मानसून रफ्तार पर, लेकिन गत साल के मुकाबले 65% बारिश कम, पिछले साल अब तक भर गए थे 22 बांध, अभी सिर्फ 1 भरा
जिले में मौसम विभाग के यलो अलर्ट के बीच पिछले दो दिनों से मानसून ने फिर से रफ्तार पकड़ी है। कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज होने से लंबे समय से बनी उमस और गर्मी से लोगों को राहत मिली है। हालांकि बारिश का यह दौर अभी भी जिले में मानसून की मौसमी कमी को पूरी तरह दूर नहीं कर पाया है। इस वर्ष अब तक जिले में सामान्य औसत वर्षा का केवल करीब 22 प्रतिशत ही रिकॉर्ड हुआ है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 87.51 प्रतिशत वर्षा हो चुकी थी। जल संसाधन विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार बुधवार सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक जिले के विभिन्न रेनगेज क्षेत्रों में वर्षा दर्ज की गई। सबसे अधिक पनवाड़ में 38 मिमी बारिश हुई। इसके अलावा चांदसेन में 27 मिमी, ठिकरिया में 25 मिमी, नासिर दा में 22 मिमी, मालपुरा में 17 मिमी, लांबाहरिसिंह में 10 मिमी तथा टोरडी सागर क्षेत्र में 1 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। हालांकि टोंक शहर सहित कई जगह बुधवार को हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी कुछ दिनों तक जिले में मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। बादलों की आवाजाही के साथ कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश तथा कुछ क्षेत्रों में एक-दो दौर तेज बारिश होने के आसार हैं। फिलहाल यलो अलर्ट के तहत गरज-चमक के साथ वर्षा और तेज हवाएं चलने की संभावना बनी हुई है। यदि अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रही तो जिले में वर्षा की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है और बांधों व जलाशयों में जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है। किसानों को भी खरीफ फसलों के लिए इस बारिश से राहत मिलने की संभावना है। मानसून की सुस्ती का असर जिले के बांधों पर भी दिखाई दे रहा है। गत वर्ष इस समय तक सिंचाई विभाग के 30 बांधों में से 22 बांध ओवरफ्लो हो चुके थे तथा इनमें 96.49 प्रतिशत जलभराव हो गया था। वर्तमान में इन बांधों में औसतन करीब 46 प्रतिशत पानी ही उपलब्ध है।

