आरएसएएचसी की बड़ी चूक:बिना फिजिकल वेरिफिकेशन बना परीक्षा केन्द्र, 1500 क्षमता वाले कॉलेज में 2600 छात्रों को बैठाया
राजस्थान स्टेट एलाइड एंड हेल्थ केयर काउंसिल (आरएसएएचसी) की परीक्षा व्यवस्था में बड़ी खामी सामने आई है। कालवाड़ रोड स्थित प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज का फिजिकल वेरिफिकेशन किए बिना केवल चेकलिस्ट के आधार पर परीक्षा केन्द्र की अनुमति दे दी गई। इसका खामियाजा 29 जून को आयोजित पैरामेडिकल डिप्लोमा कोर्स की परीक्षा में सामने आया, जहां अव्यवस्था मिलने पर परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इससे 2600 छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया। सबसे गंभीर बात यह रही कि करीब 1500 परीक्षार्थियों की क्षमता वाले परीक्षा केन्द्र पर 2600 छात्रों को बैठाया गया। व्यवस्था कम पड़ने पर परीक्षार्थियों को टेंट में बैठाकर परीक्षा करानी पड़ी। बाद में गड़बड़ियां सामने आने पर परीक्षा निरस्त कर दी गई। परीक्षा नियंत्रक डॉ. विरेन्द्र कुमार शर्मा ने स्वीकार किया कि समय कम होने के कारण फिजिकल निरीक्षण नहीं कराया गया और केवल चेकलिस्ट के आधार पर केन्द्र को स्वीकृति दी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी परीक्षा केन्द्र की क्षमता, आधारभूत सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था का भौतिक सत्यापन किए बिना अनुमति देना गंभीर प्रशासनिक चूक है। क्या है मामला; कालवाड़ रोड स्थित प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज में 29 जून को डिप्लोमा इन कैथ लैब टेक्नोलॉजी (डीसीएलटी), डिप्लोमा इन डायलिसिस टेक्नोलॉजी (डीडीटी) और डिप्लोमा इन ईसीजी टेक्नोलॉजी (डीईसीजीटी) के प्रथम वर्ष एवं रिमांडेड छात्रों की सैद्धांतिक परीक्षा आयोजित थी। परीक्षा के दौरान अव्यवस्था मिलने पर इसे रद्द करना पड़ा। जयपुर में इस दिन कुल 11 परीक्षा केन्द्र बनाए गए थे। ये हैं बड़ी खामियां
1. पिछले 10 साल से सिर्फ जयपुर ही परीक्षा केन्द्र
काउंसिल पिछले दस वर्षों से पैरामेडिकल कोर्स की सैद्धांतिक और प्रायोगिक परीक्षाएं केवल जयपुर में आयोजित करा रही है। इससे जोधपुर, कोटा, उदयपुर, बाड़मेर, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, बीकानेर, चूरू और अलवर सहित अन्य जिलों के छात्रों पर यात्रा, ठहरने और भोजन का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। मौजूदा समय में गायत्री राठौड़ के पास चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा विभाग, दोनों के सचिव का दायित्व है। ऐसे में जिला या संभाग स्तर पर परीक्षा केन्द्र बनाने और एसओपी जारी करने की मांग उठ रही है। 2. परीक्षा केन्द्रों और परीक्षकों को नाममात्र का मानदेय
परीक्षा केन्द्रों को प्रति छात्र करीब 12 रुपए और परीक्षकों को 250 रुपए मानदेय दिया जाता है, जिसे विशेषज्ञ अपर्याप्त मानते हैं। 3. काउंसिल का अपना भवन नहीं
आरएसएएचसी वर्षों से किराए के भवन में संचालित हो रही है और अब तक उसका अपना भवन नहीं बन पाया है। हमने कालवाड़ रोड स्थित सेंटर का फिजिकल वेरिफिकेशन कराने की बजाय चेकलिस्ट के आधार पर परीक्षा केन्द्र की अनुमति दी थी। सरकार को जिला या संभाग स्तर पर परीक्षा केन्द्र बनाने के लिए भी पत्र लिखा है, ताकि प्रदेश के बाहर के छात्रों को अपने गृह जिले या संभाग में परीक्षा देने की सुविधा मिल सके। -डॉ. वीरेन्द्र कुमार शर्मा, परीक्षा नियंत्रक, आरएसएएचसी

