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UK की व्हिस्की-कारें भारत में 7 दिन बाद सस्ती मिलेंगी:भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू होगा; जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे

भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर 7 दिन बाद सस्ते मिलेंगे। क्योंकि, भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू हो जाएगा। यानी इस दिन से भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। इससे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 120 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। करीब 3 साल में 14 राउंड की बातचीत के बाद 24 जुलाई 2025 को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने पीएम नरेंद्र मोदी और उनके UK समकक्ष कीर स्टार्मर की उपस्थिति में इस समझौते पर साइन किए थे। ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने कहा ‘ऐतिहासिक पल’ इस व्यापार समझौते के लागू होने से पहले दोनों देशों के बिजनेस और कंपनियों के पास तैयारी करने के लिए अब सिर्फ एक महीने से भी कम बचा है। भारत में UK की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “उल्टी गिनती शुरू हो गई है! UK और भारत इस बात पर सहमत हुए हैं कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू हो जाएगा। यह आधुनिक यूके-भारत पार्टनरशिप के लिए एक ऐतिहासिक पल है, जो हमारी दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए ग्रोथ के एक नए युग की शुरुआत करेगा।” सवाल जवाब में समझिएं इस एग्रीमेंट से क्या-क्या फायदा होगा… सवाल 1: भारत में कौन सी चीजें सस्ती होंगी? जवाब: UK से आयात होने वाले सामानों पर औसत टैरिफ 15% से घटकर 3% होगा। 85% सामान 10 साल में पूरी तरह टैरिफ-मुक्त होंगे। इससे कई चीजें सस्ती होंगी: सवाल 2: भारत के किन-किन सेक्टर्स को फायदा होगा? जवाब: टेक्सटाइल से लेकर इंजीनियरिंग, मेडिकल और केमिकल जैसे सेक्टर्स को फायदा होगा। 1. टेक्सटाइल सेक्टर यूके में भारतीय कपड़ों और होम टेक्सटाइल्स जैसे चादर, परदे पर 8-12% टैक्स लगता था, वो अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इससे हमारे कपड़े बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले सस्ते और ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो जाएंगे। तिरुप्पुर, सूरत और लुधियाना जैसे एक्सपोर्ट हब में अगले तीन साल में 40% तक की ग्रोथ हो सकती है। 2. गहने और चमड़े का सामान भारत से यूके जाने वाली ज्वेलरी और चमड़े के सामान जैसे बैग, जूतों पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे छोटे बिजनेस (MSME) और लग्जरी ब्रांड्स को बड़ा फायदा होगा। साथ ही यूके के रास्ते यूरोप में भारत का दबदबा और बढ़ेगा। 3. इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पार्ट्स यूके ने भारतीय मशीनरी, इंजीनियरिंग टूल्स और ऑटो पार्ट्स जैसे कार के पुर्जे पर लगने वाला इम्पोर्ट टैक्स खत्म कर दिया है। इससे भारत, यूके और यूरोप की इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन और मजबूत होगी। पुणे, चेन्नई और गुड़गांव जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब को फायदा होगा। 4. दवाइयां और मेडिकल डिवाइस भारतीय फार्मा कंपनियों को यूके में जेनेरिक दवाइयों के लिए आसान रजिस्ट्रेशन प्रोसेस मिलेगी। इससे भारत की दवाइयां यूके की हेल्थ सर्विस (NHS) में आसानी से पहुंचेंगी और दवाओं का अप्रूवल भी जल्दी मिलेगा। 6. खाने-पीने का सामान, चाय, मसाले और समुद्री प्रोडक्ट्स बासमती चावल, झींगा जैसे समुद्री प्रोडक्ट, प्रीमियम चाय और मसालों पर यूके का इम्पोर्ट टैक्स खत्म हो जाएगा। इससे असम, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे इलाकों की एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को बड़ा बूस्ट मिलेगा। 7. केमिकल्स और स्पेशलिटी मटेरियल्स एग्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक और स्पेशल केमिकल्स पर टैक्स कम होने से गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख हब से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इस डील के तहत भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक यूके में अपने केमिकल निर्यात को दोगुना कर दे। 8. ग्रीन एनर्जी और क्लीनटेक ये समझौता रिन्यूएबल एनर्जी में जॉइंट वेंचर्स का रास्ता खोलेगा, जिसमें सोलर, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। यूके भारत के क्लीन एनर्जी सेक्टर में और निवेश करेगा, जिससे नई टेक्नोलॉजीज का को-डेवलपमेंट होगा। सवाल 3: इस डील से भारत की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा? जवाब: FTA भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कई तरह से फायदेमंद है: सवाल 4: यह एग्रीमेंट कब से लागू होगा? जवाब: यह समझौता 24 जुलाई 2025 को साइन हुआ है, लेकिन इसे लागू होने में करीब एक साल लग सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत की केंद्रीय कैबिनेट और UK की संसद से मंजूरी जरूरी है। भारत की केंद्रीय कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल चुकी है। सवाल 5: भारत-UK के बीच एग्रीमेंट को लेकर बातचीत कब शुरू हुई थी? जवाब: भारत और UK के बीच एग्रीमेंट को लेकर बातचीत 13 जनवरी 2022 को शुरू हुई थी, जो करीब 3.5 साल बाद पूरी हुई। 2014 से भारत ने मॉरीशस, UAE, ऑस्ट्रेलिया और EFTA (यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन) के साथ 3 ऐसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ इसी तरह के समझौतों पर एक्टिवली बातचीत कर रहा है। सवाल 6: ट्रेड एग्रीमेंट्स कितने टाइप के होते हैं? जवाब: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को उसके नेचर के हिसाब से अलग-अलग नाम दिए जाते हैं। इनमें PTA (प्रेफरेंशियल), RTA (रीजनल) और BTA (बाइलेटरल) शामिल हैं। WTO इस तरह के सभी इकोनॉमिक इंगेजमेंट्स को RTA नाम देता है। सवाल 7: भारत ने किन देशों के साथ इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं? जवाब: भारत ने श्रीलंका, भूटान, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, मॉरीशस, ASEAN और EFTA ब्लॉक्स के साथ ट्रेड एग्रीमेंट्स किए हैं। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ डील हासिल करने के बाद भारत ने अपना FTA फोकस ईस्ट (ASEAN, जापान, कोरिया) से वेस्टर्न पार्टनर्स की ओर शिफ्ट कर दिया है। भारत अब एक्सपोर्ट्स का विस्तार करने और वेस्ट की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए EU और US के साथ FTA को प्राथमिकता दे रहा है।

लग्जरी तिजोरियों में धन छिपा रहे धनकुबेर; बंकर जैसी सुरक्षा:बायोमेट्रिक से एंट्री, 500 टन सोना और 10 हजार टन चांदी रखने की क्षमता

ऐसी आलीशान जगह, जहां चारों ओर अत्याधुनिक सुरक्षा का अभेद्य घेरा है। आपके बगल में करोड़ों रुपए के हीरे, सोने की सिल्लियां और बेशकीमती पेंटिंग्स रखी हैं। सामने रूफटॉप गार्डन है और आप दुनिया के सबसे महंगे शेफ के हाथों तैयार भोजन का आनंद ले रहे हैं। यह फिल्मी दृश्य नहीं, बल्कि 2026 की हकीकत है। दुनिया के अल्ट्रा-रिच लोगों के लिए बैंक के पुराने, अंधेरे व साधारण लॉकर अब बीती बात हो चुके हैं। उनकी जगह ले ली है अत्याधुनिक ‘प्राइवेट वॉल्ट्स’ ने। ये सिर्फ कीमती संपत्ति की सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आलीशान सुविधाओं से लैस ऐसे निजी म्यूजियम बन चुके हैं, जो रईसों की जीवनशैली का प्रतीक हैं। इस बदलाव की सबसे रोचक मिसाल सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट के पास स्थित ‘द रिजर्व’ है। 18 लाख वर्गफुट में फैली इस अभेद्य तिजोरी में रईसों के लिए 40 सीटों वाला शानदार ‘ऑनिक्स रूम’ बनाया गया है। इसके साथ खूबसूरत रूफटॉप गार्डन भी है। सिल्वर बुलियन ग्रुप’ के सीईओ ग्रेगर ग्रेगरसन के अनुसार, इस वॉल्ट को सुरक्षा के साथ प्रीमियम अनुभव देने के लिए डिजाइन किया गया है। मेहमान पांचवीं मंजिल के व्यूइंग प्लेटफॉर्म से तिजोरी में अपना सोना-चांदी देखते हुए खाना खाते हैं। यहां 500 टन सोना और 10 हजार टन चांदी रखने की क्षमता है। लंदन के मेफेयर और पार्क लेन इलाके भी पीछे नहीं हैं। ‘आईबीवी इंटरनेशनल वॉल्ट्स’ वीआईपी ग्राहकों को अनोखा अनुभव देता है। कीमती सामान रखने आने वालों के लिए निजी चालक वाली लग्जरी कार सेवा और मशहूर डोरचेस्टर होटल में खास ‘आफ्टरनून टी’ जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। सुरक्षा के मामले में यह जगह बंकर से कम नहीं। आईबीवी गोल्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर सीन होए के अनुसार, यहां लगे खास शीशे एके-47 की गोलियों तक का सामना कर सकते हैं। दुनियाभर में नए ठिकाने उभर रहे ट्रेंड फोरकास्टिंग फर्म ‘फ्यूचर लैबोरेटरी’ के कोफाउंडर क्रिस्टोफर सैंडरसन कहते हैं, लंदन अकेला इस उद्योग का पारंपरिक केंद्र नहीं है। जिनेवा के फ्रीपोर्ट में करीब 9.5 लाख करोड़ की कलाकृतियां सुरक्षित रखी गई हैं, जबकि दुबई तेजी से बंकर-ग्रेड तिजोरियों का नेटवर्क खड़ा कर रहा है। हांगकांग व मिलान भी लग्जरी जीवनशैली और मजबूत वित्तीय ढांचे के कारण धनकुबेरों को आकर्षित कर रहे हैं। पर्यटक शॉर्ट टर्म के लिए किराए पर ले रहे हैं निजी वॉल्ट्स यूरोप की इंटरनेशनल टैक्स ऑब्जर्वेटरी के अनुसार, 15 वर्ष पहले दुनिया के अरबपतियों की कुल संपत्ति 427 लाख करोड़ रुपए थी, जो अब बढ़कर करीब 1889 लाख करोड़ रुपए हो गई है। इस विशाल संपत्ति के साथ सुरक्षित स्टोरेज की मांग भी तेजी से बढ़ी है। लंदन की चर्चित ‘हैटन गार्डन’ डकैती और कई पारंपरिक बैंकों द्वारा लॉकर सेवाएं बंद किए जाने के बाद अमीर लोग निजी वॉल्ट्स की ओर रुख कर रहे हैं। उधर, लंदन और यूरोप के अन्य बड़े शहरों में लग्जरी घड़ियों की लूटपाट बढ़ी है। अपराधी इन्हें ‘अंडरवर्ल्ड करेंसी’ की तरह इस्तेमाल करते हैं, इसलिए पर्यटक और स्थानीय धनाढ्य वर्ग अल्पकालिक लॉकर (शॉर्ट टर्म के लिए) किराए पर लेने लगे हैं।

एक साल में डार्क स्टोर्स डेढ़ गुना बढ़े:पेय पदार्थ, आइसक्रीम और फेस केयर की बिक्री सबसे ज्यादा; 1लाख करोड़ का बाजार

देश में क्विक कॉमर्स तेजी से पारंपरिक ई-कॉमर्स को पीछे छोड़ रहा है। इक्विरस कैपिटल की जून 2026 कंज्यूमर सेक्टर रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का डिजिटल कॉमर्स बाजार 2026 में 8 लाख करोड़ रुपए का अनुमानित है, जिसमें क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी 1.08 लाख करोड़ रुपए है। सबसे खास बात यह है कि क्विक कॉमर्स सालाना आधार पर 40% की दर से बढ़ रहा है, जो समूचे डिजिटल कॉमर्स की ग्रोथ रफ्तार से दोगुने से भी ज्यादा है। ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट और जेप्टो जैसी प्रमुख कंपनियों के डार्क स्टोर नेटवर्क में पिछले एक साल में भारी इजाफा हुआ है। मई 2025 में इन तीनों कंपनियों के मिलाकर 3,405 डार्क स्टोर थे, जो मई 2026 में बढ़कर 5,026 हो गए। यानी महज एक साल में डार्क स्टोर्स की संख्या करीब डेढ़ गुना बढ़ी है। यह आक्रामक विस्तार बताता है कि कंपनियां छोटे शहरों और नए इलाकों में तेजी से पैर पसार रही हैं, ताकि 10-15 मिनट में डिलीवरी का वादा पूरा किया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, इस सीजन में आइसक्रीम, पेय पदार्थ (बेवरेजेज) और फेस केयर उत्पाद क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर सबसे तेज ग्रोथ दिखाने वाली कैटेगरी रहीं। गर्मी के मौसम में इन उत्पादों की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ती है, लेकिन क्विक कॉमर्स ने इस मांग को तुरंत पूरा करने में अहम भूमिका निभाई, जिससे पारंपरिक रिटेल चैनलों पर दबाव बढ़ा है। कमजोर मानसून से ग्रामीण मांग सुस्त पड़ने का खतरा बढ़ा हालांकि कंज्यूमर सेंटीमेंट के लिए एक चिंता की खबर भी है। रिपोर्ट में बताया गया कि 4 जून से 22 जून के बीच देश में सामान्य 97.6 मिलीमीटर के मुकाबले महज 53.1 मिमी बारिश हुई। यानी 46% की भारी कमी। इससे जून 2026 पिछले 146 वर्षों में सबसे सूखे महीनों में शुमार हो गया है। एनालिस्ट्स का मानना है कि अल नीनो की स्थितियां और कमजोर मानसून ग्रामीण आय और मांग पर विपरीत असर डाल सकते हैं, जो एफएमसीजी खपत का एक अहम आधार है। क्विक कॉमर्स – एक नजर में ग्रोथ
पैरामीटर मई 2025 मई 2026 वृद्धि
डार्क स्टोर्स 3,405 5,026 48%
साइज — ₹1.08* 40% साइज लाख करोड़ में, डार्क स्टोर (ब्लिंकिट + इंस्टामार्ट + जेप्टो)

परफेक्ट कार कलर चुनने की 5-स्टेप प्रोसेस:करीब 50% भारतीय लोगों को पसंद है सफेद रंग; ग्रीन, बेज, ऑरेंज की डिमांड कम

नई कार खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कौन-सा कलर चुनें? सिर्फ पसंद का नहीं, बल्कि मेंटेनेंस, गर्मी, रीसेल वैल्यू और ट्रेंड का भी। BASF की जनवरी में आई रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत में बिकने वाली कुल कारों में 48% सफेद रहीं। यानी हर दो में से एक खरीदार सफेद कलर की कार खरीद रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह सफेद कलर का मेंटेनेंस अन्य कलर की तुलना में सबसे कम है, यानी सफेद कलर में स्क्रैच छुपाना सबसे आसान होता है। साथ ही सफेद कार की रीसेल वैल्यू भी सबसे ज्यादा होती है। हालांकि, अब ट्रेंड बदल रहा है और अलग लुक के लिए लोग ग्रे, ब्लैक, ब्लू और ग्रीन जैसे बोल्ड कलर वाली कार भी खरीद रहे हैं। परफेक्ट कार कलर चुनने की 5-स्टेप प्रोसेस स्टेप 1: अपना प्राइमरी यूज और इलाका देखें सबसे पहले यह तय करें कि आप गाड़ी कहां और कैसे चलाने वाले हैं: स्टेप 2: अपनी मेंटेनेंस की आदत पहचानें आप गाड़ी की साफ-सफाई को कितना वक्त दे सकते हैं, यह बहुत जरूरी है: मेंटेनेंस के लिए ‘बेस्ट’ VS ‘वर्स्ट’ कलर स्क्रैच ठीक करने में आसान ‘स्पेशल एडिशन’ रंग खरीदने के नुकसान स्टेप 3: रोड सेफ्टी और विजिबिलिटी को तवज्जो दें रात के समय होने वाले एक्सीडेंट्स से बचने के लिए कलर की विजिबिलिटी मायने रखती है: स्टेप 4: बजट और वेरिएंट की उपलब्धता चेक करें शोरूम जाने से पहले बजट का गणित समझें: कम बजट: अगर बजट टाइट है, तो फ्लैट वाइट चुनें। इसके लिए ज्यादातर कंपनियां एक्स्ट्रा पैसे नहीं लेतीं और स्क्रैच आने पर इसका री-पेंट भी सबसे सस्ता होता है। फ्लेक्सिबल बजट: अगर आप एक्स्ट्रा कॉस्ट उठाने को तैयार हैं, तभी मैट फिनिश, ट्रेंडी कलर्स या स्पेशल एडिशंस जैसे जेट या काजीरंगा एडिशन की तरफ कदम बढ़ाएं। स्टेप 5: फ्यूचर रिसेल वैल्यू का आकलन करें गाड़ी को 4-5 साल में बदलने का प्लान है या लंबे समय तक रखने का, यह सोच लें: शॉर्ट समरी गाइड

सोना ₹1,733 गिरकर ₹1.42 लाख पर पहुंचा:ऑल टाइम हाई से ₹34 हजार गिरा, चांदी ₹5,650 घटकर ₹2.22 लाख किलो हुई

सोने-चांदी के दाम में 8 जुलाई को गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 1,733 रुपए गिरकर 1.42 लाख रुपए पर आ गया है। वहीं, 1 किलो चांदी का दाम 5,650 रुपए घटकर 2.22 लाख रुपए पर पहुंच गई है। ऑल टाइम हाई से 1.64 लाख रुपए गिरी चांदी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 33,771 रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 164 दिन में चांदी 1.59 लाख रुपए सस्ती हो गई है।
ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

सेंसेक्स 1677 अंक गिरकर 76,504 पर बंद:अमेरिका-ईरान सीजफायर खत्म होने का असर; 20 मिनट में ही 1000 अंक टूटा

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर खत्म होने के ऐलान के बाद आज 8 जुलाई को सेंसेक्स 20 मिनट में 1000 अंक गिर गया। बाजार में आई बिकवाली से निवेशकों की वेल्थ 8 लाख करोड़ रुपए घट गई। मंगलवार को बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों की वैल्यू ₹480 लाख करोड़ रुपए थी। बुधवार को यह गिरकर लगभग ₹472 लाख करोड़ रुपए पर आ गई। कच्चा तेल 6% चढ़कर 75 डॉलर के करीब पहुंचा उधर सीजफायर खत्म होने से कच्चे तेल की कीमतें भी 6% चढ़कर दोबारा 75 डॉलर के करीब पहुंच गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ हुआ समझौता अब खत्म हो चुका है। हमने बीती रात ईरान पर बेहद ताकतवर हमला किया। सरकारी बैंक और FMCG शेयर्स सबसे ज्यादा नीचे एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार अमेरिकी बाजार में कल गिरावट रही थी विदेशी निवेशकों ने कल 393 करोड़ के शेयर खरीदे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। अब जरूरी सवालों के जवाब जानें… सवाल 1. शेयर बाजार अचानक क्यों गिरा? जवाब: अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें 6% बढ़ गईं। इससे निवेशकों को महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने का डर है, इसलिए बाजार में बिकवाली आई है। सवाल 2. कच्चा तेल महंगा होने से भारत पर असर क्यों पड़ता है? जवाब: भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ता है और अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है। सवाल 3. किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है? जवाब: तेल महंगा होने से एयरलाइंस, पेंट, केमिकल, टायर, FMCG और लॉजिस्टिक्स कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। वहीं ONGC और ऑयल इंडिया जैसी तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों को ऊंचे दाम का फायदा मिल सकता है। सवाल 4. क्या पेट्रोल-डीजल तुरंत महंगे हो जाएंगे? जवाब: जरूरी नहीं। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें सिर्फ अंतरराष्ट्रीय तेल के दाम से नहीं, बल्कि टैक्स, रुपए की कीमत और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के फैसलों पर भी निर्भर करती हैं। अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तभी कीमतों पर असर पड़ने की संभावना बढ़ती है। कल सेंसेक्स 104 अंक गिरकर बंद हुआ था इससे पहले कल यानी 7 जुलाई को शेयर बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 104 अंक की गिरावट के साथ 78,181 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी में भी 32 अंक की गिरावट रही, ये 24,399 पर बंद हुआ था।

पेट्रोल-डीजल पर तेल कंपनियां ₹11 लीटर तक मुनाफा कमा रहीं:लेकिन आम लोगों को राहत नहीं, कच्चा तेल 6 महीने के निचले स्तर पर

अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे कच्चे तेल के दाम अब 6 माह के निचले स्तर पर आ चुके हैं। इंडियन बास्केट का कच्चा तेल 68.69 डॉलर/बैरल तक आ गया है। यह युद्ध के दौरान बने 157 डॉलर के शिखर से करीब 56% कम है। इसके बावजूद आम आदमी को पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों में कोई राहत नहीं मिली है। डीएएम कैपिटल के मुताबिक मौजूदा कीमत पर तेल कंपनियां पेट्रोल पर 10.5 और डीजल पर 11 रुपए प्रति लीटर तक मार्जिन कमा रही हैं। कच्चे तेल के दाम 1 जून के बाद से 87 डॉलर से नीचे हैं। इस रेट पर तेल कंपनियां ब्रेक ईवन यानी न नफा, न नुकसान में रहती हैं। यानी कंपनियां पूरे 36 दिन से मुनाफे में ही हैं। ईरान-अमेरिका के बीच 8 अप्रैल को पहला युद्ध विराम होने के बाद कच्चे तेल के दाम 115 डॉलर से नीचे रहे। क्रूड 75 डॉलर हो या 120, पेट्रोल के दाम एक से 2018 में कच्चे तेल के दाम 80.08 डॉलर/बैरल थे। तब दिल्ली में पेट्रोल 72.15 रुपए और डीजल 70.21 रुपए प्रति लीटर था। 2020 में कच्चा तेल 43.41 डॉलर/बैरल हो गया। लेकिन पेट्रोल 68.20 रु./लीटर ही रहा। 2022 में कच्चे तेल के दाम 119 डॉलर/बैरल तक पहुंचे। तब पेट्रोल 96.72 रु./लीटर और डीजल 89.62 रु./लीटर हो गया। जनवरी 2023 में कच्चे तेल के दाम 75 डॉलर तक पहुंचे। लेकिन दाम जस के तस रहे। तेल कंपनियों का तर्क था कि अभी पुराने घाटे की भरपाई हो रही है। तेल कंपनियों को चौथी तिमाही में भी फायदा हुआ कच्चे तेल की सबसे तेज बढ़ोतरी के दिनों में भी तेल कंपनियों के चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च 2026) के नतीजे नकारात्मक नहीं आए। देश की चार बड़ी तेल कंपनियों का मुनाफा पिछले साल 2024-25 की चौथी तिमाही की तुलना में 22% तक ज्यादा रहा। सबसे तेज युद्ध के 33 दिन इसी तिमाही में शामिल थे। इस दौरान इंडियन बास्केट में कच्चे तेल के दाम 157 डॉलर/बैरल तक पहुंचे थे। मार्च में कच्चे तेल के औसत दाम 125.7 डॉलर/बैरल थे। 1 जुलाई को नायरा ने पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 सस्ता किया था देश की सबसे बड़ी प्राइवेट फ्यूल रिटेलर कंपनी नायरा एनर्जी ने 1 जुलाई को पेट्रोल के दाम में 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपए प्रति लीटर की कमी की थी। अब भोपाल में नायरा के पेट्रोल की कीमत 119.79 रुपए से घटकर 114.79 रुपए और डीजल 102.57 रुपए से घटकर 99.57 रुपए पर आ गया है। तब भी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया था। सरकारी कंपनियों ने मई में की थी बढ़ोतरी प्राइवेट कंपनी के दाम बढ़ाने के बाद सरकारी तेल कंपनियों ने भी कीमतें बढ़ाई थीं। मई में IOC, BPCL और HPCL ने महंगे अंतरराष्ट्रीय क्रूड का हवाला देते हुए किस्तों में पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में कुल ₹7.50-₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 90% से अधिक पर इन तीनों सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है।

पेट्रोल में 25% एथेनॉल मिलाने का प्लान टल सकता है:एंड्रॉएड यूजर्स का फ्री स्टोरेज जल्दी फुल होगा; 15% तक महंगा हो सकता है मोबाइल रिचार्ज

कल की बड़ी खबर एथेनॉल से जुड़ी रही। पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने के विरोध के बीच इसकी मात्रा बढ़ाकर 25% करने की योजना को सरकार फिलहाल आगे बढ़ा सकती है। वहीं अगर आप एंड्रॉएड स्मार्टफोन यूजर हैं और अपने फोन का बैकअप गूगल अकाउंट पर रखते हैं, तो अब अकाउंट का फ्री 15GB स्टोरेज जल्दी फुल हो सकता है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. पेट्रोल में 25% एथेनॉल मिलाने का प्लान टल सकता है: अभी 20% मिलाया जा रहा; इससे माइलेज घटने का दावा, पार्ट्स खराब होने की शिकायत पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने के विरोध के बीच इसकी मात्रा बढ़ाकर 25% करने की योजना को सरकार फिलहाल आगे बढ़ा सकती है। सरकार इस ट्रांजिशन को जल्दबाजी में करने के बजाय धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से लागू करना चाहती है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. एंड्रॉएड यूजर्स का फ्री स्टोरेज जल्दी फुल होगा: कॉल हिस्ट्री और SMS बैकअप 15GB में जुड़ेगा, एक्स्ट्रा स्टोरेज के लिए प्लान ₹59 से शुरू अगर आप एंड्रॉएड स्मार्टफोन यूजर हैं और अपने फोन का बैकअप गूगल अकाउंट पर रखते हैं, तो अब अकाउंट का फ्री 15GB स्टोरेज जल्दी फुल हो सकता है। क्योंकि, गूगल ने अपनी स्टोरेज पॉलिसी बदल दी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. सरकार ने एयर सुविधा 2.0 पोर्टल लॉन्च किया: अब भारत आने वाले हर यात्री को हेल्थ डिक्लेरेशन फॉर्म भरना जरूरी; जानें प्रोसेस भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एयर सुविधा पोर्टल को नए रूप में ‘एयर सुविधा 2.0’ नाम से दोबारा शुरू किया है। अब यूएई सहित दुनिया के किसी भी शहर से भारत आने वाले हर अंतरराष्ट्रीय यात्री को उड़ान भरने से पहले यह ऑनलाइन हेल्थ डिक्लेरेशन फॉर्म भरना अनिवार्य होगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. टाटा ग्रुप में नई पीढ़ी को कमान सौंपने की रणनीति: नोएल टाटा की बेटी माया संभालेंगी रिटेल चेन ‘वेस्टसाइड’ का ई-कॉमर्स टाटा ग्रुप की फैशन रिटेल चेन ‘वेस्टसाइड’ के ई-कॉमर्स मार्केटिंग की कमान नोएल टाटा की बेटी माया टाटा (37 साल) संभालेंगी। सोमवार को हुए इस बदलाव का मकसद वेस्टसाइड की ऑनलाइन मौजूदगी बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार है। हालांकि कंपनी की ओर से अभी इस पर आधिकारिक मुहर लगना बाकी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. 15% तक महंगा हो सकता है मोबाइल रिचार्ज: अगले 3-4 महीने में बढ़ोतरी हो सकती है, जियो-एयरटेल का मार्केट शेयर और बढ़ेगा अगले 3 से 4 महीने में मोबाइल रिचार्ज और इंटरनेट प्लान महंगे हो सकते हैं। सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियां टैरिफ में 12 से 15% तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार मार्केट में अब मुख्य रूप से 3 प्राइवेट और 1 सरकारी यानी BSNL कंपनी ही बची हैं, जिससे कंसॉलिडेशन यानी बाजार का सिमट गया है। ऐसे में कंपनियों के लिए कीमतें बढ़ाने का माहौल बन गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए…

एंड्रॉएड यूजर्स का फ्री स्टोरेज जल्दी फुल होगा:कॉल हिस्ट्री और SMS बैकअप 15GB में जुड़ेगा, एक्स्ट्रा स्टोरेज के लिए प्लान ₹59 से शुरू

अगर आप एंड्रॉएड स्मार्टफोन यूजर हैं और अपने फोन का बैकअप गूगल अकाउंट पर रखते हैं, तो अब अकाउंट का फ्री 15GB स्टोरेज जल्दी फुल हो सकता है। क्योंकि, गूगल ने अपनी स्टोरेज पॉलिसी बदल दी है। गूगल की अपडेटेड पॉलिसी के मुताबिक, आपके फोन के फोटो-वीडियो ही नहीं, बल्कि अब SMS, कॉल हिस्ट्री और एप डेटा का बैकअप भी आपकी इसी फ्री लिमिट में सेव होगा। यह नियम सबसे पहले नए एंड्रॉयड यूजर्स पर लागू होगा। अभी गूगल फोटोज पर अपलोड इमेज, वीडियो सेव होता है वहीं, मौजूदा यूजर्स के अकाउंट्स में आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे रोलआउट किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अब बाय डिफॉल्ट आपके गूगल अकाउंट की ज्यादा स्टोरेज खर्च होगी। अभी तक गूगल आपकी फ्री 15GB क्लाउड स्टोरेज में सिर्फ गूगल फोटोज पर अपलोड की गई इमेज, वीडियो और MMS डेटा में शामिल फोटो-वीडियो को ही काउंट करता था। एक्स्ट्रा स्पेस के लिए भारत में ₹59 से शुरू हैं प्लान गूगल अपनी स्टोरेज पॉलिसी में लगतार बदलाव कर रहा है। इससे पहले मई में कंपनी ने कुछ नए अकाउंट्स के लिए फोन नंबर लिंक न करने की स्थिति में डिफॉल्ट फ्री स्टोरेज लिमिट को 15GB से घटाकर 5GB करने की टेस्टिंग शुरू की थी। यदि आप अपने अकाउंट के लिए अतिरिक्त स्टोरेज खरीदना चाहते हैं, तो भारत में गूगल वन के प्लान ₹59 प्रति माह से शुरू होते हैं, जिसमें 30GB स्टोरेज मिलती है। इसके अलावा गूगल AI प्लान्स के साथ भी फ्री स्टोरेज दी जा रही है। आप चाहें तो ज्यादा लिमिट वाले पेड गूगल वन या गूगल AI प्लान भी चुन सकते हैं। स्पेस मैनेज करने के लिए नए ऑन-ऑफ टॉगल मिलेंगे इस बदलाव के साथ ही गूगल यूजर्स को बैकअप पर ज्यादा कंट्रोल देने के लिए नए फीचर्स भी जोड़ रहा है। अब तक मिलने वाले प्रति-एप कंट्रोल्स के साथ ही यूजर्स को SMS, MMS, कॉल हिस्ट्री और डिवाइस सेटिंग्स के लिए ऑन-ऑफ टॉगल मिलेंगे। इसकी मदद से आप खुद चुन सकेंगे कि किस डेटा का बैकअप लेना है और किसका नहीं। इसे सेट करने के लिए आप अपने डिवाइस की सेटिंग्स में ‘गूगल बैकअप’ पेज पर जा सकते हैं। गूगल का दावा- औसत सिर्फ 40MB डेटा बढ़ेगा हालांकि, इस बदलाव से यूजर्स की फ्री स्टोरेज लिमिट जल्दी खत्म होने का डर है, लेकिन कंपनी का कहना है कि इसका असर बेहद मामूली होगा। एक गूगल प्रवक्ता ने कहा, “हमने अपनी पॉलिसी को अपडेट किया है, ताकि अब सभी एंड्रॉयड बैकअप डेटा गूगल अकाउंट स्टोरेज में काउंट हों। हमें उम्मीद है कि इससे औसतन केवल 40MB डेटा ही बढ़ेगा। हम यूजर्स को ज्यादा पारदर्शिता और नए कंट्रोल्स भी दे रहे हैं, जिससे वे खुद चुन सकें कि किस डेटा और ऐप का बैकअप लेना है।” नॉलेज पार्ट: क्लाउड स्टोरेज और बैकअप डेटा क्या होता है?