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BSNL सैटेलाइट फोन लॉन्च, बिना सिम-नेटवर्क के बात होगी:इमरजेंसी के लिए SOS सपोर्ट, खरीदने के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी; कीमत ₹1.34 लाख

सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने भारत में नया सैटेलाइट फोन लॉन्च किया है। इसकी कीमत टैक्स मिलाकर 1,34,166 रुपए रखी गई है। यह रेगुलर स्मार्टफोन से बिल्कुल अलग है, जो बिना सिम और नेटवर्क के बजाय सीधे सैटेलाइट की मदद से काम करता है। फोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नेटवर्क विहीन और ऑफ-ग्रिड जगहों पर भी बिना किसी रुकावट के वॉयस कॉल करने की सुविधा देता है, जबकि आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले फोन नजदीकी मोबाइल टावर की मदद से काम करते हैं। सेटेलाइट फोन को खरीदने के लिए सरकार की मंजूरी लेना होगी। आपातकालीन स्थिति में कनेक्टिविटी आसान होगा इस फोन का फायदा उन सुदूर इलाकों में भी काम करेगा, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाते हैं। इससे आपदा या आपातकालीन स्थितियों में लोगों से संपर्क बनाए रखना आसान हो जाएगा। कंपनी ने बताया कि इस हैंडसेट को ग्लोबल सैटेलाइट नेटवर्क प्रोवाइडर ‘इनमारसैट’ के साथ पार्टनरशिप में बनाया गया है। खरीदने के लिए सरकार की अनुमति अनिवार्य यह आम फोन या गैजेट की तरह सीधे दुकान पर नहीं मिलेगा। भारत में सैटेलाइट फोन को लेकर कड़े नियम हैं। इस फोन को खरीदने या इस्तेमाल करने से पहले यूजर को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) से मंजूरी या ऑथराइजेशन लेना अनिवार्य होगा। सरकार की बिना मंजूरी के सैटेलाइट फोन रखना या इसे ऑपरेट करना भारतीय नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। BSNL का यह सैटेलाइट फोन रोजमर्रा के स्मार्टफोन यूजर्स के लिए नहीं है। इसे उन लोगों और ऑर्गेनाइजेशन्स के लिए डिजाइन किया गया है, जिन्हें नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में भरोसेमंद कम्युनिकेशन की जरूरत होती है।

TCS ने पहली तिमाही में जोड़े 9,200 से ज्यादा कर्मचारी:नेट प्रॉफिट 5% बढ़कर ₹13,349 करोड़ हुआ, ₹12 प्रति शेयर डिविडेंड का देगी कंपनी

आईटी सर्विसेज कंपनी TCS ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। जून को खत्म हुई इस तिमाही में कंपनी के कर्मचारियों की संख्या पिछले क्वार्टर के मुकाबले 9,200 से ज्यादा बढ़कर 5,93,798 पहुंच गई है। इसके साथ ही सालाना आधार पर कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 5% बढ़कर 13,349 करोड़ रुपए रहा है। तीन तिमाहियों की गिरावट के बाद बढ़े कर्मचारी वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में TCS के कुल कर्मचारियों की संख्या 5,84,519 थी, जो अब बढ़कर 5,93,798 हो गई है। यह बढ़ोतरी कंपनी के लिए एक वापसी की तरह है, क्योंकि इससे पहले लगातार तीन तिमाहियों तक हेडकाउंट में गिरावट देखी गई थी। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में कर्मचारियों की संख्या 6,13,069 के पीक पर थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही तक गिरकर 5,82,163 के निचले स्तर पर आ गई थी। 35% महिला कर्मचारी, 148 देशों के लोग काम कर रहे TCS के तिमाही फैक्टशीट के मुताबिक, IT सर्विसेज बिजनेस में स्वैच्छिक एट्रिशन रेट यानी, नौकरी छोड़ने की दर पिछले 12 महीनों के आधार पर 13.6% रही है। कंपनी ने हाल के क्वार्टर में इस स्तर को बड़े पैमाने पर बनाए रखा है। इसके साथ ही कुल वर्कफोर्स में महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी 35% है। कंपनी में कुल 148 अलग-अलग देशों के लोग काम करते हैं। ऑपरेशंस रेवेन्यू 14% बढ़ा, ₹12 अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी कंपनी का नेट प्रॉफिट एक साल पहले की समान तिमाही के 12,760 करोड़ रुपए के मुकाबले 5% बढ़कर 13,349 करोड़ रुपए रहा है। इस अवधि के दौरान ऑपरेशंस से मिलने वाला रेवेन्यू भी सालाना आधार पर 14% बढ़कर 72,275 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 12 रुपए प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी दी है और इसके लिए 15 जुलाई को रिकॉर्ड डेट तय किया है। 9.5 बिलियन डॉलर की डील्स में SKF के साथ एआई प्रोजेक्ट इस तिमाही में कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 9.5 बिलियन डॉलर रही है। इसमें SKF के साथ हुआ 800 मिलियन डॉलर का एआई-बेस्ड ट्रांसफॉर्मेशन सौदा शामिल है। इसके अलावा, कंपनी ने सर्विसनाउ के साथ एक मल्टी-मिलियन-डॉलर की स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप और यूरोप बेस्ड फॉर्च्यून ग्लोबल 50 कंपनी के साथ एक और डील साइन की है। मुनाफे को बनाए रखते हुए AI क्षमताओं को बढ़ाने पर फोकस TCS के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) समीर सेकसरिया ने कहा, “कंपनी ने कर्मचारियों के लिए सालाना वेतन वृद्धि लागू कर दी है। इसके साथ ही अपने पार्टनर इकोसिस्टम को मजबूत किया है और लॉन्ग-टर्म कॉम्पिटिटिवनेस को बेहतर बनाने के लिए टारगेटेड इन्वेस्टमेंट किए हैं।” उन्होंने आगे कहा कि कंपनी प्रॉफिटेबिलिटी और रिटर्न रेशियो को बनाए रखते हुए AI-बेस्ड कैपेबिलिटीज को बनाने, हासिल करने या पार्टनरशिप करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। नॉलेज पार्ट: क्या होता है ‘एट्रिशन रेट’ और ‘रिकॉर्ड डेट’?

2026 का सबसे बड़ा IPO लॉन्च करेगा SBI फंड्स:प्राइस बैंड ₹545-574 तय, 14 जुलाई से खुलेगा इश्यू; ₹11,693 करोड़ जुटाने का टारगेट

भारतीय शेयर बाजार में इस साल का सबसे बड़ा IPO आने जा रहा है। स्टेट बैंक की सब्सिडियरी कंपनी SBI फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड ने इसके लिए बुधवार देर रात अपना RHP यानी, रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस फाइल किया। कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए 11,693 करोड़ रुपए तक जुटाएगी। 14 जुलाई को खुलेगा IPO, प्राइस बैंड ₹545 रुपए से ₹574 रुपए इस IPO के लिए शेयर का प्राइस बैंड 545 रुपए से 574 रुपए तय किया गया है। इस प्राइस बैंड के ऐलान से पहले अनलिस्टेड मार्केट में कंपनी के शेयर करीब 830 रुपए प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे थे। यह एसेट मैनेजमेंट कंपनी अपना पब्लिक इश्यू सब्सक्रिप्शन के लिए 14 जुलाई को खोलेगी। प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 1.17 लाख करोड़ रुपए पहुंच जाएगा। प्रमोटर्स अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे, पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल यह IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है। इसमें SBI अपनी 6.3% हिस्सेदारी के बराबर यानी 12.83 करोड़ शेयर बेचेगा। वहीं, इसकी जॉइंट वेंचर पार्टनर अमुंडी इंडिया होल्डिंग अपनी 3.7% हिस्सेदारी के बराबर यानी 7.56 करोड़ शेयर ओपन मार्केट में ऑफलोड करेगी। वर्तमान में SBI और अमुंडी के पास कंपनी की करीब 98% हिस्सेदारी है। शुरुआत में अमुंडी की यह हिस्सेदारी सोसिते जेनेराल SA के पास थी, जिसे जून 2011 में अमुंडी को ट्रांसफर किया गया था। यह इस साल का पहला एक बिलियन डॉलर से बड़ा IPO होगा। मार्केट सेंटिमेंट: ट्रम्प के बयान से बाजार में गिरावट, लेकिन टाइमलाइन पर असर नहीं पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद पिछले महीने कई बड़े IPO फाइल किए गए थे। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को ईरान के साथ सीजफायर खत्म करने की बात की। इससे भारतीय बाजार का सेंटिमेंट प्रभावित हुआ है। बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी में 2% से ज्यादा की गिरावट आई, जो मार्च के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट है। बाजार में अनिश्चितता रहेगी, लेकिन हमारा भरोसा कायम कंपनी के नमैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर देवाशीष मिश्रा ने कहा, “बाजार हमेशा अनिश्चित रहेगा, लेकिन हमारी कंपनी में लोगों का भरोसा हमेशा बना रहेगा। अगर बाजार के हालात मौजूदा स्थिति से भी बदतर होते, तो भी हमारे लॉन्च की टाइमलाइन पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि इस IPO से कंपनी को बाजार में जरूरी विजिबिलिटी मिलेगी। इससे हम ज्यादा जिम्मेदार और पारदर्शी बनेंगे, जिससे म्यूचुअल फंड की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। फाइनेंशियल परफॉर्मेंस: ₹29 लाख करोड़ के एसेट्स के साथ देश का सबसे बड़ा एसेट मैनेजर कंपनी की 2026 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, SBI फंड्स म्यूचुअल फंड बिजनेस में 1.8 करोड़ यूनिक निवेशकों को अपनी सेवाएं देता है और कुल 128 म्यूचुअल फंड स्कीम्स मैनेज करता है। यह कुल ₹29 लाख करोड़ से अधिक के एसेट के साथ भारत का सबसे बड़ा एसेट मैनेजर है। कंपनी का तीन सालों का वित्तीय लेखा-जोखा वित्त वर्ष 2026 में रेवेन्यू ₹4,390 करोड़ रहा। ये वित्त वर्ष 2025 के ₹3,598 करोड़ से 22% ज्यादा है। मुनाफा 21% बढ़कर ₹3,067 करोड़ पहुंच गया जो पहले ₹2,540 करोड़ था। वहीं वित्त वर्ष 2024 में कंपनी ने ₹2,691 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹2,073 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था। टाइमलाइन: 18 जुलाई को अलॉटमेंट और 21 जुलाई को होगी लिस्टिंग SBI फंड्स के IPO का अलॉटमेंट 18 जुलाई को फाइनल होने की उम्मीद है। इसके बाद कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 21 जुलाई को NSE और BSE दोनों पर की जाएगी। नॉलेज पार्ट: क्या होता है ‘रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस’ (RHP) रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस वह आधिकारिक दस्तावेज होता है जिसे कोई भी कंपनी अपना IPO लाने से पहले मार्केट रेगुलेटर के पास जमा करती है। इस दस्तावेज में कंपनी के बिजनेस ऑपरेशन, वित्तीय स्थिति, प्रमोटर्स की जानकारी और IPO की वजहों की पूरी डिटेल होती है।

एअर इंडिया दुनिया की चौथी ऑन-टाइम एयरलाइन बनी:जून में 86.85% फ्लाइट्स टाइम पर पहुंचीं; सिंगापुर एयरलाइंस और एमिरेट्स को पीछे छोड़ा

टाटा ग्रुप की एअर इंडिया दुनिया की चौथी सबसे पंक्चुअल (समय की पाबंद) एयरलाइंस बन गई है। एविएशन एनालिटिक्स फर्म सिरियम की जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, एअर इंडिया की लगभग 86.85% फ्लाइट्स यानी 100 में से 87 उड़ानें बिल्कुल तय समय पर पहुंची हैं। टाटा ग्रुप की स्वामित्व वाली एयरलाइन ने जून महीने में अपनी कुल 15,135 उड़ानें ऑपरेट कीं। एअर इंडिया ने सिंगापुर एयरलाइंस और एमिरेट्स को पीछे छोड़ा है। एविएशन के नियमों के मुताबिक, कोई फ्लाइट अपने तय समय से 15 मिनिट में उड़ान भर लेती है, तो उसे राइट टाइम माना जाता है। साउदिया पहले और कोरियन एयर दूसरे नंबर पर रही सिरियम के अनुसार, ग्लोबल रैंकिंग में एअर इंडिया से आगे सिर्फ तीन एयरलाइंस रहीं। इसमें साउदिया 92.38% के साथ पहले, कोरियन एयर 88.56% के साथ दूसरे और एयरोमेक्सिको 86.94% के साथ तीसरे स्थान पर रही। एअर इंडिया (86.85%) के बाद टॉप-10 की लिस्ट में सिंगापुर एयरलाइंस, वेस्टजेट, एमिरेट्स, टर्किश एयरलाइंस, SAS और कतर एयरवेज शामिल हैं। कंप्लीशन फैक्टर 99.7% रहा, लगभग सभी उड़ानें ऑपरेट हुईं एअर इंडिया ने जून के महीने में 86.23% का ऑन-टाइम डिपार्चर (समय पर प्रस्थान) रेट भी हासिल किया है। इसके साथ ही एयरलाइन का कंप्लीशन फैक्टर 99.7% रहा, जिसका मतलब है कि जून में कंपनी की लगभग सभी तय उड़ानों को बिना रद्द किए ऑपरेट किया। एशिया-पैसिफिक रीजन की रैंकिंग की बात करें तो एयर इंडिया चौथे स्थान पर रही। इस रीजन में वह जेजू एयर, कोरियन एयर और स्कूट से पीछे रही, लेकिन सिंगापुर एयरलाइंस और भारत की ही इंडिगो से आगे निकल गई। नेटवर्क प्लानिंग और ऑपरेशनल रेजिलिएंस में निवेश से मिला फायदा एअर इंडिया ने कहा कि यह रैंकिंग एयरलाइन द्वारा ऑपरेशनल रिलायबिलिटी और शेड्यूल इंटीग्रिटी पर लगातार दिए जा रहे ध्यान को दर्शाती है। कंपनी ने इस सुधार का श्रेय ऑपरेशनल रेजिलिएंस, बेहतर नेटवर्क प्लानिंग और अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिचालनों में बेहतर एग्जीक्यूशन के लिए किए गए निवेश को दिया है। एयरलाइन अपने ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम के तहत लगातार इस परफॉर्मेंस को सुधारने में जुटी है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर कंजेशन से होती है दिक्कत देश के सबसे बड़े हब-एंड-स्पोक नेटवर्क्स में से एक को ऑपरेट करने की चुनौतियों पर एयर इंडिया ने बताया कि दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों पर भारी कंजेशन (भीड़भाड़) और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के प्रतिबंधों के कारण अक्सर परिचालन प्रभावित होता है। इन दो प्रमुख हब्स पर होने वाली देरी का असर बाद में पूरे नेटवर्क पर पड़ता है। DGCA के मई के आंकड़ों में एअर इंडिया तीसरे स्थान पर थी भारत के विमानन नियामक महानिदेशालय (DGCA) भी ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) को ट्रैक करता है, लेकिन उसके पास फिलहाल मई महीने का ही डेटा अवेलेबल है। DGCA देश के 10 प्रमुख एयरपोर्ट्स (बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, कोच्चि, गुवाहाटी और लखनऊ) पर घरेलू एयरलाइंस की समय पाबंदी को मापता है। मई में एयर इंडिया ग्रुप का ओटीपी 74.5% था और वह इंडिगो व अकासा एयर के बाद तीसरे नंबर पर था। मई के दौरान एयर इंडिया का सबसे अच्छा रिकॉर्ड चेन्नई में (89.5% उड़ानें समय पर) और सबसे खराब प्रदर्शन लखनऊ में (केवल 62.4% उड़ानें समय पर) रहा था। बेड़े में शामिल हुए 3 नए बोइंग विमान एअर इंडिया ने बताया कि उसने पिछले 6 महीनों के दौरान अपने बेड़े में तीन बोइंग 787-9 विमान शामिल किए हैं, जबकि कुछ और बोइंग 787-9 और एयरबस A350-1000 विमान इस साल के अंत तक बेड़े में शामिल होने वाले हैं। इसके अलावा, नए और रिफर्बिश्ड (नए जैसे किए गए) इंटीरियर वाले दो पुराने बोइंग 787-8 विमान वापस सेवा में लौट आए हैं, जबकि तीन अन्य विमानों का अमेरिका में अपग्रेडेशन चल रहा है। कंपनी का अनुमान है कि साल 2026 के अंत तक एयर इंडिया के वाइडबॉडी विमानों के 50% से अधिक बेड़े में नया या अपग्रेड किया गया इंटीरियर होगा। ——————– ये खबर भी पढ़ें… एअर इंडिया ने इंटरनेशनल उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज घटाया: नॉर्थ अमेरिका और यूरोप के टिकट ₹7,617 तक सस्ते होंगे; घरेलू उड़ानों में बदलाव नहीं टाटा ग्रुप की विमानन कंपनी एअर इंडिया ने नॉर्थ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और UK जाने वाली अपनी उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज कम करने का एलान किया है। PTI के सूत्रों के मुताबिक, कच्चे तेल के दामों में आई कमी के बाद एयरलाइन ने यह कदम उठाया है, जिससे इन रूटों पर अंतरराष्ट्रीय हवाई सफर करने वाले यात्रियों की जेब का बोझ कम होगा। नई दरें 1 जुलाई से प्रभावी हो गई हैं। हालांकि घरेलू उड़ानों पर कोई बदलाव नहीं किया गया है। पूरी खबर पढ़ें…

जड़ी-बूटियों, आयुर्वेदिक फॉर्मुलेशन के लिए क्लीनिकल ट्रायल जरूरी:लाइफ क्वालिटी बेहतर बनाने के लिए भारत ही नहीं, अब दुनियाभर में अपनाया जा रहा ‘साइंटिफिक-आयुर्वेद’

आयुर्वेद की प्रसिद्ध अवधारणा ‘दिनचर्या’ आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी आधुनिक जीवनशैली से पहले थी। तय समय पर जागना, सही वक्त पर खाना, कसरत, पूरी नींद और खान-पान में संयम इसका मूल मंत्र है। विज्ञान भी अब इन आदतों को सही मानता है, बस भाषा अलग है। मसलन सर्केडियन साइकल, मेटाबॉलिज्म और बिहेवियरल साइंस। इसी वैज्ञानिक सोच पर टिके आधुनिक आयुर्वेदिक ब्रांड कपिवा के संस्थापक और सीईओ अमीव शर्मा ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। पढ़िए मुख्य अंश: आपके नजरिए से विज्ञान आधारित आयुर्वेद क्या है? आज लोग लंबा जी तो रहे हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वे स्वस्थ भी हों। यहीं आयुर्वेद की सबसे बड़ी भूमिका है। लेकिन आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा का विकल्प मानना गलत होगा। गंभीर संक्रमण, हार्ट अटैक, कैंसर, ट्रॉमा जैसे हालात में एविडेंस-बेस्ड इलाज ही जरूरी है। इसका सही रास्ता है इंटीग्रेशन। आधुनिक चिकित्सा डायग्नोसिस (जांच) और इमरजेंसी केयर में आगे है, जबकि आयुर्वेद लाइफस्टाइल गाइडेंस और लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करता है। यही वजह है कि लाइफ क्वालिटी सुधारने के लिए अब भारत ही नहीं, पूरी दुनिया ‘साइंटिफिक-आयुर्वेद’ अपना रही है। आयुर्वेदिक ब्रांड्स को मिले-जुले रिस्पॉन्स के बीच कपिवा अपनी जगह कैसे बना रहा है? कपिवा नाम तीन आयुर्वेदिक दोष- कफ, पित्त और वात से बना है। पिछले पांच दशकों में कोई बड़ा आयुर्वेदिक ब्रांड नहीं उभरा। 2016 में शुरू हुई कपिवा आज सालाना ~500 करोड़ का टर्नओवर पार कर चुका है। इसमें से 70% कारोबार रिपीट ग्राहकों से आता है। अब कंपनी के प्रोडक्ट्स देश के 400 से ज्यादा शहरों में एक लाख से अधिक स्टोर्स में उपलब्ध हैं। ये डायबिटीज के मरीजों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। कंपनी अपनी एप ‘कपिवा डॉट इन’ के अलावा अमेजन जैसी साइट्स पर भी सप्लीमेंट सेगमेंट में अग्रणी है। कपिवा एम्स जैसे संस्थानों में डॉक्टरों के साथ भी काम करता है। यही नहीं, चीन में भी हर तीन में से एक प्रिस्क्रिप्शन में आयुर्वेदिक दवा शामिल होती है। ऐसा यूं ही नहीं है। कपिवा के चीफ इनोवेशन ऑफिसर डॉ. आर. गोविंदराजन एम फार्म और पीएचडी हैं। आयुर्वेद को लेकर आप जागरूकता कैसे बढ़ा रहे हैं? अब तक ‘वर्ड ऑफ माउथ’ ही कंपनी की सबसे बड़ी ताकत रही है। पिछले 10 वर्षों में कंपनी हर महीने करीब पांच लाख लोगों तक पहुंच रही है। अब हम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी गंभीरता से फोकस कर रहे हैं। विज्ञान की आधुनिक दुनिया में आयुर्वेद एलोपैथी से कैसे मुकाबला करेगा? इस मामले में इंटीग्रेशन की जरूरत है। आयुर्वेद के लिए वैज्ञानिक सत्यापन जरूरी है। सिर्फ पुराना होने से कोई भी नुस्खा कारगर नहीं हो जाता। कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और फॉर्मुलेशन की सुरक्षा, सही खुराक और असर साबित करने के लिए सख्त क्लीनिकल ट्रायल जरूरी है। इस दिशा में रिसर्च बढ़ रही है। सबसे असरदार तरीकों को व्यापक स्वीकृति मिल रही है। हेल्दी एजिंग, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, स्ट्रेस रिडक्शन और सस्टेनेबल लिविंग आज दुनियाभर की प्राथमिकताएं बन चुकी हैं। यही वे क्षेत्र हैं, जहां आयुर्वेद का योगदान मायने रखता है।

सोना ₹1,306 बढ़कर ₹1.44 लाख पर पहुंचा:इस साल ₹10 हजार महंगा हुआ, चांदी ₹2,244 बढ़कर ₹2.24 लाख किलो हुई

सोने-चांदी के दाम में 9 जुलाई को बढ़त रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 1,306 रुपए बढ़कर 1.44 लाख रुपए हो गया है। वहीं, 1 किलो चांदी का दाम 2,244 रुपए बढ़कर 2.24 लाख रुपए पर पहुंच गई है। सोना इस साल ₹10,457 महंगा हुआ इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 10,457 रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.44 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 6,626 रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.24 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

स्मार्टफोन-लैपटॉप सस्ते हो सकते हैं:सरकार ने लीथियम-आयन सेल और डिस्प्ले पर कस्टम ड्यूटी माफ की, मार्च 2029 तक छूट मिलेगी

केंद्र सरकार ने देश में स्मार्टफोन, लैपटॉप, वियरेबल्स (स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड) और स्मार्ट टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान से बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) हटा दी है। इससे स्मार्टफोन, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी सस्ते हो सकते हैं। अब डिस्प्ले असेंबली, लीथियम-आयन सेल और इंडक्टर कॉयल मॉड्यूल के मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले सामानों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी। सरकार ने घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए ये कदम उठाया है। मार्च 2029 तक लागू रहेगी छूट, कंपनियों की लागत कम होगी इन खास प्रोडक्शन मशीनों के इम्पोर्ट पर अब नहीं देना होगा कोई टैक्स ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट की नई लिस्ट में इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी बनाने वाली लगभग सभी जरूरी चीजें शामिल हैं। अब कंपनियों को पाउडर ड्रायर, ऑटोमैटिक फीडिंग और ब्लेंडिंग सिस्टम, स्लरी ट्रांसफर सिस्टम, कैथोड और एनोड एक्सट्रूज़न कोटिंग मशीनें, कम्प्रेशन इक्विपमेंट और हाई वैक्यूम पंप मंगाने पर टैक्स नहीं देना होगा। इसके अलावा वाइंडिंग मशीन, इलेक्ट्रोड कटिंग और स्लिटिंग मशीन, टेस्टिंग मशीन, ऑटो-पैकिंग सिस्टम, सेपरेटर कोटिंग मशीन और स्टैकिंग मशीन भी इस छूट के दायरे में आएंगी। स्मार्टफोन, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी हो सकते हैं सस्ते इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिस्प्ले असेंबली और लीथियम-आयन सेल किसी भी स्मार्टफोन, लैपटॉप या स्मार्ट टीवी की कुल लागत का एक बहुत बड़ा हिस्सा होते हैं। इन पर बेसिक कस्टम ड्यूटी हटने से कंपनियों को मैन्युफैक्चरिंग में बड़ी राहत मिलेगी। आने वाले समय में कंपनियां इसका फायदा ग्राहकों को ट्रांसफर कर सकती हैं, जिससे भारत में बने इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स की कीमतें कम हो सकती हैं। PLI स्कीम को सपोर्ट करना और इम्पोर्ट पर निर्भरता घटाना है मकसद सरकार का यह फैसला इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए चल रही प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI स्कीम के उद्देश्यों के लिए सही है। अभी में भारत को डिस्प्ले असेंबली और लीथियम-आयन सेल जैसी प्रमुख चीजों के लिए बड़े पैमाने पर दूसरे देशों (विशेषकर चीन और वियतनाम) पर निर्भर रहना पड़ता है। इस ड्यूटी छूट के बाद स्थानीय स्तर पर प्रोडक्शन बढ़ेगा, जिससे विदेशी देशों पर भारत की निर्भरता कम हो जाएगी। क्या होती है बेसिक कस्टम ड्यूटी? बेसिक कस्टम ड्यूटी यानी BCD वह टैक्स है जो देश के बाहर से आने वाले सामानों के इम्पोर्ट पर लगाया जाता है। इसे हटाने का मतलब है कि अब कंपनियां विदेशों से कच्चा माल बिना किसी अतिरिक्त टैक्स के मंगा सकेंगी और भारत में फाइनल प्रोडक्ट तैयार करेंगी।

सेंसेक्स 238 अंक चढ़कर 76,742 पर बंद:निफ्टी में 81 अंक की बढ़त रही, रियल्टी और मीडिया शेयर्स में ज्यादा खरीदारी

शेयर बाजार में आज यानी 9 जुलाई को बढ़त रही। सेंसेक्स 238 अंक की तेजी के साथ 76,742 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 81 अंक की बढ़त रही, ये 23,963 पर बंद हुआ। रियल्टी और मीडिया शेयर्स में आज ज्यादा खरीदारी रही। एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार अमेरिकी बाजार में कल गिरावट रही थी विदेशी निवेशकों ने कल 790 करोड़ के शेयर खरीदे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले कल यानी 8 जुलाई को शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली थी। सेंसेक्स 1677 अंक या 2.15% गिरकर 76,504 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 516 अंक या 2.12% गिरकर 23,882 पर बंद हुआ।

प्याज-टमाटर के दाम बढ़े, जून में वेज थाली 5% महंगी:नॉनवेज-थाली की कीमतों में भी इजाफा, मौसम की मार से दालों के दाम बढ़ेंगे

घर पर तैयार होने वाली वेज थाली की एवरेज कीमत देशभर में 5% बढ़कर 28.4 रुपए हो गई है। पिछले साल जुलाई-2025 में वेज थाली की कीमत 28.1 रुपए थी। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मंथली रिपोर्ट में बताया कि, जून-2026 में टमाटर, प्याज, खाने का तेल और रसोई गैस सिलेंडर महंगा होने से थाली की कीमत बढ़ी है। महंगाई से आलू की कीमतों में आई गिरावट के असर भी खत्म हो गया। एजेंसी की राइस रोटी रेट (RRR) रिपोर्ट के मुताबिक, चिकन की सप्लाई घटने से नॉन-वेज थाली की कीमत भी जून में 6% महंगी हुई है। वहीं, मौसम की मार के कारण आने वाले दिनों में दालों की कीमत भी बढ़ सकती हैं। मई के मुकाबले जून में भी बढ़ी थाली की कीमत अगर महीने-दर-महीने (मई 2026 के मुकाबले जून 2026) के आधार पर देखें, तो वेज थाली 4% और नॉन-वेज थाली 3% महंगी हुई है। इस दौरान मासिक आधार पर टमाटर के दाम 17%, आलू के 5% और प्याज के दाम 8% बढ़े हैं, जिससे थाली की लागत ऊपर गई। वहीं कम सप्लाई के बीच ब्रॉयलर की कीमतों में भी महीने-दर-महीने के आधार पर 2% की बढ़त अनुमानित है। मिडिल ईस्ट संकट से LPG और खाद्य तेल 10% महंगे क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर पुशन शर्मा के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच चल रही जंग के कारण ग्लोबल लेवल पर सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इससे खाने का तेल और LPG सिलेंडर की कीमतों में सालाना आधार पर 10-10% की बढ़ी है। इससे दोनों थाली के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। टमाटर 31% महंगा, ₹42 किलो हुआ, आलू 14% सस्ता जून 2025 में जो टमाटर ₹32 प्रति किलो था, वह जून 2026 में 31% महंगा होकर ₹42 प्रति किलो पर पहुंच गया है। टमाटर महंगा होने की वजह फरवरी-मार्च में ज्यादा तापमान के कारण गर्मियों की फसल की बुआई में देरी और कम रोपाई है। दूसरी तरफ, ज्यादा कीमत वाले रबी के स्टॉक के बाजार में आने से प्याज की कीमतें भी सालाना आधार पर 2% बढ़ी हैं। हालांकि, नई रबी फसल के आने से आलू की कीमतों में 14% की गिरावट आई है, जिससे थाली की लागत कम करने में मदद मिली। गर्मी से ब्रॉयलर की सप्लाई घटी, नॉन-वेज थाली 7% महंगी नॉन-वेज थाली की कीमत बढ़ने का सबसे बड़ा कारण ब्रॉयलर (चिकन) की कीमतों में सालाना आधार पर हुआ 7% का इजाफा है। नॉन-वेज थाली की कुल लागत में ब्रॉयलर का हिस्सा करीब 50% होता है।
जून में भीषण गर्मी के चलते पक्षियों की मृत्यु दर बढ़ गई, उनका वजन कम हुआ और पोल्ट्री फार्म्स ने नए चूजों को रखने में कम रुचि दिखाई। इससे बाजार में ब्रॉयलर की सप्लाई काफी कम हो गई और दाम बढ़ गए। फसलों को नुकसान से दालें महंगी रहेंगी पुशन शर्मा ने बताया कि उड़द और मूंग का पुराना स्टॉक (ओपनिंग स्टॉक) पहले से ही कम है। इसके साथ ही कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में मौसम की मार के कारण दालों की पैदावार को नुकसान हुआ है, जिससे आगे भी दालों की कीमतों में तेजी रहने की आशंका है। इसी तरह, प्रमुख उत्पादक राज्यों में लगातार बारिश की कमी के कारण बुआई में देरी और नमी के तनाव से खरीफ की प्याज और टमाटर की पैदावार घट सकती है। प्याज और टमाटर के दाम ऊंचे रहने के आसार कम रबी सप्लाई और खरीफ की आवक में देरी के कारण मध्यम अवधि में प्याज की कीमतें मजबूत रहने की उम्मीद है। इसके साथ ही, खरीफ की बुआई में देरी और सीजनल तौर पर कम सप्लाई के चलते जुलाई और अगस्त के दौरान टमाटर के दाम भी ऊंचे बने रह सकते हैं। सितंबर में खरीफ की आवक बढ़ने से मिल सकती है राहत रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई के दौरान टमाटर की कीमतें काफी संवेदनशील बनी रहेंगी, क्योंकि मुख्य उत्पादक क्षेत्रों में मानसून के कारण लॉजिस्टिक्स में कोई भी बाधा या फसल को नुकसान होने से सप्लाई और घट सकती है, जिससे कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। हालांकि, सितंबर महीने से दक्षिण और पश्चिमी क्षेत्रों से खरीफ की आवक बेहतर होने के साथ कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। यह सुधार इस बात पर निर्भर करेगा कि मानसून की बारिश का वितरण कैसा रहता है, फसल की सेहत कैसी है और सप्लाई बिना किसी रुकावट के बाजार तक पहुंचती है या नहीं।

माइक्रोसॉफ्ट ने सॉफ्टवेयर बेचने दुनिया को स्क्रीन से चिपकाया:सीईओ श्रीनिवास का दावा – ‘बिल गेट्स ने दुनिया को 9-5 की जॉब में फंसाया

क्या आप भी सुबह 9 से शाम 5 बजे तक कंप्यूटर के सामने बैठकर डेस्क जॉब करते हैं? अगर हां, तो परप्लेक्सिटी एआई के सीईओ अरविंद श्रीनिवास का दावा आपको चौंका सकता है। श्रीनिवास का कहना है कि यह 9 से 5 की डेस्क जॉब इंसानी काम का कोई स्वाभाविक विकास नहीं है, बल्कि माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स द्वारा तैयार की गई एक बेहद सफल बिजनेस स्ट्रैटजी थी। हाल ही में मशहूर पॉडकास्ट ‘द जो रोगन एक्सपीरियंस’ में बातचीत के दौरान श्रीनिवास ने यह दावा किया। उन्होंने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने अपने सॉफ्टवेयर बेचने के लिए जानबूझकर ‘आधुनिक ऑफिस वर्कर’ का कॉन्सेप्ट तैयार किया था। श्रीनिवास ने कहा, ‘माइक्रोसॉफ्ट ने ऑफिस वर्कर की इस पूरी अवधारणा को सिर्फ इसलिए खड़ा किया क्योंकि वे अपना ऑफिस सॉफ्टवेयर बेचना चाहते थे। बिल गेट्स का मिशन ही यही था कि हर डेस्क पर एक पीसी (कंप्यूटर) हो और लोग उससे चिपके रहें।’ उन्होंने आगे बताया कि दिनभर डेस्क पर बैठकर स्क्रीन को घूरते रहने वाले इस वर्क कल्चर को सुनियोजित तरीके से नीचे से ऊपर तक तैयार किया गया था। सीईओ श्रीनिवास का यह दावा सुनकर पॉडकास्ट के होस्ट जो रोगन भी हैरान रह गए। रोगन ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘वाह! इस तरह की लाइफस्टाइल बहुत ही हालिया चीज है जिसे हम सबने अब सामान्य मान लिया है। माइक्रोसॉफ्ट ने इस मामले में सटीक निशाना लगाया।’ परप्लेक्सिटी प्रमुख श्रीनिवास ने समझाया कि इस रणनीति के तहत कॉरपोरेट जगत में आने से पहले ही पीढ़ियों को माइक्रोसॉफ्ट के उत्पादों का आदी बनाया गया। उन्होंने कहा, ‘यही वजह है कि हम सभी को बचपन से माइक्रोसॉफ्ट वर्ड और एक्सेल का इस्तेमाल करना सिखाया गया। एक बार जब आप यह सीख गए, तो आप किसी ऐसी कंपनी में काम करने के लिए तैयार हो गए जिसके डेस्क पर पीसी हो और जो माइक्रोसॉफ्ट को सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने के पैसे दे रही हो।’ स्कूलों और शुरुआती कॉरपोरेट कल्चर में वर्ड और एक्सेल को अनिवार्य बनाकर माइक्रोसॉफ्ट ने मुनाफे का एक कभी न खत्म होने वाला चक्र तैयार कर लिया। गेट्स का मकसद जॉब्स की तरह कंप्यूटिंग को सुंदर बनाना नहीं था – सीईओ अरविंद श्रीनिवास ने बिल गेट्स के आक्रामक कॉरपोरेट विजन की तुलना एपल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स से की। उन्होंने कहा कि जहां स्टीव जॉब्स का ध्यान सुंदर, आकर्षक और आसान मशीनें बनाने पर था, वहीं माइक्रोसॉफ्ट का लक्ष्य केवल मुनाफा कमाना था। श्रीनिवास ने कहा, ‘जैसा स्टीव जॉब्स सोचते थे। उन्हें सिर्फ कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर बेचने की परवाह थी, क्योंकि ज्यादा सॉफ्टवेयर बेचने से ही आप अमीर बनते हैं।’