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स्कूल के बाहर खड़ी-स्कूटी से 20 सेकंड में मोबाइल चोरी:डिक्की लॉक करना भूल गई थी छात्रा; पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी

जोधपुर में एक बदमाश स्कूल के बाहर खड़ी स्कूटी से मोबाइल चुराकर फरार हो गया। बदमाश ने महज 20 सेकंड में इस वारदात को अंजाम दिया। चोरी की यह पूरी वारदात CCTV कैमरे में कैद हो गई है, जिसका फुटेज भी सामने आया है। फुटेज में बदमाश इधर-उधर देखते हुए स्कूटी के पास आता है और फिर मोबाइल उठाकर तुरंत फरार हो जाता है। रातानाडा थाना पुलिस शिकायत मिलने के बाद आरोपी की तलाश में जुट गई है। पीड़ित भारत जैन ने रातानाडा थाने में इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी 11वीं कक्षा में सेंट पैट्रिक विद्या भवन स्कूल में पढ़ती है। हमेशा की तरह शनिवार को भी वह स्कूटी से स्कूल गई थी। संभवतः वह स्कूटी की डिक्की लॉक करना भूल गई थी और डिक्की के अंदर ही उसका मोबाइल रखा हुआ था। जब वह दोपहर 11:30 बजे स्कूल की छुट्टी के बाद वापस लौटी, तो उसे डिक्की से मोबाइल गायब मिला। इसके बाद जब स्कूल के सीसीटीवी फुटेज चेक किए गए, तब पता चला कि सुबह करीब 10:30 बजे एक चोर डिक्की खोलकर मोबाइल चुरा ले गया था। मैंने रातानाडा थाना पहुंचकर रिपोर्ट दी। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस फुटेज के आधार पर चोर का पता करने में जुटी हुई है। पहले देखिए, चोरी से जुड़ी 2 PHOTOS…

हत्या के आरोपियों का सिर मुंडवाकर फटे कपड़ों में घुमाया:लंगड़ाते हुए चले, हत्यारों को व्यापारी के घर लेकर पहुंची, क्राइम सीन रीक्रिएट कराया

अलवर शहर में बुजुर्ग व्यापारी की हत्या के दोनों आरोपियों की पुलिस ने परेड निकाली। दोनों हत्यारे फटे कपड़ों में लंगड़ाते हुए चल रहे थे और सिर मुंडा हुआ था। पुलिस रविवार सुबह दोनों आरोपियों को घटनास्थल पर लेकर गई और वारदात का सीन रीक्रिएट कराया। आरोपियों को देखने के लिए भीड़ जमा हो गई। इस दौरान लोगों ने “अलवर पुलिस जिंदाबाद” के नारे लगाए और आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। दरअसल, बुजुर्ग दिनेश अग्रवाल (80) अलवर नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन अजय अग्रवाल के मामा और पूर्व CMHO डॉ. सुबोध अग्रवाल के चचेरे भाई थे। अजय अग्रवाल साल 2023 में कांग्रेस के टिकट पर अलवर शहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। अब वे कांग्रेस में नहीं हैं। देखिए पुलिस की कार्रवाई के PHOTOS… पुलिस ने घटनास्थल पर सीन रीक्रिएट किया कोतवाली थाना प्रभारी रमेश सैनी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ कर यह जाना गया कि वे किस रास्ते से घर में घुसे, हत्या और लूट की वारदात कैसे की और बाद में किस रास्ते से फरार हुए। पुलिस इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि दो नाबालिगों को निरुद्ध किया गया है। एक अन्य आरोपी अब भी फरार है, जिसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। जांच में सामने आया है कि बदमाशों ने 9 जुलाई की रात वारदात को अंजाम दिया था। प्रारंभिक जांच में हत्या के बाद घर से हजारों रुपए की लूट की बात भी सामने आई है। पुलिस फरार आरोपी की तलाश और लूटे गए सामान की बरामदगी में जुटी हुई है। बेटे के घर नहीं पहुंचे तो किया फोन बहू रीमा अग्रवाल ने बताया- मेरे ससुर दिनेश चंद अग्रवाल खदाना मोहल्ले वाले मकान में अकेले रहते थे। वे स्वाभिमानी थे और बुढ़ापे में भी अपना सारा काम खुद ही करते थे। वे रोजाना रात का खाना खाने के लिए खदाना मोहल्ले से एक किलोमीटर दूर स्कीम नंबर 4 में हमारे घर आते थे। जब गुरुवार (9 जुलाई) शाम वे खाना खाने नहीं पहुंचे तो करीब 7:30 बजे मेरे पति विकास ने उन्हें फोन किया। उनका लैंडलाइन नंबर बंद आया। इसके बाद मेरे पति वहां पहुंचे तो मेरे ससुर कमरे में चारपाई पर मृत पड़े मिले। बदमाशों ने उनके हाथ, पैर और मुंह को कपड़ों से कसकर बांध रखा था, ताकि वे चिल्ला नहीं सकें। घर की अलमारियां टूटी हुई थीं और सारा सामान बिखरा पड़ा था। — ये खबर भी पढ़ें… जीएसटी अफसर के घर को लूटने वाले लंगड़ाते हुए चले:पुलिस ने परेड निकाली, सीन रीक्रिएट कराया; शक नहीं हो इसलिए 5-6 बार कपड़े बदले अलवर की शालीमार सोसायटी में जीएसटी असिस्टेंट कमिश्नर ओमप्रकाश के घर हुई लूट के मामले में पुलिस ने चार बदमाशों को शनिवार शाम गिरफ्तार कर लिया। पुलिस आरोपियों को मौका तस्दीक कराने के लिए घटना स्थल यानी जीएसटी अधिकारी के घर पर लेकर पहुंची। चारों आरोपी लंगड़ाते हुए चले। (पढ़िए पूरी खबर)

तालाब में नहाते समय 6 डूबे, 4 भाई-बहनों की मौत:परिवार में अब केवल माता-पिता बचे; छुट्टियों के लिए आई भांजी भी हादसे का शिकार

डूंगरपुर के बड़ी गांव में वात्रक तालाब में नहाने पहुंचे 4 भाई-बहनों की डूबने से मौत हो गई। इनमें 3 सगे और एक उनकी फुफेरी बहन है। वहीं, 2 बच्चों को उनमें से एक के पिता ने बचा लिया। मृतकों में से एक लड़की गुजरात के पालनुपर की रहने वाली है। जबकि, तीन बड़ी गांव के ही निवासी हैं। तीनों की मौत के बाद परिवार में अब केवल माता-पिता बचे हैं। घटना रविवार सुबह 10 बजे की है। नहाते समय तालाब की गहराई में चले गए थे धम्बोला थाना पुलिस के अनुसार हादसे में बड़ी गांव के रहने वाले बाबूसिंह डामोर की बड़ी बेटी हिना (24), बेटा प्रतीक (20), छोटी बेटी इशिता (15) की मौत हो गई। बच्चों की फुफेरी बहन रौनक (20) पुत्री गौतम भाई परमार निवासी पालनपुर ने भी दम तोड़ दिया। हादसे में राजवीर पुत्र कोहरा डामोर, जयसिंह पुत्र सुरेश डामोर को बचा लिया। दोनों घायल सीमलवाड़ा हॉस्पिटल में एडमिट हैं। 11 साल का जयसिंह नहाते समय गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। हिना, प्रतीक, रौनक और इशिता उसे बचाने के लिए गए। सभी ने एक दूसरे को पकड़ लिया। सभी पानी में डूबने लगे। बच्चों के चिल्लाने पर सबसे पहले जयसिंह के पिता सुरेश दौड़कर आए। बेटे जयसिंह को बाहर निकाला। फिर राजवीर को बाहर निकाला। तीसरी बार फिर एनिकट में कूदे लेकिन तब तक 4 भाई बहन डूब गए थे। अब देखिए- हादसे जुड़ी PHOTOS… परिवार के सभी बच्चों की मौत किसान बाबूसिंह डामोर के 2 बेटियां और एक बेटा ही थे। अब परिवार में कोई बच्चा नहीं है। बड़ी बेटी हिना गांव के ही एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी। जबकि भाई प्रतीक ने 12वीं कक्षा पास करने के बाद फर्स्ट ईयर में एडमिशन के लिए आवेदन किया था। सबसे छोटी बहन इशिता 11वीं कक्षा में पढ़ती थी। डामोर की भांजी रौनक 4 दिन पहले ही मामा के घर आई थी। वो भी मामा के बच्चों के साथ तालाब में नहाते हुए हादसे का शिकार हो गई। रौनक के परिवार के लोग सूचना के बाद पालनपुर से रवाना हो गए। पिता ने बेटे और उसके साथी को बचाया हादसे में बचे दो बच्चों जयसिंह और राजवीर को जयसिंह के पिता ने बचा लिया। जानकारी के अनुसार जयसिंह के पिता सुरेश सिंह तालाब के पास ही थे। वे बच्चों का शोर सुनकर मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने बड़ी मुश्किल से अपने बेटे और राजवीर को पानी से बाहर खींचा। वे बाकी 4 और बच्चों को बचाते उससे पहले ही वे डूब गए। …. ये खबर भी पढ़िए… 8 फीट गहरे टैंक में डूबने से 2-मासूमों की मौत:घर के पास खेलते समय पानी में गिरीं, चप्पलों से हुई पहचान करीब 2 महीने पहले जयपुर के शिप्रापथ इलाके में दो मासूम बच्चियों की पानी के टैंक में डूबने से मौत हो गई थी। घटना जगन्नाथपुरी सेकेंड क्षेत्र की थी। पूरी खबर पढ़िए… अलवर में 10 फीट गहरे हौद में डूबे दो दोस्त,मौत:’बचाओ-बचाओ’ चिल्लाते रहे, नहाने के लिए उतरे थे, बाहर खड़े दोस्तों ने ग्रामीणों को बुलाया अलवर में खेत में बने 10 फीट गहरे फार्म पॉन्ड (हौद) में डूबने से दो मासूम दोस्तों की दर्दनाक मौत हो गई। हौद में डूबते ही दोनों बच्चे ‘बचाओ-बचाओ’ चिल्लाने लगे, जबकि बाहर खड़े उनके 4 अन्य साथी ग्रामीणों को बुलाने के लिए दौड़े। ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और उनकी सांसें थम चुकी थी। पूरी खबर पढ़िए…

कोटा-यूनिवर्सिटी में 10 करोड़ का चंबल प्रोजेक्ट तैयार:उद्घाटन के इंतजार में 1500 छात्र खारा पानी पीने को मजबूर, टेस्टिंग हुई सफल,पाइपलाइन बिछ गई

कोटा यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार चंबल के मीठे पानी को कैंपस तक लाने का 10 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है। पानी की विशाल टंकी बनकर तैयार है, पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है और सिस्टम की टेस्टिंग भी पूरी तरह सफल रही है। लेकिन इस गर्मी और उमस के बीच यूनिवर्सिटी के छात्रों को यह पानी सिर्फ इसलिए नसीब नहीं हो रहा है, क्योंकि सिस्टम को अब तक एक ‘उद्घाटन की तारीख’ का इंतजार है। यूनिवर्सिटी कैंपस में बनाई गई इस पानी की टंकी का उद्घाटन पहले 9 जुलाई को होना संभावित था, लेकिन किन्हीं अज्ञात कारणों से यह कार्यक्रम टल गया। आज भी यूनिवर्सिटी के करीब 1500 नियमित छात्र में बोरवेल का खारा पानी पीने को मजबूर हैं। कोटा यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 2003 में हुई थी। स्थापना के बाद से ही कैंपस में मीठे पानी की किल्लत बनी हुई है। छात्रों की मांग है कि उद्घाटन के वीआईपी कल्चर को छोड़कर तुरंत पानी की सप्लाई शुरू की जाए।
पथरीली जमीन का खारा पानी और 10 करोड़ का चंबल प्रोजेक्ट कोटा यूनिवर्सिटी में कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ और सवाई माधोपुर के करीब 213 से अधिक कॉलेज जुड़े हैं, जिनमें नामांकित छात्रों की कुल संख्या 3 लाख से अधिक है। यूनिवर्सिटी कैंपस की जमीन पथरीली होने के कारण यहां का ग्राउंड वॉटर (भूजल) बेहद खराब और खारा है, जिससे कैंपस के पेड़-पौधे तक सूख जाते हैं। समस्या के स्थायी समाधान के लिए अकेलगढ़ वाटर फिल्टर प्लांट से यूनिवर्सिटी कैंपस तक पानी पहुंचाने के लिए 10 करोड़ रुपए से अधिक का बजट मंजूर किया गया था। पीएचईडी (PHED) और यूनिवर्सिटी के आपसी तालमेल से अब यह काम पूरा हो चुका है। मुख्य ओवरहेड टैंक (पानी की टंकी) बनकर तैयार है, डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है और पानी का प्रेशर व लीकेज जांचने के लिए टेस्टिंग का काम भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। आगामी सप्ताह में उद्घाटन की पूरी उम्मीद यूनिवर्सिटी के कुलगुरू प्रो. बी.पी. सारस्वत के अनुसार, 23 साल के लंबे इंतजार के बाद यूनिवर्सिटी को चंबल का मीठा पानी मिलने जा रहा है। पाइपलाइन बिछने के बाद उसकी टेस्टिंग और चेकिंग का काम भी सफलतापूर्वक कर लिया गया है। पहले इसका उद्घाटन 9 जुलाई को होना संभावित था, लेकिन कुछ कारणों से यह नहीं हो सका, अब आगामी सप्ताह में इसके उद्घाटन की पूरी उम्मीद है। छात्रों को नलकूप का पानी, स्टाफ के लिए रोज आते हैं 100 कैंपर हालांकि, इस उद्घाटन के इंतजार के बीच कैंपस के भीतर पानी को लेकर एक ‘दोहरा सिस्टम’ चल रहा है। छात्रों के लिए लगे वॉटर कूलर्स में आज भी नलकूप (बोरिंग) का खारा पानी आ रहा है। वहीं दूसरी तरफ, यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और स्टाफ के लिए रोज बाहर से 100 से अधिक पानी के कैंपर मंगवाए जाते हैं। दोपहर होते-होते ये कैंपर भी खत्म हो जाते हैं, जिसके बाद स्टाफ को भी पानी के लिए परेशान होना पड़ता है।

वेस्ट मोटी ऊन से बना रहे लेडीज-पर्स और माउस पैड:टोंक में वैज्ञानिक ने 10 साल रिसर्च की, ऑफिस फाइल और ब्लेजर भी तैयार किए

एक समय जो मोटी ऊन किसानों के लिए बेकार मानी जाती थी। जिस मोटी ऊन को बेकार समझकर किसान फेंक दिया करते थे या फिर औने-पौने दामों में बेच दिया करते थे। वहीं अब फैशन और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स का हिस्सा बन रही है। भेड़ की मोटी ऊन अब सिर्फ नमदा या सस्ते हस्तशिल्प तक सीमित नहीं रही है। आधुनिक टेक्सटाइल तकनीक ने इसकी तस्वीर बदल दी है। अब इन मोटी ऊन से अब लेडीज पर्स, माउस पैड, ऑफिस फाइल, ब्लेजर, नेहरु जैकेट, रजाई और जैवअपघटित पौध बैग जैसी चीजें तैयार की जा रही है। यह उपलब्धि टोंक के मालपुरा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अधीन केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI), अविकानगर (मालपुरा) के वस्त्र निर्माण एवं वस्त्र रसायन विभाग (TMTC) के वैज्ञानिकों ने करीब एक दशक के अनुसंधान के बाद हासिल की है। ऐसे आया पहली बार आइडिया डॉ. सिको जोस ने बताया- भेड़ के मांस की मांग लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही ऊन का उत्पादन भी दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। हालांकि, अधिकांश ऊन मोटे किस्म की होती है, जिसका अब तक पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा था। इसके कारण भेड़पालकों को अपनी ऊन का उचित मूल्य भी नहीं मिल पाता था। उन्होंने बताया- इसी स्थिति को देखते हुए मोटी ऊन के बेहतर उपयोग के लिए बुनियादी अनुसंधान की आवश्यकता महसूस हुई। इसके बाद टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग एवं टेक्सटाइल केमिस्ट्री डिवीजन ने मोटी ऊन को मूल्य संवर्धित उत्पादोंं में बदलने के उद्देश्य से पिछले एक दशक में विभिन्न शोध एवं प्रयोग (रिसर्च एक्सपेरिमेंट) शुरू किए। मोटी ऊन की नॉन-बोवन शीट तैयार की करीब दस महीने पहले संस्थान में स्थापित लगभग ढाई करोड़ रुपए की आधुनिक मशीन की मदद से मोटी ऊन की नॉन-बोवन शीट तैयार की गई, जिसके आधार पर कई उपयोगी उत्पाद विकसित किए गए हैं। इनमें से दो उत्पादों की तकनीक महाराष्ट्र की एक निजी फर्म को हस्तांतरित (Technology Transfer) भी की जा चुकी है। इस उपलब्धि से भविष्य में मोटी ऊन की मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे भेड़पालकों को उनकी ऊन का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। इस अनुसंधान में विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सिको जोस तथा वैज्ञानिक डॉ. विनोद कदम की अहम भूमिका रही।
डेढ़ दर्जन से अधिक वस्तुएं तैयार करने की तकनीक विकसित तीनों वैज्ञानिकों ने लगातार प्रयोग कर मोटी ऊन को आधुनिक टेक्सटाइल तकनीकों के माध्यम से उपयोगी उत्पादों हैंड बैग, माउस पैड,ऑफिस फाइल बैग, रजाई, कंबल, पौधों के जैव अपघटित बैग, विभिन्न प्रकार के ऊनी उत्पाद सहित डेढ़ दर्जन से अधिक वस्तुएंं तैयार करने की सफल तकनीक विकसित की। कंपोजिट निर्माण तकनीकों का उपयोग डॉ. जोस ने बताया- इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यवस्थित रणनीति अपनाई गई। इसके तहत फाइबर संशोधन (Fiber Modification) और कंपोजिट निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया। मोटी ऊन पर नेचुरल रबर लेटैक्स, जैवअपघटनीय (Biodegradable) पॉलीमर और पोलीयूरेथेन की कोटिंग कर उसके लचीलेपन, टिकाऊपन, जल प्रतिरोधक क्षमता तथा सतह के स्पर्श अनुभव में उल्लेखनीय सुधार किया गया। इसके साथ ही कच्चे माल का ग्रेडिंग और प्रसंस्करण की प्रक्रियाओं का मानकीकरण किया गया, ताकि तैयार उत्पादोंं की गुणवत्ता एक समान बनी रहे। साथ ही, डॉ. सिको जोस ने बताया- आईसीएआर केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (ICAR-CSWRI), अविकानगर में कम कीमत वाली मोटी ऊन से रजाई तैयार की जा रही है। सामान्यतः इस प्रकार की मोटी ऊन कपड़ा निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती, लेकिन संस्थान ने इसे उपयोगी उत्पाद में बदलने की तकनीक विकसित की है। मोटी ऊन से तैयार हो रहे जैवअपघटित पौध बैग डॉ. सिको जोस ने बताया- आईसीएआर-सीएसडब्ल्यूआरआई ने प्लास्टिक नर्सरी बैग के सतत (सस्टेनेबल) विकल्प के रूप में मोटी ऊन से जैवअपघटित (Biodegradable) पौध बैग भी तैयार किए हैं। इन बैगों के निर्माण की प्रक्रिया मोटी ऊन के रेशों की सफाई और उन्हें खोलने से शुरू होती है। इसके बाद निडल-पंच (Needle Punch) तकनीक की सहायता से नॉन-वोवन ऊनी शीट तैयार की जाती है। फिर इस शीट को नर्सरी और बागवानी की आवश्यकता के अनुसार काटकर खुले मुंह वाले बैग के आकार में सिल दिया जाता है। उद्योग को बेची दो उत्पादों की तकनीक संस्थान ने मोटी ऊन से तैयार रजाई और नर्सरी पौध बैग बनाने की तकनीक महाराष्ट्र की एक निजी फर्म को गैर-एकाधिकार लाइसेंस (Non-exclusive License) के माध्यम से हस्तांतरित कर दी है। अब यह फर्म बड़े स्तर पर इन उत्पादोंं का उत्पादन कर बाजार में उतारेगी। इससे मोटी ऊन की मांग बढ़ेगी। मोटी ऊन से तैयार किए जाने वाले उत्पादोंं में आवश्यकता के अनुसार लगभग 20 से 30 प्रतिशत प्राकृतिक रबर लेटैक्स का उपयोग किया जाता है। इससे ऊनी रेशों की मजबूती बढ़ती है और तैयार उत्पाद अधिक टिकाऊ बनते हैं। टेक्सटाइल तकनीकों के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने कहा- डॉ. सिको जोस की यह सफलता पूरे संस्थान के लिए गौरव का विषय है। यह संस्थान वस्त्र निर्माण एवं वस्त्र रसायन विभाग पिछले कई वर्षों से ऊन अनुसंधान और आधुनिक टेक्सटाइल तकनीकों के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। खासकर मोटी ऊन को काफी उपयोगी बना दिया है। मोटी ऊन चुनौती लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बनी संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ. अमरसिंह मीना ने बताया- केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान का अंतरराष्ट्रीय पहचान पर उत्कृष्ट प्रदर्शन का लंबा इतिहास रहा है। इससे पहले भी संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर, डॉ. सिको जोस तथा कई अन्य वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट रिसर्च कार्यों के लिए विश्व की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक रैंकिंग में स्थान मिल चुका है। अविकानगर संस्थान केवल राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कृषि एवं ऊन अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर चुका है। भेड़ पालकों द्वार मोटी ऊन को व्यर्थ मानकर फेंकते है, यह अब उपयोगी बनती जा रही है। 30 रुपए से 300 रुपए किलो बिकती है ऊन ऊन तीन किस्म की होती है। मोटी, मध्यम और सबसे बारीक। अभी सबसे बारीक (सबसे कम मोटी) ऊन करीब 300 रुपए किलो, मध्यम मोटाई की उन करीब 150 रुपए प्रतिकिलो और सबसे मोटी ऊन 30 से 40 रुपए मिलती है। लागत और बाजार तक पहुंचने का सफर डॉ. सिको जोस ने बताया- मोटे ऊनी रेशों का खुरदरापन, कड़ापन और चुभने वाला स्वभाव इनके उपयोग में सबसे बड़ी बाधा है। यही कारण है कि इनका कपड़ा और अन्य प्रीमियम उपभोक्ता उत्पादों के निर्माण में सीधे तौर पर उपयोग सीमित रहा है। उन्होंने बताया कि प्रसंस्करण के दौरान मोटी ऊन के साथ कई तकनीकी चुनौतियां सामने आती हैं। इनमें रेशों की कम एकजुटता (Cohesion), अत्यधिक रेशों का झड़ना और चिकनी सतह तैयार करने में कठिनाई होती है। इसके अलावा, उपभोक्ता भी मोटी ऊन से बने उत्पादोंं को महीन ऊन के उत्पादोंं की तुलना में कम गुणवत्ता वाला मानते हैं। डॉ. जोस के अनुसार, मोटी ऊन से बने उत्पादोंं के विकास और व्यावसायीकरण में तकनीकी, आर्थिक और बाजार से जुड़ी अनेक चुनौतियां रही हैं। मोटी ऊन के गुणों और उसके उपयोग के फायदों के बारे में लोगों में पर्याप्त जानकारी नहीं होने के कारण भी इसकी मांग सीमित रही। वहीं, कम कीमत वाले सिंथेटिक रेशों और आयातित उत्पादोंं से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा भी एक बड़ी चुनौती रही, क्योंकि वे कम लागत में समान स्पर्श का अनुभव प्रदान करते हैं।

एयरफोर्स जवान का हाथ तोड़ा, कुल्हाड़ी से सिर फोड़ा:सगे भतीजों और उसके साथियों ने हमला बोला, छोटे भाई को कैंपर गाड़ी से टक्कर मारी

जमीन पर अवैध कब्जे और तारबंदी हटाने को लेकर सगे भतीजों ने एयर फोर्स जवान भागाराम (47) और उनके छोटे भाई ओम प्रकाश (39) पर हमला बोल दिया। दोनों भाइयों को कुल्हाड़ी, सरियों और लाठियों से पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। यह घटना जोधपुर के विवेक विहार थाना क्षेत्र के गुढ़ा विश्नोइयां (मंगल नगर) की है। गंभीर रूप से घायल एयरफोर्स जवान भागाराम को मिलिट्री हॉस्पिटल (MH) में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। इस मामले में पुलिस ने 7 नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। रविवार दोपहर तक किसी की गिरफ्तारी भी नहीं हुई थी। तारबंदी उखाड़ने का वीडियो बनाया तो चढ़ा दी कैंपर गाड़ी ओमप्रकाश (39) पुत्र घेवरराम विश्नोई ने शनिवार शाम करीब साढ़े चार बजे विवेक विहार थाने में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि यह विवाद उनके सगे भाई रामसिंह के बेटों से चल रहा है। 10 जुलाई की सुबह करीब 10:30 बजे आरोपी जेसीबी (JCB) और बजरी से भरा डम्पर लेकर जबरन उनके खेत में घुसे और वहां की गई तारबंदी को उखाड़ने लगे। जब ओमप्रकाश ने इस अवैध कब्जे का अपने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया, तो उनका सगा भतीजा अशोक भड़क गया। अशोक ने जान से मारने की नीयत से अपनी सफेद रंग की कैंपर गाड़ी ओमप्रकाश के पीछे दौड़ा दी और जोरदार टक्कर मारकर उन्हें जमीन पर गिरा दिया। ओमप्रकाश के गिरते ही आरोपी राकेश, मनीष और महेंद्र ने लोहे के पाइप और लाठियों से उनके सिर और शरीर पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए। बीच-बचाव करने आए एयरफोर्स जवान के सिर पर मारी कुल्हाड़ी ओमप्रकाश की चीख-पुकार सुनकर उनकी पत्नी हेमा और बड़े भाई (एयरफोर्स जवान) भागाराम दौड़कर मौके पर पहुंचे। भागाराम ने जब अपने भाई को बचाने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने उन पर भी रहम नहीं खाया। आरोपी पिंटू और उनके साथ आई एक महिला ने जान से मारने की नीयत से भागाराम के सिर पर कुल्हाड़ी से सीधा वार कर दिया। इसी बीच महेंद्र ने लाठी और अशोक ने लोहे की रॉड से हमला बोल दिया। सिर पर होने वाले वार को रोकने के लिए जब जवान ने अपना हाथ आगे किया, तो रॉड के भारी प्रहार से उनका हाथ फ्रैक्चर हो गया। आरोपी दोनों भाइयों को मरा हुआ समझकर, उनका मोबाइल लेकर मौके से फरार हो गए। पुलिस पर गंभीर आरोप इस पूरे मामले में पीड़ित परिवार ने विवेक विहार थाना पुलिस की मिलीभगत और ढिलाई पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ओमप्रकाश ने बताया कि हमलावर (भतीजे अशोक व मनीष) आदतन अपराधी प्रवृत्ति के हैं और उनकी ऊंची राजनीतिक जान-पहचान है। इस घटना से पहले भी पुलिस को शिकायत दी गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो गए। अस्पताल में दे रहे धमकी पीड़ित पक्ष का आरोप है कि अब जब जवान अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है, तब उन्हें थाने के भीतर से ही फोन कर धमकाया जा रहा है। आरोपियों के रसूखदार मददगार कह रहे हैं कि राजीनामा कर लो, नहीं तो तुम्हारे खिलाफ महिलाओं से छेड़छाड़ का झूठा मामला दर्ज करवाकर पूरी जिंदगी जेल में सड़वा देंगे। गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेक विहार थाना पुलिस ने आरोपी अशोक, मनीष, पिंटू, महेंद्र और राकेश उर्फ विकास सहित 2 महिलाओं के खिलाफ मारपीट करने, तोड़फोड़ और दंगे करने जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। मामले की जांच एएसआई (ASI) भरतलाल को सौंपी गई है। घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। पिछले साल भी हुआ था विवाद जांच अधिकारी एएसआई भरत लाल मीणा के मुताबिक, जिस जमीन को लेकर यह खूनी संघर्ष हुआ, उस पर आरोपी पक्ष (अशोक) ने कोर्ट से यथास्थिति (स्टे) ले रखा है। कोर्ट का स्टे होने के बावजूद दूसरा पक्ष (ओमप्रकाश, जिसने थाने में रिपोर्ट दी है) उस जमीन पर गया और उसने वहां खेती करने की कोशिश की। इसी बात को लेकर दोनों पक्ष आपस में भिड़ गए। उनके बीच लाठी-डंडे चले। जानलेवा हमला हो गया। यह जमीन का विवाद नया नहीं है। पिछले साल भी इस जमीन पर दोनों पक्षों के बीच भारी विवाद हुआ था। पुलिस की सफाई- आरोप निराधार पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए राजनीतिक दबाव और रसूखदारों को बचाने के आरोपों पर पुलिस ने सफाई दी है। जांच अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पुलिस निष्पक्षता से काम कर रही है। बिना देर किए मुकदमा दर्ज किया ओमप्रकाश की ओर से शनिवार (11 जुलाई) को थाने में लिखित रिपोर्ट दी गई थी। पुलिस ने बिना किसी देरी के रिपोर्ट के आधार पर तुरंत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने बताया कि मामला दर्ज होते ही 11 जुलाई को ही घायलों का मेडिकल (MLC) करवाने के लिए अस्पताल में तहरीर भेज दी गई थी। आज (12 जुलाई) पुलिस टीम ने घटना स्थल का मुआयना किया है और सबूत जुटाए हैं। एएसआई ने साफ कहा कि पुलिस पर अपराधियों से मिलीभगत के जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। पुलिस का किसी भी पक्ष से कोई व्यक्तिगत लेना-देना नहीं है, कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा रही है। ओमप्रकाश को मिली छुट्टी, जवान का इलाज जारी पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि वारदात के दिन दोनों भाइयों को अस्पताल ले जाया गया था। इनमें से छोटे भाई ओमप्रकाश को प्राथमिक उपचार के बाद उसी दिन (10 जुलाई) अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। सिर में कुल्हाड़ी की गंभीर चोट और हाथ टूटने के कारण एयरफोर्स के जवान भागाराम का सैन्य अस्पताल (मिलिट्री हॉस्पिटल) में अभी भी इलाज चल रहा है। —– यह खबर भी पढ़िए… 70 साल की मां को बेटे ने मार डाला:पलंग पर सोई बुजुर्ग पर लाठियों से वार किए; भाई को देख घर से भागा बीकानेर में बेटे ने लाठी से पीट-पीटकर अपनी 70 साल की बुजुर्ग मां को मार डाला। इसके बाद रात को अपनी पत्नी को जगा कर बताया कि मां मर चुकी है। (पूरी खबर पढ़ें) बारात से लौट रहे दो पक्ष भिड़े, 5 घायल; एक जोधपुर रेफर; जमीनी विवाद में चली लाठियां, पत्थर फेंके फलोदी थाना क्षेत्र के लोर्डिया गांव के पास बारात से लौट रहे दो पक्षों में जमीनी विवाद को लेकर झड़प हो गई। इस दौरान तीन केंपर गाड़ियों में सवार होकर आए लोगों ने एक पक्ष पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया और पत्थरबाजी भी की। झगड़े में 5 लोग घायल हो गए। हमलावर मौके से फरार हो गए। (पूरी खबर पढ़ें)

ग्रेड सेकंड एग्जाम: दोनों पारी में 70% उपस्थिति:सेंटर के बाहर खुलवाए जेवर, हाथों में बंधे डोरे, दो पारी में हुई परीक्षा

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC), अजमेर की ओर से वरिष्ठ अध्यापक प्रतियोगी परीक्षा (माध्यमिक शिक्षा विभाग)-2025 रविवार सुबह 27 एग्जाम सेंटरों पर शुरू हुई।सेकंड ग्रेड टीचर भर्ती परीक्षा-2025 पहले दिन की दोनों पारियों की परीक्षा हो गई है। पहला पेपर सामान्य ज्ञान का हुआ। इसमें 70.84 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने भाग्य आजमाया है। दोनों ही पारियों के लिए 11261-11261 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड थे। इसमें से पहली पारी में कुल रजिस्टर्ड 11 हजार 261 में से 7 हजार 977 परीक्षार्थियों ने ही परीक्षा दी। तीन हजार 284 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। इसी तरह दूसरी पारी में सामाजिक विज्ञान का पेपर हुआ।इसमें 69.46 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। इसमें भी रजिस्टर्ड 11 हजार 261 में से 7 हजार 822 ने परीक्षा दी। इसमें 3439 अनुपस्थित रह
इस परीक्षा के लिए 11 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी रजिस्टर्ड है। पहले दिन का पहला पेपर सामान्य ज्ञान का सुबह दस बजे से दोपहर 12 बजे तक हुआ। इसमें 70.84 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने भाग्य आजमाया है। इस पेपर के लिए कुल रजिस्टर्ड 11 हजार 261 में से 7 हजार 977 परीक्षार्थियों ने ही परीक्षा दी। तीन हजार 284 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। इससे पहले परीक्षार्थियों को कड़ी जांच के बाद प्रवेश दिया गया। कई परीक्षार्थी हाथ, नाक, कान में जेवर पहनकर और डोरे बांधकर आ गए, उन्हें सेंटर के बाहर खुलवाए और काटे गए। सुबह 10 बजे परीक्षा शुरू होने से एक घंटे पहले परीक्षा केंद्र में प्रवेश बंद कर दिया गया। 10 बजे परीक्षा शुरू हो गई है। दो पारियों में होगी परीक्षा पहली पारी की परीक्षा सुबह दस बजे से दोपहर 12 बजे तक होगी, फिर दूसरी पारी की परीक्षा दोपहर बाद 3 बजे से शाम 5.30 बजे तक होगी। परीक्षा को लेकर कड़ी सुरक्षा और सख्ती की है। ADM विनोद कुमार मीना ने बताया- यह परीक्षा जिले में 12 से 17 जुलाई तक आयोजित की जाएगी। पहली पारी में सुबह दस बजे से दोपहर 12 बजे तक सामान्य ज्ञान की परीक्षा होगी। इसके लिए 11 हजार 261 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड है। परीक्षा की निगरानी के लिए 8 पेपर कोऑर्डिनेटर, 47 ऑब्जर्वर और 4 सतर्कता दल तैनात किए गए हैं। दूसरी पारी में सामाजिक विज्ञान विषय की परीक्षा होगी। परीक्षा में 11,640 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड 13 जुलाई को पहली पारी में सामान्य ज्ञान तथा दूसरी पारी में हिंदी विषय की परीक्षा आयोजित होगी। उसके लिए 11,640 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड है। इसी प्रकार आगामी दिनों में सामान्य ज्ञान, विज्ञान, संस्कृत, गणित, अंग्रेजी और उर्दू विषयों की परीक्षाएं आयोग द्वारा जारी समय-सारिणी के अनुसार 17 जुलाई तक होगी। परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिला मुख्यालय पर एक नियंत्रण कक्ष कार्यालय जिला मजिस्ट्रेट, टोंक में स्थापित किया गया है। नियंत्रण कक्ष के संचालन के लिए अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक कृष्ण गोपाल शर्मा को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया है।

कोटपूतली-बहरोड़ में वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा शुरू:17 जुलाई तक 24 केंद्रों पर होगा आयोजन, 5,691 अभ्यर्थी रहे मौजूद

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से आयोजित वरिष्ठ अध्यापक प्रतियोगी परीक्षा-2026 आज से शुरू हो गई है। यह परीक्षा 12 से 17 जुलाई तक कोटपूतली-बहरोड़ जिले के 24 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। परीक्षा प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगी। इन 24 केंद्रों में 11 राजकीय और 13 निजी केंद्र शामिल हैं। 5,691 अभ्यर्थी परीक्षा में रहे मौजूद कोटपूतली-बहरोड़ जिले में आयोजित वरिष्ठ अध्यापक प्रतियोगी परीक्षा के पहले दिन अभ्यर्थियों की अच्छी उपस्थिति रही। जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर पंजीकृत 8,815 अभ्यर्थियों में से 5,691 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 3,120 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। 4 सतर्कता दल गठित प्रशासन ने परीक्षा के सफल संचालन के लिए सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं। इसके लिए 4 सतर्कता दल गठित किए गए हैं। साथ ही, 35 पर्यवेक्षक, 24 केंद्राधीक्षक, 24 सहायक केंद्राधीक्षक और 995 अभिजागर (इनविजिलेटर) नियुक्त किए गए हैं। जिले के कोटपूतली, पावटा और बहरोड़ में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। सभी केंद्रों पर पुलिस की निगरानी, अभ्यर्थियों की फ्रिस्किंग, पेयजल, बिजली और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध रहेगी। प्रत्येक केंद्र पर डॉक्टर और एएनएम की टीम भी तैनात की गई है। प्रशासन ने बताया कि होटल, धर्मशाला और अन्य ठहरने वाले स्थानों पर भी पुलिस की निगरानी रखी जा रही है। परीक्षा से संबंधित सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नियंत्रण कक्ष एडीएम कार्यालय में सुबह 7:30 बजे से परीक्षा समाप्त होने तक संचालित रहेगा।

'मां नहीं आएगी तब तक खाना नहीं खाऊंगी':नवजात भाई लगातार रो रहा; पिता बोले- पत्नी की हॉस्पिटल की लापरवाही से मौत, कहां से लाऊं

भीलवाड़ा शहर का मंगलपुरा इलाका। यहां रहने वाले मनीष के घर के बाहर तक रोने की आवाज आ रही हैं। आवाज दो मासूमों की है। एक ही उनकी चार साल की बेटी और दूसरा है हफ्तेभर पहले जन्म उनका बेटा। मनीष बताते हैं.. दोनों ही बच्चे कुछ नहीं खा रहे और लगातार रोए जा रहे हैं, उनकी आंखें सूज गई हैं, लेकिन रोना बंद नहीं हो रहा है। दोनों केवल अपनी मां की गोद में जाना चाहते हैं। लेकिन मनीष की पत्नी ईशा की सिजेरियन डिलीवरी के तीन दिन बाद (8 जुलाई) भीलवाड़ा के सरकारी हॉस्पिटल में मौत हो चुकी है। ये हालात केवल मनीष के घर के ही नहीं हैं, ऐसे चार और नवजात हैं, जिन्होंने आंखें खोली तो मां का साथ छूट गया। इन बच्चों के परिवारों का आरोप है भीलवाड़ा के महात्मा गांधी सरकारी हॉस्पिटल की लापरवाही से कारण ये मौतें हुई हैं। सबसे पहले देखिए ये 2 तस्वीरें… बेटी की जिद…पिता लाचार महसूस कर रहे ईशा की 4 साल की बेटी ने रो-रो कर आंखें सुजा ली हैं। कहती है- मां नहीं आएगी तो खाना नहीं खाऊंगी। बेटी की जिद के आगे पिता खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं। मनीष नम आंखों से कहते हैं कि बेटी को कैसे समझाऊं, मासूम बेटे के लिए क्या करूं की कि वो चुप हो जाए, कुछ समझ नहीं आ रहा। क्रिटिकल कंडीशन में हमने ईशा को बचाने को कहा था मनीष ने बताया- मंगलपुरा से 5 जुलाई को हमने ईशा को भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टर ने बोला था कि ईशा की सिजेरियन डिलीवरी होगी। इसकी कंडीशन थोड़ी क्रिटिकल है। कोशिश मां और बच्चे दोनों को बचाने की रहेगी। डिलीवरी के समय परिस्थिति बिगड़ी तो हमने ईशा को बचाने के लिए सहमति दे दी थी। ऑपरेशन के बाद मां और बेटा दोनों स्वस्थ थे। अगले ही दिन 6 जुलाई की शाम से ईशा की तबीयत बिगड़ने लगी। 7 जुलाई को उसकी हालत और बिगड़ गई और 8 जुलाई को शाम करीब 4 बजे उसने दम तोड़ दिया। मनीष का आरोप है कि- 2 दिन ईशा ने जिंदगी की जंग लड़ी। अगर हॉस्पिटल में डॉक्टर सही से उसका इलाज करते है, जल्दी-जल्दी आते तो ईशा सकती थी। डॉक्टर-स्टाफ ने की लापरवाही- मनीष मनीष ने आरोप लगाया कि 6 से 8 जुलाई तक ईशा को जब सबसे ज्यादा डॉक्टरी देखभाल की जरूरत थी। उस समय हॉस्पिटल में किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया। हमने स्टाफ से काफी मिन्नतें की। कहा- उसका ध्यान रखें, उसकी तबीयत बिगड़ती जा रही है। उसकी बॉडी में लगातार कई चेंज हो रहे थे लेकिन, डॉक्टर्स को पता ही नहीं लग सका कि, उसे क्या हुआ? पिता बोले- मेरी एडवाइजर थी ईशा ईशा के पिता रामेश्वर पांडे कहते हैं- न मेरे भाई है, न मेरे बेटा है। मैंने अपनी दोनों बेटियों को बेटा समझ कर पाला-पोसा और बड़ा किया। ईशा और नेहा दोनों बहनें आपस में एक साथ रहें। इसलिए मैंने इनकी मंगलपुरा में एक ही परिवार के 2 भाइयों से शादी की। मेरी बड़ी बेटी ईशा मेरी एडवाइजर भी थी, हर सुख में दुख में वो मुझे समझती थी। घर परिवार में कोई भी समस्या होती थी तो मैं उसी से पूछ कर उस काम को करता था। अब इस पड़ाव में बेटी को खोना एक बाप से पूछो कि उसके दिल पर क्या बीतती होगी। छोटी बहन बोली- बेटे को लेकर ईशा की बहुत प्लानिंग थी ईशा की छोटी बहन नेहा की शादी भी इसी घर में मनीष के छोटे भाई से हुई है। नेहा कहती हैं- मेरी बहन मेरी दोस्त से बढ़कर थी, बचपन से हम लोग साथ में रहे एक दूसरे के सुख-दुख को बांटे। बाद में भी हम लोग अलग न हो इसीलिए पापा ने एक ही परिवार में हमारी शादी की। ईशा मेरी बड़ी बहन भी थी ईशा मेरी जेठानी भी थी और मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी थी। 6 जुलाई को जब उसको बेटा हुआ तो वो काफी खुश थी। बच्चे के जन्म को लेकर कई प्रोग्राम करने की प्लानिंग उसके दिमाग में थी। 1 अगस्त को ईशा का बर्थडे नेहा ने कहा- 1 अगस्त को उसका बर्थडे था तो उसने सोचा था उसी दिन पूरे परिवार को बुलाकर अपने बेटे का नामकरण संस्कार करूंगी। लेकिन, डॉक्टरों की लापरवाही के चलते मेरी बहन की मौत हो गई। जब उसकी तबीयत बिगड़ रही थी तो हमने डॉक्टर को कई बार रिक्वेस्ट करते हुए कहा था कि उसका ध्यान रखें। अगर उसे कहीं बाहर ले जाना हो तो हम उसे बाहर ले जाएं, लेकिन किसी ने उसका ध्यान नहीं रखा। एक स्त्री रोग, 4 प्रसूताओं की मौत अस्पताल की ओर से जारी प्रारंभिक जांच में सामने आया है फेरी देवी स्त्री रोग मरीज थीं गर्भवती नहीं थीं। 30 जून को भर्ती हुई थीं, ऑपरेशन 1 जुलाई को हुआ। 7 जुलाई को उनकी मौत हो गई। मौत का कारण मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (हार्ट अटैक) माना गया। शिमला गुर्जर प्रसूता थीं और 5 जुलाई को भर्ती हुई थी। उनका ऑपरेशन नहीं हुआ। 7 जुलाई को मौत हो गई। यह रेफर केस था। इसमें गंभीर एनीमिया समेत अन्य रोगों को मौत का कारण बताया है। ईशा पांडे भी प्रसूता थी, 5 जुलाई को उन्हें अस्पताल लाया गया था। 6 जुलाई को ऑपरेशन हुआ। 8 जुलाई को मौत हो गई। अस्पताल ने मौत का कारण पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म बताया है। दिव्या सेन भी प्रसूता के रूप में 7 जुलाई को अस्पताल में भर्ती हुई थी। ऑपरेशन भी 7 जुलाई को ही हुआ। उनकी मौत 2 दिन बाद 9 जुलाई को हुई। यह एक रेफर केस था। मौत का कारण है ब्लड प्रेशर और अन्य कारण माने गए हैं। संगीता जीनगर भी प्रेगनेंसी में अस्पताल में 9 जुलाई को भर्ती हुई थीं। 9 जुलाई को ही ऑपरेशन हुआ और अगले दिन 10 जुलाई को मौत हुई। हैवी ब्लीडिंग को मौत का कारण माना है। …. ये खबर भी पढ़िए… मां दुनिया में नहीं, बकरी का दूध पी रहा नवजात:परिजन बोले- वह दर्द से तड़प रही थी, नॉर्मल डिलीवरी करवाना चाहते थे डॉक्टर बांसवाड़ा में 4 प्रसूताओं की मौत के बाद राज्य सरकार से आई टीम अस्पताल में जांच में जुटी है। 3 प्रसूताओं के परिजन उन्हें ले गए। पूरी खबर पढ़े… डॉक्टर बोले- प्रसूताएं सीरियस थीं,एक को हार्टअटैक आया:परिजनों का आरोप- पोस्टमॉर्टम किए बिना शव सौंपा, खून चढ़ाया ही नहीं भीलवाड़ा के महात्मा गांधी हॉस्पिटल के मातृ एवं शिशु अस्पताल (MCH) में 6 दिन में 5 और बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में 4 दिन में 4 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। इन सभी प्रसूताओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। पढ़ें पूरी खबर…

उदयपुर में 99 सेंटर्स सेकंड ग्रेड टीचर भर्ती एग्जाम:पहली पारी में जीके और दूसरी पारी सोशल साइंस का पेपर, 17 जुलाई तक होंगे एग्जाम

आरपीएससी की सेकंड ग्रेड टीचर भर्ती एग्जाम आज से शुरू हो गए। रविवार को पहले दिन सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक पेपर चल रहा है। पहली पारी के एग्जाम के लिए सुबह 9 बजे तक अभ्यर्थियों को एंट्री दी गई। एडमिट कार्ड और मूल आधार कार्ड से मेचिंग के बाद मेटल डिटेक्टर से भी जांच हुई। इसके बाद अभ्यर्थी को अंदर जाने दिया गया। पहली पारी में सामान्य ज्ञान (जीके ग्रुप ए) का पेपर चल रहा है। सुबह 9 बजे सभी सेंटर्स पर कड़ी सुरक्षा के बीच पेपर पहुंचे। रविवार को दूसरी पारी का पेपर दोपहर 3 बजे से शाम 5:30 बजे तक होगा। दूसरा पेपर सोशल साइंस का है। दोनों पारियों के लिए 21,504 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड है। इसके लिए उदयपुर में कुल 99 निजी और सरकारी स्कूल में सेंटर्स बनाए गए है। 6 दिन यानि 17 जुलाई तक रोजाना 2 पारियों में यह एग्जाम होंगे। पूरी परीक्षा के दौरान सबसे ज्यादा अभ्यर्थियों के एग्जाम सोमवार को है। जब जीके ग्रुप-बी और हिंदी विषय की परीक्षा में रिकॉर्ड 29,488 अभ्यर्थी बैठेंगे। परीक्षा के लिए शहर में कुल 99 केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 43 सरकारी और 56 निजी विद्यालय शामिल हैं। उड़नदस्तों की निगरानी के लिए 17 सतर्कता दल और 33 उपसमन्वयक तैनात किए गए हैं। एग्जाम को लेकर आयोग की ओर से सख्त नियम लागू किए गए हैं। सेंटर्स पर पर वैध एडमिट कार्ड और ओरिजनल आईडी लाना अनिवार्य किया गया है, जिसके बिना एंट्री नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही केंद्र के भीतर मोबाइल, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ या अन्य कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना पूरी तरह बैन है। हर सेंटर्स पर परीक्षा कक्ष में केवल 24 अभ्यर्थियों के बैठने की क्षमता तय की गई है, जहां दो वीक्षकों की तैनाती रहेगी।
6 दिनों तक रोजाना सुबह 10 से दोपहर 12 बजे और दोपहर 3 से शाम 5:30 बजे तक एग्जाम होंगे। 13 जुलाई को सामान्य ज्ञान ग्रुप बी और हिंदी विषय की परीक्षा होगी, जिसमें सबसे अधिक 29,488 अभ्यर्थी बैठेंगे। 14 जुलाई को सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक और दोपहर 3 से शाम 5:30 बजे तक सामान्य ज्ञान ग्रुप सी तथा विज्ञान विषय की परीक्षा आयोजित होगी, जिसमें सामान्य ज्ञान के लिए 29,376 और विज्ञान के लिए 19,488 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड हैं। 15 जुलाई को केवल सुबह की पारी में 10 से दोपहर 12:30 बजे तक संस्कृत विषय की परीक्षा होगी, जिसमें 9,912 परीक्षार्थी भाग लेंगे। 16 जुलाई को सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक और दोपहर 3 से शाम 5:30 बजे तक सामान्य ज्ञान ग्रुप डी तथा गणित विषय की परीक्षा होगी, जिसमें सामान्य ज्ञान के लिए 10,608 और गणित के लिए 5,232 अभ्यर्थी बैठेंगे। परीक्षा के अंतिम दिन 17 जुलाई को सुबह 10 से दोपहर 12:30 बजे तक अंग्रेजी और दोपहर 3 से शाम 5:30 बजे तक उर्दू विषय की परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसमें अंग्रेजी विषय के लिए 5,160 और उर्दू के लिए 216 अभ्यर्थी शामिल होंगे।