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डारडातुर्की में स्वास्थ्य सेवा शिविर में हाई-रिस्क गर्भवतियों सहित विभिन्न रोगों की हुई जांच

भास्कर न्यूज | टोंक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डारडातुर्की में बुधवार को समग्र स्वास्थ्य सेवा शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं सहित विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की टीबी, एचआईवी, डेंगू, मलेरिया, हेपेटाइटिस-बी व सी, सिफिलिस तथा ब्लड शुगर सहित कई रोगों की जांच की गई। बीसीएमओ पीपलू डॉ. संगीत चौधरी ने शिविर का निरीक्षण करते हुए हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं से टीबी, एचआईवी एवं अन्य आवश्यक स्वास्थ्य जांच समय पर कराने की अपील करते हुए कहा कि समय पर जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। इस दौरान निक्षय पोषण योजना के तहत पात्र टीबी मरीजों को पोषण सहायता भी वितरित की गई। जिला डीआरटीबी कोऑर्डिनेटर मोनिका कुमावत ने बताया कि जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हिमांशु मित्तल के निर्देशानुसार आयोजित शिविर का उद्देश्य, विशेषकर हाई-रिस्क समूह के लोगों को एक ही स्थान पर समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। ब्लॉक हेल्थ सुपरवाइजर निसार खान की देखरेख में टीबी जांच के लिए बलगम के नमूने भी एकत्रित किए गए। शिविर में पीएचसी प्रभारी डॉ. दीपक बरूणा, एएनएम, लैब टेक्नीशियन, नर्सिंग स्टाफ, काउंसलर हेमंत वर्मा, सेक्टर हेल्थ सुपरवाइजर, आशा सहयोगिनियां तथा राष्ट्रीय मानव विकास संस्थान के प्रतिनिधि रमेशचंद वर्मा, पूजा प्रजापत और विक्रम धाप सहित स्वास्थ्यकर्मियों ने सेवाएं दीं। ग्रामीणों को टीबी, एचआईवी, हेपेटाइटिस, डेंगू, मलेरिया एवं अन्य मौसमी बीमारियों से बचाव, समय पर जांच और उपचार के प्रति जागरूक करने के साथ निशुल्क जांच एवं दवाइयों का भी वितरण किया गया।

प्रसूताओं की देखभाल के लिए हर केंद्र पर हेल्प डेस्क के निर्देश

भास्कर न्यूज | झालावाड़ झालावाड़ के मिनी सचिवालय स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक हुई। बैठक में लाडो प्रोत्साहन योजना के तहत भुगतान 100 प्रतिशत सुनिश्चित करने और अधिक से अधिक लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए। शुभलक्ष्मी योजना की तृतीय किश्त के भुगतान के लिए जिला मुख्यालय पर एनओसी भेजने को कहा गया। बैठक में हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान, नियमित फॉलोअप और सुरक्षित प्रसव पर फोकस करने के निर्देश दिए गए। गर्भावस्था का पंजीकरण 12 सप्ताह से पहले कराने और चार एएनसी जांच अनिवार्य रूप से कराने पर जोर दिया गया। संपूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस पर 9, 18 और 27 तारीख को आने वाली सभी गर्भवती महिलाओं की गुणवत्तापूर्ण जांच, उपचार और निदान कराने को कहा गया। चिकित्सा संस्थानों में आने वाली गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। जिन प्रसुताओं का नाम जनआधार में शामिल नहीं है, उनका नाम जोड़कर सत्यापन कराने को कहा गया। कलेक्टर ने ग्रामीण शिविरों में गर्भवती महिलाओं और आमजन की जांच कराने और जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सहित विभागीय गतिविधियों में कम से कम 95 प्रतिशत उपलब्धि हासिल करने का लक्ष्य तय किया गया। एचपीवी टीकाकरण के लिए शिक्षा विभाग के साथ मिलकर चार दिवसीय विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। बताया गया कि जिला राज्य में एचपीवी टीकाकरण में चौथे स्थान पर है, लेकिन बकानी, मनोहरथाना, खानपुर और भवानीमंडी ब्लॉक में उपलब्धि कम रही। इन क्षेत्रों में टीम वर्क से सुधार के निर्देश दिए गए।

मानसून रफ्तार पर, लेकिन गत साल के मुकाबले 65% बारिश कम, पिछले साल अब तक भर गए थे 22 बांध, अभी सिर्फ 1 भरा

जिले में मौसम विभाग के यलो अलर्ट के बीच पिछले दो दिनों से मानसून ने फिर से रफ्तार पकड़ी है। कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज होने से लंबे समय से बनी उमस और गर्मी से लोगों को राहत मिली है। हालांकि बारिश का यह दौर अभी भी जिले में मानसून की मौसमी कमी को पूरी तरह दूर नहीं कर पाया है। इस वर्ष अब तक जिले में सामान्य औसत वर्षा का केवल करीब 22 प्रतिशत ही रिकॉर्ड हुआ है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 87.51 प्रतिशत वर्षा हो चुकी थी। जल संसाधन विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार बुधवार सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक जिले के विभिन्न रेनगेज क्षेत्रों में वर्षा दर्ज की गई। सबसे अधिक पनवाड़ में 38 मिमी बारिश हुई। इसके अलावा चांदसेन में 27 मिमी, ठिकरिया में 25 मिमी, नासिर दा में 22 मिमी, मालपुरा में 17 मिमी, लांबाहरिसिंह में 10 मिमी तथा टोरडी सागर क्षेत्र में 1 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। हालांकि टोंक शहर सहित कई जगह बुधवार को हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी कुछ दिनों तक जिले में मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। बादलों की आवाजाही के साथ कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश तथा कुछ क्षेत्रों में एक-दो दौर तेज बारिश होने के आसार हैं। फिलहाल यलो अलर्ट के तहत गरज-चमक के साथ वर्षा और तेज हवाएं चलने की संभावना बनी हुई है। यदि अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रही तो जिले में वर्षा की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है और बांधों व जलाशयों में जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है। किसानों को भी खरीफ फसलों के लिए इस बारिश से राहत मिलने की संभावना है। मानसून की सुस्ती का असर जिले के बांधों पर भी दिखाई दे रहा है। गत वर्ष इस समय तक सिंचाई विभाग के 30 बांधों में से 22 बांध ओवरफ्लो हो चुके थे तथा इनमें 96.49 प्रतिशत जलभराव हो गया था। वर्तमान में इन बांधों में औसतन करीब 46 प्रतिशत पानी ही उपलब्ध है।

विरोध में पिसा आमजन:पहली बार भाजपा-कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एक ही दिन दोनों के कार्यालय घेरने निकले; गवर्नमेंट हॉस्टल पर जाम, वाहनों की कतार लगी

नई दिल्ली में पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे घटनाक्रम से राजस्थान में भी राजनीतिक सरगर्मी उबाल पर रही। बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षों ने पहली बार एक ही दिन एक दूसरे के कार्यालय के घेराव का ऐलान किया। पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस कार्यालय को घेराने के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ निकले। इसके बाद शाम 5 बजे गोविंद सिंह डोटासरा प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से बीजेपी मुख्यालय की ओर चले। दोनों प्रदर्शनों को बेरीकेड्स लगा कर पुलिस ने रोक दिया। कांग्रेस के मार्च को शहीद स्मारक पर रोर दिया गया। इस दौरान डोटासरा की पुलिस से धक्का मुक्की भी हुई। पुलिस ने वाटर कैनन से पानी की बौछारें छोड़ीं। कई महिलाएं और युवा गिर गए। भगदड़ मच गई और कई को चोटें आई। एक महिला बेहोश हो गई। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस मौके पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत, जिला अध्यक्ष सुनील शर्मा समेत सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे। दूसरी ओर, चौमूं हाउस सर्किल पर भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी वाटर कैनन से पानी की बौछार की गई। हालांकि इस दौरान युवा नेता बेरीकेड्स पर चढ़ने लगे तो राठौड़ ने उन्हें रोका और कहा कि बीजेपी कार्यकर्ता अनुशासन नहीं तोड़़ते। फिर वहीं काफिला रुक गया। भाजपा : प्रदर्शन पर फिर गया पानी कांग्रेस कार्यालय का घेराव के लिए निकले भाजपा कार्यकर्ताओं की पुलिस से धक्का-मुक्की हुई। कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए। पुलिस ने हटाने के लिए वाटर कैनन चलाई। इस दौरान गवर्नमेंट हॉस्टल चौराहे पर जाम लग गया और सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। कांग्रेस : इंसाफ मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा कांग्रेस के मार्च को शहीद स्मारक बेरीकेड्स लगा कर व वाटर कैनन चलाकर रोका गया। डोटासरा की पुलिस के साथ काफी देर धक्का मुक्की हुई। धर्मेन्द्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति और शिक्षा व्यवस्था में भारतीय संस्कृति, इतिहास, महापुरुषों को उचित स्थान देने का कार्य किया गया है। जांच हो रही है कि कहां से कितना पैसा मिला, कहां से पत्थर बाजों को लाया गया।
-मदन राठौड़, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बीजेपी वाले आंदोलन का दमन करना जानते हैं। अब तक 150 परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं, फिर भी केन्द्र सरकार शिक्षा मंत्री व अन्य अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। इंसाफ मिलने तक हम संघर्ष करते रहेंगे।
-गोविंद सिंह डोटासरा, पीसीसी चीफ

बिजली कटौती से परेशान कलेक्टर से लगाई गुहार

टोंक | सोलंगपुरा रोड इलाके में लगातार हो रही बिजली कटौती से परेशान होकर मोहल्लेवासियों ने कलेक्टर से बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार की मांग की है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि सालों से उनके इलाके में अनियमित बिजली आपूर्ति की समस्या बनी हुई है। जिससे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

जिला जूनि. एथलेटिक्स स्पर्धा 26-27 जुलाई को

टोंक| जिला एथलेटिक्स एसोसिएशन के तत्वावधान में 54वीं जिला जूनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता का आयोजन 26 एवं 27 जुलाई को जिला खेल स्टेडियम, टोंक में होगा। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से जूनियर एथलीट 14, 16, 18 एवं 20 वर्ष आयु वर्ग की विभिन्न स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। एसोसिएशन द्वारा प्रतियोगिता से संबंधित दिशा-निर्देश पूर्व में ही जारी किए जा चुके हैं। प्रतियोगिता का शुभारंभ 26 जुलाई को सुबह होगा तथा दो दिनों तक विभिन्न ट्रैक एवं फील्ड स्पर्धाओं का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता खिलाड़ी 17 से 20 अगस्त तक अजमेर में आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय जूनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में टोंक जिले का प्रतिनिधित्व करेंगे।

सीकर रोड पर इंटरलॉकिंग, NHAI बोला- प्रयोग कर रहे:जलभराव-मिट्‌टी का कटाव रुकेगा, विशेषज्ञ- ट्रोले-डंपर का वजन नहीं झेल पाएंगी

राजधानी के सबसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों में शामिल सीकर रोड पर रोड नंबर-14 के आगे सड़क के दोनों किनारों पर इंटरलॉकिंग टाइल (पेवर ब्लॉक) बिछाने का काम शुरू किया है। एनएचएआई का कहना है कि बरसात के दौरान सड़क किनारे होने वाले जलभराव और मिट्टी कटाव को रोकने के लिए 500 मीटर के हिस्से में यह कार्य प्रयोग के तौर पर कराया जा रहा है। हालांकि सड़क निर्माण और हाईवे इंजीनियरिंग से जुड़े विशेषज्ञ इस निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यहां एम-20 या एम-30 ग्रेड की टाइल्स लगाई जा रही हैं तो वे लगातार भारी वाहनों का दबाव लंबे समय तक नहीं झेल पाएंगी। विशेषज्ञों के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग पर दिन-रात हजारों ट्रक, ट्रोले और कंटेनर गुजरते हैं। ऐसे में यदि भारी वाहन सड़क के किनारे चढ़ते-उतरते हैं तो इंटरलॉकिंग ब्लॉक बैठने, उखड़ने और असमतल होने का खतरा रहेगा। राष्ट्रीय राजमार्गों पर टिकाऊ व्यवस्था के लिए प्रबलित कंक्रीट शोल्डर, बेहतर स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज और नियमित रखरखाव अधिक प्रभावी विकल्प माने जाते हैं, जबकि इंटरलॉकिंग ब्लॉक का उपयोग फुटपाथ, मीडियन, बस-बे, पैदल मार्ग या सीमित भार वाले क्षेत्रों में अधिक उपयुक्त माना जाता है। असल चुनौती जलभराव नहीं, ड्रेनेज व्यवस्था कई वर्षों से सीकर रोड़ के वीकेआई नंबर-14 और ढ़ेहर का बालाजी क्षेत्र में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बनी हुई है जो जाम का प्रमुख कारण है। इसके समाधान के लिए NHAI पहले भी सीमेंट कंक्रीट रोड, ड्रेनेज नेटवर्क और फ्लाईओवर निर्माण की योजना शुरू कर चुका है। अब फिर इंटरलॉकिंग टाइल (पेवर ब्लॉक) बिछाने का काम शुरू किया गया है। मजबूत सब-बेस और ड्रेनेज ही स्थायी समाधान
रिटायर्ड एक्सईएन हरिमोहन शर्मा के अनुसार इंटरलॉकिंग ब्लॉक जल निकासी सुधारने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए मजबूत सब-बेस, उचित कम्पेक्शन और वैज्ञानिक ड्रेनेज जरूरी है। सड़क किनारे भारी वाहन चढ़ते-उतरते हैं, ब्लॉक जल्द बैठ सकते हैं। सीकर रोड पर फिलहाल प्रयोग के तौर पर 500 मीटर की दूरी में टाइल्स लगाई जा रही है। यहां कच्ची सड़क थी, जिस पर बारिश में जलभराव होता था। उसी के किनारे यह टाइल्स लगाई गई हैं। -अजय आर्य, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई जयपुर

मसूदा में 19 साल का रिकॉर्ड टूटा, 5 घंटे में 6.4 इंच, ब्यावर में 6.2 इंच बारिश

मानसून की पहली ही मूसलाधार बारिश ने बुधवार को जिंदगी की रफ्तार रोक दी। तड़के 3:30 बजे शुरू हुई बारिश दोपहर 12:30 बजे तक लगातार 9 घंटे तक कभी तेज तो कभी धीमी होती रही। इस दौरान 6.2 इंच बारिश दर्ज हुई। वहीं मसूदा में 5 घंटे में 6.4 इंच बारिश दर्ज हुई। 19 साल पहले जुलाई में ही 24 घंटे में 6 इंच बारिश हुई थी। कस्बे के व्यस्तम मार्ग मसूदा अजमेर रोड स्थित छीपा पुलिया पर पानी का बहाव तेज हो गया। प्रशासन ने पुलिस बल तैनात कर वाहन चालकों की आवाजाही रोक दी है। मसूदा. छीपा पुलिया पर बहाव तेज, पुलिस ने आवाजाही रोकी। सबसे बदहाल स्थिति रेलवे स्टेशन पर रही। गंदे नाले का पानी स्टेशन परिसर में घुस गया। टिकट खिड़की, स्लीपर वेटिंग रूम और रेलवे डिस्पेंसरी जलमग्न हो गए। प्लेटफॉर्म और ट्रैक नंबर-1 पर पानी भरने से कर्मचारियों को निकासी के लिए मशक्कत करनी पड़ी। पार्किंग में घुटनों तक पानी भर गया, ऑटो बंद हो गए और दुकानों के बाहर खड़े दोपहिया वाहन बहाव में गिर गए। छावनी अंडरपास में सुबह 11 बजे पंप लगाकर पानी निकाला गया। रेलवे डिसपेंसरी में भरा पानी। जर्जर मकान की छत गिरी: ब्यावर खास में तेजाजी मंदिर के सामने वर्षों से बंद पड़े हरचंद चौधरी और कानाराम चौधरी के दो मंजिला जर्जर मकान की छत बारिश से ढह गई। पड़ोसियों ने बताया कि दीवारों में बड़ी दरारें हैं और पूरा मकान गिरने से जन-धन हानि का खतरा बना हुआ है। वहीं हाउसिंग बोर्ड सेक्टर-3 में बिजली के तारों सहित पोल झूल गया। बिजली आपूर्ति बंद कर निगम टीम ने मौके पर पहुंचकर रास्ता सुचारू कराया। जवाजा में 10 घंटे बारिश से जर्जर मकान की छत गिर गई। पीसांगन में 2 इंच से जयादा बारिश हुई।

100 करोड़ का अस्पताल; न डॉक्टर, न सुपरस्पेशलिटी:ईएसआईसी : 2.5 लाख मरीजों से 180 करोड़ की वसूली, इलाज के बजाय कर रहे रेफर

यदि आप उदयपुर संभाग के उन ढाई लाख ईएसआईसी कार्डधारक बीमित कर्मचारियों में से हैं, जो हर महीने अपनी गाढ़ी कमाई से 15 करोड़ रुपए (सालाना 180 करोड़ रुपए) सरकारी खजाने में जमा कराते हैं। आपकी ही बदौलत उदयपुर में 100 करोड़ रुपए की लागत से एक आलीशान इमारत बनकर खड़ी हो चुकी है। कागजों में इसे मॉडल हॉस्पिटल और सुपरस्पेशलिटी सेंटर कहा जाता है, लेकिन हकीकत में यह सिर्फ एक भव्य रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। इलाज को छोड़कर बाकी सब कुछ प्रथम श्रेणी का है। यहां 64 की जगह 75 नर्सेज (जरूरत से ज्यादा) मुस्तैद हैं, लेकिन गंभीर बीमारी का इलाज करने वाले डॉक्टर नहीं हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के स्वीकृत 34 पदों में से केवल 4 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें भी सिर्फ आंख (ओप्थाल्मोलॉजी), स्किन (डर्मेटोलॉजी), शिशु रोग (पिडियाट्रिक) और रेडियोलॉजी के डॉक्टर ही ड्यूटी बजा रहे हैं। गंभीर रोगों के इलाज के लिए आवश्यक सुपरस्पेशलिटी विभागों नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी, आंकोलॉजी (कैंसर), न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी का तो खाता तक नहीं खुला है। यहां एक भी डॉक्टर नहीं हैं। पैरामेडिकल स्टाफ में 77 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 25 हैं। रेजिडेंट डॉक्टर्स 38 में से केवल 1 रेजिडेंट कार्यरत हैं। गत वर्ष आए तीन सीनियर रेजिडेंट्स तो दो-दो महीने काम करके ही यहां से निकल गए। मुख्यालय या तो अस्पताल की क्षमता 100 बेड से बढ़ाकर 150 या 200 बेड करे, ताकि यहां आने वाले डॉक्टरों का अनुभव काउंट हो सके और वे टिक पाएं। या फिर मुख्यालय स्तर से ही स्थायी विशेषज्ञों की सीधी पदस्थापना की जाए, ताकि ढाई लाख बीमित श्रमिकों को उनके हक का इलाज उदयपुर में ही मिल सके। अनोखा आदेश… इलाज मत करो, मरीज को बाहर भेजो जब स्थानीय बीमित श्रमिकों ने डॉक्टर भेजने की गुहार लगाई तो दिल्ली-जयपुर बैठे आकाओं ने डॉक्टर भेजने के बजाय एक और अनोखा आदेश जारी कर दिया। इसमें कहा गया है कि स्थानीय आरएनटी (आरएनटी) मेडिकल कॉलेज से टाइअप कर काम चलाओ, या फिर मरीज को उठाकर जयपुर, कोटा, अहमदाबाद, अलवर या बीकानेर के ईएसआईसी अस्पतालों में रेफर कर दो। यह स्थिति तब है जब उदयपुर का श्रमिक अपनी जेब से सालाना 180 करोड़ रुपए प्रीमियम भर रहा है और जब इलाज की नौबत आए तो 300 से 500 किलोमीटर दूर दूसरे शहरों की दौड़ लगाएं। आंकड़ों में हकीकत : इस साल 1200 मरीजों को कर चुके रेफर अस्पताल के निर्माण पर 100 करोड़ रु. खर्च हुए हैं। ईएसआईसी का मासिक प्रीमियम कलेक्शन 15 करोड़ रु. है, जो सालाना 180 करोड़ तक पहुंचता है। उदयपुर जिले में 92 हजार और संभाग में 2.50 लाख कार्मिक ईएसआईसी के दायरे में हैं। गत वर्ष 90 हजार ओपीडी व 21 हजार आईपीडी मरीज आए थे। इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक 44,100 ओपीडी और 17 हजार आईपीडी मरीज दर्ज हुए हैं। गत वर्ष 3,800 मरीजों को बाहर रेफर किया था। इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक 1,200 रेफर किए जा चुके हैं। इनमें अधिकांश एमआरआई, सीटी स्कैन, हृदय रोग और न्यूरो से जुड़ी समस्याओं के मरीज हैं। 100 बेड की सीमा: डॉक्टर लंबे समय तक टिकना नहीं चाहते 100 बेड का अस्पताल होने से यहां कार्यरत डॉक्टरों का अनुभव आगे की पढ़ाई या उच्च पदों के लिए मान्य नहीं माना जाता। यही डॉक्टरों के यहां नहीं टिकने का मुख्य कारण है। कॅरिअर प्रभावित होने की आशंका के चलते डॉक्टर यहां लंबे समय तक काम नहीं करना चाहते। 18 मई को इंटरव्यू के जरिए गायनिक और सर्जरी के दो डॉक्टर नियुक्त किए गए थे, लेकिन इनमें से सर्जरी के डॉक्टर ही टिके। बता दें कि अशोक नगर, बेदला रोड, फतेहपुरा और मादड़ी रोड नंबर-3 के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े 1 लाख बीमितों को बेहतर इलाज देने के उद्देश्य से अस्पताल शुरू किया गया था, लेकिन अब मेडिकल क्लेम महीनों अटक रहे हैं। हम मुख्यालय से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार ही कार्य कर रहे हैं। जो भी कमियां हैं, उन्हें दूर करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए समय-समय पर वॉक-इन इंटरव्यू लिए जाते हैं। जो विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे मरीजों को सही समय पर उपचार दिलाने के लिए रेफर करना नियम अनुसार अनिवार्य है।
-डॉ. अनुराधा गहलोत, अधीक्षक, ईएसआईसी हॉस्पिटल उदयपुर

सेंट सोल्जर एकेडमी : लविश यादव व गुंजन राठौर को नीट में सफलता

भास्कर न्यूज | टोंक सेंट सोल्जर एकेडमी ने अपने पहले प्रयास में ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सफलता हासिल की है। एकेडमी के छात्र लविश यादव ने 720 में से 569 और छात्रा गुंजन राठौर ने 550 अंक लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए पात्रता हासिल की। जिसपर समारोहपूर्वक दोनों विद्यार्थियों का ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच स्वागत करते हुए उनके अभिभावकों का भी शॉल व चुनरी ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया। एसएमएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने वाले संस्था के पूर्व छात्र डॉ. अभिनव शर्मा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता के साथ-साथ संस्था निदेशक बाबूलाल शर्मा को दिया। दूसरी तरफ सफल विद्यार्थियों ने अपनी उपलब्धि का श्रेय सेंट सोल्जर एकेडमी के मार्गदर्शन को देते हुए कहा कि उचित दिशा-निर्देशन से ही यह सफलता संभव हो सकी। प्रबंध निदेशक हितेश शर्मा ने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं, जबकि निदेशक बाबूलाल शर्मा ने कहा कि टोंक के विद्यार्थियों को अब नीट-जेईई की तैयारी के लिए घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा और संस्था इस संकल्प को आगे भी मजबूती से निभाएगी। प्राचार्य डॉ. शिप्रा बारेगामा ने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का संदेश दिया। स्कूल प्राचार्य मदन गोपाल, प्राचार्य मंजु माथुर ने अभिभावकों को संस्था पर विश्वास जताने पर सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का भरोसा दिलाया। इस दौरान प्राचार्य डॉ. धीरज कुमार शर्मा, डॉ. सरोज चाम्पावत, डॉ. सुधीर पारीक, डॉ. विनोद नाकरा, डॉ. राघवेन्द्र नामा, डॉ. शिव सिंह राजावत सहित सभी स्टाफ व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।