ब्रेकिंग न्यूज़
क्या नीरज चोपड़ा नहीं जीतेंगे कॉमनवेल्थ गोल्ड:ओलिंपिक और खेल संघों की इंटरनल रिपोर्ट- भारत 28 साल में सबसे कमजोर प्रदर्शन कर सकता है

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सामने 28 साल में अपने सबसे कमजोर प्रदर्शन का खतरा मंडरा रहा है। भारतीय ओलिंपिक संघ और अलग-अलग स्पोर्ट्स फेडरेशन की इंटरनल रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को पैरा स्पोर्ट्स सहित 13 खेलों में 32 पदक मिलने का अनुमान है, जिसमें सिर्फ 7 गोल्ड शामिल हैं। रिपोर्ट में नीरज चोपड़ा को भी गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है। नीरज ने 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। वे ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे हैं। जिन सात खिलाड़ियों को गोल्ड का दावेदार माना गया है उनके नाम आप नीचे दी गई तस्वीर में देख सकते हैं। 2002 से हर बार भारत ने जीते 15 या ज्यादा गोल्ड भारत के मेडल्स कम क्यों आएंगे? 1. जिन खेलों से सबसे ज्यादा मेडल आते हैं, वही इस बार बाहर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की सफलता का आधार शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे खेल रहे हैं। इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार पदक जीते हैं। ग्लासगो 2026 के कार्यक्रम में इन तीनों खेलों को शामिल नहीं किया गया है। यही भारत के लिए सबसे बड़ा झटका है। ग्लासगो 2026 में बर्मिंघम 2022 के 19 की तुलना में सिर्फ 10 खेल होंगे। भारत के कई मेडल स्पोर्ट्स शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी, स्क्वैश और क्रिकेट इस बार शामिल नहीं हैं। बर्मिंघम में भारत के 61 में से 30 मेडल इन्हीं खेलों से आए थे। यही वजह है कि इस बार भारत का प्रदर्शन केवल खिलाड़ियों की फॉर्म पर नहीं, बल्कि गेम्स के स्पोर्ट्स प्रोग्राम पर भी निर्भर करेगा। 2. नीरज की फॉर्म चिंता का विषय भारत के कुछ बड़े मेडल दावेदारों की मौजूदा फॉर्म भी चिंता बढ़ा रही है। जेवलिन थ्रो में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद नीरज चोपड़ा हैं। लेकिन इस बार उनके सामने चुनौती पहले से ज्यादा कठिन होगी। उनकी मौजूदा फॉर्म भी पहले जैसी नहीं है और पाकिस्तान के अरशद नदीम के अलावा ऑस्ट्रेलिया के कैमरन मैकिन्टायर जैसे खिलाड़ी भी नीरज को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। इसलिए रिपोर्ट में नीरज को गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है। बॉक्सिंग में भारत की उम्मीदें लवलीना बोरगोहेन जैसे बड़े नामों पर होंगी। हालांकि, पिछले कुछ समय में उनका प्रदर्शन उस लेवल का नहीं रहा है, जिसके लिए वे जानी जाती हैं। भारत के कई अन्य बड़े खिलाड़ियों के साथ भी यही स्थिति है। वे पदक जीतने की क्षमता रखते हैं, लेकिन हालिया प्रदर्शन के आधार पर उनके गोल्ड मेडल जीतने की गारंटी नहीं दी जा सकती। 5 खेल ऐसे जिनमें भारत हमेशा से कमजोर इस बार शामिल 10 में से 5 खेल स्वीमिंग, साइक्लिंग, जूडो, नेटबॉल और जिम्नास्टिक्स में भारत हमेशा से कमजोर रहा है। इसलिए इस बार भारत के मेडल काउंट में बड़ी गिरावट की आशंका है। क्या अहमदाबाद 2030 में बदलेगी तस्वीर? ग्लासगो गेम्स के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत करेगा। अहमदाबाद 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स में खेलों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2030 गेम्स में 15 से 17 खेल शामिल किए जा सकते हैं। इससे भारत को शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे अपने मजबूत खेलों को वापस कार्यक्रम में शामिल कराने का फायदा मिल सकता है। खेलों की संख्या बढ़ने के साथ मेडल इवेंट्स भी बढ़ेंगे, जिससे भारत के पदक जीतने के मौके बढ़ सकते हैं। ऐसे में ग्लासगो 2026 भारत के लिए चुनौतीपूर्ण एडिशन हो सकता है, लेकिन अहमदाबाद 2030 में तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। ————————— कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… भारत के 125 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, पिछली बार से 85 कम स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से शुरू होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारत ने अपने 125 एथलीटों के दल की घोषणा कर दी है। ESPN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दल में 77 पुरुष और 48 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ी कुल 13 खेल विधाओं में अपनी चुनौती पेश करेंगे। पूरी खबर…

क्या नीरज चोपड़ा नहीं जीतेंगे कॉमनवेल्थ गोल्ड:ओलिंपिक और खेल संघों की इंटरनल रिपोर्ट- भारत कर सकता है 28 साल में सबसे कमजोर प्रदर्शन

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सामने 28 साल में अपने सबसे कमजोर प्रदर्शन का खतरा मंडरा रहा है। भारतीय ओलिंपिक संघ और अलग-अलग स्पोर्ट्स फेडरेशन की इंटरनल रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को पैरा स्पोर्ट्स सहित 13 खेलों में 32 पदक मिलने का अनुमान है, जिसमें सिर्फ 7 गोल्ड शामिल हैं। रिपोर्ट में नीरज चोपड़ा को भी गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है। नीरज ने 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। वे ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे हैं। जिन सात खिलाड़ियों को गोल्ड का दावेदार माना गया है उनके नाम आप नीचे दी गई तस्वीर में देख सकते हैं। 2002 से हर बार भारत ने जीते 15 या ज्यादा गोल्ड भारत के मेडल्स कम क्यों आएंगे? 1. जिन खेलों से सबसे ज्यादा मेडल आते हैं, वही इस बार बाहर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की सफलता का आधार शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे खेल रहे हैं। इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार पदक जीते हैं। ग्लासगो 2026 के कार्यक्रम में इन तीनों खेलों को शामिल नहीं किया गया है। यही भारत के लिए सबसे बड़ा झटका है। ग्लासगो 2026 में बर्मिंघम 2022 के 19 की तुलना में सिर्फ 10 खेल होंगे। भारत के कई मेडल स्पोर्ट्स शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी, स्क्वैश और क्रिकेट इस बार शामिल नहीं हैं। बर्मिंघम में भारत के 61 में से 30 मेडल इन्हीं खेलों से आए थे। यही वजह है कि इस बार भारत का प्रदर्शन केवल खिलाड़ियों की फॉर्म पर नहीं, बल्कि गेम्स के स्पोर्ट्स प्रोग्राम पर भी निर्भर करेगा। 2. नीरज की फॉर्म चिंता का विषय भारत के कुछ बड़े मेडल दावेदारों की मौजूदा फॉर्म भी चिंता बढ़ा रही है। जेवलिन थ्रो में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद नीरज चोपड़ा हैं। लेकिन इस बार उनके सामने चुनौती पहले से ज्यादा कठिन होगी। उनकी मौजूदा फॉर्म भी पहले जैसी नहीं है और पाकिस्तान के अरशद नदीम के अलावा ऑस्ट्रेलिया के कैमरन मैकिन्टायर जैसे खिलाड़ी भी नीरज को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। इसलिए रिपोर्ट में नीरज को गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है। बॉक्सिंग में भारत की उम्मीदें लवलीना बोरगोहेन जैसे बड़े नामों पर होंगी। हालांकि, पिछले कुछ समय में उनका प्रदर्शन उस लेवल का नहीं रहा है, जिसके लिए वे जानी जाती हैं। भारत के कई अन्य बड़े खिलाड़ियों के साथ भी यही स्थिति है। वे पदक जीतने की क्षमता रखते हैं, लेकिन हालिया प्रदर्शन के आधार पर उनके गोल्ड मेडल जीतने की गारंटी नहीं दी जा सकती। 5 खेल ऐसे जिनमें भारत हमेशा से कमजोर इस बार शामिल 10 में से 5 खेल स्वीमिंग, साइक्लिंग, जूडो, नेटबॉल और जिम्नास्टिक्स में भारत हमेशा से कमजोर रहा है। इसलिए इस बार भारत के मेडल काउंट में बड़ी गिरावट की आशंका है। अहमदाबाद 2030 में बदलेगी तस्वीर? ग्लासगो गेम्स के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत करेगा। अहमदाबाद 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स में खेलों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2030 गेम्स में 15 से 17 खेल शामिल किए जा सकते हैं। इससे भारत को शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे अपने मजबूत खेलों को वापस कार्यक्रम में शामिल कराने का फायदा मिल सकता है। खेलों की संख्या बढ़ने के साथ मेडल इवेंट्स भी बढ़ेंगे, जिससे भारत के पदक जीतने के मौके बढ़ सकते हैं। ऐसे में ग्लासगो 2026 भारत के लिए चुनौतीपूर्ण एडिशन हो सकता है, लेकिन अहमदाबाद 2030 में तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। ————————— कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… भारत के 125 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, पिछली बार से 85 कम स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से शुरू होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारत ने अपने 125 एथलीटों के दल की घोषणा कर दी है। ESPN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दल में 77 पुरुष और 48 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ी कुल 13 खेल विधाओं में अपनी चुनौती पेश करेंगे। पूरी खबर…

आज 11 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी:राजस्थान में एक दिन में 9 इंच तक पानी बरसा, सीजन में सबसे ज्यादा बरसात

राजस्थान में बुधवार (22 जुलाई) को इस सीजन की सबसे भारी बारिश हुई। ब्यावर में कल रिकॉर्ड 9 इंच पानी बरसा, जो इस मानसून सीजन में अब तक की सबसे ज्यादा बारिश है। ब्यावर के साथ-साथ अजमेर और भीलवाड़ा में भी कई जगहों पर 3 से 5 इंच तक बारिश हुई। मौसम विभाग ने अगले 2 दिनों तक पूरे राजस्थान में बारिश का अलर्ट जारी किया है। हालांकि, 25 जुलाई के बाद पश्चिमी राजस्थान में बारिश थोड़ी कम हो जाएगी। गुरुवार को भी राज्य के 11 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। मानसून के बड़े अपडेट्स बरसाती नदियों में उफान, खेत डूबे: पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बरसात ब्यावर के पास बदनोर में 225MM (9 इंच) दर्ज हुई। यहां खेत और खुले इलाके जलमग्न हो गए। भारी बारिश से बरसाती नदियों में पानी बहने लगा है। ब्यावर के साथ डूंगरपुर बांसवाड़ा, जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर, भरतपुर, नागौर, बूंदी, जैसलमेर, अलवर, पाली के कई इलाकों में दो इंच तक बारिश रिकॉर्ड हुई। 2 दिन तेज बारिश का अलर्ट: मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया- राज्य में अभी मानसून एक्टिव रहने और अच्छी बारिश होने की परिस्थितियां अनुकूल है। मानसून ट्रफ अभी नॉर्मल पॉजिशन पर है, जो बीकानेर, टोंक, गुना, दमोह होकर गुजर रही है। उत्तर-पूर्वी राजस्थान के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इन सिस्टम के असर से राज्य में अगले दो दिन पूरे प्रदेश में बारिश होगी, जबकि दक्षिणी राजस्थान के हिस्से में कई स्थानों पर भारी से अतिभारी बारिश हो सकती है। राजस्थान के मौसम की PHOTOS… ये शहर सबसे ज्यादा गर्म आगे कैसा रहेगा मौसम राजस्थान के बड़े शहरों में कैसा रहा मौसम? जयपुर: राजधानी और उसके आस-पास के इलाकों में बारिश का दौर दूसरे दिन भी जारी रहा। बुधवार को फुलेरा, फागी, नरैना, सांभर, जोबनेर और दूदू के इलाकों में अच्छी बारिश हुई। सबसे ज्यादा 52 मिमी (करीब 2 इंच) बारिश सांभर में दर्ज की गई। जयपुर शहर में सुबह बूंदाबांदी हुई। बुधवार रात भी कई रुक-रुककर हल्की बारिश हुई। अलवर: जिले में बुधवार सुबह से शाम तक रुक-रुककर रिमझिम बारिश का दौर चलता रहा। अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में यहां तेज बारिश होने की संभावना है। अजमेर: जिले में सुबह से लेकर शाम तक रुक-रुककर तेज बारिश होती रही, जिससे लोगों को उमस और गर्मी से बड़ी राहत मिली। दिनभर में कुल 79 मिमी बारिश दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 27.0 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23.4 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 से 48 घंटों तक तेज बारिश का दौर जारी रहेगा। सीकर: शहरी इलाकों में दोपहर करीब 1 बजे तेज हवा के साथ करीब 10-12 मिनट तक रिमझिम बारिश हुई। बारिश के बाद दिनभर उमस रही। फतेहपुर मौसम केंद्र पर अधिकतम तापमान 32.5 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, सीकर जिले में 24 जुलाई तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। उदयपुर: लेकसिटी में बुधवार सुबह करीब एक घंटे तक तेज बारिश हुई, जिससे मौसम सुहावना हो गया। बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को उदयपुर का अधिकतम तापमान 30.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि मंगलवार को अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री था। कोटा: जिले में मंगलवार और बुधवार को हुई बारिश के बाद तापमान में अच्छी गिरावट आई है। बुधवार को कोटा का अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कोटा में बीते दो दिन से रुक-रुककर बारिश हो रही है। जिले के डैम व नदियों में पानी की आवक शुरू हो गई है। जोधपुर: बुधवार को जोधपुर में मानसून की पहली अच्छी बारिश हुई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिली। बारिश के बाद मौसम खुशनुमा हो गया। बुधवार को जोधपुर का अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

अंग्रेजों ने गुलाम देशों के लिए शुरू किया कॉमनवेल्थ गेम्स:पादरी ने आइडिया दिया था, भारत को पहला गोल्ड जीतने में 24 साल लगे

14 अक्टूबर 2010… दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम ‘भारत…भारत…’ के नारों से गूंज रहा था। बैडमिंटन कोर्ट पर सायना नेहवाल थीं। सामने सिर्फ एक फाइनल नहीं था, बल्कि पदक तालिका में भारत का भविष्य भी था। अगर सायना हार जातीं, तो मेजबान भारत तीसरे स्थान पर खिसक जाता, लेकिन उन्होंने जीत दर्ज की। भारत का 38वां स्वर्ण पदक आया। कुल पदक 101 हुए और पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत दूसरे स्थान पर पहुंच गया। आज भी यह भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत की यह कहानी 2010 में शुरू नहीं हुई थी, इसकी शुरुआत 76 साल पहले हुई थी, जब 1934 में सिर्फ छह भारतीय खिलाड़ी पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में उतरे थे। उस वक्त भारत पर अंग्रेजों का शासन था, लेकिन पहलवान राशिद अनवर ने कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम इतिहास में दर्ज करा दिया। हालांकि, कॉमनवेल्थ गेम्स की कहानी इससे भी 43 साल पहले की है। आइए, 135 साल पुराने इस सफर के बारे में जानते हैं…. न सरकार, न राजा… एक पादरी का आइडिया कॉमनवेल्थ की कहानी शुरू होती है 1891 में। ब्रिटिश साम्राज्य अपने चरम पर था। दुनिया की करीब एक-चौथाई आबादी और विशाल भूभाग पर ब्रिटेन का शासन था। तब एक ब्रिटिश पादरी जॉन एस्टली कूपर ने एक ऐसा सपना देखा, जिसने बाद में दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजनों में से एक को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि साम्राज्य की ताकत सिर्फ सेना से नहीं, बल्कि लोगों के रिश्तों से भी बढ़ती है। अगर ब्रिटिश साम्राज्य के अलग-अलग देशों के खिलाड़ी एक मैदान पर उतरेंगे तो आपसी भरोसा और भाईचारा मजबूत होगा। उन्होंने इसका नाम दिया- ‘पैन-ब्रिटेनिक फेस्टिवल’, लेकिन विचार देना आसान था, उसे सच करना मुश्किल। करीब 20 साल तक यह सपना कागजों में ही पड़ा रहा। राजा के राज्याभिषेक ने दिखाया भविष्य 1911 में ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम का राज्याभिषेक हुआ। इसी मौके पर लंदन में फेस्टिवल ऑफ एम्पायर आयोजित किया गया। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के खिलाड़ी पहली बार एक ही आयोजन में उतरे। यह आधिकारिक कॉमनवेल्थ गेम्स नहीं थे, लेकिन इतिहासकार इसे कॉमनवेल्थ गेम्स की पहली झलक मानते हैं। यहीं लोगों को एहसास हुआ कि ऐसा आयोजन सफल हो सकता है। ओलिंपिक में हुई एक बैठक… जिसने इतिहास बदल दिया 1928 के एम्स्टर्डम ओलिंपिक के दौरान ब्रिटिश साम्राज्य के खेल प्रशासक मिले। यहीं फैसला हुआ कि ओलिंपिक से अलग, हर चार साल में ब्रिटिश साम्राज्य के देशों के लिए अपना एक खेल आयोजन होगा। यही वह फैसला था जिसने कॉमनवेल्थ गेम्स को जन्म दिया। पहले गेम्स लगभग रद्द होने की कगार पर थे 16 अगस्त 1930… कनाडा के छोटे से शहर हैमिल्टन में पहले ब्रिटिश एम्पायर गेम्स शुरू होने वाले थे। लेकिन एक बड़ी समस्या सामने थी। उस समय हवाई यात्रा आम नहीं थी। ज्यादातर खिलाड़ी समुद्री जहाजों से कनाडा पहुंचते थे। कई देशों ने साफ कह दिया कि उनके पास यात्रा का खर्च नहीं है। आयोजकों ने कई टीमों की आर्थिक मदद की। तब जाकर पहला आयोजन हो सका। अगर उस समय कनाडा पीछे हट जाता, तो शायद कॉमनवेल्थ गेम्स का इतिहास वहीं खत्म हो जाता। आज हजारों खिलाड़ी आते हैं… तब सिर्फ 400 थे पहले संस्करण में केवल 11 देशों के करीब 400 खिलाड़ी। इसमें सिर्फ 6 खेल- एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, स्विमिंग, डाइविंग, कुश्ती और लॉन बॉल्स शामिल थे। आज इन खेलों में हजारों खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं और दर्जनों खेल खेले जाते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास का पहला स्वर्ण पदक ऑस्ट्रेलिया के रोवर बॉबी पियर्स ने जीता। वे बाद में ओलिंपिक चैंपियन भी बने। 1934 में भारत गुलाम था, लेकिन इतिहास लिखा भारत पहली बार इन खेलों में उतरा। आजाद भारत नहीं… ब्रिटिश भारत। पूरे दल में सिर्फ छह खिलाड़ी थे। उनमें से पहलवान राशिद अनवर ने कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला। यानी भारत का पहला कॉमनवेल्थ पदक उस समय आया, जब देश का अपना तिरंगा भी आधिकारिक राष्ट्रीय ध्वज नहीं था। फिर आया ऐसा युद्ध, जिसने खेल ही रोक दिए 1942 और 1946… इन दोनों सालों में कॉमनवेल्थ गेम्स होने थे, लेकिन दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध में जल रही थी। लाखों लोग मारे जा रहे थे। ऐसे में खेलों की कोई जगह नहीं थी। इतिहास में केवल यही दो संस्करण हैं, जो विश्व युद्ध की वजह से रद्द हुए। 1950 में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड से खेलों की वापसी हुई। जब साम्राज्य टूट गया, तो खेलों का नाम भी बदल गया 1930 में इन खेलों का नाम था- ब्रिटिश एम्पायर गेम्स, लेकिन अगले तीन दशकों में दुनिया बदल गई। भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, घाना, नाइजीरिया, मलेशिया जैसे कई देश आजाद हो गए। ब्रिटिश साम्राज्य सिकुड़ने लगा और नाम बदलने लगे। भारत 24 साल बाद जीता पहला गोल्ड 1958… कार्डिफ। एक दुबला-पतला धावक ट्रैक पर उतरा। नाम था मिल्खा सिंह। उन्होंने 440 यार्ड दौड़ जीतकर इतिहास रच दिया। वे कॉमनवेल्थ गेम्स की एथलेटिक्स स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बने। इस जीत के बाद उन्हें ‘फ्लाइंग सिख’ कहा जाने लगा। उसी संस्करण में पहलवान लीला राम ने भी स्वर्ण पदक जीता। भारत 76 साल बाद बना मेजबान भारत 1934 में कॉमनवेल्थ गेम्स में शामिल हुआ और 2010 में उसने मेजबानी की, यानी 76 साल बाद। नई दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करने वाला दक्षिण एशिया का पहला शहर बना। 71 कॉमनवेल्थ देशों और क्षेत्रों के करीब 6,000 खिलाड़ी 17 खेलों की 272 स्पर्धाओं में उतरे। मेजबान होने का दबाव कम नहीं था, लेकिन भारत ने 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य समेत 101 पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक तालिका में भारत ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरे स्थान पर पहुंचा। आज भी यह भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में 126 भारतीय खिलाड़ी हिस्सा लेंगे 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स 23 जुलाई से 2 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होंगे। इस बार सिर्फ 10 खेल शामिल हैं। भारत 126 खिलाड़ियों का दल भेज रहा है, जो एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, वेटलिफ्टिंग, जूडो, तैराकी, ट्रैक साइक्लिंग, जिम्नास्टिक, लॉन बॉल्स, 3×3 बास्केटबॉल और पैरा कॉम्पिटीशन में हिस्सा लेगा। मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहैन भारत की ध्वजवाहक होंगी। वहीं, 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स एक बार फिर भारत लौटेंगे। मेजबानी अहमदाबाद करेगा। 2030 में ही कॉमनवेल्थ गेम्स के 100 साल पूरे हो रहे हैं, इसलिए इसे खास माना जा रहा है। ——————–

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 आज से:125 भारतीय खिलाड़ी 8 खेलों में उतरेंगे; 1,168 मेडल्स के लिए 3,000+ एथलीट्स में होगा मुकाबला

स्कॉटलैंड के शहर ग्लासगो में आज 23वें कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत होगी। 2 अगस्त तक चलने वाले इस इवेंट में 74 देशों के 3,000 से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। 10 खेलों में 215 गोल्ड सहित कुल 1,168 मेडल दांव पर होंगे। भारत के 125 खिलाड़ी 8 खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। स्टोरी में जानिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी… कॉमनवेल्थ गेम्स कब और कैसे शुरू हुआ? कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत 1930 में कनाडा के हैमिल्टन में हुई थी। तब इसे ब्रिटिश एम्पायर गेम्स कहा जाता था। पहले एडिशन में ब्रिटिश साम्राज्य से जुड़े 11 देशों के 400 से ज्यादा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इसमें एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, लॉन बॉल्स, रोइंग, स्विमिंग और रेसलिंग जैसे खेल शामिल थे। 1930 से 1950 तक इस टूर्नामेंट को ब्रिटिश एम्पायर गेम्स कहा गया। 1954 में इसका नाम बदलकर ब्रिटिश एम्पायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स किया गया। 1970 में यह ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स बना और 1978 से इसे कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम से जाना जाता है। इसका आयोजन हर चार साल में होता है। इसका मकसद कॉमनवेल्थ देशों के खिलाड़ियों को बड़े इंटरनेशनल मंच पर कम्पटीशन का अवसर देना है। भारत ने पहली बार 1934 में हिस्सा लिया था। हॉकी, क्रिकेट, शूटिंग, बैडमिंटन और कुश्ती जैसे बड़े खेल गायब इस बार कुल 10 खेलों में 215 मेडल इवेंट्स होंगे। इनमें 47 पैरा-स्पोर्ट्स मेडल इवेंट्स शामिल हैं। क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती, टेबल टेनिस और स्क्वैश जैसे खेल ग्लासगो 2026 का हिस्सा नहीं हैं। भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे ज्यादा मेडल शूटिंग में ही जीते हैं। भारत का प्रदर्शन कैसा रहा है? भारत ने 1934 में कॉमनवेल्थ गेम्स में डेब्यू किया था।भारत ने 1930, 1950, 1962 और 1986 को छोड़कर बाकी सभी एडिशन में हिस्सा लिया है। लंदन 1934 गेम्स में भारत की ओर से छह एथलीटों ने हिस्सा लिया था। भारतीय दल ने 10 ट्रैक एंड फील्ड इवेंट्स और एक कुश्ती स्पर्धा में भाग लिया। इसी एडिशन में भारत ने अपना पहला मेडल जीता था। पहलवान राशिद अनवर ने पुरुषों की 74 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में कांस्य पदक जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पहला मेडल हासिल किया था। 1934 में डेब्यू के बाद से भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 564 मेडल जीते हैं। इनमें 203 गोल्ड, 189 सिल्वर और 172 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में नया क्या होगा?
कॉमनवेल्थ माइल की वापसी: एथलेटिक्स में कॉमनवेल्थ माइल की वापसी होगी। यह इवेंट आखिरी बार 1966 में हुआ था। यानी करीब 60 साल बाद इसकी वापसी हो रही है। 2026 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 1500 मीटर की जगह 1 मील यानी 1.609 किलोमीटर की रेस कराई जाएगी। इस बार मेंस के साथ विमेंस की माइल रेस भी होगी।
सबसे बड़ा पैरा-स्पोर्ट प्रोग्राम: 2026 में छह खेलों में पैरा-स्पोर्ट्स को पूरी तरह शामिल किया गया है। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास का सबसे बड़ा पैरा-स्पोर्ट प्रोग्राम है। कितने वेन्यू पर होंगे इवेंट्स? कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आयोजन ग्लासगो के चार अलग-अलग वेन्यू पर किया जाएगा। ग्लासगो दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा। इससे पहले 2014 में पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन किया था। ओपनिंग सेरेमनी में चानू-लवलीना फ्लैग बियरर होंगी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की ओपनिंग सेरेमनी 23 जुलाई 2026 को होगी। समारोह ग्लासगो के ओवीओ हाइड्रो एरीना में भारतीय समयानुसार रात 12:30 बजे से 2:30 बजे तक होगी। भारत की ओर से मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन फ्लैग बियरर होंगी। इसमें मशहूर ब्रिटिश सिंगर टॉम वॉकर परफॉर्म करेंगे। मेडल में दिखेगा शहर की पहचान और इतिहास ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के मेडल्स में मेजबान शहर की पहचान, इतिहास और समावेशिता की झलक दिखेगी। पुरस्कार विजेता आर्टिस्ट और डिजाइनर मिलित्सा मिलेनकोवा ने मेडल डिजाइन किए गए हैं। ये मेडल ग्लासगो के लैंडमार्क्स, कोट ऑफ आर्म्स, औद्योगिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान से प्रेरित हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहली बार मेडल्स में ब्रेल और टैक्टाइल एलिमेंट्स शामिल किए गए हैं। कहां देख सकते हैं इवेंट्स? भारत में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स का सीधा प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के टीवी चैनल पर किया जाएगा। इसके अलावा ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग सोनी लिव ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। आप इन खेलों का लुत्फ डीडी स्पोर्ट्स पर भी मुफ्त में उठा सकते हैं। इसके अलावा दैनिक भास्कर एप पर भी लाइव अपडेट्स पढ़े जा सकेंगे। ————————— कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… भारत के 125 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, पिछली बार से 85 कम स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से शुरू होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारत ने अपने 125 एथलीटों के दल की घोषणा कर दी है। ESPN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दल में 77 पुरुष और 48 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ी कुल 13 खेल विधाओं में अपनी चुनौती पेश करेंगे। पूरी खबर…

कुत्ते के काटने पर अब त्वचा पर ही लगेगा टीका, घाव पर टांके भी नहीं लगेंगे; विभाग को पोर्टल पर एंट्री करनी होगी

डॉग बाइट और रैबीज के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए चिकित्सा विभाग ने इलाज और प्रोटोकॉल को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें डॉग बाइट सहित रैबीज से जुड़े विभिन्न मामलों के उपचार को लेकर निर्देश दिए गए हैं। इसमें कुत्ते के काटने पर त्वचा पर ही टीका लगाए जाना, घाव पर टांके नहीं लगाना आदि निर्देश शामिल है। वहीं अब विभाग को इन मामलों को ऑनलाइन रिकॉर्ड भी रखना होगा। इसके लिए ऐसे हर मामले को पीसीपीएफ पोर्टल पर इंद्राज किया जाएगा। नई गाइडलाइन में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब अस्पतालों में रैबीज के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पताल तक एंटी रैबीज वैक्सीन और एंटी रैबीज सीरम की कोल्ड चेन (तय तापमान पर सुरक्षित रखना) बनाए रखना अनिवार्य होगा। विभाग ने साफ किया है कि पशु के काटने पर घाव पर प्राथमिक टांके नहीं लगाए जाएंगे। अगर टांके लगाना बहुत जरूरी हुआ, तो पहले घाव में रैबीज से लड़ने वाली दवा (इम्यूनोग्लोबुलिन) भरी जाएगी। साथ ही अब वैक्सीन को मांस में लगाने के बजाय त्वचा के अंदर लगाना ज्यादा प्रभावी माना गया है। अगर मरीज के पूरा वैक्सीनेशन होने के तीन महीने के भीतर दोबारा बाइट होने पर घाव धोने के अलावा वैक्सीन की जरूरत नहीं होगी। वहीं 3 महीने बाद काटने पर सिर्फ शून्य व तीसरे दिन दो डोज लगाएंगे।

हरिसागर कुंड में डूबने की सूचना अफवाह निकली

लांबाहरिसिंह| ऐतिहासिक हरिसागर कुंड बाराखंबा छतरी गार्डन के सामने घाट के किनारे देर शाम चप्पल जोड़ी, कुरकुरे के पैकेट व बीयर की बोतल दिखाई पड़े पर कुंड में किसी व्यक्ति के डूबने की आंशका को लेकर कस्बेवासियों में सनसनी फैल गई। जहां सूचना मिलने पर एएसआई रामस्वरूप खींची मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से कुंड में जाल डालकर शंका का समाधान किया। जहां पुलिस व ग्रामीणों ने मंगलवार देर रात 12 बजे तक पानी के अन्दर तलाश किया। पुलिस ने बताया की हरिसागर कुंड के किनारे घाट पर चप्पल जोड़ी व बीयर शराब बोतल दिखाई दी। लोगों ने उसके आधार पर किसी के कुंड में डूबने की आंशका जताई। सूचना पर मौके पर पहुंचकर कुंड तलाश की लेकिन कुछ नहीं मिला।

टोंक के कबाड़ बाजार में 8 घंटे सर्च ऑपरेशन 15 गोदामों को नोटिस थमाए, संचालक फरार

भास्कर न्यूज | टोंक धन्नातलाई क्षेत्र के गैस गोदाम और बिलाल मस्जिद के आसपास स्थित कबाड़ गोदामों पर बुधवार को पुलिस और परिवहन विभाग ने सर्च अभियान चलाया। कई कबाड़ गोदाम मालिक ताला लगाकर भाग छूटे। इस कार्रवाई का आधार आरटीओ टैक्स बकाया, फाइनेंस बकाया व संदिग्ध वाहनों की जांच करना रहा। इस दौरान पुलिस ने 15 गोदाम संचालकों को नोटिस जारी कर 3 दिन में जवाब मांगा है। परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ लेकर वृत्ताधिकारी मृत्युंजय मिश्रा ने कोतवाली सहित छह थानों और पुलिस लाइन के जाब्ते, मय थाना प्रभारियों सहित करीब 8 घंटे गहन छानबीन की। दरअसल पुलिस को सूचना मिली थी कि कबाड़ गोदामों में संदिग्ध वाहनों को लाकर काटा जा रहा है। दूसरी तरफ कबाड़ गोदामों पर पुलिस की मौजूदगी की भनक लगते ही कई कबाड़ी अपने गोदामों पर ताला लगाकर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने बंद और खुले दोनों तरह के गोदामों की जांच करते हुए वहां खड़े वाहनों, खुले पड़े इंजनों, चेसिस, वाहन पार्ट्स और उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन किया। साथ ही जिन वाहनों का आरटीओ टैक्स या फाइनेंस बकाया था, उनके रिकॉर्ड भी खंगाले गए। अधिकारियों ने इंजन और चेसिस नंबर का मिलान कर वाहनों की वैधता जांचने के साथ रजिस्ट्रेशन संबंधी दस्तावेजों की भी पड़ताल की। चोरी का माल की खरीद-फरोख्त वाले बख्शे नहीं जाएगे ^चोरी का माल खरीदने, छिपाने या खपाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की नजर हर संदिग्ध गोदाम और प्रतिष्ठान पर है। आज जांच हुई है, कल भी होगी। चोरी के सामान के साथ पकड़े गए तो गोदाम सीज होगा, गिरफ्तारी होगी और सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान जारी रहेगा, भागकर या छिपकर कोई बच नहीं सकेगा। – मृत्युंजय मिश्रा, सीओ, टोंक सिटी

पूर्व उपमुख्यमंत्री बनवारी लाल बैरवा की पुण्यतिथि पर कांग्रेसियों ने दी श्रद्धांजलि

भास्कर न्यूज |टोंक राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री, पूर्व सांसद और वरिष्ठ कांग्रेसी रहे बनवारी लाल बैरवा की पुण्यतिथि पर बुधवार को टोंक बस स्टैंड के बाहर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी-कार्यकर्ता ओं के अलावा सामाजिक संगठनों से जुडे लोगों ने बैरवा के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूर्व विधायक कमल बैरवा ने कहा कि डिप्टी सीएम और राजनीति में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए बनवारी बैरवा का सादगीपूर्ण जीवन, उनका हंसमुख, मिलनसार और सहज व्यक्तित्व ही उनकी पहचान था। स्वयं को सबसे पहले कांग्रेस का एक समर्पित कार्यकर्ता मानते थे और जीवनभर जनता के सुख-दुख में सहभागी बनकर सेवा करते रहे। जिला कांग्रेस सोशल मीडिया प्रभारी जर्रार खान ने बताया कि श्रद्धांजलि कार्यक्रम में स्व. बैरवा के पुत्र मनिंदर बेरवा, पूर्व जिलाध्यक्ष हरिप्रसाद बेरवा, अलका बैरवा, दिनेश चौरासिया, हंसराज फागणा, कैलाशी देवी मीणा, देवकरण गुर्जर, रामदेव गुर्जर, बरकात हसीन, सलीमुद्दीन खान, फोजूराम मीणा, शब्बीर अहमद, शिवजीराम मीणा, विकास लोदी, अशोक महावर, हंसराज गाता सहित काफी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी-कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

रास्ते में गंदा पानी जमा होने से लोग परेशान

टोंक| डारडा हिंद में चौराहे से स्कूल के रास्ते की तरफ आम रास्ता है, जो कि पूरे 12 महीने गंदे पानी की झील बना रहता है। संबंधित विभाग की अनदेखी की वजह से स्कूल जाने वाले परेशान होते हैं। कभी-कभीं बच्चे कीचड़ में गिर भी जाते हैं। कई बार संबंधित विभाग से शिकायत की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लोग गंदे पानी में आने जाने को मजबूर होते हैं, यहां पर मच्छर आदि भी बढ़ रहे हैं। – शंकर, डारडाहिंद