हाईकोर्ट ने पूछा-RPSC में अध्यक्ष-सदस्य की नियुक्ति के क्या मापदंड:नियुक्त मेंबर्स का रिकॉर्ड किया तलब, कहा- SI भर्ती में भी हमने इनकी कार्यशैली की ऑब्जर्व
राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के क्या मापदंड हैं। कोर्ट ने आयोग में नियुक्त मेंबर्स की नियुक्ति से जुड़ा ऑरिजनल रिकॉर्ड भी तलब किया है। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने बुधवार को सोसायटी फॉर पब्लिक ग्रीवेंस और सुभाष सियाग की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिकाओं में आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष केसरी सिंह, सदस्य कैलाश चंद मीणा और अयूब खान की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया कि तीनों की नियुक्ति तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से कुछ घंटे पहले की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा- हम SI भर्ती के मामले में भी सदस्यों की कार्यशैली को ऑब्जर्व कर चुके हैं। सरकार कर रही राजनीतिक नियुक्तियां अधिवक्ता शिवचरण गुप्ता और अधिवक्ता हिमांशु जैन ने कोर्ट को बताया- सरकार आयोग में राजनीतिक नियुक्तियां कर रही हैं। जबकि संवैधानिक आयोग होने और सरकारी नियुक्तियों की जिम्मेदारी के बावजूद नियुक्ति में मैरिट पर निर्णय नहीं लिया जाता है। उन्होने कहा- सदस्य केसरी सिंह के सोशल मीडिया पर टिप्पणियों के वीडियो मौजूद हैं, लेकिन उसके बाद भी उन्हें संवैधानिक पद पर नियुक्त कर दिया गया। सरकार मनमाने तरीके से आयोग में नियुक्तियां कर रही हैं। वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि यह सर्विस मैटर है। इसे जनहित याचिका में चुनौती नहीं दी जा सकती है। रिकॉर्ड में बताना होगा नियुक्ति का आधार हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा- सदस्यों की नियुक्ति का क्या आधार है। क्या नियुक्त सदस्यों ने नियुक्ति के लिए कोई आवेदन किया है। सरकार की आपत्ति पर कोर्ट ने कहा- हम नियुक्ति का ज्यूडिशियल रिव्यू कर सकते हैं।
यह खबर भी पढ़ें… सरकार ने हाईकोर्ट में कहा-SI भर्ती रद्द करना गलत:एकलपीठ ने नियम दरकिनार किए, जांच एजेंसी सही और गलत की छंटनी करने में सक्षम सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में सुनवाई में सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा- सिंगल बेंच में दायर याचिका मेंटेनेबल ही नहीं थी। सिंगल बेंच ने इसे दरकिनार कर मेरिट पर सुनवाई करते हुए भर्ती को रद्द करने का फैसला सुनाया। (पूरी खबर पढ़ें)

