364 बड़ी कंपनियां गरेना/फ्री फायर, कृष्णा गेम्स/बीजीएमआई-क्राफ्टन, नजारा टेक्नोलॉजीज, ड्रीम11, गेम्सक्राफ्ट (स्रोत: मोरडोर इंटेलिजेंस, ट्रैक्सन) शूटर कैटेगरी से कमाई में 94% हिस्सेदारी 2 कंपनियों की – डाउनलोड में सिमुलेशन, आर्केड गेम्स आगे, आय में शूटर गेम्स अव्वल। – फ्री फायर मैक्स और बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया मिलकर भारती गेम मार्केट में शूटर कैटेगरी की कुल कमाई में 94% हिस्सेदारी रखते हैं। – हाई-एंड शूटर एक्सपीरियंस की मांग बढ़त रही है। यानी गेमर अब सिर्फ हल्के-फुल्के गेम्स नहीं, बल्कि ज्यादा ग्राफिक्स और गहराई वाले शूटर गेम्स भी पसंद कर रहे हैं। – स्नाइपर गेम्स भारत में सबसे तेजी से बढ़ती कैटेगरी बनकर उभरे हैं। अब स्थानीय भाषा, थीम वाले गेम का बोलबाला बढ़ रहा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय गेमिंग अब भी कम कमाई वाला बाजार बना हुआ है। लेकिन बेहतर लोकलाइजेशन, भारत-केंद्रित टूर्नामेंट और बदलते उपभोक्ता व्यवहार से आगामी वर्षों में खर्च बढ़ने की उम्मीद है। लूडो किंग और क्रिकेट लीग जैसे स्थानीय गेम्स सांस्कृतिक जुड़ाव के दम पर कई ग्लोबल गेम्स को डाउनलोड में पीछे छोड़ रहे हैं। जो बताता है कि आगे स्थानीय भाषा और थीम वाले गेम्स भारतीय बाजार में बड़ी भूमिका निभाएंगे। हर ऑनलाइन गेम सट्टा नहीं होता, इनमें फर्क समझें सामान्य गेम (जैसे शूटर, स्ट्रैटजी, आर्केड) में जीत या हार खिलाड़ी के कौशल और रणनीति पर निर्भर करती है। पैसा सिर्फ गेम के अंदर हथियार, कैरेक्टर या लेवल जैसी चीजें खरीदने में खर्च होता है। ‘रियल मनी’ जीतने का कोई दावा नहीं होता। वहीं रियल मनी गेमिंग (आरएमजी) गेम्स में खिलाड़ी असली पैसा दांव पर लगाते हैं और नतीजे के आधार पर पैसे जीतते या हारते हैं। इस पर भारत में 2025 में सख्ती की गई है।

सोना ₹306 घटकर ₹1.42 लाख पर आया:चांदी ₹1,253 बढ़कर ₹2.20 लाख किलो पर पहुंची, इस साल ₹2.80 लाख तक जा सकती है

सोने के दाम में आज यानी 14 जुलाई को गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 306 रुपए घटकर 1.42 लाख रुपए पर आ गया है। वहीं एक किलो चांदी 1,253 रुपए बढ़कर 2.20 लाख रुपए पर पहुंच गई है। चांदी ऑल टाइम हाई से 1.66 लाख रुपए नीचे इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 34 हजार रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए तक पहुंच गई थी। यह चांदी के अब तक की सबसे ज्यादा दाम थे। तब से अब तक 166 दिन में चांदी 1.66 लाख रुपए सस्ती हो गई है। सोने-चांदी के दाम में गिरावट की वजह सोने-चांदी में एकमुश्त निवेश से बचें कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है।

खाने-पीने और रोजाना जरूरत के सामान महंगे:जून में थोक महंगाई 9.81%, 44 महीने में सबसे ज्यादा; रिटेल महंगाई भी 6 महीने से लगातार बढ़ रही

जून में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई है। यह पिछले महीने 9.68% पर थी। जून में महंगाई 44 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 14 जुलाई को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। महंगाई बढ़ने की वजह रोजमर्रा की जरूरत के सामान और खाने-पीने की चीजों का महंगा होना है। अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी से चल रहा तनाव कम नहीं हुआ तो इसके दामों में और इजाफा हो सकता है। इससे पहले कल रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी हुए थे। रिटेल महंगाई भी लगातार छठे महीने बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई है। रोजाना जरूरत के सामान के दाम बढ़े होलसेल महंगाई के 4 हिस्से प्राइमरी आर्टिकल, जिसका वेटेज 22.62% है। फ्यूल एंड पावर का वेटेज 13.15% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट का वेटेज सबसे ज्यादा 64.23% है। प्राइमरी आर्टिकल के भी चार हिस्से हैं। होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का आम आदमी पर असर थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है। जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है। रिटेल महंगाई लगातार छठे महीने बढ़ी आलू-अदरक समेत खाने-पीने की चीजों के दाम फिर बढ़ने से रिटेल महंगाई लगातार छठे महीने बढ़ी है। जून में यह 4.38% पर पहुंच गई है। जनवरी में यह 2.74% थी। वहीं एक महीने पहले मई में 3.93% थी। यानी, यह लगातार छठा महीना है जब महंगाई बढ़ी है। महंगाई कैसे मापी जाती है? भारत में दो तरह की महंगाई होती है। एक रिटेल यानी खुदरा और दूसरी थोक महंगाई होती है। रिटेल महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी कहते हैं। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का अर्थ उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है। महंगाई मापने के लिए अलग-अलग आइटम्स को शामिल किया जाता है। जैसे थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल जैसे फूड 22.62% और फ्यूल एंड पावर 13.15% होती है। वहीं, रिटेल महंगाई में फूड और प्रोडक्ट की भागीदारी 45.86%, हाउसिंग की 10.07% और फ्यूल सहित अन्य आइटम्स की भी भागीदारी होती है। —————————————- ये खबर भी पढ़े… सोना ₹476 घटकर ₹1.42 लाख आया:चांदी ₹849 बढ़कर ₹2.19 लाख किलो पर पहुंची, इस साल ₹2.80 लाख तक जा सकती है सोने के दाम में आज यानी 14 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 476 रुपए घटकर 1.42 लाख रुपए पर आ गया है। वहीं एक किलो चांदी 849 रुपए बढ़कर 2.19 लाख रुपए पर पहुंच गई है। पूरी खबर पढ़ें

सेंसेक्स में 300 अंक की गिरावट:77,300 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 100 अंक गिरा; ऑटो और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली

शेयर बाजार में आज यानी 14 जुलाई को गिरावट है। सेंसेक्स करीब 300 अंक की गिरावट के साथ 77,300 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी में भी 100 अंक से ज्यादा की गिरावट है, ये 24,100 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। ऑटो और बैंकिंग शेयर्स में आज ज्यादा बिकवाली है। कच्चा तेल 2% चढ़कर 85 डॉलर पर पहुंचा कच्चे तेल की कीमतें 2% चढ़कर दोबारा 85 डॉलर के करीब पहुंच गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि ईरान के साथ हुआ समझौता अब खत्म हो चुका है। इससे कच्चे तेल के दाम में फिर से तेजी देखने को मिल रही है। आज से 2 IPO में निवेश का मौका आज से 2 कंपनियों के IPO ओपन हो रहे हैं। ये IPO एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट और अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के हैं। म्यूचुअल फंड कंपनी SBI फंड्स मैनेजमेंट प्राइमरी मार्केट से 9,813 करोड़ रुपए जुटा रही है। इसी तरह अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड फ्रेश इश्यू के जरिए 126.25 करोड़ रुपए जुटाएगी। एशियाई बाजारों में भी आज गिरावट 13 जुलाई को अमेरिकी बाजार में गिरावट रही थी बीते 7 दिनों में घरेलू निवेशकों ने 7,039 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रहा था फ्लैट कारोबार इससे पहले कल यानी 13 जुलाई को शेयर बाजार में फ्लैट कारोबार देखने को मिला था। सेंसेक्स 47 अंक बढ़कर 77,616 पर बंद हुआ था। निफ्टी में 4 अंक बढ़त रही, ये 24,211 पर बंद हुआ था।

जून में लगातार छठे महीने महंगाई बढ़ी:4.38% पर पहुंची, RBI के मिड टारगेट के पार निकली; आलू-अदरक महंगे हुए, सोना-चांदी सस्ते

आलू-अदरक समेत खाने-पीने की चीजों के दाम फिर बढ़ने से रिटेल महंगाई लगातार छठे महीने बढ़ी है। जून में यह 4.38% पर पहुंच गई है। जनवरी में यह 2.74% थी। वहीं एक महीने पहले मई में 3.93% थी। यानी, यह लगातार छठा महीना है जब महंगाई बढ़ी है। वहीं जनवरी 2025 के बाद यह पहला मौका है जब महंगाई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 4% के मिड टारगेट के पार निकल गई है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने सोमवार 13 जनवरी को महंगाई के ये आंकड़े जारी किए हैं। फूड इंफ्लेशन जून में बढ़कर 5.32% पर पहुंची खाने-पीने के सामानों की महंगाई यानी फूड इंफ्लेशन जून में बढ़कर 5.32% पर पहुंच गई है। मई में यह आंकड़ा 4.38% पर था।
महंगाई बढ़ने से ब्याज दरें बढ़ने की आशंका भले ही मौजूदा महंगाई अभी भी RBI के 2% से 6% के टॉलरेंस बैंड के भीतर है, लेकिन कीमतों में आगे और बढ़ोतरी केंद्रीय बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए मजबूर कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो आने वाली तिमाहियों में देश की आर्थिक ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। जून में ही RBI ने अल नीनो परिस्थितियों के कारण कम मानसून की आशंका और बढ़ती एनर्जी कीमतों के दोहरे रिस्क को देखते हुए अपने महंगाई के अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया था। नए इंडेक्स की वजह से पिछले साल से तुलना नहीं महंगाई के डेटा की तुलना पिछले साल की समान अवधि से नहीं की जा सकती, क्योंकि इसी साल जनवरी में इस इंडेक्स को रीसेट किया गया था। साल 2024 को बेस ईयर बनाकर नई सीरीज की शुरुआत की गई थी, जिसमें जनवरी में संशोधित रिटेल महंगाई 2.74% दर्ज हुई थी। इसके बाद कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई। फरवरी में यह 3.21%, मार्च में 3.4%, अप्रैल में 3.48% और मई में 3.93% दर्ज की गई थी। पुरानी CPI सीरीज जिसका बेस ईयर 2012 था के तहत महंगाई दर दिसंबर में 1.33% और नवंबर में 0.71% रही थी। नए महंगाई इंडेक्स में खर्च के पैटर्न को बदला गया नया इन्फ्लेशन इंडेक्स साल 2023-24 के हाउसहोल्ड कंजम्पशन एक्सपेंडिचर सर्वे में सामने आए खर्च के तौर-तरीकों पर आधारित है। इंडेक्स के घटकों के नए वेटेज की वजह से महंगाई के आंकड़ों में मामूली बढ़ोतरी दिख रही है। इसमें मुख्य चीजों की हिस्सेदारी करीब 10% बढ़ा दी गई है, जबकि उतार-चढ़ाव वाले खाद्य पदार्थों की भूमिका को कम किया गया है। महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है? महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी। 4.38% महंगाई दर का क्या मतलब है? 1. तुलना पिछले साल से होती है (साल-दर-साल) जब हम कहते हैं कि जून 2026 में महंगाई 4.38% है, तो इसका मतलब है कि हम इसकी तुलना जून 2025 से कर रहे हैं। यह पूरे एक साल का बदलाव है। 4.38% एक औसत नंबर है जिसे ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ कहते हैं। इसमें आपके जीवन की सैकड़ों चीजें शामिल हैं: 2. ₹100 की चीज अब ₹104.38 की हो गई इसका गणित बहुत सीधा है। अगर जून 2025 में आपने कोई सामान जैसे राशन ₹100 में खरीदा था, तो वही सामान मई 2026 में ₹104.38 का हो गया है। ——————— ये खबर भी पढ़ें… चांदी ₹3,155 गिरकर ₹2.17 लाख किलो पर आई: एक महीने में ₹25 हजार कीमत कम हुई, सोना आज ₹1,079 सस्ता हुआ सोने-चांदी के दाम में आज यानी 13 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 3,155 रुपए घटकर 2.17 लाख रुपए पर आ गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,079 रुपए घटकर 1.42 लाख रुपए आ गया है। बीते 1 महीने में चांदी की कीमत 25 हजार और सोने की कीमत 5 हजार रुपए कम हो चुकी है। 14 जून को चांदी 2.43 लाख और 1.48 लाख रुपए पर था। पूरी खबर पढ़ें…