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पुरी रथयात्रा कल से, 6 महीने पहले से होटल बुकिंग:₹1500 का कमरा ₹50 हजार में मिल रहा; हावड़ा में जगन्नाथ यात्रा गोद में निकलती है

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 16 जुलाई, गुरुवार से शुरू होगी। यह भव्य उत्सव 24 जुलाई तक चलेगा, जिसमें 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। रथयात्रा को लेकर पुरी के होटल और लॉज पूरी तरह फुल हो चुके हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक, इस साल फरवरी से ही बुकिंग शुरू हो गई थी। मंदिर और रथयात्रा मार्ग के आसपास के होटल-लॉज की सबसे ज्यादा मांग है। खासकर जिन होटलों की बालकनी या खिड़की रथयात्रा मार्ग की ओर खुलती है, उनके लिए सबसे ज्यादा मारामारी है। पिछले साल के मुकाबले होटल और लॉज का किराया 10 गुना तक बढ़ गया है। जिन लॉज का सामान्य किराया 1500 से 2000 रुपए होता है, उनका किराया रथयात्रा के दौरान तीन दिन के लिए 50 हजार रुपए तक पहुंच गया है। पूरे शहर में करीब 1200 होटल हैं। रथयात्रा की तैयारियों से जुड़ी 6 तस्वीरें… हावड़ा में प्रोफेसर की गोद बनती है भगवान जगन्नाथ का रथ धर्म और आस्था की सीमाओं से परे पश्चिम बंगाल के हावड़ा में हर साल एक अनोखी रथयात्रा निकाली जाती है। यहां न तो रस्सी से रथ खींचा जाता है और न ही विशाल रथ सजाया जाता है। इसके बजाय कोलकाता के सेंट पॉल कैथेड्रल मिशन कॉलेज के बांग्ला विभाग के प्रोफेसर डॉ. शेख मकबूल इस्लाम भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन के विग्रह को अपनी गोद में लेकर करीब 400 मीटर की परिक्रमा करते हैं। इस यात्रा में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई तीनों समुदायों के लोग शामिल होते हैं। डॉ. इस्लाम 1992 से भगवान जगन्नाथ पर शोध कर रहे हैं और इस विषय पर 14 से अधिक किताबें लिख चुके हैं। 1996 से उनके घर में भगवान जगन्नाथ का विग्रह स्थापित है, जबकि 2009 से वे हर साल रथपूजा के अवसर पर इस अनूठी परिक्रमा का आयोजन कर रहे हैं। डॉ. शेख बोले- शरीर ही रथ है, तो अलग रथ क्यों? डॉ. शेख मकबूल इस्लाम इस परंपरा का आधार कठोपनिषद् के प्रसिद्ध श्लोक ‘आत्मानं रथिनं विद्धि, शरीरं रथमेव तु…’ को मानते हैं। उनके मुताबिक, इस श्लोक में शरीर को रथ, बुद्धि को सारथी और आत्मा को रथ का स्वामी बताया गया है। इसलिए जब शरीर ही रथ है, तो अलग रथ की जरूरत नहीं। वे पूरी तरह शाकाहारी हैं और भगवान जगन्नाथ के लिए अपने घर में पुरी की परंपरा के अनुसार 35 प्रकार का सात्विक भोग बनाकर विधि-विधान से अर्पित करते हैं। —————————— यह खबर भी पढ़ें… अमरनाथ गुफा में शिवलिंग पूरी तरह पिघला, अभी यात्रा के 5 दिन ही हुए अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग यात्रा के पांचवें दिन ही लगभग पूरी तरह पिघल गया। 57 दिन चलने वाली यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी। यात्रा के पहले चार दिनों में करीब 86 हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में दर्शन किए। पूरी खबर पढ़ें…

चित्रकार ने ‘बणी- ठणी’ का चित्र उकेरा या ‘राधा’ का:सदियों बाद भी कायम है इस रहस्यमयी पेंटिंग की पहचान पर बहस; पार्ट-3

राजस्थानी प्रेम कहानी के पार्ट-2 में आपने पढ़ा कि कैसे राजा और बणी-ठणी के प्रेम को चित्रकार ने अपनी पेंटिंग्स में उकेरा और बणी-ठणी क्यों भारत की मोनालिसा कहलाई। पार्ट-3 में पढ़िए आगे की कहानी… राजा सावंत सिंह और बणी-ठणी की कहानी में दोनों के श्रीकृष्ण और अध्यात्म की ओर झुकाव की विशेष भूमिका थी, जिसके चलते राजा ने बणी-ठणी में राधा की छवि को देखा था। एक शाम राजा सावंत सिंह ने निहाल चंद को बुलाया और बोले – मुझे खास चित्र बनाना है निहाल चंद। ध्यान रहे चित्र में मन की निर्मलता और आत्मा की शीतलता भी झलके। राधा के स्वरूप को उकेरो, ठीक वैसा जैसा मैंने अपनी कविताओं में राधा को महसूस किया है। राजा के आदेश ने निहाल चंद को सोच में डाल दिया। इस अनोखे सौंदर्य को कैनवास पर उतारना आसान नहीं था। दरबारी कलाकार ने इस चुनौती को स्वीकार किया और जुट गया अपने काम में। कभी वो राजा की कविताओं में डूब जाता तो कभी उन्हीं भावों को कैनवास पर उतारने की कोशिश करता। उधेड़ बुन के बीच उसने स्केच बनाना शुरू किया। हर रेखा, हर रंग मानो एक भावना को आकार दे रहे थे। ऐसा भी माना जाता है कि राजा ने बणी-ठणी से प्रेरित होकर निहाल चंद को राधा का चित्र बनाने का आदेश दिया था। बणी- ठणी के सौंदर्य को ध्यान में रखते हुए निहाल चंद ने धीरे-धीरे चित्र को पूरा किया और फिर एक पारदर्शी ओढ़नी के माध्यम से तस्वीर के सौंदर्य को और अधिक बढ़ा दिया। अंततः चित्रकार के कैनवास पर उतर आया दिव्य प्रेम और आलौकिक सौंदर्य का अद्भुत संगम। एक ऐसी कृति जो समय से परे थी। यही वो दौर था जब किशनगढ़ में जन्म हुआ उस कला शैली का जिसने खूबसूरती की परिभाषा बदल दी। किशनगढ़ कला शैली की सबसे बड़ी खासियत इसके पात्रों के चेहरे-मोहरे की खास बनावट थी। बणी-ठणी पेंटिंग किशनगढ़ कला शैली का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। बणी-ठणी बनाम ‘राधा’ राजा के कहने पर निहाल चंद ने बणी-ठणी को राधा के रूप में चित्रित किया था। हालांकि किशनगढ़ के कला इतिहासकार, आर्टिस्ट और पूर्व राजपरिवार इस चित्र को ‘राधा’ की पेंटिंग बताते हैं। किशनगढ़ पूर्व राजपरिवार का कहना है कि निहाल चंद ने दरअसल राधा की पेंटिंग बनाई थी, जिसे राजा सावंत सिंह ने अपनी कविताओं में दर्शाया था।
किशनगढ़ शैली के वरिष्ठ चित्रकार शंकर सिंह राठौड़ कहते हैं – पक्का तो कोई बात कही नहीं जा सकती। मगर कहते हैं कार्ल खंडेलवाला और डिकिंसन ने जब यहां शोध कार्य किया तो उन्होंने ये सारा स्टडी कर के बताया कि किसी लेडी से प्रभावित होकर ये पोर्ट्रेट बनाया गया और वो लेडी बणी-ठणी हो सकती है। कई विद्वान इसे राधा भी कहते हैं। श्री जयकृष्ण देवाचार्य, पीठाधीश्वर निम्बार्काचार्य,काचरिया पीठ, बणी-ठणी के चित्र में आध्यात्मिक भाव को विस्तार से समझाते हैं- राधिका जी के चित्र में उनका ललाट भव्य बताया गया है, बिंदी सौभाग्य का सूचक है। इस चित्र में कटाक्ष नयन हैं। श्रीनाथ जी के चित्र को देखेंगे तो उनके नेत्र भी इसी तरह के दिखाई देंगे।
‘बणी-ठणी’ या ‘राधा’! कौन जानता था कि निहाल चंद अपने राजा की अभिलाषा को पूरा करते हुए किशनगढ़ शैली को कला के इतिहास में अमर करने वाला था। (कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किया गया है। फोटो व पेंटिंग आभार : किशनगढ़ पूर्व राजपरिवार, चित्रकार,शहज़ाद अली शेरानी ) ग्राफिक्स – भाविक जैन
इनपुट सहयोग- रोहित पारीक राजा सावंत सिंह और बणी ठणी कृष्ण प्रेम और भक्ति में एक समान थे। इस भक्ति रस के चलते ऐसा क्या हुआ कि राजा ने राज पाट छोड़ दिया? जानेंगे कल के एपिसोड में… …… ये भी पढ़िए… 1. प्रेम कहानी जिसे शब्दों ने लिखा, रंगों ने जिंदा रखा:’बणी-ठणी’ क्या सिर्फ एक कल्पना है या वाकई कोई महिला थी? पार्ट- 1 बणी- ठणी कौन थी? ऐसा क्या था उस तस्वीर में जो राजस्थान की धरोहर बनी, जिसने किशनगढ़ शैली को दुनिया भर के कला जगत में पहचान दिलाई। जानते हैं राजा सावंत सिंह और बणी- ठणी की कहानी, जिनके प्रेम और भक्ति को कलाकार निहाल चंद ने अमर कर दिया। पूरी खबर पढ़ें… 2. खुद को कृष्ण मानते थे राजा, ‘बणी-ठणी’ को राधा:विदेशियों ने माना था भारत की मोनालिसा, ऐसा प्रेम जिसने किशनगढ़ को वृंदावन बना दिया; पार्ट–2 राजा सावंत सिंह के जीवन को भक्ति और कविता पूर्णता प्रदान करते थे, लेकिन उस दिन बणी-ठणी को सुनने के बाद उनकी साधना में अध्यात्म का एक नया और गहरा आयाम जुड़ गया था। धीरे- धीरे राजा और बणी- ठणी का रिश्ता जैसे राधा और कृष्ण के आध्यात्मिक प्रेम का रूपक बन गया था। पूरी खबर पढ़ें…

राजस्थान के 18 जिलों में बारिश की चेतावनी:अलवर और कोटपूतली-बहरोड़ में झमाझम बरसात, श्रीगंगानगर में पारा 40 के पार

राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मंगलवार को मानसून सुस्त नजर आया और लोगों को बारिश का इंतजार ही रहा। हालांकि, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और अलवर जिलों में हुई बारिश से तापमान में थोड़ी गिरावट जरूर दर्ज की गई है। इसके बावजूद श्रीगंगानगर जिला प्रदेश में सबसे गर्म रहा। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, आज (बुधवार) से मानसून एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगा, जिससे प्रदेश के 18 जिलों में तेज बारिश होने की संभावना है। विभाग ने इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए मेघगर्जन (थंडर) और आकाशीय बिजली (वज्रपात) के साथ हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी दी है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में सबसे ज्यादा बारिश अलवर जिले में रिकॉर्ड की गई। कोटपूतली-बहरोड़ में भी बदरा जमकर बरसे। हनुमानगढ़ के टिब्बी क्षेत्र में भी मंगलवार सुबह तक 37 मिलीमीटर (एमएम) बारिश दर्ज की जा चुकी थी। सबसे पहले राजस्थान में बारिश की स्थिति जानिए… राजस्थान में मौसम की तस्वीर… राजस्थान के सबसे गर्म जिले गर्मी-बारिश के बड़े अपडेट्स तप रहा है पश्चिमी राजस्थान : मंगलवार को श्रीगंगानगर का पारा 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। यहां तापमान 40.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पश्चिमी राजस्थान के ही जैसलमेर में 39 डिग्री सेल्सियस, बीकानेर में 38.8, चूरू में 38.7, फलोदी में 38.6 डिग्री सेल्सियस पारा रहा। छोटे कस्बों में संगरिया (हनुमानगढ़) में पारा 36.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। जोधपुर में तापमान में ज्यादा परिवर्तन नहीं आया। यहां मंगलवार को 35.8 डिग्री सेल्सियस पारा रहा, जो 13 जुलाई की तुलना में महज 0.3 डिग्री सेल्सियस कम हुआ है। आगे क्या : 15 जुलाई को हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं, सीकर, कोटपूतली-बहरोड़, अलवर, खैरथल-तिजारा, अलवर, डीग, भरतपुर, धौलपुर, जालोर, सिरोही, उदयपुर, सलूंबर, प्रतापगढ़, डूंगरगढ़ और बांसवाड़ा में बारिश हो सकती है। राजस्थान के बड़े शहरों में कैसा रहा मौसम जयपुर : मंगलवार को जयपुर में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस रहा, जो बुधवार को 36 डिग्री सेल्सियस हो सकता है। यहां दिनभर मौसम साफ रहा। बीते 24 घंटे में जयपुर में न्यूनतम तापमान 29.6 डिग्री सेल्सियस रहा है। बुधवार को बादल छाए रहेंगे। तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है। अजमेर : मंगलवार को अजमेर में मौसम सुहावना बना रहा। अधिकतम तापमान 33.8 और न्यूनतम 25.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे दिन में हल्की उमस महसूस हुई, जबकि सुबह और रात के समय राहत रही। हवा में नमी सुबह 75 प्रतिशत और शाम तक घटकर 50 प्रतिशत रही। मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल तापमान सामान्य के आसपास बना हुआ है। बादलों की आवाजाही के बीच कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है। अलवर : मंगलवार अलवर में दोपहर 2 बजे के बाद करीब एक घंटे तक अच्छी बारिश हुई। इस दौरान अलवर कोर्ट परिसर सहित शहर की सड़कें लबालब हो गईं। महल चौक की सीढ़ियों से पानी झरने की तरह बहने लगा। कोर्ट की कैंटीन में भी पानी भर गया। यहां लोग डिब्बों से पानी बाहर निकालते नजर आए। अच्छी बारिश से उमस से काफी राहत मिली है। कोटा : मंगलवार को कोटा का अधिकतम तापमान 36.3 और न्यूनतम तापमान 28.4 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम में हल्की उमस रही। इससे पहले सोमवार को अधिकतम तापमान 35.9 डिग्री व न्यूनतम 28.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में 13 जुलाई तक 21% कम बारिश हुई है। कोटा में 8 जुलाई के बाद से बरसात नहीं हुई है। जोधपुर : मंगलवार को जोधपुर में अधिकतम तापमान 35.8 और न्यूनतम तापमान 28.4 डिग्री रहा। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिन मौसम सामान्य रहेगा और कोई अलर्ट नहीं है। इस दौरान 17 जुलाई तक बादल छाए रहेंगे। 18 जुलाई से बारिश की संभावना है। उदयपुर : मंगलवार को उदयपुर में मौसम सामान्य रहा। कभी बादल छाए तो कभी तेज धूप निकली, लेकिन बारिश नहीं हुई। बावजूद इसके लोगों को उमस से राहत रही। मंगलवार को उदयपुर का अधिकतम तापमान 32.8 और न्यूनतम तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सीकर : मानसून कमजोर पड़ने के चलते सीकर जिले में गर्मी बढ़ गई है। यहां मंगलवार को अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री दर्ज किया गया। सुबह और शाम के समय हल्के बादल छाए, लेकिन बारिश नहीं हुई।

गडकरी बोले- 2004 से पेट्रोल में एथेनॉल मिल रहा:गाड़ियों को नुकसान का कोई सबूत नहीं, माइलेज सड़क और ट्रैफिक की स्थिति पर निर्भर

देश में ई-20 पेट्रोल, एथेनॉल, माइलेज और गाड़ियों पर इसके असर को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में इन सभी सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि एथेनॉल से गाड़ियां खराब होने का कोई प्रमाण नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि वैकल्पिक ईंधन से देश का तेल आयात कम होगा, प्रदूषण घटेगा और किसानों की आय बढ़ेगी। पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश- सवाल: एथेनॉल और ई-20 पर सबसे ज्यादा चर्चा आपकी है, जबकि आप परिवहन मंत्री हैं, पेट्रोलियम नहीं? गडकरी: मैं परिवहन मंत्री हूं और ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के मानक तय करना मेरा अधिकार है। कौन-सा ईंधन इस्तेमाल होगा, इसका अंतिम फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय करता है। मैं पिछले 25 साल से किसानों के हित में वैकल्पिक ईंधन पर काम कर रहा हूं। देश 22 लाख करोड़ रुपए का पेट्रोलियम आयात करता है। दिल्ली के प्रदूषण का 40% हिस्सा परिवहन से आता है। इसे कम करना भी हमारी जिम्मेदारी है। सवाल: ई-20 के लिए जरूरी एथेनॉल हम बना पा रहे हैं? गडकरी: देश को हर साल करीब 1450 करोड़ लीटर एथेनॉल की जरूरत है, जबकि हमारी उत्पादन क्षमता 1750-1800 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है। एथेनॉल सिर्फ गन्ने से नहीं, बल्कि मोलासेस, मक्का, टूटे चावल, पराली और बांस से भी बनाया जा रहा है। इससे करीब 2 लाख करोड़ रुपए का तेल आयात बचा है, प्रदूषण कम हुआ है और किसानों की आय बढ़ी है। सवाल: लोगों की शिकायत है कि ई-20 से माइलेज घट रहा है। ARAI ने भी 6% तक अंतर बताया है? गडकरी: माइलेज सड़क और ट्रैफिक की स्थिति पर निर्भर करता है। एथेनॉल की कैलोरी वैल्यू पेट्रोल से थोड़ी कम होती है, इसलिए कुछ परिस्थितियों में मामूली अंतर आ सकता है। लेकिन एथेनॉल सस्ता है, प्रदूषण कम करता है और फ्लेक्स-फ्यूल इंजन आने के बाद यह अंतर और कम हो जाएगा। सवाल: कई देशों में ई-20 के साथ 100% पेट्रोल का विकल्प भी मिलता है, भारत में क्यों नहीं? गडकरी: हर देश की परिस्थितियां अलग होती हैं। भारत अपनी जरूरत और संसाधनों के हिसाब से नीति बना रहा है। हमारा लक्ष्य तेल आयात कम करना और प्रदूषण घटाना है। ब्राजील में 1970 से 100% एथेनॉल का इस्तेमाल हो रहा है। वहां एक ही पेट्रोल पंप पर कई तरह के ईंधन उपलब्ध हैं। भारत में अभी उस स्तर तक पहुंचना बाकी है। सवाल: ई-20 से गाड़ियां खराब होने की शिकायतें आ रही हैं? गडकरी: इसका कोई प्रमाण नहीं है। 2004 से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है। अब तक किसी की गाड़ी खराब होने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया। सोशल मीडिया पर भ्रामक बातें फैलाई जा रही हैं। सवाल: एथेनॉल सस्ता ईंधन है, फिर पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं हुआ? गडकरी: कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करती हैं। पेट्रोल के दाम तय करना पेट्रोलियम मंत्रालय का अधिकार है, मेरा नहीं। सरकार कीमतों में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश करती है। सवाल: अगर कच्चे तेल (क्रूड) की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ जाए, तब भी एथेनॉल फायदे का सौदा रहेगा? गडकरी: यह सही है कि कच्चे तेल की कीमत बहुत कम होने पर एथेनॉल की आर्थिक बढ़त कम हो सकती है। लेकिन हमारा मकसद सिर्फ लागत घटाना नहीं है। ऊर्जा सुरक्षा, प्रदूषण में कमी, किसानों की आय बढ़ाना और भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए वैकल्पिक ईंधन भविष्य की जरूरत हैं। सवाल: नेशनल हाईवे पर गड्ढों की शिकायतें बढ़ रही हैं। दिल्ली-देहरादून राजमार्ग पर गड्‌ढे देखे गए? गडकरी: मोटे तौर पर हमारे रोड की क्वालिटी अच्छी है। हम एक मशीन लाए हैं, एक्सरे मशीन जैसी। पूरे रोड का एक्सरे निकलकर हमारे पास आता है। मैंने पिछले महीने में राज्यों के 950 प्रोजेक्ट में से एक-एक का रिव्यू लिया। बहुत कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया। आजकल ठेकेदारों का रेटिंग होता है। अभी रेटिंग की लिस्ट भी हम प्रकाशित करने वाले हैं। सवाल: आपकी स्पष्टवादिता की हमेशा चर्चा होती है। क्या इसकी कभी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी? गडकरी: मैं सुविधा की नहीं, सिद्धांतों की राजनीति करता हूं। राजनीति मेरे लिए सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का माध्यम है। मैं सत्ता के लिए नहीं, समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए राजनीति में आया हूं। एथेनॉल के बारे में जानें… देश में 2 जनरेशन एथेनॉल मौजूद, थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल पर सरकार का फोकस थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल, 5 जून को E85 फ्यूल लॉन्च कई देशों में एथेनॉल मिला पेट्रोल पहले से इस्तेमाल हो रहा सरकार के मुताबिक, अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे कई देशों में एथेनॉल मिला पेट्रोल पहले से इस्तेमाल हो रहा है। सरकार का कहना है कि इस योजना से भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 1.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ी है, प्रदूषण कम हुआ है और किसानों को भी फायदा मिला है। भारत पिछले साल ही पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले हासिल कर चुका है। एक अप्रैल से पूरे देश में E20 पेट्रोल की सप्लाई शुरू हो चुकी है। अब सरकार 2030 तक इसे बढ़ाकर 30% करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। ———————————– यह खबर भी पढ़ें… खाने-पीने और रोजाना जरूरत के सामान महंगे:जून में थोक महंगाई 9.81%, 44 महीने में सबसे ज्यादा; रिटेल महंगाई भी 6 महीने से लगातार बढ़ रही जून में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई है। यह पिछले महीने 9.68% पर थी। जून में महंगाई 44 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 14 जुलाई को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

महिला के जबरन ब्रेस्ट दबाना, सलवार उतारना…रेप की कोशिश नहीं:पटना हाईकोर्ट ने आरोपी को किया बरी, इस तरह के फैसले का क्या असर होगा

बंद कमरे में जबरदस्ती महिला की छाती दबाना, सलवार उतारने की कोशिश करना रेप की कोशिश नहीं है। 9 जुलाई को पटना हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाते हुए स्टूडियो मालिक को बरी कर दिया। क्या है पूरा मामला, कोर्ट ने क्यों बरी किया और इस फैसले का क्या असर होगा; जानेंगे, बूझे की नाही में…। सवाल-1: लड़की की छाती दबाना और सलवार खोलने की कोशिश करने का पूरा मामला क्या है? जवाबः 20 जनवरी 2008 को बांका जिले के अमरपुर स्थित ‘छाया स्टूडियो’ के मालिक के खिलाफ रेप की कोशिश की FIR हुई। युवती ने आरोप लगाया था… 5 साल तक चले ट्रायल के बाद 2013 में बांका कोर्ट ने हिमांशु को IPC की धारा 376/511 (रेप का प्रयास) और 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना) के तहत दोषी करार दिया था। उसे 3 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। लोअर कोर्ट के फैसले को हिमांशु ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी। सवाल-2ः आरोपी के वकील ने हाईकोर्ट में क्या दलीलें दी? जवाबः हिमांशु उर्फ मिथिया के वकील अजय मुखर्जी और गणेश शर्मा ने पटना हाईकोर्ट में दलील दी कि निचली अदालत का फैसला गैरकानूनी है। सवाल-3ः पटना हाईकोर्ट ने किस आधार पर आरोपी को बरी किया? जवाबः 9 जुलाई को फैसला सुनाते हुए पटना हाईकोर्ट के जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने कहा- इस मामले में मेडिकल एविडेंस का अभाव है। और रेप करने की कोशिश की दिशा में भी स्पष्ट शारीरिक प्रयास के प्रमाण नहीं है। इसलिए आरोपी को बरी किया जाता है। जस्टिस सिंह ने अपने फैसले में 3 बातों को आधार बनाया… 1. पेनेट्रेशन का कोई सबूत नहीं कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने बल का प्रयोग अवश्य किया, क्योंकि उसने युवती को बंधक बनाया। दरवाजा बंद किया। उसकी सलवार उतारने की कोशिश की और उसकी छाती दबाकर शारीरिक उत्पीड़न किया। हालांकि, ये घटना रेप के प्रयास के बजाय मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाले हैं। 2. युवती की नहीं हुई मेडिकल जांच कोर्ट ने कहा कि इस केस में बहुत खामियां हैं। कोर्ट ने कहा कि 5 गवाहों में एक ही स्वतंत्र गवाह था, जो मुकर गया। जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने वाले जांच अधिकारी से मुकदमे के दौरान पूछताछ तक नहीं नहीं की गई थी। इसके अलावा चिकित्सा अधिकारी की भी गवाही नहीं कराई गई। 3. सिर्फ माता-पिता ही मुख्य गवाह इस मामले में पीड़िता के माता-पिता ही मुख्य गवाह हैं, जिनका इस मामले के नतीजे से सीधा संबंध है। सुप्रीम कोर्ट के कृष्ण कुमार मलिक और संदीप राय मामलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा… ‘यौन अपराधों में पीड़िता की अकेली गवाही सजा के लिए पर्याप्त हो सकती है, लेकिन इसके लिए गवाही का बेदाग और पूरी तरह से विश्वसनीय होना अनिवार्य है। अगर गवाही में कमियां या विरोधाभास हैं, तो बिना स्वतंत्र पुष्टि के आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यहां युवती के बयानों में कई तरह का विरोधाभास है।’ सवाल-4ः भारतीय कानून में ‘रेप की कोशिश’ किसे माना जाता है? जवाब: 25 अक्टूबर 2021 को एक अन्य केस की सुनवाई के दौरान रेप की तैयारी और रेप की कोशिश में फर्क बताया गया था… सवाल-5: पटना हाईकोर्ट के इस फैसले का क्या असर पड़ेगा? जवाबः पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट सर्वदेव सिंह का कहना है, ‘हाईकोर्ट ने कानून के तहत ही फैसला सुनाया है। इसलिए इसका निगेटिव इम्पैक्ट पड़ना गलत है। हालांकि, लोगों के बीच इस फैसले को लेकर आक्रोश भी हो सकता है।’ वहीं, मगध महिला कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर और साइकोलॉजिस्ट निधि सिंह इसके 3 बड़े दूरगामी परिणाम बतातीं हैं… सवाल-6: अब पीड़िता के पास क्या कानूनी रास्ते बचे हैं? जवाबः एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर पीड़िता को पटना हाईकोर्ट के फैसले पर आपत्ति है, तो वह फैसले को हाईकोर्ट की डबल बेंच में चुनौती दे सकती है। या सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। इसके बाद कोर्ट केस को आगे बढ़ाते हुए सुनवाई शुरू करेगी। अगर जांच में आरोपी पर अटेम्प्ट टू रेप का मामला साबित हो जाता है, तो उन्हें संगीन धाराओं के तहत सजा दी जाएगी।

रात में उतरी रालसा टीम:मॉडिफाइड स्लीपर बसें, चेसिस काट अवैध डिग्गी बनाई, 7 बसें सीज कीं

जैसलमेर बस अग्निकांड के बाद अक्टूबर में परिवहन विभाग ने अवैध बसों के खिलाफ 15 दिन के अभियान में 2400 से अधिक बसों पर कार्रवाई की। कई बसों को सीज किया था। इसके बाद अब फिर से हालात वैसे ही हो गए हैं। सड़कों पर ओवरहैंग, ओवरहाइट और मॉडिफाइड स्लीपर बसें दौड़ रही हैं। इसका खुलासा राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) के राज्यव्यापी विशेष जांच अभियान में हुआ है। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के नेतृत्व में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मोबाइल मजिस्ट्रेट, पुलिस और परिवहन अधिकारियों की टीम ने 15 जिलों में 295 बसों की जांच की। इनमें 119 बसें सीज की, 220 के चालान कर ~68 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया। अभियान राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के नेतृत्व और सदस्य सचिव हरिओम शर्मा अत्री के निर्देशन में चल रहा है। जयपुर एक्सप्रेस-वे पर बसें सीज, 6.50 लाख का जुर्माना
सोमवार को रात 9 बजे से 2 बजे तक जयपुर-अजमेर एक्सप्रेस-वे पर रालसा के सचिव पवन कुमार जीनवाल और जयपुर जिला के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवींद्र प्रताप सैनी के नेतृत्व में बसों की जांच की गई। इस दौरान परमिट, फिटनेस, टैक्स, ओवरलोडिंग और सुरक्षा मानकों की जांच में 7 बसें सीज की गईं और 6.50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। स्लीपर बसों में ये मानक जरूरी; इमरजेंसी एग्जिट निर्धारित ऊंचाई और आकार का हो। चेसिस और बॉडी में बिना अनुमति बदलाव नहीं हो। ओवरहैंग और ओवरहाइट निर्धारित मानकों के भीतर हों। ड्राइवर केबिन और यात्री हिस्से में केवल स्वीकृत डिजाइन हो। फिटनेस, परमिट, टैक्स और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य हों। बस का संतुलन प्रभावित करने वाला अतिरिक्त निर्माण नहीं हो।

JTI में जेल उपाधीक्षकों का प्रशिक्षण शुरू:RAS बैच-2023 के आठ नवचयनित अधिकारी नौ माह के संस्थागत प्रशिक्षण में लेंगे हिस्सा

अजमेर घूघरा स्थित कारागार प्रशिक्षण संस्थान में राजस्थान जेल सेवा के RAS बैच-2023 से चयनित उपाधीक्षक वर्ग-13 अधिकारियों के नौ माह के संस्थागत प्रशिक्षण कार्यक्रम का सोमवार को शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण में आठ नवचयनित अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र में अधिकारियों को अनुशासन, कानूनों की समझ और मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्य करने का संदेश दिया गया। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि उप महानिरीक्षक कारागार राकेश मोहन शर्मा ने कहा कि प्रशिक्षण अवधि के दौरान अनुशासन, समर्पण और सीखने की भावना बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से विभागीय नियमों, कानूनों और प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन करने का आह्वान करते हुए कहा कि एक दक्ष कारागार अधिकारी बनने के लिए व्यावहारिक ज्ञान और सकारात्मक सोच दोनों जरूरी हैं।ल विशिष्ट अतिथि हाई सिक्योरिटी जेल के अधीक्षक पारस जांगिड़ ने कहा कि जेल सेवा सुरक्षा, संवेदनशीलता और सुधार के तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। अधिकारियों को ऐसी चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा, जहां कानून का प्रभावी पालन करने के साथ मानवीय और सुधारात्मक दृष्टिकोण भी अपनाना होगा। संस्थान के प्राचार्य जगदीश पूनिया ने बताया कि नौ माह के प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को कारागार प्रशासन, सुरक्षा प्रबंधन, विधिक प्रावधान, मानवाधिकार, सुधारात्मक कार्यक्रमों और व्यवहारिक प्रशिक्षण सहित विभिन्न विषयों का समग्र प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में उम्मेद चौधरी, सुरेश कुमार, सुनील विश्नोई, नेहा यादव, हेमा धाकड़, परसा राम, पुष्पेंद्र और मनीष महावर शामिल हैं।
कार्यक्रम का संचालन अशोक कुमार शर्मा (एमडीआई) ने किया। इस दौरान उप अधीक्षक लक्ष्मण बिश्नोई, सहायक प्रशिक्षक बनवारी लाल शर्मा, सोमराज सहित संस्थान का स्टाफ मौजूद रहा।

हिमाचल में तीन दिन की धूप से उमस बढ़ी:तापमान में उछाल, 11 शहरों का पारा 30॰C पार; 18 जुलाई से भारी बारिश

हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन दिनों से मौसम साफ रहने से तापमान में अचानक उछाल आ गया है। इससे राज्य के मैदानी इलाकों में एक बार फिर गर्मी लौट आई है। राज्य के 11 शहरों का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार और ऊना का पारा 36.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। अधिकांश शहरों का अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर चल रहा है, जिससे दिन के समय गर्मी का असर साफ महसूस किया जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार- प्रदेश में आज और कल भी गर्मी व उमस से राहत मिलने की संभावना नहीं है। हालांकि, 17 जुलाई को दोपहर बाद नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा, जिसके प्रभाव से मौसम का मिजाज बदलेगा। इससे 18 से 20 जुलाई के दौरान राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है। इसे देखते हुए चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के कुछ भागों के लिए तेज बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी वर्षा के साथ भूस्खलन और अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं। तीन दिन से मानसूनी बादल गायब प्रदेश में मानसून की एंट्री 30 जून को हुई। मानसून के प्रवेश के बाद शुरुआती 48 घंटों में सामान्य से करीब 200 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके बाद भी हल्की बारिश जारी रही, लेकिन तीन दिन से हिमाचल से मानसूनी बादल गायब हो गए। अब तक सामान्य से 21 फीसदी ज्यादा बारिश भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार 1 से 14 जुलाई के बीच हिमाचल में सामान्य से 21 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है। इस अवधि में बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, लाहौल-स्पीति और मंडी में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई, जबकि अन्य जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई। सबसे अधिक बारिश किन्नौर में रिकॉर्ड की गई, जहां सामान्य के मुकाबले 134 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज हुई है। पर्यटन स्थलों पर मौसम सुहावना बेशक, राज्य के निचले इलाकों में गर्मी बढ़ी है, लेकिन मशहूर पर्यटन स्थल मनाली, शिमला, कुफरी, नारकंडा इत्यादि में मौसम सुहावना बना हुआ है। शिमला का अधिकतम तापमान 26॰C, मनाली 26.6॰C, कुफरी 21.2॰C और नारकंडा का 24.2॰C चल रहा है। यही वजह है कि पहाड़ों पर अभी भी पर्यटक पहुंच रहे हैं।