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अमेरिका ने माना- ईरानी हमलों में 100 सैनिक घायल:कहा- सुरक्षा को देखते हुए देर से जानकारी दी; ईरान के 9 शहरों पर अमेरिकी हमले

अमेरिका ने मान लिया है कि ईरान के जवाबी हमलों में उसके करीब 100 सैनिक घायल हुए हैं। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ये सैनिक 7 जुलाई के बाद हुए हमलों में घायल हुए। इनमें से 96% सैनिक ठीक होकर ड्यूटी पर लौट चुके हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादातर को सिर पर हल्की चोट लगी थी। पार्नेल ने यह बयान न्यूयॉर्क टाइम्स की उस रिपोर्ट के जवाब में दिया, जिसमें दावा किया गया था कि रक्षा मंत्रालय ईरान के साथ युद्ध में घायल हुए अमेरिकी सैनिकों की जानकारी सार्वजनिक नहीं कर रहा है। पार्नेल ने कहा कि इसमें जानबूझकर देरी हुई। ऐसा सैनिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया। उधर अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हमले जारी हैं। ईरान ने सोमवार को उन देशों को निशाना बनाया, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इसके जवाब में अमेरिका ने मंगलवार सुबह ईरान के 9 शहरों पर हवाई हमले किए। ईरान की लेबर न्यूज एजेंसी के मुताबिक अबदानान, बंदर अब्बास, बंदर लेंगेह, बुशेहर, चाबहार, केश्म द्वीप, सीरिक, शीराज और कोनारक को निशाना बनाया गया। ईरान जंग से जुड़े सभी अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

ऑस्ट्रेलिया में पंजाबी ड्राइवर पर थूका:रेडियो पर बच्चों की हत्या, पत्नियों को गुलाम बनाने की धमकी; गृहमंत्री बोले- ये कड़वा सच

ऑस्ट्रेलिया में पंजाबी बोलने पर ट्रक ड्राइवर पर थूक दिया गया। रेडियो पर पत्नियों को गुलाम बनाकर बेचने और बच्चों को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया संस्थान ABC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय ड्राइवरों को पगड़ी पहनने और आपस में पंजाबी में बात करने पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ऑस्ट्रेलियन ट्रकिंग एसोसिएशन (ATA) और नेशनल हेवी व्हीकल रेगुलेटर (NHVR) ने इस तरह के व्यवहार की निंदा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का मानसिक तनाव ड्राइवरों के स्वास्थ्य पर असर डालता है। इससे उनका ध्यान बंटता है और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ऑस्ट्रेलिया यात्रा के ठीक बाद ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क ने इस पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जताई है। एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में बर्क ने माना कि ऑस्ट्रेलियाई सड़कों और ट्रकों के अंदर इस्तेमाल होने वाले सीबी रेडियो पर भारतीय ड्राइवरों को निशाना बनाना एक कड़वी सच्चाई है। बता दें, ऑस्ट्रेलिया में 5 हजार के करीब पंजाबी मूल के ट्रक ड्राइवर हैं। ये वे लोग हैं, जिन्होंने सरकारी कागजों में अपनी मातृ भाषा पंजाबी लिखवाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि असल संख्या 7 से 8 हजार के करीब हो सकती है। धमकी भरे ऑडियो में क्या कहा गया इंस्टाग्राम पर यह ऑडियो क्रिएटर एगी (@babysoftarms) ने शेयर किया है। यह ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (ABC) की जांच का हिस्सा है। ट्रक ड्राइवरों के बीच रेडियो पर आमतौर पर सड़क सुरक्षा या रूट की बात होती है, लेकिन इस क्लिप में नफरत भरी आवाजें आ रही हैं। एक व्यक्ति कहता है- भारतीयों को मार डालो। श्वेत आदमी के लिए खड़े हो। गृह युद्ध आने वाला है। हम सभी भारतीय पुरुषों को मार डालेंगे, उनके बच्चों को पानी में डुबो देंगे और उनकी औरतों को गुलामी के लिए बेच देंगे। लहजे के आधार पर गालियां ABC की रिपोर्ट में कई भारतीय ड्राइवरों ने बताया कि ऑस्ट्रेलियाई सड़कों पर नस्लवाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। एक ड्राइवर ने कहा कि अगर आपका लहजा ऑस्ट्रेलियाई है तो कोई समस्या नहीं, लेकिन अगर पंजाबी या भारतीय अंदाज में बोलते हो तो रेडियो पर भारी गालियां मिलती हैं। इन लगातार धमकियों से परेशान होकर कई भारतीय ड्राइवरों ने रेडियो का इस्तेमाल करना ही छोड़ दिया है। वे अब इस तरह की बातचीत से दूर रहते हैं। पंजाबी ड्राइवरों ने ये दिक्कतें बताईं… भारतीय ड्राइवरों की सुरक्षा के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार क्या कर रही… ऑस्ट्रेलिया एक ऑर्केस्ट्रा की तरह है, जहां हर संस्कृति की अपनी जगह गृहमंत्री टोनी बर्क ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया कभी किसी एक समाज का देश नहीं रहा है। हम एक ऑर्केस्ट्रा (संगीत मंडली) की तरह हैं। इसमें कई अलग-अलग तरह के यंत्र होते हैं, लेकिन जब सब मिलकर बजते हैं तो एक खूबसूरत धुन बनती है। भारतीय समुदाय के खिलाफ ऐसी नफरत की हमारे देश में कोई जगह नहीं है। क्यों अहम हैं भारतीय ड्राइवर? ऑस्ट्रेलिया की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में भारतीय ऑस्ट्रेलिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रवासी समुदाय बनकर उभरा है। इनमें से बड़ी संख्या में भारतीयों ने ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में श्रमिकों की कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इंटरनेशनल रोड ट्रांसपोर्ट यूनियन (IRTU) के वर्ष 2024 के अनुमान के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में लगभग 28,000 भारी वाहन ड्राइवरों की कमी थी। रिपोर्ट के अनुसार, सिख और पंजाबी प्रवासियों के लिए ट्रक चलाना कोई नया पेशा नहीं है। उनके परिवारों का लंबे समय से खेती-बाड़ी और परिवहन व्यवसाय से जुड़ाव रहा है, इसलिए बड़ी संख्या में सिख और पंजाबी समुदाय के लोग ऑस्ट्रेलिया में भी ट्रक ड्राइविंग को रोजगार के रूप में अपनाते हैं। हालांकि, नस्लीय घटनाए बढ़ने के बाद पुराने ड्राइवर रिटायर हो रहे हैं और नए स्थानीय युवा इस काम में नहीं आ रहे हैं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया की सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में समस्या पैदा हो सकती है। ———- यह खबर भी पढ़ें… कनाडा सरकार का पंजाबियों को झटका, PR होने पर भी पेरेंट्स, दादा-दादी को साथ नहीं बसा पाएंगे कनाडा में रह रहे लाखों भारतीयों, खासकर पंजाबी समुदाय को बड़ा झटका लगा है। कनाडा सरकार ने 15 जुलाई 2026 से पेरेंट्स एंड ग्रैंडपेरेंट्स प्रोग्राम (PGP) के तहत नई स्पॉन्सरशिप अर्जियाें पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इससे अब कनाडा में PR हासिल कर चुके नए आवेदक अपने माता-पिता और दादा-दादी को स्थायी निवास (PR) दिलाने के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। पढ़ें पूरी खबर…

यूक्रेन में शिप पर हमला, 4 भारतीयों की मौत:भारत ने कहा- कारोबारी जहाजों को निशाना बनाना गलत; यूक्रेन बोला- रूसी मिसाइलों से हमला हुआ

यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट से रवाना हुए कार्गो जहाज ‘MV गोल्डन लियो’ पर रविवार को हुए हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। एक भारतीय गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। भारत सरकार ने सोमवार को इसकी पुष्टि करते हुए हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय दूतावास लगातार यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है। उधर, यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक गोल्डन लियो जहाज ओडेसा से मक्का लेकर रवाना हुआ था। पोर्ट से निकलने के कुछ देर बाद उस पर तीन रूसी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। यूक्रेन की नौसेना ने कहा कि हमले के बाद जहाज में आग लग गई। रॉयटर्स के मुताबिक, समुद्र में जहाज से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी बाद में पहचान हुई। हमले के बाद की 3 तस्वीरें… जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 5 भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, 19 जुलाई की शाम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले इस जहाज पर हमला हुआ। उस समय जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर थे, जिनमें पांच भारतीय शामिल थे। विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीयों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायल भारतीय के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है। कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिक क्रू को निशाना बनाना या समुद्री व्यापार और नेविगेशन की आजादी में बाधा डालना निंदनीय है और इससे बचा जाना चाहिए। वहीं, यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण के मुताबिक घटना के बाद पूरी रात सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। हमले में नौ क्रू मेंबर और एक समुद्री पायलट की मौत हुई, जबकि 17 में से आठ क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लिया गया। ब्लैक सी में बढ़ता तनाव, कारोबार पर असर यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब रूस और यूक्रेन के बीच ब्लैक सी और सी ऑफ एजोव में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इससे कारोबारी जहाजों और अनाज के निर्यात पर खतरा बढ़ गया है। 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद ब्लैक सी दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में शामिल हो गया। कुछ अंतरराष्ट्रीय समझौतों से अनाज का निर्यात फिर शुरू हुआ था, लेकिन हाल के महीनों में बढ़े हमलों से यह व्यवस्था फिर प्रभावित हुई है। यूक्रेन लगातार रूस के ऊर्जा ढांचे और तेल टैंकरों को निशाना बना रहा है। वहीं रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों, ईंधन भंडारण केंद्रों और कार्गो जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी दावा किया है कि उसकी सेना ने ओडेसा बंदरगाह पर ईंधन भंडारण केंद्रों पर हमला किया। वैश्विक अनाज कारोबार पर भी असर यूक्रेन दुनिया के कुल गेहूं निर्यात का करीब 6% और मक्का निर्यात का लगभग 11% हिस्सा देता है। लेकिन लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण ब्लैक सी के जरिए होने वाला यूक्रेन का अनाज निर्यात करीब एक-तिहाई तक प्रभावित हुआ है। दूसरी तरफ यूक्रेनी हमलों का असर रूस के अनाज कारोबार पर भी पड़ा है। रॉयटर्स के मुताबिक, यूक्रेन के हमलों के कारण रूस को सी ऑफ एजोव के रास्ते होने वाली जहाजों की आवाजाही सीमित करनी पड़ी है। इसी रास्ते से रूस के करीब एक-चौथाई अनाज का निर्यात होता है। —————– ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन के हमले से रूस में भी होर्मुज जैसा संकट:एजोव सागर में जहाजों की आवाजाही रुकी, 9 दिन में 116 जहाजों पर हमले हुए यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के बाद रूस को बड़ा झटका लगा है। इस सप्ताह हमलों की वजह से रूस को एजोव सागर के अहम समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही रोकनी पड़ी। इससे दुनिया के दूसरे देशों के साथ रूस का व्यापार प्रभावित होने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…

चीन में डिलीवरी ब्वॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान मिला:खाना पहुंचाते हुई लिखी कई कविताएं, ग्राहक की फटकार के बाद लेखक बने

चीन में फूड डिलीवरी का काम करने वाले 56 वर्षीय वांग जिबिंग को देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक लू शुन साहित्य पुरस्कार मिला है। उनकी कविता संग्रह ‘लो फ्लाइट’ को यह सम्मान दिया गया है। इस किताब की कई कविताएं उन्होंने फूड डिलीवरी के बीच मिले खाली समय में कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लिखी थीं। वांग 2019 के आसपास फूड डिलीवरी राइडर बने थे। उनकी कविताएं सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए। उनकी नई किताब ‘लो फ्लाइट’ डिलीवरी राइडर्स की रोजमर्रा की परेशानियों, संघर्ष और जीवन पर आधारित है। यह किताब उन्होंने 2024 में प्रकाशित की थी। इसके लिए उन्होंने करीब 200 डिलीवरी राइडर्स से बातचीत की और उनके अनुभवों को अपनी कविताओं में दर्ज किया। उनकी एक कविता की पंक्ति है- किसने कहा कि पंख फैलाने का मतलब सिर्फ ऊंची उड़ान भरना है? नीचे उड़ना भी उड़ान ही है। कस्टमर से मिली फटकार के बाद लिखी कविता- वायरल हुई वांग का जन्म चीन के जियांगसू प्रांत में हुआ था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें 14 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने निर्माण मजदूर, कबाड़ बीनने वाले और सड़क किनारे सामान बेचने जैसे कई छोटे-मोटे काम किए। बाद में वे फूड डिलीवरी राइडर बन गए। हालांकि, पढ़ने-लिखने का उनका शौक कभी खत्म नहीं हुआ। 2022 में उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। यह कविता 2019 की एक घटना से प्रेरित थी। उस समय वह जियांगसू के कुनशान शहर में फूड डिलीवरी का काम कर रहे थे। एक ग्राहक ने गलत पता दर्ज कर दिया था। सही घर ढूंढने के लिए वांग को तीन रिहायशी इमारतों में भटकना पड़ा और 18 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। जब वह आखिरकार खाना लेकर पहुंचे तो ग्राहक ने देर होने पर उन्हें डांट दिया। घर लौटते समय उन्होंने अपनी नाराजगी और दर्द को शब्दों में ढाल दिया। इसी से उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ जन्मी। यह कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। यही से उनके साहित्यिक सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 2023 में उनका पहला कविता संग्रह ‘मैन इन ए हरी: पोएम्स ऑफ ए फूड डिलीवरी राइडर’ प्रकाशित हुआ। इस किताब की एक कविता की एक पंक्ति है- सड़क पर दौड़ता हर आम इंसान अपने हाथ में एक छोटी-सी रोशनी लिए चलता है। यही रोशनी पहले हमें रास्ता दिखाती है और फिर धीरे-धीरे पूरी दुनिया को रोशन कर देती है। 6 हजार से ज्यादा कविताएं लिख चुके वांग अब तक वह 6 हजार से अधिक कविताएं लिख चुके हैं। उनकी कई रचनाएं प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वांग कहते हैं, “लोग शायद मुझे याद न रखें, लेकिन उन्हें तेज रफ्तार से गुजरता एक फूड डिलीवरी राइडर जरूर याद रहता है।” यही सोच उन्हें लाखों डिलीवरी कर्मियों की जिंदगी पर किताब लिखने की प्रेरणा बनी। वांग का कहना है, मैं चाहता हूं कि इस किताब को पढ़ने के बाद लोग डिलीवरी राइडर्स के प्रति ज्यादा समझदारी और धैर्य दिखाएं, ताकि उनके साथ होने वाले विवाद कम हों। पुरस्कार मिलने के बाद भी नौकरी नहीं छोड़ेंगे पुरस्कार जीतने के बाद वांग ने सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स से कहा कि पुरस्कार मिलने की खबर आने तक वे बेहद घबराए हुए थे। उन्होंने बताया कि मीडिया का बढ़ता ध्यान उनके लिए मानसिक दबाव भी लेकर आया। उन्होंने साफ किया कि पुरस्कार मिलने के बावजूद वे अपनी नौकरी नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि वे 60 साल की उम्र तक फूड डिलीवरी का काम जारी रखना चाहते हैं। वांग ने कहा, अब मुझे जीवनयापन के लिए इस नौकरी की जरूरत नहीं है, लेकिन मुझे यह काम पसंद है। इससे मैं सक्रिय और फिट रहता हूं। मैं जमीन से जुड़ी जिंदगी जीना चाहता हूं और यह पुरस्कार मुझे नहीं बदलेगा। चीन में बढ़ रही है मजदूर लेखकों की पहचान वांग जिबिंग उन ब्लू-कॉलर कामगारों की नई पीढ़ी का हिस्सा हैं, जिन्हें हाल के कुछ साल में उनके साहित्यिक लेखन के लिए पहचान मिली है। उनकी रचनाएं चीन की तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों लोगों के संघर्ष, दबाव और जीवन की सच्चाई को सामने लाती हैं। साल 2023 में पूर्व डिलीवरी कर्मी हू आनयान की आत्मकथा ‘आई डिलीवर पार्सल्स इन बीजिंग’ प्रकाशित हुई थी। यह किताब चीन में बेस्टसेलर बनी और विदेशों में भी चर्चा का विषय रही। पिछले साल इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ। इसी तरह 2017 में प्रवासी मजदूर फान यूसु का आत्मकथात्मक लेख ‘आई एम फान यूसु’ चीन में इंटरनेट पर जबरदस्त वायरल हुआ था। इसे इतनी बड़ी प्रतिक्रिया मिली कि लगातार मीडिया की भीड़ से बचने के लिए फान को कुछ समय के लिए अपना घर तक छोड़ना पड़ा। लू शुन चीन का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान वांग जिबिंग को जिस लू शुन साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, उसका नाम चीन के महान साहित्यकार लू शुन के नाम पर रखा गया है। उन्हें 20वीं सदी के चीन का सबसे प्रभावशाली लेखक माना जाता है। उन्होंने अपने व्यंग्यात्मक उपन्यासों और कहानियों के जरिए पारंपरिक चीनी समाज की कमियों और सामाजिक बुराइयों पर हमला बोला। लू शुन साहित्य पुरस्कार का आयोजन चाइना राइटर्स एसोसिएशन करता है। यह पुरस्कार हर चार साल में दिया जाता है और इसे चीन के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मानों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत समकालीन चीनी साहित्य की उत्कृष्ट रचनाओं को सम्मानित करने के लिए की गई थी। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यह पुरस्कार लंबे समय से चीन के मुख्यधारा के साहित्य का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता रहा है और साहित्य जगत में इसका खास महत्व है।

जेडी वेंस उपराष्ट्रपति रहते हुए चौथे बच्चे के पिता बने:अमेरिका में 150 साल में पहली बार ऐसा हुआ; ज्यादा बच्चों के पक्षधर हैं वेंस

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी पत्नी उषा वेंस के घर चौथे बच्चे का जन्म हुआ है। 19 जुलाई की सुबह उनके बेटे एलक नील वेंस का जन्म हुआ। 150 साल से ज्यादा समय बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी मौजूदा अमेरिकी उपराष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान उनके घर बच्चे का जन्म हुआ। टाइम मैगजीन के मुताबिक, इससे पहले ऐसा 1870 में हुआ था। उस समय राष्ट्रपति यूलिसिस एस. ग्रांट के कार्यकाल में उपराष्ट्रपति शायलर कोलफैक्स की पत्नी एलन कोलफैक्स ने बेटे शायलर कोलफैक्स तृतीय को जन्म दिया था। जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर चौथे बच्चे की खुशखबरी साझा करते हुए लिखा, उषा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। हमारे तीनों बच्चे अपने छोटे भाई से मिलकर बेहद खुश हैं। एलक नील वेंस, जेडी और उषा वेंस की चौथी संतान हैं। उनसे पहले उनके तीन बच्चे इवान (9 वर्ष), विवेक (6 वर्ष) और मिराबेल (4 वर्ष) हैं। भारतीय मूल की हैं उषा वेंस उषा वेंस का जन्म और पालन-पोषण कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में हुआ। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। उनके पिता मैकेनिकल इंजीनियर हैं, जबकि मां मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट हैं। उषा और जेडी वेंस की मुलाकात 2010 में येल लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान हुई थी। बाद में दोनों ने शादी की। ज्यादा बच्चों के पक्षधर रहे हैं वेंस जेडी वेंस ट्रम्प सरकार के उन प्रमुख नेताओं में रहे हैं, जो अमेरिका में जन्मदर बढ़ाने की वकालत करते रहे हैं। उनका मानना है कि अमेरिका में गिरती जन्मदर भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है। इसी वजह से उन्होंने टैक्स छूट, परिवारों के लिए आर्थिक मदद और बच्चों वाले परिवारों को अधिक समर्थन देने जैसी नीतियों की पैरवी की है। अपनी हाल ही में रिलीज हुई किताब कम्युनियन में वेंस ने अपनी निजी जिंदगी का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि वे कई साल से पत्नी उषा वेंस से चौथा बच्चा करने की बात कहते रहे, लेकिन उषा का मानना था कि तीन बच्चों के बाद उनका परिवार पूरा हो चुका है। सार्वजनिक जीवन में आने के बाद वह चौथा बच्चा नहीं चाहती थीं। चौथे बच्चे के लिए उषा को मनाया इस साल मिशिगन में व्हाइट हाउस के एक कार्यक्रम में जेडी वेंस ने मजाकिया अंदाज में बताया था कि उन्होंने उषा को चौथे बच्चे के लिए कैसे राजी किया। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने से पहले उन्होंने उषा से कहा था, “मैं चौथा बच्चा चाहता हूं।” इस पर उषा ने जवाब दिया, “ठीक है, लेकिन तुम्हें अमेरिका का उपराष्ट्रपति बनना है या चौथा बच्चा चाहिए, दोनों एक साथ नहीं मिल सकते।” वेंस ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं अपनी बात मनवाने में काफी अच्छा हूं, क्योंकि आज मेरे पास दोनों हैं।” वेंस के मुताबिक, यह सोच तब बदली जब 2025 में उनके करीबी दोस्त और एक्टिविस्ट चार्ली किर्क की हत्या हो गई। अंतिम संस्कार के दौरान उषा की मुलाकात चार्ली किर्क की पत्नी एरिका किर्क से हुई। वेंस लिखते हैं कि एरिका ने रोते हुए उषा से कहा कि उन्हें अफसोस है कि उनके और चार्ली के केवल दो ही बच्चे थे। इस बातचीत का उषा पर गहरा असर पड़ा और कुछ समय बाद उन्होंने चौथे बच्चे के लिए हामी भर दी। भारतीय मूल के ससुराल वालों की कर चुके हैं तारीफ जेडी वेंस कई बार अपने भारतीय मूल के ससुराल वालों की खुलकर तारीफ कर चुके हैं। इस साल एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि उनके सास-ससुर इस बात का उदाहरण हैं कि प्रवासियों ने अमेरिका को किस तरह समृद्ध बनाया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिकी नागरिक बनने के बाद देश के हितों को सबसे पहले रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा था, “मैंने भारत से आए प्रवासियों की बेटी से शादी की। मुझे अपने सास-ससुर से बहुत प्यार है। वे शानदार लोग हैं और उन्होंने अमेरिका के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।”

एंडी बर्नहैम ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बने:10 साल में सातवें PM; पाकिस्तानी मूल की शबाना महमूद वित्त मंत्री बन सकती हैं

ब्रिटेन में सोमवार को एंडी बर्नहैम ने नए प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया। वह पिछले 10 साल में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बने हैं। उन्होंने देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव का वादा करते हुए कहा है कि उनकी सरकार लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं, जैसे महंगाई और खराब सार्वजनिक सेवाओं पर सबसे ज्यादा ध्यान देगी। पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर विदाई भाषण देने के बाद किंग चार्ल्स को अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम ने किंग से मुलाकात की और औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। 56 वर्षीय बर्नहैम ऐसे समय सत्ता में आए हैं, जब ब्रिटेन कई चुनौतियों से जूझ रहा है। इनमें धीमी आर्थिक वृद्धि, खराब प्रदर्शन करने वाली सार्वजनिक सेवाएं और बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं प्रमुख हैं। सरकार संभालने के साथ ही उन्हें अपनी नई कैबिनेट का भी गठन करना है। नई कैबिनेट पहली चुनौती होगी प्रधानमंत्री बनने के बाद बर्नहैम की पहली बड़ी चुनौती अपनी कैबिनेट का गठन होगी। खास तौर पर वित्त मंत्री की नियुक्ति पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि पहले भी प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के बीच मतभेद कई सरकारों के लिए मुश्किल बने हैं। ऊर्जा सुरक्षा मंत्री एड मिलिबैंड को पहले इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन अब गृह मंत्री शबाना महमूद का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। शबाना पाकिस्तानी मूल की नेता हैं। हालांकि बर्नहैम ने कहा है कि उन्होंने अभी अपनी टीम पर अंतिम फैसला नहीं लिया है और अटकलों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। पहला फैसला- डिजिटल पहचान पत्र लागू करने का फैसला रद्द किया बर्नहैम सरकार के शुरुआती फैसलों पर भी सबकी नजर रहेगी। सरकार ने पहले ही एक अहम कदम उठाते हुए सभी कर्मचारियों के लिए डिजिटल पहचान पत्र लागू करने की योजना रद्द कर दी है। इस की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सरकार ने सितंबर 2025 में की थी। इसका मकसद यह था कि देश में काम करने वाले हर कर्मचारी की पहचान और उसके काम करने के कानूनी अधिकार की डिजिटल तरीके से पुष्टि की जा सके। सरकार का मानना था कि इससे फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कम होगा और अवैध प्रवासन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। हालांकि इस योजना का शुरुआत से ही विरोध होने लगा। आलोचकों का कहना था कि इससे सरकार नागरिकों की निजी जानकारी पर जरूरत से ज्यादा कंट्रोल हासिल कर सकती है। डेटा सुरक्षा और निजता को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। बर्नहैम के सामने 5 बड़ी चुनौतियां 1. सुस्त अर्थव्यवस्था को रफ्तार देना ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पिछले कई वर्षों से कमजोर बनी हुई है। 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी, ब्रेक्जिट और कोविड-19 महामारी के कारण लोगों का जीवन स्तर लगातार प्रभावित हुआ है। बर्नहैम ने वादा किया है कि वह आम लोगों की जिंदगी में वास्तविक सुधार लाएंगे। उन्होंने टैक्स न बढ़ाने का भी वादा किया है। 2. यूक्रेन, मिडिल ईस्ट और अमेरिका के साथ रिश्तों में संतुलन बर्नहैम घरेलू मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात उन्हें ऐसा करने की पूरी छूट नहीं देंगे। यूक्रेन युद्ध अभी जारी है और मिडिल ईस्ट में भी तनाव बढ़ा हुआ है। माना जा रहा है कि इन दोनों मुद्दों पर ब्रिटेन की विदेश नीति में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा, क्योंकि NSA जोनाथन पॉवेल अपने पद पर बने रह सकते हैं। साथ ही अमेरिका के साथ ब्रिटेन के रिश्ते भी नई सरकार के लिए अहम होंगे। पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ अच्छे संबंध बनाने की कोशिश की थी, लेकिन ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों का खुलकर समर्थन नहीं करने के कारण दोनों नेताओं के बीच तनाव पैदा हो गया था। 3. रक्षा बजट बढ़ाना और उसके लिए पैसा जुटाना रक्षा खर्च बढ़ाने को लेकर मतभेद की वजह से पिछले महीने कीर स्टार्मर सरकार के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने इस्तीफा दे दिया था। उनका कहना था कि सेना के लिए प्रस्तावित बजट बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। इसके कुछ हफ्तों बाद स्टार्मर ने अगले चार वर्षों में रक्षा बजट में 15 अरब पाउंड (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) की बढ़ोतरी का ऐलान किया। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि एक्स्ट्रा पैसा कहां से आएगा और किन सरकारी विभागों के बजट में कटौती कर इसकी भरपाई की जाएगी। 4. इमिग्रेशन पर सख्त नीति और राजनीतिक संतुलन हाल के वर्षों में ब्रिटेन में शुद्ध प्रवासन (नेट माइग्रेशन) में काफी गिरावट आई है। इसकी वजह पिछली कंजर्वेटिव सरकार द्वारा लागू की गई सख्त इमिग्रेशन नीतियां हैं। इसे लेबर सरकार ने भी जारी रखा है। मई में एंडी बर्नहैम ने माना था कि इमिग्रेशन में कमी आई है, लेकिन उन्होंने कहा कि इसे और कम करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह पूर्व गृह मंत्री शबाना महमूद की सख्त इमिग्रेशन नीति को बड़े पैमाने पर जारी रखेंगे। हालांकि लेबर पार्टी के कई सांसद और उदारवादी समर्थक इसका विरोध करते रहे हैं। ऐसे में बर्नहैम के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पार्टी के भीतर विरोध के बीच संतुलन बनाना होगी। 5. बढ़ता कल्याण और पेंशन खर्च ब्रिटेन में सरकार का सामाजिक कल्याण (वेलफेयर) पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसकी एक बड़ी वजह कामकाजी उम्र के उन लोगों की बढ़ती संख्या है, जो मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के आधार पर सरकारी सहायता ले रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या युवाओं की है, जो बेरोजगार हैं। हालांकि सामाजिक सुरक्षा पर होने वाले कुल सरकारी खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा सेवानिवृत्त लोगों पर जाता है। सरकारी पेंशन और दूसरी सहायता योजनाओं पर कुल सामाजिक सुरक्षा बजट का आधे से ज्यादा हिस्सा खर्च होता है। अगर बर्नहैम इस खर्च को नियंत्रित कर पाते हैं, तो उनके पास सामाजिक आवास जैसी दूसरी योजनाओं पर ज्यादा पैसा खर्च करने का मौका मिलेगा। लेकिन यह आसान नहीं होगा। कीर स्टार्मर ने भी वेलफेयर खर्च घटाने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी ही पार्टी के सांसदों के विरोध के बाद उन्हें अपने फैसले वापस लेने पड़े थे। यही वजह है कि बर्नहैम के लिए यह आर्थिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी सबसे कठिन चुनौतियों में से एक होगी।

वर्ल्ड अपडेट्स:रूस का यूक्रेन पर बड़ा मिसाइल हमला: 40 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें, 100 से अधिक ड्रोन दागे

रूस ने शनिवार रात यूक्रेन पर युद्ध शुरू होने के बाद के सबसे बड़े बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में से एक किया। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इस संयुक्त हमले में 40 से अधिक विभिन्न प्रकार की मिसाइलें और 120 अटैक ड्रोन दागे गए। राजधानी कीव इस हमले का मुख्य निशाना रही। राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने 40 से अधिक मिसाइलें और 120 अटैक ड्रोन लॉन्च किए। यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने 18 मिसाइलों और 108 ड्रोन सहित कुल 126 हवाई लक्ष्यों को मार गिराया या निष्क्रिय किया। यूक्रेन की आपातकालीन सेवा ने बताया कि हमले में कीव में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 16 अन्य घायल हुए हैं। इससे पहले रूस ने दावा किया कि यूक्रेन ने रविवार रात मॉस्को और आसपास के क्षेत्रों पर 400 से अधिक ड्रोन से बड़ा हमला किया। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन के अनुसार, रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकांश ड्रोन को राजधानी से काफी दूर ही नष्ट कर दिया, जबकि मॉस्को के करीब पहुंचे 85 ड्रोन भी मार गिराए गए। रूसी अधिकारियों का कहना है कि 11 से 18 जुलाई के बीच मॉस्को क्षेत्र की ओर कुल 1,892 ड्रोन भेजे गए थे। इनमें से अधिकांश को दूर ही रोक लिया गया, जबकि 207 ड्रोन राजधानी के नजदीक मार गिराए गए। इसी अवधि में एक रात में 370 से अधिक ड्रोन से भी हमला किया गया था। रूस ने यह भी दावा किया कि हालिया हमलों में ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज़ (Wildberries) के दो लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निशाना बनाया गया, जिनमें आठ लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की सूचना है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… यूक्रेन में सैनिकों की भर्ती पर बढ़ा विवाद: जबरन भर्ती के आरोप, भर्ती अधिकारियों पर हमले
रूस के साथ जारी युद्ध के पांचवें वर्ष में यूक्रेन सैनिकों की कमी से जूझ रहा है। सेना को नए जवानों की जरूरत है, लेकिन जबरन भर्ती के आरोपों और भर्ती अधिकारियों पर बढ़ते हमलों ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। यूक्रेन के राष्ट्रीय पुलिस के अनुसार, अब तक भर्ती अधिकारियों पर 600 से अधिक हमले दर्ज किए जा चुके हैं। अप्रैल में कई अधिकारियों पर चाकू से हमला हुआ था, जबकि हाल ही में ल्वीव में एक भर्ती अभियान के दौरान भीड़ ने अधिकारियों की गाड़ी पलट दी। पूर्व सैनिक वासिल क्रुपिच ने बताया कि भर्ती अभियान के दौरान दो लोगों का पीछा करते समय उन पर लोहे की रॉड से हमला किया गया, जिससे उनकी पसली टूट गई और उन्हें छह सप्ताह अस्पताल में रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि युद्ध लड़ने वाले सैनिकों पर अपने ही देश में हमला होना बेहद पीड़ादायक है। वहीं दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों के पास भर्ती प्रक्रिया में मारपीट, गैरकानूनी हिरासत और जबरन भर्ती की हजारों शिकायतें भी पहुंची हैं। ड्नीप्रो के एक विश्वविद्यालय प्रोफेसर ने आरोप लगाया कि भर्ती दल ने उन्हें सड़क से जबरन बस में बैठाने की कोशिश की और विरोध करने पर पीटा। विश्लेषकों के अनुसार, लगातार युद्ध, भारी सैन्य नुकसान और युद्ध खत्म होने की अनिश्चितता के कारण लोग सेना में शामिल होने से बच रहे हैं। यूक्रेन में सड़कों से लोगों को पकड़कर भर्ती केंद्र ले जाने की प्रक्रिया को स्थानीय तौर पर ‘बसिफिकेशन’ कहा जाने लगा है, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया है। सरकार ने सैनिकों को बेहतर वेतन, निश्चित अवधि के अनुबंध और भर्ती प्रक्रिया में सुधार जैसे कदम शुरू किए थे, लेकिन पूर्व रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव के पद छोड़ने के बाद ये सुधार अधूरे रह गए हैं।
जेडी वेंस अमेरिकी उपराष्ट्रपति रहते हुए चौथे बच्चे के पिता बने, 150 साल में पहली बार ऐसा हुआ अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी पत्नी उषा वेंस के घर चौथे बच्चे का जन्म हुआ है। उनके बेटे एलेक नील वेंस का जन्म रविवार, 19 जुलाई की सुबह हुआ। जेडी वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। वेंस ने लिखा, “उषा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। हमारे तीनों बच्चे अपने छोटे भाई से मिलकर बेहद खुश हैं।” इस बच्चे के जन्म के साथ अमेरिकी राजनीति में एक अनोखा इतिहास भी बना है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक, 150 साल से ज्यादा समय बाद पहली बार किसी मौजूदा अमेरिकी उपराष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान उनके घर बच्चे का जन्म हुआ है। टाइम मैगजीन के अनुसार, इससे पहले ऐसा 1870 में हुआ था। उस समय राष्ट्रपति यूलिसिस एस. ग्रांट के कार्यकाल में उपराष्ट्रपति शायलर कोलफैक्स की पत्नी एलेन कोलफैक्स ने बेटे शायलर कोलफैक्स तृतीय को जन्म दिया था। बाद में वह इंडियाना के साउथ बेंड शहर के मेयर भी बने। मैगजीन के मुताबिक, 1870 से पहले उपराष्ट्रपतियों के परिवार में जन्म से जुड़े रिकॉर्ड पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। एलेक नील वेंस, जेडी और उषा वेंस की चौथी संतान हैं। उनसे पहले उनके तीन बच्चे इवान (9 वर्ष), विवेक (6 वर्ष) और मिराबेल (4 वर्ष) हैं। पेरू में दो भूकंप से 6 लोगों की मौत, 21 घायल; 48 मकान ढहे, राहत अभियान जारी
पेरू के मध्य पर्वतीय क्षेत्र में शनिवार रात आए दो भूकंपों में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई, जबकि 21 अन्य घायल हो गए। भूकंप से दर्जनों मकान ढह गए और करीब 300 लोग प्रभावित हुए हैं। राहत एवं बचाव दल मलबा हटाने और संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, पहला भूकंप 5.1 तीव्रता का था, जिसकी गहराई 24 किलोमीटर थी। इसके बाद 3.7 तीव्रता का दूसरा भूकंप 18 किलोमीटर की गहराई पर आया। दोनों झटकों का केंद्र राजधानी लीमा से लगभग 300 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। वहीं, यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने पहले भूकंप की तीव्रता 5.6 दर्ज की है। राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा संस्थान के प्रमुख लुइस वास्केज़ ने बताया कि शुरुआती आकलन के अनुसार 48 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और 18 अन्य क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी शिविर और टेंट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र के अधिकांश मकान मिट्टी (एडोबी) की ईंटों से बने हैं, जिसके कारण उन्हें भारी नुकसान हुआ। पेरू प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है, जहां दुनिया की लगभग 85% भूकंपीय गतिविधियां होती हैं। इसी कारण देश में समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं। ब्रिटेन में विपक्ष की मांग- पाकिस्तान की सहायता और वीजा पर लगे रोक ब्रिटेन में विपक्षी दलों ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पाकिस्तान द्वारा बाल यौन अपराधी शबीर अहमद को वापस लेने से इनकार करने के बाद विपक्ष ने कहा है कि जब तक पाकिस्तान ऐसे दोषियों को स्वीकार नहीं करता, तब तक उसे दी जाने वाली आर्थिक सहायता और नए वीजा जारी करने पर रोक लगा दी जाए। पाकिस्तान में जन्मा शबीर अहमद रोचडेल ग्रूमिंग गैंग का प्रमुख सदस्य था। उसे बच्चियों से दुष्कर्म के 30 मामलों में दोषी ठहराया गया था। 22 साल की सजा में से 14 साल जेल काटने के बाद इस महीने उसे रिहा किया गया। ब्रिटेन ने 2016 में उसकी नागरिकता समाप्त कर दी थी, लेकिन 1971 के इमिग्रेशन एक्ट के तहत मिले कानूनी संरक्षण के कारण सरकार उसे निर्वासित नहीं कर सकी। गृह सचिव शबाना महमूद ने कहा है कि ऐसे अत्यंत गंभीर मामलों में कानून में संशोधन किया जाएगा। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि अहमद ने दशकों पहले अपनी पाकिस्तानी नागरिकता छोड़ दी थी और उसकी जिम्मेदारी अब ब्रिटेन की है, जहां उसका पालन-पोषण हुआ और उसने अपराध किए। इसी दौरान यह भी सामने आया कि ब्रिटेन ने अगले तीन वर्षों के लिए पाकिस्तान को 153 मिलियन पाउंड की विकास सहायता मंजूर की है। इस पर विपक्ष ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सहायता और वीजा दोनों तब तक रोके जाने चाहिए, जब तक पाकिस्तान शबीर अहमद जैसे दोषियों को वापस लेने के लिए तैयार नहीं होता। हिटलर की तारीफ करना पड़ा भारी: जर्मन अदालत ने डच दक्षिणपंथी कार्यकर्ता को किया तलब
हिटलर से मिलती-जुलती शक्ल के कारण चर्चित डच दक्षिणपंथी कार्यकर्ता स्टीफन वाइकैम्प को जर्मनी की अदालत ने नफरत फैलाने के आरोप में तलब किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पिछले साल म्यूनस्टर में आयोजित एक दक्षिणपंथी रैली के दौरान एडॉल्फ हिटलर का सार्वजनिक रूप से महिमामंडन किया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वाइकैम्प ने एक यूट्यूबर को दिए इंटरव्यू में कहा था कि “जर्मनी के प्रति मेरा प्यार एडॉल्फ हिटलर है।” उन्होंने हिटलर को “बेमिसाल विश्व चमत्कार” और “जीनियस” भी बताया था। इसी बयान को आधार बनाकर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। म्यूनस्टर जिला अदालत के अनुसार, मामले की पहली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। यदि वाइकैम्प अदालत में पेश नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है। डच मीडिया के अनुसार, वाइकैम्प के खिलाफ नीदरलैंड में भी कई कानूनी मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें सार्वजनिक रूप से नाजी सलामी देने जैसे आरोप भी शामिल हैं। नॉर्वे ने 2011 आतंकी हमले के 77 पीड़ितों की याद में बनाया नया स्मारक
नॉर्वे ने 22 जुलाई 2011 के आतंकी हमले में जान गंवाने वाले 77 लोगों की स्मृति में नया राष्ट्रीय स्मारक स्थापित किया है। हमले की 15वीं बरसी से पहले रविवार को ओस्लो में इसका उद्घाटन किया गया। समारोह में पीड़ितों के परिजन, हमले से बचे लोग, सरकारी अधिकारी और नॉर्वे के क्राउन प्रिंस हाकोन शामिल हुए। 22 जुलाई 2011 को दक्षिणपंथी चरमपंथी एंडर्स बेहरिंग ब्रेविक ने पहले ओस्लो में कार बम विस्फोट किया, जिसमें आठ लोगों की मौत हुई। इसके बाद उसने उटोया द्वीप पर लेबर पार्टी के युवा शिविर में गोलीबारी कर 69 लोगों की हत्या कर दी। इस हमले में अधिकांश पीड़ित किशोर थे और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। ओस्लो के सरकारी क्षेत्र में बने ‘अपहोल्डिंग’ नामक इस स्मारक में 12 मीटर ऊंची पत्थर की मोज़ेक कला बनाई गई है, जिसमें उटोया द्वीप पर पाए जाने वाले एक छोटे पक्षी को दर्शाया गया है। स्मारक पर हमले में मारे गए सभी 77 लोगों के नाम अंकित किए गए हैं। हमले के दोषी एंडर्स बेहरिंग ब्रेविक को 2012 में 21 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। बाद में उसने पैरोल और जेल की परिस्थितियों को लेकर कई कानूनी चुनौतियां दीं, लेकिन 2022 में उसकी पैरोल याचिका और 2024 में अलग-थलग रखे जाने के खिलाफ दायर मुकदमा दोनों अदालत ने खारिज कर दिए।

ईरान बोला- अमेरिकी सैनिकों का इंतजार कर रहे हैं:खार्ग आइलैंड पर कब्जे की कोशिश की, तो कोई जिंदा बचकर नहीं जाएगा

ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने खार्ग आइलैंड पर कब्जे की कोशिश की तो उसके सैनिक जिंदा वापस नहीं लौट पाएंगे। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की खार्ग आइलैंड पर कब्जे से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ईरान में ऐसे लोग हैं जो अमेरिकी सैनिकों के आने का इंतजार कर रहे हैं। खार्ग आइलैंड और उसके आसपास सामना करने के लिए पूरी तैयारी है। खार्ग आइलैंड फारस की खाड़ी में बुशहर प्रांत के तट से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित है। यह ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है और रणनीतिक रूप से देश की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिसंपत्तियों में गिना जाता है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान का जॉर्डन, कुवैत और ओमान में अमेरिकी ठिकानों पर हमला: IRGC ने कहा कि उसने जॉर्डन, कुवैत, ओमान समेत कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं। साथ ही चेतावनी दी कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। 2. कुवैत में डिसेलिनेशन प्लांट पर दो दिनों में दूसरी बार हमला: कुवैत के बिजली उत्पादन और वॉटर डिसेलिनेशन संयंत्र पर फिर हमला हुआ, जिससे कई बिजली उत्पादन इकाइयों में आग लग गई। मंत्रालय ने घटना की पुष्टि करते हुए राहत कार्य जारी होने की जानकारी दी। 3. ईरान बोला- अमेरिका ने परमाणु संयंत्र को निशाना बनाया: ईरान के एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइजेशन (AEOI) ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने खुजेस्तान प्रांत में बन रहे डारखोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र की साइट पर हमला किया है। 4. ईरान में बिजली संकट गहराया: अमेरिकी हमलों और भीषण गर्मी के बीच ईरान में बिजली संकट बढ़ गया है। तेहरान समेत कई इलाकों में रोज बिजली कटौती हो रही है, जिससे आम जनजीवन और पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 5. इराक होर्मुज पर निर्भरता घटाने की तैयारी में: इराक ने बसरा से तुर्किये और सीरिया तक नई तेल पाइपलाइन बिछाने की योजना पर काम शुरू किया है। इसका उद्देश्य तेल निर्यात के लिए होर्मुज पर निर्भरता कम करना है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

वर्ल्ड अपडेट्स:UNGA से पहले बयान: नेतन्याहू की संभावित यात्रा पर न्यूयॉर्क मेयर और इजराइल आमने-सामने

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा है कि वे सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए शहर आने वाले इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गिरफ्तारी की कानूनी संभावना पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में शहर के विधि विभाग के साथ बातचीत चल रही है। ममदानी ने कहा कि वे वही करेंगे, जिसकी कानून इजाजत देगा। उन्होंने दोहराया कि उनके मुताबिक नेतन्याहू का स्थान द हेग में है, जहां अंतरराष्ट्रीय अपराधों के आरोपियों पर मुकदमा चलता है। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने नवंबर 2024 में गाजा में कथित युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों में नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। ममदानी ने न्यूयॉर्क टाइम्स के पॉडकास्ट द इंटरव्यू में कहा कि नेतन्याहू युद्ध अपराधों के आरोपी हैं और कई लोग यही मानते हैं। संयुक्त राष्ट्र में इजराइल के राजदूत डैनी डैनन ने ममदानी पर यहूदी विरोधी माहौल को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ममदानी बढ़ते यहूदी विरोध का सामना करने के बजाय इजराइल के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। डैनन ने पुष्टि की कि नेतन्याहू 22 से 28 सितंबर के बीच होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल वीक में संबोधन करेंगे। उन्होंने कहा कि मेयर का रुख इससे कोई फर्क नहीं डालेगा। उन्होंने X पर लिखा कि अगर किसी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए तो वह न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी हैं। हाल ही में एक रेडियो इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा था कि उन्हें ममदानी की गिरफ्तारी संबंधी धमकियों की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यूयॉर्क के मेयर हमास का समर्थन करते हैं और अमेरिका से नफरत करते हैं। अमेरिका और इजराइल, दोनों ICC के सदस्य नहीं हैं। अमेरिकी संघीय कानून राज्य और स्थानीय प्रशासन को ICC के अनुरोधों पर सहयोग करने से रोकता है। पिछले साल न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल भी कह चुकी हैं कि मेयर के पास नेतन्याहू को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… कनाडा के जंगलों में आग से टोरंटो, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन की हवा दुनिया में सबसे खराब
कनाडा में जंगलों में लगी भीषण आग का धुआं अमेरिका तक पहुंच गया है। शनिवार को टोरंटो, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन DC दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। खराब एयर क्वालिटी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों को बाहर कम निकलने और सावधानी बरतने की सलाह दी है। कनाडा में इस समय 955 जगहों पर जंगलों में आग लगी हुई है। इनमें से करीब 200 आग केवल ओंटारियो प्रांत में हैं। कई जगह आग अब भी नियंत्रण से बाहर है। अमेरिका के मिनेसोटा राज्य की उत्तरी सीमा पर भी एक दर्जन से ज्यादा जंगलों में आग लगी है। ये 73 हजार एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैली है। अधिकारियों ने इसे अभूतपूर्व स्थिति बताते हुए आपातकाल घोषित किया है। अमेरिका के नेशनल इंटरएजेंसी फायर सेंटर और नेचुरल रिसोर्सेज कनाडा के अनुसार, जून के आखिर में लगातार गर्म मौसम और सामान्य से कम बारिश के कारण आग तेजी से फैली। सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा कि हवा धुएं को ओंटारियो से टोरंटो, न्यूयॉर्क राज्य और बोस्टन तक ले गई। एयर क्वालिटी मॉनिटर करने वाली संस्था IQAir के अनुसार शनिवार को टोरंटो, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन DC दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कनाडा पर जंगलों की आग रोकने में लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि धुएं से अमेरिका को भारी नुकसान हो रहा है और इसकी भरपाई के लिए कनाडा पर नए टैरिफ लगाने पर विचार किया जा सकता है। ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने अमेरिकी नेताओं की आलोचना को गलत बताया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले साल कैलिफोर्निया में लगी आग बुझाने में टोरंटो ने अमेरिका की मदद की थी। विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों की आग के धुएं के लिए सिर्फ कनाडा को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के विशेषज्ञ पैट्रिक जेम्स के मुताबिक, धुआं सीमाएं नहीं मानता। हवा उसे जहां ले जाती है, वह वहीं पहुंच जाता है। पहले भी अमेरिका में लगी बड़ी आग का धुआं कनाडा तक पहुंच चुका है। ताइवानी राष्ट्रपति बोले- लोकतांत्रिक ताइवान को कभी ‘चीन का ताइवान’ नहीं बनने देंगे
ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने रविवार को कहा कि देश को अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए एकजुट रहना होगा और किसी भी कीमत पर ‘लोकतांत्रिक ताइवान’ को ‘चीन का ताइवान’ नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने अपनी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बीजिंग के “रेड टेरर” का मिलकर मुकाबला करने की अपील की। DPP के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए लाइ ने कहा कि शांति के समय भी ताइवान को सतर्क रहने की जरूरत है। लाइ ने कहा कि चीन का नया ‘एथनिक यूनिटी लॉ’ बीजिंग को अपनी सीमाओं के बाहर रहने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई का आधार देता है। ताइवान को आशंका है कि इस कानून का इस्तेमाल उन ताइवानी नागरिकों के खिलाफ किया जा सकता है, जिन्हें चीन अलगाववादी मानता है। हालांकि, चीन इस कानून को लेकर की गई सभी आलोचनाओं को पहले ही खारिज कर चुका है। ताइवान का कहना है कि चीन की कानूनी व्यवस्था का उसके क्षेत्र पर कोई अधिकार नहीं है। ताइवानी (होक्कियन) भाषा में भाषण देते हुए लाइ ने पार्टी नेताओं से कहा कि वे सबसे आगे रहकर समाज पर चीन के “रेड टेरर” के खतरे का मुकाबला करें। उन्होंने कहा, “हमें अपनी लोकतांत्रिक और स्वतंत्र जीवनशैली की रक्षा के लिए साथ मिलकर काम करना होगा। किसी भी हालत में लोकतांत्रिक ताइवान को फिर से चीन का ताइवान नहीं बनने देंगे।” लाइ ने एक बार फिर कहा कि ताइवान पहले से ही एक स्वतंत्र देश है, जिसका संवैधानिक नाम ‘रिपब्लिक ऑफ चाइना’ है। उन्होंने कहा कि यह ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के अधीन नहीं है। लाइ ने कहा कि पिछले एक दशक में DPP सरकार ने चीन के बढ़ते दबाव, दुष्प्रचार, सैन्य धमकियों और कूटनीतिक दबाव के सामने कभी पीछे हटने का रास्ता नहीं चुना।

संडे प्रोफाइल : एलिक्स अर्ले:85 लाख फॉलोअर्स वाली अर्ले सबसे प्रभावशाली कंटेंट क्रिएटर

अमेरिकी इंफ्लूएंसर एलिक्स अर्ले को टाइम मैग्जीन ने 2026 के 100 सबसे प्रभावशाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर की सूची में शीर्ष पर रखा है। अर्ले ने एक प्रोडक्ट भी लॉन्च किया है। अब नेटफ्लिक्स उन पर रियलिटी सीरीज बनाएगा। आज सोशल मीडिया पर लाखों लोग अपनी जिंदगी साझा करते हैं, लेकिन अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर एलिक्स अर्ले ने इसी आदत को अपना सबसे बड़ा बिजनेस मॉडल बना दिया। टिकटॉक पर करीब 85 लाख फॉलोअर्स वाली 25 वर्षीय अर्ले का मानना है कि लोग अब भी उन्हें ठीक से नहीं समझते। उनके मुताबिक सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि लोगों को लगता है उन्हें सफलता आसानी से मिल गई। दूसरी धारणा यह है कि वह केवल किसी और के बिजनेस का चेहरा हैं, जबकि वह अपने फैसले खुद लेने वाली उद्यमी हैं। अर्ले कहती हैं, ‘लोग मुझे कम आंकते हैं या सोचते हैं कि मैं नासमझ हूं।’ इंटरनेट पर बेहद आत्मविश्वासी और प्रभावशाली दिखने वाली अर्ले वास्तविक जीवन में काफी शांत स्वभाव की हैं। उनका कहना है कि उनसे पहली बार मिलने वाले कई लोग कहते हैं कि वे तस्वीरों और वीडियो जैसी नहीं दिखतीं। एक समय उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थक भी माना गया। इस पर अर्ले ने साफ किया कि कॉलेज के दिनों में उनके विचार अलग थे, लेकिन अब वे खुद को ट्रम्प समर्थक नहीं मानतीं। अर्ले की सबसे बड़ी ताकत उनकी साफगोई मानी जाती है। उन्होंने कभी अपनी जिंदगी को परफेक्ट दिखाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने पारिवारिक परेशानियों, प्रेम संबंधों, मानसिक उतार-चढ़ाव और मुंहासों जैसी निजी समस्याओं तक को सोशल मीडिया पर खुलकर साझा किया। यही ईमानदारी उनके फॉलोअर्स को उनसे जोड़ती है। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए नेटफ्लिक्स उन पर आधारित रियलिटी सीरीज ‘अर्ले मीट्स वर्ल्ड’ लेकर आ रहा है। मियामी यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग की पढ़ाई करने वाली अर्ले दो बार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी व्याख्यान दे चुकी हैं। उन्होंने अमेजन, कार्ल्स जूनियर और प्रीबायोटिक ड्रिंक पॉपी सहित कई बड़े ब्रांड्स के साथ काम किया है। अर्ले का सोशल मीडिया सफर भी संघर्ष से भरा रहा। न्यू जर्सी में पली-बढ़ी अर्ले ने कॉलेज के दौरान टिकटॉक पर डांस, शॉपिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े वीडियो पोस्ट किए, लेकिन खास पहचान नहीं मिली। 2022 में उन्होंने अपने मुंहासों (एक्ने) से जुड़ी परेशानी और बिना मेकअप वाली तस्वीरें साझा कीं। यह वीडियो वायरल हो गई और लाखों लोगों ने उनकी ईमानदारी की सराहना की।