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इंडिगो ने जून में रिकॉर्ड 66.3% मार्केट शेयर हासिल किया:एअर इंडिया ने क्षमता घटाई, इंडिगो ने 1000 से ज्यादा एयरक्राफ्ट इंजन के ऑर्डर दिए

देश के एविएशन सेक्टर में इंडिगो की हिस्सेदारी और मजबूत हो गई है। जून महीने में इंडिगो ने 66.3% का अब तक का अपना सबसे बड़ा मार्केट शेयर हासिल किया है। DGCA के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, यह तेजी ऐसे समय आई है जब प्रतिस्पर्धी एयरलाइन एअर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूटों पर अपनी क्षमता में कटौती की है। मार्केट में अपनी बढ़त को बनाए रखने के लिए इंडिगो ने एयरबस फ्लीट के लिए 1,000 से ज्यादा सीएफएम लीप इंजनों की खरीद के लिए एक ऐतिहासिक समझौता (MoU) भी किया है। जून में 89.2 लाख यात्रियों ने इंडिगो से यात्रा की जून के आंकड़ों के अनुसार, इंडिगो ने 89.2 लाख यात्रियों को उनके डेस्टिनेशन तक पहुंचाया। इससे पहले मई में इंडिगो से 99 लाख और अप्रैल में 89.7 लाख यात्रियों ने सफर किया था। इंडिगो अपनी मजबूत फ्लीट और नेटवर्क के दम पर लगातार नंबर वन पर बनी हुई है। एअर इंडिया 32 लाख यात्रियों के साथ इस साल के सबसे निचले स्तर पर टाटा ग्रुप द्वारा संचालित एअर इंडिया का प्रदर्शन जून में कमजोर रहा। एअर इंडिया ने जून में 32 लाख पैसेंजर्स को सर्विसेज दीं, जो इस साल का इसका सबसे कम आंकड़ा है। इससे पहले जनवरी में एअर इंडिया ने इस साल का अपना उच्चतम स्तर 40 लाख पैसेंजर्स का छुआ था। एअर इंडिया को वित्त वर्ष 2025 में ₹26,000 करोड़ से ज्यादा का घाटा अकासा एयर का भी रिकॉर्ड प्रदर्शन, मार्केट शेयर 6.4% पर पहुंचा अकासा एयर ने भी जून में अपना अब तक का सबसे बेहतरीन 6.4% मार्केट शेयर दर्ज किया है। यह एयरलाइन सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है। पश्चिम एशिया संघर्ष से पैदा हुई चुनौतियों के बावजूद कंपनी अपने ऑपरेशन्स के लिए ₹10,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। अकासा एयर ने जून में देश में सबसे ज्यादा 92.2% का पैसेंजर लोड फैक्टर (सीट ऑक्यूपेंसी) दर्ज किया। मिडिल ईस्ट तनाव का एविएशन सेक्टर पर असर भू-राजनीतिक तनाव और मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण भारतीय एयरलाइंस को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मार्च और अप्रैल में मिडिल ईस्ट रूट की उड़ानों में भारी कटौती करनी पड़ी थी। भारतीय एयरलाइंस के कुल रेवेन्यू में खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा है। एयर इंडिया एक्सप्रेस और स्पाइसजेट की 90% से ज्यादा इंटरनेशनल कैपेसिटी गल्फ रीजन में ही तैनात रहती है। इंडिगो ने 510 एयरबस विमानों के लिए 1,000+ लीप इंजन ऑर्डर किए ग्लोबल एयरलाइन बनने की राह पर अग्रसर इंडिगो ने CFM इंटरनेशनल के साथ 510 एयरबस A320neo फैमिली एयरक्राफ्ट को पावर देने के लिए 1,000 से ज्यादा LEAP-1A इंजनों की खरीद के लिए एक MoU साइन किया है। 10 साल से मजबूत है इंडिगो और CFM की साझेदारी इंडिगो और CFM इंटरनेशनल के बीच सहयोग का इतिहास एक दशक पुराना है। दुनिया भर में अब तक 10,000 से अधिक LEAP इंजनों की डिलीवरी की जा चुकी है। भारत CFM का तीसरा सबसे बड़ा मार्केट है। यहां 5 भारतीय एयरलाइंस 400 से ज्यादा लीप-पावर्ड विमानों का संचालन कर रही हैं और लगभग 2,000 इंजनों के ऑर्डर पाइपलाइन में हैं। क्या होता है MRO फैसिलिटी और LEAP इंजन? ये खबर भी पढ़ें… अडाणी एनर्जी का मुनाफा 124% बढ़कर ₹1,149 करोड़: पहली तिमाही में रेवेन्यू 42% चढ़ा; कंपनी का शेयर 1,737 रुपए पर पहुंचा अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दोगुना से ज्यादा यानी 124% बढ़कर 1,149 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। पूरी खबर पढ़ें…

ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का संभागीय आयुक्त ने किया निरीक्षण:निर्माण कार्य में तेजी लाने और समय पर पूरा करने के दिए निर्देश

संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल ने मंगलवार को बूंदी के शंभूपुरा में निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के कार्यों की प्रगति का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान संभागीय आयुक्त ने कार्यस्थल का जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में आ रही किसी भी बाधा को तुरंत दूर किया जाए ताकि काम की गति प्रभावित नहीं हो।
अग्रवाल ने अंतर-विभागीय समन्वय पर विशेष जोर दिया। उन्होंने केडीए, जेवीवीएनएल, आरवीपीएल और पीएचईडी विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने वन विभाग से संबंधित क्लीयरेंस प्रक्रिया में तेजी लाने और इसे समय-सीमा के भीतर प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।
इस अवसर पर केडीए आयुक्त बचनेश कुमार अग्रवाल, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त ममता तिवारी और केडीए सचिव मुकेश चौधरी सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

कोटवास में 3 घरों में चोरी, ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन:एसपी को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग

सूरौठ थाना क्षेत्र के ग्राम कोटवास में तीन घरों में हुई चोरी की वारदात के खुलासे और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पीड़ित परिवारों के सदस्यों ने मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने पुलिस अधीक्षक के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें घटना का शीघ्र खुलासा करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई। ज्ञापन में बताया गया कि यह घटना 15 जुलाई 2026 की रात करीब 2 बजे हुई थी। ग्राम कोटवास में राजो पत्नी राजेश, लक्ष्मी पत्नी दिनेश और सुनीता पत्नी हिम्मत सिंह के घरों को निशाना बनाया गया। चोर घरों से जेवरात, नकदी और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए थे। इस मामले में सूरौठ थाने में एफआईआर दर्ज की गई है, जिसकी जांच जगर चौकी के एएसआई हरिराम गुर्जर कर रहे हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे मेहनत-मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं और चोरी से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। घटना के काफी समय बीत जाने के बावजूद न तो चोरी का सामान बरामद हुआ है और न ही आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकी है। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले का जल्द खुलासा कर चोरी गए जेवरात और नकदी की बरामदगी सुनिश्चित की जाए। साथ ही, आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। ज्ञापन के साथ एफआईआर की प्रति भी लगी हुई थी।

बारिश में भी NTA के खिलाफ स्टूडेंट्स का धरना जारी:तिरपाल का टेंट बनाया, छाते लेकर लगाए नारे; इस्तीफे की मांग दोहराई

झुंझुनूं में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और पेपर लीक के मामलों के विरोध में Gen Z के 11वीं और 12वीं के स्कूली स्टूडेंट्स का धरना मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर मूसलाधार बारिश के बावजूद स्टूडेंट्स डटे रहे। उन्होंने तिरपाल और प्लास्टिक से अस्थायी टेंट बनाया, छाते लेकर प्रदर्शन जारी रखा और NTA को निरस्त करने व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। फोटोज में देखें… ​बारिश भी नहीं रोक सकी छात्रों का प्रदर्शन मंगलवार को शहर में अचानक तेज मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। आमतौर पर ऐसी स्थिति में प्रदर्शन स्थल खाली हो जाते हैं, लेकिन यहां स्टूडेंट्स अपनी जगह से नहीं हटे। बारिश शुरू होते ही स्टूडेंट्स ने तिरपाल और प्लास्टिक की मदद से अस्थायी टेंट तैयार कर लिया। इसके बाद हाथों में छाते लेकर कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर सड़क पर ही प्रदर्शन जारी रखा। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ थीम से कर रहे प्रदर्शन इस आंदोलन की खास बात इसका अलग तरीका है। ‘चेंज मोड ऑन’ ग्रुप के नेतृत्व में चल रहा यह प्रदर्शन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ थीम पर आधारित है। स्टूडेंट्स के इस तरीके की जिलेभर में चर्चा हो रही है। बच्चों के प्रदर्शन को देखकर झुंझुनूं के कई अन्य छात्र संगठन भी धरना स्थल पर पहुंचे और अपना समर्थन दिया। स्टूडेंट्स का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। छात्रा बोली- संविधान ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार दिया है धरना स्थल पर बारिश के बीच बैठी 12वीं क्लास की छात्रा अनुप्रिया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर स्कूली और कॉलेज के स्टूडेंट्स के साथ पुलिस ने जिस तरह कार्रवाई की, वह गलत और शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन का अधिकार देता है। वहां किसी तरह की अशांति नहीं थी, फिर भी स्टूडेंट्स के साथ बर्बरता की गई। उन्होंने कहा कि वे इसके खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे। लोकतंत्र बचाने के लिए सड़क पर उतरने की बात धरने में शामिल एक अन्य छात्र ने कहा कि वे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने के लिए सड़क पर उतरे हैं, ताकि देश का हर नागरिक बिना किसी डर के अपना हक मांग सके। कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन के दौरान स्टूडेंट्स लगातार नारेबाजी करते रहे। धरना स्थल पर “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो”, “NTA को निरस्त करो” और “छात्र एकता जिंदाबाद” के नारे लगाए गए।

दुबई से 160 करोड़ की साइबर ठगी, मास्टरमाइंड गिरफ्तार:नेपाल-भूटान के रास्ते डूंगरपुर लौटा था, मामले में 5 आरोपी पहले ही पकड़े

डूंगरपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दुबई से संचालित होने वाले 160 करोड़ रुपए की साइबर ठगी के अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह भोले-भाले ग्रामीणों और विद्यार्थियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनका इस्तेमाल साइबर अपराधों में करता था। पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया कि साइबर ठगी के इस मामले में फरार चल रहे मुख्य सरगना घनश्याम कलाल, निवासी सीमलवाड़ा को उदयपुर के बलीचा क्षेत्र से पकड़ा गया। साइबर थाना डीएसपी हंसाराम चौधरी के अनुसार आरोपी दुबई से नेपाल और भूटान के रास्ते भारत लौटा था। पुलिस को इसकी सूचना मिलने के बाद तकनीकी और पारंपरिक पुलिसिंग के माध्यम से उसे दबोच लिया गया। जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, पैन कार्ड, बैंक खाता और लोन दिलाने का लालच देकर ग्रामीणों और विद्यार्थियों के नाम पर 450 से अधिक बैंक खाते खुलवाए थे। इन खातों की पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, मोबाइल सिम और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी अपने कब्जे में लेकर, गिरोह देशभर में साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए इनका उपयोग करता था। पुलिस के मुताबिक इन खातों के जरिए कुल 160 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। दुबई के साथ ही कुवैत ओर जॉर्जिया से चलता था नेटवर्क
पुलिस के अनुसार ठगी का नेटवर्क दुबई, जॉर्जिया और कुवैत से संचालित होता था। टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए गिरोह के सदस्य आपस में संपर्क में रहते थे। ठगी की रकम बैंक खातों में आने के बाद उसे एटीएम और चेक के माध्यम से निकालकर कमीशन के आधार पर आपस में बांट लिया जाता था।

गिरोह के 5 आरोपी पहले गिरफ्तार
इस मामले में इससे पहले गिरोह के पांच अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क, अन्य सहयोगियों और विदेश में बैठे संचालकों के संबंध में जानकारी जुटा रही है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या बैंकिंग जानकारी किसी भी तरह से न दे।

कोटा में निकाय चुनाव को लेकर 100-वार्डों का खाका तैयार:भाजपा अपने काम गिनाएगी तो कांग्रेस कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरेगी

कोटा में नगर निकाय चुनाव को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनावी प्रक्रिया के तहत 100 वार्डों का प्रारंभिक गणित और व्यवस्थाओं का खाका तैयार कर लिया गया है। नवबंर 2025 के करीब 9 महीने बाद स्थानीय सरकार के चुनाव होने हैं, ऐसे में प्रशासन मतदाता सूची, मतदान केंद्र, वार्डवार व्यवस्थाओं और अन्य तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गया है। चुनावी हलचल के बीच राजनीतिक दलों ने भी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। ऐसे में भाजपा अपने कार्यकाल में हुए काम गिनाएगी तो कांग्रेस कई मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार को घेरने की तैयारी में है। दरअसल, लंबे समय से लटके कोटा नगर निगम चुनावों को लेकर आखिरकार प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राजस्थान हाईकोर्ट के कड़े रुख और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्राथमिक स्तर पर कोर्ट में चुनावों की तारीखों की जानकारी देने के बाद निकाय चुनावों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। हालांकि, अभी निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव की आधिकारिक तारीखों और विस्तृत समयसीमा की घोषणा होना बाकी है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब बैठकों और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के बाद फाइनल वोटर्स की लिस्टे अब जारी होने की उम्मीद है। बता दें कि नवंबर 2025 को पार्षदों और महापौर का कार्यकाल खत्म हो गया था। कोटा में पहले दो निगम उत्तर और दक्षिण थे। लेकिन अब एक ही नगर निगम कर दिया गया है। ऐसे में इस बार एक ही बोर्ड चुना जाएगा। नवंबर 2025 से 9 महीने बाद पार्षदों और महापौर को चुना जाएगा। 100 वार्डों का गणित तैयार चुनावों के आधिकारिक नोटिफिकेशन से पहले ही बुनियादी ढांचा दुरुस्त किया जाना है। कोटा नगर निगम में इस बार 100 वार्डों के नए सीमांकन के आधार पर चुनावी बिसात बिछाई जाएगी। वार्डवार मतदाता सूचियों को अपडेट करने, भौतिक सत्यापन और पोलिंग बूथों के निर्धारण का काम अब होना है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही आयोग से तारीखों की अंतिम अधिसूचना जारी होगी, चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इधर, निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही कोटा के राजनीतिक दल भी अब इलेक्शन मोड में आ रहे हैं। बूथ स्तर के कार्यकर्ता और संगठन चुनावों के लिए तैयार भाजपा नेताओं के अनुसार, पिछले ढाई साल से सरकार और पार्टी जनहित को सर्वोपरि मानकर काम कर रही है। शहर के विकास को नए आयाम दिए गए हैं। इसी के आधार पर बूथ स्तर के कार्यकर्ता और संगठन चुनावों के लिए तैयार है। भाजपा केंद्र और राज्य सरकार के ढाई साल के कार्यकाल, विकास कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के दम पर जनता के बीच पैठ बनाने की रणनीति तैयार कर रही है। कांग्रेस कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरेगी वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस शहर की स्थानीय समस्याओं को लेकर आक्रामक है। कांग्रेस पार्टी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत, नाली-पटान, सफाई व्यवस्था, सीवरेज की नाकामी और टूटी सड़कों के मुद्दों को हथियार बनाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। स्थानीय मुद्दों पर ही तय होगी कोटा की सरकार राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार कोटा नगर निगम का चुनाव बड़े राष्ट्रीय या राज्यस्तरीय मुद्दों के बजाय शुद्ध रूप से स्थानीय विकास और जनसुविधाओं के इर्द-गिर्द घूमेगा। पिछले कार्यकाल के अधूरे प्रोजेक्ट्स, सड़कों की हालत और सफाई व्यवस्था मतदाताओं के निर्णय में अहम भूमिका निभाएंगे। जैसे-जैसे चुनाव आयोग की आधिकारिक तारीखों का समय नजदीक आएगा, कोटा में वार्ड स्तर पर बैठकों, जनसंपर्क अभियानों और राजनीतिक आंदोलनों का शोर और तेज होना तय है।

10गांवों के पंचों की पंचायती ने लगाया 19लाख का दंड:वसूली के बाद प्रीतिभोज के 4 लाख और मांगे, नहीं देने पर परिवार को समाज से निकाला

सिरोही के मामावली गांव में देवासी समाज के एक परिवार को लड़ाई के मामले में पंचायती ने 19 लाख रुपए का दंड लगाया है।
यह दंड भरने के बाद जब परिवार ने पंचों के प्रीतिभोज का 4 लाख का बिल चुकाने से इनकार किया, तो उन्हें समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। अब यह परिवार पिछले एक महीने से सामाजिक तिरस्कार झेल रहा है। यह मामला देवासी समाज के 2 बच्चों के बीच हुई लड़ाई से जुड़ा है। इस विवाद को सुलझाने के लिए 10 गांवों के पंचों ने एक पंचायती बुलाई।
पंचायती में परिवार पर 19 लाख रुपए का दंड लगाया गया। बताया गया कि बच्चों का यह विवाद सिरोही सदर थाना क्षेत्र में हुआ था, जिस पर पुलिस ने मामूली धाराओं में मामला दर्ज किया था। पंचों ने पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट होकर सरूपगंज थाना क्षेत्र के इशारे गांव में पंचायती आयोजित की। इशारे गांव में हुई थी पंचायती
दंड वसूली के बाद पंचों ने प्रीतिभोज का आयोजन किया। जब पीड़ित परिवार ने प्रीतिभोज के 4 लाख रुपए का भुगतान करने से मना किया, तो पंचों ने परिवार को समाज से बहिष्कृत करने का फैसला सुनाया। पीड़ित परिवार का ‘हुक्का-पानी’ बंद
इस बहिष्कार के तहत परिवार का समाज से “हुक्का-पानी” बंद कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि परिवार के सदस्य न तो समाज के किसी अन्य सदस्य के घर जा सकते हैं और न ही कोई उनके घर आ सकता है। 1 महीने पहले मामला दर्ज
पीड़ित परिवार ने एक महीने पहले पुलिस में मामला दर्ज कराया था। लेकिन पुलिस अब तक जांच का हवाला दे रही है।
वहीं स्थानीय विधायक ओटाराम देवासी भी इस कुरीति को खत्म करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
पीड़ित परिवार अब मुख्यमंत्री से गुहार लगा रहा है कि देवासी समाज में प्रचलित इस कुरीति पर तुरंत रोक लगाई जाए। मामावली गांव के निवासी पीड़ित परिवार के डूंगाराम देवासी ने बताया कि ”बच्चों की लड़ाई पर पंचायती बैठी। 19 लाख का जुर्माना लगाया। फिर प्रीतिभोज का बिल मांगा। हमने नहीं दिया तो हमें समाज से निकाल दिया। एक महीने से हम तिरस्कार झेल रहे हैं। पुलिस में भी शिकायत दी, एक महीना हो गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हम मुख्यमंत्री से मांग करते हैं कि ऐसी कुरीति पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए।”

तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से पेड़ टूटा:ड्राइवर घायल; अवैध बजरी ले जाते समय पुलिस दिखने पर बढ़ाई थी स्पीड

जालोर शहर के कल्याण नगर क्षेत्र में पुलिस को देखकर भाग रहे अवैध बजरी से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली पर करीब 50 साल पुराना नीम का पेड़ गिर गया। इससे ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने घायल को हॉस्पिटल में भर्ती करवाया है। दरअसल, मंगलवार दोपहर पुलिस से बचने के प्रयास में अवैध बजरी से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली के ड्राइवर ने गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी। ट्रैक्टर की ट्रॉली उठाकर सड़क पर बजरी खाली करने की कोशिश की, लेकिन ट्रॉली की चपेट में करीब 50 वर्ष पुराना और डेढ़ फीट मोटा नीम का पेड़ आ गया। पेड़ तने से टूटकर सीधे ट्रैक्टर पर गिर पड़ा, जिससे ड्राइवर नरेश कुमार चौधरी गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों की सूचना पर एंबुलेंस मौके पर पहुंची और घायल ड्राइवर को जालोर के सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब एक बजे दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में अवैध रूप से बजरी भरकर ले जाई जा रही थी। पुलिस वाहन को पीछे आता देखकर दोनों ड्राइवर गलियों से तेज गति में ट्रैक्टर दौड़ाने लगे। इसी दौरान कल्याण नगर में एक ड्राइवर ने चलते ट्रैक्टर की ट्रॉली उठाकर बजरी सड़क पर खाली कर दी, जिससे हादसा हो गया। हादसे में नीम का पेड़ टूटकर ट्रैक्टर पर गिर गया। पेड़ गिरने से बिजली के तार भी टूट गए, जिसके कारण आसपास के कई घरों और कॉलोनियों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। वहीं दूसरा ट्रैक्टर-ट्रॉली ड्राइवर मौके से फरार हो गया। घटना के बाद पुलिस ने सड़क पर फैली बजरी दोबारा ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरवाकर वाहन को थाने पहुंचाया और मामले की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ट्रैक्टर दलपत चौधरी का बताया जा रहा है। पुलिस फरार ट्रैक्टर-ट्रॉली की तलाश के साथ पूरे मामले की जांच कर रही है। देखिए- तस्वीरें

BCCI ने घरेलू-इंटरनेशनल मैचों की टाइटल स्पॉन्सरशिप टेंडर निकाला:IDFC फर्स्ट बैंक का कॉन्ट्रैक्ट अगस्त में खत्म, एसोसिएट पार्टनर के लिए भी बिड मांगी

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट और भारत में खेले जाने वाले इंटरनेशनल मैचों के टाइटल स्पॉन्सरशिप राइट्स के लिए टेंडर जारी किया है। मौजूदा स्पॉन्सर IDFC फर्स्ट बैंक का तीन साल का करार अगस्त 2026 में खत्म हो रहा है। बोर्ड ने एसोसिएट पार्टनर राइट्स के लिए भी आवेदन मांगे हैं। IDFC से पहले मास्टरकार्ड था टाइटल स्पॉन्सर
IDFC से पहले टाइटल स्पॉन्सर का अधिकार मास्टरकार्ड के पास था। उसके बाद पेटीएम के पास था। घरेलू और इंटरनेशनल मैच शामिल चुनी गई कंपनी को भारत में होने वाले पुरुष और महिला टीमों के टेस्ट, वनडे और टीञ20 इंटरनेशनल मैचों के साथ रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, ईरानी कप और जूनियर घरेलू टूर्नामेंटों के टाइटल स्पॉन्सरशिप अधिकार मिलेंगे। 4 अगस्त तक दस्तावेज, 13 अगस्त तक बिड टेंडर पेपर खरीदने के लिए 1 लाख रुपए (GST अलग) की नॉन-रिफंडेबल फीस तय की गई है। टेंडर पेपर खरीदने की अंतिम तारीख 4 अगस्त और बिड जमा करने की आखिरी तारीख 13 अगस्त है। 2023 में IDFC फर्स्ट बैंक से हुई थी डील
IDFC फर्स्ट बैंक ने सितंबर 2023 में BCCI के साथ तीन साल का करार किया था, जिसकी अवधि अगस्त 2026 में पूरी होगी। इसके बाद बोर्ड नए टाइटल स्पॉन्सर का चयन करेगा। एसोसिएट पार्टनर के लिए भी आवेदन
BCCI ने एसोसिएट पार्टनर राइट्स के लिए भी बोली मंगाई है। टेंडर पेपर 14 अगस्त तक खरीदे जा सकेंगे, 16 अगस्त तक स्पष्टीकरण मांगा जा सकेगा और 25 अगस्त तक कोटेशन जमा किए जा सकेंगे। केवल फीस जमा करने से एलिजिबिलिटी नहीं
BCCI ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ टेंडर की फीस जमा करने से कोई कंपनी टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेगी। बोर्ड की सभी शर्तें पूरी करने वाली कंपनियों को ही इसमें शामिल होने की अनुमति मिलेगी।

सैमसंग सर्विस सेंटर में 41.35 लाख की धोखाधड़ी:468 स्पेयर पार्ट्स गायब, स्टोर इंचार्ज ने खाली डिब्बों में छिपा रखे थे; सफाई के दौरान सामने आया फर्जीवाड़ा

जोधपुर के सरदारपुरा स्थित सैमसंग के अधिकृत सर्विस सेंटर मैसर्स नेहल टेक्नो सर्विसेज में 41.35 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि 10 साल से कार्यरत स्टोर इंचार्ज प्रदीप ने 468 स्पेयर पार्ट्स की हेराफेरी कर कंपनी को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचाया। सफाई और स्टॉक की जांच के दौरान कई खाली डिब्बों में स्पेयर पार्ट्स मिलने के बाद गड़बड़ी का खुलासा हुआ। इस संबंध में फर्म के प्रोपराइटर दीक्षांत सोलंकी की शिकायत पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सरदारपुरा पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया गया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। रिपोर्ट में सोलंकी ने बताया कि आरोपी स्टोर इंचार्ज प्रदीप भार्गव पिछले 10 सालों से फर्म में कार्यरत था और अकेला ही डिजिटल रिकॉर्ड का प्रबंधन देखता था। खाली डिब्बों में छिपा रखे थे लाखों के स्पेयर पार्ट्स FIR के मुताबिक, कुछ दिन पहले सैमसंग कंपनी के अधिकारियों ने सर्विस सेंटर का आकस्मिक निरीक्षण किया था। उस समय स्टोर इंचार्ज प्रदीप परिसर में मौजूद नहीं था। अधिकारियों के निर्देश पर जब स्टाफ ने खाली डिब्बों को हटाकर सफाई की, तो उनके होश उड़ गए। खाली डिब्बों के अंदर भारी कीमत के स्पेयर पार्ट्स छुपाकर रखे गए थे। जब इस बारे में पड़ताल की गई, तो पता चला कि करीब 10 महीने पहले इन पार्ट्स को वापस भेजने की रिक्वेस्ट डाली गई थी, लेकिन प्रक्रिया पूरी न होने पर कंपनी ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बावजूद आरोपी ने इन पार्ट्स को वापस सिस्टम या फिजिकल स्टॉक में दर्ज नहीं किया और चोरी की नीयत से छुपा दिया। मामले पर संदेह गहराने पर फर्म संचालक दीक्षांत सोलंकी ने एक सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट को बुलाकर डिजिटल रिकॉर्ड का ऑडिट कराया। ऑडिट में पता चला कि आरोपी प्रदीप भार्गव सिस्टम के ऑनलाइन और ऑफलाइन रिकॉर्ड में एडिट और डिलीट करके लगातार हेरफेर कर रहा था। 2016 से अब तक सैमसंग के 468 असली स्पेयर पार्ट्स गायब मांग और भौतिक जांच के बाद पाया गया कि वर्ष 2016 से अब तक सैमसंग के लगभग 468 असली स्पेयर पार्ट्स गायब हैं, जिनकी कुल कीमत 41 लाख 35 हजार 491 रुपए है। FIR के मुताबिक, आरोपी ही एकमात्र अधिकृत व्यक्ति था, जिसके पास सिस्टम का एक्सेस था और ओटीपी भी उसी के मोबाइल पर आता था। आरोपी ने कर्ज चुकाने के लिए की चोरी फर्म संचालक का आरोप है कि शुरुआत में जब आरोपी से पूछताछ की गई तो उसने रोते हुए अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि पत्नी के जेवर मुथूट फाइनेंस में गिरवी रखे हैं और कर्ज चुकाने के लिए उसने चोरी की। वह 6 में से 5 गायब पार्ट्स अगले दिन लौटा भी लाया और 1 पार्ट की रकम चुकाने का वादा किया। हालांकि, जब पूरे 10 साल का बड़ा फ्रॉड सामने आया, तो आरोपी ने कानूनी कार्रवाई करने पर आत्महत्या की धमकी दी और फरार हो गया।