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बिजनेस शहरों में कॉफी क्रेज; 1200+ कैफे बेंगलुरु में:कॉफी स्टार्टअप्स की नई रेस; सेलेब्स कर रहे निवेश, विदेशी ब्रांड भी भारतीय मार्केट में उतरे

भारत में अब लोग सिर्फ कॉफी नहीं, बेहतर कॉफी की तलाश कर रहे हैं। स्पेशलिटी कॉफी यानी चुनिंदा बीन्स से बनी प्रीमियम कॉफी, जिसकी पहचान उसके स्वाद, गुणवत्ता और बनाने के तरीके से होती है। इसी बदलती पसंद की वजह से पिछले 10 वर्षों में यह बाजार करीब ₹11,000 करोड़ तक पहुंच गया है। 2016 के बाद 100 से ज्यादा नए स्पेशलिटी कॉफी ब्रांड शुरू हुए हैं। स्पेशलिटी कॉफी की सबसे बड़ी ताकत मिलेनियल और जेन-जी हैं। यही वर्ग नई चीजें आजमाने, प्रीमियम उत्पादों पर खर्च करने और कैफे को सोशल स्पेस की तरह इस्तेमाल करने में सबसे आगे है। इसी वजह से अब कई सेलेब्रिटीज भी इस बिजनेस में उतर रहे हैं। विराट से दीपिका तक ये सेलेब्रिटी कॉफी स्टार्टअप्स पर लगा रहे दांव – विराट कोहली रेज कॉफी में निवेशक और ब्रांड एंबेसडर हैं। ब्रांड को तेजी से बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। – दीपिका पादुकोण ब्लू टोकई कॉफी रोस्टर्स में निवेश किया है। स्पेशलिटी कॉफी ब्रांड में बड़ा नाम है। – निखिल कामत ‘सबको’और ‘थर्ड वेव कॉफी’ जैसे भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश। – राणा दग्गुबाती हैदराबाद के कॉफी स्टार्टअप कथा कॉफी के शुरुआती निवेशकों में शामिल हैं। – रकुल प्रीत सिंह कनाडा की प्रसिद्ध कैफे ब्रांड ब्लेंज कॉफी के भारत विस्तार में साझेदारी की है। दक्षिण भारत से उत्तर की ओर बढ़ रहा बाजार बेंगलुरु – 1200 से अधिक कैफे, देश में सबसे ज्यादा
यह देश का कॉफी हब है। यहां 1200 से ज्यादा कैफे मौजूद हैं, यानी हर 11 हजार लोगों पर एक कैफे, जो भारत में सबसे अधिक है। चेन्नई – प्रति व्यक्ति कॉफी की खपत में सबसे आगे
यहां प्रति व्यक्ति सालाना करीब 2.4 किलोग्राम कॉफी की खपत होती है, जो देश में सबसे अधिक है। यह देश की ‘फिल्टर कॉफी कैपिटल’ भी है। दिल्ली – भविष्य का सबसे तेज बढ़ता कॉफी बाजार बन रहा यहां कॉफी बाजार 22% सालाना की दर से बढ़ रहा है, जो बड़े शहरों में सबसे अधिक है। यह भविष्य का सबसे तेज बढ़ता बाजार है। बड़ी कॉफी कंपनियों की नजर अब भारत पर -2000 के दशक में कैफे कॉफी डे, स्टारबक्स व कॉस्टा कॉफी ने भारतीयों को कैफे जाने की आदत डाली। अब नई पीढ़ी के ब्रांड्स ने स्पेशलिटी कॉफी को लोकप्रिय बनाया है। – पिछले 10 वर्षों में कम से कम 6 बड़े विदेशी कॉफी ब्रांड भारत आए हैं। कनाडा का टिम हॉर्टन्स (2022) और ग्रीस का कॉफी आइलैंड (2025) इनमें प्रमुख ब्रांड हैं। (सोर्स: ब्लू टोकाई, सेकेंडरी रिसर्च, Inc42)

स्विगी इंस्टामार्ट से सड़े अंडे, खराब दूध मिलने का आरोप:शिकायत करने वाले को रिफंड करके मामला दबाया, FSSAI ने 9 नोटिस जारी किए

फूड रेगुलेटर FSSAI ने क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्विगी इंस्टामार्ट को 9 नोटिस जारी किए हैं। FSSAI को शिकायत मिली थी कि प्लेटफॉर्म ने उन्हें सड़े अंडे, खराब दूध और एक्सपायरी डेट वाले पैक्ड फूड डिलीवर किया। FSSAI ने स्विगी इंस्टामार्ट से इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण और कम्पलायंस रिपोर्ट मांगी है। यदि कंपनी तय समय में सही जवाब नहीं देती है, तो उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। बच्चे का खराब खाना वापस लेकर दोबारा भेजा FSSAI ने ग्राहकों से मिली शिकायतों की डिटेल साझा करते हुए बताया कि एक बेहद गंभीर मामले में बच्चों के खाने का प्रोडक्ट बेहद खराब और असुरक्षित हालत में डिलीवर किया गया था। इस प्रोडक्ट में खराबी थी और इसे गलत तरीके से स्टोरेज करने की बात सामने आई थी । इतना ही नहीं ग्राहक द्वारा इसे वापस करने के बाद भी कथित तौर पर इसी खराब प्रोडक्ट को दोबारा सप्लाई कर दिया गया। इसके अलावा, ग्राहकों ने स्विगी इंस्टामार्ट के जरिए खराब अंडे, खराब दूध और डैमेज पैकेज्ड फूड आइटम्स की डिलीवरी मिलने की भी शिकायतें की हैं। बिना वैलिड लाइसेंस के बिक रहा था सामान जांच के दौरान FSSAI ने पाया कि प्लेटफॉर्म पर वेंडर्स के ऑनबोर्डिंग और वेरिफिकेशन सिस्टम में बड़ी कमियां हैं। स्विगी इंस्टामार्ट पर कुछ ऐसे फूड बिजनेस लिस्टेड पाए गए जिनका FSSAI लाइसेंस नंबर या तो गलत था, इनवैलिड था या फिर था ही नहीं। इतना ही नहीं, कई फूड बिजनेस पार्टनर्स को उन नामों के तहत लिस्ट किया गया था जो उनके आधिकारिक FSSAI रजिस्ट्रेशन नाम से बिल्कुल अलग थे। इससे फूड प्रोडक्ट्स की ट्रेसिबिलिटी यानी वो सामान कहा आया है ये पता लगाना और उनकी क्वालिटी मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत पर गंभीर नहीं था प्लेटफॉर्म FSSAI के मुताबिक, ग्राहकों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज कराने या मामले को आगे बढ़ाने के बाद भी स्विगी इंस्टामार्ट की तरफ से कोई संतोषजनक रिस्पॉन्स या सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया। एक शिकायतकर्ता ने बताया कि फूड सेफ्टी से जुड़ी इतनी गंभीर चिंता पर ध्यान देने के बजाय प्लेटफॉर्म ने केवल पैसे रिफंड करके अपना पल्ला झाड़ लिया। FSSAI ने साफ किया है कि यह नोटिस सेलर ऑनबोर्डिंग, शिकायत निवारण सिस्टम और फूड सेफ्टी कम्प्लायंस सिस्टम की कमियों को उजागर करता है। FSSAI बोली- कई और कंपनियों पर भी एक्शन फूड रेगुलेटर पिछले कुछ समय से नियमों का उल्लंघन करने वाले फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) के खिलाफ काफी सख्त है। FSSAI ने स्विगी इंस्टामार्ट को दिए गए इन 9 नोटिस की जानकारी खुद अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करके दी है। रेगुलेटर ने बताया कि ये नोटिस ग्राहकों की शिकायतों के साथ-साथ खुद संज्ञान लेकर जारी किए गए हैं। हाल ही में FSSAI ने देश की कई बड़ी एनर्जी ड्रिंक्स निर्माताओं, शराब कंपनियों, फूड ब्रांड्स और अन्य क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को भी नियमों की अनदेखी के लिए नोटिस भेजे हैं। अगर आपको खराब खाना मिले तो क्या करें? ग्राहक FSSAI के ‘Food Safety Connect’ ऐप या नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन पर सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं। केवल रिफंड लेना समाधान नहीं है, एक्सपायर्ड खाना सेहत के लिए जानलेवा हो सकता है। भारत में तेजी से बढ़ रहा क्विक-कॉमर्स मार्केट भारत में क्विक-कॉमर्स मार्केट (स्विगी इंस्टामार्ट, ब्लिंकिट, जैप्टो) बहुत तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन ‘फास्ट डिलीवरी’ के चक्कर में डार्क स्टोर्स पर क्वालिटी चेक और प्रॉपर कोल्ड स्टोरेज की कमी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ——————————————————– ये खबर भी पढें… पाकिस्तान में पेट्रोल 13.18 और डीजल 13.80 रुपया महंगा:पेट्रोल 310.71 और हाई-स्पीड डीजल 323.30 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 11 जुलाई से लागू पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल के दाम में 13.18 रुपया (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल में 13.80 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 310.71 रुपया और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 323.30 रुपया लीटर हो गई है। नई कीमतें 11 जुलाई से लागू हो गई हैं। पूरी खबर पढ़ें…

इस हफ्ते सोने-चांदी के दाम में गिरावट रही:चांदी ₹13,468 गिरकर ₹2.20 लाख किलो पर आई, 10 ग्राम सोना ₹2,976 सस्ता हुआ

सोने-चांदी के दाम में इस हफ्ते गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 2,976 रुपए गिरकर 1.43 लाख रुपए हो गया है। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 4 जुलाई को 1.46 लाख रुपए पर था। वहीं, चांदी 2.34 लाख रुपए किलो से गिरकर 2.20 लाख रुपए पर आ गई है, इसकी कीमत 13,468 रुपए कम हुई। इससे पहले बीते महीने यानी जून में सोना-चांदी में गिरावट रही थी। बीते महीने सोना 15 हजार और चांदी 38 हजार रुपए सस्ती हुई थी। चांदी इस साल 1.66 लाख रुपए गिरी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 33 हजार रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए तक पहुंच गई थी। यह चांदी के अब तक की सबसे ज्यादा दाम थे। तब से अब तक 163 दिन में चांदी 1.66 लाख रुपए सस्ती हो गई है। सोने-चांदी के दाम में गिरावट की वजह ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

बिना डेटा वाले मोबाइल रिचार्ज प्लान सस्ते हो सकते हैं:ट्राई ने ड्राफ्ट पेश किया, सुझाव मांगे; 70% तक घट सकती हैं कीमतें

बिना डेटा वाले मोबाइल रीचार्ज प्लान सस्ते हो सकते हैं। दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) इस पर काम कर रहा है। TRAI ने ‘दूरसंचार उपभोक्ता संरक्षण विनियम, 2026’ का नया मसौदा जारी किया है। इसका मुख्य उद्देश्य है- ‘डेटा नहीं चाहिए, तो उसका पैसा क्यों दें?’ ट्राई ने इस पर सभी पक्षों से सुझाव मांगे हैं, फिर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। क्या है नया प्रस्ताव? अभी कंपनियां सीमित समय के लिए ही ‘केवल कॉल-SMS’ पैक देती हैं। इससे कई ग्राहकों को मजबूरी में डेटा वाला महंगा प्लान लेना पड़ता है। अब ट्राई ने प्रस्ताव दिया है कि कंपनियां जितने दिनों की वैधता जैसे 7, 28, 56 या 84 दिन का डेटा वाला प्लान लाती हैं, उतनी ही अवधि का ‘केवल कॉल व एसएमएस’ वाला प्लान भी लाना होगा। कीमतें कितनी कम होंगी? चूंकि मोबाइल प्लान्स में 50-70% खर्च डेटा का होता है, इसलिए नया नियम लागू होने पर सिर्फ कॉल-SMS वाले प्लान की कीमत आधी से भी कम हो सकती है। उदाहरण के लिए, 300 रुपए का प्लान 100 से 150 रुपए में मिल सकता है। फीचर फोन यूजर्स व बुजुर्गों को, जो डेटा इस्तेमाल नहीं करते। जो दूसरी सिम सिर्फ कॉल के लिए रखते हैं। इसके अलावा जिनके घरों में वाईफाई है। उनके लिए भी ये फायदेमंद रहेगा। 1600 और 140 सीरीज के जरूरी कॉल को ब्लॉक नहीं कर पाएंगे एप्स ट्राई ने साफ किया है कि ट्रूकॉलर जैसे कॉल मैनेजमेंट एप्स 1600 और 140 सीरीज वाले कॉल्स ब्लॉक नहीं कर सकते… कंपनियों को नए नियम लागू करने के लिए समय मिलेगा अंतिम कीमत टेलीकॉम कंपनियां तय करेंगी। नियम बनने के बाद कंपनियों को लागू करने के लिए समय दिया जाएगा। इससे दूरसंचार कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे यूजर्स के लिए सस्ते ऑप्शन मिलेंगे। सरकार को क्यों दखल देना पड़ा? इस ड्राफ्ट से साफ हो गया है कि ग्राहकों को सही रिचार्ज ऑप्शन नहीं मिल रहे थे, इसलिए सरकार और रेगुलेटर को बीच में आना पड़ा। अभी कंपनियां ग्राहकों को लंबी अवधि और महंगे प्लान खरीदने के लिए मजबूर करती हैं। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर से बिना वजह का आर्थिक बोझ खत्म हो सकता है। ट्राई इस नियम के लागू होने के 6 महीने बाद कंपनियों के कामकाज का रिव्यू भी करेगी। ——————————————————– बिजनेस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… इस हफ्ते सोने-चांदी के दाम में गिरावट रही:चांदी ₹13,468 गिरकर ₹2.20 लाख किलो पर आई, 10 ग्राम सोना ₹2,976 सस्ता हुआ सोने-चांदी के दाम में इस हफ्ते गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 2,976 रुपए गिरकर 1.43 लाख रुपए हो गया है। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 4 जुलाई को 1.46 लाख रुपए पर था। वहीं, चांदी 2.34 लाख रुपए किलो से गिरकर 2.20 लाख रुपए पर आ गई है, इसकी कीमत 13,468 रुपए कम हुई। पूरी खबर पढ़ें…

गडकरी बोले-E20 पेट्रोल से गाड़ी खराब, तो पुर्जे मुफ्त बदलें:कंपनियों को सरकार का आदेश; माना- इससे माइलेज घटा

20% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल से गाड़ी खराब होने पर कंपनियां फ्री में पार्ट्स बदलेंगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे E20 फ्यूल से प्रभावित पुरानी गाड़ियों (2023 से पहले की) के पार्ट्स को बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के बदलें। उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि E20 फ्यूल से सोशल मीडिया पर गाड़ियों के खराब होने या नुकसान की खबरें गलत हैं और यह एक झूठा नैरेटिव है। हालांकि, उन्होंने पुरानी गाड़ियों का माइलेज कम होने की बात मानी है। सर्विसिंग के दौरान मुफ्त बदले जाएंगे रबर वॉशर्स गडकरी ने कहा कि सर्विसिंग के लिए जाने वाली पुरानी कारों में पहले वॉशर्स मेटल (धातु) के बने होते थे, जबकि अब ये रबर के बनाए जा रहे हैं। हमने कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सर्विसिंग के दौरान ग्राहकों से बिना कोई एक्स्ट्रा चार्ज लिए इन वॉशर्स को बदला जाए। सोशल मीडिया पर चल रही खबरें मनगढ़ंत और झूठी गडकरी ने एथेनॉल से गाड़ियां खराब होने के दावों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, “मुझे एक भी ऐसी कार दिखाएं जो E20 फ्यूल की वजह से खराब हुई हो या जिसे कोई नुकसान पहुंचा हो। सोशल मीडिया पर जो कुछ भी चलाया जा रहा है, वह एक सोची-समझी रणनीति के तहत तैयार किया गया झूठा नैरेटिव है। अब तक ऐसी कोई भी कार नहीं मिली है, जो इस E20 पेट्रोल के कारण बंद पड़ी हो।” गडकरी ने बयान की 5 खास बातें भारत में क्यों हो रहा है E20 पेट्रोल का विरोध? भारत में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल के इस मिश्रण (E20) का विरोध हो रहा है। खासकर 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं। उनका दावा है कि इस फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं। ये खबर भी पढ़ें… E-20 पेट्रोल नीति पर केजरीवाल ने केंद्र सरकार को घेरा: बोले-30 करोड़ वाहनों को कबाड़ बनाने की जिद, दबाव में मारुति-टोयोटा ने बोला झूठ आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की ‘E-20 पेट्रोल’ नीति को लेकर भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है। केजरीवाल ने साफ लफ्जों में कहा कि सरकार पूरे देश पर जबरदस्ती E-20 पेट्रोल थोप रही है। जनता के भारी विरोध के बावजूद सरकार अपनी जिद पर अड़ी है और लगातार झूठ के पुलंदे बांध रही है। पूरी खबर पढ़ें… —————- सरकार का दावा- E-20 पेट्रोल से गाड़ियों को नुकसान नहीं: बेचने से पहले टेस्टिंग कराई; सुप्रीम कोर्ट में कहा था- अभी एक्सपेरिमेंट, रिजल्ट अगले साल पता चलेगा पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर हो रहे विरोध के बीच शनिवार को सरकार ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग का काम रातों-रात नहीं हुआ। यह एक जांची-परखी, साइंटिफिक और स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस और इससे गाड़ियों को कई नुकसान नहीं है। इसे पेट्रोल में मिलाने की ग्लोबल प्रैक्टिस अपनाई है और टॉप एजेंसियां भी इसकी टेस्ट कर चुकीं हैं। एथेनॉल ब्लेंडिंग पर दिल्ली में हुई इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट वर्तिका शुक्ला ने यह बात कही। वर्तिका शुक्ला ने बताया कि देश में साल 2013 और 2014 के दौरान पेट्रोल में सिर्फ 1.5% एथेनॉल मिलाया जा रहा था। पूरी खबर पढ़ें…

फेरारी इटली की मशहूर कार कंपनी:दो बार गंभीर आर्थिक संकट में फंस चुकी है, आज टॉप सुपर-कार ब्रांड में शामिल है

अगर आपके पास करोड़ों रुपए हैं, तो भी आप शोरूम जाकर अपनी पसंद की फेरारी कार नहीं खरीद सकते। इसके कुछ स्पेशल और लिमिटेड एडिशन मॉडल्स जैसे- फेरारी ला-फेरारी या हालिया पुरोसांग्वे एसयूवी को खरीदने के लिए पहले आपको अपना बैकग्राउंड बताना होगा। यहां तक कि हो सकता है कि कंपनी खुद तय करे कि वह आपको गाड़ी बेचेगी या नहीं। फेरारी को लेकर दीवानगी का आलम यह है कि अगर आज आप कोई कार बुक करते हैं तो 2028 या 2029 में वह आपको मिल पाएगी। फेरारी रफ्तार और लग्जरी का ऐसा संगम है जो इसे सुपर-कार बनाती है। हालांकि फेरारी के इतिहास में दो ऐसे संकट भी आए जब कंपनी दिवालिया होने के करीब पहुंच कर अस्तित्व के लिए जूझती नजर आई। 1969 में यह दिवालिया होने के कगार पर थी, लेकिन तब फिएट ने हिस्सेदारी खरीदकर इसे बचा लिया। असली चुनौती 1988 में इसके संस्थापक एंजो फेरारी के निधन के बाद आई। 80 के दशक के अंत में सट्टेबाजों की वजह से कारों की कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ गई थीं। इसे कलेक्टर बबल कहा गया। जब 90 के दशक में वैश्विक मंदी आई और यह बुलबुला फूटा, तो 1991 के पीक के मुकाबले 1993 तक इसकी बिक्री आधी रह गई। कारें अपनी साख खोने लगी थीं। 8.50 लाख करोड़ रुपए की कंपनी है फेरारी आज फेरारी दुनिया के सबसे मजबूत ऑटोमोटिव और सुपर-कार ब्रांड्स में से एक है। ब्रांड्स फाइनेंस की रिपोर्ट के अनुसार इसे दुनिया के सिर्फ 12 ब्रांड को मिलने वाली AAA+ रेटिंग हासिल है। आज यह करीब 8.50 लाख करोड़ रु. मूल्य की कंपनी है। वर्तमान में इसके दुनियाभर में करीब 5,718 कर्मचारी हैं। अगर भारत की बात करें तो यहां फेरारी की एक्स-शोरूम कीमत ₹3.76 करोड़ से शुरू होकर ₹10.37 करोड़ रु. तक जाती है। नई फेरारी कार के लिए ग्राहकों को दो साल तक की वेटिंग रहती है। देश में पूरा कोटा सोल्ड-आउट रहता है। शुरुआत – गाड़ियों के टेस्ट ड्राइवर ने रखी थी फेरारी की नींव इटली के मोदेना शहर में जन्मे और गाड़ियों के टेस्ट ड्राइवर एंजो फरारी ने 1939 में ऑटो एवियो कोस्त्रुजियोनी नाम से कंपनी शुरू की थी, लेकिन दूसरा विश्व युद्ध शुरू होने के कारण करीब 8 साल तक काम बंद रहा। इसके बाद 1947 में उन्होंने फेरारी नाम से पहली कार सड़क पर उतारी। कार रेसिंग उनका जुनून था। नए कदम – लाइफस्टाइल और फैशन के क्षेत्र में भी उतरी कंपनी कंपनी लाइफस्टाइल और फैशन के क्षेत्र में भी धूम मचा रही है। हाल ही में मिलान फैशन वीक में फेरारी कलेक्शन पेश किया गया। कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में कदम रख रही है, जिसके लिए मारानेलो में एक नई ‘ई-बिल्डिंग’ शुरू की गई है। इसके अलावा, मरीन इंजीनियरिंग और सेलिंग की दुनिया में भी प्रवेश की तैयारी कर रही है। यूं संकट में फंसी थी रेसिंग पर फोकस, ग्राहकों की अनदेखी – एंजो फेरारी का जुनून सिर्फ रेसिंग और फॉर्मूला वन जीतना था। इस रवैये के कारण उन्होंने कभी ग्राहकों की पसंद, आराम या लग्जरी को प्राथमिकता नहीं दी। लीडरशिप का अड़ियल रवैया, आंतरिक कलह – 1961 में एंजो की पत्नी ने प्रबंधन के कामों में दखल देना शुरू किया। जब अधिकारियों ने विरोध किया, तो एंजो ने कई प्रबंधकों को नौकरी से निकाल दिया। आर्थिक मंदी और कलेक्टर बबल का फूटना – 80 के दशक के अंत में लोग ये कारें निवेश के तौर पर खरीदते थे। 90 के दशक में मंदी की वजह से बिक्री आधी रह गई और कंपनी गहरे वित्तीय घाटे में डूब गई। भविष्य की रणनीति का अभाव – एंजो की मृत्यु के बाद फिएट के अधिकारियों ने कमान संभाली, लेकिन उनके पास कोई स्पष्ट रणनीति नहीं थी। इस तरह की वापसी लुका डि मोंटेजेमोलो की लीडरशिप – 1991 में लुका डि मोंटेजेमोलो फेरारी के चेयरमैन बने। सबसे पहले कारों की क्वालिटी को सुधारा। सुनिश्चित किया कि फेरारी सड़क पर भी आरामदायक और भरोसेमंद हो। ब्रांड लाइसेंसिंग का विस्तार – मोंटेजेमोलो ने लग्जरी कपड़े, घड़ियां, परफ्यूम और अन्य लाइफस्टाइल उत्पादों के लिए अपने मशहूर ‘प्रान्सिंग हॉर्स’ लोगो को लाइसेंस पर देकर करोड़ों रुपए कमाए। एक्सक्लूसिविटी बरकरार रखना – लुका की रणनीति स्पष्ट थी- ‘हमेशा बाजार की मांग से एक कार कम बनाओ। इस कृत्रिम कमी ने अमीरों के बीच फेरारी का आकर्षण कई गुना बढ़ा दिया पर्सनलाइजेशन – 1993 में ‘फेरारी चैलेंज’ शुरू किया, जो फेरारी मालिकों के लिए एक एमेच्योर रेसिंग सीरीज थी। कई भारी पर्सनलाइजेशन के विकल्प दिए। ऐसे पड़ा नाम – कंपनी का नाम इसके संस्थापक एंजो फेरारी के सरनेम पर रखा गया है। रेसिंग शौकीन एंजो ने खुद ही यह नाम तय किया था। सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी – लैंबॉर्गिनी, मैकलारेन, पॉर्श, एस्टन मार्टिन और बुगाटी दुनियाभर में इसके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों में हैं। – 3.5 लाख कारें ही बनाई हैं फेरारी ने आज तक।
– 60 से ज्यादा देशों में व्यापार करती है कंपनी दुनियाभर में।
– 179 अधिकृत डीलर हैं दुनियाभर में फेरारी के।
-13,640 कारें बिकी कंपनी की 2025 में विभिन्न देशों में।

चांदी आज ₹3,404 सस्ती, इस महीने ₹5,040 गिरी:सोना ₹288 घटकर ₹1.43 पर आया; जानें अपने शहर के दाम

सोने-चांदी की कीमतों में 10 जुलाई को गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 3,404 रुपए घटकर 2,20,390 रुपए पर आ गई है, जो गुरुवार को 2,23,794 रुपए पर थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 288 रुपए घटकर 1,43,368 लाख रुपए आ गया। इससे पहले 9 जुलाई को यह 1,43,656 लाख पर था। सोना के दाम इस महीने 1,736 रुपए बढ़े हैं, जबकि चांदी की कीमत 5,040 रुपए गिरी है। 1 जुलाई को सोना ₹1.42 लाख/10 ग्राम और चांदी ₹2.25 लाख/किलो थी। अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें ऑल टाइम हाई से 1.66 लाख रुपए गिरी चांदी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 32,753 रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 162 दिन में चांदी 1.66 लाख रुपए सस्ती हो गई है। सोना-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़कर 15% हुई केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी है। सरकार का मकसद विदेशी खरीद कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को घटाना है। अमेरिकी-ईरान जंग के बीच सरकार ने ये फैसला लिया है। सरकार ने सोने पर 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) लगाया है। इस तरह कुल प्रभावी टैक्स 15% हो गया है। इससे पहले 2024 के बजट में वित्त मंत्री सीतारमण ने इंपोर्ट ड्यूटी 15% से घटाकर 6% की थी। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें…

ओपनएआई कर्मियों ने बेचे शेयर, पैसा रियल एस्टेट में:सैन फ्रांसिस्को में घरों के औसत दाम 17 करोड़ तक; गैर-टेक परिवार शहर छोड़ रहे

सैन फ्रांसिस्को के डुबोसे ट्राएंगल इलाके में एक आलीशान फ्लैट की कीमत करीब 30 करोड़ डॉलर (2,864 करोड़) रखी गई थी। दिलचस्प बात यह थी कि विक्रेता कैश की जगह ओपनएआई या एंथ्रोपिक के शेयर लेने के लिए भी तैयार था। यह अकेला किस्सा नहीं, बल्कि एआई से आ रहे पैसे का असर है, जो पूरे शहर की तस्वीर बदल रहा है। रियल एस्टेट फर्म रेडफिन के मुताबिक मई में शहर में घरों की औसत कीमत रिकॉर्ड 17.6 लाख डॉलर (16.8 करोड़) तक पहुंच गई, जबकि पूरे अमेरिका में यह औसत महज करीब 4 लाख डॉलर (3.8 करोड़) है। मार्च में शहर के घरों की कीमत 19% बढ़ी, अप्रैल-मई में भी 14% से ज्यादा की तेजी बनी रही। रेडफिन की चीफ इकोनॉमिस्ट डैरिल फेयरवेदर के मुताबिक, यह उछाल सीधे-सीधे एआई कंपनियों के कर्मचारियों की दौलत से जुड़ा है। पिछले साल अक्टूबर में ओपनएआई के 600 से ज्यादा मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों ने कुल 63,000 करोड़ के शेयर बेचे थे यानी औसतन 105 करोड़ प्रति व्यक्ति। एंथ्रोपिक में भी कर्मचारियों को करीब 57,000 करोड़ के शेयर बेचने की इजाजत मिली थी। एजेंट्स का कहना है कि बोली की जंग अब आम बात हो गई है, जिसमें अक्सर मकान पूछी गई कीमत से लाखों डॉलर ज्यादा में बिकते हैं। नकद भुगतान वाली डील्स भी तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर महंगे इलाकों में। हालांकि हर कोई इस तेजी में साथ नहीं है। बर्कले यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री एनरिको मोरेटी के मुताबिक, अभी एआई बूम का शुरुआती दौर है। मेटा जैसी कंपनियों में हो रही छंटनी इस तेजी पर लगाम भी लगा सकती है। उनका यह भी कहना है कि ओपनएआई और एंथ्रोपिक के आने वाले शेयर मार्केट लिस्टिंग से होने वाली ज्यादातर कमाई कर्मचारियों को नहीं, बल्कि दुनियाभर में फैले निवेशकों को मिलेगी। इस बीच शहर के दो परिवारों की कहानी इस बदलाव का दूसरा पहलू दिखाती है। एक परिवार, जिसमें एक सदस्य ओपनएआई में काम करता है, शेयर बेचकर अपने ही इलाके में घर खरीद पाया। वहीं दूसरा गैर-टेक परिवार शहर छोड़कर बाहरी इलाके में जाने को मजबूर हो गया।
बहरहाल, डुबोसे ट्राएंगल वाला फ्लैट आखिरकार 32 लाख डॉलर ( 30.5 करोड़) में बिका, जो पूछी गई कीमत से 1.9 करोड़ ज्यादा था। क्या इस डील में एआई शेयर भी शामिल थे, यह जानकारी गोपनीय रखी गई है। एआई का पैसा सबको शहर से बाहर धकेल रहा जिस परिवार को शहर छोड़ना पड़ा, उसके मुखिया सैन फ्रांसिस्को में ही एक बड़े सरकारी पद पर हैं, फिर भी वे शहर में मकान नहीं खरीद सके। अब वे उपनगर में किराए पर लिए घर में रहते हैं, जहां से उन्हें रोज लंबा सफर तय करना पड़ता है। परिवार की मां कहती हैं, ‘अगर शहर में रहने की गुंजाइश होती तो हम कभी न जाते। यह देखकर बुरा लगता है कि एआई का पैसा बाकी सबको बाहर धकेल रहा है।’

X पर 3 साल बाद लौटे मार्क जुकरबर्ग:मेटा ने लॉन्च किया 'म्यूज स्पार्क 1.1' AI मॉडल, OpenAI और एंथ्रोपिक से मुकाबला

मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने तीन साल से अधिक समय के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वापसी की है। उन्होंने कंपनी का सबसे नया और एडवांस AI मॉडल ‘म्यूज स्पार्क 1.1’ लॉन्च करने की घोषणा की है। जुकरबर्ग का यह कदम एआई मार्केट में OpenAI और एंथ्रोपिक जैसी दिग्गज कंपनियों को टक्कर देने की मेटा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। कम कीमत में कोडिंग और एजेंटिक परफॉर्मेंस मार्क जुकरबर्ग ने अपनी पोस्ट में लिखा, “आज हम म्यूज स्पार्क 1.1 रिलीज कर रहे हैं। यह बहुत ही कम कीमत पर एक मजबूत एजेंटिक और कोडिंग मॉडल है। यह हमारे नए मेटा मॉडल API और मेटा AI में उपलब्ध है।” उन्होंने कहा कि यह मॉडल टूल यूज, कंप्यूटर यूज और एजेंटिक परफॉर्मेंस में सबसे मजबूत है। यह 10 लाख टोकन कॉन्टेक्स्ट विंडो के साथ लंबे समय तक चलने वाले टास्क को आसानी से पूरा कर सकता है। यह समानांतर चलने वाले सब-एजेंट्स को काम सौंपने में सक्षम है और इसे डेस्कटॉप, मोबाइल या ब्राउज़र पर कंप्यूटर इंटरफेस का उपयोग करने के लिए ट्रेन किया गया है। म्यूज स्पार्क से डेवेलपर्स बना सकेंगे एप्लिकेशन्स जुकरबर्ग ने बताया कि डेवेलपर्स म्यूज स्पार्क का उपयोग करके नए एप्लिकेशन्स बना सकेंगे। कंपनी का पूरा फोकस बहुत कम लागत पर मजबूत एजेंटिक और मल्टीमॉडल मॉडल देने पर है। अमेरिका में डेवेलपर्स अब मेटा मॉडल API के पब्लिक प्रीव्यू के जरिए म्यूज स्पार्क 1.1 का एक्सेस पा सकते हैं। कम इंसानी दखल के पूरे होंगे जटिल काम मेटा ने इस अपग्रेडेड मॉडल को कोडिंग, एजेंटिक वर्कफ़्लो और सॉफ़्टवेयर ऑटोमेशन के लिए अपना अब तक का सबसे सक्षम एआई सिस्टम बताया है। यह मॉडल न केवल कोड लिख और डिबग कर सकता है, बल्कि सॉफ़्टवेयर टूल्स के साथ इंटरैक्ट भी कर सकता है। यह टेक्स्ट, इमेज और वीडियो को समझकर बिना किसी इंसानी हस्तक्षेप के बेहद जटिल और मल्टी-स्टेप टास्क को पूरा करने की क्षमता रखता है। सुपरइंटेलिजेंस लैब्स ने किया तैयार इस मॉडल को मेटा की ‘सुपरइंटेलिजेंस लैब्स’ ने डेवलप किया है। इससे पहले कंपनी ने अप्रैल में अपना ओरिजिनल म्यूज स्पार्क मॉडल पेश किया था, जिसका मकसद एआई के क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वियों के साथ अंतर को कम करना था। इस नए लॉन्च के साथ मेटा ने पेड एआई मॉडल API मार्केट में औपचारिक रूप से एंट्री कर ली है। 20 डॉलर का फ्री क्रेडिट और प्राइसिंग का गणित मेटा मॉडल API के लिए साइन अप करने वाले डेवेलपर्स को 20 डॉलर का फ्री क्रेडिट मिलेगा, जिसके बाद वे ‘पे-एज-यू-गो’ (जितना इस्तेमाल, उतना भुगतान) प्राइसिंग मॉडल पर शिफ्ट हो जाएंगे। मेटा ने इस सर्विस की कीमत 1.25 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट टोकन और 4.25 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन तय की है। यह कीमत OpenAI के एंट्री-लेवल ‘GPT-5 mini’ और एंथ्रोपिक के ‘क्लॉड हायकू 4.5’ से अधिक है, लेकिन एंथ्रोपिक के प्रीमियम ‘क्लॉड सॉनेट 4.6’ मॉडल से कम है। वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम के ल्लामा मॉडल्स बदलेंगे म्यूज स्पार्क 1.1 को फिलहाल मेटा AI एप और वेबसाइट के ‘थिंकिंग मोड’ में रोल आउट किया जा रहा है। आने वाले समय में यह मॉडल धीरे-धीरे वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक और मेटा के एआई-इनेबल्ड स्मार्ट ग्लासेस में मौजूद मौजूदा ल्लामा मॉडल्स की जगह लेगा। हाल ही में मेटा ने अपनी सुपरइंटेलिजेंस लैब्स द्वारा विकसित पहला इमेज-जनरेशन मॉडल ‘म्यूज इमेज’ भी पेश किया था, जिससे कंपनी का जेनरेटिव एआई पोर्टफोलियो और मजबूत हुआ है। नॉलेज पार्ट: क्या होते हैं एजेंटिक मॉडल और टोकन कॉन्टेक्स्ट विंडो?

सेंसेक्स 828 अंक चढ़कर 77,569 पर बंद:निफ्टी में 244 अंक की तेजी रही; बैंक और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी

आज यानी शुक्रवार, 10 जुलाई को सेंसेक्स 828 अंक (1.08%) की तेजी के साथ 77,569 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 244 अंकों (1.02%) की तेजी रही, ये 24,206 पर पहुंच गया। आज के कारोबार में बैंक और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी रही। टीसीएस के नतीजों के बाद शेयर 0.90% चढ़ा 2026-2027 की पहली तिमाही के नीतेजों के बाद टीसीएस के शेयर में आज 0.90% की तेजी रही। ये 2,068 रुपए पर बंद हुआ। बीते 6 महीने में टीसीएस का शेयर करीब 30 परसेंट गिरा है। वहीं एक साल में ये 40% टूटा है। टीसीएस का नेट प्रॉफिट एक साल पहले की समान तिमाही के 12,760 करोड़ रुपए के मुकाबले 5% बढ़कर 13,349 करोड़ रुपए रहा है। इस अवधि के दौरान ऑपरेशंस से मिलने वाला रेवेन्यू भी सालाना आधार पर 14% बढ़कर 72,275 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 12 रुपए प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी दी है और इसके लिए 15 जुलाई को रिकॉर्ड डेट तय किया है। एशियाई बाजारों में भी तेजी रही कल अमेरिकी बाजार में भी रही थी कल विदेशी निवेशकों ने 533 करोड़ रुपए के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल सेंसेक्स 238 अंक चढ़कर 76,742 पर बंद हुआ था