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पंचायत-निकाय चुनाव नहीं कराने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी:कहा-इलेक्शन कमीशन सक्षम नहीं तो हम किसी को अपॉइंट कर देते हैं; CEC को तलब किया

राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव तय समय सीमा में नहीं कराने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने सरकार के चुनाव टालने के प्रार्थना पत्र पर बुधवार को सुनवाई की। हाईकोर्ट ने कहा- अगर राज्य चुनाव आयोग इलेक्शन कराने में सक्षम नहीं है तो हम हाईकोर्ट से किसी को चुनाव कराने के लिए अपॉइंट कर देते हैं। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा- हमें सख्त आदेश पास करने के लिए मजबूर मत कीजिए। कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और ओबीसी कमीशन की कार्यशैली को लेकर मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर इसके सदस्य सक्षम नहीं हैं तो उन्हें हटाकर सक्षम व्यक्ति को काम दीजिए। कोर्ट ने अदालती आदेश की पालना नहीं करने पर गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) राजेश्वर सिंह और ओबीसी आयोग के सदस्य सचिव को तलब किया है। सरकार ने कहा- लास्ट चांस दे दीजिए सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि चुनाव में ओबीसी का प्रतिनिधित्व जरूरी है। हम कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं कर रहे हैं। लेकिन ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं आने से विभिन्न वर्गों के आरक्षण का वर्गीकरण नहीं हो पाया है। ओबीसी आयोग की मांग पर उनका समय कई बार बढ़ाया जा चुका है। लेकिन इस बार आयोग ने कहा है कि वह 14 अगस्त तक रिपोर्ट दे देगा। चुनाव टालते हुए सरकार को लास्ट चांस दिया जाए। अधिकारी कोर्ट की अवमानना के लिए जिम्मेदार याचिकाकर्ता पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता पुनीत सिंघवी ने कहा- सरकार और राज्य चुनाव आयोग कोर्ट के आदेश के बाद भी ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। जबकि कोर्ट अपने 22 मई के आदेश में साफ कर चुका था कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं आती है तो उसका इंतजार नहीं करना है। उसके बाद भी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बहाने चुनाव टालने के लिए अधिकारी कोर्ट की अवमानना के दोषी हैं। चुनाव कराने की जिम्मेदारी आयोग की दूसरे याचिकाकर्ता गिर्राज सिंह देवंदा की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने कहा- सरकार का यह प्रार्थना पत्र मेंटेनेबल ही नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 243 (क) में चुनाव कराने की जिम्मेदारी राज्य चुनाव आयोग की है। कोर्ट के आदेश की पालना कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की थी। वह उसमें पूरी तरह से विफल रहा है। इस पर कोर्ट ने राज्य चुनाव आयुक्त को तलब करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने दिए थे 31 जुलाई तक चुनाव कराने के आदेश राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले आयोग और सरकार को 15 अप्रेल तक प्रदेश में निकाय-पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार और आयोग ने अदालत में प्रार्थना पत्र लगाकर चुनाव टालने की अपील की थी। प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने समय देते हुए 31 जुलाई तक हर हाल में चुनाव कराने के लिए कहा था। वहीं, ओबीसी आयोग को भी 20 जून तक अपनी रिपोर्ट देने के लिए बोला था। … यह खबर भी पढ़ें… राजस्थान में सितंबर-नवंबर के बीच हो सकते हैं पंचायत-निकाय चुनाव:हाईकोर्ट ने 31 जुलाई तक कराने को कहा था; सरकार ने मांगा समय राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव सितंबर से नवंबर के बीच होंगे। इसके संकेत हाईकोर्ट में सरकार की ओर से लगाए गए चुनाव टालने के प्रार्थना पत्र में मिलते हैं। सरकार ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र लगाकर 31 जुलाई तक चुनाव कराने की समय सीमा को बढ़ाने की मांग की है। (पूरी खबर पढ़ें)

भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट का डेटा लीक:दावा- हैकर्स ने कंट्रोल रूम का लेआउट, सप्लायर्स की लिस्ट डार्क वेब पर डाली

भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट कुडनकुलम से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक हो गए हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, हैकर्स ग्रुप ‘वर्ल्ड लीक्स’ ने डार्क वेब पर इन दस्तावेजों को अपलोड करने का दावा किया है। इनमें पावर प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायर्स की लिस्ट, कंट्रोल रूम और अन्य रिकॉर्ड सार्वजनिक किए गए। सर्वर मई में हैक हुआ था, जून में दस्तावेज लीक का दावा किया गया। इसकी जानकारी अब सामने आई है। तमिलनाडु के कुडनकुलम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने माना है कि थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा का सर्वर हैक किया गया। इसकी जानकारी सरकार को दे दी गई है। डेटा लीक कैसे हुआ, 6 पॉइंट में समझें… न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) रिलायंस के साथ मिलकर मामले की समीक्षा कर रहा है। भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम भी इस डेटा लीक की जांच कर रही है। डेटा लीक कितना खतरनाक परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डार्क वेब पर मौजूद ये दस्तावेज अगर असली हैं, तो इनके जरिए कोई हमलावर न्यूक्लियर पावर प्लांट के सपोर्ट सिस्टम, सप्लाई चेन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझ सकता है, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है। प्लांट पर 2019 में भी हो चुका साइबर हमला साल 2019 में भी कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रशासनिक नेटवर्क में उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर समूह का मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी। उस समय NPCIL ने कहा था कि संयंत्र की परिचालन प्रणाली प्रभावित नहीं हुई थी। हैकिंग से कितना खतरा, क्या है इसकी वजह; 5 सवाल-जवाब सवाल: डार्क वेब क्या है, जहां डेटा अपलोड किया गया जवाब: डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जिसे सामान्य ब्राउजर (जैसे- क्रोम, एज या सफारी) से नहीं खोला जा सकता। इसे एक्सेस करने के लिए टोर ब्राउजर जैसे विशेष ब्राउजर की जरूरत होती है। सवाल: ये हमला सप्लाई चेन अटैक जैसा, वजह क्या है? जवाब: जब हैकर सीधे किसी संस्था पर हमला करने के बजाय उसके ठेकेदार, सॉफ्टवेयर कंपनी या डेटा सेंटर को निशाना बनाते हैं, तो इसे सप्लाई चेन अटैक कहते हैं। इससे असली लक्ष्य तक पहुंचना उनके लिए आसान हो जाता है। सवाल: हैकर्स डेटा डार्क वेब पर क्यों डालते हैं? जवाब: फिरौती मांगने, डेटा बेचने, जासूसी करने, अपनी हैकिंग क्षमता दिखाने या भविष्य के हमलों के लिए जानकारी साझा करने के उद्देश्य से। सवाल: अगर कंट्रोल रूम का लेआउट लीक हो जाए तो खतरा क्या है? जवाब: इससे हमलावरों को पता चल सकता है कि प्लांट के अहम सिस्टम कहां हैं और सुरक्षा व्यवस्था कैसे काम करती है। ऐसी जानकारी भविष्य में साइबर हमला या घुसपैठ की योजना बनाने में मदद कर सकती है। सवाल: भारत के न्यूक्लियर प्लांट की साइबर सुरक्षा कौन करता है? जवाब: भारत में NPCIL, CERT-In, NCIIPC और AERB जैसे संस्थान न्यूक्लियर प्लांट की साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… 6 नए न्यूक्लियर प्लांट बिजली की कमी पूरी करेंगे: सबसे ज्यादा पूर्वांचल में बनेंगे देश में सबसे ज्यादा बिजली की डिमांड यूपी में है। इसको पूरा करने के लिए सरकार 6 न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने जा रही है। इनमें नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) के हिस्से में 3, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) 2 और अडानी ग्रुप 1 पावर प्लांट बना सकते हैं। ये कुल 8400 मेगावाट क्षमता वाले प्लांट होंगे। पूरी खबर पढ़ें…

युवक की मौत, प्रेमिका समेत 8 पर हत्या का आरोप:पिता ने कहा- पहले प्रताड़ित किया फिर जहरीला पदार्थ पिलाया

खैरथल-तिजारा में एक युवक की मौत के बाद परिवार ने उसकी प्रेमिका और परिवार पर हत्या करने का आरोप लगाया है। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने कुल 8 लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना किशनगढ़ बास थाना क्षेत्र की है। पुलिस के अनुसार, अलवर के किथूर गांव निवासी प्रमोद (25) को 12 जुलाई 2026 की दोपहर करीब 1 बजे खानपुर निवासी पूरण जाटव ने अपनी बेटी संगीता से रिश्ते की बात करने के लिए बुलाया था। प्रमोद और संगीता पहले साथ पढ़ते थे। एक-दूसरे से परिचित थे। कमरे में बंधक बनाकर प्रताड़ित किया, फिर पिलाया जहर पिता हरि नारायण ने बताया- मेरा बेटा प्रमोद खानपुर पहुंचा तो पूरण जाटव और परिवार के अन्य लोगों ने संगीता से संबंध खत्म करने का दबाव बनाया। प्रमोद ने मना किया तो आरोपियों ने जान से मारने और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद पूरण, अशोक, कविता, संगीता, अंजली, वर्षा, पोला और धनराज ने मिलकर प्रमोद को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। उसे जबरन जहरीला पदार्थ पिला दिया। इलाज के दौरान तोड़ा दम, मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम जहर खाने के बाद प्रमोद की तबीयत बिगड़ने पर उसे 108 एंबुलेंस की मदद से किशनगढ़ बास के सरकारी हॉस्पिटल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे अलवर रेफर कर दिया। अलवर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान 14 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे प्रमोद की मौत हो गई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया- संगीता ने प्रमोद से अपने जीजा के खाते में करीब 90 हजार रुपए भी ट्रांसफर करवाए थे। पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है और मामले की जांच में जुट गई है।

ICC की वनडे ऑलरांउडर रैंकिंग में अक्षर टॉप-10 में पहुंचे:3 पायदान की छलांग: 9वें पर पहुंचे; गिल नंबर-1 बनने से सिर्फ 11 पॉइंट दूर

ICC ने 15 जुलाई को वनडे रैंकिंग जारी की। इसमें भारतीय ऑलराउंडर अक्षर पटेल तीन स्थान की छलांग लगाकर नौवें नंबर पर पहुंच गए। शुभमन गिल दूसरे स्थान पर बरकरार हैं और नंबर-1 बल्लेबाज बनने से सिर्फ 11 रेटिंग अंक दूर हैं। वहीं, इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में सस्ते में आउट होने के बावजूद रोहित शर्मा और विराट कोहली टॉप-5 बल्लेबाजों में बने हुए हैं। अक्षर ने इंग्लैंड के खिलाफ मैच जिताया इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में अक्षर पटेल ने पहले 4 विकेट लिए, फिर 52 गेंदों में नाबाद 57 रन की मैच जिताऊ पारी खेलकर प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड जीता। उनके इस ऑलराउंड प्रदर्शन का असर ICC की ताजा वनडे रैंकिंग में भी दिखा। अक्षर बल्लेबाजों की रैंकिंग में 18 स्थान की छलांग लगाकर 73वें, गेंदबाजों में दो स्थान के सुधार के साथ 42वें और ऑलराउंडर रैंकिंग में तीन स्थान ऊपर चढ़कर 9वें नंबर पर पहुंच गए। 213 रेटिंग अंकों के साथ वह अपने करियर के बेस्ट रैंकिंग पर हैं। इससे पहले वह 7 जुलाई को जारी रैंकिंग में 12वें स्थान पर पहुंचे थे। इस सूची में अफगानिस्तान के अजमतुल्लाह ओमरजई 316 अंकों के साथ शीर्ष पर हैं। वहीं, मैच जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले वाशिंगटन सुंदर बल्लेबाजों की रैंकिंग में 177वें और ऑलराउंडर रैंकिंग में 55वें स्थान पर पहुंच गए। गिल नंबर-1 से सिर्फ 11 रेटिंग अंक दूर इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में 259 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए कप्तान शुभमन गिल ने 75 गेंदों में 80 रन बनाए। वह चोट के कारण रिटायर्ड हर्ट होकर लौटे, लेकिन उनकी पारी भारत की जीत की नींव साबित हुई। इस प्रदर्शन से उन्हें 12 रेटिंग अंक मिले और वह 803 अंकों के साथ वनडे बल्लेबाजों की रैंकिंग में दूसरे स्थान पर बने हुए हैं। अब वह टॉप पर मौजूद न्यूजीलैंड के डेरिल मिचेल से सिर्फ 11 रेटिंग अंक पीछे हैं। वहीं, पहले वनडे में सस्ते में आउट होने के बावजूद विराट कोहली तीसरे और रोहित शर्मा चौथे स्थान पर कायम हैं। गेंदबाजों में कुलदीप को नुकसान, बुमराह 24वें स्थान पर वनडे गेंदबाजों की रैंकिंग में कुलदीप यादव एक स्थान फिसलकर आठवें नंबर पर आ गए। वह भारत के इकलौते टॉप-10 गेंदबाज हैं। कुलदीप पहले वनडे में नहीं खेले थे। जसप्रीत बुमराह वापसी मैच में 1 विकेट लेने के बाद 24वें और मोहम्मद सिराज 19वें स्थान पर हैं। इंग्लैंड के खिलाड़ियों को भी मिला फायदा हार के बावजूद जो रूट 76 रन की पारी के बाद संयुक्त 12वें स्थान पर पहुंच गए। लियम डॉसन 81 स्थान की छलांग लगाकर 262वें नंबर पर आ गए। टी20 रैंकिंग में इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रुक 12 स्थान के सुधार के साथ सातवें और जोस बटलर छठे स्थान पर पहुंच गए। जोफ्रा आर्चर चार मैचों में सात विकेट लेकर संयुक्त 18वें स्थान पर हैं। न्यूजीलैंड, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के खिलाड़ियों ने भी लगाई छलांग वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे में 5 विकेट लेने वाले न्यूजीलैंड के जेडन लेनोक्स 31 स्थान की छलांग लगाकर 66वें नंबर पर पहुंच गए। वेस्टइंडीज के शाई होप बैटिंग रैंकिंग में छठे और केसी कार्टी टॉप-20 में शामिल हो गए। वहीं जिम्बाब्वे के बेन करन 34वें स्थान पर पहुंच गए, जबकि ब्रैड इवांस ने बल्लेबाजी, गेंदबाजी और ऑलराउंडर तीनों रैंकिंग में बड़ा सुधार किया।

वसुंधरा बोलीं- राजनीति के लिए सामाजिक रिश्ते खराब न करें:मेरे खिलाफ चुनाव लड़े अबरार अहमद की मौत पर कांग्रेस कार्यालय गई थी

पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने कहा- सामाजिक रिश्तों को राजनीति के कारण खराब नहीं करना चाहिए। राजनीति से अलग भी हमारे सामाजिक रिश्ते होते हैं। विधानसभा सदन से बाहर आने पर बहुत सी बातें ऐसी होती हैं, जिन पर हम साथ बैठ सकते हैं। लेकिन अब सदन के भीतर अमर्यादित आचरण के छींटे लगने लगे हैं और भाषा का स्तर बहुत गिर चुका है। राजस्थान विधानसभा के 75 साल पूरे होने पर साल भर चलने वाले कार्यक्रमों के उद्घाटन के मौके पर वसुंधरा राजे ने ये बातें कही। वसुंधरा राजे ने किस्सा साझा करते हुए कहा- कांग्रेस नेता अबरार अहमद मेरे खिलाफ चुनाव लड़े थे। जब कुछ समय बाद उनका निधन हुआ और उनका पार्थिव शरीर कांग्रेस कार्यालय लाया गया, तब वहां सबसे पहले पहुंचने वालों में मैं भी शामिल थी। उस समय कांग्रेस के लोग भी वहां ज्यादा संख्या में नहीं पहुंचे थे। मेरे बहुत से शुभचिंतकों ने मुझसे कहा था कि ‘आप कांग्रेस कार्यालय क्यों जा रही हैं?’ तब मैंने उनसे कहा था कि इंसानियत राजनीति की लक्ष्मण रेखा से ऊपर होनी चाहिए। जब कभी किसी के यहां दुख-सुख हो, जैसे किसी की मौत, शादी या बच्चों का जन्म, तो हमें विरोधी दलों के नेताओं के यहां भी जाना चाहिए। इसमें कोई बुरा मानने वाली बात नहीं है। मैंने भैरोंसिंह शेखावत से पूछा था- आप विपक्ष के नेताओं को इतना भाव क्यों देते हैं? वसुंधरा राजे ने कहा- मोहनलाल सुखाड़िया और भैरोंसिंह शेखावत पान की एक दुकान पर जाते थे। वहां बैठकर खूब चर्चा करते थे। हरिदेव जोशी जब खुद मुख्यमंत्री थे और बाद में जब वे विपक्ष में रहे, तब भी शेखावत साहब के साथ उनकी गहरी दोस्ती थी। शेखावत साहब के मुख्यमंत्री रहते हुए जब हरिदेव जोशी बीमार हो गए, तो शेखावत साहब रोज उनसे मिलने अस्पताल जाते थे। घंटों वहां बैठते थे। कभी-कभी तो वे सरकारी फाइलें भी अस्पताल से ही निपटाते थे। मैंने एक बार उनसे पूछा था कि आप विपक्ष के नेताओं को इतना भाव क्यों देते हैं? तब शेखावत साहब ने मुझे पोरस और सिकंदर की कहानी सुनाकर इसका महत्व समझाया था। सदन में सुखाड़िया और हरिदेव जोशी की खूब आलोचना करते थे पूर्व सीएम ने कहा- राजनेताओं के बीच वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उनके बीच हमेशा से ही आपसी रिश्ते अच्छे रहे हैं। भैरोंसिंह शेखावत विपक्ष में रहते हुए उस वक्त के मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया और हरिदेव जोशी की सदन में खूब आलोचना करते थे। लेकिन दोनों तरफ से कभी दुश्मनी नहीं रही। उनके आपसी रिश्ते बहुत अच्छे थे। पीएम नरसिम्हा राव ने अटलजी को भारत का पक्ष रखने UN भेजा था वसुंधरा ने कहा- पूर्व पीएम नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच गहरी दोस्ती थी। नरसिम्हा राव जब प्रधानमंत्री थे, उस वक्त पाकिस्तान जेनेवा में भारत के खिलाफ मानवाधिकार के मामले में संयुक्त राष्ट्र (UN) में एक प्रस्ताव ला रहा था। राव ने विपक्षी दल के नेता होने के बावजूद अटलजी पर भरोसा जताया और उन्हें भारत का पक्ष रखने जेनेवा भेजा। अटलजी ने अपने बेहतरीन राजनयिक कौशल से उस प्रस्ताव को पास नहीं होने दिया और वह प्रस्ताव गिर गया। नए विधायक तैयारी करके नहीं आते नए विधायकों को सीख देते हुए वसुंधरा राजे ने कहा- आजकल ज्यादातर नए विधायक तैयारी करके नहीं आते। भैरोंसिंह शेखावत और सतीश चंद्र अग्रवाल जैसे नेता विधानसभा की लाइब्रेरी में जाकर पुस्तकें पढ़ते थे। जब वे सदन में आते थे, तो उनके तर्कों के आगे कोई टिक नहीं पाता था। आज कई नए विधायक पढ़ते नहीं हैं और विधानसभा सदन में भी कम आते हैं। मैं सभी विधायकों से कहना चाहूंगी कि यह कोई साधारण सदन नहीं है। यहां से ऐतिहासिक निर्णय निकले हैं। भैरोंसिंह जी हमेशा नए विधायकों को बोलने का मौका देते थे। जब कोई नया विधायक अच्छा बोलता था, तो वे खुश होकर लड्डू मंगवाकर बंटवाते थे। कई बार तो ये लड्डू विरोधी दल के विधायकों तक भी पहुंच जाते थे। मदेरणा रविवार को मौन रखते थे, वह उनके अध्ययन का दिन होता था पूर्व सीएम ने कहा- एक बार मैं बिना बताए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष परसराम मदेरणा साहब के यहां चली गई थी। वहां लोगों ने मुझे बताया कि उन्होंने मौन धारण किया हुआ है। वे रविवार को किसी से बोलते नहीं हैं। मैंने कहा कि जब मैं यहां तक आई हूं, तो राम-राम करके ही जाऊंगी। जब मैं उनसे मिली, तो वे मौन थे। उन्होंने मुझे कागज पर लिखकर बताया कि रविवार को उनका मौन व्रत होता है और यह दिन उनके अध्ययन (स्टडी) का होता है। हमें ऐसे महान नेताओं से सीखने की जरूरत है कि व्यस्तता के बीच भी अध्ययन के लिए समय कैसे निकाला जाता है। हमारे शरीर का कतरा-कतरा भी राजस्थान के काम आए तो कम है वसुंधरा राजे ने कहा- सरकार ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का काम हाथ में लिया है। यह बहुत बड़ा कदम है। हम सदन में केवल अपना नाम दर्ज करवाने नहीं आए हैं। हम यहां आए हैं तो राजस्थान के उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करें। जिन्होंने हमें चुनकर भेजा है, हम उनके विश्वास पर खरा उतरें। आज हमें संकल्प लेना चाहिए कि अगर राजस्थान के विकास के लिए हमारे शरीर का कतरा-कतरा भी लग जाए, तो वह भी कम होगा। … ये खबर भी पढ़िए… उपराष्ट्रपति बोले- विकसित राजस्थान बिना विकसित भारत नहीं बनेगा:बिरला ने कहा- सदन में हंगामा हो, मैं खड़ा नहीं होता, स्पीकर के चेहरे पर तनाव नहीं हो जयपुर में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा- विकसित राजस्थान के बिना विकसित भारत नहीं बन सकता है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने लक्ष्य दिया है। यह लक्ष्य पाने के लिए सशक्त संस्थाएं जरूरी हैं। पढ़ें पूरी खबर वसुंधरा बोलीं- भैया मेरा चला गया, तुम्हारे लिए क्या करूं:लोग कहते हैं आपका तो ठीक है, हमें बचा लीजिए; मैं कैसे बचाऊं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा- छोटे-मोटे काम होते रहते हैं। किसी को मकान नहीं मिल रहा, किसी की पेंशन नहीं मिल रही, किसी का मुआवजा नहीं मिल रहा। कल आई थी, ये लोग मुझे बोल रहे थे। पढ़ें पूरी खबर

बिजली विभाग से जुड़ी कंपनी का डीजीएम रिश्वत लेते पकड़ा:फॉउंडेशन और अर्थिंग वर्क के 1 लाख मांगे थे, 90 हजार में सौदा तय हुआ था

बीकानेर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए बिजली विभाग से जुड़ी कंपनी के डीजीएम देवेश को 90 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी अधिकारी शिकायतकर्ता से रिश्वत की राशि ले रहा था, तभी एसीबी की टीम ने उसे ट्रैप कर दबोच लिया। जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के निर्देश पर की गई। बीकानेर एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशीष कुमार के नेतृत्व में टीम ने जाल बिछाकर आरोपी को रिश्वत की रकम के साथ पकड़ लिया। अधिकारी ने बिजली लाइन बिछाने वाली जगह पर अर्थिंग और फॉउंडेशन काम को चलने देने के लिए 1 लाश रुपए की रिश्वत मांगी थी। कार्रवाई के दौरान सीआई इंद्र कुमार सहित एसीबी की टीम मौके पर मौजूद रही। ट्रैप के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है। साथ ही उसके कार्यालय और संबंधित दस्तावेजों की जांच भी शुरू कर दी गई है। एसीबी अब रिश्वतखोरी से जुड़े संभावित नेटवर्क, लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल में जुटी है। अधिकारियों का मानना है कि जांच के दौरान मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

श्रीगंगानगर में इनकम टैक्स की छापेमारी:दो साल की रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर की जांच शुरू, 9 लोगों की टीम पहुंची

श्रीगंगानगर में आयकर विभाग की इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन विंग ने रियल एस्टेट कारोबार पर अब तक की सबसे बड़ी छापेमारी शुरू की है। विभाग की 9 सदस्यीय विशेष टीम ने रजिस्ट्रार कार्यालय में पिछले दो साल यानी 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2026 तक हुई सभी महत्वपूर्ण रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। टीम सोमवार दोपहर को श्रीगंगानगर पहुंची और कर रिकॉर्ड खंगालती रही। सूत्रों के माने तो टीम अभी एक-दो दिन और रुक सकती है। कार्रवाई की खबर फैलते ही प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े बिल्डरों, निवेशकों और बड़े सौदागरों में हड़कंप मच गया। पुलिस 30 लाख से अधिक मूल्य की रजिस्ट्री खंगाल रही विभाग विशेष रूप से उन मामलों पर फोकस कर रहा है जिनमें दो लाख रुपए से अधिक का नकद भुगतान हुआ है। साथ ही 30 लाख रुपए से अधिक मूल्य की रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है, जिनकी सूचना नियमानुसार आयकर विभाग को भेजी जानी चाहिए थी। जांच में गलत पैन नंबर, फर्जी बैंक खाते, गलत चेक नंबर या डीएलसी दरों में हेरफेर की भी पड़ताल की जा रही है। वित्तीय लेन-देन की गहन जांच सीमावर्ती जिला होने के कारण श्रीगंगानगर में पिछले कुछ वर्षों में जमीनों और संपत्तियों के दामों में आई अप्रत्याशित तेजी भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विभाग को आशंका है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में बाहरी और संदिग्ध धन का भारी निवेश हुआ हो सकता है। इसी एंगल से दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जा रही है। 75 करोड़ की संदिग्ध रजिस्ट्रियां सामने आई थी हाल ही में अनूपगढ़ सब रजिस्ट्रार कार्यालय में हुई जांच के दौरान लगभग 75 करोड़ रुपए की संदिग्ध रजिस्ट्रियां सामने आई थीं। वहां दो लाख रुपए से अधिक के नकद लेन-देन, 30 लाख से ऊपर की रजिस्ट्रियों की रिपोर्ट न भेजने और गलत पैन, बैंक खाते और चेक नंबर दर्ज करने जैसी गंभीर अनियमितताएं मिली थीं। इसके बाद अब श्रीगंगानगर को भी जांच के दायरे में लिया गया है। यदि जांच में टैक्स चोरी, फर्जी दस्तावेज या संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के पुख्ता प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आयकर अधिनियम और अन्य प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इस पूरे मामले से रियल एस्टेट कारोबारियों में दहशत का माहौल है और आगे और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है। टीम में मौजूद रहे ये अधिकारी जयपुर से 9 लोगों की टीम पहुंची। जिसका नेतृत्व आईटीओ सुमित तिवाड़ी कर रहे हैं। टीम में प्रभारी राजेश कुमार चौधरी, निरीक्षक सत्येन्द्र शर्मा, प्रदीप, विनोद गोदारा, गायत्री, संदीप ढालिया, योगेश ढाका, पंकज रहेजा और अब्दुल रहमान शामिल हैं।

चार प्रसूताओं की मौत, मंत्री बोले-2 पहले से थीं क्रिटिकल:एनीमिया-हाई बीपी बन रही वजह; रिपोर्ट में लिखा-महिलाओं की हार्ट-किडनी फेल हुई

बांसवाड़ा जिला हॉस्पिटल में पहुंचे चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने माना कि चार में दो महिलाओं की मौत प्रसव के दौरान हुई है। कहा- सभी मौतें प्रसव की जटिलताओं के कारण नहीं हुईं। एक महिला दो महीने की प्रेग्नेंट थी और उसने बिना डॉक्टर की सलाह के गर्भपात की गोलियां (अबॉर्शन पिल्स) खा ली थीं। अस्पताल पहुंचने तक उसकी हालत पहले से ही बेहद गंभीर हो चुकी थी। दो महिलाओं की मौत हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) और लिवर (यकृत) से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई। जबकि अन्य दो मरीज अस्पताल आने से पहले ही अत्यंत गंभीर स्थिति में थीं। मंत्री ने कहा- एनीमिया और हाई बीपी मौत की वजह बन रही है। वहीं रिपोर्ट में दो महिलाओं की मौत का कारण हार्ट और किडनी खराब होना लिखा है। मंत्री ने कहा- मैं खुद स्वास्थ्य मंत्री के नाते यहां आया हूं। हमने विभाग के अधिकारियों के साथ पूरी बैठक की है। सभी मृत प्रसूताओं के अस्पताल में भर्ती होने से लेकर उनकी मौत तक के सभी रिकॉर्ड मंगवाए गए हैं। इन रिकॉर्ड्स को जयपुर ले जाकर गहनता से वेरिफाई किया जाएगा, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके। बता दें, 12 जुलाई को उच्च अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीम हॉस्पिटल पहुंची थी। टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट मंत्री को सौंप दी है। अधिकारियों के साथ बैठक के बाद चिकित्सा मंत्री ने अस्पताल के वार्डों का भी निरीक्षण किया। मंत्री बोले- एनीमिया के कारण हो रही ज्यादा मौत चिकित्सा मंत्री ने कहा- उप-स्वास्थ्य केंद्र स्तर से ही सभी गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान सुनिश्चित की जाएगी। अधिकांश मातृ मृत्यु एनीमिया (खून की कमी) और हाई ब्लड प्रेशर के कारण हो रही हैं। इसलिए अब सभी एएनएम और फील्ड स्टाफ को गर्भवती महिलाओं के हीमोग्लोबिन की नियमित जांच, आयरन की गोलियों के वितरण और ब्लड प्रेशर की लगातार मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जयपुर की फाइनल रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई हॉस्पिटल में बैठक के दौरान कलेक्टर और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने चारों मामलों की विस्तृत केस हिस्ट्री चिकित्सा मंत्री को सौंपी। विभाग ने बताया कि अब जयपुर से आने वाली अंतिम सत्यापन (फाइनल वेरिफिकेशन) रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। ​पढ़िए… जांच रिपोर्ट में क्या आया सामने? — संबंधित ये खबरें भी पढ़ें … मां दुनिया में नहीं, बकरी का दूध पी रहा नवजात:परिजन बोले- वह दर्द से तड़प रही थी, नॉर्मल डिलीवरी करवाना चाहते थे डॉक्टर बांसवाड़ा में 4 प्रसूताओं की मौत के बाद राज्य सरकार से आई टीम अस्पताल में जांच में जुटी है। 3 प्रसूताओं के परिजन उन्हें ले गए। 1 प्रसूता का लक्ष्मी का परिवार सामने आया है। पूरी खबर पढ़िए

ममता बोलीं- भाजपा चाहती थी मुझे हार्ट अटैक आ जाए:मैं तब तक जिंदा रहूंगी, जब तक उनका अंत न हो जाए

ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा चाहती थी मुझे हार्ट अटैक आ जाए, लेकिन मैं तब तक जिंदा रहूंगी जब तक उनका अंत न हो जाए। पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता ने बुधवार को एक वीडियो मैसेज जारी किया। उन्होंने इस मैसेज में तृणमूल में जारी फूट पर भी अपना पक्ष रखा। ममता ने कहा- जो लोग जाना चाहते हैं, वे जा सकते हैं। मैंने 2006 में तृणमूल को फिर से खड़ा किया था, तो मैं 2026 में भी ऐसा कर सकती हूं। दरअसल तृणमूल के सीनियर लीडर मदन मित्रा बुधवार को ममता बनर्जी का गुट छोड़ ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट में शामिल हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने विधायक पद नहीं छोड़ा है। मदन मित्रा ने यह कदम तब उठाया, जब उनके ऊपर प्रवर्तन निदेशालय (ED) का शिकंजा कस रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंगलवार को ईडी ने मदन मित्रा की पत्नी और उनके दो बेटों को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था। ममता बोलीं- लोगों को धमकाया जा रहा मदन मित्रा बोले- टीएमसी अभिषेक को बचाने में लगी मदन मित्रा ने कहा- पार्टी डूब रही है, लोगों की जान जा रही है, लेकिन टीएमसी सिर्फ अभिषेक को बचाने में लगी है। मैंने अभिषेक को सुझाव दिया था कि वह एक साल के लिए पद से हट जाएं। पहले पार्टी मजबूत कर लेते हैं फिर वापस आ जाइएगा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। मित्रा ने कहा कि तृणमूल दो हिस्सों में बंट गई है। मैं ममता बनर्जी का सम्मान करता हूं और उनका शुक्रिया अदा करता हूं। वह लंबे समय से हमारे साथ रही हैं। हमने भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है। 3 जून को शुरु हुई थी बगावत, ऋतब्रत बने बागी गुट के नेता 3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। TMC के 80 में से 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना था। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया था। इसमें मांग की गई थी कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी थी। 22 जून को हुई प्रतिनिधि बैठक में नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया था। ममता के पास अब 21 विधायक और 17 सांसद बचे टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं। विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। इसमें से 59 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 21 विधायक बचे हैं। दो तिहाई सदस्य होने पर मिलती है अलग दल की मान्यता बागी गुट के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 2 जुलाई को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलकर खुद को असली TMC के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। उन्होंने चुनाव आयोग को पार्टी में हुए संगठनात्मक बदलावों और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (NWC) की जानकारी दी थी। ——————- टीएमसी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ममता गुट बोला- TMC पर बागी खेमे का दावा फर्जी:चुनाव आयोग से कहा पार्टी संविधान के अनुसार सभी समितियां 2027 तक वैध
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट ने सोमवार को चुनाव आयोग (EC) के समक्ष अपना विस्तृत जवाब दाखिल करते हुए बागी गुट के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। पार्टी ने कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की सभी संगठनात्मक समितियां पार्टी संविधान के अनुसार 2027 तक वैध हैं। पूरी खबर पढ़ें…

'या तो किडनी ट्रांसप्लांट कराओ, नहीं तो इच्छा मृत्यु दो':डिलीवरी के बाद किडनी फेल, महिलाओं ने सरकार को दिया अल्टीमेटम

कोटा मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन (प्रसव) के बाद महिलाओं की किडनी फेल होने के बेहद गंभीर मामले में नया मोड़ आ गया है। अस्पताल के नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती 5 पीड़ित महिलाओं में से 4 बुधवार को मीडिया के सामने आईं। महिलाओं ने रोते हुए कहा- हमें अस्पताल में भर्ती हुए 2 महीने से ज्यादा का समय हो गया है। अब सरकार या तो हमारे किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था करवाए, नहीं तो हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दे। दो दिन पहले इन महिलाओं के परिजनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की थी और प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। अल्टीमेटम की अवधि पूरी होने के बाद, विरोध स्वरूप इन महिलाओं ने बुधवार से डायलिसिस कराने से साफ मना कर दिया है। सीजेरियन ऑपरेशन के बाद फेल हुई थीं किडनियां
गौरतलब है कि 4 से 8 मई के बीच कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में डिलीवरी के लिए ये महिलाएं भर्ती हुई थीं। सीजेरियन ऑपरेशन के बाद इन सभी महिलाओं की किडनियां फेल हो गई थीं। इस मामले में पांचों महिलाएं अब भी अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक (SSB) में भर्ती हैं। इन महिलाओं की किडनियां पूरी तरह काम करना बंद कर चुकी हैं और इन्हें हर दूसरे-तीसरे दिन डायलिसिस की दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पीड़ित महिला रागिनी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा- हम यहां डिलीवरी के लिए आए थे। 4 मई को भर्ती किया गया था, आज 70 दिन से ज्यादा का समय हो गया है और हम अस्पताल में ही पड़े हैं। हर दो-तीन दिन में डायलिसिस होता है, जिसमें असहनीय दर्द और तकलीफ होती है। पीड़ित महिलाओं का दर्द और इच्छा मृत्यु की मांग
पीड़ित महिला रागिनी ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई डायलिसिस के दौरान हालत बहुत खराब हो जाती है, बार-बार बुखार आता है और तबीयत बिगड़ जाती है। हमारी बस यही मांग है कि हमारा किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाए। हम अस्पताल में जैसे (भले-चंगे) आए थे, हमें वैसे ही ठीक करके घर भेजा जाए। बीमारी के कारण घर पर सब परेशान हैं और पति की नौकरी तक छूट गई है। हम डायलिसिस के भरोसे कब तक जिंदा रहेंगे? या तो हमारा ट्रांसप्लांट कराओ या फिर हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दो, अब यह दर्द सहन नहीं होता।” वहीं, दूसरी पीड़ित धन्नी बाई ने भी साफ कह दिया कि अब वे डायलिसिस नहीं करवाएंगी, चाहे अस्पताल में उनके साथ कुछ भी हो जाए। डायलिसिस का बहिष्कार और आईसीयू में भर्ती मरीज अपनी मांगों को लेकर महिलाओं ने अब इलाज का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। बुधवार को पिंकी और आरती का डायलिसिस होना था, लेकिन दोनों ने इसके लिए साफ मना कर दिया। इस बीच, डायलिसिस न होने के कारण बुधवार को आरती की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उसे आनन-फानन में आईसीयू (ICU) में शिफ्ट करना पड़ा। इसके बावजूद पीड़ित महिलाएं अपनी मांग पर अड़ी हुई हैं कि जब तक सरकार किडनी ट्रांसप्लांट की लिखित गारंटी नहीं देती, वे डायलिसिस नहीं कराएंगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का पक्ष
दूसरी ओर, कोटा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने इस मामले पर कहा- पांचों महिलाओं की स्थिति फिलहाल स्थिर है और जरूरत के अनुसार उनका डायलिसिस किया जा रहा है। यह कहना संभव नहीं है कि डायलिसिस कब तक करना पड़ेगा। जब तक उनकी किडनियां खुद रिकवर नहीं हो जातीं, तब तक डायलिसिस करना बेहद जरूरी है। वैसे इन महिलाओं को अब अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं है, सिर्फ डायलिसिस के लिए आना ही काफी है, लेकिन यहां रहने से भी हमें कोई आपत्ति नहीं है। जहां तक किडनी ट्रांसप्लांट का सवाल है, तो मरीज की स्थिति देखने के बाद 3 से 6 महीने बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जा सकता है।