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वसुंधरा बोलीं- राजनीति के लिए सामाजिक रिश्ते खराब न करें:मेरे खिलाफ चुनाव लड़े अबरार अहमद की मौत पर कांग्रेस कार्यालय गई थी

पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने कहा- सामाजिक रिश्तों को राजनीति के कारण खराब नहीं करना चाहिए। राजनीति से अलग भी हमारे सामाजिक रिश्ते होते हैं। विधानसभा सदन से बाहर आने पर बहुत सी बातें ऐसी होती हैं, जिन पर हम साथ बैठ सकते हैं। लेकिन अब सदन के भीतर अमर्यादित आचरण के छींटे लगने लगे हैं और भाषा का स्तर बहुत गिर चुका है। राजस्थान विधानसभा के 75 साल पूरे होने पर साल भर चलने वाले कार्यक्रमों के उद्घाटन के मौके पर वसुंधरा राजे ने ये बातें कही। वसुंधरा राजे ने किस्सा साझा करते हुए कहा- कांग्रेस नेता अबरार अहमद मेरे खिलाफ चुनाव लड़े थे। जब कुछ समय बाद उनका निधन हुआ और उनका पार्थिव शरीर कांग्रेस कार्यालय लाया गया, तब वहां सबसे पहले पहुंचने वालों में मैं भी शामिल थी। उस समय कांग्रेस के लोग भी वहां ज्यादा संख्या में नहीं पहुंचे थे। मेरे बहुत से शुभचिंतकों ने मुझसे कहा था कि ‘आप कांग्रेस कार्यालय क्यों जा रही हैं?’ तब मैंने उनसे कहा था कि इंसानियत राजनीति की लक्ष्मण रेखा से ऊपर होनी चाहिए। जब कभी किसी के यहां दुख-सुख हो, जैसे किसी की मौत, शादी या बच्चों का जन्म, तो हमें विरोधी दलों के नेताओं के यहां भी जाना चाहिए। इसमें कोई बुरा मानने वाली बात नहीं है। मैंने भैरोंसिंह शेखावत से पूछा था- आप विपक्ष के नेताओं को इतना भाव क्यों देते हैं? वसुंधरा राजे ने कहा- मोहनलाल सुखाड़िया और भैरोंसिंह शेखावत पान की एक दुकान पर जाते थे। वहां बैठकर खूब चर्चा करते थे। हरिदेव जोशी जब खुद मुख्यमंत्री थे और बाद में जब वे विपक्ष में रहे, तब भी शेखावत साहब के साथ उनकी गहरी दोस्ती थी। शेखावत साहब के मुख्यमंत्री रहते हुए जब हरिदेव जोशी बीमार हो गए, तो शेखावत साहब रोज उनसे मिलने अस्पताल जाते थे। घंटों वहां बैठते थे। कभी-कभी तो वे सरकारी फाइलें भी अस्पताल से ही निपटाते थे। मैंने एक बार उनसे पूछा था कि आप विपक्ष के नेताओं को इतना भाव क्यों देते हैं? तब शेखावत साहब ने मुझे पोरस और सिकंदर की कहानी सुनाकर इसका महत्व समझाया था। सदन में सुखाड़िया और हरिदेव जोशी की खूब आलोचना करते थे पूर्व सीएम ने कहा- राजनेताओं के बीच वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उनके बीच हमेशा से ही आपसी रिश्ते अच्छे रहे हैं। भैरोंसिंह शेखावत विपक्ष में रहते हुए उस वक्त के मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया और हरिदेव जोशी की सदन में खूब आलोचना करते थे। लेकिन दोनों तरफ से कभी दुश्मनी नहीं रही। उनके आपसी रिश्ते बहुत अच्छे थे। पीएम नरसिम्हा राव ने अटलजी को भारत का पक्ष रखने UN भेजा था वसुंधरा ने कहा- पूर्व पीएम नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच गहरी दोस्ती थी। नरसिम्हा राव जब प्रधानमंत्री थे, उस वक्त पाकिस्तान जेनेवा में भारत के खिलाफ मानवाधिकार के मामले में संयुक्त राष्ट्र (UN) में एक प्रस्ताव ला रहा था। राव ने विपक्षी दल के नेता होने के बावजूद अटलजी पर भरोसा जताया और उन्हें भारत का पक्ष रखने जेनेवा भेजा। अटलजी ने अपने बेहतरीन राजनयिक कौशल से उस प्रस्ताव को पास नहीं होने दिया और वह प्रस्ताव गिर गया। नए विधायक तैयारी करके नहीं आते नए विधायकों को सीख देते हुए वसुंधरा राजे ने कहा- आजकल ज्यादातर नए विधायक तैयारी करके नहीं आते। भैरोंसिंह शेखावत और सतीश चंद्र अग्रवाल जैसे नेता विधानसभा की लाइब्रेरी में जाकर पुस्तकें पढ़ते थे। जब वे सदन में आते थे, तो उनके तर्कों के आगे कोई टिक नहीं पाता था। आज कई नए विधायक पढ़ते नहीं हैं और विधानसभा सदन में भी कम आते हैं। मैं सभी विधायकों से कहना चाहूंगी कि यह कोई साधारण सदन नहीं है। यहां से ऐतिहासिक निर्णय निकले हैं। भैरोंसिंह जी हमेशा नए विधायकों को बोलने का मौका देते थे। जब कोई नया विधायक अच्छा बोलता था, तो वे खुश होकर लड्डू मंगवाकर बंटवाते थे। कई बार तो ये लड्डू विरोधी दल के विधायकों तक भी पहुंच जाते थे। मदेरणा रविवार को मौन रखते थे, वह उनके अध्ययन का दिन होता था पूर्व सीएम ने कहा- एक बार मैं बिना बताए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष परसराम मदेरणा साहब के यहां चली गई थी। वहां लोगों ने मुझे बताया कि उन्होंने मौन धारण किया हुआ है। वे रविवार को किसी से बोलते नहीं हैं। मैंने कहा कि जब मैं यहां तक आई हूं, तो राम-राम करके ही जाऊंगी। जब मैं उनसे मिली, तो वे मौन थे। उन्होंने मुझे कागज पर लिखकर बताया कि रविवार को उनका मौन व्रत होता है और यह दिन उनके अध्ययन (स्टडी) का होता है। हमें ऐसे महान नेताओं से सीखने की जरूरत है कि व्यस्तता के बीच भी अध्ययन के लिए समय कैसे निकाला जाता है। हमारे शरीर का कतरा-कतरा भी राजस्थान के काम आए तो कम है वसुंधरा राजे ने कहा- सरकार ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का काम हाथ में लिया है। यह बहुत बड़ा कदम है। हम सदन में केवल अपना नाम दर्ज करवाने नहीं आए हैं। हम यहां आए हैं तो राजस्थान के उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करें। जिन्होंने हमें चुनकर भेजा है, हम उनके विश्वास पर खरा उतरें। आज हमें संकल्प लेना चाहिए कि अगर राजस्थान के विकास के लिए हमारे शरीर का कतरा-कतरा भी लग जाए, तो वह भी कम होगा। … ये खबर भी पढ़िए… उपराष्ट्रपति बोले- विकसित राजस्थान बिना विकसित भारत नहीं बनेगा:बिरला ने कहा- सदन में हंगामा हो, मैं खड़ा नहीं होता, स्पीकर के चेहरे पर तनाव नहीं हो जयपुर में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा- विकसित राजस्थान के बिना विकसित भारत नहीं बन सकता है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने लक्ष्य दिया है। यह लक्ष्य पाने के लिए सशक्त संस्थाएं जरूरी हैं। पढ़ें पूरी खबर वसुंधरा बोलीं- भैया मेरा चला गया, तुम्हारे लिए क्या करूं:लोग कहते हैं आपका तो ठीक है, हमें बचा लीजिए; मैं कैसे बचाऊं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा- छोटे-मोटे काम होते रहते हैं। किसी को मकान नहीं मिल रहा, किसी की पेंशन नहीं मिल रही, किसी का मुआवजा नहीं मिल रहा। कल आई थी, ये लोग मुझे बोल रहे थे। पढ़ें पूरी खबर

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