ब्रेकिंग न्यूज़
हत्या-डकैती की वारदात करने से पहले 4 को दबोचा:3 देशी कट्टे, 1 देशी पिस्टल और 31 जिंदा कारतूस बरामद; वर्चस्व को लेकर रंजिश थी

दौसा में पुलिस ने हत्या और डकैती करने से पहले ही बदमाशों को दबोच लिया। एसपी पीयूष दीक्षित के निर्देशन तथा एएसपी शंकर लाल एवं डिप्टी एसपी धर्मराज चौधरी के सुपरविजन में थाना इंचार्ज सतीश कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने कार्रवाई की। पुलिस ने गिरोह के चार बदमाशों को गिरफ्तार किया है। जबकि एक नाबालिग को निरुद्ध किया है। आरोपियों के कब्जे से 3 देशी कट्टे, 1 देशी पिस्टल, 31 जिंदा कारतूस और एक कार बरामद की गई है। कार्रवाई मानपुर थाना पुलिस ने मंगलवार सुबह की। वारदात को अंजाम देने हथियार सहित निकले थे पुलिस को सूचना मिली थी कि कोटा से आगरा की ओर जा रही एक कार में सवार बदमाश हत्या और डकैती की वारदात को अंजाम देने के लिए हथियार लेकर निकले हैं। सूचना पर मानपुर क्षेत्र में नाकाबंदी कर कोटा नंबर की कार को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान 315 बोर के 3 देशी कट्टे, 22 बोर 1 देशी पिस्टल, 31 जिंदा कारतूस बरामद किए। हत्या का प्लान था डिप्टी एसपी धर्मराज चौधरी ने बताया- पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का मुख्य आरोपी फरदीन खान और उसके साथियों की कोटा के हिस्ट्रीशीटर शाहरुख खान से वर्चस्व और उगाही को लेकर रंजिश चल रही थी। बदमाशों को सूचना मिली थी कि शाहरुख आगरा की ओर से रुपए लेकर लौटेगा। इसी दौरान उसकी हत्या कर लूट की वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने कार्रवाई कर बड़ी वारदात को टाल दिया। 4 बदमाश गिरफ्तार, एक निरुद्ध डिप्टी एसपी धर्मराज चौधरी ने बताया- इस मामले में बदमाश आसिफ खान (26), निराले खान (19), फरदीन खान (21) और शाहनवाज (24) को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी यूपी के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं। जबकि फरदीन वर्तमान में कोटा में रह रहा था। पुलिस ने बदमाशों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सीकर में बदबू से परेशान हुए कॉलोनी के लोग:बोले- घर का गेट खोलना भी मुश्किल, रोजाना 8-10 बच्चे बीमार हो रहे

सीकर में लोग सीवरेज के रिसाव से परेशान हैं। इस समस्या को लेकर नेहरू पार्क के पीछे वार्ड नंबर 18 स्थित महादेव कॉलोनी के लोग मंगलवार को कलेक्टर को ज्ञापन देने पहुंचे। वार्ड पार्षद परमेश्वरी देवी ने बताया- सीवरेज के चैंबर से लगातार रिसाव हो रहा है। सीवरेज का गंदा पानी अब आसपास के गड्‌ढों में जमा हाे गया है। गड्ढों की गंदगी की वजह से बीमारियां फैलने लगी हैं। नगर परिषद के कर्मचारियों को शिकायत करने के बाद भी कोई समाधान नहीं हो रहा है। एरिया में बदबू फैली कॉलाेनी की सुमन शर्मा व मोनिका अग्रवाल ने बताया कि गंदे पानी से आसपास के 500 मीटर के एरिया में बदबू फैल गई है। घर का गेट खोलना भी मुश्किल हो गया है। गंदे पानी में मच्छर पनपने लगे हैं। पिछले 5-7 सालों से बार-बार ये समस्या रूक-रूककर सामने आ रही है। सीवरेज लाइन के 3 चैंबरों से बह रहा गंदा पानी अब आम रास्ते पर जमा होने लगा है, इससे स्थानीय लोगों का पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है। कॉलोनी के तेजपाल सैनी व हनुमान पिलानियां ने बताया- मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर नगर परिषद तक सैकड़ों शिकायतें देने के बाद भी आज तक इस समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं हुआ है। जब से इस इलाके में सीवरेज लाइन डाली गई थी, तभी से यह समस्या लगातार बनी हुई है। सीवरेज लाइन बिछाते समय उचित ढलान (स्लोप) नहीं दिया गया, जिसके कारण पानी की निकासी आगे नहीं हो रही है। सीवरेज का गंदा पानी बैकफ्लो होकर चैंबरों से बाहर आने लगता है। शिकायत करने पर लीपापोती की वार्डवासी विनय शर्मा व आरती सैनी ने बताया कि पिछले 4-5 सालों में जब भी शिकायत की तो नगर परिषद का कर्मचारी मोटर के प्रेशर से थोड़ा सा ब्लॉकेज हटाकर लीपापोती कर देता है, लेकिन कोई स्थाई समाधान नहीं किया जा रहा है। जिस वजह से 1-2 दिन बाद फिर वही स्थिति बन जाती है। कॉलोनी के खाली प्लॉट्स में पानी भरने से अब महामारी की स्थिति बनने लगी है। कॉलोनीवासी पंकज अग्रवाल व पाना देवी ने बताया- सड़क पर जमा रहने वाले इस दूषित पानी के कारण इलाके में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे हैजा, डेंगू, मलेरिया और स्किन संबंधी बीमारियां बढ़ने लगी है। वार्डवासियों ने अब जिला कलेक्टर से मांग की है कि इस समस्या का स्थाई समाधान किया जाए। सीवरेज कंपनी और नगर परिषद के कार्मिकाें को पाबंद कर सीवरेज लाइन के ढलान को सुधारा जाए ताकि गंदे पानी का बैकफ्लो होना बंद हो सके।

शेरनी तारा के नवजात शावक का दम घुटा, मौत:अपने बच्चे को मुंह में दबाकर इधर-उधर घुमती रही शेरनी; 9 दिन में दो शावकों ने तोड़ा दम

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क स्थित लायन सफारी में शेरनी तारा ने हाल में एक शावक को जन्म दिया था। इस नवजात शावक की आज सुबह श्वास नली के सिकुड़ने से (एस्फीक्सिया रिजल्टिंग फॉर्म ट्रेक्सल कॉलेप्स) दम घुट गया और मौत हो गई। वन विभाग ने मेडिकल बोर्ड से शावक का पोस्टमार्टम कराया, जिसमें इसका खुलासा हुआ। इससे पहले 29 जून को भी शेरनी तारा के एक शावक की मौत हो गई थी। ऐसे में 9 दिन में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में दूसरे शावक की मौत हो गई है। जिसके बाद वन्य जीव प्रेमियों ने बायोलॉजिकल पार्क प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आज सुस्त नजर आया था,दूध पीना छोड़ा था उप वन संरक्षक (वन्यजीव) विजय पाल ने बताया कि जन्म के बाद शावक का उसकी मां तारा के साथ पुनर्मिलन कराया गया था। शेरनी अपने शावक की सामान्य रूप से देखभाल कर रही थी। उसके व्यवहार में किसी प्रकार की असामान्यता नहीं थी। मंगलवार सुबह शावक अचानक सुस्त नजर आने लगा। उसने मां का दूध पीना भी बंद कर दिया, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने उसकी लगातार निगरानी शुरू कर दी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार- इस दौरान शेरनी तारा लगातार अपने शावक को चाटती रही और उसे मुंह में दबाकर इधर-उधर घूमती रही, जिससे साफ था कि वह उसे सामान्य करने का प्रयास कर रही थी। बावजूद इसके कुछ ही देर बाद शावक ने दम तोड़ दिया। श्वास नली सिकुड़ने से दम घुटा मौत के कारणों की पुष्टि के लिए गठित मेडिकल बोर्ड ने पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि शावक की मृत्यु एस्फीक्सिया रिजल्टिंग फॉर्म ट्रेक्सल कॉलेप्स (श्वास नली के सिकुड़ने या क्षतिग्रस्त होने के कारण) दम घुटने से हुई। इसके बाद वन विभाग और लायन सफारी प्रशासन ने नियमानुसार शावक के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। शेरनी तारा की लगातार मॉनिटरिंग वन विभाग के अनुसार-शेरनी तारा पूरी तरह स्वस्थ है। उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है। इसके साथ ही उसकी विशेष देखभाल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि लायन सफारी में सभी वन्य जीवों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी जारी है। बता दें कि शेरनी तारा ने 29 जून को दो शावकों को जन्म दिया था। जिसमें से एक शावक की 29 जून को ही मौत हो गई थी। वन विभाग ने शावक की मौत की जानकारी को मीडिया से छुपा कर रखा था। इसके साथ ही वन विभाग की टीम ने दूसरे शावक को शेरनी से दूर रखा लेकिन आज जब दूसरे शावक को शेरनी के पास भेजा। उसके कुछ देर बाद ही उसकी मौत की जानकारी भी सामने आ गई। जिसको लेकर अब वन्य जीव प्रेमियों में काफी मायूसी है।

डिलीवरी के दौरान इस्तेमाल होने वाली जेल-क्रीम का सैंपल फेल:मेडिकल कॉलेज के ड्रग वेयर हाउस से 1117 पैकेट सीज; कोटा में मृतका 5 प्रसूताओं को लगाई थी

कोटा में प्रसूताओं को डिलीवरी के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाली जेल-क्रीम (डायनोप्रोस्टोन) का सैंपल फेल हो गया है। ये जेल-क्रीम सरकारी सप्लाई की है। ड्रग कंट्रोल विभाग ने प्रदेशभर में इसकी बिक्री रोकने और स्टॉक वापस मंगाने के निर्देश जारी किए। बता दें कि कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत के बाद ड्रग विभाग ने सरकारी हॉस्पिटल्स में सप्लाई हुई दवाओं के सैंपल लिए थे। औषधि नियंत्रण विभाग ने 17 मई को न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (एनएमसीएच) के स्टोर से डायनोप्रोस्टोन (Gel Dinoprostone बैच नंबर H-084) का सैंपल लिया था। ये जेल-क्रीम भी 5 मृत प्रसूताओं को लगाई गई थी। जयपुर स्थित ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी की जांच में इस बैच का सैंपल निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। यानी दवा में कंटेंट तो था, लेकिन अन्य पैरामीटर में फेल पाया गया। यह दवा Cotec Healthcare Pvt. Ltd., रुड़की (उत्तराखंड) द्वारा निर्मित है। स्टोर से 1117 जेल-क्रीम पैकेट किए सीज जांच में सैंपल फेल होने के बाद ड्रग विभाग की टीम नयापुरा स्थित एमसीडीडब्ल्यू स्टोर में पहुंची। अलग अलग सरकारी हॉस्पिटल्स में सप्लाई हुई जेल/क्रीम (डायनोप्रोस्टोन) को वापस मंगवाया। ड्रग विभाग की टीम ने एमसीडीडब्ल्यू स्टोर से इसी बैच के लगभग 1,117 जेल/क्रीम पैकेट सीज किए। अलग अलग संस्थानों में उपलब्ध इस बैच का स्टॉक वापस मंगाने की कार्रवाई भी शुरू कर दी। औषधि नियंत्रण विभाग ने बताया- मामले में औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम के प्रावधानों के तहत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। प्रसव के दौरान होती है उपयोगी डाइनोप्रोस्टोन जेल प्रसूति और स्त्री रोग विभाग में उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण दवा है। इसका उपयोग गर्भवती महिलाओं में प्रसव पीड़ा शुरू कराने, गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) को प्रसव के लिए तैयार करने और चिकित्सकीय आवश्यकता होने पर प्रसव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह दवा केवल विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में अस्पताल में ही उपयोग की जाती है।

राजस्थान दिनभर, 10 बड़ी खबरें:ट्रेलर की टक्कर से बच्चों के टुकड़े हुए; राजेंद्र राठौड़ बोले-हम साइलेंट नहीं; महिला ने प्रेमी का मर्डर किया

नमस्कार, आज की सबसे बड़ी खबर जयपुर में एक्सीडेंट की है। ट्रेलर की टक्कर से फुटपाथ पर बैठे तीन बच्चों और पिता की मौत हो गई। चलिए सिलसिलेवार पढ़ते हैं, राजस्थान दिनभर में क्या कुछ खास रहा… पहले टॉप 5 खबरें 1. जयपुर में परिवार पर चढ़ा ट्रेलर, 4 की मौत
जयपुर में तेज रफ्तार ट्रेलर ने फुटपाथ पर बैठे एक परिवार के 5 लोगों को कुचल दिया। तीन बच्चों और पिता की मौत हो गई। मां के दोनों पैर टूट गए। बच्चों के शवों के चिथड़े उड़ गए। एक बच्चे के शव के दो टुकड़े हो गए। सभी लोग नाले में गिर गए। हादसा श्याम नगर थाना क्षेत्र के 200 फीट बाइपास पर कमला नेहरू नगर में मंगलवार सुबह 8:46 बजे हुआ। पूरी खबर पढ़ें 2. जालोर में नदी में पलटी जीप, चित्तौड़गढ़ में 3 की मौत
राजस्थान में झमाझम बारिश का दौर जारी है। चित्तौड़गढ़ में बिजली गिरने से एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत हो गई। जालोर में नदी में जीप पलट गई। मंगलवार को सवाई माधोपुर, अलवर, श्रीगंगानगर सहित कई जिलों में बरसात हुई। पूरी खबर पढ़ें 3. राठौड़ बोले- हमें साइलेंट नहीं, वोकल फॉर लोकल कर रखा
अजमेर में भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा- साइलेंट कहां कर रखा है? हमें तो वोकल कर रखा है, ‘वोकल फॉर लोकल’ हैं हम। कल जोधपुर में बोल रहे थे, आज अजमेर में बोल रहे हैं, कल जयपुर में बोलेंगे। पूरी खबर पढ़ें 4. RCA में चुनाव का रास्ता साफ
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में चुनाव कराने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए याचिका को बेतुका बताया। पूरी खबर पढ़ें 5. सरकारी नौकरी-प्रॉपर्टी के लिए बेटी ने करवाई मां की हत्या
जयपुर में प्रॉपर्टी और सरकारी नौकरी के लिए बेटी ने मां की हत्या करवा दी। बेटी ने ताऊ और चचेरे भाई के साथ मिलकर मर्डर प्लान किया था। 7 लाख रुपए सुपारी देकर मां को स्कॉर्पियो से कुचलवा दिया। पुलिस ने बेटी समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूरी खबर पढ़ें अब 3 अहम खबरें 6. एसआई भर्ती री-एग्जाम: 2021 के सभी कैंडिडेट्स दे सकेंगे परीक्षा
RPSC ने 20 सितंबर 2026 को प्रस्तावित सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 के री-एग्जाम में आवेदन करने वाले सभी कैंडिडेट्स को शामिल होने का मौका दिया है। 2021 की भर्ती में ऑनलाइन आवेदन करने वाले सभी अभ्यर्थी फिर एग्जाम दे पाएंगे। इसके लिए कैंडिडेट्स को 8 से 22 जुलाई तक आवेदन में जरूरी जानकारी अपडेट करनी होगी। पूरी खबर पढ़ें 7. गहलोत बोले- राम मंदिर का नया ट्रस्ट बने, योगी उसके अध्यक्ष हों
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अयोध्या में राम मंदिर का नया ट्रस्ट बनाने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ को इसका अध्यक्ष बनने का सुझाव दिया। पूरी खबर पढ़ें 8. प्रेमिका ने लिव-इन पार्टनर का किया मर्डर
बीकानेर में महिला ने बच्चों के साथ मिलकर लिव-इन पार्टनर (प्रेमी) की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी। दोनों में किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। पुलिस ने आरोपी महिला को डिटेन कर लिया। पूरी खबर पढ़ें खबर जो हटकर है 9. नदी से 5 किमी दूर पहाड़ी पर मिला मगरमच्छ का बच्चा
कोटा के जवाहर सागर बांध (चंबल नदी) से करीब पांच किलोमीटर दूर पहाड़ी की सड़क पर मगरमच्छ का बच्चा घूमता मिला। वन विभाग की टीम का दावा है कि इस तरह का ये पहला मामला है। टीम ने मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया। पूरी खबर पढ़ें कल क्या होगा खास 10. दो नगर निगम को एक करने के मामले में सुनवाई
जयपुर में दो नगर निगम को एक करने के मामले में कांग्रेस के तत्कालीन जिलाध्यक्ष आरआर तिवाड़ी की जनहित याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के चार निजी सचिवों को हटाया:मुख्य निजी सचिव को मूल कैडर में भेजा, दो की सेवा खत्म की

केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री भूपेंद्र यादव के 4 निजी सचिवों को एक साथ हटा दिया गया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया में इस घटनाक्रम को सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जा रहा। इस तरह से किसी कैबिनेट मंत्री के पूरे निजी स्टाफ को बदल देना कठोर प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। हालांकि सरकार और विभाग की तरफ से इस घटनाक्रम पर कोई बयान जारी नहीं किया गया। ये ऑर्डर 3 जुलाई को जारी किए गए थे। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। मुख्य निजी सचिव 6 साल से मंत्री के साथ थे कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की मंजूरी के बाद अलग-अलग आदेश जारी किए गए। इसमें भूपेंद्र यादव के मुख्य निजी सचिव अमर सिंह को हटाकर उनके मूल कैडर में भेज दिया गया। अमर सिंह 2010 बैच के आईआरएस-आईटी अधिकारी हैं। यादव जब साल 2021 से 2024 तक श्रम मंत्री रहे, तब भी सिंह उनके निजी सचिव थे। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यादव के पर्यावरण मंत्री बनने पर अमर सिंह को फिर निजी सचिव नियुक्त किया गया था। दो निजी सचिवों की सेवा समाप्त इसके अलावा मंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव शैलेश कुमार सिंह को समय से पहले ‘एक्सटेंडेड कूलिंग ऑफ’ के साथ उनके मूल विभाग में वापस भेजा गया है। वहीं अतिरिक्त निजी सचिव आयुष सारण और सहायक निजी सचिव सिद्धार्थ यादव की सेवाएं तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर किया पोस्ट उधर, मामले को लेकर कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश और राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया ‘X’ पर पोस्ट किया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री के स्टाफ के चार सदस्यों को बर्खास्त किए जाने की खबर चौंकाने वाली है। यह किसी से छिपा नहीं है कि मोदी शासन में इस तरह की नियुक्तियां कैसे की जाती हैं। क्या बिना आग के इतना धुआं उठ सकता है?क्या यह प्रधानमंत्री की चंदा दो, धंधा लो…— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) July 7, 2026 केंद्रीय मंत्री एवं अलवर सांसद श्री भूपेंद्र यादव के निजी सचिव तथा दो अतिरिक्त निजी सचिवों को हटाए जाने की खबर राजस्थान समेत पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। केंद्रीय मंत्री के स्टाफ में कौन शामिल होगा और किसे हटाया जाएगा, यह निश्चित रूप से केंद्र सरकार का विशेषाधिकार है…— Tika Ram Jully (@TikaRamJullyINC) July 7, 2026

शातिर ने 5 बार बेची एक ही XUV कार:लाखों रुपए ठगे, गिरवी रखा, चोरी की; NGO में जॉब का झांसा भी दिया

बांसवाड़ा की गढ़ी पुलिस ने 6 महीने से फरार एक ऐसे शातिर ठग को पकड़ा है जिसने एक ही लग्जरी कार 5 बार बेचकर लाखों की ठगी की। इससे पहले वह युवाओं को एक NGO में नौकरी दिलाने के नाम पर भी ठग चुका है। जिसका मामला जिले के दानपुर थाने में दर्ज है। गढ़ी थाना इंचार्ज रमेशचंद्र मीणा ने बताया- 16 जनवरी 2026 को परतापुर (बांसवाड़ा) निवासी यशवंत सिंह राव ने गढ़ी थाने में ठगी का मामला दर्ज कराया। यशवंत ने बताया- आरोपी जिगर भट्‌ट (28) पुत्र नरेंद्र ने मई 2025 में अपनी महिंद्रा XUV कार 20 लाख रुपए में बेचने का झांसा दिया था। मैंने उसे 18 लाख रुपए कैश दिए और कार ले ली। इसके कुछ दिन बाद उसने कार से जयपुर जाने की रिक्वेस्ट की। मैंने उस पर विश्वास कर कार दे दी। वह कार और पैसे लेकर फरार हो गया। पुलिस ने आरोपी की तलाश में कई जगह दबिश दी लेकिन वो हाथ नहीं लगा। बांसवाड़ा एसपी ने उस पर 10 हजार का इनाम भी रखा। अब पुलिस ने उसे जयपुर से डिटेन कर गिरफ्तार किया है। आरोपी ने पूछताछ की तो पता चला कि वह कार बेचकर ठगी करने की 5 वारदातें कर चुका है। शातिर ने पूछताछ में कबूल की वारदातें गढ़ी पुलिस को जिगर भट्ट ने बताया- यशवंत के पास से पैसा और कार लेकर मैं सागवाड़ा (डूंगरपुर) पहुंचा। आखिरकार 3 जून 2026 को जयपुर की अशोकनगर थाना पुलिस कार को प्रतापनगर (सांगानेर) से बरामद कर लिया और लाकर थाने में खड़ी कर दी। लगातार वारदात कर बदलता रहा ठिकाने हर वारदात के बाद आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहा था। आरोपी को पकड़ने के लिए बांसवाड़ा की गढ़ी पुलिस 2 बार जयपुर आई और संभावित ठिकाने पर दबिश दी। लेकिन जिगर भट्‌ट पकड़ में नहीं आया। जानकारी के सामने आया कि फरारी के दौरान वह माता-पिता और पत्नी के साथ जयपुर में किराए पर फ्लैट लेकर रहा था। गढ़ी पुलिस ने आरोपी को जयपुर से गिरफ्तार किया। NGO में जॉब दिलाने का झांसा देकर ठगी शातिर ठग जिगर भट्‌ट ने सिर्फ लग्जरी कार के जरिए ही ठगी की वारदात नहीं की। बल्कि इससे पहले वह शौर्य फाउंडेशन में लोगों को नौकरी दिलाने के बहाने भी ठग चुका है। इससे संबंधित एक मुकदमा उसके खिलाफ दानपुर (बांसवाड़ा) में दर्ज हुआ था। इसी मामले की जांच बांसवाड़ा DSP मनीष चारण कर रहे हैं। पूछताछ के लिए आरोपी उनकी कस्टडी में हैं। आरोपी की दो दिनों की पिसी रिमांड लेकर पूछताछ की जा रही हैं।

मोहाली- 110 की रफ्तार से कैंटर में घुसी कार:नवविवाहित दंपती और एडवोकेट की मौत; हरियाणा से हिमाचल लौट रहे थे

मोहाली में मंगलवार को भारतमाला एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में पति-पत्नी और एडवोकेट शामिल है। हादसा बजेहड़ी टोल प्लाजा के पास हुआ। यहा आगे चल रहे कैंटर के अचानक ब्रेक लगाने से पीछे आ रही क्रेटा कार उससे जा टकराई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के वक्त कार की 110 थी। ये सभी हरियाणा के जींद से लौट रहे थे। मृतकों की पहचान 28 वर्षीय प्रत्युष जैन, उनकी 26 वर्षीय पत्नी हरसरिता निवासी गांव महितपुर, जिला ऊना(हिमाचल प्रदेश) और 65 वर्षीय सुरेश निवासी गांव देहल, जिला ऊना के रूप में हुई है। प्रत्युष जैन और हरसरिता की शादी इसी साल 7 मार्च को हुई थी। सुरेश एडवोकेट थे। वह प्रत्युष के पिता के दोस्त थे। हादसे की पूरी कहानी, 6 पॉइंट में पढ़िए अचानक सांप आने पर लगाए थे ब्रेक
कैंटर ड्राइवर हादसे के बाद मौके पर रूका था। उसने बताया कि कैंटर के आगे अचानक सांप आने की वजह से उसने ब्रेक लगाए थे। जिसके बाद गाड़ी आकर उसके कैंटर से टकरा गई। सुरेश ऊना कोर्ट में थे एडवोकेट
सुरेश ऊना जिला अदालत में एडवोकेट थे। वे आरएसएस से जुड़े संगठन ‘सक्षम दिव्यांग सेवा’ की हिमाचल प्रदेश इकाई के अध्यक्ष भी थे। इसके अलावा वे क्षेत्र में संचालित एक दिव्यांग आश्रम के संचालन और गतिविधियों का नेतृत्व भी कर रहे थे।

लिफ्ट मांगी, उसी ट्रेलर ने कुचला, 4 की मौत, VIDEO:घर जाने के लिए हाईवे पर बने डिवाइडर पर खड़े थे, जानें- हादसे की 3 वजह

जयपुर के कमला नेहरू नगर में तेज रफ्तार ट्रेलर ने फुटपाथ पर बैठे एक परिवार के 5 लोगों को कुचल दिया। हादसे में तीन बच्चों और पिता की मौत हो गई। मां के दोनों पैर टूट गए। हादसे के बाद भास्कर टीम मौके पर पहुंची और हादसे की वजह समझने की कोशिश की। सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो सामने आया कि परिवार काफी देर से ट्रकों से लिफ्ट लेने की कोशिश कर रहा था। जिस ट्रेलर से कुचला, उसे हाथ हिलाकर रुकने का इशारा किया था। परिवार राजसमंद का था। ये लोग पैसे बचाने के लिए ट्रेलर या ट्रकों में सफर करते हैं। भास्कर पड़ताल में हादसे की 3 प्रमुख वजह सामने आई… 1. पुलिया से उतरते ही डिवाइडर न होना। 2.आगे बने डिवाइडर की कम हाइट। 3. अवैध बस स्टैंड। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 100 मीटर तक डिवाइडर नहीं भास्कर पड़ताल में सामने आया कि हीरापुरा पुलिया से होटल हाईवे किंग तक 100 मीटर तक सड़क पर डिवाइडर नहीं बना हुआ है। जबकि पुलिया उतरने के साथ ही डिवाइडर होना चाहिए, ताकि कोई पुलिया के पास से यू-टर्न न ले। इस 100 मीटर के पैच में ट्रैफिक क्रॉस में चलता है। हीरापुरा पुलिया उतरते ही अधिकांश वाहन अजमेर रोड पर सीधे निकल जाते हैं। कुछ वाहन नारायण विहार के लिए सर्विस लाइन में घुस जाते हैं। कुछ वाहन पुलिया खत्म होते ही यू-टर्न लेते हैं। वहीं कमला नहरू नगर से सर्विस लाइन पर आने वाला व्हीकल अजमेर रोड के लिए इसी मोड़ से यू-टर्न लेता है। कुछ व्हीकल हीरापुरा चौराहे के लिए इसी सर्विस लाइन का इस्तेमाल करते हैं। पुलिया से नीचे उतरते ही 25 प्रतिशत ट्रैफिक यू-टर्न लेता है। एनएचएआई ने सिर्फ एक साइन बोर्ड लगाकर औपचारिकता पूरी कर दी, जिस पर लिखा है- आगे से यू-टर्न लेना गलत है। जिम्मेदार कौन : इस खामी के लिए जिम्मेदार जयपुर ट्रैफिक पुलिस और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) है। डीसीपी ट्रैफिक योगेश गोयल ने बताया कि 100 मीटर का पैच जो खुला है, उसके लिए एनएचएआई को लिखा जाएगा। देख रहे हैं कि गलत यू-टर्न को कैसे रोक सकते हैं। डिवाइडर का न साइन बोर्ड न लाइट अजमेर रोड पर चलने वाले व्हीकल को पुलिया से उतरने के दौरान सड़क चौड़ी दिखाई देती है। एनएचएआई ने इस मुख्य सड़क के साथ-साथ एक सर्विस लेन बना रखी है। जिसमें दोनों तरफ व्हीकल चलते हैं। मुख्य सड़क और डिवाइडर को दो पार्ट में दिखाने के लिए मुख्य हाईवे पर कोई साइन बोर्ड, ऐरो यहां तक कि कोई ब्लिंक करने वाली लाइट तक नहीं लगा रखी है। ऐसे में रात में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इसी रूट पर लोग अपने छोटे व्हीकल से भी इस डिवाइडर से टकरा जाते हैं। एनएचएआई अगर इस डिवाइडर को सड़क से कुछ ऊंचा कर देता या मार्किंग लगा देता तो यह परेशानी नहीं होती। इस खामी का जिम्मेदार : एनएचएआई अवैध बस स्टैंड से होती है हाईवे पर गफलत कमला नेहरू नगर के सामने रोडवेज बस स्टैंड बनने के बाद हीरापुरा चौराहे पर बसों को खड़े नहीं करने के आदेश दिए गए हैं। इस कारण सभी निजी बसें होटल हाईवे किंग के सामने जाकर खड़ी हो जाती हैं। पिछले तीन महीने से मुख्य हाईवे पर अवैध बस स्टैंड संचालित है। ऐसे में दिल्ली से हीरापुरा पुलिया की तरफ आने वाला हैवी ट्रैफिक यहां पर होने वाली भीड़ को देखकर गफलत में पड़ जाता है। जिससे यहां पर आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। जिम्मेदार कौन : इस खामी का जिम्मेदार आरटीओ विभाग है। जयपुर आरटीओ प्रथम चंपालाल जीनगर ने बताया कि यह हादसा तेज रफ्तार ट्रेलर के कारण हुआ। लोग सड़क पर खड़े थे। यह हादसा ड्राइवर की लापरवाही से हुआ। वहां पर जो वाहन खड़े होते हैं, उन पर हम लोग कार्रवाई करते हैं।
परिवार फुटपाथ पर झाड़ू बनाकर बेचता था मृतकों की पहचान राजसमंद के जैतपुरा निवासी चंद्रप्रकाश और उनके बेटों रमेश (11), दीपक (8), रतन (10) के रूप में हुई है। चंद्रप्रकाश की पत्नी कैलाशी गंभीर घायल है। कैलाशी के दोनों पैर टूट गए हैं। परिवार फुटपाथ पर झाड़ू बनाकर बेचता था। दंपती के पांच बच्चे थे, दो बच्चे घर पर थे, जिससे वो बच गए। ….. ये खबर भी पढ़ें… जयपुर में परिवार पर चढ़ा ट्रेलर, 4 की मौत:बच्चों के शव टुकड़ों में नाले में गिरे, मां के पैर टूटे; ट्रेलर के 5 चालान पेंडिंग
जयपुर में तेज रफ्तार ट्रेलर ने फुटपाथ पर बैठे एक परिवार के 5 लोगों को कुचल दिया। हादसे में तीन बच्चों और पिता की मौत हो गई। मां के दोनों पैर टूट गए। हादसा इतना भीषण था कि बच्चों के शवों के चिथड़े उड़ गए। एक बच्चे के शव के दो टुकड़े हो गए। सभी लोग नाले में गिर गए। (पढ़ें पूरी खबर)

उत्तराखंड में फोरलेन प्रोजेक्ट के विरोध में मनेगा 'ब्लैक हरेला':एलीफेंट कॉरिडोर में पेड़ काटने पर उठे सवाल; पर्यावरणविद बोले- कोर्ट में मामला, फिर कटाई क्यों?

ऋषिकेश-भानियावाला फोरलेन परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। एलीफेंट कॉरिडोर से गुजर रही इस सड़क के चौड़ीकरण के लिए 4,475 पेड़ों की कटाई शुरू होने पर पर्यावरणविदों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि एलीफेंट कॉरिडोर से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, फिर भी बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है। विरोध में 8 जुलाई को NHAI कार्यालय के बाहर प्रदर्शन होगा, जबकि पेड़ों की कटाई के विरोध में इस बार हरेला पर्व (16 जुलाई) को ‘ब्लैक हरेला’ के रूप में मनाया जाएगा। जानिए क्या है ऋषिकेश-भानियावाला फोरलेन परियोजना… 1. 20 किमी लंबी सड़क, ₹743 करोड़ की लागत
राष्ट्रीय राजमार्ग-7 (NH-7) पर भानियावाला से ऋषिकेश तक करीब 20 किमी लंबी फोरलेन सड़क बनाई जा रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत ₹743 करोड़ की लागत से विकसित कर रहा है। 2. एयरपोर्ट और चारधाम यात्रा को मिलेगा फायदा
NHAI का दावा है कि परियोजना पूरी होने पर जौलीग्रांट एयरपोर्ट से ऋषिकेश की यात्रा करीब 30 मिनट में पूरी होगी। इससे देहरादून, एयरपोर्ट, ऋषिकेश और चारधाम यात्रा का यातायात भी अधिक सुगम होगा। 3. 4,475 पेड़ों की कटाई, 754 के ट्रांसप्लांट का दावा
परियोजना के लिए 4,475 पेड़ों की कटाई की जा रही है। वहीं, FRI के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर 754 पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने की योजना है। NHAI का कहना है कि वन क्षेत्र में सामान्य 60 मीटर की जगह केवल 23 मीटर राइट ऑफ वे (ROW) रखा गया है, ताकि पेड़ों की कटाई कम हो। इसलिए हो रहा विरोध पर्यावरणविदों और नागरिक संगठनों का कहना है कि यह परियोजना राज्य के संवेदनशील एलीफेंट कॉरिडोर से होकर गुजरती है। उनका आरोप है कि हजारों पेड़ों की कटाई से जंगलों का विखंडन होगा, हाथियों के प्राकृतिक आवागमन पर असर पड़ेगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है। उनका यह भी कहना है कि एलीफेंट कॉरिडोर से जुड़ा मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसके बावजूद बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई है। अब जानिए पर्यावरणविदों-सामाजिक संगठनों ने क्या कहा… 1. लंबित मामले के बीच पेड़ों की कटाई पर आपत्ति
पर्यावरण मामलों से जुड़े हिमांशु अरोड़ा ने कहा कि एलीफेंट कॉरिडोर और वन भूमि से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। उत्तराखंड हाईकोर्ट भी अपने आदेश में इसका उल्लेख कर चुका है। ऐसे में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई किस आधार पर की जा रही है, यह बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। 2. एलीफेंट कॉरिडोर प्रभावित होगा, संघर्ष बढ़ेगा
ऋषिकेश निवासी पर्यावरणविद दिनेश सेमवाल ने कहा कि यह क्षेत्र राजाजी लैंडस्केप और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण वन क्षेत्र है। जंगलों का विखंडन होने पर हाथियों के प्राकृतिक रास्ते प्रभावित होंगे और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है। उनका यह भी कहना है कि इस मार्ग पर ऐसा ट्रैफिक दबाव नहीं है, जिससे फोरलेन निर्माण की तत्काल जरूरत साबित होती हो। 3. मानसून में पेड़ों की कटाई पर सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने कहा कि उत्तराखंड में पहली बार मानसून के दौरान हजारों पेड़ों की कटाई हो रही है। उनके मुताबिक बरसात पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण का समय होता है, ऐसे में इसी दौरान पेड़ काटना चिंताजनक है। उन्होंने परियोजना का दोबारा पर्यावरणीय मूल्यांकन कराने और क्षतिपूरक वनरोपण की समीक्षा की भी मांग की। 8 जुलाई को प्रदर्शन का ऐलान नागरिक समूहों ने आंदोलन तेज करने की घोषणा की है। 8 जुलाई को NHAI कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा इस वर्ष हरेला पर्व को ‘ब्लैक हरेला’ के रूप में मनाने का फैसला लिया गया है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य पेड़ों की कटाई और जंगलों को हो रहे नुकसान के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाना है। अंडरपास समेत कई सुरक्षा इंतजाम
वहीं, इस मामले में NHAI का कहना है कि परियोजना में 1 ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास, 4 समर्पित एलीफेंट अंडरपास, ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक और ‘नो हॉर्न’ जोन जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। इनका उद्देश्य हाथियों समेत अन्य वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करना है। ————— ये खबर भी पढ़ें : बद्रीनाथ चढ़ावा चोरी विवाद- 25 लैपटॉप गायब: बिना अधिकारियों के हो रही थी नोटों की गिनती; 3 दिन बाद भी जांच कमेटी मंदिर नहीं पहुंची बद्रीनाथ धाम में हो रहे चढ़ावे में हेरफेर के आरोप लग रहे हैं। इसी बीच बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) को 10 से 12 सालों के अंदर दिए गए 20 से 25 लैपटॉप का कोई हिसाब-किताब समिति के पास मौजूद नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…