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अब गांवों में श्मशानों तक पहुंचने के रास्ते देगी सरकार:जमीन आरक्षित होगी, अतिक्रमण हटेंगे; राजस्व विभाग ने कलेक्टर्स को दिए आदेश

प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में श्मशानों की जमीनों और उन तक पहुंचने के लिए अब रास्ते बनाए जाएंगे, वहीं श्मशानों की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होगी। कई जगह श्मशानों की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने से विवाद होते हैं। सरकार ने इन विवादों को खत्म करने का फैसला किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे ग्रामीण सेवा शिविरों में श्मशान की जमीनों को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। साथ ही श्मशानों तक पहुंचने के लिए रास्ते खुलवाए जाएंगे। इसको लेकर राजस्व विभाग ने सभी कलेक्टर्स को चिट्ठी लिखकर श्मशानों की जमीनों का रिकॉर्ड सुधारकर उन तक पहुंचने केच लिए रास्ते बनाने के आदेश दिए हैं। राजस्व विभाग की चिट्ठी के अनुसार प्रदेश के कई गांवों में श्मशान चालू हैं, लेकिन श्मशान की जमीन राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) में दर्ज नहीं है। कई जगहों पर श्मशान की जमीन का कानूनी रूप से आरक्षण नहीं होने के कारण अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कामों में सामाजिक असुविधा, अतिक्रमण और जमीन विवाद जैसे मामले सामने आते हैं। कलेक्टरों को आदेश, श्मशान तक पहुंचने के रास्ते खुलवाएं श्मशान की जमीनों से जुड़े विवादों को ग्रामीण सेवा शिविरों में सुलझाया जाएगा। जिन श्मशानों की जमीन का सरकारी रिकॉर्ड में जिक्र नहीं है, उन श्मशानों की जमीन को सरकारी जमाबंदी में दर्ज करने के आदेश दिए हैं। गांवों में श्मशान की जमीनों का भौतिक सत्यापन करते हुए सीमांकन करना होगा। श्मशानों से अतिक्रमण हटाने होंगे। श्मशान की जमीन का नाप जोख कर सरकारी जमाबंदी में रिकॉर्ड दर्ज करना होगा। राजस्व विभाग ने श्मशानों तक रास्ते खुलवाकर उन्हें पंचायतों के सुपुर्द करने के आदेश दिए हैं। नए श्मशानों के लिए जमीन आवंटित होगी राजस्व विभाग ने कलेक्टरों को गांवों में श्मशानों के लिए जमीन आरक्षित करने को कहा है। जहां श्मशान के लिए जमीन की आवश्यकता है वहां जमीन आरक्षित कर श्मशान के लिए आवंटित की जाएगी। यह काम आगे भी जारी रखने को कहा है। दाह संस्कार को लेकर होते हैं विवाद ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशानों तक पहुंचने के रास्ते नहीं होने के कारण कई बार विवाद होते हैं, इन विवादों को टालने के लिए ही श्मशान तक पहुंचने के रास्ते सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने और श्मशानों से अतिक्रमण हटवाने का फैसला किया है। कई जगह श्मशानों की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, इस वजह से विवाद होते हैं।

राममंदिर चढ़ावा चोरी- सुप्रीम कोर्ट में 13 जुलाई को सुनवाई:दान गिनने वाले 23 कर्मचारियों का इस्तीफा, चढ़ावे में ₹10-20 के नोट बढ़े, 500 के घटे

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच 3 याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। याचिकाओं में जांच CBI को सौंपने और SIT के गठन के मांग की गई है। साथ ही, मंदिर में दान के प्रबंधन से जुड़े अलग-अलग विषयों की समीक्षा के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाने की भी मांग की गई है। इधर, मंदिर में चढ़ावा गिनने वाले 23 कर्मचारियों ने गुरुवार को एक साथ इस्तीफा दे दिया। उनका कहना है कि चोरी की घटना के बाद 10-20 रुपए के नोट बढ़ गए हैं, जिससे गिनती में ज्यादा समय लग रहा है। पहले 500 रुपए के नोटों की 70-80 गड्डियां बन जाती थीं, अब बमुश्किल 15 गड्डियां बन रही हैं। पहले काम दो शिफ्ट में होता था, लेकिन अब सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक एक ही शिफ्ट कर दी गई है। वेतन वही है और काम के घंटे बढ़ गए हैं। अब बैंक के पास सिर्फ 13 गणना कर्मी बचे हैं। चढ़ावा चोरी से माता सीता का मायका ‘जानकी मंदिर’ भी आहत है। श्रीराम का ससुराल पड़ोसी देश नेपाल के जनकपुर में है। मंदिर के महंत रोशन दास ने दैनिक भास्कर से कहा कि भगवान श्रीराम के किसी मंदिर में ऐसी घटना न कभी देखी, न सुनी। मन व्यथित है, इसलिए सावन में जनकपुर से 5-7 लोग प्रभु श्रीराम के घर अयोध्या जाएंगे, सांत्वना देंगे और दर्शन कर लौट आएंगे। राम मंदिर से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

12% से ज्यादा अल्कोहल वाली दवा बिना प्रिस्क्रिप्शन नहीं मिलेगी:कफ सिरप और टॉनिक पर असर, मेडिकल स्टोर्स को 3 साल का रिकॉर्ड रखना होगा

केंद्र सरकार ने 12% से ज्यादा अल्कोहल मिक्स दवाओं की खुली बिक्री पर रोक लगा दी है। अब ये दवाएं डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना खरीदी या बेची नहीं जा सकेंगी। दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में यह बदलाव किया है। नए नियम के तहत उन सभी पीने वाली दवाओं को ‘शेड्यूल H1’ कैटेगरी में शामिल कर दिया गया है। इनमें एथिल अल्कोहल की मात्रा 12% से ज्यादा होती है और जो 30 मिलीलीटर से बड़ी बोतल में बेची जाती हैं। मेडिकल स्टोर्स के लिए भी खास निर्देश हैं। अब मेडिकल स्टोर्स को इन दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड एक अलग रजिस्टर में रखना होगा। इस फैसले का आम मरीजों, मेडिकल स्टोर्स और पब्लिक हेल्थ पर क्या असर पड़ेगा? आसान सवाल-जवाब में समझिए… फैसले की वजह और बैकग्राउंड सवाल-1: सरकार को अचानक यह कदम क्यों उठाना पड़ा? जवाब: मार्केट में मिलने वाले कई कफ सिरप और टॉनिक में अल्कोहल की मात्रा काफी ज्यादा होती है। बिना रोक-टोक या डॉक्टर की पर्ची के मिलने से कई लोग इनका इस्तेमाल नशे के लिए करने लगे थे। इसी दुरुपयोग को रोकने और दवाओं की बिक्री की सख्ती से निगरानी के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। सवाल-2: यह फैसला किस कमेटी की सिफारिश पर लिया गया है? जवाब: दवाओं के गलत इस्तेमाल की बढ़ती चिंताओं को देखते हुए सरकार की रेगुलेटरी कमेटियों- ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड ने इस पर समीक्षा की थी। इन कमेटियों की सिफारिशों के बाद ही सरकार ने कानून में यह संशोधन लागू किया है।
मेडिकल स्टोर्स और मरीजों पर असर सवाल-1: मेडिकल स्टोर चलाने वालों को अब किन नियमों का पालन करना होगा? जवाब: शेड्यूल H1 के तहत आने के बाद अब फार्मेसी या मेडिकल स्टोर्स को ये 3 मुख्य काम करने होंगे… सवाल-2: एक मरीज के तौर पर क्या मेरे लिए यह दवाएं बैन या असुरक्षित हो गई हैं? जवाब: बिल्कुल नहीं। इसका यह मतलब कतई नहीं है कि ये दवाएं असुरक्षित हैं या इन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह सिर्फ सुरक्षा मानक है। अगर डॉक्टर ने यह दवा लिखी है, तो आपको यह पहले की तरह मेडिकल स्टोर से मिल जाएगी, बस आपको डॉक्टर की पर्ची दिखानी होगी। मेडिकल फैक्ट्स और हेल्थ इंपैक्ट सवाल-1: दवाओं में अल्कोहल का इस्तेमाल क्यों किया जाता है, क्या यह खतरनाक है? जवाब: दवाओं में सीमित मात्रा में एथिल अल्कोहल का इस्तेमाल एक सॉल्वेंट या प्रिजर्वेटिव (दवा को सुरक्षित रखने और घोलने) के रूप में किया जाता है, जो क्लीनिकल तौर पर जरूरी है। यह आमतौर पर हानिकारक नहीं होता। हालांकि, जर्नल ऑफ मेडिकल टॉक्सिकोलॉजी की 2024 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ऐसी दवाओं का बिना डॉक्टरी सलाह के या जरूरत से ज्यादा सेवन किया जाए, तो यह बच्चों, बुजुर्गों और लिवर के मरीजों के लिए गंभीर साइड इफेक्ट्स पैदा कर सकता है। सवाल-2: इस मामले में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की क्या गाइडलाइन है? जवाब: वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) भी हमेशा दवाओं के तर्कसंगत और सीमित इस्तेमाल पर जोर देता है। इसके तहत दवाओं को केवल तभी लिखा और बेचा जाना चाहिए, जब उनकी वाकई में क्लीनिकल जरूरत हो। शेड्यूल H1 और फ्यूचर इंपैक्ट सवाल-1: यह ‘शेड्यूल H1’ क्या है और इसमें कौन सी दवाएं आती हैं? जवाब: ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स के तहत ‘शेड्यूल H1’ को साल 2013 में पेश किया गया था। इसका मकसद उन दवाओं की सख्त निगरानी करना था, जिनके दुरुपयोग की संभावना ज्यादा होती है। शुरुआत में इसमें थर्ड और फोर्थ जनरेशन की एंटीबायोटिक्स, टीबी की दवाएं और आदत लगाने वाली दवाएं शामिल थीं। अब इस लिस्ट का दायरा बढ़ाया जा रहा है। सवाल-2: इस फैसले से पब्लिक हेल्थ सेक्टर को लंबे समय में क्या फायदा होगा? जवाब: इस कदम से भारत में ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम और मजबूत होगा। दवाओं की ट्रेसेबिलिटी बढ़ेगी यानी यह पता लगाना आसान होगा कि कौन सी दवा कहां और किसे बेची गई। इससे दवाओं के गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। —————– ये खबर भी पढ़ें… 2 साल से छोटे बच्चों को कफ सिरप न दें: केंद्र की एडवाइजरी; MP-राजस्थान में कफ सिरप के सैंपल में जहरीला रसायन नहीं मिला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को हेल्थ एडवाइजरी जारी करके कहा कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप (खांसी और सर्दी की दवाएं) न दी जाएं। सरकार ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से 11 बच्चों की मौत की खबरों के बाद एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी बताया कि दोनों राज्यों से बच्चों की मौत से जुड़े कफ सिरप के सैंपल में किडनी को नुकसान पहुंचाने वाला कोई जहरीला रसायन नहीं मिला है। पूरी खबर पढ़ें…

चित्तौड़गढ़ में गजेंद्र सिंह जोधा बने नए एडिशनल एसपी:दो महीने पहले आए मुकुल शर्मा का हुआ ट्रांसफर; 6 पुलिस इंस्पेक्टर भी जिले में लगाए

चित्तौड़गढ़ जिले की पुलिस व्यवस्था में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। राजस्थान सरकार ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) स्तर के 49 अधिकारियों के तबादले किए हैं, जिसका असर चित्तौड़गढ़ जिले पर भी पड़ा है। जिले में मई महीने में ही पदभार संभालने वाले अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकुल शर्मा का महज दो महीने के अंदर ही तबादला ग्रामीण उदयपुर कर दिया गया है। उनकी जगह प्रतापगढ़ में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत गजेंद्र सिंह जोधा को चित्तौड़गढ़ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी के साथ उदयपुर रेंज में पुलिस निरीक्षकों के स्तर पर भी बदलाव किया गया है और चित्तौड़गढ़ जिले को छह नए थाना अधिकारी मिल सकते हैं। लगातार हुए इन तबादलों को जिले की पुलिस व्यवस्था में नए सिरे से जिम्मेदारियां तय करने के तौर पर देखा जा रहा है। मुकुल शर्मा उदयपुर रवाना, गजेंद्र सिंह जोधा संभालेंगे जिम्मेदारी संयुक्त शासन सचिव (पुलिस) मनीष गोयल की ओर से जारी तबादला सूची में मुकुल शर्मा को चित्तौड़गढ़ से ग्रामीण उदयपुर भेजा गया है। मुकुल शर्मा मई महीने में ही चित्तौड़गढ़ आए थे और उनका कार्यकाल करीब दो महीने का ही रहा। अब उनकी जगह गजेंद्र सिंह जोधा को लगाया गया है। वर्तमान में जोधा प्रतापगढ़ में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। वे नागौर जिले के रहने वाले हैं और वर्ष 2011 बैच के अधिकारी हैं। चित्तौड़गढ़ से उनका पुराना जुड़ाव भी रहा है, क्योंकि इससे पहले वे यहां पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। ऐसे में जिले की भौगोलिक स्थिति और पुलिस व्यवस्था से उनकी पहले से अच्छी पहचान मानी जा रही है, जिसका फायदा उनके नए कार्यकाल में देखने को मिल सकता है। छह नए पुलिस निरीक्षक भी पहुंचे, कई थानों में बदलेगी जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के तबादले के साथ ही उदयपुर रेंज में पुलिस निरीक्षकों के स्तर पर भी फेरबदल किया गया है। इस संबंध में उदयपुर रेंज के आईजी गौरव श्रीवास्तव ने आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों के तहत रूप सिंह जाटव को उदयपुर से चित्तौड़गढ़ भेजा गया है। प्रवीण टांक का तबादला प्रतापगढ़ से चित्तौड़गढ़ किया गया है, जबकि रंजीत सिंह को सलूंबर से चित्तौड़गढ़ लगाया गया है। इसके अलावा पदस्थापन की प्रतीक्षा में चल रहे सुमन कुमार को भी चित्तौड़गढ़ में नियुक्ति मिली है। जयपुर पुलिस आयुक्तालय से रजनीश कुमार को चित्तौड़गढ़ भेजा गया है, वहीं गेहरी लाल का तबादला खेरवाड़ा से चित्तौड़गढ़ किया गया है। इन अधिकारियों की तैनाती के बाद जिले के कई थानों और पुलिस इकाइयों में जिम्मेदारियों का नया बंटवारा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन अधिकारियों को अलग-अलग थानों और शाखाओं में पदस्थापित किया जाएगा, जिससे जिले की कानून व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली को और मजबूत करने की कोशिश होगी।

ट्रांसफर के लास्ट दिन 1653 प्रिंसिपल बदले:सालों से शहर में जमे कर्मचारियों को गांव भेजा, कई को गृह जिले में मिली पोस्टिंग

ट्रांसफर के आखिरी दिन शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए एक ही आदेश में 1653 सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल बदल दिए। कई साल से शहरों में जमे प्रिंसिपलों को गांवों में भेजा गया है, जबकि दूर-दराज के जिलों में काम कर रहे कई प्रिंसिपलों को उनके गृह जिले में पोस्टिंग मिली है। सभी को अगले 10 दिन के भीतर नए स्कूल में जॉइन करना होगा। शुरुआत में विभाग ने करीब 500 प्रिंसिपलों की लिस्ट तैयार की थी, लेकिन अंतिम दो दिन में यह संख्या बढ़ा दी गई। शुक्रवार सुबह 5:49 बजे माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इस लिस्ट पर ई-हस्ताक्षर किए। प्रदेश के सभी जिलों में हुए बदलाव
आदेश के तहत प्रदेश के सभी जिलों में प्रिंसिपलों के ट्रांसफर किए गए हैं। खास बात यह रही कि कांग्रेस सरकार के समय शहर से गांव और गांव से शहर गए प्रिंसिपलों को भी बदला गया है। किसी को गृह जिला, किसी को दूर पोस्टिंग
नई लिस्ट में कई प्रिंसिपलों को दूर जिलों से उनके गृह जिले में लाया गया है, जबकि कुछ को गृह जिले से दूर इलाकों में भेजा गया है। पिछले दो साल से ट्रांसफर का इंतजार कर रहे कई प्रिंसिपलों को राहत मिली है, जबकि कुछ को इस बार भी मनचाही पोस्टिंग नहीं मिल सकी। सर्वे में लगे कर्मचारी अभी नहीं होंगे रिलीव
जिन ग्रेड सेकंड टीचर्स, लेक्चरर्स और प्रिंसिपलों की ड्यूटी ओबीसी सर्वे में लगी है, उन्हें फिलहाल रिलीव नहीं किया जाएगा। जनगणना कार्य में लगे प्रिंसिपलों को संबंधित अधिकारियों की मंजूरी मिलने के बाद ही रिलीव किया जाएगा। निदेशालय से स्कूलों में भेजे गए टीचर
लंबे समय से शिक्षा निदेशालयों में अधिकारी के रूप में काम कर रहे 20 से ज्यादा टीचर्स को वापस स्कूलों में भेजा गया है। कांग्रेस सरकार के समय निदेशालय में लगाए गए पीटीआई को भी अब स्कूलों में पोस्टिंग दी गई है।

एएसपी रैंक के 49 आरपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर:नीरज पाठक होंगे जयपुर ग्रामीण के नए ASP ; समीर दुबे को मुख्यमंत्री सतर्कता में लगाया

राजस्थान सरकार के गृह (ग्रुप-1) विभाग ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) एवं समकक्ष स्तर के अधिकारियों के बड़े स्तर पर ट्रांसफर और पदस्थापन आदेश जारी किए हैं। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार- 49 अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर एवं पदस्थापन किया गया है। आदेश संयुक्त शासन सचिव मनीष गोयल द्वारा जारी किए गए हैं। इस फेरबदल में जयपुर पुलिस कमिश्नरेट, जोधपुर कमिश्नरेट, पुलिस मुख्यालय, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF), सीआईडी-सीबी, साइबर क्राइम, राजस्थान पुलिस अकादमी, महिला अपराध अनुसंधान सेल, अभय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर सहित कई महत्वपूर्ण शाखाओं में नई नियुक्तियां की गई हैं। ASP समीर को नई जिम्मेदारी एडिशनल SP समीर दुबे को मुख्यमंत्री सतर्कता में लगाया गया है। वह पहले जयपुर में ट्रैफ‍िक में थे। जयपुर ग्रामीण से रजनीश पूनिया को एडिशनल DCP वेस्ट लगाया गया है। पूनिया काफी अनुभवी अधिकारी माने जाते हैं। वेस्ट में अपराध नियंत्रण के लिए उन्हें लगाया गया है। जयपुर ग्रामीण के नए ASP नीरज पाठक नीरज पाठक एडिशनल DCP नॉर्थ को एडिशनल SP जयपुर ग्रामीण लगाया गया है। उन्होंने एडिशनल डीसीपी नार्थ रहते हुए कई मुख्य वारदातों का खुलासा किया है। आलोक सिंगल को एडिशनल DCP नॉर्थ लगाया गया है, उन्होंने जयपुर के साउथ और ईस्ट में सेवाएं दी है, उन्हें जयपुर का अच्छा खासा अनुभव है। लॉ एंड ऑर्डर और अपराध में विशेष पकड़ मानी जाती है, इसलिए उन्हें संवेदनशील इलाके में नॉर्थ में लगाया गया है। मनराज मीणा को एडिशनल एसपी डीसीपी महिला अपराध अनुसंधान सेल पश्चिम, जयपुर कमिश्नरेट की जिम्मेदारी मिली है। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के रोकथाम और त्वरित कानूनी कार्रवाई करेंगे। अलोक कुमार सिंघल को अतिरिक्त उपायुक्त जयपुर कमिश्नरेट के पद पर लगाया नीलकमल मीना को एएसपी, लीव रिजर्व, सिविल राइट्स, पुलिस मुख्यालय, जयपुर, हिम्मत सिंह को एएसपी, बौंली (सवाई माधोपुर), रोशनलाल पटेल को डिप्टी कमांडेंट, महाराणा प्रताप बटालियन, आरएसी, प्रतापगढ़, डॉ. प्रेरणा शेखावत को एएसपी, वैर (भरतपुर), सुरेश कुमार को एएसपी, उच्चैन (भरतपुर), ओमप्रकाश मीना को एएसपी, एटीएस, मुख्यालय जयपुर, माधुरी वर्मा को कमांडेंट, पीटीएस, खैरवाड़ा (उदयपुर), समीर कुमार दुबे को एएसपी, सीएम विजिलेंस, रजनीश पुनिया को अतिरिक्त उपायुक्त (यातायात पश्चिम) जयपुर कमिश्नरेट, नीरज पाठक को एएसपी (मुख्यालय), जयपुर ग्रामीण और अलोक कुमार सिंघल को अतिरिक्त उपायुक्त (उत्तर-प्रथम) जयपुर कमिश्नरेट के पद पर लगाया गया है। जयपुर में हुए प्रमुख बदलाव जोधपुर कमिश्नरेट में बदलाव अन्य प्रमुख तबादले इनका भी हुआ ट्रांसफर इनको मिली नई जिम्मेदारी दो पुराने तबादला आदेश किए निरस्त गृह विभाग ने 7 मई 2026 को जारी स्थानांतरण आदेश में दो अधिकारियों के तबादले भी निरस्त कर दिए हैं। इनमें चांदमल का विभागीय जांच प्रकोष्ठ, पुलिस मुख्यालय, जयपुर में किया गया स्थानांतरण निरस्त किया गया। राजेश कुमार गुप्ता का जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में पूर्व अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त के पद पर किया गया स्थानांतरण भी निरस्त कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी स्थानांतरण एवं पदस्थापन तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। देखिए ट्रांसफर लिस्ट

पति के सामने पत्नी किडनैप, थाने जाकर बोली-मैंने प्लानिंग की:शादी के बाद ससुराल नहीं गई; आरोप- परिवार ने घर में कैद करके रखा

जयपुर में युवक से मारपीट के बाद बदमाश उसकी पत्नी का किडनैप कर ले गए। ब्रेजा कार में आए चार बदमाशों में से दो ने विवाहिता को जबरन गाड़ी में डाला। वहीं दो बदमाशों ने उसके पति की जमकर पिटाई की। हाथापाई होते देख भीड़ ने दो बदमाशों को पकड़कर पुलिस को सौंपा। पति की रिपोर्ट पर उसकी पत्नी की तलाश में पुलिस जुटी। इस बीच वह खुद थाने पहुंच गई। उसने पुलिस को कहा कि अपने किडनैप की पूरी प्लानिंग उसने खुद की थी। वो इस शादी से खुश नहीं थी। पढ़िए- क्या है पूरा मामला पत्नी को अजमेर से जयपुर लेकर आ रहा था पति मालपुरा थाने के एएसआई वेद प्रकाश ने बताया- जयपुर में रहने वाले 28 साल के युवक ने अपनी पत्नी के किडनैपिंग का मामला दर्ज करवाया था। रिपोर्ट में बताया था कि अप्रैल-2026 में उसकी शादी अजमेर की रहने वाली लड़की से हुई थी। शादी के बाद से ही पत्नी अपने पीहर में रह रही थी। कुछ दिन पहले ही पत्नी को लेने वह ससुराल अजमेर गया था। 7 जुलाई को पत्नी को अजमेर से जयपुर लेकर आ रहा था। रोडवेज बस ने सुबह करीब 9 बजे हमें मालपुरा गेट बस स्टेंड पर उतार दिया। दोनों उतरकर कैब का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान एक ब्रेजा कार तेजी से हमारे आगे आकर रुकी। ब्रेजा कार में आए बदमाश पत्नी को लेकर भागे कार में बैठ चार जनों में से दो नीचे उतरकर आए। दोनों बदमाशों ने पत्नी को पकड़ जबरन कार में बैठा दिया। वहीं दो बदमाशों ने मेरे से हाथापाई की। शोर-शराबा और चिल्लाने की आवास सुनकर भीड़ इकट्ठा हो गई। भीड़ ने दोनों बदमाशों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने दोनों बदमाशों को शांतिभंग में गिरफ्तार कर जांच शुरू की। पढ़िए- कैसे की प्रेमी के साथ किडनैपिंग की प्लानिंग की थाने आकर बोली- मैंने की थी किडनैपिंग की प्लानिंग पुलिस ने बताया कि विवाहिता की तलाश की जा रही थी। इस बीच 9 जुलाई को वह खुद थाने आ गई। उसने खुद सहमति से जाने और किडनैपिंग जैसी प्लानिंग करना बताया। पुलिस जांच में सामने आया कि करीब 4-5 साल से वह एक लड़के से प्रेम करती है। दोनों ने आर्य समाज में शादी भी की थी। इस बारे में पता चलने पर परिजनों ने उसे घर में कैद कर दिया और अप्रैल-2026 में जबरन उसकी शादी दूसरे लड़के से करवा दी। शादी के बाद वह ससुराल नहीं गई और पीहर में ही रही। शादी के बाद घर से भागी, जोधपुर में मिली शादी के करीब 6 दिन बाद वह मौका मिलने पर घर छोड़कर भाग निकली। अजमेर पुलिस में परिजनों ने गुमशुदगी भी दर्ज करवाई थी। पुलिस ने करीब 45 दिन की मशक्कत कर उसे जोधपुर से ढूंढ निकाला था। युवती के मिलने के बाद घरवालों ने दोबारा उसे कैद कर लिया और जिस लड़के से उन्होंने शादी करवाई थी उसके साथ जाने का दबाव बनाने लगे। जांच में सामने आया कि युवती को इस बीच अपनी मामी का मोबाइल हाथ लग गया। उसने कॉल कर पति के साथ जयपुर भेजने के बारे में बताया। प्लान के तहत उसका बस स्टेंड से किडनैप कर भाग गए लेकिन दो बदमाश पकड़े गए।

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट पर प्रत्याशी बदला:नामांकन में गड़बड़ी थी, भाजपा ने बांकीपुर उपचुनाव के लिए आनन-फानन में नया कैंडिडेट उतारा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा को नामांकन के अगले ही दिन अपना कैंडिडेट बदलना पड़ा। पहले घोषित कैंडिडेट अभिषेक सिन्हा ने नाम वापस लेने का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने उनकी जगह नीरज सिन्हा को नया उम्मीदवार बनाया है। बांकीपुर में 30 जुलाई को वोटिंग है और तीन अगस्त को काउंटिंग होगी। सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक के नामांकन पत्र में परिवार और एजुकेशन से जुड़ी जानकारी में गड़बड़ियों के चलते भाजपा ने यह फैसला लिया। भाजपा को डर था गड़बड़ियों के चलते अभिषेक का नामांकन कैंसिल हो सकता है। इसी सीट से चुनाव लड़ रहे जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर (PK) और RJD चुनाव में इसे मुद्दा बना सकते हैं। हालांकि अभिषेक ने नाम वापसी के लिए पारिवारिक कारणों का हवाला दिया है। नए कैंडिडेट नीरज सिन्हा 20 साल से पार्टी से जुड़े हैं। वे नितिन नवीन के करीबी बताए जा रहे हैं। फिलहाल, मंडल अध्यक्ष हैं। नितिन नवीन ने इसी साल 30 मार्च को बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा दिया था। पहले देखिए 2 तस्वीरें… अभिषेक ने प्रदेश अध्यक्ष को सौंपे लेटर में लिखा- मुझे BJP ने बांकीपुर विधानसभा उप चुनाव में NDA प्रत्याशी बनाया, उसके लिए केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व के प्रति आभार प्रकट करता हूं । विनम्रता के साथ आपको आग्रह करना चाहता हूं कि मैं पारिवारिक कारण से विधानसभा उप चुनाव लड़ने में असमर्थ हूं। मैं कार्यकर्ता के नाते निष्ठा पूर्वक सेवा देता रहूंगा। गुरुवार को अभिषेक ने किया था नामांकन नामांकन की प्रक्रिया 13 जुलाई तक चलेगी। अभिषेक ने गुरुवार को नामांकन दाखिल किया था। नामांकन सभा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अलावा NDA के सभी सीनियर नेता शामिल हुए थे। गुरुवार को ही RJD प्रत्याशी रेखा गुप्ता ने नॉमिनेशन किया था। जनसुराज के प्रशांत किशोर 13 जुलाई को पर्चा भरेंगे। नितिन नवीन के करीबी हैं नीरज नितिन नवीन के करीबी हैं अभिषेक कुमार बंटी बीजेपी ने भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक कुमार बंटी को अपना उम्मीदवार बनाया था। अभिषेक कायस्थ जाति से आते हैं और नितिन नवीन के काफी करीबी माने जाते हैं। कैंडिडेट बदले जाने पर PK ने BJP पर साधा निशाना जनसुराज के संस्थापक और बांकीपुर सीट से उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने बीजेपी कैंडिडेट बदले जाने पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जन बल के आगे कोई बल नहीं है। अब तक लोग बीजेपी के डर से भागते थे, लेकिन ये पहली बार इंसाफ हुआ है कि भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार भाग गया। —————————————————– ये भी पढ़ें नितिन-नवीन ने चारा घोटाला आरोपी के बेटे को दिलवाया टिकट:24 घंटे में वापस हुआ अभिषेक सिन्हा का नामांकन, पिता पर लगा था 50 हजार जुर्माना बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उप चुनाव में बीजेपी ने अपना कैंडिडेट बदल दिया है। आनन-फानन में नए उम्मीदवार का नाम घोषित किया गया है। अभिषेक सिन्हा का नाम इसलिए वापस लिया गया कि उनके पिता रविंद्र सिन्हा का नाम चारा घोटाले से जुड़ा पाया गया। उनके पिता पर लालू यादव के साथ चारा घोटाले में 50 हजार रुपए जुर्माना लगा था। इस बात की चर्चा छिड़ने लगी थी कि नितिन नवीन ने चारा घोटाला के आरोपी के बेटे को टिकट दिलवाया है। पूरी खबर पढ़ें

जयपुर में होगी साउथ अभिनेत्री और प्रोड्यूसर की शाही शादी:शर्मीला मांद्रे और सुधन सुंदरम 12 जुलाई को लेंगे सात फेरे; कई फिल्म सेलिब्रिटी आएंगे

राजस्थान में एक बार फिर फिल्मी सितारों की शाही शादी होगी। कन्नड़ और दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित अभिनेत्री शर्मिला मांद्रे और फिल्म निर्माता सुधन सुंदरम 12 जुलाई को जयपुर के सामोद पैलेस में विवाह बंधन में बंधेंगे। दो दिन चलने वाले भव्य वेडिंग सेलिब्रेशन में दक्षिण भारतीय फिल्म जगत की कई नामचीन हस्तियां शामिल होंगी। सुधन सुंदरम बुधवार को तैयारियों का जायजा लेने जयपुर आए थे। वहीं गुरुवार को एक्ट्रेस शर्मिला अपने परिवार के साथ पहुंचीं। एयरपोर्ट से शर्मिला सामोद पैलेस के लिए रवाना हो गईं। इस शादी में फिल्म ‘जवान’ के डायरेक्टर एटली भी आएंगे। इसके अलावा विजय सेतुपति के आने की भी संभावना है। विजय सेतुपति की फिल्म ‘महाराजा’ को सुधन ने प्रोड्यूस किया था। हल्दी, मेहंदी कार्यक्रम 11 जुलाई को जानकारी के अनुसार- विवाह समारोह की शुरुआत 11 जुलाई से होगी। इस दौरान हल्दी, मेहंदी और संगीत समारोह होंगे। इसमें राजस्थानी शाही आतिथ्य और दक्षिण भारतीय संस्कृति का संगम दिखेगा। वहीं 12 जुलाई को दक्षिण भारतीय वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार सुबह विवाह होगा। शाम को रिसेप्शन किया जाएगा। इसमें फिल्म जगत की कई चर्चित हस्तियों के शामिल होने की संभावना है। 25 जून को हुई थी सगाई अभिनेत्री शर्मिला मांद्रे और निर्माता सुधन सुंदरम ने 25 जून को सगाई की थी। अभिनेत्री ने एक इंटरव्यू में बताया था कि सुधन से उनकी मुलाकात अभिनेत्री संयुक्ता के जरिए हुई थी, जिन्होंने दोनों को मिलवाया। शुरुआत दोस्ती से हुई और समय के साथ यह रिश्ता प्यार में बदल गया। शर्मिला ने बताया था कि दोनों लंबे समय तक अच्छे दोस्त रहे। इस साल मार्च में सुधन ने अचानक मुझे प्रपोज कर दिया। शर्मिला के अनुसार- सुधन का प्रस्ताव किसी फिल्मी अंदाज में नहीं था। सुधन की सादगी और सहजता ने मुझे प्रभावित किया। उन्होंने कहा था कि मैं हमेशा से मानती थी कि शादी उसी व्यक्ति से करनी चाहिए, जिससे आप प्यार करते हो। अब मेरा यह सपना पूरा होने जा रहा है। अभिनेत्री ने कहा था कि दोस्ती हमारे रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत है। सेलेब्रिटी वेडिंग के लिए राजस्थान पहली पसंद राजस्थान में जयपुर, उदयपुर सहित कई जगह कुछ साल में कई शाही शादियां हुई हैं। वहीं दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों के लिए जयपुर पसंदीदा वेडिंग डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। अधिकांश बड़े साउथ सितारों ने उदयपुर, जोधपुर और जैसलमेर में शाही महलों को चुना। बाहुबली के डायरेक्टर राजामौली ने अपने बेटे की शादी के लिए जयपुर को चुना था। इसी साल दक्षिण भारतीय सुपरस्टार रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने उदयपुर स्थित एक लग्जरी रिसॉर्ट में विवाह किया था। …………….
राजस्थान में शाही शादियों की ये न्यूज पढ़ें उदयपुर में पुष्पा फिल्म की हीरोइन की शादी, PHOTOS:रश्मिका ने साउथ स्टार विजय संग फेरे लिए; तेलुगु-कोडवा रीति-रिवाज से रस्में हुईं पुष्पा फिल्म की हीरोइन रश्मिका मंदाना और साउथ के सुपरस्टार विजय देवरकोंडा ने उदयपुर में शादी की। रश्मिका मंदाना कर्नाटक के कोडवा और विजय देवरकोंडा तेलुगु के हिंदू परिवार से आते हैं। (पढ़िए पूरी खबर) कियारा बनीं सिद्धार्थ मल्होत्रा की दुल्हनियां:दूल्हे ने गोल्डन शेरवानी और दुल्हन ने पिंक लहंगा पहना, बोले- अब हमारी परमानेंट बुकिंग हो गई एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी शादी के बंधन में बंधे थे। जैसलमेर के होटल सूर्यगढ़ में दोनों ने परिवार और करीबियों के बीच सात फेरे लिए थे। (पूरी खबर पढ़ें) राजस्थान में PV सिंधु की शादी की PHOTOS:उदयपुर में समारोह के बाद हैदराबाद में रिसेप्शन; एयरपोर्ट का वीडियो आया झीलों की नगरी उदयपुर में बैडमिंटन चैम्पियन पीवी सिंधु की शादी की कुछ तस्वीरें सामने आई थीं। ​शादी के बाद वे पति के साथ रवाना हुईं। (पढ़ें पूरी खबर)

शादीशुदा महिला-युवक ने एक ही चुन्नी से लगाया फंदा:पेड़ पर लटके मिले शव, बोलेरो से आए थे दोनों, गाड़ी में रखा था डीजल से भरा जरीकन

बीकानेर में शुक्रवार सुबह शादीशुदा महिला और एक युवक का शव खेजड़ी के पेड़ पर एक ही चुन्नी के फंदे से लटके मिले। दोनों बोलेरो गाड़ी से घटनास्थल तक पहुंचे थे। गाड़ी से उनके मोबाइल फोन, करीब 20 लीटर डीजल से भरा जरीकन और शराब की एक खाली बोतल भी मिली है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को फंदे से उतरवाकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया। मृतकों की पहचान श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के कीतासर निवासी सुंदरलाल मेघवाल और बंधवा गांव की काली देवी के रूप में हुई है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम और सुसाइड के कारणों की जांच कर रही है। घटना सेरुणा थाना क्षेत्र के लिखमीसर दिखनादा गांव की है। लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस
सेरुणा थाना SHO संध्या बिश्नोई ने बताया- श्रीडूंगरगढ़ के कीतासर गांव का रहने वाला सुंदरलाल मेघवाल और बंधवा गांव निवासी काली देवी दोनों शादीशुदा थे। पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को नीचे उतारकर पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भिजवाया। परिजनों को सूचना दे दी गई है। पुलिस दोनों के एक साथ फंदा लगाने के कारणों की जांच कर रही है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बोलेरो से पहुंचे, गाड़ी में मिले मोबाइल और अन्य सामान जानकारी के अनुसार, दोनों अपने घर से करीब 60 किलोमीटर दूर एक बोलेरो गाड़ी में घटनास्थल तक पहुंचे थे। उन्होंने सड़क किनारे गाड़ी खड़ी की और इसके बाद खेजड़ी के पेड़ पर फंदा लगा लिया। मौके पर खड़ी बोलेरो में दोनों के मोबाइल फोन, शराब की एक खाली बोतल और डीजल से भरा करीब 20 लीटर का एक जरीकन भी मिला है। घटनास्थल के ठीक सामने गौशाला है, गुरुवार रात सत्संग होने के कारण देर रात तक लोगों की आवाजाही रही। पुलिस का अनुमान है कि दोनों रात करीब 2 से 4 बजे के बीच वहां पहुंचे और फंदा लगा लिया।