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सीकर में बारिश से अंडरपास, कॉलोनियां और पटरियां डूबीं:2 किलोमीटर तक 4 फीट पानी भरा, सीवरेज ओवरफ्लो; 2 दिन का अलर्ट

सीकर में आज मानसून की दूसरी अच्छी बारिश हुई। मानसूनी हवा के दोबारा एक्टिव होने के बाद सीकर में रात डेढ़ बजे से सुबह करीब साढ़े सात बजे तक रुक-रुककर बारिश हुई। इससे नवलगढ़ रोड पर 4 फीट तक पानी भर गया। सीकर में अब तक 90 MM यानी करीब 3.5 इंच बारिश दर्ज की गई है। बारिश के कारण नवलगढ़ रोड पर करीब 2 किलोमीटर क्षेत्र में 4 फीट तक पानी भर गया। जलभराव के चलते आम जनजीवन प्रभावित हुआ। सुबह कोचिंग जाने वाले स्टूडेंट्स को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई वाहन पानी में फंसकर बंद हो गए, जबकि लोगों के लिए घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया। बारिश पुलिसकर्मियों और कलेक्ट्रेट कार्मिकों के लिए आफत बन गई। पुलिस लाइन में बने सरकारी क्वार्टरों में बरसात का पानी भर गया। वहीं, सीवरेज ओवरफ्लो होने की वजह से शहर का गंदा पानी भी सरकारी क्वार्टरों में घुस गया। अंडरपास लबालब हो गया। कॉलोनियों में पानी भर गया। सीकर में मानसून की दूसरी बारिश से ही हालात बदतर होने लगे हैं। बारिश से सीकर में जलभराव की स्थिती के PHOTOS…
सीकर में बारिश से जुड़े अपडेट… पिछले 24 घंटे में बारिश के आंकड़े…

कोटपूतली-बहरोड़ में फिर मानसून सक्रिय, लगातार दूसरे दिन बारिश:पिछले 24 घंटे से शहर में धूप नहीं निकली, अगले 5 दिन तक बारिश का अलर्ट

कोटपूतली-बहरोड़ जिले में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। मंगलवार को लगातार दूसरे दिन रुक-रुककर रिमझिम बारिश होती रही। सुबह से ही आसमान घने बादलों से ढका रहा और धूप नहीं निकलने से मौसम पूरे दिन सुहावना बना रहा। दोपहर करीब 12 बजे से मूसलाधार बारिश का दौर जारी हुआ, जो करीब एक घंटे तक चला। लगातार हो रही बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों को उमस से राहत मिली। बारिश का असर सुबह के समय सबसे अधिक स्कूल जाने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों पर देखने को मिला। कई जगह सड़कों पर पानी भरने और फिसलन बढ़ने से लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शहर के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने से स्थानीय नागरिकों की परेशानी भी बढ़ गई। देखें बारिश से जुड़े PHOTOS 36 घंटे में 35 एमएम बारिश दर्ज बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो सोमवार सुबह 17 एमएम और शाम को 11 एमएम वर्षा दर्ज की गई थी। वहीं मंगलवार सुबह तक 7 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। इस तरह पिछले 36 घंटों में कोटपूतली क्षेत्र में कुल 35 एमएम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे जिले में मानसून की गतिविधियां तेज हो गई हैं। खरीफ फसलों के लिए बारिश बनी राहत लगातार हो रही बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। कृषि उपनिदेशक डॉ. रामजी लाल यादव ने बताया कि मौजूदा बारिश खरीफ सीजन की फसलों के लिए काफी लाभदायक है। इससे खेतों में पर्याप्त नमी बनी रहेगी और फसलों की बढ़वार बेहतर होने की उम्मीद है। जलभराव और फिसलन से बढ़ी आवागमन की मुश्किल एक ओर बारिश ने मौसम को खुशनुमा बना दिया है, वहीं दूसरी ओर शहरी इलाकों में जलभराव और सड़कों पर बढ़ी फिसलन लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। कई स्थानों पर वाहन चालकों को सावधानी के साथ सफर करना पड़ रहा है, जबकि पैदल आने-जाने वालों को भी फिसलन की वजह से अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है।

अलवर के कई इलाकों में बूंदाबांदी हुई:मौसम विभाग ने जारी की बिजली गिरने की चेतावनी, अगले पांच दिन येलो अलर्ट

अलवर जिले में सोमवार से मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में हुई बारिश से कई दिनों से पड़ रही उमस और गर्मी से लोगों को बड़ी राहत मिली है। मंगलवार सुबह से ही अलवर शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में घने बादल छाए हुए हैं। कई जगह हल्की बूंदाबांदी और रिमझिम बारिश का दौर जारी है, जबकि कुछ इलाकों में फुहारें पड़ रही हैं। कठूमर में सबसे ज्यादा 44 मिमी बारिश लगातार बारिश के कारण मौसम पूरी तरह सुहावना हो गया है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है। पिछले कई दिनों की तुलना में रात का तापमान भी कम रहा, जिससे मंगलवार सुबह ठंडक का अहसास बना रहा। सोमवार को सबसे अधिक 44 मिमी बारिश कठूमर में दर्ज की गई। इसके अलावा राजगढ़ में 28 मिमी, लक्ष्मणगढ़ में 17 मिमी, रामगढ़ में 14 मिमी, गोविंदगढ़ में 6 मिमी, अलवर शहर और सिलीसेढ़ में 5-5 मिमी, जयसमंद में 4 मिमी, थानागाजी में 2 मिमी तथा मालाखेड़ा और टहला में 1-1 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। सोमवार देर रात भी जिले के कई इलाकों में रुक-रुककर बारिश होती रही। 22 से 26 जुलाई तक गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार मंगलवार को दिनभर आसमान में बादल छाए रहने और जिले के कई क्षेत्रों में भारी बारिश होने की संभावना है। अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। वहीं 22 से 26 जुलाई तक जिले में गरज-चमक के साथ बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है। इस अवधि में अधिकांश दिनों के लिए आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है। लगातार बारिश के चलते तापमान में और गिरावट आएगी तथा 24 और 25 जुलाई को अधिकतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने, पेड़ों के नीचे खड़े नहीं होने और बिजली कड़कने के समय खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है।

कोटा में हुई तेज बारिश, तापमान गिरा:मानसून की एंट्री से अब तक 38% कम बरसात हुई; 2 दिन यलो अलर्ट

कोटा में सुबह रिमझिम बारिश हुई। वहीं दोपहर को तेज बारिश का दौर शुरू हुआ। करीब 20 मिनट तक शहर में तेज बारिश हुई। इससे लोगों को उमस से थोड़ी राहत मिली। वहीं रिमझिम बारिश का दौर अभी जारी है। इस कारण तापमान में 2 डिग्री की गिरावट दर्ज हुई। हल्की बारिश होने से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली। सुबह से आसमान में काली घटाएं छाई हुई हैं। मौसम विभाग ने 2 दिन बारिश का अलर्ट जारी किया है। 38% कम बारिश हुई मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में 20 जुलाई तक 38% कम बारिश हुई है। सामान्यतया जिले में 20 जुलाई तक औसत 236.4 मिमी बारिश होती है। इस सीजन में मानसून की एंट्री होने से अभी तक 146.2 मिमी बारिश हुई है। एक दिन पहले 32.9 डिग्री रहा था अधिकतम तापमान शहर में सोमवार को भी आसमान में बादल छाए रहे। रात तक बारिश नहीं हुई। बादल छाए रहने से तापमान में 1 डिग्री की गिरावट दर्ज हुई। सोमवार को अधिकतम तापमान 32.9 डिग्री व न्यूनतम 28.6 डिग्री दर्ज हुआ। लोग बारिश का इंतजार करते रहे। मौसम विभाग के अनुसार मानसून की टर्फ लाइन अपनी सामान्य स्थिति में है। इससे राज्य के पूर्वी और उत्तर पूर्वी भागों में आगामी दिनों में बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाओं के सक्रिय होने की उम्मीद की जा रही है। मंगलवार को कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में मध्यम और मध्यम से तेज बारिश हो सकती है।

सबसे खतरनाक सांपों पर राजस्थान में होगी रिसर्च:ऑनलाइन मिलेगा स्नेक बाइट का इलाज, हर तरह के जहर को जांचेंगे डॉक्टर

राजस्थान में हर साल सांप के काटने से करीब 2700 लोगों की मौत होती है। पूरे भारत की बात करें तो ये आंकड़ा करीब 60 हजार है। ऐसे मामलों में कई बार पीड़ित के जहर से प्रभावित अंग तक को काटना पड़ जाता है। वहीं इलाज में देरी के कारण जान गंवानी पड़ जाती है। मौत के इन आंकड़ों को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नेशनल स्नेक बाइट एनवेनमिंग प्रोग्राम के तहत पॉइजन इन्फॉर्मेशन सेंटर (PIC) सेंटर बनाए जा रहे हैं। राजस्थान का पहला PIC अजमेर के जवाहरलाल नेहरू (जेएलएन) हॉस्पिटल में बनाया जा रहा है। यहां पूरे प्रदेश के लिए रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा। 24 घंटे एक्सपर्ट मौजूद रहेंगे। प्रदेश के किसी भी जिले में सांप के काटने का केस होने पर ट्रीटमेंट बताकर पीड़ित की जान बचाई जाएगी। जानिए- सरकार के इस पूरे प्रोजेक्ट के बारे में राजस्थान का पहला पॉइजन इन्फॉर्मेशन सेंटर अजमेर में बनेगा केंद्र सरकार ने 6 महीने पहले राजस्थान में पॉइजन इन्फॉर्मेशन सेंटर स्थापित करने की मंजूरी दी थी। इसके लिए अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल का चयन किया गया। अगले दो महीने में इस सेंटर का काम शुरू होने की उम्मीद है। हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के डॉ. मुनेश कुमार को इस प्रोजेक्ट का नोडल अधिकारी बनाया गया है। 5 से 7 साल का डेटा खंगालकर बनेगा राजस्थान का एक्शन प्लान इस प्रोजेक्ट के लिए चिकित्सा विभाग, सीएमएचओ और वन विभाग मिलकर पिछले 5 से 7 साल के स्नेक बाइट के मामलों का डेटा जुटा रहे हैं। डेटा डिस्ट्रिक्ट वाइज निकाला जाएगा, जिससे पता लगेगा कि किस जिले में कितने केस आते हैं। कौन-सी प्रजाति के सांप ज्यादा काटते हैं? मरीज को पहला इलाज कहां मिला? मौत की असली वजह क्या थी? किन मामलों में मरीज का कोई अंग काटना पड़ा। इसी अध्ययन के आधार पर राजस्थान का पहला स्टेट स्नेक बाइट एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा, जिससे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में इलाज, एंटी-वेनम की उपलब्धता और जागरूकता को बेहतर बनाया जा सके। जहरीले सांपों पर होगी रिसर्च राजस्थान में पाए जाने वाले जहरीले सांपों पर रिसर्च की जाएगी। इनकी पहचान, इनके जहर के असर और प्रभावी इलाज पर रिसर्च होगी, ताकि प्रदेश की परिस्थितियों के अनुसार इलाज व्यवस्था को ज्यादा मजबूत बनाया जा सके। हर तरह के पॉइजन की होगी जांच अजमेर का पॉइजन इन्फॉर्मेशन सेंटर केवल सर्पदंश तक सीमित नहीं रहेगा। यहां दवाइयों के ओवरडोज, कीटनाशकों, केमिकल पॉइजनिंग और अन्य विषैले पदार्थों से जुड़े मामलों की भी जांच, रिसर्च और विशेषज्ञ सलाह दी जाएगी। यह सेंटर भविष्य में राजस्थान में टॉक्सिकोलॉजी से जुड़ी सबसे बड़ी विशेषज्ञ इकाई के रूप में विकसित किया जाएगा। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को मिलेगी ट्रेनिंग प्रदेश के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मचारियों को इस सेंटर के माध्यम से नियमित ट्रेनिंग दी जाएगी। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उन्हें सर्पदंश के इलाज के राष्ट्रीय प्रोटोकॉल, एंटी-वेनम के सही उपयोग और आपातकालीन प्रबंधन की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि जिला और उपजिला अस्पतालों में भी मरीजों को तुरंत वैज्ञानिक इलाज मिल सके। नोडल अधिकारी डॉ. मुनेश कुमार के अनुसार, राजस्थान में हर साल करीब 18 हजार केस सांप के काटने के आते हैं। इनमें से 2700 लोगों की मौत हो जाती है। वहीं पूरे भारत में हर साल 20 लाख लोगों को सांप काटते हैं, जिनमें से 60 हजार लोगों की मौत हो जाती है। अन्य राज्यों के अनुभव का भी मिलेगा फायदा केंद्र सरकार इस योजना के तहत देशभर में चरणबद्ध तरीके से पॉइजन इन्फॉर्मेशन सेंटर विकसित कर रही है। दक्षिण भारत के कुछ प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में पहले से विष विज्ञान (टॉक्सिकोलॉजी) और स्नेक बाइट मैनेजमेंट पर काम हो रहा है। अब राजस्थान में इसकी शुरुआत अजमेर से होने जा रही है, जिससे प्रदेश को पहली बार सर्पदंश और अन्य विषाक्त मामलों के लिए समर्पित विशेषज्ञ केंद्र मिलेगा।

डमी कैंडिडेट बैठाकर पटवारी बना, 5 साल बाद गिरफ्तार:5 लाख देकर की थी डील, 9 महीने पहले किया गया था सस्पेंड, अब SOG ने पकड़ा

राजस्थान की 2021 पटवारी भर्ती परीक्षा में अपनी जगह डमी अभ्यर्थी से परीक्षा दिलाकर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले पटवारी को एसओजी ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने बिचौलिए के जरिए 5 लाख रुपए में सौदा कर दूसरे युवक को परीक्षा में बैठाया था। मामले में करीब नौ महीने पहले उसे सस्पेंड कर दिया गया था। अब नौकरी मिलने के करीब पांच साल बाद एसओजी ने पकड़ा है। इस फर्जीवाड़े में शामिल बिचौलिए की भी करीब एक साल पहले दूसरी भर्ती परीक्षा देने जाते समय ट्रेन हादसे में मौत हो चुकी है। पढ़िए … सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम • 2021 में डमी अभ्यर्थी से दिलवाई परीक्षा: एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया – जालोर जिले के सांचौर क्षेत्र के भादरूणा निवासी दिनेश कुमार विश्नोई ने 23 अक्टूबर 2021 को उदयपुर के एक परीक्षा केंद्र पर अपनी जगह डमी अभ्यर्थी को परीक्षा में बैठाया। एडमिट कार्ड पर डमी अभ्यर्थी का फोटो लगाकर और फर्जी हस्ताक्षर कर परीक्षा दिलाई गई। • परीक्षा पास कर बना पटवारी: डमी अभ्यर्थी से परीक्षा दिलवाने के बाद दिनेश कुमार विश्नोई का पटवारी पद पर चयन हो गया। इसके बाद उसकी नियुक्ति सिरोही जिले की रेवदर तहसील के मगरीवाड़ा पटवार हल्के में कर दी गई, जहां वह पटवारी के रूप में कार्यरत था। • गोपनीय शिकायत पर खुला मामला: एसओजी को वर्ष 2024 में गोपनीय शिकायत मिली। इसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच में आरोप सही पाए गए तो इसी मामले में करीब नौ महीने पहले आरोपी को सस्पेंड कर उसका मुख्यालय पिंडवाड़ा एसडीएम कार्यालय कर दिया गया। • पांच साल बाद एसओजी ने किया गिरफ्तार: जांच पूरी होने के बाद एसओजी ने वर्ष 2021 की परीक्षा के करीब पांच साल बाद आरोपी पटवारी दिनेश कुमार विश्नोई को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने खुद की जगह दूसरे युवक से परीक्षा दिलाकर सरकारी नौकरी हासिल की थी। • 5 लाख में हुई थी डील, बिचौलिए की हो चुकी है मौत: जांच में सामने आया कि आरोपी ने अरणाय लियादरा निवासी बिचौलिए चौथाराम विश्नोई के जरिए करड़ा के मीरपुरा निवासी विक्रम पुत्र हेमाराम विश्नोई से संपर्क किया था। डमी अभ्यर्थी से परीक्षा दिलाने के लिए 5 लाख रुपए में सौदा तय हुआ था। एसओजी के अनुसार इस पूरे फर्जीवाड़े में अहम भूमिका निभाने वाले बिचौलिए चौथाराम विश्नोई की करीब एक साल पहले दूसरी भर्ती परीक्षा देने जाते समय ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। — भर्ती में फर्जीवाड़े की ये खबर भी पढ़ें … NEET में डमी बनकर बैठने वाला था MBBS स्टूडेंट:जयपुर में 3 मेडिकल छात्र सहित 5 गिरफ्तार; AI की मदद से फोटो एडिट करते थे जयपुर पुलिस ने NEET में डमी कैंडिडेट बैठाने वाली गैंग के 5 बदमाशों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि डमी बैठने वाला MBBS फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट शामिल है। पूरी खबर पढ़िए

खेत में घायल मिला दुर्लभ हिमालयन ग्रिफन गिद्ध:वन विभाग और कोबरा टीम ने रेस्क्यू किया, हालत नाजुक होने पर जयपुर रेफर करने की तैयारी

अजमेर के घूघरा गांव के पास लाडपुरा रोड पर एक खेत में बड़ा पक्षी होने की सूचना वन विभाग को मिली थी। वन विभाग ने कोबरा टीम के सुखदेव भट्ट को मौके पर भेजा। कोबरा टीम मौके पर पहुंची तो यह पक्षी हिमालय ग्रिफन प्रजाति का गिद्ध निकला। भट्ट ने इसकी जानकारी अजमेर रेंजर टीकमचंद मीणा को दी। भट्ट के मुताबिक यह पक्षी राजेश गुर्जर के खेत में नजर आया था। घायल हालत में होने से उसे शास्त्री नगर स्थित पशु चिकित्सालय लाया गया। यहां डॉ. नीतू अरोड़ा ने उसका उपचार किया। कुछ ही संख्या में बचे हैं ये गिद्ध गिद्ध की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई थी। ऐसे में उसे जयपुर रेफर करने की प्रक्रिया की गई। भट्ट के मुताबिक हिमालयन ग्रिफन गिद्ध की तादाद एशिया में कुछ एक ही रह गई हैं।

मेवाड़ यूनिवर्सिटी का पूर्व डिप्टी एग्जाम कंट्रोलर गिरफ्तार:फर्जी डिग्री मामला में अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद किया सरेंडर

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की हिन्दी स्कूल व्याख्याता भर्ती में फर्जी डिग्री लगाने के चर्चित मामले में मेवाड़ यूनिवर्सिटी के तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक सुशील कुमार शर्मा को गिरफतार किया है। आरोपी ने सोमवार को अपर जिला एवं सेशन न्यायालय में समर्पण कर दिया था। अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने व न्यायालय के आदेश की पालना में किए गए सरेंडर के बाद एसओजी ने उसे गिरफ्तार किया। यूपी के अलीगढ़ निवासी सुशील कुमार शर्मा के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में आयोग की ओर से मुकदमा दर्ज करवाया गया है। शर्मा के न्यायालय में समर्पण की सूचना पर अपर लोक अभियोजक शशि प्रकाश इन्दोरिया ने अनुसंधान अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्याम सुंदर विश्नोई को सूचना दी। एसओजी ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश कर अनुसंधान की आवश्यकता बताते हुए आरोपी शर्मा को अदालत परिसर से गिरफ्तार कर लिया। ये था मामला -अब तक 15 गिरफ्तार RPSC के वरिष्ठ उप सचिव अजय सिंह चौहान की ओर से अजमेर के सिविल लाइन्स पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया गया। इसमें बताया कि RPSC ने 2022 में हिंदी स्कूल लेक्चरर एग्जाम आयोजित करवाया था। इसमें ऑनलाइन फॉर्म एप्लीकेशन में दोनों ने फर्जी डिग्रियां लगाई थी। इसमें मेवाड़ यूनिवर्सिटी गंगरार चित्तौड़गढ़ की MA की डिग्रियां फर्जी थी। 15 अक्टूबर 2022 को हिंदी स्कूल लेक्चरर एग्जाम का आयोजन किया गया था। यह परीक्षा दो परियों में आयोजित हुई। पहली पारी सुबह 9 बजे से साढ़े 10 बजे तक सामान्य ज्ञान और दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक हिंदी विषय की परीक्षा आयोजित की गई थी। भूतेल-साचौर निवासी ब्रह्माकुमारी पुत्री बाबूलाल और वाडा भावड़ी, साचौर निवासी कमला कुमारी पुत्री भारमल विश्नोई ने यह परीक्षा पास कर ली। इसके बाद 14 जून 2023 को रिजल्ट घोषित किया गया था। दोनों ही कैंडिडेट को 31 जुलाई से 14 अगस्त तक डॉक्युमेंट्स वेरिफिकेशन के लिए बुलाया और पुलिस के हवाले किया। मामले की जांच एसओजी को सौंपी गई। अब तक 15 की गिरफ्तारी हो चुकी है। ……….. पढें ये खबर भी… फर्जी डिग्री से नौकरी दिलाने वाला आरोपी गिरफ्तार:लेक्चरर भर्ती- 2022 में नियुक्ति का आरोप,अब तक 15 आरोपी गिरफ्तार राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की प्राध्यापक (हिंदी) स्कूल शिक्षा प्रतियोगी परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्री के जरिए नियुक्ति दिलाने के मामले में सहयोगी आरोपी को गिरफ्तार किया है। SOG ने आरोपी को 13 जुलाई को पकड़ा था, जिसके बाद कोर्ट में पेश कर 17 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पूरी खबर पढें

क्या खत्म हो गया पांचना बांध विवाद?:20 साल लंबे संघर्ष के बाद खुले सात गेट, अब लिफ्ट योजना तय करेगी विवाद का भविष्य, पार्ट-2

पांचना बांध के सातों स्लूस गेट खुलने के साथ ही कमांड एरिया की नहरों में पानी पहुंचा तो किसानों ने इसे सिर्फ सिंचाई की शुरुआत नहीं, बल्कि दो दशक लंबे संघर्ष की पहली जीत बताया। इन गेट का खुलना महज तकनीकी खामी दूर होना नहीं है। करीब दो दशक तक करौली और सवाई माधोपुर के 74 गांव पानी के मुद्दे पर दो हिस्सों में बंटे रहे। एक ओर कमांड एरिया के 35 गांव थे। इनका कहना था कि बांध का निर्माण सिंचाई के लिए हुआ है। ऐसे में नहरों में नियमित जलापूर्ति उनका अधिकार है। दूसरी ओर बांध के आसपास के 39 गांव थे। इन्हें आशंका थी कि यदि लगातार नहरों में पानी छोड़ा गया तो उनके क्षेत्र में भूजल स्तर और पेयजल स्रोत प्रभावित होंगे। यही मतभेद समय के साथ प्रशासनिक विवाद से राजनीतिक मुद्दा बन गया। गुड़ला गांव के बुजुर्ग श्रीपाल गुर्जर कहते हैं- विवाद न हमने बढ़ाया न ही मीणा समाज ने। हमें लड़ाने का काम सरकारों ने किया। पानी खोलने से हमें कोई दिक्कत नहीं है। हमारी बाकी मांगें नवंबर तक पूरी नहीं हुईं तो फिर आंदोलन करेंगे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 30 जून की रात तीन मंत्रियों की मौजूदगी में हुई बैठक में तय हुआ था कि सात दिन के भीतर पांचना बांध की नहरों, गंभीरी नदी और गुड़ला लिफ्ट परियोजना में पानी छोड़ने की कार्ययोजना बनाई जाएगी। साथ ही 2026-27 के बजट में घोषित गुड़ला क्षेत्र के 21 राजस्व गांवों के लिए लिफ्ट सिंचाई योजना को नए स्वरूप में जल्द लागू करने पर सहमति बनी थी। इसके बाद 6 जुलाई को नई व्यवस्था के तहत बांध से पानी छोड़ा गया। एक गेट में तकनीकी खराबी आने से पानी कमांड एरिया के अंतिम गांवों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच सका। इससे नाराज किसानों ने कई स्थानों पर धरना-प्रदर्शन किए और जाम लगाया। बाद में विभाग ने लगातार काम कर 7 जुलाई को जाम गेट को दुरुस्त किया। तकनीकी खामी दूर होने के बाद नहरों में पानी का प्रवाह सामान्य हो गया। राजनीति और ‘श्रेय की लड़ाई’ ने बढ़ाया तनाव पांचना से प्रभावित अधिकांश गांव मीणा और गुर्जर बहुल हैं। ऐसे में आंदोलन धीरे-धीरे सामाजिक और राजनीतिक रंग भी लेने लगा। पूरे घटनाक्रम में विभिन्न नेताओं के बीच श्रेय लेने की होड़ भी दिखाई दी। कमांड एरिया के किसान पूरी क्षमता से पानी छोड़े जाने की मांग पर अड़े रहे, जबकि दूसरी ओर कुछ स्थानों पर विरोध और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियों से तनाव बढ़ गया। आखिरकार कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम और अन्य जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद अधिकांश धरने और जाम समाप्त हुए। 1972 की बाढ़ के बाद बनी थी परियोजना पांचना बांध की परिकल्पना 1972 की भीषण बाढ़ के बाद की गई थी। पूर्वी राजस्थान में जल प्रबंधन को मजबूत करने के उद्देश्य से भद्रावती, अटा, माची, बरखेड़ा और भैंसावत नदी के पानी को रोकने की योजना बनी। 1978-79 में निर्माण शुरू हुआ और 2004-05 तक बांध तैयार हो गया। सिंचाई विभाग के अनुसार परियोजना का कमांड एरिया करीब 9,985 हेक्टेयर निर्धारित किया गया। शुरुआती वर्षों में नहरों के माध्यम से किसानों को सिंचाई का पानी मिला और इससे करौली तथा सवाई माधोपुर के हजारों किसानों को लाभ हुआ। 2006 में शुरू हुआ विरोध, यहीं से बदल गई तस्वीर पांचना बांध से साल 1987 से 2005 तक कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ा जा रहा था। बाद में प्रदेश में गुर्जर आंदोलन के बाद उनकी मांगों पर विचार करते हुए सरकार ने नहरों में पानी छोड़ना बंद कर दिया। स्थिति 2006-07 में बदली, जब बांध के आसपास बसे गांवों ने नहरों में पानी छोड़े जाने का विरोध शुरू किया। इसके कारण साल 2006 से नहरों के अंत में बसे कमांड एरिया के 35 गांवों (मुख्य रूप से मीणा बहुल) के किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा है। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट ने साल 2020 और इसी साल अप्रैल-मई में नहरों में पानी छोड़ने का आदेश दिया। बांध के पास बसे गुर्जर बहुल क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना था कि जलाशय का स्तर घटने से उनके कुएं, ट्यूबवेल और पेयजल स्रोत प्रभावित होंगे। उन्होंने मांग रखी कि पहले लिफ्ट परियोजना के जरिए आसपास के गांवों तक पानी पहुंचाया जाए। इसके बाद सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाए। दूसरी ओर कमांड एरिया के मीणा बहुल गांवों के किसानों का कहना था कि सरकार बांध के मूल उद्देश्य से पीछे हट रही है। उनका तर्क था कि सिंचाई परियोजना बनाकर भी किसानों को लाभ नहीं दिया जा रहा। यहीं से विवाद लगातार गहराता गया। हाईकोर्ट ने आदेश दिए, लेकिन अमल नहीं हुआ विवाद बढ़ने पर कमांड एरिया के किसान राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचे। अदालत ने अलग-अलग अवसरों पर नहरों में पानी छोड़े जाने के निर्देश दिए। इसके बावजूद आदेश जमीन पर लागू नहीं हो सके। प्रशासन हर बार कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका का हवाला देता रहा। स्थानीय विरोध और संभावित टकराव को देखते हुए पानी छोड़ने का निर्णय टाल दिया गया। इससे किसानों में यह धारणा मजबूत होती गई कि समस्या तकनीकी नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक इच्छाशक्ति की है। हाल ही में विधायक रामकेश मीणा व अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश की पालना नहीं होने पर नाराजगी जताई थी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने सरकार से पूछा है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहरों में पानी क्यों नहीं छोड़ा जा रहा है। इस पर सरकार ने अदालती आदेश की पालना के लिए 15 दिन का समय मांगा। कोर्ट ने सरकार को समय देते हुए कहा था कि अगर नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो कलेक्टर और संबंधित अधिकारी 27 जुलाई को कोर्ट में पेश हो जाएं। जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया था। 20 साल पहले शुरू हुआ विवाद क्या सचमुच खत्म हुआ विवाद? हालांकि नहरों में पानी पहुंचने से लंबे संघर्ष का एक अध्याय जरूर समाप्त हुआ है, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं माना जा रहा। बांध क्षेत्र के ग्रामीण अब भी लिफ्ट परियोजना और अन्य वादों के समय पर क्रियान्वयन पर नजर बनाए हुए हैं। युवा नेता हाकम बैंसला कहते हैं- हमारे संघर्ष का परिणाम अब दिख रहा है। अगर सरकार तय समय में वादे पूरे कर देगी तो विवाद खत्म हो जाएगा। जब नेता सत्ता में थे तब मुद्दा नहीं उठाया, विपक्ष में आए तो आंदोलन का हिस्सा बन गए। इस मुद्दे पर सिर्फ वोटों की राजनीति हुई। वहीं ग्राम उत्थान समिति के अध्यक्ष रघुवीर मीणा का कहना है कि भविष्य में यदि स्लूस गेटों का मोटरीकरण कर उन्हें स्वचालित प्रणाली से संचालित किया जाए तो जल प्रबंधन और अधिक प्रभावी हो सकेगा। … यह खबर भी पढ़ें… राजस्थान में 20 साल बाद खत्म हुआ पानी का विवाद:लोग बोले- राजनीति ने लड़ाई बड़ी बनाई, नेता भड़काते हैं; ग्रामीणों के बीच पहुंची भास्कर टीम राजस्थान की 5 नदियों से मिलकर बना पांचना बांध, जिसके पानी के लिए 74 गांवों के बीच 20 साल लंबा संघर्ष चला। जब भी पानी छोड़ने की बारी आती 39 गांव उसके हक में तो 35 गांव विरोध में खड़े हो जाते। एक दूसरे के खिलाफ धरने पर बैठ जाते, लेकिन अब ये ‘जंग’ खत्म हो गई है। (पूरी खबर पढ़ें)

उदयपुर में दोपहर बाद रिमझिम बारिश:खंड वर्षा हो रही, मौसम ठंडा हो गया, इस पूरे सप्ताह बरसात की संभावना

उदयपुर में मंगलवार दोपहर बाद मौसम बदला और शहर में बारिश शुरू हुई। शुरूआत में हल्की बारिश थी और उसके बाद करीब 15 मिनट तक रिमझिम बारिश रही। इसके बाद शाम करीब साढ़े सात बजे तक एक बूंद नहीं गिरी। करीब तीन बजे से शहर के विभिन्न हिस्सों में हल्की बारिश का दौर शुरू हुआ, जिससे गर्मी और उमस से लोगों को कुछ राहत मिली। कलेक्ट्री रोड, देहलीगेट, कोर्ट चौराहा, चेतक सर्कल, अस्पताल रोड सहित आसपास के क्षेत्रों में रिमझिम बारिश हुई गई। बारिश के साथ आसमान में बादल छाए रहे और ठंडी हवाएं चलने से मौसम सुहावना हो गया। हालांकि बारिश का दौर ज्यादा देर तक नहीं चला, लेकिन नमी छा गई और लोगों ने राहत महसूस की। पिछले कई दिनों से शहर में तेज बारिश का इंतजार किया जा रहा है। तापमान गिरा सोमवार शाम शहर के कुछ क्षेत्रों में खंड वर्षा होने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम केंद्र के अनुसार सोमवार को उदयपुर का अधिकतम तापमान 29.7 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बारिश के बाद लोगों को गर्मी से कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन वातावरण में उमस अब भी बनी हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। यदि मानसून सक्रिय होता है तो अच्छी बारिश के साथ तापमान में और गिरावट आएगी तथा गर्मी और उमस से राहत मिलने की संभावना है।
इधर, मौसम विशेषज्ञ डॉ. आर.एस. देवड़ा के अनुसार उदयपुर सहित दक्षिणी राजस्थान में पूरे सप्ताह आसमान में बादल छाए रहने और रुक-रुककर हल्की खंड वर्षा होने के आसार हैं। इस दौरान तापमान में हल्की कमी बनी रहेगी, हालांकि हवा में नमी अधिक रहने से उमस का असर पूरी तरह खत्म होने की संभावना फिलहाल नहीं है। उदयपुर में जलाशयों का जलस्तर (आंकड़े मीटर में)
पिछले सात दिनों का उदयपुर का तापमान (डिग्री से.)