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खेत में घायल मिला दुर्लभ हिमालयन ग्रिफन गिद्ध:वन विभाग और कोबरा टीम ने रेस्क्यू किया, हालत नाजुक होने पर जयपुर रेफर करने की तैयारी

अजमेर के घूघरा गांव के पास लाडपुरा रोड पर एक खेत में बड़ा पक्षी होने की सूचना वन विभाग को मिली थी। वन विभाग ने कोबरा टीम के सुखदेव भट्ट को मौके पर भेजा। कोबरा टीम मौके पर पहुंची तो यह पक्षी हिमालय ग्रिफन प्रजाति का गिद्ध निकला। भट्ट ने इसकी जानकारी अजमेर रेंजर टीकमचंद मीणा को दी। भट्ट के मुताबिक यह पक्षी राजेश गुर्जर के खेत में नजर आया था। घायल हालत में होने से उसे शास्त्री नगर स्थित पशु चिकित्सालय लाया गया। यहां डॉ. नीतू अरोड़ा ने उसका उपचार किया। कुछ ही संख्या में बचे हैं ये गिद्ध गिद्ध की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई थी। ऐसे में उसे जयपुर रेफर करने की प्रक्रिया की गई। भट्ट के मुताबिक हिमालयन ग्रिफन गिद्ध की तादाद एशिया में कुछ एक ही रह गई हैं।

मेवाड़ यूनिवर्सिटी का पूर्व डिप्टी एग्जाम कंट्रोलर गिरफ्तार:फर्जी डिग्री मामला में अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद किया सरेंडर

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की हिन्दी स्कूल व्याख्याता भर्ती में फर्जी डिग्री लगाने के चर्चित मामले में मेवाड़ यूनिवर्सिटी के तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक सुशील कुमार शर्मा को गिरफतार किया है। आरोपी ने सोमवार को अपर जिला एवं सेशन न्यायालय में समर्पण कर दिया था। अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने व न्यायालय के आदेश की पालना में किए गए सरेंडर के बाद एसओजी ने उसे गिरफ्तार किया। यूपी के अलीगढ़ निवासी सुशील कुमार शर्मा के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में आयोग की ओर से मुकदमा दर्ज करवाया गया है। शर्मा के न्यायालय में समर्पण की सूचना पर अपर लोक अभियोजक शशि प्रकाश इन्दोरिया ने अनुसंधान अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्याम सुंदर विश्नोई को सूचना दी। एसओजी ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश कर अनुसंधान की आवश्यकता बताते हुए आरोपी शर्मा को अदालत परिसर से गिरफ्तार कर लिया। ये था मामला -अब तक 15 गिरफ्तार RPSC के वरिष्ठ उप सचिव अजय सिंह चौहान की ओर से अजमेर के सिविल लाइन्स पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया गया। इसमें बताया कि RPSC ने 2022 में हिंदी स्कूल लेक्चरर एग्जाम आयोजित करवाया था। इसमें ऑनलाइन फॉर्म एप्लीकेशन में दोनों ने फर्जी डिग्रियां लगाई थी। इसमें मेवाड़ यूनिवर्सिटी गंगरार चित्तौड़गढ़ की MA की डिग्रियां फर्जी थी। 15 अक्टूबर 2022 को हिंदी स्कूल लेक्चरर एग्जाम का आयोजन किया गया था। यह परीक्षा दो परियों में आयोजित हुई। पहली पारी सुबह 9 बजे से साढ़े 10 बजे तक सामान्य ज्ञान और दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक हिंदी विषय की परीक्षा आयोजित की गई थी। भूतेल-साचौर निवासी ब्रह्माकुमारी पुत्री बाबूलाल और वाडा भावड़ी, साचौर निवासी कमला कुमारी पुत्री भारमल विश्नोई ने यह परीक्षा पास कर ली। इसके बाद 14 जून 2023 को रिजल्ट घोषित किया गया था। दोनों ही कैंडिडेट को 31 जुलाई से 14 अगस्त तक डॉक्युमेंट्स वेरिफिकेशन के लिए बुलाया और पुलिस के हवाले किया। मामले की जांच एसओजी को सौंपी गई। अब तक 15 की गिरफ्तारी हो चुकी है। ……….. पढें ये खबर भी… फर्जी डिग्री से नौकरी दिलाने वाला आरोपी गिरफ्तार:लेक्चरर भर्ती- 2022 में नियुक्ति का आरोप,अब तक 15 आरोपी गिरफ्तार राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की प्राध्यापक (हिंदी) स्कूल शिक्षा प्रतियोगी परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्री के जरिए नियुक्ति दिलाने के मामले में सहयोगी आरोपी को गिरफ्तार किया है। SOG ने आरोपी को 13 जुलाई को पकड़ा था, जिसके बाद कोर्ट में पेश कर 17 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पूरी खबर पढें

क्या खत्म हो गया पांचना बांध विवाद?:20 साल लंबे संघर्ष के बाद खुले सात गेट, अब लिफ्ट योजना तय करेगी विवाद का भविष्य, पार्ट-2

पांचना बांध के सातों स्लूस गेट खुलने के साथ ही कमांड एरिया की नहरों में पानी पहुंचा तो किसानों ने इसे सिर्फ सिंचाई की शुरुआत नहीं, बल्कि दो दशक लंबे संघर्ष की पहली जीत बताया। इन गेट का खुलना महज तकनीकी खामी दूर होना नहीं है। करीब दो दशक तक करौली और सवाई माधोपुर के 74 गांव पानी के मुद्दे पर दो हिस्सों में बंटे रहे। एक ओर कमांड एरिया के 35 गांव थे। इनका कहना था कि बांध का निर्माण सिंचाई के लिए हुआ है। ऐसे में नहरों में नियमित जलापूर्ति उनका अधिकार है। दूसरी ओर बांध के आसपास के 39 गांव थे। इन्हें आशंका थी कि यदि लगातार नहरों में पानी छोड़ा गया तो उनके क्षेत्र में भूजल स्तर और पेयजल स्रोत प्रभावित होंगे। यही मतभेद समय के साथ प्रशासनिक विवाद से राजनीतिक मुद्दा बन गया। गुड़ला गांव के बुजुर्ग श्रीपाल गुर्जर कहते हैं- विवाद न हमने बढ़ाया न ही मीणा समाज ने। हमें लड़ाने का काम सरकारों ने किया। पानी खोलने से हमें कोई दिक्कत नहीं है। हमारी बाकी मांगें नवंबर तक पूरी नहीं हुईं तो फिर आंदोलन करेंगे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 30 जून की रात तीन मंत्रियों की मौजूदगी में हुई बैठक में तय हुआ था कि सात दिन के भीतर पांचना बांध की नहरों, गंभीरी नदी और गुड़ला लिफ्ट परियोजना में पानी छोड़ने की कार्ययोजना बनाई जाएगी। साथ ही 2026-27 के बजट में घोषित गुड़ला क्षेत्र के 21 राजस्व गांवों के लिए लिफ्ट सिंचाई योजना को नए स्वरूप में जल्द लागू करने पर सहमति बनी थी। इसके बाद 6 जुलाई को नई व्यवस्था के तहत बांध से पानी छोड़ा गया। एक गेट में तकनीकी खराबी आने से पानी कमांड एरिया के अंतिम गांवों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच सका। इससे नाराज किसानों ने कई स्थानों पर धरना-प्रदर्शन किए और जाम लगाया। बाद में विभाग ने लगातार काम कर 7 जुलाई को जाम गेट को दुरुस्त किया। तकनीकी खामी दूर होने के बाद नहरों में पानी का प्रवाह सामान्य हो गया। राजनीति और ‘श्रेय की लड़ाई’ ने बढ़ाया तनाव पांचना से प्रभावित अधिकांश गांव मीणा और गुर्जर बहुल हैं। ऐसे में आंदोलन धीरे-धीरे सामाजिक और राजनीतिक रंग भी लेने लगा। पूरे घटनाक्रम में विभिन्न नेताओं के बीच श्रेय लेने की होड़ भी दिखाई दी। कमांड एरिया के किसान पूरी क्षमता से पानी छोड़े जाने की मांग पर अड़े रहे, जबकि दूसरी ओर कुछ स्थानों पर विरोध और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियों से तनाव बढ़ गया। आखिरकार कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम और अन्य जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद अधिकांश धरने और जाम समाप्त हुए। 1972 की बाढ़ के बाद बनी थी परियोजना पांचना बांध की परिकल्पना 1972 की भीषण बाढ़ के बाद की गई थी। पूर्वी राजस्थान में जल प्रबंधन को मजबूत करने के उद्देश्य से भद्रावती, अटा, माची, बरखेड़ा और भैंसावत नदी के पानी को रोकने की योजना बनी। 1978-79 में निर्माण शुरू हुआ और 2004-05 तक बांध तैयार हो गया। सिंचाई विभाग के अनुसार परियोजना का कमांड एरिया करीब 9,985 हेक्टेयर निर्धारित किया गया। शुरुआती वर्षों में नहरों के माध्यम से किसानों को सिंचाई का पानी मिला और इससे करौली तथा सवाई माधोपुर के हजारों किसानों को लाभ हुआ। 2006 में शुरू हुआ विरोध, यहीं से बदल गई तस्वीर पांचना बांध से साल 1987 से 2005 तक कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ा जा रहा था। बाद में प्रदेश में गुर्जर आंदोलन के बाद उनकी मांगों पर विचार करते हुए सरकार ने नहरों में पानी छोड़ना बंद कर दिया। स्थिति 2006-07 में बदली, जब बांध के आसपास बसे गांवों ने नहरों में पानी छोड़े जाने का विरोध शुरू किया। इसके कारण साल 2006 से नहरों के अंत में बसे कमांड एरिया के 35 गांवों (मुख्य रूप से मीणा बहुल) के किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा है। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट ने साल 2020 और इसी साल अप्रैल-मई में नहरों में पानी छोड़ने का आदेश दिया। बांध के पास बसे गुर्जर बहुल क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना था कि जलाशय का स्तर घटने से उनके कुएं, ट्यूबवेल और पेयजल स्रोत प्रभावित होंगे। उन्होंने मांग रखी कि पहले लिफ्ट परियोजना के जरिए आसपास के गांवों तक पानी पहुंचाया जाए। इसके बाद सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाए। दूसरी ओर कमांड एरिया के मीणा बहुल गांवों के किसानों का कहना था कि सरकार बांध के मूल उद्देश्य से पीछे हट रही है। उनका तर्क था कि सिंचाई परियोजना बनाकर भी किसानों को लाभ नहीं दिया जा रहा। यहीं से विवाद लगातार गहराता गया। हाईकोर्ट ने आदेश दिए, लेकिन अमल नहीं हुआ विवाद बढ़ने पर कमांड एरिया के किसान राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचे। अदालत ने अलग-अलग अवसरों पर नहरों में पानी छोड़े जाने के निर्देश दिए। इसके बावजूद आदेश जमीन पर लागू नहीं हो सके। प्रशासन हर बार कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका का हवाला देता रहा। स्थानीय विरोध और संभावित टकराव को देखते हुए पानी छोड़ने का निर्णय टाल दिया गया। इससे किसानों में यह धारणा मजबूत होती गई कि समस्या तकनीकी नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक इच्छाशक्ति की है। हाल ही में विधायक रामकेश मीणा व अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश की पालना नहीं होने पर नाराजगी जताई थी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने सरकार से पूछा है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहरों में पानी क्यों नहीं छोड़ा जा रहा है। इस पर सरकार ने अदालती आदेश की पालना के लिए 15 दिन का समय मांगा। कोर्ट ने सरकार को समय देते हुए कहा था कि अगर नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो कलेक्टर और संबंधित अधिकारी 27 जुलाई को कोर्ट में पेश हो जाएं। जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया था। 20 साल पहले शुरू हुआ विवाद क्या सचमुच खत्म हुआ विवाद? हालांकि नहरों में पानी पहुंचने से लंबे संघर्ष का एक अध्याय जरूर समाप्त हुआ है, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं माना जा रहा। बांध क्षेत्र के ग्रामीण अब भी लिफ्ट परियोजना और अन्य वादों के समय पर क्रियान्वयन पर नजर बनाए हुए हैं। युवा नेता हाकम बैंसला कहते हैं- हमारे संघर्ष का परिणाम अब दिख रहा है। अगर सरकार तय समय में वादे पूरे कर देगी तो विवाद खत्म हो जाएगा। जब नेता सत्ता में थे तब मुद्दा नहीं उठाया, विपक्ष में आए तो आंदोलन का हिस्सा बन गए। इस मुद्दे पर सिर्फ वोटों की राजनीति हुई। वहीं ग्राम उत्थान समिति के अध्यक्ष रघुवीर मीणा का कहना है कि भविष्य में यदि स्लूस गेटों का मोटरीकरण कर उन्हें स्वचालित प्रणाली से संचालित किया जाए तो जल प्रबंधन और अधिक प्रभावी हो सकेगा। … यह खबर भी पढ़ें… राजस्थान में 20 साल बाद खत्म हुआ पानी का विवाद:लोग बोले- राजनीति ने लड़ाई बड़ी बनाई, नेता भड़काते हैं; ग्रामीणों के बीच पहुंची भास्कर टीम राजस्थान की 5 नदियों से मिलकर बना पांचना बांध, जिसके पानी के लिए 74 गांवों के बीच 20 साल लंबा संघर्ष चला। जब भी पानी छोड़ने की बारी आती 39 गांव उसके हक में तो 35 गांव विरोध में खड़े हो जाते। एक दूसरे के खिलाफ धरने पर बैठ जाते, लेकिन अब ये ‘जंग’ खत्म हो गई है। (पूरी खबर पढ़ें)

उदयपुर में दोपहर बाद रिमझिम बारिश:खंड वर्षा हो रही, मौसम ठंडा हो गया, इस पूरे सप्ताह बरसात की संभावना

उदयपुर में मंगलवार दोपहर बाद मौसम बदला और शहर में बारिश शुरू हुई। शुरूआत में हल्की बारिश थी और उसके बाद करीब 15 मिनट तक रिमझिम बारिश रही। इसके बाद शाम करीब साढ़े सात बजे तक एक बूंद नहीं गिरी। करीब तीन बजे से शहर के विभिन्न हिस्सों में हल्की बारिश का दौर शुरू हुआ, जिससे गर्मी और उमस से लोगों को कुछ राहत मिली। कलेक्ट्री रोड, देहलीगेट, कोर्ट चौराहा, चेतक सर्कल, अस्पताल रोड सहित आसपास के क्षेत्रों में रिमझिम बारिश हुई गई। बारिश के साथ आसमान में बादल छाए रहे और ठंडी हवाएं चलने से मौसम सुहावना हो गया। हालांकि बारिश का दौर ज्यादा देर तक नहीं चला, लेकिन नमी छा गई और लोगों ने राहत महसूस की। पिछले कई दिनों से शहर में तेज बारिश का इंतजार किया जा रहा है। तापमान गिरा सोमवार शाम शहर के कुछ क्षेत्रों में खंड वर्षा होने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम केंद्र के अनुसार सोमवार को उदयपुर का अधिकतम तापमान 29.7 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बारिश के बाद लोगों को गर्मी से कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन वातावरण में उमस अब भी बनी हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। यदि मानसून सक्रिय होता है तो अच्छी बारिश के साथ तापमान में और गिरावट आएगी तथा गर्मी और उमस से राहत मिलने की संभावना है।
इधर, मौसम विशेषज्ञ डॉ. आर.एस. देवड़ा के अनुसार उदयपुर सहित दक्षिणी राजस्थान में पूरे सप्ताह आसमान में बादल छाए रहने और रुक-रुककर हल्की खंड वर्षा होने के आसार हैं। इस दौरान तापमान में हल्की कमी बनी रहेगी, हालांकि हवा में नमी अधिक रहने से उमस का असर पूरी तरह खत्म होने की संभावना फिलहाल नहीं है। उदयपुर में जलाशयों का जलस्तर (आंकड़े मीटर में)
पिछले सात दिनों का उदयपुर का तापमान (डिग्री से.)

खबर हटके- फ्रिज जो लोगों को ठंडा करता है:हॉस्पिटल में बदले गए बच्चे 38 साल बाद परिवार से मिले; गांव जहां सांपों से खेलते हैं बच्चे

जापान में एक ऐसा फ्रिज बनाया गया है, जो लोगों को गर्मी से बचाता है। लोग इसमें बैठ सकते हैं। उधर, अमेरिका में 38 साल पहले हॉस्पिटल में बदले गए दो बच्चे, एक क्रिसमस गिफ्ट की वजह से अपने असली परिवार से मिले। वहीं, महाराष्ट्र में एक ऐसा गांव है, जहां बच्चे जहरीले सांपों के साथ खेलते हैं। राजस्थान में 15 साल की बच्ची ने 35 हजार माचिस की डिब्बियों का म्यूजियम बना लिया। वहीं, जापान में भूतिया घर में रात बिताने के लिए लोगों को हजारों रुपए दिए जा रहे हैं। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

एलडीसी पेपर लीक मामला, आरोपी टीचर समेत तीन सस्पेंड:3 आरोपी अब भी फरार, प्रिंसिपल पर अब तक कार्रवाई नहीं

जैसलमेर के स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल परीक्षा केंद्र पर हुई एलडीसी भर्ती परीक्षा में नकल के मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस रिपोर्ट और मुख्य आरोपी शिक्षक के न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेजे जाने के बाद जोधपुर के संयुक्त शिक्षा निदेशक ने आरोपी शिक्षक पदमसिंह को सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही परीक्षा कक्ष में ड्यूटी पर तैनात दो वीक्षक भीम सिंह और जालम सिंह को भी सस्पेंड किया गया है। हालांकि मामले में नामजद प्रिंसिपल पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, प्रिंसिपल समेत तीन आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। कमरा नंबर 10 में ड्यूटी देने वाले दोनों वीक्षक भी सस्पेंड शिक्षा विभाग ने परीक्षा कक्ष नंबर 10 में तैनात वीक्षक भीम सिंह और जालम सिंह को भी सस्पेंड कर दिया है। वहीं, सस्पेंड किए गए टीचर पदमसिंह का मुख्यालय सीबीईओ कार्यालय पोकरण तय किया गया है। विभागीय कार्रवाई पुलिस रिपोर्ट और आरोपी के जेल भेजे जाने के बाद की गई। 5 जुलाई को परीक्षा के दौरान सामने आया था नकल का मामला एलडीसी भर्ती परीक्षा के दौरान स्वामी विवेकानंद मॉडल उच्च माध्यमिक विद्यालय परीक्षा केंद्र पर नकल का मामला सामने आया था। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने परीक्षार्थी मनु कंवर और मुख्य आरोपी शिक्षक पदमसिंह को गिरफ्तार किया था। पदमसिंह के न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने की आधिकारिक सूचना मिलने के बाद जोधपुर के संयुक्त शिक्षा निदेशक ने उनके निलंबन के आदेश जारी किए। निलंबन अवधि के दौरान उनकी उपस्थिति सीबीईओ कार्यालय पोकरण में रहेगी। प्रिंसिपल समेत तीन आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से दूर पुलिस ने मुख्य आरोपी शिक्षक पदमसिंह और महिला परीक्षार्थी मनु कंवर को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन मामले में नामजद केंद्राधीक्षक एवं प्रिंसिपल उम्मेदसिंह तथा दोनों वीक्षक जालम सिंह और भीम सिंह अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) महेश बिस्सा ने बताया कि संयुक्त निदेशक ने दो वीक्षकों और शिक्षक को निलंबित कर दिया है तथा पदमसिंह का मुख्यालय सीबीईओ कार्यालय पोकरण बनाया गया है। प्रिंसिपल का निलंबन क्यों नहीं हुआ? मामले में नामजद केंद्राधीक्षक उम्मेदसिंह का निलंबन अभी तक नहीं हुआ है। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार प्रधानाचार्य (प्रिंसिपल) को निलंबित करने का अधिकार केवल माध्यमिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर के पास है। इसलिए उनके संबंध में आदेश वहीं से जारी होगा। — पेपर लीक से जुडी ये खबर भी पढ़ें … LDC परीक्षा विवाद,SP बोले-गिरफ्तारी के तीन दिन बाद आरोप बेतुके:कोर्ट ने दोबारा मेडिकल के लिए मना किया; पुलिस पर राजनीतिक दबाव नहीं जैसलमेर के चर्चित एलडीसी भर्ती परीक्षा नकल मामले में पुलिस हिरासत के दौरान प्रताड़ना के आरोप लगाने वाले आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। पूरी खबर पढ़िए

ऊर्जा मंत्री की बैठक में ही बत्ती गुल:हनुमान बेनीवाल का 'जंतर-मंतर', बच्चे से बोले- हमारे साथ आंदोलन करेगा; SHO की 'लंगड़ी टांग'

नमस्कार, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने बच्चे पर ऐसा क्या ‘जंतर-मंतर’ किया कि गोद से उतरने को तैयार नहीं। बिजली वाले मंत्रीजी की मीटिंग में ‘बत्ती गुल’ हो गई। कर्मचारियों को रिलीव करने के मामले में एक मंत्री महोदय भड़क उठे और CI साहब का ‘लंगड़ी टांग’ खेल वायरल हो गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. हनुमान बेनीवाल का ‘जंतर-मंतर’ दिल्ली के जंतर-मंतर पर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल को पूर्व जन्म का रिश्तेदार मिल गया। हुआ यूं कि कॉकरोच वालों के आंदोलन में नेताजी समर्थन देकर कार से निकल रहे थे। इस दौरान किसी समर्थक ने अपना बच्चा सांसद महोदय की गोद में दे दिया। लाड़-दुलार मिला तो बच्चा रमण गया। अब गोद से उतरने को तैयार नहीं। सांसद जी ने बच्चे के पापा को बुलाया। पापा का प्रयास फेल हुआ तो मां आई। बच्चा मां की गोद में भी जाने को तैयार नहीं। भीड़ से आवाज आई- बच्चे ने दबंग नेता को पकड़ लिया। नेताजी ने बच्चे को दुलारते हुए पूछा- हमारे साथ आंदोलन करेगा क्या? लोग हंसने लगे। बच्चे की मां से नेताजी कहा- इससे पूर्व जन्म का कोई रिश्ता है शायद। नेताजी की यही खासियत। यूथ पर उनका ‘जंतर-मंतर’ खूब चलता है। एक इशारे पर हनुमान सेना तैयार। हालांकि गोद में बैठाकर राजनीति सिखाने वाले कुछ नेताओं के साथ बेनीवाल जी का अनुभव अच्छा नहीं रहा। बड़े होकर वे कहीं और खेलने लगे। 2. ऊर्जा मंत्रीजी की ‘बत्ती फिर गुल’ बिजली वाले मंत्रीजी की बत्ती फिर से गुल हो गई। पहले जयपुर और अब कोटा। जयपुर में तो बत्ती तब गुल हुई थी जब रेलमंत्री आए हुए थे। पार्टी दफ्तर में ही भद्द पिट गई थी। रेलमंत्रीजी सौगातें गिना रहे थे। अचानक अंधकार छा गया। मोबाइलों की लाइट जलने लगी। घुस-मुस होने लगी। लोग दबी हंसी हंसने लगे। हालांकि उस मामले में बिजली कर्मचारी सस्पेंड किए गए, लेकिन दूसरा मौका जल्द आया। इस बार मंत्रीजी अपने गृह जिले कोटा में थे। जिला परिषद के हॉल में विधानसभा क्षेत्र सांगोद में किए गए काम गिनवा रहे थे। इस दौरान बत्ती गुल। हॉल में अंधेरा। किसी ने भागकर खिड़कियों के पर्दे हटाए। किसी ने दौड़कर जनरेटर शुरू किया। हीरे में अपनी चमक होती है। लेकिन यहां जनरेटर यूज करना पड़ा। 3. तालमेल का घालमेल सरकार विभागों के तालमेल से चलती है। लेकिन लगता है कि फिलहाल विभागों के बीच घालमेल चल रहा है। एक विभाग के अंडर आने वाली बॉडी में दूसरे विभाग के 22 पद स्वीकृत हैं। विभाग ने 4 कर्मचारियों को यह कहकर रिलीव कर दिया कि जगह नहीं है। तबादलों के दौर का असर हो सकता है। लेकिन अपने विभाग के कर्मचारियों को रिलीव होता देख दूसरे विभाग के मुखियाजी भड़क उठे। पारा हाई हो गया। जब पद स्वीकृत हैं तो रिलीव करने का क्या मतलब? उन्होंने अपने विभाग के सभी कर्मचारियों-अधिकारियों को APO कराया और वापस बुला लिया। हालांकि, इस पर सफाइयों का दौर चल रहा है। लेकिन खरी बात ये कि एक मुखियाजी ने बात दिल पर ले ली। 4. चलते-चलते.. CI साहब स्टार बन गए। चहुंओर उनकी तारीफ हो रही है। तारीफ का कारण अतिक्रमण हटाने के दौरान पत्थरबाजी का डंटकर सामना करने, या किसी वारंटी को पकड़ने, या तस्कर को डोडा-चूरा के साथ दबोचने, या चोर को थाना इलाके की सीमा के भीतर धर लेने, या बजरी माफिया का पर्दाफाश करने या पुल के नीचे लूट की साजिश रचते बदमाशों को डिटेन करने के लिए नहीं है। ये काम तो पुलिस करती रहती है। कानून के हाथ लंबे होते हैं। ऐसे में पुलिस कुर्सी पर बैठे-बैठे हाथ बढ़ाकर आरोपी को दबोचने में सक्षम है। मुश्किल तो पैरों के साथ है। पैरों को मौका-ए-वारदात तक जाना ही पड़ता है। निगरानी करनी पड़ती है। गश्त पर निकलना पड़ता है। भीलवाड़ा के जहाजपुर में भी SHO दयाराम गश्त पर निकले। नजरें पैनी थी। कान खुले थे। हर हलचल की नब्ज टटोलते हुए शहर में तफरी कर रहे थे। अचानक एक गली में हलचल दिखी। गाड़ी गली की तरफ मोड़ दी। पता चला कि कुछ बच्चे सड़क पर पाला बनाकर खेल रहे हैं। गार्जियन भी वहीं खुले में हवा खा रहे थे। बच्चे पाले की तरफ कांटी फेंकते और लंगड़ी टांग से ठुमकते हुए खेल में बिजी थे। एसएचओ साहब को अपना बचपन याद आ गया। गाड़ी से उतरे और बच्चों के साथ पाला खेलने लगे। कांटी फेंककर लंगड़ी टांग से पालों में पहुंचने का नियम उन्होंने बखूबी निभाया। किसी ने घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। लोगों ने इसे काफी पसंद किया। कभी-कभी जो काम दोनों टांगों से अपराधियों के पीछे भागकर नहीं होते, वे बच्चों के साथ एक टांग पर खेलकर हो जाते हैं। इनपुट सहयोग- प्रकाश तंवर (नागौर), नितिन शर्मा (कोटा), मनीष जैन (भीलवाड़ा)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

शेर की दहाड़ और पहेलियों से प्रेम की परीक्षा:हजारों राजकुमार हुए नाकाम, जानिए, राणा महेंद्र पर कैसे आकर्षित हुईं मूमल, एपिसोड-2

कल आपने पढ़ा कि राजकुमारी मूमल का हाथ थामने की चाह रखने वाले कई राजकुमार आए। लेकिन सभी मूमल के जादुई महल की पहेलियों में उलझ कर वापस लौट चुके थे। पढ़िए आगे की कहानी- मूमल इंतजार में थी उस राजकुमार के जो उसकी खूबसूरती से ज्यादा उसकी पहेलियों की गहराई को समझ सके। अपने मन में वह संकल्प लिए बैठी थी कि लौद्रवा का महल उसी का स्वागत करेगा जो बिना डरे काक महल की पहेलियों को सुलझा पाएगा। हजारों राजकुमारों के असफल होने के बाद, कहानी में प्रवेश हुआ अमरकोट के राणा महेंद्र का। महेंद्र निडर और साहसी योद्धा थे। एक दिन शिकार खेलते हुए वे भटककर काक नदी के तट पर पहुंच गए। वहां उन्होंने मूमल के जादुई महल की चर्चा सुनी। उनके साथियों ने उन्हें चेतावनी दी- राणा वहां जाना अपनी जान और इज्जत को दांव पर लगाना है। वह राजकुमारी सौंदर्य से ज्यादा अपनी पहेलियों के लिए जानी जाती है। राणा महेंद्र ने इस चेतावनी को चुनौती की तरह लिया। उन्होंने अपने ऊंट को एड़ लगाई और महल की ओर बढ़ गए। गहरा और डरावना था काक नदी का पानी चांदनी रात थी और रेगिस्तान की रेत चांदी की तरह चमक रही थी। राणा महेंद्र अपने ऊंट पर सवार काक नदी के किनारे पहुंच गए-ठहरो चीतल ! सामने देखो..वह रहा काक महल। जिसकी चर्चा पूरे राजपूताने में है, महेंद्र के चेहरे पर डर नहीं, एक जिज्ञासु मुस्कान थी। महेंद्र जैसे ही महल की ओर बढ़े, सामने एक विशाल जलाशय दिखाई दिया जिसमें चांद की परछाईं हिल रही थी। पानी गहरा और डरावना लग रहा था। इतना शांत पानी… और लहरें भी नहीं? महेंद्र सोच में पड़ गए। …और टूट गया जादुई महल का तिलस्म महेंद्र ने अपनी तलवार निकाली और पानी की सतह पर मारी। ‘खनक’ की आवाज आई। वे समझ गए कि यह पानी नहीं, बल्कि चमकाया हुआ पत्थर और कांच है। वे निडर होकर उस पर चल पड़े। मूमल ऊपर से यह सब देख रही थी। वह हैरान थी कि कोई इतनी जल्दी रहस्य समझ गया। महेंद्र महल के गलियारे में पहुंचे। अचानक रास्ते में उन्हें कांटों और झाड़ियों का ढेर दिखाई दिया, जिससे गुजरना असंभव लग रहा था। हवा का झोंका इन कांटों के बीच से होकर आ रहा है, अगर ये असली होते तो हवा रुक जाती, महेंद्र ने मन ही मन समझ बनाई, आंखें बंद कीं और सीधा उन कांटों की तरफ कदम बढ़ा दिए। जैसे ही वे उनसे टकराए, कांटे धुएं की तरह गायब हो गए। वह सिर्फ एक रेशमी परदे का भ्रम था। अपने आप खुल गए दरवाजे अगले कक्ष में उन्हें शेर की दहाड़ सुनाई दी और सैकड़ों परछाइयां उनकी ओर झपटीं। महेंद्र ने तलवार नहीं निकाली, बल्कि अपनी आंखें बंद कर लीं और अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी। उन्होंने महसूस किया कि यह सब हवा और शीशों का खेल है। उनकी इसी बुद्धिमानी और धैर्य को देखकर मूमल बेहद प्रभावित हुई। महेंद्र अंततः मूमल के कक्ष पर पहुंचे। दरवाजे अपने आप खुल गए। सामने मूमल खड़ी थी, जिसके चेहरे पर गर्व और खुशी साफ दिखाई दे रही थी। काक महल के भ्रम को केवल वही पार कर सकता था जिसकी आंखों पर अहंकार की पट्टी न हो। यहां रास्ता वही बना पाता है जो आंखों से नहीं, दिल से देखता है। आपका स्वागत है राणा महेंद्र, मूमल का चेहरा खुशी से चमक उठा। राजकुमारी, आपकी पहेलियां कठिन थीं, लेकिन सत्य हमेशा सीधा होता है। मैं यहां आपकी बुद्धिमानी को नमन करने आया हूं, राणा महेंद्र की नज़र मूमल के चेहरे पर जैसे ठहर गईं। महेंद्र और मूमल एक दूसरे की बुद्धिमत्ता पर मोहित थे। उस रात लौद्रवा की ठंडी रेत ने एक ऐसा मिलन देखा, जो देखते ही देखते अटूट प्रेम में तब्दील हो गया। कहते हैं प्रेम की परीक्षा अक्सर कठिन होती है। इस प्रेम कहानी को भी नियति का सामना करना पड़ा। मूमल -महेंद्र का प्रेम परवान पर था, लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ जिसने इस गहरे प्रेम को विरह में बदल दिया? जानिए अगले एपिसोड में….. (कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किया गया है। सोर्स : राजस्थानी साहित्य, लोक कथाएं व स्थानीय लोगों से बातचीत ) ….. राजस्थानी प्रेम कहानी…मूमल-महेंद्र की कहानी का पार्ट-1 रेगिस्तान में काक नदी के किनारे था मूमल का महल:अमरकोट के राजा और जैसलमेर की राजकुमारी का प्रेम; 4 एपिसोड में मूमल-महेंद्र की कहानी जैसलमेर के लौद्रवा की राजकुमारी मूमल और अमरकोट (वर्तमान पाकिस्तान) के राणा महेंद्र की प्रेम कहानी सदियों पुरानी है। इस कहानी को जानने के लिए दैनिक भास्कर जैसलमेर से 14 किलोमीटर दूर लौद्रवा गांव पहुंचा। पूरी स्टोरी पढ़िए…

झालावाड़ में नदी के उफान में पुल डूबा, रास्ता बंद:सीकर-बारां में दुकान-ऑफिसों में पानी घुसा; जयपुर-भरतपुर संभाग में भारी बारिश का अलर्ट

राजस्थान में एक बार फिर मानसून सक्रिय हो गया है। 9 जिलों में बारिश हुई। झालावाड़ जिले में तेज बारिश के कारण परवन नदी उफान पर है। यहां एक छोटा पुल और मंदिर डूब गया। बारां में मूसलाधार बारिश के कारण दुकानों में पानी घुस गया। सीकर में ट्रैक पर पानी भरने से ट्रेनों का शेड्यूल प्रभावित हुआ है। चूरू में 5 घंटे तक रुक-रुककर बरसात हुई। वहीं, जयपुर में सोमवार देर शाम से शुरू हुआ बारिश का दौर मंगलवार सुबह 7 बजे तक जारी रहा। मौसम विभाग के अनुसार अगले 3 दिन पूरे प्रदेश में तेज बारिश की संभावना है। बुधवार को जयपुर-भरतपुर संभाग में भारी बारिश की भी आशंका है। प्रदेश में फिर एक्टिव हुए मानसून के कारण दिन का तापमान 7 डिग्री तक गिर गया है। गर्मी-बारिश के बड़े अपडेट्स घर-ऑफिस डूबे, ट्रेनें प्रभावित: सीकर शहर व आसपास के इलाकों मंगलवार रात करीब डेढ़ बजे शुरू हुआ तेज बारिश का दौर सुबह 7.30 बजे तक जारी रहा। तेज बरसात के कारण पुलिस लाइन के क्वार्टर, कलेक्ट्रेट में पानी घुस गया। यार्ड में पानी भरने से सीकर-रेवाड़ी (54803) ट्रेन को लोहारू-रेवाड़ी के बीच कैंसिल किया है। रेवाड़ी-जोधपुर (14824) ट्रेन को रेवाड़ी-लोहारू के बीच कैंसिल किया गया है। शेखावाटी के झुंझुनूं और चूरू में सुबह से दोपहर तक रुक-रुककर बरसात हुई। झालावाड़ में नदी उफनी, मंदिर-पुल डूबे: हाड़ौती क्षेत्र के बारां और झालावाड़ जिले में मंगलवार सुबह से बारिश का दौर जारी रहा। झालावाड़ जिले के मनोहरथाना में परवन नदी में उफान से करीब एक छोटा पुल डूब गया। नदी का जलस्तर तीन फीट बढ़ने से एक मंदिर का भी काफी हिस्सा डूब गया। बारां में भी सुबह हुई मूसलाधार बारिश के कारण शहर के अधिकतर इलाकों में जलभराव हो गया। 9 शहरों में बरसात: मंगलवार को सीकर, झुंझुनूं, चूरू, झालावाड़, बारां, कोटपूतली-बहरोड़, जयपुर, कोटा, उदयपुर में बरसात हुई। सबसे ज्यादा बारिश सीकर में 90 मिमी रिकॉर्ड हुई है। वहीं, सोमवार को करौली के टोडाभीम में एक इंच से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई। बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट हुई है। जयपुर का अधिकतम तापमान 3 डिग्री तक लुढ़ककर 34.4 डिग्री दर्ज हुआ। भारी बारिश की भी आशंका: मंगलवार को प्रदेश के 33 जिलों में तेज बारिश की चेतावनी है। वहीं, बुधवार से कोटा, अजमेर, उदयपुर, जयपुर, भरतपुर, जोधपुर व बीकानेर संभाग में मानसून सक्रिय रहेगा। भरतपुर और जयपुर संभाग में भारी बारिश होने की आशंका है। वहीं, राज्य में फिर से सक्रिय हुए मानसून के बाद से तापमान में भी गिरावट आई है। राजस्थान में बारिश की PHOTOS…
…. बारिश की ये खबर भी पढ़िए… सीकर में 3.5 इंच से ज्यादा बारिश,सीकर-रेवाड़ी ट्रेन आंशिक रद्द:पुलिस क्वार्टरों में भरा गंदा पानी, सीवरेज ओवरफ्लो; अगले 2 दिन बारिश का अलर्ट मानसून की पल-पल की अपडेट के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

पेपर लीक मुद्दे पर राहुल गांधी स्पीकर से मिले:कहा- लोकसभा में चर्चा हो; खड़गे बोले- सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा, चिट्ठी लिखी

संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही बुधवार तक स्थगित कर दी गई। इसके पहले मंगलवार सुबह 11 बजे जैसे ही दोनों सदनों में कार्यवाही शुरू हुई विपक्ष ने NEET पेपर लीक पर चर्चा की मांग की, प्लेकार्ड दिखाए और नारेबाजी की। भारी हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही पहले 12 बजे तक और इसके बाद दोपहर 2 बजे तक स्थगित की गई थी। सदन के बाहर आकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हमें संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा है, लोकतंत्र में ऐसा करना गलत है। वहीं, नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल और सैयद नासिर हुसैन ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत काम रोकने का नोटिस दिया है। उन्होंने NEET UG 2026 पेपर लीक मामले पर तुरंत चर्चा कराने की मांग की है। वहीं, इससे पहले संसद भवन में NDA संसदीय दल की बैठक हुई। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बैठक में पीएम मोदी ने बताया कि पेपर लीक मामले में दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। मानसून सत्र के दूसरे दिन की तस्वीरें…
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