एनसीआरबी-2024 में बाल अपराध 11.2 प्रतिशत बढ़े:डिजिटल पढ़ाई की आड़ में क्राइम क्लास बच्चे यू-ट्यूब से सीख रहे हत्या के तरीके
गर्मियों की छुट्टियों के बाद स्कूल फिर खुल गए हैं। होमवर्क, असाइनमेंट और स्कूल अपडेट अब वाट्सएप व डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलने लगे हैं। इसी ‘डिजिटल पढ़ाई’ के नाम पर बच्चों के हाथों में दिनभर मोबाइल रहता है। लेकिन चिंता कि बात यह है कि मोबाइल पर कई बच्चे पढ़ाई के बीच हिंसक गेम, क्राइम सीरीज, डार्क वेब और अपराध से जुड़े वीडियो देख रहे हैं। इसी कारण बच्चों यानी किशोरों के अपराध में बढ़ोतरी हुई है। मई 2026 में जारी एनसीआरबी-2024 रिपोर्ट के अनुसार बच्चों यानी किशोरों के अपराध में 11.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मर्डर, डकैती और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों में नाबालिगों की भूमिका बढ़ना गंभीर संकेत है। साइबर अपराधों में भी 17.9% वृद्धि दर्ज हुई। पहली बार साइबर अपराध का आंकड़ा 1 लाख के पार पहुंचा है। राजस्थान और जयपुर की स्थिति भी चिंताजनक है। जयपुर धोखाधड़ी के मामलों में देश में पहले नंबर पर है। चोरी, किडनैपिंग और मर्डर के मामलों में जयपुर महानगरों में तीसरे पायदान पर है। मुहाना कांड; 11-12 साल के बच्चों ने दोस्त का सिर काटा जयपुर के मुहाना इलाके में 14 जून को लापता 10 साल के अजमत की 25 जून को नाले में सिर कटी लाश मिली। वारदात में मृतक के ही 11 और 12 साल के तीन दोस्त शामिल निकले। बहन को लेकर हुई मामूली कहासुनी का बदला लेने के लिए बच्चों ने पहले अजमत का गला घोंटा, फिर चाकू से सिर काटकर धड़ से अलग कर दिया। इतनी कम उम्र में इस तरह की वारदात और फिर सामान्य तरीके से घर लौट आना, बच्चों पर हिंसक कंटेंट के असर की ओर इशारा करता है। शिवदासपुरा कांड; यू-ट्यूब देखकर काटे ताई के पैर
शिवदासपुरा इलाके में 24 साल के सूरज बैरवा ने अपनी 53 साल की ताई की हत्या कर दी। उसे ताई के पैरों में पहने करीब एक किलो चांदी के कड़े लूटने थे। वारदात की पूरी साजिश मोबाइल पर रची गई। हत्या से पहले सूरज ने तीन दिन तक यू-ट्यूब पर 50 से ज्यादा क्राइम वीडियो देखे। गूगल पर यह भी सर्च किया कि सबूत कैसे मिटाएं और कुएं में फेंकी लाश कितने दिन में पानी के ऊपर आती है। उसने इंटरनेट से ही हत्या का तरीका सीखा। पुणे मर्डर; डिजिटल प्लानिंग से पुलिस को चकमे की कोशिश
महाराष्ट्र के पुणे में 20 साल की सिया गोयल ने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर मंगेतर केतन अग्रवाल को 500 फीट गहरी खाई में धक्का देकर मार डाला। इस केस में मोबाइल का इस्तेमाल पुलिस को चकमा देने के लिए किया गया। आरोपी चेतन ने अपनी लोकेशन छुपाने के लिए वारदात वाले दिन अपना फोन दुकान पर ही छोड़ दिया और इंटरनेट बंद रखा, ताकि पुलिस उसे ट्रेस न कर सके। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. अदिति अग्रवाल, मनोवैज्ञानिक रील्स खत्म कर रही बच्चों का धैर्य, हिंसक गेम्स बना रहे आक्रामक – 5 से 17 साल के बच्चों में मनोरंजन के लिए स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने और रोज 60 मिनट शारीरिक गतिविधि की सलाह दी गई है। – अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स और कुछ अन्य संस्थाएं 5 से 17 साल के बच्चों के लिए 2 घंटे से कम स्क्रीन टाइम की सलाह देती हैं। भारतीय बाल रोग अकादमी भी मनोरंजन के लिए स्क्रीन का उपयोग सीमित रखने और परिवार के साथ स्क्रीन-फ्री समय तय करने पर जोर देती है। एक्सपर्ट व्यू : सर्च इंजन जवाबदेह बनें, पैरेंट्स दें ‘डिजिटल संस्कार’ मुकेश चौधरी, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट
– इंटरनेट पर अपराध के तरीके खोजना आसान होता जा रहा है। सरकार को ऐसे सख्त नियम बनाने चाहिए कि क्राइम से जुड़े खतरनाक वीडियो सर्च होते ही ब्लॉक हों और पुलिस को अलर्ट मिले। स्कूलों में इंटरनेट के सही इस्तेमाल की पढ़ाई जरूरी है। अभिभावकों को एडमिशन के समय स्कूलों से इसकी मांग करनी चाहिए। आज घर के संस्कारों के साथ ‘ऑनलाइन संस्कारों’ की भी उतनी ही जरूरत है। – बच्चा आपसे ज्यादा मोबाइल चलाना जानता है, तो इसे गर्व नहीं बल्कि चिंता की बात मानना चाहिए। पैरेंट्स खुद को तकनीकी रूप से अपडेट रखें और बच्चों के फोन में पैरेंटल कंट्रोल सॉफ्टवेयर जरूर डालें। बच्चों को फोन में पासवर्ड लगाने या पूरी प्राइवेसी की छूट न दें। उनकी सर्च हिस्ट्री नियमित जांचें। कुछ गलत दिखे तो तुरंत डांटने के बजाय शांत तरीके से समझाएं और जरूरत हो तो काउंसलिंग कराएं।

