राजापार्क के वन-वे सिस्टम से व्यापारियों में गुस्सा:पार्किंग और ट्रैफिक अव्यवस्था पर भड़के दुकानदार, बोले- 50 फीसदी तक घटा कारोबार
जयपुर के राजापार्क क्षेत्र में लागू वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर व्यापारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि वन-वे सिस्टम लागू होने के बाद उनका व्यापार करीब 50 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है। उनका आरोप है कि पार्किंग की कमी, अतिक्रमण और कमजोर ट्रैफिक प्रबंधन के कारण ग्राहकों की आवाजाही घट गई है। व्यापारियों ने प्रशासन से व्यवस्था की समीक्षा कर व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की है। इस व्यवस्था से ट्रैफिक जाम की समस्या खत्म होने के बजाय बाजार का कारोबार लगातार गिर रहा है। व्यापारियों का कहना है कि राजापार्क फैशन, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य रिटेल कारोबार का बड़ा बाजार है, जहां शहर के अलग-अलग इलाकों से लोग खरीदारी के लिए आते हैं। लेकिन अब वन-वे सिस्टम के कारण ग्राहकों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे बड़ी संख्या में लोग बाजार आने से बच रहे हैं। इसका सीधा असर दुकानदारों की आय पर पड़ रहा है। जाम कम करने के लिए लागू किया गया था सिस्टम यातायात पुलिस ने राजापार्क में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और जाम की समस्या को देखते हुए वन-वे सिस्टम लागू किया था। इसके तहत गोविंद मार्ग पर परनामी मंदिर चौराहे से ध्रुव मार्ग तक वाहनों की आवाजाही एक दिशा में कर दी गई। वहीं विद्यालय मार्ग पर भी प्रवेश केवल गोविंद मार्ग की ओर रखा गया है। इसके अलावा रॉन्ग साइड वाहन चलाने वालों और सफेद पट्टी के बाहर वाहन खड़ा करने वालों के खिलाफ लगातार चालान और नो-पार्किंग की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से ट्रैफिक में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ, बल्कि ग्राहकों की संख्या जरूर कम हो गई। कई इलाकों के ग्राहक बाजार आने से बच रहे व्यापारियों का कहना है कि पंचवटी सर्किल से परनामी चौराहे की ओर से जाने वाले मार्ग पर प्रतिबंध होने के कारण तिलक नगर, जवाहर नगर, आदर्श नगर सहित आसपास के इलाकों से आने वाले ग्राहकों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। कई लोग इसी वजह से राजापार्क आने के बजाय दूसरे बाजारों का रुख कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने लाखों रुपए निवेश कर बड़ी-बड़ी दुकानें ली हैं और हर महीने भारी किराया दे रहे हैं, लेकिन ग्राहकों की संख्या लगातार कम होने से आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। व्यापार आधा रह गया, किराया निकालना मुश्किल राजापार्क में मोबाइल शॉप संचालित करने वाले हरीश कुमार ने बताया कि मेरी दुकान का मासिक किराया करीब 60 हजार रुपए है। पहले बाजार में ग्राहकों की अच्छी आवाजाही रहती थी, लेकिन वन-वे सिस्टम लागू होने के बाद कारोबार लगभग 60 प्रतिशत तक घट गया है। उन्होंने कहा कि इतना अधिक किराया देने के बावजूद व्यापार लगातार प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि बाजार में जगह-जगह ठेले लगे हुए हैं और लोग सड़क पर ही वाहन खड़े कर देते हैं। इससे जाम लगता है, लेकिन इन समस्याओं पर कार्रवाई करने के बजाय केवल वन-वे लागू कर दिया गया, जिसका नुकसान व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है। काम कम हुआ तो स्टाफ भी घटाना पड़ा मोबाइल रिपेयरिंग का काम करने वाले अभिषेक ने बताया कि उनकी दुकान छोटी है, लेकिन हर महीने 30 हजार रुपए किराया और बिजली समेत करीब 40 हजार रुपए खर्च हो जाता है। पहले दुकान पर दो कर्मचारी काम करते थे, लेकिन कारोबार घटने के कारण अब केवल एक कर्मचारी ही रखा है। उन्होंने कहा कि वन-वे सिस्टम लागू होने के बाद दुकान पर आने वाले ग्राहकों की संख्या आधे से भी कम रह गई है। अगर यही स्थिति बनी रही तो छोटे व्यापारियों के लिए दुकान चलाना मुश्किल हो जाएगा। वन-वे नहीं, बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट की जरूरत व्यापारियों का कहना है कि अगर प्रशासन वास्तव में जाम की समस्या खत्म करना चाहता है तो वन-वे सिस्टम लागू करने के बजाय बाजार में पर्याप्त संख्या में ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाए। सड़क पर गलत तरीके से वाहन खड़े करने वालों के वाहन तुरंत हटाए जाए और उनके खिलाफ चालान की कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि बाजार में जगह-जगह अतिक्रमण और ठेले हटाए जाए, पार्किंग की समुचित व्यवस्था की जाए और ट्रैफिक को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाए। इससे व्यापार भी प्रभावित नहीं होगा और जाम की समस्या भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। पार्किंग, अतिक्रमण और सुविधाओं का भी अभाव व्यापारियों का आरोप है कि पूरे बाजार में पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में लोग सड़क किनारे वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे ट्रैफिक प्रभावित होता है। वहीं जगह-जगह ठेले और अतिक्रमण भी सड़क की चौड़ाई कम कर रहे हैं। इसके अलावा इतने बड़े बाजार में सार्वजनिक महिला शौचालय तक उपलब्ध नहीं है, जबकि यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में परिवार और महिलाएं खरीदारी के लिए आती हैं। 400 से ज्यादा दुकानों पर असर राजापार्क में करीब 400 दुकानें संचालित हैं, जहां रेडीमेड गारमेंट्स, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फुटवियर, कॉस्मेटिक्स और लेटेस्ट फैशन से जुड़े प्रतिष्ठान हैं। इनमें से अधिकांश दुकानें किराये पर हैं, जिनका मासिक किराया 40 हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक है। व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले समय में कई दुकानों को बंद करने या खाली करने की नौबत आ सकती है। व्यापारियों की मांग- अतिक्रमण हटाए प्रशासन व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि वन-वे सिस्टम की दोबारा समीक्षा कर बाजार के हितों को ध्यान में रखते हुए नई ट्रैफिक व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही पार्किंग की समुचित व्यवस्था, अतिक्रमण हटाने, ट्रैफिक पुलिस की नियमित तैनाती और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी प्राथमिकता से काम किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो राजापार्क का व्यापार लगातार प्रभावित होता रहेगा।

