ब्यूटी पार्लर में 'टोटका' करना पड़ा भारी:मदन दिलावर खुद भूले 'नियम'; क्या है राजस्थान यूनिवर्सिटी में 'VC टैक्स'?

नमस्कार राजस्थान यूनिवर्सिटी में VC टैक्स की बड़ी चर्चा है। शिक्षामंत्रीजी ने सरकारी टीचर्स को खूब उपदेश दिए और खुद नियम भूल गए और धंधा अगर मंदा चले तो सोच-समझकर टोटका करना चाहिए। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. राजस्थान यूनिवर्सिटी में क्या है ‘VC टैक्स’? अगली क्रांति अगर हुई तो न हथियार से होगी और न व्यापार से। क्रांति का नया हथियार कला होगी। एक वक्त था जब विश्वविद्यालयों में अपनी राजनीति चमकाने के लिए युवा हाथ में जूता लेकर घूमते थे। हो-हल्ला, हुड़दंग, मारपीट और नारेबाजी कर अपनी ताकत दिखाया करते थे। जिसको पुलिस ने सड़क पर पटककर घसीट लिया, उसकी जीत पक्की। लेकिन अब कला का काल है। छात्रनेता कला यानी आर्ट का महत्व और मारक क्षमता समझते हैं। एक छात्रनेता राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग का झंडा उठाए हुए हैं। इसके लिए वे छात्रों के मुद्दों को कलात्मक तरीके से उठाते हैं। कभी यूनिवर्सिटी में आ रहे पेयजल को फ्लोटमीटर से मापते हैं। कभी चाय बनाकर अधिकारियों के केबिन तक कुल्हड़ ले जाते हैं। कभी लाइब्रेरी इंचार्ज का फ्रीज छात्रों के लिए उठा लाते हैं। इस बार छात्रों के बैक लगने और पुनर्मूल्यांकन के नाम पर मोटी फीस लिए जाने पर उन्होंने नाटक का सहारा लिया। नाटक में मुख्य पात्र निभाते हुए नया एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स को बता रहे हैं कि फीस के नाम पर हो रही उगाही ही वाइस चांसलर टैक्स यानी वीसी टैक्स है। 2. शिक्षा मंत्रीजी ने ‘उन’ शिक्षकों को कहा निकम्मा टोंक में शिक्षा मंत्रीजी समाज के कार्यक्रम में पहुंचे थे। शिक्षा और संस्कार की बातें करने लगे। पहले तो बताया कि किस तरह सरकारी स्कूलों ने रिकॉर्ड प्रदर्शन किया और सरकारी स्कूलों के बच्चे किस तरह मैरिट में आए हैं। जनता समझ गई कि यह शिक्षा मंत्रीजी की ही लीला है, उन्हीं के कारण शिक्षा का उद्धार और कायाकल्प हुआ है। इसके बाद शिक्षामंत्रीजी बताने लगे कि किस भांति सरकारी अध्यापकों ने शिक्षा का बेड़ा गर्क कर रखा है। अध्यापक गुटखा खाते हैं, शराब पीते हैं। उनकी सूची बनाएंगे। एक-एक मास्टर की आदतों का पता लगाकर रिकॉर्ड रखेंगे ताकि वक्त आने पर उन्हें ‘दूरस्थ-दर्शन’ कराया जा सके। उन्हें निकम्मे मास्टर की परिभाषा देते हुए कहा कि जो मास्टर अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं वे निकम्मे हैं। उन्होंने सिर्फ निकम्मा कहा। वे इसमें नालायक और नकारा भी जोड़ सकते थे। लेकिन एक साथ तीनों शब्दों पर किसी और पेटेंट है। सभा समाप्त हुई। पत्रकारों को भी थोड़ी बहुत मास्टरी आती है। उन्होंने मंत्रीजी की कुंडली निकाली ली। अखबार में खबर छाप दी- मंत्रीजी के खुद के पोते प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। 3. ब्यूटी पार्लर में ‘टोटका’ टोटका करने से अगर धंधा बढ़िया चलता तो फिर भारत दुनिया का सबसे अमीर देश होता और अमेरिका से पूछता- तू क्या है बे? यहां भले शिकंजी बनाते वक्त 80 रुपए पाव वाला नींबू महंगा लगे, लेकिन दुकान पर मिर्ची के साथ लटकाते वक्त यह सस्ता हो जाता है। यहां भले मिट्‌टी के घड़े का रेट 120 रुपए बताने वाले कुंभकार पर लूटने का इल्जाम लगाया जाए, लेकिन चौराहे पर रखते वक्त उस निवेश की याद नहीं आती। यहां हर चौक, चौराहे, सर्किल, फुटपाथ, नाले, जोहड़े, नदी, पहाड़ी, डूंगर, टीले पर कोई न कोई बाबा बैठकर ताबीज बनाता है। धर्म, आस्था और विश्वास की चाशनी में आदमी को लपेटकर कई ठेकेदार अपने चेले-चपेटियों के साथ करोड़ोंपति बन गए और टीवी पर बैठकर उपदेश देते हैं- सज्जनों, कोई उल्लेखनीय बात ध्यान में नहीं आई है। बात चूरू के सादुलपुर की है। ब्यूटी पार्लर का धंधा मंदा चल रहा था। पार्लर पर उसने कुछ लड़कियों को काम पर रखा था। मालिक ने सोचा कि शायद टोटका करने से बात बन जाए। टोटके को लेकर यह बात प्रसिद्ध है कि यह गुप्त रूप से किया जाना चाहिए, तभी फलित होता है। तो इसी नियम का पालन करते हुए मालिक ने लड़कियों के कैंपर से पानी निकाला और अपने कुर्ते की जेब से कुछ टोटकात्मक सामग्री निकाल कर पानी में मिला दी। लड़कियों को पहले से शक था। उन्होंने मालिक पर मोबाइल कैमरा सेट कर रखा था। यह काम भी लड़कियों ने गुप्त रूप से किया था। कैमरे में मालिक की करतूत सामने आ गई। फिर क्या था। लड़कियों ने चंडी का रूप धारण कर लिया। चप्पल उठाई और मालिक की ही हजामत बना दी। पत्रकारों ने गिनकर खबर लिखी- लड़कियों ने 6 मिनट में 43 चप्पलें मारी। इनपुट सहयोग- महावीर बैरवा (टोंक), नरेश भाटी (चूरू), विजय कुमार (बाड़मेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

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