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कैरी के अचार से किसान को सालाना 8-लाख की कमाई:विदेशों तक है डिमांड, अरावली की पहाड़ियों में 4 बीघा में लगाया आम का बाग

बेहतर उत्पादन की उम्मीद में किसान नए-नए बीज और पौधों की वैरायटी की तलाश में रहते हैं। खराब बीज और पौधों से न केवल किसानों की उम्मीदें टूटती हैं, बल्कि नुकसान भी होता है। ऐसे समय में सवाल उठता है कि जब नर्सरियां और रिसर्च सेंटर नहीं थे, तब किसान अच्छी पैदावार कैसे लेते थे? दरअसल, किसान अपनी अगली फसल के लिए खुद ही बीज तैयार करते थे। यही परंपरा आज भी बताती है कि अपनी फसल से तैयार बीज भरोसेमंद और टिकाऊ होता है। अरावली की पहाड़ियों में वर्षों पहले बागवानी का ऐसा ही कल्चर डेवलप हुआ। गुठली (बीज) से तैयार आम के बगीचे ही लोगों के जीवन का आधार हैं। किसान पीढ़ियों से इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। पुराने बगीचों से मिलने वाली गुठलियों से नए पौधे बना रहे हैं और बगीचों का विस्तार कर रहे हैं। इसलिए सदियों पुराना कैरी का स्वाद आज भी बरकरार है। चार बीघा के एक बगीचे से तैयार कैरी के अचार से किसान को सालाना करीब आठ लाख रुपए से ज्यादा की कमाई हो रही है। इस अचार की डिमांड विदेशों में भी है। म्हारे देश की खेती में आज बात झुंझुनूं के किसान की… झुंझुनूं जिले में नवलगढ़ के लोहार्गल निवासी किसान दशरथ सिंह शेखावत (55) के पास चार बीघा में आम का बगीचा है। बगीचे में करीब 130 पेड़ हैं। इनमें करीब 30 पेड़ 100 साल पुराने हैं, वहीं करीब 70 पेड़ 50 साल पुराने हैं। पहले वे कैरी (कच्चा आम) मंडी में बेचते थे, लेकिन अच्छा दाम नहीं मिलने पर उन्होंने कैरी का अचार बनाना शुरू कर दिया। पिछले सात साल से उनके बड़े बेटे शिवराज सिंह शेखावत (22) इस कारोबार को आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं, छोटा बेटा हंसराज (18) ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है। जनवरी में आते हैं फूल, मई-जून में होती है तुड़ाई दशरथ सिंह बताते हैं- आम के पेड़ों पर जनवरी में फूल आना शुरू हो जाते हैं। इसके बाद मार्च में कैरी तैयार होने लगती है। मई, जून और जुलाई, तीन महीने कैरी का सीजन रहता है। मई में कैरी पूरी तरह से पक कर तैयार हो जाती है। जून की शुरुआत में बगीचों में आम के पेड़ों पर लगी कैरी को पकने से पहले अचार डालने के लिए तोड़ना शुरू कर दिया जाता है। पेड़ से कैरी को तोड़ने के बाद उनकी कटिंग की जाती है। कैरी तोड़ने, उसकी कटिंग, मिक्सिंग से लेकर पैकिंग करने का परिवार के लोग मिलकर करते हैं। एक पेड़ से दो क्विंटल कैरी एक पेड़ से औसतन करीब दो क्विंटल कैरी मिल जाती है। मंडी में कैरी का भाव करीब 100 रुपए प्रति किलो मिलता है, जबकि उसी कैरी का अचार बनाकर करीब 200 रुपए प्रति किलो में बेचा जाता है। इससे आमदनी भी दोगुनी हो जाती है। अब तीन बीघा में तैयार कर रहे नया बगीचा किसान ने बताया- पहले आम के बगीचे के बीच में गेहूं जैसी दूसरी फसल भी उगा लेते थे, लेकिन जैसे-जैसे पेड़ बड़े हुए, उनके नीचे दूसरी फसल होना बंद हो गई। अब उन्होंने तीन बीघा जमीन पर आम का नया बगीचा तैयार करना शुरू किया है। इसमें गुठली से तैयार करीब 60 पौधे लगाए गए हैं। सभी पौधों के बीच 20×20 फीट की दूरी रखी गई है, ताकि पेड़ों को पर्याप्त जगह मिल सके। लोहार्गल की कैरी का स्वाद ही इसकी पहचान शिवराज सिंह शेखावत बताते हैं कि गुठली से तैयार होने वाले लोहार्गल के आम के पौधे इस क्षेत्र के बाहर आसानी से नहीं पनपते। यहां की कैरी में मिलने वाले रेशे, उसका खट्टा-मीठा और चटपटा स्वाद इसे अलग पहचान देते हैं। लोहार्गल में जो अचार की क्वालिटी मिलती है, वो पूरे राजस्थान में कहीं भी नहीं है। यही वजह है कि एक बार यहां का अचार खाने वाले लोग दोबारा खरीदने के लिए लोहार्गल जरूर आते हैं। स्वाद ने अचार को बनाया ब्रांड शिवराज सिंह शेखावत बताते हैं- बेहतरीन स्वाद ने कुछ ही सालों में लोहार्गल के अचार को ब्रांड बना दिया। धीरे-धीरे कई परिवारों ने इसे घर से ही बनाकर बेचना शुरू कर दिया। साल 1990 आते-आते जब बाजार पर मार्केटिंग कंपनियों की नजर पड़ी तो पैकिंग में बिकने लगा। आज कम से कम 10 से 12 कंपनियां रजिस्टर्ड ब्रांड से लोहार्गल का अचार बेच रही हैं। वहीं 300 से ज्यादा लोग इस कारोबार से जुड़े हैं। नेचुरल तरीके से तैयार होती है कैरी कैरी के छिलके थोड़े मोटे होते हैं, जो स्वाद को और भी बेहतर बनाते हैं। इस कैरी में कोई केमिकल नहीं होता, ऑर्गेनिक तरीके से पकती है। नेचुरल खट्टापन होने के कारण इसमें सिरका नहीं मिलाना पड़ता है। सबसे खास बात ये है कि मसालों और सरसों के तेल का स्वाद कैरी के अंदर तक जालों में समा जाता है। जालेदार होने के कारण हर पीस में एक जैसा स्वाद बनता है। जैसे ही डिब्बे का ढक्कन खुलता है, अचार की खुशबू फैल जाती है। तीर्थयात्री लेकर जाते हैं अचार लोहार्गल तीर्थ स्थल पर राजस्थान ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु आते हैं। शिवराज बताते हैं कि यहां आने वाले कई लोग कम से कम पांच किलो अचार अपने साथ लेकर जाते हैं। कई ग्राहक तो सिर्फ अचार खरीदने के लिए ही आते हैं। फोन पर भी ऑर्डर मिलते हैं और जहां तक संभव होता है, वहां तक अचार की डिलीवरी भी की जाती है। शेखावाटी क्षेत्र सहित जयपुर, हनुमानगढ़, बीकानेर, सीकर, गुरुग्राम, कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, हरियाणा, मध्य प्रदेश, सूरत सहित कई जगह अचार की डिमांड रहती है। वहीं शेखावाटी से खाड़ी देशों में रहने वाले लोग भी अपने साथ यह अचार जरूर लेकर जाते हैं। इनपुट सहयोग : राजकुमार शर्मा, नवलगढ़ (झुंझुनूं) … खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… बागवानी के लिए बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़ी:अब फलों से हर साल 10 लाख की कमाई, नवाचार के लिए सरकार करेगी सम्मानित खेती के लिए बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़ दी। दिल्ली से गांव लौटकर 10 बीघा में बागवानी करने की शुरुआत की। खेत में अलग-अलग वैरायटी के पौधों से ट्रायल किया। पूरी खबर पढ़िए

पहचान छिपाकर रह रहे पॉक्सो के आरोपी को किया गिरफ्तार:पुलिस ने 15 हजार का रखा था इनाम, अलग-अलग जगह काटी फरारी

पुलिस ने पॉक्सो के मामले में करीब छह महीने से फरार चल रहे 15 हजार के इनामी और स्थायी वारंटी आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग स्थानों पर रह रहा था और लगातार पुलिस से बचने का प्रयास कर रहा था। पुलिस ने बताया कि परिवादी की शिकायत पर बजाज नगर थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया था। मामला दर्ज होने के बाद से ही आरोपी अपने दर्ज पते से फरार हो गया था। स्थायी वारंट जारी, 15 हजार का इनाम घोषित आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन उसके फरार रहने पर न्यायालय से उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी कराया गया। बाद में उसकी गिरफ्तारी पर 15 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया। आरोपी एक स्कूल में स्वीमिंग कोच था और छात्रा से छेड़छाड़ करने का आरोप था। जांच में सामने आया कि आरोपी पिछले करीब छह महीने से अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग स्थानों पर रह रहा था। लगातार निगरानी के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है। पुलिस मामले में अग्रिम अनुसंधान कर रही है।

एक ही कमरे में चल रही आठ क्लासेज, टीचर्स-स्टूडेंट मजबूर:ना शौचालय, ना पानी की टंकी, बारिश में टपकती है छत; हेडमास्टर बोले- ठेकेदार की लापरवाही

टपकती छत, दीवारों पर पड़ी दरारें, ऑफिस रूम में ही चलती 8 कक्षाएं 99 नौनिहालों का भविष्य संवार रही है। कारण सिर्फ निर्माण कार्य में देरी। मामला है नागौर जिले डेगाना की राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल का। कक्षा 8 तक के स्कूल में 99 छात्रों का नामांकन, पढ़ाई के लिए सिर्फ एक कमरा, इस कमरे में क्लास ही नहीं ऑफिस वर्क भी किया जाता है। पहले देखें स्कूल के PHOTOS डेडलाइन जून तक, अब तक महज 40 फीसदी काम
दरअसल, स्कूल बिल्डिंग जर्जर हो चुकी थी। तीन कमरों का रिनोवेशन करना था। फरवरी में निर्माण एजेंसी को काम सौंपा गया, डेडलाइन जून तक थी। लेकिन, जुलाई तक महज 40 फीसदी ही काम पूरा हो पाया है। ऐसे में बच्चों को एक ही रूम में क्लास लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इतना ही नहीं बारिश के मौसम में यहां भी छत से पानी टपकता है, ना छात्रों के लिए पानी की टंकी, ना ठीक से बने शौचालय है। ऐसे में छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल हेडमास्टर मुकेश ने बताया- स्कूल में 99 छात्र-छात्राओं का नामांकन है और तीन कमरों की मरम्मत का कार्य ठेकेदार की लापरवाही के कारण धीमी गति से चल रहा है, जिसके चलते आठों कक्षाओं का अध्ययन एक ही ऑफिस रूम में करवाया जा रहा है। इससे शिक्षण व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। डेगाना के उच्च माध्यमिक स्कूल के पीईईओ सुरेश लोमरोड ने बताया- स्कूल के तीन कमरों की मरम्मत का कार्य फरवरी में एक निर्माण एजेंसी को सौंपा गया था। निर्धारित समय सीमा के अनुसार, ये काम जून के अंत तक पूरा होना था, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के चलते अब तक केवल लगभग 40 प्रतिशत ही कार्य हो पाया है। पीईईओ जानकी देवी ने बताया- फरवरी में जर्जर अवस्था के चलते स्कूल भवन को मरम्मत के लिए दिया गया था। पिछले चार महीने से इस स्कूल के छात्रों को एक किमी दूर राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल डेगाना में अध्ययन कराया गया था। ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से स्कूल का शीघ्र निरीक्षण कर निर्माण कार्य समय पर पूरा कराने, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और छात्रों के लिए सुरक्षित और बेहतर शिक्षण वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की है। हालांकि, पीईईओ जानकी देवी ने आश्वासन दिया कि स्कूल का निरीक्षण कर पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई की व्यवस्था सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।

भीलवाड़ा में आज 5 घंटे तक बिजली कटौती:सुबह 9 बजे से बंद होगी सप्लाई, कई इलाके होंगे प्रभावित

भीलवाड़ा के अलग-अलग क्षेत्रों में शुक्रवार को रखरखाव कार्य के चलते 3 से 5 घंटे तक बिजली बंद रहेगी। बसंत विहार और इंडस्ट्री फीडर से जुड़े इलाकों में सुबह 9 से 12 बजे और दोपहर 1 से 4 बजे तक तीन-तीन घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी, जबकि एमटीएम जीएसएस से जुड़े क्षेत्रों में सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक पांच घंटे का पावर कट रहेगा। बसंत विहार फीडर के क्षेत्र प्रभावित
एवीएनएल के सहायक अभियंता नीरज शर्मा ने बताया कि 11 केवी बसंत विहार फीडर से जुड़े ओल्ड आरटीओ रोड, बर्फ फैक्ट्री, चारभुजा स्क्रैप, मिर्ची मंडी, देशी शराब ठेका, होटल हर्ष पैलेस, गांधीनगर, गाडरी खेड़ा, बीएसएल फैक्ट्री, कांचीपुरम, निम्बार्क आश्रम, बसंत विहार पार्क के आसपास, कमला निवास, बैंक ऑफ बड़ौदा, हर्ष दीप, लैंडमार्क होटल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सर्किट हाउस, एमटीएम कॉलोनी और पार्श्वनाथ कॉलोनी सहित अन्य क्षेत्रों में सुबह 9 से 12 बजे तक बिजली बंद रहेगी। इंडस्ट्री फीडर से जुड़े क्षेत्रों में दोपहर का पावर कट
जवाहर नगर, लेबर कॉलोनी, प्रताप नगर पुलिस चौकी, लेबर कॉलोनी स्कूल, सब्जी मंडी, घोसी मोहल्ला, छाबड़ा सिनकोटेक्स, वाटर वर्क्स के सामने का क्षेत्र और इंडस्ट्री फीडर से जुड़े इलाकों में दोपहर 1 से शाम 4 बजे तक बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। एमटीएम जीएसएस क्षेत्र में 5 घंटे कटौती
33/11 केवी एमटीएम जीएसएस से जुड़े पार्श्वनाथ सोसायटी, नवकार ग्रीन, एमटीएम कॉलोनी और एमआरएम जीएसएस से संबंधित क्षेत्रों में सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक बिजली बंद रहेगी।

खेल मंत्रीजी के इलाके में 'पा नी सा..':ड्रम तक पहुंची DIG साहब की टीम; किसान की तोहमत-SDM 'रील-प्रेमी'

नमस्कार जयपुर में खेलमंत्रीजी का निशाना ड्रेनेज के मामले में चूक गया। राज्यसभा सांसद और रिटायर्ड IAS साहब को पुराने दिन याद आ रहे हैं। चौमूं SDM पर किसान ने बड़ी तोहमत लगाई और एंटी नारकोटिक्स वाले DIG साहब की टीम ड्रम तक पहुंच गई। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. खेल मंत्रीजी का ‘ड्रेनेज प्लान’ खेल मंत्रीजी खिलाड़ी रहे हैं। उनका निशाना अचूक है। खिलाड़ी जब राजनेता बनता है तो ईमानदार होता है। उसके जेहन में खेल नियम हमेशा रहते हैं। वह फाउल से डरता है। जबकि नेता ‘बड़े खिलाड़ी’ होते हैं। उनके पास हर मर्ज की दवा होती है। हर समस्या का तोड़ होता है। तोड़ न हो तो तोड़ का आश्वासन का जरूर होता है। खेल मंत्रीजी उन ‘बड़े खिलाड़ियों’ जैसे नहीं। आज भी वे समर्पित खिलाड़ी की तरह राजनीति की बिसात पर चल रहे हैं। मंत्रीजी ने अपने क्षेत्र में 500 करोड़ के ड्रेनेज प्लान का ऐलान किया था। जनता को आस जगी कि इस बार बारिश में सड़कें दरिया नहीं बनेंगी। लेकिन मानसून के एक ही झटके ने झोटवाड़ा की हालत झर-झर कर दी। लोग रील बनकर डालने लगे। तोहमतें लगाने लगे। ड्रेनेज प्लान पर पानी फिरता दिखा। झोटवाड़ा ही क्यों? सारे शहर का यही हाल है। ठेकेदार कैसे इतनी खामियां कर जाते हैं। इतने साल में ड्रेनेज के हाल क्यों नहीं सुधरे। जबकि निगम और विकास प्राधिकरण करोड़ों फूंक रहे हैं। व्यवस्था में ही छेद हो सकता है। राठौड़ साहब गोली मारकर बोतल उड़ा देते हैं। टारगेट बोर्ड के बीचों-बीच निशाना लगा सकते हैं। लेकिन राजनीति में अच्छे-अच्छों का निशाना चूक जाता है। 2. तस्वीरें कुछ बोलती हैं.. आदमी जब किसी मुकाम पर पहुंचता है तो उसे सफर के शुरुआत की बहुत याद आती है। बीते दौर में किया हुआ संघर्ष बहुत प्रिय लगने लगता है। सतीश पूनियाजी ने एक पोस्ट शेयर की। एबीवीपी का कार्यक्रम है। पूनिया शपथ ले रहे हैं। बिल्कुल नौजवान। पहचान पाना मुश्किल। पूनियाजी तस्वीर शेयर करते हुए प्रसिद्ध गीतकार शैलेंद्र के गीत की लाइन लिखते हैं- कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन.. एबीवीपी के उन शुरुआती दिनों से लेकर राज्यसभा की सीढ़ियां चढ़ने तक पूनियाजी ने क्या कुछ सहा होगा, क्या-कुछ किया होगा। कभी उठे होंगे, कभी गिरे होंगे, कहीं जीते होंगे, कुछ हारे होंगे। किसी के भले बने होंगे, किसी के लिए बुरे हो गए होंगे। रास्ते भर सिर्फ बहारें तो आती नहीं। कंकड़ पत्थर शूल धूल आंधी-तूफान बारिश ओले..सारे मौसम आते हैं। फिर भी शिखर पर पहुंचकर आदमी को शैलेंद्र का गीत ही याद आता है- कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन.. बीते दिनों का लौटना मुमकिन नहीं, लेकिन उन दिनों की यादें जेहन में अंत तक रहती हैं। ऐसी ही एक पोस्ट सोशल मीडिया पर रिटायर्ड IAS रोहित कुमार सिंह ने भी शेयर की है। उन्होंने 1983 में अपनी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान बनाए कुछ नोट्स के पन्ने शेयर किए हैं। उन्होंने इन पन्नों को अनमोल बताया है। उस दोस्त को धन्यवाद दिया, जिसने इन्हें संभालकर रखा। तस्वीर हो या पन्ना अगर बीते दौर की याद ताजा कर दे, हंसा दे या फिर रुला दे तो समझिए आप अभी जिंदा हैं और सफर जारी है। मुंशी प्रेमचंद ने ठीक ही कहा था- अतीत कितना भी संघर्ष भरा रहा हो, यादें मधुर ही होती हैं… 3. SDM साहब का रील प्रेम चौमूं के SDM साहब रील प्रेमी बताए जाते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी रील्स की भरमार है। रील्स में साहब लोगों की समस्याएं सुलझाते दिखते हैं। बुजुर्गों का आशीर्वाद पाते दिखते हैं। खरी बात कहते नजर पड़ते हैं। लोगों से कहते हैं कि फलां काम न बने तो सीधे मेरे कोर्ट में आ जाना। बहू गर्म रोटी न दे तो मेरे कोर्ट में आ जाना। माता-पिता की इज्जत नहीं करता तो मेरे कोर्ट… उनकी रील्स की चर्चा है। हालांकि रील्स बनाकर अपने जनसेवक अवतार का प्रदर्शन करना नेताओं का काम है। उन्हें लोगों के वोट चाहिएं। इसलिए नेता रील बनाते हैं। अफसर क्यों रील बनाए? उसका तो काम ही है जनता के काम करना। लेकिन डिजिटल युग है तो कोई बात नहीं। मैसेज तो जा रहा है कि अच्छा काम हो रहा है। आजकल वैसे भी बड़े मंचों पर सम्मानित वही होते हैं जो रील्स में काम करते नजर आते हैं। इधर रील्स बनाने वाले अफसर को एक लोकल नेताजी पचा नहीं पा रहे हैं। स्थानीय नेता किसान भी हैं। अपना मामला लेकर गए थे एसडीएम के पास। शिकायत लेकर लौटे। उन्होंने एसडीएम साहब के रील प्रेम का भेद खोल दिया। बोले-साहब कोई काम ढंग का नहीं करते। सेवा शिविर में वक्त पर नहीं पहुंचते। एक लड़का साथ रखते हैं जो उनकी रील बनाकर सोशल मीडिया पर डालता रहता है। हालांकि नेताजी को यह पचता नहीं होगा कि कोई अफसर खुद नेता बनकर घूमे। बाकी, सच क्या है झूठ क्या है राम जाने। 4. चलते-चलते.. बच्चन साहब की फिल्म ‘शराबी’ में गीतकार अंजान ने बहुत ही सुनहरी शब्दों में नशेबाजों को डिफेंड किया। गीतकार ने लिखा है- नशे में कौन नहीं है मुझे बताओ जरा। इस पंक्ति के बाद गीतकार नशे के प्रकार गिनाते हैं- किसी को हुस्न-जवानी का नशा, किसी को इस बात का, किसी को उस बात का नशा। फेहरिस्त लंबी है। बहरहाल, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के DIG विकास कुमार ने भी कविता के जरिए बताया कि उन्हें भी कुछ नशों की लत है। डीआईजी साहब कहते हैं- एक नशा है, सेनानी खड़े कई लाख कर देंगे। एक नशा है कि नशाखोरों की खत्म साख कर देंगे एक नशा है कि नशे की निशा का नाश कर देंगे और एक नशा है कि नशे को जलाकर राख कर देंगे। ईंधन बचाने के लिए डीआईजी साहब साइकिल से दफ्तर पहुंचते नजर आए थे। लेकिन नशा तस्करों और नशे के नेटवर्क तक उनके पहुंचने की स्पीड सुपर-सोनिक है। राजस्थान मध्यप्रदेश में बेखौफ नेटवर्क फैलाने वाले नशा तस्कर सुनील रावत मीणा को उनकी टीम ने मध्यप्रदेश के नीमच से आधी रात को उठा लिया। खौफ ऐसा कि कुख्यात तस्कर ने ड्रम के पीछे छुपकर बचने की कोशिश की। उसे बिल से निकालकर दफ्तर में पेश किया गया है। इनपुट सहयोग- मनोज सैनी (चौमूं, जयपुर), ओम टेलर (पाली)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

फौजी के आखिरी शब्द- बहुत दर्द हो रहा…:पत्नि से कहा- अब बोला नहीं जा रहा, बेटियों से बात नहीं कर पाए; लुधियाना में अंतिम संस्कार

लुधियाना के रहने वाले भारतीय सेना के जवान सिकंदर सिंह का दिल्ली में ड्यूटी के दौरान अचानक हार्ट अटैक आने से निधन हो गया। शुक्रवार सुबह जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव गगड़ा लाया गया। पार्थिव शरीर को देखते ही पत्नी और बेटी रोने लगे। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ा। सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें भाई ने मुखाग्नि दी। सिकंदर भारतीय सेना की 5 सिख लाइट इन्फैंट्री में तैनात थे। वह अपने पीछे पत्नी और दो बेटियों को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी से लास्ट बार 4 दिन पहले बात हुई थी। तब उन्होंने कहा था कि सीने में दर्द हो रहा है। वह बेटियों से भी बात नहीं कर पाए थे। अंतिम यात्रा के PHOTOS… पत्नी बोलीं- 4 दिन पहले ही फोन पर बात हुई सिकंदर की पत्नी रमनजीत कौर ने बताया कि उन्हें अपने पति पर बेहद गर्व है। उनकी दो बेटियां हैं, जिनकी परवरिश और पढ़ाई को लेकर वह हमेशा चिंतित रहते थे। जनवरी में वह 45 दिन की छुट्टी पर घर आए थे और मार्च में फिर ड्यूटी पर लौट गए। चार दिन पहले उनकी आखिरी बार फोन पर बात हुई थी। पत्नी ने आगे बताया – आखिरी बातचीत के दौरान उन्होंने सिर्फ इतना कहा था- मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मुझसे बोला नहीं जा रहा। इसके बाद वह बच्चों से भी बात नहीं कर पाए। पति ने शादी बाद एमए-बीएड तक पढ़ाया पत्नी ने बताया कि उनके पति ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उनकी पढ़ाई पूरी करवाई। पति ने शादी के बाद मुझे एमए और बीएड तक पढ़ाया। आज मुझे अपने पति की शहादत पर गर्व है। बस सरकार से यही गुजारिश है कि मेरे बच्चों के सिर पर हमेशा अपना हाथ रखे और उनके भविष्य का सहारा बने। पढ़िए जवान के बारे में… सिकंदर सिंह ने 16 साल देश की सेवा की जगराओं के पास स्थित गांव गगड़ा निवासी नायक सिकंदर सिंह (33) करीब 16 वर्ष पहले एक बेहद साधारण मजदूर परिवार से निकलकर भारतीय सेना में भर्ती हुआ थे। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। तीन भाइयों में सबसे बड़े थे सिकंदर सिकंदर सिंह ने छोटी उम्र से ही बड़ी जिम्मेदारियां संभाल ली थीं। तीन भाइयों में सबसे बड़े होने के नाते सिकंदर सिंह ने बहुत ही कम उम्र में पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक संबल दिया था। पिता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उन्होंने घर की जिम्मेदारियों को उठाया। करीब 5 साल पहले ही सिकंदर सिंह का विवाह हुआ था। दो बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। उनकी एक ढाई साल की और एक आठ महीने की बेटी है।

बेटी की गवाही से मां के हत्यारे पिता को उम्रकैद:बेटा नहीं होने के ताने मारता था, गला घोंटकर मारा, कोर्ट ने कहा- ये विश्वास का संबंध था

दो बेटियां होने से नाखुश पति ने अपनी पत्नी की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। पाली जिले में मारवाड़ जंक्शन में 3 साल पहले हुए इस कत्ल में कोर्ट ने हत्यारे को उम्रकैद की सजा सुनाई है। हत्यारे पिता को सजा दिलाने में छोटी बेटी (10) की गवाही अहम साबित हुई, जो इस क्राइम सीन की चश्मदीद भी थी। मासूम बच्ची ने ही कोर्ट को बताया कि पिता शराब पीकर मां से मारपीट करता था। बेटा पैदा नहीं करने पर ताने मारता था। सुनवाई के बाद 8 जुलाई को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा ये वैवाहिक और विश्वास का संबंध था। पढ़िए- हत्या की वारदात से लेकर कोर्ट के फैसले की पूरी कहानी… पति कर्ज से डूबा तो स्कूल में पोषाहार बनाकर पेट पालती पत्नी 15 जुलाई, 2023 को पांचेटिया गांव के तेजसिंह ने मारवाड़ जंक्शन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी 34 साल की बहन अनिता कंवर की शादी करीब 14 साल पहले गांव में ही किशनसिंह के साथ की थी। शादी के बाद अनिता कंवर ने दो बेटियों को जन्म दिया, जिससे उसका बहनोई किशनसिंह नाराज था। एफआईआर में आरोप लगाए गए कि किशनसिंह नशे में उसकी बहन के साथ मारपीट कर बेटा पैदा नहीं करने के ताने देता था। किशन बेरोजगार था। उस पर काफी कर्ज हो चुका था। पत्नी अनिता कंवर पति का कर्ज उतारने व परिवार का गुजारा करने के लिए स्कूल में पोषाहार बनाती थी। किशनसिंह के कारण अनिता कंवर ने अपनी बड़ी बेटी को ननिहाल भेज दिया था। रात में पत्नी की हत्या, सुबह लौट कर कहानी रची मारवाड़ जंक्शन थाना पुलिस की चार्जशीट में खुलासा हुआ कि 14 जुलाई, 2023 की रात 10 बजे आरोपी किशनसिंह ने बेटा पैदा नहीं करने पर पत्नी अनिता कंवर से मारपीट की। रात में मौका पाकर आरोपी ने गला घोंटकर अनिता कंवर को मार डाला और बाइक लेकर घर से निकल गया। रात उसने एक रिश्तेदार के घर बिताई। अगले दिन 15 जुलाई की सुबह आरोपी उसी रिश्तेदार के साथ अपने घर पहुंचा। उसने घटनास्थल पर पत्नी का शव पड़ा देख पुलिस को गुमराह करने के लिए कहा कि उसकी पत्नी की हत्या किसने की? आरोपी ने इस हत्या से अनजान बनने के लिए पुलिस और गांव वालों के सामने झूठी कहानी बनाई। उसने बताया कि वह कंप्रेशर खरीदने किशनगढ़ जाने वाला था। रात में रास्ते में उसकी बाइक स्लिप हो गई तो उसे चोट आ गई थी। पुलिस ने मृतक अनिता कंवर के भाई की रिपोर्ट के आधार पर घटनास्थल से ही आरोपी किशनसिंह को डिटेन कर लिया था। मृतका के गले पर खरोंच व चोटों के निशान थे। पुलिस ने आरोपी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर कोर्ट में चार्जशीट पेश की। इस केस में मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटना की चश्मदीद बेटी अहम गवाह बनी। बेटी ने दी गवाही- बेटा पैदा नहीं करने पर मां को पीटते थे पापा अभियोजन के अनुसार घटना के वक्त मृतका की छोटी बेटी घर पर थी। वह एकमात्र चश्मदीद भी थी। बच्ची ने कोर्ट को बताया कि वह माता-पिता के बीच में लोन की किश्ते जमा कराने एवं उसके कोई भाई नहीं होने के कारण झगड़ा होता रहता था। घटना वाले दिन 14 जुलाई की सुबह पापा ने मां से झगड़ा किया था। भाई (बेटा) पैदा नहीं करने का ताना मारा और फिर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद काम पर निकल गए। मां भी स्कूल पोषाहार बनाने के लिए चली गई थी। रात में करीब 8 से 9 बजे के बीच पापा शराब पीकर घर आए। मैं रात में हॉल में सो गई। पापा-मम्मी कमरे में सो रहे थे। रात करीब 01.30 बजे प्यास लगने पर नींद खुली तब देखा कि पापा बाहर जा रहे थे। मैंने आवाज दी कि पापा रुको कहां जा रहे हो, लेकिन वो निकल गए। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और घटना की कड़ी से कड़ी जुड़ी जज ने कहा- पत्नी की हत्या करना गंभीर अपराध जज राजेंद्र कुमार ने फैसले में लिखा कि अभियुक्त ने अपनी ही पत्नी, जिसके साथ उसका वैवाहिक एवं विश्वास का संबंध था, उसकी गला घोंटकर हत्या की है। वैवाहिक संबंधों में इस प्रकार का विश्वासघात अत्यंत गंभीर प्रकृति का अपराध है, जो न केवल एक व्यक्ति के जीवन का अंत करता है, बल्कि परिवार एवं समाज पर भी गहरा प्रतिकूल प्रभाव डालता है। ऐसे में कोर्ट ने अभियुक्त किशनसिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। …. क्राइम की ये खबर भी पढ़िए… जयपुर- बेटी ने पहले टोना-टोटका करवाया, फिर मां का मर्डर,VIDEO:घर में काली गुड़िया में आग लगाई, तंत्र-मंत्र कर नारियल रखा, फिर जलाया जयपुर में सरकारी नौकरी के लिए मां की हत्या करवाने वाली बेटी टोना-टोटका भी करवा रही थी। पुलिस ने घर के सीसीटीवी फुटेज जब्त किए हैं। पूरी खबर पढ़िए…

आज 6 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट:कल से मानसून के कमजोर होने के संकेत; जुलाई में भी पारा 42 डिग्री के ऊपर

राजस्थान के बीकानेर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और फलोदी क्षेत्र में गुरुवार को मानसून की एंट्री हुई। लेकिन यह एंट्री कमजोर रही। हनुमानगढ़ को छोड़कर शेष जिलों में मौसम साफ रहा। इधर, पूर्वी राजस्थान के अजमेर, बारां, करौली और धौलपुर में हल्की बारिश हुई। शुक्रवार को 6 जिलों में आंधी-बारिश का यलो अलर्ट है। वहीं, मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि राज्य में अब मानसून की बारिश का दौर कमजोर पड़ गया है। 11 जुलाई से मानसून के कमजोर फेज की शुरुआत होगी। ये ब्रेक एक हफ्ते का रह सकता है। इधर जुलाई में भी कई जिलों में तापमान 40 डिग्री के ऊपर रिकॉर्ड हो रहा है। सबसे पहले- राजस्थान में बारिश की स्थिति अब- प्रदेश में मौसम से जुड़ी PHOTOS… ये शहर सबसे ज्यादा गर्म मानसून के बड़े अपडेट्स कहां हुई सबसे ज्यादा बारिश: पिछले 24 घंटों में अजमेर के केकड़ी में 49MM, बारां के अंता में 28MM, करौली के सूरोठ में 24MM, चूरू के सिद्धमुख में 20MM, करौली के मासलपुर में 10MM और झुंझुनूं के पिलानी में 10MM बरसात दर्ज की गई। वहीं हनुमानगढ़, जालौर, भीलवाड़ा, दौसा, धौलपुर, झालावाड़, कोटा और सीकर में कहीं-कहीं हल्की बारिश हुई। श्रीगंगानगर, चूरू समेत कई शहरों का पारा चढ़ा: बारिश का दौर कमजोर पड़ने और धूप निकलने से श्रीगंगानगर, चूरू, जयपुर, अलवर और चित्तौड़गढ़ समेत कई जिलों में तापमान बढ़ गया है। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस श्रीगंगानगर में दर्ज किया गया। आगे कैसा रहेगा मौसम… राजस्थान के प्रमुख शहरों का मौसम जयपुर: राजधानी में गुरुवार को दिनभर मौसम ज्यादातर साफ रहा। कुछ देर के लिए बादल छाए, लेकिन फिर धूप खिल गई। जयपुर में अधिकतम तापमान 1 डिग्री चढ़कर गुरुवार को 34.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 25.7 डिग्री सेल्सियस रहा। अलवर: जिले में गुरुवार को दिनभर बादल छाए रहे। उमस बनी रही और बारिश नहीं हुई। इससे एक दिन पहले बुधवार को अलवर में अच्छी बारिश हुई थी, जहां रामगढ़ में सबसे अधिक करीब 60 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। यहां अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया। जोधपुर: दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार, यहां अधिकतम तापमान 35.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.9 डिग्री कम रहा। वहीं, न्यूनतम तापमान 28.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 1.1 डिग्री अधिक रहा। उदयपुर: मौसम विभाग के यलो अलर्ट के बावजूद गुरुवार को जिले में पूरे दिन बारिश नहीं हुई। सुबह कुछ समय तक आसमान में बादल छाए रहे, लेकिन इसके बाद दिनभर मौसम साफ रहा और तेज धूप खिली रही, जिससे लोगों को उमस का सामना करना पड़ा। अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सीकर: जिले में गुरुवार को दिनभर गर्मी का असर रहा। गुरुवार सुबह से ही तेज धूप खिली रही, हालांकि शाम को हल्के बादलों के बीच हवा चली। सीकर जिला मुख्यालय समेत आसपास के इलाकों में हल्के बादल छाए रहे, जिससे उमस रही। दिन के तापमान में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली। अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कोटा:दिनभर बादलों की आवाजाही के बीच लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। यहां अधिकतम तापमान 35.0 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार तापमान सामान्य बना हुआ है। हालांकि मानसून सक्रिय होने पर आने वाले दिनों में बारिश की संभावना है। अजमेर: गुरुवार सुबह हल्की हवा के कारण मौसम सामान्य रहा। लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली। हालांकि, बीच-बीच में तेज धूप निकलने से गर्मी भी महसूस हुई। अजमेर का अधिकतम तापमान 32.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

भारत-चीन व्यापार की शुरुआत टली:गुंजी में इंतजार कर रहे 100 भारतीय व्यापारी; चीन ने कहा- दुकानों और गोदामों का काम जारी

उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से छह साल बाद शुरू होने जा रहे परंपरागत भारत-चीन व्यापार की शुरुआत एक बार फिर टल गई है। भारतीय व्यापारियों को 8 जुलाई तक चीन के तकलाकोट पहुंचना था, लेकिन वहां मंडी, दुकानें और गोदाम तैयार नहीं होने से व्यापार की तारीख आगे बढ़ गई। फिलहाल करीब 100 भारतीय व्यापारी गुंजी और नाबीढांग में इंतजार कर रहे हैं। चीन की ओर से नई तारीख भी अभी तय नहीं की गई है। व्यापारियों को अब तकलाकोट मंडी की तैयारियां पूरी होने और नई तिथि घोषित होने का इंतजार है। चीनी विदेश मंत्रालय ने भारतीय प्रशासन को जानकारी दी है कि तकलाकोट में भारतीय व्यापारियों के लिए दुकानों और गोदामों का निर्माण कार्य अभी जारी है। इस बार चीन की ओर से भारतीय व्यापारियों के लिए नया व्यापारिक भवन बनाया जा रहा है, जहां उन्हें किराये पर दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी। भवन और गोदाम पूरी तरह तैयार होने के बाद ही व्यापारियों को तकलाकोट जाने की अनुमति मिलेगी। 100 व्यापारियों को मिले ट्रेड पास इस वर्ष तकलाकोट व्यापार के लिए 134 भारतीय व्यापारियों ने आवेदन किया है। प्रशासन अब तक 100 व्यापारियों और उनके सहायकों को ट्रेड पास जारी कर चुका है। शेष व्यापारियों, सहायकों और पोनी-पोर्टरों के पास जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। भारतीय व्यापारी निर्यात किया जाने वाला सामान गुंजी पहुंचा चुके हैं। यहां कस्टम कार्यालय में सामान की जांच और कस्टम क्लीयरेंस शुरू हो गई है। कई व्यापारियों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। व्यापारियों की सुविधा के लिए गुंजी में एसबीआई की शाखा भी संचालित की जा रही है। ADM बोले- चीन से मंजूरी का इंतजार पिथौरागढ़ के अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि भारत की ओर से व्यापार शुरू कराने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कस्टम जांच की प्रक्रिया जारी है। चीन की ओर से सूचना मिली है कि तकलाकोट में भारतीय व्यापारियों के लिए दुकानें और गोदाम तैयार किए जा रहे हैं। फिलहाल व्यापारी गुंजी और नाबीढांग में ठहरे हुए हैं। उनके रहने, खाने और अन्य जरूरी सुविधाओं की पूरी व्यवस्था की गई है। वहीं, एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि इस वर्ष सीमा व्यापार में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है। नवयुवक व्यापारी के रूप में सुनील गर्ब्याल सहित एक महिला व्यापारी भी इस व्यापारिक गतिविधि से जुड़ने जा रही हैं। सामान्य पासपोर्ट से इतना अलग ट्रेड पास… 1. विदेश यात्रा का नहीं, सीमा व्यापार का दस्तावेज सामान्य पासपोर्ट भारत सरकार का आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है, जिसके जरिए व्यक्ति वीजा नियमों के तहत दुनिया के विभिन्न देशों की यात्रा कर सकता है। इसके विपरीत भारत-तिब्बत ट्रेड पास केवल सीमा व्यापार से जुड़े अधिकृत लोगों को जारी किया जाता है। यह पर्यटन, नौकरी या अन्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए मान्य नहीं होता। 2. तय मार्ग और सीमित अवधि के लिए मान्य सामान्य पासपोर्ट कई वर्षों तक वैध रहता है और धारक को विभिन्न देशों की यात्रा की अनुमति देता है। वहीं ट्रेड पास केवल निर्धारित ट्रेड सीजन और अधिकृत व्यापारिक मार्ग, जैसे लिपुलेख दर्रा-तकलाकोट क्षेत्र के लिए ही जारी किया जाता है। इसकी वैधता सीमित होती है और अवधि समाप्त होने पर इसका उपयोग नहीं किया जा सकता। 3. विशेष अनुमति-पत्र, जिसमें भूमिका भी तय होती है ट्रेड पास सामान्य पहचान दस्तावेज नहीं, बल्कि सीमा व्यापार के लिए जारी विशेष अनुमति-पत्र है। यह केवल पंजीकृत व्यापारियों, उनके सहायकों, पोर्टर, कुली और म्यूल (खच्चर) चालकों को दिया जाता है। पास में धारक की श्रेणी भी दर्ज होती है। इसे किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता और ट्रेड सीजन समाप्त होने पर संबंधित प्राधिकरण को वापस जमा करना पड़ता है। पात्रता से मंजूरी तक पूरी प्रक्रिया भारत-तिब्बत ट्रेड पास सामान्य पर्यटकों के लिए नहीं, बल्कि सीमा व्यापार से जुड़े पंजीकृत व्यापारियों, उनके सहायकों, पोर्टर, कुली और म्यूल (खच्चर) चालकों को जारी किया जाता है। पास बनवाने के लिए आवेदक का नाम सीमा व्यापार या पंजीकृत व्यापारी सूची में होना जरूरी है। इसके बाद आवेदन ट्रेड कार्यालय या जिला प्रशासन के पास जमा किया जाता है। आवेदन मिलने पर एसआईबी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन ब्रांच) समेत अन्य सुरक्षा और प्रशासनिक जांच होती है। सभी मंजूरियां मिलने के बाद ट्रेड पास जारी किया जाता है। इसके लिए पहचान पत्र, स्थानीय निवासी या व्यापारी प्रमाण, व्यापार पंजीकरण दस्तावेज, फोटो और सुरक्षा क्लीयरेंस से जुड़े रिकॉर्ड की जरूरत पड़ सकती है। अंतिम दस्तावेजों की सूची संबंधित जिला प्रशासन की अधिसूचना के अनुसार तय होती है। पहली बार सड़क आधारित मॉडल में बदलेगा व्यापार अब तक लिपुलेख दर्रे से होने वाला कारोबार पूरी तरह पारंपरिक ढुलाई व्यवस्था पर निर्भर था। व्यापारी धारचूला से गुंजी, कालापानी और नाभीढांग होते हुए कई दिन की कठिन यात्रा कर दर्रे तक पहुंचते थे। सामान घोड़े-खच्चरों, याक और पोर्टरों के जरिए ढोया जाता था। खराब मौसम और भूस्खलन कई बार व्यापार रोक देते थे। कुमाऊं यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता सुमन जोशी के मुताबिक पहले सीमांत समुदाय नेपाल से चावल, जौ और गेहूं लेकर तिब्बत की ग्यानिमा और गरहाटोक मंडियों तक पहुंचते थे, जहां बदले में नमक और बोरेक्स लिया जाता था। कई जगह एक नाली चावल के बदले पांच नाली नमक तक का विनिमय होता था। अब सड़क बनने के बाद करीब 100 किलोमीटर तक वाहन सीधे सीमा के करीब पहुंच सकेंगे। सिर्फ अंतिम करीब 200 मीटर तक ही सामान पारंपरिक तरीके से ले जाया जाएगा। इसके बाद चीन क्षेत्र में सड़क मार्ग उपलब्ध रहेगा, जहां से व्यापारी करीब 18 किलोमीटर दूर तकलाकोट मंडी पहुंचेंगे। तकलाकोट की नई मंडी में मिलेंगी दुकानें करीब 7 साल तक व्यापार बंद रहने के दौरान तकलाकोट की पुरानी मंडी की कई दुकानें नेपाली और अन्य व्यापारियों को आवंटित कर दी गई थीं। अब भारतीय और नेपाली व्यापारियों के लिए नई ट्रेड मंडी विकसित की गई है। इसी नई मंडी में भारतीय व्यापारियों को दुकानें दी जाएंगी। व्यापार समिति का कहना है कि नई मंडी पहले के मुकाबले ज्यादा व्यवस्थित है और वहां सामान रखने के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी। भारतीय व्यापारियों के लिए रियायती किराए और बेहतर लॉजिस्टिक सुविधा की भी मांग की गई है। व्यापार से जुड़े लोगों का मानना है कि सड़क और आधुनिक सुविधाओं के कारण आने वाले वर्षों में कारोबार का दायरा और बढ़ सकता है। 2019 में करोड़ों का कारोबार, अब बढ़ने की उम्मीद 2019 में इस मार्ग से करीब तीन करोड़ रुपए का व्यापार हुआ था, जिसमें लगभग 1.25 करोड़ रुपए का निर्यात और 1.90 करोड़ रुपये का आयात शामिल था। अब सड़क और आधुनिक सुविधाओं के साथ व्यापार फिर शुरू होने जा रहा है, ऐसे में इस आंकड़े के काफी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। व्यापार बंद होने के कारण कई भारतीय व्यापारी अपना सामान तिब्बत की तकलाकोट मंडी में ही छोड़ आए थे। पिछले छह साल से करीब 45 व्यापारियों का एक करोड़ रुपये से ज्यादा का सामान वहां फंसा हुआ है। अब व्यापार शुरू होने से इन व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि वे अपना सामान वापस ला सकेंगे या उसे बेच सकेंगे। सदियों से व्यापार, संस्कृति और भरोसे का रास्ता रहा लिपुलेख लिपुलेख दर्रा सिर्फ सीमा कारोबार का रास्ता नहीं, बल्कि सदियों से भारत, नेपाल और तिब्बत के बीच संपर्क का प्रमुख मार्ग रहा है। सीमांत क्षेत्रों में लंबे समय तक वस्तु विनिमय प्रणाली पर आधारित व्यापार चलता था। ब्रिटिश अधिकारी और लेखक सर फ्रांसिस एडवर्ड यंगहसबैंड ने अपनी किताब ‘इंडिया एंड तिब्बत’ में हिमालयी व्यापारिक रास्तों को भारत और तिब्बत के बीच सांस्कृतिक और व्यापारिक संपर्क का माध्यम बताया था। इन रास्तों से सिर्फ सामान नहीं, बल्कि परंपराएं, भाषाएं और सीमांत समाजों के रिश्ते भी एक इलाके से दूसरे इलाके तक पहुंचते थे। तिब्बत के साथ यह संपर्क सिर्फ मंडियों तक सीमित नहीं था। सीमांत इलाकों के मेले, धार्मिक यात्राएं और कारोबारी काफिले भारत, नेपाल और तिब्बत के बीच सामाजिक संबंधों का भी आधार बने हुए थे। जौलजीबी जैसे मेले लंबे समय तक त्रिपक्षीय व्यापारिक केंद्र के रूप में पहचाने जाते रहे। कौन हैं रं समुदाय, जिन्होंने जिंदा रखा हिमालयी व्यापार लिपुलेख दर्रे से होने वाले पारंपरिक व्यापार में रं समुदाय की सबसे अहम भूमिका रही है। यह समुदाय मुख्य रूप से पिथौरागढ़ की ब्यास, दारमा और चौंदास घाटियों में निवास करता है। रं समाज को भोटिया या शौका समुदाय का हिस्सा भी माना जाता है। सदियों तक यही समुदाय दुर्गम हिमालयी रास्तों में भारत-तिब्बत व्यापार को जिंदा रखे हुए था। इनके रहन-सहन, खानपान और पहनावे में तिब्बती संस्कृति की झलक दिखाई देती है। यह समुदाय अपनी ऊनी बुनाई, लोक संस्कृति और सीमांत जीवनशैली के लिए जाना जाता है। 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड में भोटिया जनजाति की आबादी 39 हजार से ज्यादा थी। व्यापार से पहले पी जाती थी शराब सुमन जोशी की एक सोध के अनुसार ऊंचे इलाकों में बर्फबारी होने पर कई भोटिया परिवार सर्दियों में नेपाल के निचले इलाकों में अस्थायी घर बनाकर रहते थे, जबकि गर्मियों में व्यापारिक काफिलों के साथ तिब्बत की मंडियों तक पहुंचते थे। नेपाल और तिब्बत के बीच यही सीमांत समुदाय कारोबारी पुल की तरह काम करता था। व्यापार शुरू करने से पहले भारतीय व्यापारियों और तिब्बती कारोबारियों के बीच ‘Share Chu-Dul Chyu’ नाम की मित्रता रस्म निभाई जाती थी। दोनों पक्ष चांदी के पात्र में शराब पीते, घी, सत्तू, ऊन और सोने को छूकर भरोसे का प्रतीक मानते थे। दोस्ती के प्रमाण के तौर पर पत्थर के टुकड़े तक संभालकर रखे जाते थे। नेपाल की आपत्ति से फिर चर्चा में आया सीमा विवाद लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्र को लेकर नेपाल पहले भी आपत्ति जता चुका है। 2019 में भारत सरकार के नए नक्शे के बाद नेपाल ने भी नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था, जिसमें उसने इस पूरे क्षेत्र पर दावा किया था। बाद में नेपाल संसद ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। नेपाल का दावा है कि यह इलाका उसका हिस्सा है, जबकि भारत सिगौली संधि के आधार पर इसे अपना क्षेत्र मानता है। यही वजह है कि भारत-चीन व्यापार और कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ा यह पूरा इलाका रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ————— ये खबर भी पढ़ें : भारत से कैलाश पर्वत दर्शन के लिए करना होगा इंतजार: 2 माह बाद जारी होंगे परमिट; व्यू पॉइंट पर हर दिन बदलता रहता है मौसम तिब्बत स्थित पवित्र कैलाश पर्वत के भारत से दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं को अभी करीब दो महीने और इंतजार करना होगा। फिलहाल इनर लाइन परमिट (ILP) जारी नहीं किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि सितंबर के आसपास परमिट शुरू होने पर आदि कैलाश और ओम पर्वत आने वाले श्रद्धालु 17 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित ओल्ड लिपुलेख (ओल्ड लिपुपास) जाकर भारत की सीमा से कैलाश पर्वत के दर्शन कर सकेंगे। पढ़ें पूरी खबर…

दोस्ती का खूनी अंजाम:बाइक को धक्का लगाने की मामूली बात पर भिड़े दोस्त, नर्सिंग छात्र की चाकू मारकर हत्या

अब दोस्ती भी चाकू की धार पर टिक गई है। बाइक को धक्का लगाने की मामूली कहासुनी में एक दोस्त ने दूसरे की चाकू मारकर निर्मम हत्या कर दी। थानाधिकारी गजवीर सिंह ने बताया कि सवीना खेड़ा निवासी छात्र दिनेश मीणा (23) डाकन कोटड़ा स्थित वागड़ नर्सिंग कॉलेज में सेकंड ईयर का छात्र था। उसकी बाइक का क्लच वायर टूट गया था। वह बुधवार शाम 5 बजे घर से बाइक ठीक कराने के लिए निकला था। फिर दोस्त ललित गमेती व एक अन्य साथी के साथ सेक्टर-14 गया। इस बीच रात 9 बजे मां सूरज देवी ने उसे फोन कर पूछा कि घर कब आओगे। दिनेश ने कुछ देर में आने की बात कही। रात 10 बजे तीनों दोस्त घर लौट रहे थे। रास्ते में बाइक फिर खराब हो गई। सेक्टर-14 स्थित श्रीराम अपार्टमेंट के पास दिनेश ने ललित को बाइक को धक्का लगाने लिए कहा। ललित के मना करने पर दोनों में कहासुनी हो गई। ललित ने गाली-गलौज की तो मामला झगड़े में बदल गया। इस पर ललित ने दिनेश पर चाकू से हमला कर दिया। इससे दिनेश गंभीर घायल हो गया। आरोपी वहां से भाग गया। तीसरे साथी ने दिनेश को एमबी हॉस्पिटल पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। आरोपी पकड़ाया, तब परिजनों ने लिया शव हत्या की सूचना पर दिनेश के पिता दौलाराम और मां सूरज देवी हॉस्पिटल पहुंचे। दोनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने आरोपी ललित को तुरंत पकड़ने की मांग की। फिर गुरुवार को मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठ गए और शव लेने से मना कर दिया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर आरोपी को पकड़ लिया। फिर शव का पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों को सौंपा। मां ने कहा कि उन्हें न्याय में सिर्फ बेटा वापस चाहिए और कुछ नहीं। बुधवार रात 9 बजे बेटे ने आखिरी बार कहा था कि कुछ ही देर में घर पहुंच जाएगा। देर रात पता चला कि उसकी मौत हो गई। पिता दौलाराम मीणा ने बताया कि रात को हॉस्पिटल से फोन आया कि बेटा यहां भर्ती है। हॉस्पिटल पहुंचे तो बेटा मृत अवस्था में मिला। बेटे ने बाइक को धक्का लगाने के लिए कहा था। इस पर ललित ने उससे गाली-गलौज की। फिर चाकू मारकर हत्या कर दी। भास्कर एक्सपर्ट राजेश जाजोदिया, वरिष्ठ अधिवक्ता धार लगे तलवार और छुरी की बिक्री पर लगे पाबंदी
धारा 4/25 आर्म्स एक्ट के बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस प्रशासन को चरणबद्ध और नियमित सघन जांच अभियान चलाने की आवश्यकता है। छुरी, तलवार आदि के विक्रेताओं को पाबंद किया जाए कि वे धार लगे हथियारों का विक्रय नहीं करें। ऐसे दुकानदारों का पुलिस रिकॉर्ड तैयार कर समय-समय पर जांच हो। बड़े चाकू बेचते समय खरीदार का नाम, मोबाइल नंबर और पहचान पत्र दर्ज कराया जाए। इससे अपराध होने पर हथियार की ट्रेसिंग आसान होगी।