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जयपुर में पुलिस की गाड़ी डिवाइडर फांद कार से टकराई:भीड़ ने स्कॉर्पियो पर पत्थर फेंके, शीशे तोड़कर बीयर की कैन और बोतल निकाल बोनट पर रखी

जयपुर में शनिवार रात करीब साढ़े 10 बजे एक तेज रफ्तार राजस्थान लिखी स्कॉर्पियो डिवाइडर फांदकर रॉन्ग साइड में जाकर कार से टकरा गई। हादसे में कार क्षतिग्रस्त हो गई, वहीं स्कॉर्पियो का एक टायर भी फट गया। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और स्कॉर्पियो को घेर लिया। लोगों ने स्कॉर्पियो पर पत्थर फेंके। जिससे स्कॉर्पियो के शीशे टूट गए। अंदर रखी बीयर की कैन और बोतल बाहर निकालकर बोनट पर रख दी। घटना एयरपोर्ट रोड स्थित 6 नंबर बस स्टैंड के पास की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्कॉर्पियो ने सांगानेर की ओर जा रही वरना कार को जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और देखते ही देखते हंगामा शुरू हो गया। प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने स्कॉर्पियों पर पत्थर फेंककर उसके शीशे तोड़ दिए। डिवाइडर फांदकर रॉन्ग साइड में पहुंची स्कॉर्पियो प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्कॉर्पियो RJ 14 CB TF 5022 सांगानेर से तेज गति से कोचिंग हब की ओर आ रही थी। वह अनियंत्रित डिवाइडर पार कर रॉन्ग साइड में पहुंच गई और एयरपोर्ट रोड से सांगानेर की ओर जा रही वरना कार से टकरा गई। वरना कार में तीन लोग सवार थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कॉर्पियो का दाहिना अगला टायर फट गया और अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि दुर्घटना के तुरंत बाद वरना कार को मौके से हटा दिया गया, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई। भीड़ ने पुलिस वाहन पर पत्थर फेंके हादसे के बाद करीब 150 से ज्यादा लोग मौके पर एकत्र हो गए। लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी और गुस्साई भीड़ ने राजस्थान पुलिस लिखी स्कॉर्पियो पर फेंककर उसके शीशे तोड़ दिए। मौके पर पीसीआर और डायल-112 की टीम पहुंची। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस वाहन के शीशे तोड़ने के बाद भीड़ ने उसमें से बीयर के कैन और बोतलें निकालकर वाहन के बोनट पर रख दीं। इस घटनाक्रम को लेकर मौके पर काफी देर तक चर्चा होती रही। डेढ़ घंटे बाद क्रेन से हटाई गई स्कॉर्पियो हंगामे के दौरान एक बाइक सवार युवक ने भीड़ को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन गुस्साई भीड़ ने उसके साथ मारपीट कर दी। युवक किसी तरह वहां से जान बचाकर निकल सका। पुलिस ने लोगों को समझाइश कर स्थिति को नियंत्रित किया। करीब डेढ़ घंटे बाद क्रेन बुलाकर क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो को मौके से हटवाया गया और यातायात सुचारू कराया गया। दो थानों की सीमा, फिर भी नहीं पहुंचे थानाधिकारी हादसे का स्थान प्रतापनगर और सांगानेर थाना क्षेत्रों की सीमा पर बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक हंगामा चलता रहा, लेकिन दोनों थानों के थानाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। लोगों का कहना था कि समय पर वरिष्ठ अधिकारी पहुंचते तो स्थिति और अधिक तनावपूर्ण नहीं होती। स्कॉर्पियो पर ‘राजस्थान पुलिस’ लिखा, पुलिस बत्ती भी लगी प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे में शामिल स्कॉर्पियो पर टैक्सी नंबर होने के बावजूद सफेद प्लेट लगी हुई थी। वाहन पर “राजस्थान पुलिस” लिखा हुआ था और पुलिस की फ्लैश लाइट (बीकन) भी लगी हुई थी। बताया गया कि वाहन में कॉन्स्टेबल सुंदरम और ड्राइवर मौजूद थे। आरपीएस अधिकारी से वाहन जुड़े होने की चर्चा मौके पर मौजूद लोगों के बीच यह भी चर्चा रही कि उक्त स्कॉर्पियो जेडीए में कार्यरत एक आरपीएस अधिकारी को आवंटित है। हालांकि इस संबंध में पुलिस या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस जांच जारी फिलहाल पुलिस हादसे के कारणों, वाहन की स्थिति, उससे जुड़े तथ्यों और हंगामे और पुलिस वाहन में हुई तोड़फोड़ की घटना की जांच कर रही है। हादसे में घायल लोगों की स्थिति और हंगामे में शामिल लोगों की पहचान को लेकर भी कार्रवाई की जा रही है।

जमीन खुदाई में मिला खजाना किसका, मालिक या सरकार का?:जयपुर में घर में मिले सोने से भरे 15 कलश; 8 सवालों से समझें नियम

हाल ही जयपुर में एक हवेली की खुदाई में खजाना मिलने का दावा किया गया। मालिक का आरोप है कि ठेकेदार और उसके साथियों ने करीब 40-45 किलो चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे 14-15 कलश और 8 से 10 हजार चांदी के पुराने सिक्के आपस में बांट लिए। मामला पुलिस तक पहुंच गया है। इस घटना के बाद कई सवाल उठ रहे हैं… इस रिपोर्ट में आपके मन में उठ रहे सवालों के जवाब मिल जाएंगे… सवाल : आपकी पुश्तैनी जमीन या घर में खजाना मिलता है तो क्या आपका हो जाता है? जवाब : आपके पूर्वजों ने घर में 100 साल पहले या सैकड़ों साल पहले भी जमीन के भीतर खजाना छिपाया हो और एक दिन अचानक आपको मिल जाए तो आपको ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ के तहत सरकार को इसकी जानकारी देनी होगी। जमीन के ऊपर या खुदाई में आपको मिलने पर भी खजाना कानूनी रूप से आपका नहीं हो जाता है। सवाल : फिर इस खजाने पर किसका हक माना जाएगा? जवाब : कानूनन गड़े मिले खजाने पर सरकार का ही हक माना जाएगा। पूरे देश में ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ लागू है। वहीं राजस्थान में ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव रूल्स 1961’ भी काम करता है। गड़ा हुआ खजाना मिलने की स्थिति में ये नियम ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ के प्रावधानों को राज्य में लागू करने के लिए बनाए गए हैं। कानूनी प्रवधानों के तहत ही गड़े खजाने पर सबसे पहला हक राज्य सरकार का है। सवाल : क्या गड़ा खजाना जिसका हक हो, उसका हो सकता है? जवाब : हां, कानून के तहत हो सकता है। शर्त यह है कि व्यक्ति साबित कर दे कि ये खजाना उसके पूर्वजों का है, भले ही 100 साल से कम पुराना हो। खजाना किसी और को मिला हो, लेकिन कोई और यदि खजाना अपने बुजुर्गों का होने के तथ्य ले आए और कानूनी जांच में साबित कर दे तो सरकार उसे सौंप सकती है। सवाल : खजाने के दावेदारों की जांच कैसे की जाती है, दावेदार नहीं मिले तो…? जवाब : जांच के दौरान खजाना सरकारी ट्रेजरी में सरकार की निगरानी में रहता है। जिसे खजाना मिला हो और वह खुद की संपत्ति होने का दावा करता है तो भी जांच प्रक्रिया पूरी करनी होती है। कलेक्टर को खजाने की अनुमानित कीमत बताते हुए एक सार्वजनिक नोटिस जारी करना होता है। इसमें वह कहता है कि इस खजाने का कोई दावेदार हो या उसके वंशज हों तो दस्तावेज सहित हाजिर हो जाएं। इस नोटिस के बाद कलेक्टर चाहे तो 4 से 6 महीने का समय दे सकते हैं। दावेदार के हाजिर होने पर कलेक्टर चाहें तो दावा साबित करने के लिए उसे सालभर का समय भी दे सकते हैं। पूरी जांच कलेक्टर की अंडर में चलती है। यदि कलेक्टर की जांच में कोई अपने दावे को साबित कर देता है कि खजाना उसके बुजुर्गों का है, तो कलेक्टर मूल मालिक को खजाना सौंप सकता है। यदि कोई दावेदार इस दौरान नहीं आता, तो ये खजाना लावारिस घोषित हो जाता है और पूरी तरह सरकार के अंडर आ जाता है। सवाल : यदि खजाना 100 साल पुराना हो तो… जवाब : जांच के दौरान यदि खजाना ऐतिहासिक महत्व का लगता है तो कलेक्टर पुरातत्व विभाग से रिपोर्ट मांग सकते हैं। यदि खजाने में शामिल चीजें 100 साल से ज्यादा पुरानी निकलती हैं, तो एंटीक्विटी एंड आर्ट वैल्यूएबल्स एक्ट 1972 के तहत उन्हें ‘पुरातत्व’ या ‘ऐतिहासिक धरोहर’ माना जाता है। ऐसे में संबंधित खजाना किसी निजी व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ के प्रावधानों के तहत ऐसा खजाना सीधे राज्य की संपत्ति माना जाता है। सवाल : क्या गड़ा खजाना खोजने वालों या जमीन मालिक के बीच बांटा जा सकता है? जवाब : कानूनी धाराओं के तहत यदि खजाना सौ साल से ज्यादा पुराना है तो खोजने वाले का इस पर कोई अधिकार नहीं होता है। ये सरकार की संपत्ति माना जाएगा। वहीं यदि गड़ा खजाना 100 साल से कम पुराना हो तो कानूनी प्रावधानों के तहत खोजकर्ता और जमीन के मालिक के बीच साझा किया जा सकता है। प्रशासन की जांच में यदि कोई खजाने का दावेदार नहीं मिलता है तो उसे खोजने वाले को 75% और जमीन मालिक को 25% हिस्सा मिल सकता है। सवाल : सरकार को जानकारी देना क्यों जरूरी है? जवाब : कानून के अनुसार तो 10 रुपए से अधिक की कीमत का भी धन या वस्तु, सोना-चांदी आदि आपको मिलता है, तो तत्काल लिखित सूचना कलेक्टर या स्थानीय प्रशासन को देनी होती है। सवाल : यदि खजाना सार्वजनिक जगह या सरकारी कब्जे वाली जमीन पर मिले तो…? जवाब : तो ये खजाना सरकार के ही अधीन माना जाएगा। सरकार के कब्जा लेने से पहले यदि कोई इसमें से कुछ भी ले जाएगा तो उसे सरकार को ही जमा करवाना होगा। यदि खजाने में कुछ भी ले जाने वाला व्यक्ति खुद अपने स्तर पर प्रशासन को सौंपता है तो वह सजा से बच सकता है, लेकिन यदि प्रशासन अपने स्तर पर जांच कर तलाशी से कुछ वसूली करेगी तो सजा भी मिल सकती है। … ये खबर भी पढ़िए… 1. जयपुर-हवेली की नींव से निकले सोने से भरे 15 कलश:45 किलो चांदी की सिल्लियां, 10 हजार सिक्के भी; मालिक का दावा- मजदूरों ने आपस में बांटे जयपुर में एक हवेली की खुदाई में खजाना मिलने का दावा है। मालिक का आरोप है कि ठेकेदार और उसके साथियों ने पूरा खजाना गायब कर दिया। पूरी खबर पढ़िए… 2. जयपुर की एक और हवेली से निकली खजाने वाली तिजोरियां:एक ठेकेदार लेकर भागा; परिवार का दावा- दादी ने कहा था यहां है सोने-चांदी का भंडार जयपुर में करीब 250 साल पुरानी बंबई वालों की हवेली की खुदाई में खजाने वाली दो तिजोरी निकलने का दावा किया गया है। परिवार का आरोप है कि इनमें से एक छोटी तिजोरी खुदाई करने वाला ठेकेदार चोरी-छिपे ले गया। पूरी खबर पढ़िए…

कॉन्स्टेबल की हत्या का आरोपी कोर्ट से भागा:सरेंडर करने आया था, जमानत न मिलने की आशंका पर फरार हुआ

दौसा में 5 साल पहले पुलिस कॉन्स्टेबल हत्याकांड में वांटेड बदमाश कोर्ट में सरेंडर करने के बाद भाग निकला। उसे अंदेशा था कि उसकी जमानत नहीं हो पाएगी। ऐसे में, मौका पाकर बदमाश कोर्ट में रफूचक्कर हो गया। मामला दौसा के सिकराय कोर्ट का शनिवार का है। कोर्ट की रिपोर्ट पर मानपुर थाने में मामला दर्ज किया गया है और पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। लोक अदालत में भीड़ का फायदा उठा कर भागा मानपुर थाना इंचार्ज सतीश कुमार ने बताया- आरोपी विजय मीणा को 2024 में कॉन्स्टेबल संजय गुर्जर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। केस ट्रायल के दौरान आरोपी बेल पर चल रहा था। 2026 जून में इसी मामले में पेशी थी। आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। इसके बाद 16 को विजय मीणा के खिलाफ सिकराय कोर्ट ने अरेस्ट वारंट जारी किया था। शनिवार को यह कोर्ट में सरेंडर करने आया था। इस दौरान आरोपी विजय मीणा की पेशी होनी थी। जेल भेजने की आशंका के चलते यह भीड़ का फायदा उठा कर भाग निकला। इसी दिन कोर्ट में लोक अदालत भी चल रही थी। ऐसे में भीड़ का फायदा उठा कर भाग निकला। 2021 में जमीन विवाद में हुई थी कॉन्स्टेबल की हत्या कोर्ट की रिपोर्ट पर दर्ज हुआ मामला आरोपी के फरार होने के बाद कोर्ट की ओर से मानपुर थाने को रिपोर्ट भेजी गई। इसके आधार पर देर शाम आरोपी के कोर्ट परिसर से फरार होने का मामला दर्ज किया गया। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विजय मीणा की गिरफ्तारी के लिए उसके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।

शादीशुदा होकर लिव-इन में गए तो 5 साल की जेल:सीएम ने क्यों कहा- राम एक शादी करेगा तो रहीम चार क्यों'; MP में UCC से क्या बदलेगा?

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को कटनी में कहा- अगर राम एक शादी करेगा तो रहीम दो या चार शादियां क्यों करेगा? मध्य प्रदेश में वही रह पाएगा, जो एक ही शादी करेगा। रविवार को भोपाल के जगदीशपुर में हुई कैबिनेट बैठक में मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता-2026 को मंजूरी मिल गई। अब इसे 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा। तो क्या UCC किसी एक धर्म के खिलाफ है और क्या लिव-इन पार्टनर्स को भी अलग करना चाहती है सरकार; समझेंगे आज के एमपी एक्सप्लेनर में… सवाल 1: UCC का एमपी मॉडल क्या उत्तराखंड से ज्यादा सख्त है? जवाब: मध्य प्रदेश का ड्राफ्ट काफी हद तक उत्तराखंड मॉडल पर ही आधारित है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि उत्तराखंड का UCC ड्राफ्ट भी सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने ही तैयार किया था और मध्य प्रदेश की समिति की अध्यक्ष भी वही हैं। हालांकि, मध्य प्रदेश के ड्राफ्ट में कुछ बदलाव किए गए हैं… सवाल 2: ‘राम एक शादी करेगा तो रहीम चार क्यों’ सीएम के बयान के क्या मायने हैं? जवाबः मुख्यमंत्री के इस बयान का मतलब बहुविवाह खत्म करना है। सवाल 3: क्या लिव-इन में रहने पर पुलिस सीधे गिरफ्तार कर लेगी? जवाबः अगर आप सामान्य और अविवाहित लिव-इन कपल हैं तो जवाब है- नहीं। पुलिस यूं ही गिरफ्तार नहीं करेगी। प्रस्ताव के मुताबिक, हर लिव-इन कपल को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। इसके 5 अहम पहलू हैं 1. पेरेंट्स और पुलिस को सूचना: रजिस्ट्रेशन होते ही इलाके के थाने और कपल के माता-पिता को इसकी आधिकारिक सूचना भेजी जाएगी। 2. पड़ोसी भी कर सकेंगे शिकायत: बिना रजिस्ट्रेशन लिव-इन में रहने पर पड़ोसी, स्थानीय लोग या किराए के मकान के मालिक भी पुलिस से इसकी शिकायत कर सकते हैं। 3. बिना बताए रहने पर 3 महीने की जेल: रजिस्ट्रेशन न कराने या अपनी गलत पहचान बताने पर 3 महीने तक की जेल हो सकती है। उत्तराखंड में भी बिल्कुल यही नियम है। ब्रेकअप होने की स्थिति में रजिस्ट्रेशन कैंसिल कराना भी उतना ही जरूरी होगा। 4. शादीशुदा होने पर 5 साल की जेल: अगर कोई व्यक्ति पहले से शादीशुदा है और वह लिव-इन रिलेशनशिप में जाता है, तो 5 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। सरकार ने इसे कठोरता से लागू करने की बात कही है। 5. मेंटेनेंस देना होगा: पुरुष अगर अपनी लिव-इन पार्टनर को छोड़कर जाता है, तो उसे महिला को भरण-पोषण देना पड़ सकता है। सवाल 4: लिव-इन कपल अगर अलग हो जाएं, तो उनसे पैदा हुए बच्चों का क्या होगा? जवाबः अभी तक लिव-इन से जन्मी संतानों को अपने जन्म देने वाले माता-पिता की संपत्ति में हक पाने के लिए अक्सर कोर्ट में लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती थी, खासकर तब जब कपल में अनबन हो जाए। सूत्रों के मुताबिक, इसे सिर्फ संपत्ति के अधिकार तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि बच्चे की पूरी कानूनी पहचान को सुरक्षित करने का प्रस्ताव है। इसमें 3 प्रावधान हो सकते हैं…. 1. माता-पिता की पहचान कानूनी तौर पर मिलेगी: अभी तक कानूनी उलझनों में बच्चों को अक्सर समाज में अवैध या नाजायज मान लिया जाता था। लेकिन UCC लागू होने के बाद, रजिस्टर्ड लिव-इन से पैदा हुए बच्चे कानूनी रूप से पूरी तरह वैध माने जाएंगे। कानून की नजर में उनका दर्जा शादीशुदा जोड़े के बच्चे जैसा ही होगा। साथ ही उन्हें माता-पिता का नाम और पहचान भी कानूनी तौर पर मिलेगी। 2. संपत्ति में जन्म से हक: बच्चों को अपने माता और पिता, दोनों की पैतृक और खुद कमाई हुई संपत्ति में जन्म से ही बराबर अधिकार मिलेगा। इसके लिए उन्हें खुद को संतान साबित करने या कोर्ट के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 3. ब्रेकअप के बाद जिम्मेदारी: लिव-इन कपल के अलग होने पर महिला को भरण-पोषण यानी आर्थिक सहारा मिलने का प्रावधान प्रस्ताव में शामिल है। चूंकि बच्चे को अब कानूनन वैध माना जाएगा, इसलिए तार्किक तौर पर उसकी कस्टडी, शिक्षा और भरण-पोषण के भी वही नियम लागू होने की उम्मीद है, जो शादीशुदा जोड़ों के बच्चों पर लागू होते हैं। हालांकि, ड्राफ्ट बिल विधानसभा में पेश होने के बाद ही इन प्रावधानों की आधिकारिक तस्वीर साफ हो सकेगी। सवाल 5: क्या UCC लागू होने से सात फेरे या निकाह जैसी परंपराएं खत्म हो जाएंगी? जवाबः ऐसा नहीं है। सवाल 6: संपत्ति पर किसका-कितना हक होगा, क्या यह बदल सकता है? जवाबः प्रदेश के UCC ड्राफ्ट में कमेटी ने दो बदलावों का प्रस्ताव रखा है… 1. पिता को बराबर हक: मौजूदा व्यवस्था में उत्तराधिकार के नियम अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के तहत तय होते हैं। प्रस्तावित ड्राफ्ट में ‘मां’ की जगह ‘माता-पिता’ शब्द इस्तेमाल करने की सिफारिश की गई है। इसका मकसद यह है कि मां के न होने की स्थिति में भी पिता का उत्तराधिकार का अधिकार बना रहे। 2. बेटियों को बेटों के बराबर हक: हिंदू बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार 2005 से मिल चुका है। प्रस्तावित UCC के तहत इसी तरह के समान उत्तराधिकार सभी समुदायों की बेटियों को देने की व्यवस्था की गई है, ताकि धर्म के आधार पर अलग-अलग नियम न रहें। सवाल 7: किन समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है और क्यों? जवाबः कमेटी ने अनुसूचित जनजातियों (ST) के साथ-साथ घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों को UCC के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है। सवाल 8: क्या UCC किसी धर्म के खिलाफ है? जवाबः नहीं, UCC किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है। मध्य प्रदेश में UCC का मसौदा तैयार करने से पहले राज्य स्तरीय समिति ने आम लोगों से सुझाव मांगे थे। समिति के मुताबिक, उसे करीब साढ़े नौ लाख सुझाव मिले। एमपी एक्सप्लेनर की यह खबर भी पढ़ें… क्या नरोत्तम के आंसू हार की वजह बनेंगे 15 साल दतिया के विधायक रहे नरोत्तम मिश्रा टिकट कटने के बाद मंच पर भावुक नजर आए। इसके बाद गुरुवार को आशुतोष तिवारी की मौजूदगी में अपने कार्यकर्ताओं से कहा- लोग कहने लगे हैं कि आशुतोष ने टिकट काट दिया। उसकी क्षमता है टिकट काटने की? टिकट काटने वाले कोई और हैं। पढ़ें पूरी खबर…

मंत्री किरोड़ी की राह में बिछाए फूल:IPS अफसर के लिए कवि बना ASI; सरिस्का में हिचकोले खाते हुए सफर

नमस्कार IPS शरत कविराज पर लिखी एक कविता सोशल मीडिया पर खूब घूम रही है। कवि हैं- ASI हरसहाय। करौली में पांचना का पानी पहुंचा तो जयपुर में कृषि मंत्रीजी के लिए गुलाब की पंखुड़ियों का कारपेट बिछा दिया और सरिस्का में सड़कों की हालत खराब है। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. किरोड़ी बाबा की राह में बिछाए फूल किरोड़ी बाबा अपने मिशन पर लगे रहते हैं। बीते दिनों कृषि विभाग में बहुत कुछ चला। मामला शांत होता आया। फिर पांचना के पानी को लेकर तीन पक्षों के किसान हो-हल्ला करने लगे। इनमें एक कमांड एरिया के किसान भी थे। उनकी नहर भी 20 साल से सूखी थी। किरोड़ीलाल मीणा ने ही उन्हें आश्वासन दिया था कि पानी आ जाएगा। लंबे इंतजार के बाद नहर में दग-दग करते हुए पानी बहा तो लोगों की भीड़ जमा हो गई। मोबाइल कैमरों में धारा को कैद किया गया। यह पानी टेस्टिंग के लिए छोड़ा गया था। टेस्टिंग सफल रही। पानी आने से किसान इतने खुश हुए कि किरोड़ी बाबा को जयपुर में उनके सरकारी आवास पर सरप्राइज दे दिया। रात में ही किरोड़ी बाबा की सीढ़ियों के पास से लेकर खुले अहाते तक गुलाब की पंखुड़ियों का कारपेट बिछा दिया। जिस प्रकार सूखी नजर में पानी आया था, उसी तरह गुलाब के कारपेट पर सुबह किरोड़ी बाबा चलते हुए मॉर्निंग वॉक करने मैदान में पहुंचे। 2. क्राइम ब्रांच में गए ‘कविराज’ जोधपुर को कमिश्नर सूट नहीं कर रहे या कमिश्नरों को जोधपुर सूट नहीं कर रहा। भगवान जाने क्या मैटर है कि एक साल में तीन कमिश्नर बदल गए। IPS कविराज तो यहां 138 दिन ही रह पाए। अब जयपुर जाकर क्राइम ब्रांच में IG हो गए हैं। यूं तो सुरा और कविता का पुराना गठजोड़ रहा है। लेकिन जोधपुर में कविराज का नियम के खिलाफ चलने वाले शराब कारोबारियों से छत्तीस का आंकड़ा रहा। रात को 8 बजे बाद कमिश्नर साहब एक्टिव हो जाते थे। सादा कपड़ों में बाजारों में घूमते। कहीं 8 बजे बाद शटर के ऊपर से, नीचे से, इधर से, उधर से, खिड़की से, झरोखे से, कहीं से भी शराब बिकती देखते तो दूसरे दिन पूरा अमला पहुंच जाता। कार्रवाइयों से हड़कंप मच गया। साहब ने अपना सिक्का जमा दिया था। एक ASI हरसहाय मीणा तो कविराज की कार्यशैली देख क्रिएटिव हो गए और कल्पना कर-करके कमाल की कविता क्रिएट कर दी। ASI की कविता के कुछ अंश इस प्रकार हैं- मैं कमिश्नरेट की रज हूं
आप कमिश्नरेट के ताज हैं
अल्प सा एहसास हूं मैं
आप बुलंद आवाज हैं

मैं अदना सा कवि हूं
आप स्वयं कविराज हैं कवि ने अपनी कल्पना से शब्द गढ़े तो नेतागण ने अपने हिसाब से ट्रांसफर का अर्थ गढ़ना शुरू कर दिया। पूर्व मुखियाजी ने एक्स पर लिखा-शराब माफिया के दवाब में कमिश्नर साहब की बदली कर दी गई। नजाकत अपनी जगह और सियासत अपनी जगह। साहब तो ट्रांसफर ऑर्डर लेकर निकल चुके क्राइम ब्रांच। 3. चलते-चलते.. जयपुर से अलवर जाने के सड़क मार्ग में सरिस्का का जंगल आता है। रिजर्व फोरेस्ट का इलाका होने के कारण वन विभाग यहां सड़क सुधारने से बचता है। सड़क पर जंगली जानवरों का आना-जाना होता है। ऐसे में करीब ढाई साल पहले एक प्लान की बड़ी चर्चा हुई। कहा गया कि सरिस्का के जंगल में थानागाजी से कुशालगढ़ तक एलिवेटेड रोड बना दी जाएगी। ऊपर से गाड़ियां गुजरेंगी और नीचे जंगली जानवर स्वच्छंद विचरण करेंगे। जंगल भी डिस्टर्ब नहीं होगा और रास्ता भी बंद नहीं होगा। इस प्लान पर चर्चा तो खूब हुई, लेकिन यह ठंड बस्ते में चला गया। अब इलाके के दर्जनों गांवों के लोग जयपुर या अलवर जाते वक्त इस रोड पर हिचकोले खाने को मजबूर हैं। अपनी परेशानी बयान करने के लिए क्षेत्र के युवाओं ने AI वीडियो बनाया जिसमें बस टूटी सड़क से होती हुई अलवर जा रही है। परेशान यात्री प्रार्थना करते हैं- हे भर्तृहरि बाबा ये रोड तो मार ही डालेगा। बचा ले। सवारियां कमर-गर्दन सहलाते बस से उतरती हैं। एक बुजुर्ग मन्नत मांगता है- अगर ये सड़क बन गई तो सवा-मणी कर दूंगा। इनपुट सहयोग- जयदीप पुरोहित (जोधपुर), धर्मेंद्र शर्मा (करौली)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मंगलवार 7 बजे मुलाकात होगी।

भास्कर अपडेट्स:जम्मू-कश्मीर में एक हफ्ते के अंदर दूसरा संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन बरामद

जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में सेना ने एक संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन बरामद किया है। पिछले एक हफ्ते में इस तरह का दूसरा ड्रोन मिला है। अधिकारियों के अनुसार, टेरिटोरियल आर्मी के जवानों ने शनिवार देर रात पुरमंडल क्षेत्र के सांगर खेतों से इस ड्रोन को बरामद किया। लगातार ड्रोन मिलने की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी बढ़ा दी है और मामले की जांच शुरू कर दी है। ड्रोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। इससे पहले 14 जुलाई को भी जम्मू क्षेत्र के देवक गांव के पास एक खुले मैदान से एक ड्रोन बरामद किया गया था। आज की अन्य बड़ी खबरें… आंध्र प्रदेश के विजयनगरम के पास लॉरी-कार की टक्कर, 4 लोगों की मौत, एक घायल आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में सत्ताराव जंक्शन के पास एक लॉरी और कार की टक्कर हो गई। हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना मिलते ही आनंदपुरम पुलिस मौके पर पहुंची और मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस हादसे के कारणों का पता लगाने में जुटी है। गुजरात के गोधरा रेलवे स्टेशन पर उद्घाटन के कुछ घंटे बाद ही लिफ्ट खराब, 6 यात्री फंसे गुजरात के गोधरा रेलवे स्टेशन पर शनिवार को नई लिफ्ट के उद्घाटन के कुछ ही घंटे बाद उसमें तकनीकी खराबी आ गई। इसके चलते 6 यात्री करीब एक घंटे तक लिफ्ट में फंसे रहे। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और लिफ्ट का दरवाजा काटकर सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

अमायरा बिल्डिंग से कूदी, क्लास टीचर देखने तक नहीं गई:स्कूल ने 10 दिन तक छुपाए रखा बैग, जो सीसीटीवी फुटेज मिले उनसे आवाज गायब

जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल के चर्चित अमायरा डेथ केस में 8 महीने बाद पुलिस ने चार्जशीट पेश की है। इसमें कई अहम खुलासे हुए हैं। 1 नवंबर 2025 को हुई इस घटना से एक दिन पहले भी अमायरा बुलिंग से परेशान थी और 3 बार क्लास टीचर के पास शिकायत लेकर गई थी। अगले दिन फिर वह 5 बार अपनी शिकायत लेकर गई। लेकिन टीचर ने अनसुना कर दिया। अमायरा के चौथी मंजिल से नीचे कूदने की सूचना मिलने के बाद भी क्लास टीचर वहीं बैठी रही। वहीं स्कूल ने सबूत मिटाने की भी कोशिश की। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में अमायरा की मौत के पीछे सबसे बड़ा कारण क्लास टीचर की ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ में लापरवाही को बताया है। मामले में क्लास टीचर, स्कूल संस्थापक और प्रिंसिपल को आरोपी बनाया गया है। हालांकि परिजनों का आरोप है कि 8 महीने जांच के बाद भी पुलिस ने कमजोर धाराएं लगाई हैं। भास्कर ने इस मामले में दाखिल चार्जशीट का एनालिसिस किया। साथ ही मामले की जांच कर रही पुलिस अफसर से भी बात की। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए- अमायरा केस में स्कूल ने कहां-कहां लापरवाही बरती… 1. घटना से एक दिन पहले भी बुलिंग की शिकार हुई थी अमायरा जांच टीम ने अमायरा के क्लासरूम के CCTV फुटेज जब्त किए थे। बारीकी से जांच में सामने आया कि अमायरा को आसपास के बच्चे बार-बार परेशान कर रहे हैं। अमायरा बार-बार उनकी शिकायत लेकर क्लास टीचर पुनिता शर्मा के पास जा रही है। एडिशनल डीसीपी जिज्ञासा पूनिया (जांच अधिकारी) ने बताया कि उन्होंने घटना से कुछ दिन पहले के भी सीसीटीवी खंगाले थे। उस दौरान सामने आया कि अमायरा 31 अक्टूबर को भी बुलिंग का शिकार हुई थी। तब भी वह 3 बार शिकायत लेकर क्लास टीचर के पास गई थी। इसके अगले दिन फिर से वह 5 बार शिकायत लेकर गई। यहां चौंकाने वाली बात ये भी सामने आई है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की गाइडलाइन के अनुसार सीसीटीवी कैमरे वॉयस रिकॉर्डिंग के साथ होने चाहिए। लेकिन स्कूल में जो फुटेज पुलिस को मिले, वो सब बिना वॉयस के थे। यही कारण है कि घटनाक्रम से जुड़ी एक भी आवाज रिकॉर्ड नहीं हो पाई। 2. ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ में चूक से गई अमायरा की जान 1 नवंबर को घटना वाले सीसीटीवी फुटेज में अमायरा 5 बार क्लास टीचर के पास जाती दिखाई देती है। उसके व्यवहार से बच्चों द्वारा परेशान करने पर मानसिक तनाव के संकेत स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। लेकिन क्लास टीचर पुनिता शर्मा उसे अनसुना कर देती है। इससे अमायरा की परेशानी और बढ़ जाती है और वह यह एक्शन (सुसाइड) कर बैठती है। पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा है कि अमायरा की मौत मामले में सबसे अहम पहलू ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ (Duty of Care) बना। क्लास टीचर के पास बच्ची की स्थिति देखने और उसमें हस्तक्षेप करने का पर्याप्त अवसर था। इसकी जिम्मेदारी भी उसी की थी। लेकिन बच्ची की बात को नजरअंदाज किया गया। इसलिए यह मामला शिक्षक की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी निभाने में चूक का भी है। क्या है ‘ड्यूटी ऑफ केयर’? ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ का मतलब है कि किसी बच्चे की जिम्मेदारी जिस व्यक्ति के पास है, वह उसकी सुरक्षा, मानसिक स्थिति और तत्काल जरूरतों का ध्यान रखे। स्कूल के दौरान यह जिम्मेदारी संबंधित टीचर पर भी होती है। पुलिस जांच में इसी जिम्मेदारी के कथित उल्लंघन को इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना गया है। 3. सूचना के बाद भी टीचर क्लास मे बैठी रही, तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी जांच अधिकारी ने चार्जशीट में बताया- उनकी जांच में सामने आया है कि अमायरा के छत से गिरने की बात एक अन्य छात्रा ने क्लास टीचर को दे दी थी। इसके बावजूद क्लास टीचर पुनिता शर्मा ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस व्यवहार को पुलिस ने गंभीर संवेदनहीनता बताया है। जानकारी मिलने के बाद भी टीचर क्लास में ही रुकी रही। इससे जाहिर है उसे बच्ची के गिरने का कोई दुख नहीं था। इन्हीं तथ्यों के आधार पर पुलिस ने क्लास टीचर पुनिता शर्मा को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) की धारा 75 में आरोपी बनाया है। जांच अधिकारियों ने चार्जशीट में अपने निष्कर्ष में लिखा है कि घटना के समय बच्ची कानूनी रूप से क्लास टीचर की देखरेख और संरक्षण में थी। इसलिए उसके मानसिक संकट के संकेतों को नजरअंदाज करना इस मामले का महत्वपूर्ण आधार बना। 4. स्कूल में सबूत मिटाने की कोशिश पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 238 लगाई गई है। यह धारा तब लगाई जाती है जब क्राइम सीन के साथ कोई छेड़छाड़ हुई हो या सबूत मिटाने की कोशिश की गई हो। जांच अधिकारियों ने माना है कि घटना के बाद सबूत मिटाने की भी कोशिश की गई। चौथी मंजिल से कूदने के बाद जिस स्पॉट पर अमायरा गिरी, वहां से खून के धब्बों को साफ कर दिया गया था। एडिशनल डीसीपी जिज्ञासा पूनिया ने बताया कि स्कूल प्रशासन ने पुलिस के पहुंचने से पहले ही मौके से ब्लड और अन्य चीजों को साफ कर दिया था। यहां तक कि स्पॉट को पानी से धो दिया था। इसके अलावा बच्ची का बैग करीब 10 दिन तक स्कूल मैनेजमेंट की कस्टडी में रहा था। हमें वो बैग नहीं दिया गया था। स्कूल में कई जगह मिली लापरवाही एडिशनल डीसीपी जिज्ञासा पूनिया ने बताया- अमायरा प्रकरण में कई जगह जिम्मेदारों ने लापरवाही की। ओवरऑल सुपरवाइजरी नेग्लीजेंसी है। सीबीएसई से कई एडवाइजरी हैं जिनका उल्लंघन हुआ है। अमायरा के पिता विजय मीणा ने भी आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने घटना से जुड़े सबूत मिटाने की पूरी कोशिश की। घटना के करीब एक घंटे बाद सूचना दी थी। जब हम अस्पताल पहुंचे तो वहां से स्कूल के टीचर भाग गए थे। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और शिक्षा विभाग की टीमों को स्कूल प्रशासन ने कई घंटों तक अंदर प्रवेश नहीं दिया था। पिता का आरोप- स्कूल संस्थापक, प्रिंसिपल को बचाने की कोशिश पिता विजय मीणा ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने 8 माह बाद कोर्ट में चालान पेश किया। इस दौरान 3 जांच अधिकारी बदले गए। पहला जांच अधिकारी लखन खटाना (सीआई मानसरोवर थाना) था। इसके बाद प्रशिक्षु आईपीएस आदित्य कांकड़े को लगाया। फिर आरपीएस जिज्ञासा पूनिया को जांच दी गई। जांच अधिकारियों ने क्लास टीचर पर BNS की धारा 106, 238 के साथ-साथ जस्टिस जुवेनाइल एक्ट की धारा-75 लगाई है। लेकिन स्कूल संस्थापक सौरभ मोदी और प्रिंसिपल इंदू दूबे को केवल धारा 106 और 238 में नामजद किया है। विजय मीणा ने चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमायरा के क्लासरूम के CCTV फुटेज में उसकी मानसिक पीड़ा साफ दिख रही है। इसके बावजूद भी उसे किसी भी प्रकार का प्रोटेक्शन या काउंसलिंग नहीं दी गई। क्लास टीचर के खिलाफ और भी गंभीर धाराओं में केस चलना चाहिए। हैरानी इस बात की है कि जस्टिस जुवेनाइल एक्ट में आरोपी होने के बावजूद अभी तक क्लास टीचर को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस ने स्कूल संस्थापक और प्रिंसिपल पर भी जेजे एक्ट-75 क्यों नहीं लगाया। क्योंकि स्कूल परिसर में चाइल्ड सेफ्टी, सुपरविजन, प्रोटेक्शन और वैलबीइंग की जिम्मेदारी स्कूल मैनेजमेंट और प्रिंसिपल की भी होती है। पुलिस की इस लापरवाही के खिलाफ हम आगे वह हाईकोर्ट तक जाएंगे। चार्जशीट में बताई पूरी घटना कैसे हुई? जयपुर के मानसरोवर इलाके में स्थित नीरजा मोदी स्कूल में एक नवंबर 2025 को चौथी क्लास की स्टूडेंट अमायरा ने स्कूल परिसर में आत्महत्या कर ली थी। घायल स्टूडेंट को स्कूल के पास ही एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। इस मामले में लंबी जांच के बाद 1 जुलाई 2026 को पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश कर दिया था। चार्जशीट में घटना से जुड़े कई पहलुओं को रखा गया है। घटना से पहले की परिस्थितियां, स्कूल प्रशासन ने किस समय क्या कदम उठाए और घटना के बाद किस तरह की कार्रवाई की, घटना के दौरान किसकी क्या भूमिका रही और किन परिस्थितियों में कथित लापरवाही बरती गई। इन्हीं तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ आरोप तय करते हुए अदालत में चालान पेश किया है। इस मामले में 10 जुलाई को कोर्ट में सुनवाई होनी थी, जो टल गई। इसके बाद 15 जुलाई को आरोपी पक्ष के वकील के नहीं पहुंचने पर फिर सुनवाई टल गई। अभी तक इस केस में एक भी सुनवाई नहीं हुई है। अब आगे क्या होगा? … अमायरा केस से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… नीरजा-मोदी स्कूल में अमायरा की मौत से पहले का VIDEO:कई बार टीचर के पास गई थी; परिवार बोला-बेटी मदद मांगती रही, किसी ने नहीं सुनी
अमायरा मौत मामला,परिवार बोला-बच्ची को आत्महत्या के लिए मजबूर किया:पुलिस ने हमें ही मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, चार्जशीट पर परिजनों ने उठाए सवाल अपशब्दों से नाराज होकर 4th मंजिल से कूदी थी छात्रा:नीरजा मोदी स्कूल टीचर ने जांच कमेटी के सामने किया खुलासा, मैडम ने रेलिंग से नीचे देखा था नीरजा मोदी स्कूल में 4th फ्लोर से कूदी छात्रा,मौत, VIDEO:पसलियां टूटी; स्कूल प्रबंधन ने सबूत मिटाए, पिता ने FIR दर्ज कराई

राजस्थान में 3 दिन तेज बारिश की चेतावनी:अब तक 25 फीसदी कम बरसात; जानें- फिर कब से एक्टिव होगा मानसून

राजस्थान में मानसून का असर एक बार फिर दिखाई दे सकता है। पहले पूर्वी और बाद में पश्चिमी राजस्थान में बारिश होने की संभावना है। मौसम केंद्र जयपुर ने रविवार को प्रदेश के 15 जिलों में आंधी और बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, पिछले 24 घंटों में प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश दौसा के बसवा में 32 एमएम (मिलीमीटर) दर्ज की गई है। अलवर, धौलपुर, बूंदी और कोटा के कुछ हिस्सों में भी हल्की बारिश दर्ज की गई। प्रदेश में इस सीजन में अब तक सामान्य से 25 फीसदी कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान के अधिकांश हिस्सो में कमजोर मानसूनी परिस्थितियां आगामी दो-तीन दिन तक जारी रह सकती हैं। हालांकि कोटा, भरतपुर, जयपुर और अजमेर संभाग के कुछ हिस्सों में 20-21 जुलाई से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। अब तक बारिश की स्थिति गर्मी-बारिश के बड़े अपडेट्स पश्चिमी राजस्थान में भी होगी बारिश: मौसम विभाग के अनुसार 22 से 28 जुलाई के दौरान जोधपुर और बीकानेर संभाग के कुछ हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना है। इस दौरान केवल श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ के कुछ हिस्सों में ही हल्की बारिश हुई है। श्रीगंगानगर में पारा 42.5 डिग्री: राजस्थान में सबसे गर्म इलाका अभी भी श्रीगंगानगर ही बना हुआ है। पिछले 10 में से 9 दिन श्रीगंगानगर ही प्रदेश में सर्वाधिक गर्म रहा है। शनिवार को यहां अधिकतम तापमान 42.5, जबकि न्यूनतम 31.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीकानेर में पारा 40.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के मौसम से जुड़ी PHOTO ये शहर सबसे ज्यादा गर्म आगे कैसा रहेगा मौसम राजस्थान के बड़े शहरों में कैसा रहा मौसम जयपुर: राजधानी में इन दिनों गर्मी और उमस है। यहां शनिवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 3.6 डिग्री ज्यादा यानी 37.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ज्यादा 29.8 डिग्री सेल्सियस रहा। दिन और रात दोनों ही समय तापमान सामान्य से करीब तीन डिग्री ऊपर चल रहा है। कोटा: शनिवार को उमस रही। यहां अधिकतम तापमान 37.3 और न्यूनतम 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, कोटा में अगले 2 दिन मौसम ड्राई रहने का अनुमान है। 21 जुलाई से बारिश की गतिविधियों में तेजी आने से लोगों को राहत मिल सकती है। उदयपुर: लेक सिटी में बादलों की बेरुखी के कारण बारिश का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। शनिवार को भी दिनभर मौसम ड्राई रहा। मौसम केंद्र के अनुसार, शनिवार को शहर का अधिकतम तापमान 34.8 और न्यूनतम 25.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे पहले शुक्रवार को अधिकतम तापमान 34.9 और न्यूनतम 24.4 डिग्री सेल्सियस रहा था। अलवर: शनिवार सुबह आसमान में बादलों की आवाजाही रही, लेकिन दोपहर होते ही तीखी धूप ने लोगों को परेशान कर दिया। अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने अगले दो दिन तक बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई है। 20 जुलाई से जिले में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। अजमेर: जिले में शनिवार को दिनभर तेज धूप के कारण लोग गर्मी से परेशान रहे। शनिवार को अधिकतम तापमान 36.5 और न्यूनतम 26.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, आगामी दो से तीन दिन में अजमेर संभाग में मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी। जोधपुर: बीते 24 घंटे में शहर का अधिकतम तापमान सामान्य से 1.1 डिग्री अधिक यानी 37.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, न्यूनतम तापमान भी सामान्य से 2.5 डिग्री ज्यादा 29.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, जोधपुर में आगामी तीन दिनों तक मौसम ड्राई रहने का अनुमान है। सीकर: जिले में शनिवार को दिनभर आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रही, लेकिन बारिश न होने के कारण लोग उमस और गर्मी से परेशान रहे। जिले का अधिकतम तापमान 37.5 और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहा। हवा में नमी होने और धूप-छांव के खेल के कारण उमस का असर बना रहा। मौसम विभाग के अनुसार, सीकर जिले में आगामी दिनों में मानसून के दोबारा सक्रिय होने से अच्छी बारिश होने की प्रबल संभावना है, जिससे लोगों को इस गर्मी से राहत मिलेगी।

30 साल बाद घर लौटेगा जवान का शव:माउंट एवरेस्ट पर तूफान में फंसे थे लद्दाख के दोरजे, 26 हजार फीट ऊपर गुफा में शरीर

माउंट एवरेस्ट की बर्फीली चोटियों पर 26,247 फीट ऊंचे ‘डेथ जोन’ में पिछले 30 सालों से एक पर्वतारोही का शरीर बर्फ में जमा है। पैरों में हरे जूते होने के कारण दुनिया उसे ‘ग्रीन बूट्स’ के नाम से जानती रही। सालों तक इसे आईटीबीपी के हेड कांस्टेबल शेवांग पाल्जोर का शव माना गया, लेकिन हाल में हुए डीएनए टेस्ट से पुष्टि हुई कि यह लांस नायक दोरजे मोरुप का पार्थिव शरीर है। अब 30 साल इंतजार के बाद इस साल अक्टूबर तक लद्दाख में दोरजे के परिवार को उनका शव सौंपा जाएगा। दोरजे मोरुप, शेवांग पाल्जोर और सूबेदार शेवांग समनला 1996 में तिब्बत के उत्तरी मार्ग से एवरेस्ट फतह करने निकली पहली भारतीय तीन सदस्यीय टीम का हिस्सा थे। 10 मई 1996 को शिखर के पास तीनों भीषण बर्फीले तूफान में फंस गए थे। यह अभियान बाद में ‘1996 माउंट एवरेस्ट डिजास्टर’ के नाम से जाना गया, जिसमें उस सीजन में 12 पर्वतारोहियों की मौत हुई थी। 75 वर्षीय पत्नी बोलीं- उन्हें देखकर ही आखिरी सांस लूंगी भास्कर ने दोरजे के घर पहुंचकर उनकी पत्नी कोनचोक यांगस्किट से मुलाकात की। 75 वर्षीय कोनचोक अब सुन नहीं सकतीं। वह पति की पेंशन पर गुजर-बसर करती हैं। जब से बेटे फुंतसोग दोरजे ने पिता का शव लाने वाले मिशन की सूचना दी, तब से वह रो रही हैं। उन्होंने बेटे को कागज पर लिखकर दिया है कि उनकी आखिरी इच्छा एक बार पति को देखने की है। उन्होंने लिखा, “उन्हें देखकर ही आखिरी सांस लूंगी।” दोरजे के बेटे फुंतसोग भारतीय सेना में हैं। उन्होंने बताया कि आईटीबीपी से उन्हें अब तक मिशन की पूरी जानकारी नहीं मिली है। मां ने पिता के इंतजार में पूरी जिंदगी रो-रोकर बिता दी। अब उनकी आंखों में उम्मीद नजर आ रही है। एवरेस्ट चढ़ने वालों के लिए लैंडमार्क बन गया था ग्रीन बूट्स 1996 में ब्रिटिश पर्वतारोही और फिल्ममेकर मैट डिकिन्सन ने पहली बार बर्फ में फंसे दोरजे मोरुप के शव का वीडियो रिकॉर्ड किया था। बाद में यह फुटेज ‘समिट फीवर’ डॉक्यूमेंट्री में भी दिखाई गई। पैरों में पहने हरे रंग के जूतों के कारण इस शव को ‘ग्रीन बूट्स’ नाम दिया गया।। यह शव एवरेस्ट के उत्तरी मार्ग पर एक छोटी गुफा में पड़ा था जो ‘ग्रीन बूट्स गुफा’ नाम से मशहूर हुआ। शिखर पर जाने वाले लगभग सभी पर्वतारोही इसी रास्ते से होकर गुजरते थे। उनके लिए यह रास्ते की पहचान (लैंडमार्क) बन गया था। 30 साल तक शव क्यों नहीं निकाला जा सका दोरजे का शव जिस जगह है, वह 8 हजार मीटर (करीब 26,247 फीट) से ऊपर का ‘डेथ जोन’ है। यहां समुद्र तल की तुलना में सिर्फ करीब 33% ऑक्सीजन होती है। इतनी ऊंचाई पर शरीर तेजी से जवाब देने लगता है। कोशिकाएं मरने लगती हैं। यहां हेलिकॉप्टर भी नहीं पहुंच सकते। इसलिए यहां से शव वापस लाना दुनिया के सबसे मुश्किल अभियानों में गिना जाता है। यही वजह है कि एवरेस्ट पर मारे गए 340 से ज्यादा पर्वतारोहियों में से अधिकांश के शव आज भी वहीं पड़े हैं। ————————- यह खबर भी पढ़ें… भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कामयाब: स्काईरूट एयरोस्पेस ने खुद बनाकर अंतरिक्ष में भेजा, 2 दोस्तों ने इसरो छोड़कर बनाई थी यह कंपनी हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार 18 जुलाई को भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च किया। यह टेस्ट पहले ही प्रयास में कामयाब रहा। विक्रम-1 को स्काईरूट एयरोस्पेस ने तैयार किया और लॉन्चिंग भी खुद ही की। सिर्फ लॉन्चपैड इसरो का था। पूरी खबर पढ़ें…

खबर हटके-ट्रेन में छेड़छाड़ के आरोपी का मेकअप, चूड़ियां पहनाईं:बंदर की कीमत ₹25 लाख; सांप के काटने पर ₹11 करोड़ का इलाज

ट्रेन में लड़की से छेड़छाड़ करने पर लोगों ने आरोपी को लिपस्टिक लगाकर मेकअप किया। वहीं, चीन में बंदरों की डिमांड इतनी बढ़ गई है कि उनकी कीमत ₹25 लाख तक पहुंच गई है। उधर, अमेरिका में सांप के काटने पर एक शख्स को ₹11 करोड़ का इलाज कराना पड़ा। आगरा में एक परिवार ने अपने लापता तोते की तलाश में शहरभर में होर्डिंग लगवाए हैं। साथ ही उसे ढूंढने वाले पर ₹50 हजार का इनाम रखा है। वहीं, 246 साल पहले शहीद हुए एक अमेरिकी सैनिक की अब जाकर पहचान हो पाई। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…