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RGHS में कैंसर इलाज की नई गाइडलाइन:30 हजार से महंगी दवा पर मेडिकल बोर्ड की मंजूरी जरूरी, मरीज की जरूरत से तय होगा इलाज

RGHS में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए नई गाइडलाइन लागू कर दी गई है। अब डॉक्टर मरीजों को सीधे महंगी और ब्रांडेड दवाइयां नहीं दे पाएंगे। मरीज की जरूरत के हिसाब से किफायती इलाज चुना जाएगा। अगर मरीज को 30 हजार रुपए से ज्यादा कीमत की दवा, एक लाख रुपए से अधिक की सर्जरी के अलावा किसी खास थेरेपी की जरूरत है तो इसके लिए मेडिकल बोर्ड की मंजूरी लेनी होगी। इसके साथ ही RGHS पोर्टल पर जल्द कैंसर रेफरल मॉड्यूल भी शुरू किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और अधिक पारदर्शी बनेगी। मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए- मरीजों के कैंसर के इलाज के लिए नए नियम क्या हैं? क्यों पड़ी नई गाइडलाइन की जरूरत? कैंसर का इलाज जटिल और महंगा होता है। इसमें इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, उन्नत रेडियोथेरेपी और जटिल सर्जरी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता है। अब तक एक समान प्रोटोकॉल नहीं होने से कई बार इलाज में देरी, अनावश्यक खर्च और संसाधनों के गलत इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती थीं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी ने प्रदेश के कैंसर विशेषज्ञों के साथ मिलकर ऑन्कोलॉजी स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन तैयार की है। इनका उद्देश्य सभी अस्पतालों में एक समान व्यवस्था लागू करना और मरीजों को प्रभावी और किफायती इलाज उपलब्ध कराना है। इलाज कैसे तय होगा? सभी डॉक्टरों को इलाज के लिए NICE और ICMR की गाइडलाइंस का पालन करना होगा। यदि किसी बीमारी के लिए इन संस्थाओं की सिफारिश उपलब्ध नहीं है, तभी ESMO या NCCN जैसी अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस का सहारा लिया जा सकेगा। यदि कोई डॉक्टर निर्धारित प्रोटोकॉल से अलग उपचार लिखता है तो उसे लिखित रूप से कारण और उस इलाज की जरूरत के वैज्ञानिक प्रमाण देने होंगे। अब जानते हैं मेडिकल बोर्ड की मंजूरी कहां-कहां जरूरी होगी सर्जरी और दवाएं : सामान्य सर्जरी के लिए अलग मंजूरी की जरूरत नहीं। लेकिन एक लाख रुपए से अधिक लागत वाली सर्जरी के लिए RGHS के गठित मेडिकल बोर्ड की अनुमति जरूरी होगी। इसके अलावा जेनेरिक दवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। महंगी दवाओं के लिए मेडिकल बोर्ड की स्वीकृति अनिवार्य होगी। कीमोथेरेपी : रेडियोथेरेपी में कैंसर को खत्म करने वाली या दर्द कम करने वाली रेडिएशन तकनीक का चुनाव डॉक्टर मरीज की स्थिति देखकर करेंगे। टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी : ये कैंसर का सबसे महंगा इलाज माना जाता है। यह इलाज मरीज को RGHS में तभी मिल पाएगा जब उसकी रिपोर्ट में संबंधित बायोमार्कर पॉजिटिव होगा। यदि एक साइकिल या एक माह में खर्च 30 हजार रुपए से अधिक है तो मेडिकल बोर्ड की मंजूरी अनिवार्य होगी। हार्मोनल थेरेपी : थेरेपी ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर में जेनेरिक दवाओं को प्राथमिकता। महंगी दवाओं के लिए मेडिकल बोर्ड की अनुमति लेनी होगी। कैंसर के इलाज में मेडिकल बोर्ड की क्या भूमिका होगी नई गाइडलाइन में मेडिकल बोर्ड की भूमिका अहम रहेगी। सामान्य इलाज के लिए किसी तरह की परमिशन की आवश्यकता नहीं है। लेकिन 30 हजार रुपए से अधिक लागत वाली दवा, एक लाख रुपए से अधिक लागत वाली सर्जरी या फिर कोई ऐसी तकनीक जो लिस्ट में शामिल नहीं है, उस इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड की परमिशन लेनी होगी। गाइडलाइन में स्पष्ट निर्देश हैं कि मेडिकल बोर्ड को भी 10 से 15 दिन के भीतर निर्णय लेना होगा, ताकि मरीज के इलाज में किसी प्रकार की देरी न हो। इलाज की परमिशन के लिए मरीज को खुद बोर्ड के सामने उपस्थित होना होगा। हालांकि, ICU और वेंटिलेटर पर भर्ती मरीजों को इससे छूट रहेगी। मरीज की शारीरिक क्षमता के अनुसार मिलेगा इलाज कैंसर का मरीज कौन-कौन सी महंगी थेरेपी के लिए पात्र है, इसका निर्धारण ECOG (Eastern Cooperative Oncology Group) स्केल से किया गया है। ECOG एक अंतरराष्ट्रीय स्केल है, जिससे डॉक्टर यह आकलन करते हैं कि कैंसर मरीज शारीरिक रूप से कितना सक्रिय है और वह इलाज (जैसे कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या टारगेटेड थेरेपी) सहन कर पाएगा या नहीं। ECOG 1: सभी आधुनिक और उच्च-लागत वाली थेरेपी के पात्र हैं। ECOG 2: मेडिकल बोर्ड केस-दर-केस निर्णय लेगा। ECOG 3: आक्रामक उपचार की बजाय पैलिएटिव केयर को प्राथमिकता। ECOG 4: सक्रिय कैंसर थेरेपी नहीं, केवल सहायक देखभाल। मरीजों को क्या फायदा होगा? नई व्यवस्था से महंगी ब्रांडेड दवाओं के बजाय प्रभावी और किफायती विकल्पों को बढ़ावा मिलेगा। महंगे इलाज का फैसला अब किसी एक डॉक्टर के बजाय विशेषज्ञों का मेडिकल बोर्ड करेगा। इससे अनावश्यक खर्च कम होगा और ट्रीटमेंट अधिक पारदर्शी बनेगा। इसके साथ ही RGHS पोर्टल पर कैंसर रेफरल मॉड्यूल शुरू होने जा रहा है। इसके लागू होने के बाद कैंसर मरीजों को रेफर करना, मेडिकल बोर्ड की मंजूरी और उपचार की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी। मरीज को पहले क्या इलाज दिया गया और अब आगे क्या होगा, इसकी जानकारी भी अपडेट रहेगी। इससे कागजी कार्रवाई कम होगी और मरीज अपने केस की स्थिति पोर्टल पर देख सकेंगे। कैंसर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों की मदद से तैयार हुई गाइडलाइन राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी (RSHAA) के CEO हरजीलाल अटल ने बताया कि स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों की मदद से यह गाइडलाइन तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि RGHS पोर्टल में बदलाव किए जा रहे हैं। मेडिकल बोर्ड के गठन से लेकर उसकी रिपोर्ट तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। ऑफलाइन पत्राचार समाप्त होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और समय बचेगा। मरीज भी पोर्टल पर अपने केस की स्थिति देख सकेंगे। मामलों की रोजाना मॉनिटरिंग और साप्ताहिक समीक्षा भी की जाएगी, ताकि समयबद्ध निर्णय सुनिश्चित हो सके। —— यह खबर भी पढ़िए… RGHS में OPD जांच के लिए अब नए नियम:2 हजार रुपए तक की जांच के लिए मंजूरी जरूरी नहीं; जानें- और क्या बदलाव हुए सरकारी कर्मचारियों के लिए राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला किया है। RGHS के तहत OPD में रूटीन जांच को लेकर राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी (RSHAA) ने नई गाइडलाइन जारी की है, जो 13 जुलाई यानी सोमवार से लागू हो जाएगी। पढ़ें पूरी खबर…

प्रेम कहानी जिसे शब्दों ने लिखा, रंगों ने जिंदा रखा:'बणी-ठणी' क्या सिर्फ एक कल्पना है या वाकई कोई महिला थी? एपिसोड-1

बणी- ठणी कौन थी? ऐसा क्या था उस तस्वीर में जो राजस्थान की धरोहर बनी, जिसने किशनगढ़ शैली को दुनिया भर के कला जगत में पहचान दिलाई। जानते हैं राजा सावंत सिंह और बणी- ठणी की कहानी, जिनके प्रेम और भक्ति को कलाकार निहाल चंद ने अमर कर दिया- अठारहवीं सदी में राजपूताना का एक कोना- किशनगढ़। यहां के राजा सावंत सिंह केवल शासक नहीं, कवि और कृष्ण भक्त भी थे। यही वजह थी कि जहां अन्य दरबारों में तलवारों की खनक थी, किशनगढ़ में कविता, संगीत और भक्ति का मीठा शोर गूंजता था। यहां के राजा सावंत सिंह खुद ‘नागरी दास’ के छद्म नाम से कविताएं लिखते थे। उनकी रचनाओं में शब्द नहीं, भक्ति बहती थी और शायद यही वजह थी कि उनका मन राजपाट से ज्यादा कविता और कृष्ण में रमता था। यही माहौल बणी- ठणी और किशनगढ़ कला शैली के लिए उपजाऊ जमीन साबित हुआ। बणी-ठणी को दिल्ली से खरीदा गया था कहा जाता है बणी- ठणी को राजा सावंत सिंह की सौतेली मां, बंकावतजी के लिए बहुत छोटी उम्र में उस समय के शाहजहानाबाद यानी आज की पुरानी दिल्ली से खरीदा गया था। जिसके बाद उसे संगीत और गायन का प्रशिक्षण दिया गया। समय के साथ बणी- ठणी न सिर्फ गायन और संगीत में निपुण हो गई, बल्कि कविता लेखन में भी पारंगत हो गई। बणी-ठणी राजा सावंत सिंह की पासवान थीं किशनगढ़ पूर्व राजपरिवार की सदस्य मीनाक्षी देवी के अनुसार, बणी-ठणी महाराजा सावंत सिंह की पासवान थीं। वे बहुत अच्छा लिखती थीं। वे राजा के साथ इसलिए जुड़ीं क्योंकि दोनों साथ में कविताएं लिखते थे। उनकी कविताएं आज भी मंदिर में गाई जाती हैं।
नई आवाज का जादू उस शाम महल में एक नई आवाज सुनाई दी, उस आवाज में कृष्ण भक्ति की ऐसी गहराई थी कि पूरा दरबार भक्ति में सराबोर हो गया। सावंत सिंह भी इस आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस कर रहे थे। कौन है यह जिसकी आवाज में साक्षात सरस्वती का वास है? राजा ने जिज्ञासा के साथ पूछा। यह बणी- ठणी है, हमारे महल की नई सदस्य। ‘रसिक बिहारी’ के नाम से लिखी इनकी रचनाएं सिर्फ शब्द नहीं जादू हैं, बंकावत जी ने राजा को बणी- ठणी का परिचय दिया। राजा की नजर बणी- ठणी पर जैसे कुछ पल ठहर गयी। इस आवाज में गजब की मिठास और आकर्षण है। बणी- ठणी हम चाहेंगे कि आप हमारे दरबार में भी अपनी रचनाएं सुनाएं, ऐसा कहते हुए सावंत सिंह ने बणी- ठणी को और अधिक सुनने की इच्छा जाहिर कर दी। अब राजा रोज बणी- ठणी के कृष्ण भक्ति के मधुर संगीत और कविताएं सुनते, साथ ही उसमें अपनी रचनाएं भी जोड़ते। राजा सावंत और बणी- ठणी दोनों का कृष्ण भक्त होना उन्हें एक अनकही डोर से जोड़ रहा था। (कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किया गया है। फोटो व पेंटिंग आभार: किशनगढ़ पूर्व राजपरिवार, चित्रकार, शहज़ाद अली शेरानी ) कल के एपिसोड में जानेंगे ‘नागरी दास’ और ‘रसिक बिहारी’ की भक्ति और प्रेम की जुगलबंदी…

पॉलीहाउस की छत का पानी सहेज कर पूरे साल खेती:चाराें ओर लगे गेंदा से कीट-रोग का पहले पता लग रहा, समय पर कर देते हैं फसल उपचार

जयपुर के किशनगढ़ रेनवाल ब्लॉक का खेड़ी मिलक गांव भूजल के डार्क जोन में है। यहां पानी की कमी है, या फिर खारा है। इस गांव के युवा किसान कानाराम यादव बरसाती खेती पर ही निर्भर रहे। वे अपनी आठ बीघा जमीन पर बाजरा की फसल से ज्यादा कभी कुछ दूसरी फसल ले नहीं पाते थे। इंटरनेट और यूट्यूब के जरिए सरकारी योजनाओं और कम पानी में होने वाली फसलों का पता लगाया। फार्म पौंड में सालभर के लिए पानी फिर वर्ष 2024 में खेत में पॉलीहाउस लगाया। बारिश में पॉलीहाउस की छत का पानी एकत्र करने के लिए दो फार्म पौंड बना लिए। सिंचाई के लिए पांच एचपी का सोलर पंप भी लगाया है। अब इन दो फार्म पौंड में इतना पानी जमा हो जाता है कि साल भर चार हजार वर्गमीटर क्षेत्र में खीरे और बाकी जमीन पर गेहूं, बाजरा व टमाटर की फसल हो जाती है। खीरे की जैविक खेती कभी उनकी पूरे साल में एक लाख की फसल नहीं हो पाती थी लेकिन इन दिनों वे रोज बीस से पच्चीस हजार रुपए कमा रहे हैं। कानाराम खीरे की खेती भी जैविक ही कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे तीस प्रतिशत तक खर्च घट जाता है। जैविक खीरे के भाव भी अच्छे मिलते हैं। यह दो सप्ताह तक खराब भी नहीं होता। रासायनिक खेती वाला खीरा दो तीन दिन में ही सड़ने लग जाता है। गेंदे की पौध से पहचान रहे रोग वे फसल में रोग की पहचान पहले से ही कर लेते हैं। ताकि नियंत्रण आसानी से किया जा सके। इसके लिए भी वैज्ञानिक तरीका अपनाया है। कानाराम ने बताया कि खीरे की फसल के चारों ओर पॉलीहाउस में गेंदे की पौध लगा देते हैं। गेंदा रोग के मामले में संवेदनशील होता है। कोई भी कीट व रोग का प्रकोप होगा तो इसकी पौध मुरझा जाएगी। इन पौधों में रोग के लक्षण दिखते ही उपचार कर देते हैं। इससे रोग फैलता नहीं और गेंदे के फूल भी आय देते हैं। खुद तैयार करते हैं ऑर्गेनिक खाद कानाराम खुद ऑर्गेनिक खाद तैयार करते हैं। 20 पशु पाल रखे हैं। दूध घी से भी अतिरिक्त आय हो रही है। गोबर से केंचुआ खाद और नीम, गुड़, चूना, बेसन और छाछ सहित अन्य घरेलू नुस्खों से जैविक कीटनाशक तैयार कर रहे हैं। इस खाद से फसल को प्राकृतिक पोषण मिलता है। मिट्टी की गुणवत्ता भी बढ़ाती है। ऑर्गेनिक खाद पौधों को अधिक मजबूती देकर सिंचाई की जरूरत भी कम कर देती है। उन्होंने इन तरीकों से खेती को लाभदायक बना दिया है।

राजस्थान के 9 जिलों में बारिश की संभावना:मानसून पर लगा ब्रेक, 15 जुलाई के बाद फिर एक्टिव होगा सिस्टम; फलोदी सबसे ज्यादा गर्म रहा

राजस्थान में मानसून के पहले दौर के धीमे पड़ने के बाद प्रदेश के अधिकांश जिले रविवार को सूखे रहे। पश्चिमी राजस्थान के किसी भी जिले में अगले 24 घंटों के दौरान बारिश की कोई संभावना नहीं है। केवल 9 जिलों में आंशिक रूप से बारिश हो सकती है। इसमें खैरथल-तिजारा, अलवर, डीग, भरतपुर, धौलपुर, सिरोही, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ शामिल हैं। रविवार को भी राज्य में बारिश का ग्राफ काफी नीचे गिरा है। अब 15 जुलाई के बाद ही प्रदेश में मानसून का सिस्टम एक बार फिर एक्टिव हो सकता है। पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सिर्फ बूंदी जिले में 5 एमएम बारिश हुई है। इसके अलावा प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम पूरी तरह ड्राय (शुष्क) रहा। पिछले 24 घंटों में फलोदी जिला 41 डिग्री तापमान के साथ प्रदेश में सबसे ज्यादा गर्म दर्ज किया गया है। सबसे पहले- प्रदेश में बारिश की स्थिति और सैटेलाइट इमेज राजस्थान के मौसम से जुड़ी PHOTOS… राजस्थान के गर्म शहर गर्मी-बारिश के बड़े अपडेट्स गर्मी और उमस बढ़ने लगी : बारिश का दौर थमने के साथ ही अब राज्य में गर्मी और उमस बढ़ने लगी है। रविवार को फलोदी में अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे अधिक रहा। यहां न्यूनतम तापमान 29.2 डिग्री सेल्सियस रहा। अलवर में 38, बीकानेर में 38.1, चूरू में 38.5 और श्रीगंगानगर में 38 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। झुंझुनूं के पिलानी में भी पारा 37.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। अब आगे क्या: प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में यदि कोई कमजोर वेदर सिस्टम बनता है, तो मौसम बदल सकता है। 14 से 15 जुलाई के दौरान बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू के आसपास के जिलों में, 13 और 15 जुलाई को जयपुर और सीकर में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। अगले दो दिन यानी सोमवार और मंगलवार को जोधपुर और बीकानेर संभाग में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती हैं। फिलहाल प्रदेश में मौसम ड्राय रहेगा, लेकिन अगले दो-तीन दिन कुछ इलाकों में छिटपुट बारिश और बूंदाबांदी का दौर जारी रह सकता है। राजस्थान के बड़े शहरों में कैसा रहा मौसम जयपुर: मौसम के मिजाज में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला। शनिवार की तरह रविवार (12 जुलाई) को भी पारा 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही बना रहा। यहां अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तापमान में कोई बड़ा अंतर नहीं आया है। अधिकतम तापमान शनिवार की तुलना में महज 0.3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। न्यूनतम तापमान अभी भी सामान्य से करीब डेढ़ डिग्री सेल्सियस ज्यादा बना हुआ है, जिससे रात के समय उमस का अहसास हो रहा है। अलवर: रविवार सुबह से ही तेज धूप खिलने के कारण उमस और गर्मी का असर साफ देखने को मिला। यहां अधिकतम तापमान करीब 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शाम तक मौसम सामान्य बना रहा और बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक आंशिक रूप से बादल छाए रहने तथा मौसम सामान्य रहने का अनुमान जताया है। इस दौरान जिले में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी की भी संभावना बनी हुई है। उदयपुर: रविवार को बादलों और हल्की धूप की आंख-मिचौली के बीच मौसम बेहद सुहावना बना रहा, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को उमस से थोड़ी राहत मिली। सुबह से ही बादल छाए रहे और ठंडी हवा चलती रही। घने बादल छाए रहने के बावजूद बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार, दिन के तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। यहां अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रहा, जो एक दिन पहले 33 डिग्री सेल्सियस था। जोधपुर: रविवार को मौसम पूरी तरह सामान्य बना रहा। शहर का अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.8 डिग्री कम रहा। न्यूनतम तापमान 28.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.5 डिग्री अधिक है। शहर में पिछले 24 घंटों के दौरान कहीं भी बारिश नहीं हुई। अजमेर: रविवार को दिनभर मौसम पूरी तरह साफ रहा और तेज धूप ने लोगों को परेशान किया। लंबे समय से बरसात का इंतजार कर रहे अजमेरवासियों को रविवार को भी निराशा हाथ लगी। यहां दिनभर बादलों का नामोनिशान नहीं दिखा। अजमेर में अधिकतम तापमान 33.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 24.7 डिग्री सेल्सियस रहा। कोटा: रविवार को अधिकतम तापमान 36.1, जबकि न्यूनतम तापमान 28.6 डिग्री सेल्सियस रहा। दिनभर उमस रही। मौसम विभाग के अनुसार, तापमान सामान्य सीमा के भीतर ही बना रहा, लेकिन उमस के कारण लोगों को गर्मी का अहसास ज्यादा हुआ। सीकर: मानसून के कमजोर पड़ने के चलते रविवार को जिले में मौसम पूरी तरह साफ रहा। अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दोपहर के समय तीखी धूप का असर देखने को मिला और गर्मी बढ़ गई। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी सीकर में बारिश होने का कोई अनुमान नहीं है।

जन्म दर घटी, फिर भी 2025 में 11,104 नवजात ज्यादा:जयपुर में सबसे ज्यादा 1.69 लाख जन्म दर्ज, अनुमानित आंकड़े से 4 प्रतिशत कम; 26 जिलों में कम पंजीकरण

राजस्थान में जन्म दर 2024 के 23.17 से घटकर 2025 में 22.56 प्रति हजार रह गई, लेकिन नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) के आंकड़े अलग तस्वीर पेश करते हैं। वर्ष 2025 में राज्य में 19,82,719 जन्म पंजीकृत हुए, जो 2024 के 19,71,615 की तुलना में 11,104 अधिक हैं। 41 में से 15 जिलों में अनुमान से अधिक, जबकि 26 जिलों में अनुमान से कम जन्म पंजीकरण दर्ज हुआ। जयपुर में सबसे अधिक 1,69,243 जन्म दर्ज हुए, हालांकि यह 2024 के मुकाबले 24,265 कम और अनुमानित जन्म के मुकाबले 96.09% रहे। उदयपुर 1,12,454 जन्म के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जहां 2024 की तुलना में 2,462 अधिक जन्म पंजीकृत हुए। वहीं बाड़मेर, जैसलमेर, उदयपुर और प्रतापगढ़ में अनुमान से 149% से 161% तक अधिक जन्म पंजीकरण दर्ज हुए। भास्कर एक्सपर्ट डॉ. गौरव लाटा, कम्युनिटी हेल्थ सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम में अनुमानित जन्म और जन्म दर के आधार पर तैयार किया गया अनुमान होता है, जबकि पंजीकृत जन्म वास्तविक संख्या है। नए जिलों के गठन और बड़े मेडिकल हब में आसपास के जिलों के प्रसव दर्ज होने से कई जिलों में पंजीकरण 100% से अधिक पहुंच गया। जन्म दर में गिरावट भविष्य में जनसंख्या वृद्धि पर लगाम लगने का संकेत है।

700+ मकानों की वैधता जांच में उलझे:1 माह बाद भी तय नहीं कर पाया जेडीए; खोहनागोरियान में 8 मौतों वाली पटाखा फैक्ट्री सरकारी जमीन पर या निजी?

खोह नागोरियान स्थित रहीम नगर तलाई में 9 जून को पटाखा फैक्ट्री की भीषण आग में 8 लोगों की मौत के 1 महीने बाद भी जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) इस नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है कि हादसा जिस इलाके में हुआ, वहां बसे 700 से अधिक मकानों वाली बस्ती सरकारी जमीन पर है या निजी खातेदारी कृषि भूमि पर। हादसे के तुरंत बाद जेडीए ने राजस्व रिकॉर्ड, सेटलमेंट नक्शे, मौके की पैमाइश और भू-अभिलेखों की जांच शुरू की थी। अब स्थिति यह है कि फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग तक घूम रही हैं और जांच पर जांच चल रही है। इस बीच अवैध निर्माण रुकने के बजाय बढ़ रहे हैं। बड़ा सवाल है कि यदि जमीन विवादित है तो वहां वर्षों से कॉलोनी कैसे बस गई? यदि जमीन निजी है तो उसका वैध रूपांतरण और स्वीकृत लेआउट कहां है? और यदि सरकारी जमीन है तो उस पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? स्थानीय लोगों का आरोप है कि तालाब और श्मशान की सरकारी भूमि पर भूमाफिया और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध कॉलोनियां विकसित कर दी। यही कारण है कि अब विभिन्न रिकॉर्डों में जमीन की स्थिति को लेकर विरोधाभास सामने आ रहा है। आरोप यह भी हैं कि प्रभावशाली लोगों के फार्म हाउस और बड़े कब्जों के कारण जेडीए कार्रवाई से बच रहा है। दूसरी वजह यह भी है कि पिछली सरकार में अवैध कॉलोनी बसाने का खेल, एक कांग्रेसी नेता ने जेडीए अफसरों की मिलीभगत से शुरू किया, जो अब भी बदस्तूर जारी है। 2 साल पहले जेडीए ने अवैध मान ध्वस्त की हादसे के बाद इलाके में अवैध निर्माण तेज हो गए। रहीम नगर तलाई से 500 मीटर दूर बालकनाथ आश्रम के पीछे ‘द्वारकापुरी-2’ नाम से नई कॉलोनी विकसित होने की चर्चाएं हैं। लोगों का कहना है कि प्लॉटिंग और निर्माण शुरू है। बड़ा सवाल है कि क्या इस कॉलोनी को जेडीए की स्वीकृति मिली है? यदि नहीं, तो निर्माण क्यों नहीं रोका गया? यदि यह अवैध है तो प्रवर्तन शाखा कार्रवाई कब करेगी? 2024 में बालकनाथ आश्रम के पीछे कृषि भूमि पर विकसित हो रही द्वारकापुरी नामक अवैध कॉलोनी को जेडीए ने ध्वस्त किया था। पुरानी जांचों में भी तालाब की जमीन पर सवाल…रहीम नगर तलाई का विवाद नया नहीं है। राजस्व रिकॉर्ड और सेटलमेंट नक्शों में तालाब भूमि के अस्तित्व पर सवाल उठ चुके हैं। जेडीए की रिपोर्ट में तालाब नहीं मिलने की बात कही गई, जबकि पुराने भू-अभिलेखों में जलाशय का उल्लेख होने के दावे किए जाते रहे हैं। विरोधाभास के कारण अब बसावट की वैधता जांच का विषय बनी हुई है। पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद उम्मीद थी कि जेडीए सीमांकन कर पूरे क्षेत्र की स्थिति स्पष्ट करेगा, लेकिन एक महीने बाद भी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

बोनस अंकों के आधार पर नौकरी हासिल की:एलडीसी भर्ती-2013 घोटाला: जिला स्तरीय जांच में 145, राज्य स्तरीय जांच में 250 नियुक्तियां संदिग्ध

राज्यस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार जिला परिषद जयपुर में वर्ष-2013 की एलडीसी भर्ती तत्कालीन समय के बड़े भर्ती घोटालों में शामिल होती नजर आ रही है। मेरिट निर्धारण संबंधी दस्तावेजों की जांच में जिला स्तर पर केवल 627 कार्मिकों का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया, जबकि राज्य स्तर पर 672 कार्मिकों के रिकॉर्ड सामने आए। 45 कार्मिकों का रिकॉर्ड नहीं मिलने से पूरी भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 672 कार्मिकों के दस्तावेजों की जांच में 529 अभ्यर्थियों ने संविदा सेवा के अनुभव प्रमाण-पत्र के आधार पर बोनस अंक प्राप्त किए। इनमें 250 से अधिक नियुक्तियों में फर्जी डिग्री, फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र और अन्य अनियमितताएं सामने आईं। जांच समिति ने नियमविरुद्ध नियुक्त कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने, फर्जी दस्तावेज देने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने तथा दस्तावेजों का सत्यापन नहीं कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के साथ एसीबी और एसओजी से जांच कराने की सिफारिश की थी। हालांकि, रिपोर्ट आने के बाद भी इन सिफारिशों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इन राज्यों की डिग्रियों पर सबसे ज्यादा खेल संदिग्ध लिपिकों ने शैक्षणिक और कंप्यूटर योग्यता (पीजीडीसीए/डीसीए) के दस्तावेज राजस्थान से बाहर के राज्यों से हासिल किए। इनमें सबसे अधिक डिग्रियां सिक्किम, नागालैंड, मेघालय, मध्यप्रदेश (भोपाल) और छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालयों की हैं। जांच में इन दस्तावेजों का सत्यापन नहीं होने का भी खुलासा हुआ। तीन दस्तावेजों के आधार पर हुई भर्ती एलडीसी भर्ती-2013 में न लिखित परीक्षा हुई, न साक्षात्कार और न ही टाइप टेस्ट। मेरिट केवल तीन आधारों सीनियर सेकेंडरी अंक, कंप्यूटर योग्यता और अनुभव प्रमाण-पत्र पर तय हुई। अंतिम चयन इन दस्तावेजों के सत्यापन के अधीन था। मेरिट को मारा.. सिस्टम को बेचा, जांच रिपोर्ट में 672 का हिसाब आया सामने 9 साल में 4 आदेश, कार्रवाई अधूरी जांच समिति की 3 सिफारिशें, आज तक अधूरी

बालोतरा में सड़क हादसे में तीन की मौत, 5 रेफर:स्कॉर्पियो गाड़ी में सवार से सभी, राहगीरों ने निजी एंबुलेंस से पहुंचाया अस्पताल

बालोतरा जिले में जोधपुर नेशनल हाईवे पर देर रात हुए एक भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा भाडिंयावास के पास हुआ, जहां एक स्कॉर्पियो गाड़ी की अज्ञात वाहन से जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कॉर्पियो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। राहगीरों ने बताया कि हादसा रविवार आधी रात को हुआ और टक्कर की आवाज दूर तक सुनाई दी। दुर्घटना के बाद स्कॉर्पियो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के तुरंत बाद हाईवे से गुजर रहे राहगीरों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। पुलिस और स्थानीय लोगों ने चलाया राहत अभियान घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंच गई। राहत एवं बचाव कार्य के बाद घायलों और मृतकों को निजी एंबुलेंस की सहायता से राजकीय नाहटा अस्पताल, बालोतरा पहुंचाया गया। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लेकर हादसे की जांच शुरू कर दी है। पांच घायल जोधपुर रेफर राजकीय नाहटा अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया। वहीं, हादसे में गंभीर रूप से घायल पांच लोगों को प्राथमिक उपचार देने के बाद बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जोधपुर रेफर कर दिया गया। घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। अज्ञात वाहन की तलाश में जुटी पुलिस पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार स्कॉर्पियो की टक्कर किसी अज्ञात वाहन से हुई थी। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात वाहन की पहचान करने का प्रयास कर रही है। मृतकों और घायलों की पहचान तथा हादसे के अन्य पहलुओं की जांच जारी है।

मंत्री ने मेडिकल-कॉलेज प्रिंसिपल और सुपरिटेंडेंट को कल जयपुर बुलाया:प्रसूताओं की मौत पर लेंगे जानकारी, एसओपी की पालना पर होगी चर्चा

प्रदेशभर में प्रसूताओं की मौत के मामलों को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने बीकानेर सहित प्रभावित मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपल और संबद्ध अस्पतालों के अधीक्षकों(सुपरिटेंडेंट) को सोमवार को जयपुर तलब किया है। स्वास्थ्य भवन में होने वाली बैठक में मंत्री स्वयं अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेंगे। बैठक का मुख्य फोकस ऑपरेशन थियेटर में संक्रमण रोकने के लिए जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) की पालना पर रहेगा। यह समीक्षा की जाएगी कि अस्पतालों में निर्धारित गाइडलाइन का पालन हो रहा है या नहीं और यदि नहीं, तो किन स्तरों पर लापरवाही हुई। बीकानेर में अब तक तीन प्रसूताओं की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य प्रसूताएं की हालत अभी भी गंभीर हैं। इसी तरह कोटा, जोधपुर और भीलवाड़ा से भी प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आए हैं। प्रारंभिक स्तर पर माना जा रहा है कि ऑपरेशन थियेटर में संक्रमण नियंत्रण संबंधी एसओपी की प्रभावी पालना नहीं होना इन घटनाओं का एक बड़ा कारण हो सकता है। इसी कारण प्रभावित मेडिकल कॉलेजों के प्रबंधन से जवाब-तलब किया गया है। बैठक के बाद सरकार आगे की कार्रवाई और आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है।

जोधपुर में चार घंटे तक कल नहीं आएगी बिजली:चौपासनी हाउसिंग बोर्ड सहित कई बडे़ इलाके होंगे प्रभावित

जोधपुर शहर में बिजली लाइनों के रखरखाव के चलते कई कॉलोनी में सोमवार को बिजली बंद रहेगी। चौपासनी हाउसिंग बोर्ड सहित कई बडे़ इलाकों में चार घंटे तक बिजली नहीं आएगी। इसके बाद बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। सुबह 8 से दोपहर 12 बजे यहां बिजली बंद