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प्रेम कहानी जिसे शब्दों ने लिखा, रंगों ने जिंदा रखा:'बणी-ठणी' क्या सिर्फ एक कल्पना है या वाकई कोई महिला थी? एपिसोड-1

बणी- ठणी कौन थी? ऐसा क्या था उस तस्वीर में जो राजस्थान की धरोहर बनी, जिसने किशनगढ़ शैली को दुनिया भर के कला जगत में पहचान दिलाई। जानते हैं राजा सावंत सिंह और बणी- ठणी की कहानी, जिनके प्रेम और भक्ति को कलाकार निहाल चंद ने अमर कर दिया- अठारहवीं सदी में राजपूताना का एक कोना- किशनगढ़। यहां के राजा सावंत सिंह केवल शासक नहीं, कवि और कृष्ण भक्त भी थे। यही वजह थी कि जहां अन्य दरबारों में तलवारों की खनक थी, किशनगढ़ में कविता, संगीत और भक्ति का मीठा शोर गूंजता था। यहां के राजा सावंत सिंह खुद ‘नागरी दास’ के छद्म नाम से कविताएं लिखते थे। उनकी रचनाओं में शब्द नहीं, भक्ति बहती थी और शायद यही वजह थी कि उनका मन राजपाट से ज्यादा कविता और कृष्ण में रमता था। यही माहौल बणी- ठणी और किशनगढ़ कला शैली के लिए उपजाऊ जमीन साबित हुआ। बणी-ठणी को दिल्ली से खरीदा गया था कहा जाता है बणी- ठणी को राजा सावंत सिंह की सौतेली मां, बंकावतजी के लिए बहुत छोटी उम्र में उस समय के शाहजहानाबाद यानी आज की पुरानी दिल्ली से खरीदा गया था। जिसके बाद उसे संगीत और गायन का प्रशिक्षण दिया गया। समय के साथ बणी- ठणी न सिर्फ गायन और संगीत में निपुण हो गई, बल्कि कविता लेखन में भी पारंगत हो गई। बणी-ठणी राजा सावंत सिंह की पासवान थीं किशनगढ़ पूर्व राजपरिवार की सदस्य मीनाक्षी देवी के अनुसार, बणी-ठणी महाराजा सावंत सिंह की पासवान थीं। वे बहुत अच्छा लिखती थीं। वे राजा के साथ इसलिए जुड़ीं क्योंकि दोनों साथ में कविताएं लिखते थे। उनकी कविताएं आज भी मंदिर में गाई जाती हैं।
नई आवाज का जादू उस शाम महल में एक नई आवाज सुनाई दी, उस आवाज में कृष्ण भक्ति की ऐसी गहराई थी कि पूरा दरबार भक्ति में सराबोर हो गया। सावंत सिंह भी इस आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस कर रहे थे। कौन है यह जिसकी आवाज में साक्षात सरस्वती का वास है? राजा ने जिज्ञासा के साथ पूछा। यह बणी- ठणी है, हमारे महल की नई सदस्य। ‘रसिक बिहारी’ के नाम से लिखी इनकी रचनाएं सिर्फ शब्द नहीं जादू हैं, बंकावत जी ने राजा को बणी- ठणी का परिचय दिया। राजा की नजर बणी- ठणी पर जैसे कुछ पल ठहर गयी। इस आवाज में गजब की मिठास और आकर्षण है। बणी- ठणी हम चाहेंगे कि आप हमारे दरबार में भी अपनी रचनाएं सुनाएं, ऐसा कहते हुए सावंत सिंह ने बणी- ठणी को और अधिक सुनने की इच्छा जाहिर कर दी। अब राजा रोज बणी- ठणी के कृष्ण भक्ति के मधुर संगीत और कविताएं सुनते, साथ ही उसमें अपनी रचनाएं भी जोड़ते। राजा सावंत और बणी- ठणी दोनों का कृष्ण भक्त होना उन्हें एक अनकही डोर से जोड़ रहा था। (कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किया गया है। फोटो व पेंटिंग आभार: किशनगढ़ पूर्व राजपरिवार, चित्रकार, शहज़ाद अली शेरानी ) कल के एपिसोड में जानेंगे ‘नागरी दास’ और ‘रसिक बिहारी’ की भक्ति और प्रेम की जुगलबंदी…

पॉलीहाउस की छत का पानी सहेज कर पूरे साल खेती:चाराें ओर लगे गेंदा से कीट-रोग का पहले पता लग रहा, समय पर कर देते हैं फसल उपचार

जयपुर के किशनगढ़ रेनवाल ब्लॉक का खेड़ी मिलक गांव भूजल के डार्क जोन में है। यहां पानी की कमी है, या फिर खारा है। इस गांव के युवा किसान कानाराम यादव बरसाती खेती पर ही निर्भर रहे। वे अपनी आठ बीघा जमीन पर बाजरा की फसल से ज्यादा कभी कुछ दूसरी फसल ले नहीं पाते थे। इंटरनेट और यूट्यूब के जरिए सरकारी योजनाओं और कम पानी में होने वाली फसलों का पता लगाया। फार्म पौंड में सालभर के लिए पानी फिर वर्ष 2024 में खेत में पॉलीहाउस लगाया। बारिश में पॉलीहाउस की छत का पानी एकत्र करने के लिए दो फार्म पौंड बना लिए। सिंचाई के लिए पांच एचपी का सोलर पंप भी लगाया है। अब इन दो फार्म पौंड में इतना पानी जमा हो जाता है कि साल भर चार हजार वर्गमीटर क्षेत्र में खीरे और बाकी जमीन पर गेहूं, बाजरा व टमाटर की फसल हो जाती है। खीरे की जैविक खेती कभी उनकी पूरे साल में एक लाख की फसल नहीं हो पाती थी लेकिन इन दिनों वे रोज बीस से पच्चीस हजार रुपए कमा रहे हैं। कानाराम खीरे की खेती भी जैविक ही कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे तीस प्रतिशत तक खर्च घट जाता है। जैविक खीरे के भाव भी अच्छे मिलते हैं। यह दो सप्ताह तक खराब भी नहीं होता। रासायनिक खेती वाला खीरा दो तीन दिन में ही सड़ने लग जाता है। गेंदे की पौध से पहचान रहे रोग वे फसल में रोग की पहचान पहले से ही कर लेते हैं। ताकि नियंत्रण आसानी से किया जा सके। इसके लिए भी वैज्ञानिक तरीका अपनाया है। कानाराम ने बताया कि खीरे की फसल के चारों ओर पॉलीहाउस में गेंदे की पौध लगा देते हैं। गेंदा रोग के मामले में संवेदनशील होता है। कोई भी कीट व रोग का प्रकोप होगा तो इसकी पौध मुरझा जाएगी। इन पौधों में रोग के लक्षण दिखते ही उपचार कर देते हैं। इससे रोग फैलता नहीं और गेंदे के फूल भी आय देते हैं। खुद तैयार करते हैं ऑर्गेनिक खाद कानाराम खुद ऑर्गेनिक खाद तैयार करते हैं। 20 पशु पाल रखे हैं। दूध घी से भी अतिरिक्त आय हो रही है। गोबर से केंचुआ खाद और नीम, गुड़, चूना, बेसन और छाछ सहित अन्य घरेलू नुस्खों से जैविक कीटनाशक तैयार कर रहे हैं। इस खाद से फसल को प्राकृतिक पोषण मिलता है। मिट्टी की गुणवत्ता भी बढ़ाती है। ऑर्गेनिक खाद पौधों को अधिक मजबूती देकर सिंचाई की जरूरत भी कम कर देती है। उन्होंने इन तरीकों से खेती को लाभदायक बना दिया है।

राजस्थान के 9 जिलों में बारिश की संभावना:मानसून पर लगा ब्रेक, 15 जुलाई के बाद फिर एक्टिव होगा सिस्टम; फलोदी सबसे ज्यादा गर्म रहा

राजस्थान में मानसून के पहले दौर के धीमे पड़ने के बाद प्रदेश के अधिकांश जिले रविवार को सूखे रहे। पश्चिमी राजस्थान के किसी भी जिले में अगले 24 घंटों के दौरान बारिश की कोई संभावना नहीं है। केवल 9 जिलों में आंशिक रूप से बारिश हो सकती है। इसमें खैरथल-तिजारा, अलवर, डीग, भरतपुर, धौलपुर, सिरोही, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ शामिल हैं। रविवार को भी राज्य में बारिश का ग्राफ काफी नीचे गिरा है। अब 15 जुलाई के बाद ही प्रदेश में मानसून का सिस्टम एक बार फिर एक्टिव हो सकता है। पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सिर्फ बूंदी जिले में 5 एमएम बारिश हुई है। इसके अलावा प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम पूरी तरह ड्राय (शुष्क) रहा। पिछले 24 घंटों में फलोदी जिला 41 डिग्री तापमान के साथ प्रदेश में सबसे ज्यादा गर्म दर्ज किया गया है। सबसे पहले- प्रदेश में बारिश की स्थिति और सैटेलाइट इमेज राजस्थान के मौसम से जुड़ी PHOTOS… राजस्थान के गर्म शहर गर्मी-बारिश के बड़े अपडेट्स गर्मी और उमस बढ़ने लगी : बारिश का दौर थमने के साथ ही अब राज्य में गर्मी और उमस बढ़ने लगी है। रविवार को फलोदी में अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे अधिक रहा। यहां न्यूनतम तापमान 29.2 डिग्री सेल्सियस रहा। अलवर में 38, बीकानेर में 38.1, चूरू में 38.5 और श्रीगंगानगर में 38 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। झुंझुनूं के पिलानी में भी पारा 37.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। अब आगे क्या: प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में यदि कोई कमजोर वेदर सिस्टम बनता है, तो मौसम बदल सकता है। 14 से 15 जुलाई के दौरान बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू के आसपास के जिलों में, 13 और 15 जुलाई को जयपुर और सीकर में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। अगले दो दिन यानी सोमवार और मंगलवार को जोधपुर और बीकानेर संभाग में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती हैं। फिलहाल प्रदेश में मौसम ड्राय रहेगा, लेकिन अगले दो-तीन दिन कुछ इलाकों में छिटपुट बारिश और बूंदाबांदी का दौर जारी रह सकता है। राजस्थान के बड़े शहरों में कैसा रहा मौसम जयपुर: मौसम के मिजाज में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला। शनिवार की तरह रविवार (12 जुलाई) को भी पारा 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही बना रहा। यहां अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तापमान में कोई बड़ा अंतर नहीं आया है। अधिकतम तापमान शनिवार की तुलना में महज 0.3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। न्यूनतम तापमान अभी भी सामान्य से करीब डेढ़ डिग्री सेल्सियस ज्यादा बना हुआ है, जिससे रात के समय उमस का अहसास हो रहा है। अलवर: रविवार सुबह से ही तेज धूप खिलने के कारण उमस और गर्मी का असर साफ देखने को मिला। यहां अधिकतम तापमान करीब 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शाम तक मौसम सामान्य बना रहा और बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक आंशिक रूप से बादल छाए रहने तथा मौसम सामान्य रहने का अनुमान जताया है। इस दौरान जिले में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी की भी संभावना बनी हुई है। उदयपुर: रविवार को बादलों और हल्की धूप की आंख-मिचौली के बीच मौसम बेहद सुहावना बना रहा, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को उमस से थोड़ी राहत मिली। सुबह से ही बादल छाए रहे और ठंडी हवा चलती रही। घने बादल छाए रहने के बावजूद बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार, दिन के तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। यहां अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रहा, जो एक दिन पहले 33 डिग्री सेल्सियस था। जोधपुर: रविवार को मौसम पूरी तरह सामान्य बना रहा। शहर का अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.8 डिग्री कम रहा। न्यूनतम तापमान 28.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.5 डिग्री अधिक है। शहर में पिछले 24 घंटों के दौरान कहीं भी बारिश नहीं हुई। अजमेर: रविवार को दिनभर मौसम पूरी तरह साफ रहा और तेज धूप ने लोगों को परेशान किया। लंबे समय से बरसात का इंतजार कर रहे अजमेरवासियों को रविवार को भी निराशा हाथ लगी। यहां दिनभर बादलों का नामोनिशान नहीं दिखा। अजमेर में अधिकतम तापमान 33.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 24.7 डिग्री सेल्सियस रहा। कोटा: रविवार को अधिकतम तापमान 36.1, जबकि न्यूनतम तापमान 28.6 डिग्री सेल्सियस रहा। दिनभर उमस रही। मौसम विभाग के अनुसार, तापमान सामान्य सीमा के भीतर ही बना रहा, लेकिन उमस के कारण लोगों को गर्मी का अहसास ज्यादा हुआ। सीकर: मानसून के कमजोर पड़ने के चलते रविवार को जिले में मौसम पूरी तरह साफ रहा। अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दोपहर के समय तीखी धूप का असर देखने को मिला और गर्मी बढ़ गई। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी सीकर में बारिश होने का कोई अनुमान नहीं है।

भास्कर अपडेट्स:जम्मू-कश्मीर के रामबन में अमरनाथ यात्रियों की 4 गाड़ियां टकराईं, 18 श्रद्धालु घायल

जम्मू-कश्मीर के रंबन में सोमवार को अमरनाथ यात्रा के काफिले में बड़ा हादसा हो गया। चंदरकोट के लंगर प्वाइंट पर दो SRTC बसें, एक कार और एक प्राइवेट बस आपस में टकरा गईं। हादसे में 18 श्रद्धालु घायल हो गए। सभी को रंबन जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, एक SRTC बस ने आगे चल रही दूसरी SRTC बस को टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही दूसरी बस आगे चल रही नेक्सा XL6 कार से भिड़ गई। इसके बाद कार सामने चल रही प्राइवेट बस से टकरा गई। घायलों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और पंजाब के श्रद्धालु शामिल हैं। अब तक 10 लोगों की पहचान हो चुकी है, जबकि 8 अन्य की पहचान की जा रही है। आज की अन्य बड़ी खबरें… सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के 361 मदरसा कर्मचारियों की सरकारी वेतन की मांग खारिज की सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के 361 मदरसा शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सरकारी वेतन देने की मांग खारिज कर दी। इन कर्मचारियों ने दावा किया था कि उनकी नियुक्ति नियमित रूप से हुई थी, इसलिए उन्हें राज्य सरकार की ग्रांट-इन-एड योजना के तहत वेतन मिलना चाहिए। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने कहा कि याचिकाओं में कोई दम नहीं है, इसलिए इन्हें खारिज किया जाता है। कोर्ट ने 350 से अधिक याचिकाकर्ताओं में से 13 मामलों की पहले जांच की। अदालत ने कहा कि यदि इन 13 में से किसी एक का दावा सही पाया जाता, तो बाकी मामलों पर भी विचार किया जाता। लेकिन कोई भी याचिकाकर्ता अपने दावे को साबित नहीं कर सका, इसलिए सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं। प्रणब मुखर्जी का राजघाट पर बनेगा राष्ट्रीय स्मारक, केंद्र सरकार ने मंजूरी दी केंद्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न प्रणब मुखर्जी का स्मारक बनाने की मंजूरी दे दी है। यह स्मारक दिल्ली के राजघाट स्थित राष्ट्रीय स्मृति परिसर (राष्ट्रीय स्मृति स्थल) में बनाया जाएगा। इससे पहले जनवरी 2025 में सरकार ने स्मारक के लिए भूमि आरक्षित करने का फैसला किया था। प्रणब मुखर्जी 2012 से 2017 तक भारत के 13वें राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रपति बनने से पहले वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक सांसद रहे। उन्होंने वित्त, रक्षा और विदेश मंत्री जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। 2020 में उनका निधन हो गया था। जम्मू-कश्मीर और मणिपुर में भूकंप के झटके, बारामूला में 3.6 और कामजोंग में 3.9 तीव्रता रही मणिपुर और जम्मू-कश्मीर में सोमवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक, दोनों राज्यों में फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। मणिपुर के कामजोंग जिले में सुबह 6:32 बजे 3.9 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र 80 किलोमीटर की गहराई में था। भूकंप का केंद्र इंफाल से करीब 31 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में स्थित था। वहीं, जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में रात 2 बजे 3.6 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई में था। फरवरी में भी बारामूला में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र पट्टन क्षेत्र था। बंगाल में ‘खेला होबे दिवस’ की जगह ‘आयुष्मान दिवस’ मनाया जाएगा पश्चिम बंगाल सरकार ने 16 अगस्त को ‘खेला होबे दिवस’ की जगह ‘आयुष्मान दिवस’ मनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि 16 अगस्त राज्य के इतिहास का ‘काला दिन’ है, इसलिए अब इस दिन आयुष्मान भारत योजना से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि 16 अगस्त 1946 को ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ के दौरान कोलकाता में भीषण सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। इस घटना को ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि उस हिंसा में करीब 4 हजार लोग मारे गए थे, 10 हजार से ज्यादा घायल हुए थे और हजारों लोग विस्थापित हुए थे। ममता बनर्जी सरकार ने 2021 विधानसभा चुनाव में जीत के बाद 16 अगस्त को ‘खेला होबे दिवस’ घोषित किया था। इस दिन राज्यभर में फुटबॉल प्रतियोगिताएं कराई जाती थीं और खिलाड़ियों को खेल सामग्री बांटी जाती थी। सरकार का कहना था कि इसका उद्देश्य युवाओं में खेलों को बढ़ावा देना है। दिल्ली में सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 16वां दिन, कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन जारी नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) 24 दिन से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही है। इस प्रदर्शन में सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी शामिल हैं। वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल कर रहे हैं। बुधवार को सोनम वांगचुक की तबीयत खराब हो गई थी। डॉक्टरों के मुताबिक 11 दिनों में उनका वजन 7 किलो से ज्यादा घटकर 59.4 किलो रह गया है। दिल्ली में 17 साल के लड़के की चाकू मारकर हत्या दिल्ली के बदरपुर में कई बार चाकू मारे जाने से एक 17 साल के लड़के की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को पकड़ा है। हत्या के पीछे के मकसद और घटना की वजह बनने वाले घटनाक्रम का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है। दिल्ली में 4 बच्चे यमुना में डूबे, दो की मौत दिल्ली के अलीपुर में शनिवार को यमुना नदी में नहाते समय तेज बहाव में चार बच्चों के बह जाने के बाद दो नाबालिग लड़कों की मौत हो गई। एनडीआरएफ के चलाए गए अभियान में दो लड़कों के शव बरामद कर लिए गए हैं। वहीं, अंधेरा होने के कारण देर रात बाकी दो बच्चों की तलाश रोक दी गई थी। स्थानीय अधिकारियों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और निवासियों को नदी में न जाने की सलाह दे रहे हैं, विशेष रूप से पानी के खतरनाक स्तर और तेज बहाव को देखते हुए।

बोनस अंकों के आधार पर नौकरी हासिल की:एलडीसी भर्ती-2013 घोटाला: जिला स्तरीय जांच में 145, राज्य स्तरीय जांच में 250 नियुक्तियां संदिग्ध

राज्यस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार जिला परिषद जयपुर में वर्ष-2013 की एलडीसी भर्ती तत्कालीन समय के बड़े भर्ती घोटालों में शामिल होती नजर आ रही है। मेरिट निर्धारण संबंधी दस्तावेजों की जांच में जिला स्तर पर केवल 627 कार्मिकों का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया, जबकि राज्य स्तर पर 672 कार्मिकों के रिकॉर्ड सामने आए। 45 कार्मिकों का रिकॉर्ड नहीं मिलने से पूरी भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 672 कार्मिकों के दस्तावेजों की जांच में 529 अभ्यर्थियों ने संविदा सेवा के अनुभव प्रमाण-पत्र के आधार पर बोनस अंक प्राप्त किए। इनमें 250 से अधिक नियुक्तियों में फर्जी डिग्री, फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र और अन्य अनियमितताएं सामने आईं। जांच समिति ने नियमविरुद्ध नियुक्त कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने, फर्जी दस्तावेज देने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने तथा दस्तावेजों का सत्यापन नहीं कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के साथ एसीबी और एसओजी से जांच कराने की सिफारिश की थी। हालांकि, रिपोर्ट आने के बाद भी इन सिफारिशों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। इन राज्यों की डिग्रियों पर सबसे ज्यादा खेल संदिग्ध लिपिकों ने शैक्षणिक और कंप्यूटर योग्यता (पीजीडीसीए/डीसीए) के दस्तावेज राजस्थान से बाहर के राज्यों से हासिल किए। इनमें सबसे अधिक डिग्रियां सिक्किम, नागालैंड, मेघालय, मध्यप्रदेश (भोपाल) और छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालयों की हैं। जांच में इन दस्तावेजों का सत्यापन नहीं होने का भी खुलासा हुआ। तीन दस्तावेजों के आधार पर हुई भर्ती एलडीसी भर्ती-2013 में न लिखित परीक्षा हुई, न साक्षात्कार और न ही टाइप टेस्ट। मेरिट केवल तीन आधारों सीनियर सेकेंडरी अंक, कंप्यूटर योग्यता और अनुभव प्रमाण-पत्र पर तय हुई। अंतिम चयन इन दस्तावेजों के सत्यापन के अधीन था। मेरिट को मारा.. सिस्टम को बेचा, जांच रिपोर्ट में 672 का हिसाब आया सामने 9 साल में 4 आदेश, कार्रवाई अधूरी जांच समिति की 3 सिफारिशें, आज तक अधूरी

जन्म दर घटी, फिर भी 2025 में 11,104 नवजात ज्यादा:जयपुर में सबसे ज्यादा 1.69 लाख जन्म दर्ज, अनुमानित आंकड़े से 4 प्रतिशत कम; 26 जिलों में कम पंजीकरण

राजस्थान में जन्म दर 2024 के 23.17 से घटकर 2025 में 22.56 प्रति हजार रह गई, लेकिन नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) के आंकड़े अलग तस्वीर पेश करते हैं। वर्ष 2025 में राज्य में 19,82,719 जन्म पंजीकृत हुए, जो 2024 के 19,71,615 की तुलना में 11,104 अधिक हैं। 41 में से 15 जिलों में अनुमान से अधिक, जबकि 26 जिलों में अनुमान से कम जन्म पंजीकरण दर्ज हुआ। जयपुर में सबसे अधिक 1,69,243 जन्म दर्ज हुए, हालांकि यह 2024 के मुकाबले 24,265 कम और अनुमानित जन्म के मुकाबले 96.09% रहे। उदयपुर 1,12,454 जन्म के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जहां 2024 की तुलना में 2,462 अधिक जन्म पंजीकृत हुए। वहीं बाड़मेर, जैसलमेर, उदयपुर और प्रतापगढ़ में अनुमान से 149% से 161% तक अधिक जन्म पंजीकरण दर्ज हुए। भास्कर एक्सपर्ट डॉ. गौरव लाटा, कम्युनिटी हेल्थ सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम में अनुमानित जन्म और जन्म दर के आधार पर तैयार किया गया अनुमान होता है, जबकि पंजीकृत जन्म वास्तविक संख्या है। नए जिलों के गठन और बड़े मेडिकल हब में आसपास के जिलों के प्रसव दर्ज होने से कई जिलों में पंजीकरण 100% से अधिक पहुंच गया। जन्म दर में गिरावट भविष्य में जनसंख्या वृद्धि पर लगाम लगने का संकेत है।

700+ मकानों की वैधता जांच में उलझे:1 माह बाद भी तय नहीं कर पाया जेडीए; खोहनागोरियान में 8 मौतों वाली पटाखा फैक्ट्री सरकारी जमीन पर या निजी?

खोह नागोरियान स्थित रहीम नगर तलाई में 9 जून को पटाखा फैक्ट्री की भीषण आग में 8 लोगों की मौत के 1 महीने बाद भी जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) इस नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है कि हादसा जिस इलाके में हुआ, वहां बसे 700 से अधिक मकानों वाली बस्ती सरकारी जमीन पर है या निजी खातेदारी कृषि भूमि पर। हादसे के तुरंत बाद जेडीए ने राजस्व रिकॉर्ड, सेटलमेंट नक्शे, मौके की पैमाइश और भू-अभिलेखों की जांच शुरू की थी। अब स्थिति यह है कि फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग तक घूम रही हैं और जांच पर जांच चल रही है। इस बीच अवैध निर्माण रुकने के बजाय बढ़ रहे हैं। बड़ा सवाल है कि यदि जमीन विवादित है तो वहां वर्षों से कॉलोनी कैसे बस गई? यदि जमीन निजी है तो उसका वैध रूपांतरण और स्वीकृत लेआउट कहां है? और यदि सरकारी जमीन है तो उस पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? स्थानीय लोगों का आरोप है कि तालाब और श्मशान की सरकारी भूमि पर भूमाफिया और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध कॉलोनियां विकसित कर दी। यही कारण है कि अब विभिन्न रिकॉर्डों में जमीन की स्थिति को लेकर विरोधाभास सामने आ रहा है। आरोप यह भी हैं कि प्रभावशाली लोगों के फार्म हाउस और बड़े कब्जों के कारण जेडीए कार्रवाई से बच रहा है। दूसरी वजह यह भी है कि पिछली सरकार में अवैध कॉलोनी बसाने का खेल, एक कांग्रेसी नेता ने जेडीए अफसरों की मिलीभगत से शुरू किया, जो अब भी बदस्तूर जारी है। 2 साल पहले जेडीए ने अवैध मान ध्वस्त की हादसे के बाद इलाके में अवैध निर्माण तेज हो गए। रहीम नगर तलाई से 500 मीटर दूर बालकनाथ आश्रम के पीछे ‘द्वारकापुरी-2’ नाम से नई कॉलोनी विकसित होने की चर्चाएं हैं। लोगों का कहना है कि प्लॉटिंग और निर्माण शुरू है। बड़ा सवाल है कि क्या इस कॉलोनी को जेडीए की स्वीकृति मिली है? यदि नहीं, तो निर्माण क्यों नहीं रोका गया? यदि यह अवैध है तो प्रवर्तन शाखा कार्रवाई कब करेगी? 2024 में बालकनाथ आश्रम के पीछे कृषि भूमि पर विकसित हो रही द्वारकापुरी नामक अवैध कॉलोनी को जेडीए ने ध्वस्त किया था। पुरानी जांचों में भी तालाब की जमीन पर सवाल…रहीम नगर तलाई का विवाद नया नहीं है। राजस्व रिकॉर्ड और सेटलमेंट नक्शों में तालाब भूमि के अस्तित्व पर सवाल उठ चुके हैं। जेडीए की रिपोर्ट में तालाब नहीं मिलने की बात कही गई, जबकि पुराने भू-अभिलेखों में जलाशय का उल्लेख होने के दावे किए जाते रहे हैं। विरोधाभास के कारण अब बसावट की वैधता जांच का विषय बनी हुई है। पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद उम्मीद थी कि जेडीए सीमांकन कर पूरे क्षेत्र की स्थिति स्पष्ट करेगा, लेकिन एक महीने बाद भी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

पारिवारिक कारण…चारा घोटाला, अभिषेक बंटी का टिकट क्या इसलिए कटा:BJP असली वजह क्यों नहीं बता रही, बांकीपुर में खेला के पीछे की कहानी

बांकीपुर विधानसभा सीट से अभिषेक कुमार बंटी ने नामांकन करने के 24 घंटे बाद टिकट वापस कर दिया। इसके बाद भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को नया प्रत्याशी बनाया। नीरज आज यानी 13 जुलाई को नामांकन करेंगे। बंटी ने टिकट वापस क्यों किया, इस वक्त सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। पार्टी ने सूत्रों के हवाले से मीडिया को तरह-तरह के कारण बताए हैं। लेकिन इसके पीछे क्या वही कारण हैं, जो बताए जा रहे हैं या कहानी कुछ और है, समझेंगे, बूझे की नाही में…। टिकट कटने के 4 कारण बताए जा रहे, क्या वह सही हैं? 1. पारिवारिक कारण 10 जुलाई की दोपहर अभिषेक कुमार बंटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि मैं पारिवारिक कारणों से चुनाव लड़ने में असमर्थ हूं। इसी वजह से अपना नामांकन वापस ले रहा हूं। बंटी ने भाजपा नेतृत्व को इस संबंध में पत्र भी लिखा और मौका देने के लिए आभार जताया। यह थोड़ा अटपटा है। क्योंकि… 2. चारा घोटाले में माता-पिता को मिली है सजा भाजपा ने सूत्रों के हवाले से मीडिया में जानकारी दी कि अभिषेक कुमार बंटी के माता-पिता पर चारा घोटाला का केस है। उनकी मां चंचला सिन्हा और पिता रविंद्र प्रसाद सिन्हा को चारा घोटाले में सजा हो चुकी है। पार्टी चारा घोटाले के खिलाफ लगातार मुहिम चला रही थी। ऐसे में टिकट देने से पार्टी की इमेज खराब होती। हां, यह सच बात है कि CBI अदालत ने अभिषेक की मां और पिता को डोरंडा ट्रेजरी घोटाले में 3-3 साल की सजा सुनाई है। दोनों अभी जमानत पर बाहर हैं। केस झारखंड हाईकोर्ट में पेंडिंग है। हालांकि, यह तर्क बहुत कमजोर है, क्योंकि… 3. मैट्रिक के सर्टिफिकेट में गड़बड़ी की चर्चा पार्टी ने सूत्रों के हवाले से दूसरा बड़ा कारण बताया कि अभिषेक कुमार बंटी के मैट्रिक के सर्टिफिकेट में गड़बड़ी थी। कुछ तकनीकी गड़बड़ी थी। इससे पार्टी की फजीहत होती। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि प्रशांत किशोर उनकी पढ़ाई-लिखाई को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले थे। उससे गलत मैसेज जाता। वहीं, अभिषेक के पिता का दावा है कि बेटे के मैट्रिक के सर्टिफिकेट में कोई गड़बड़ी नहीं है। चाहे तो कोई जांच कर सकता है। BJP का यह तर्क उसकी दोहरी नीतियों को उजागर कर रहा। क्योंकि… 4. नामांकन रद्द होने का खतरा पार्टी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अभिषेक ने नामांकन में गलत जानकारी दी थी। उन्होंने पढ़ाई से जुड़ी जानकारियां भी छिपाई थी। इस गलती की वजह से उनका नॉमिनेशन रद्द हो सकता था। ऐसे में भाजपा ने जोखिम नहीं लेने का फैसला किया। पार्टी का यह तर्क व्यवहारिक नहीं है। क्योंकि… अभिषेक ने 9 जुलाई को 2 सेट में नामांकन किया था। अगर पार्टी को जानकारी हो गई थी कि नामांकन में गलत जानकारी दी गई है तो वह दोबारा 2 सेट या एक सेट में नामांकन दाखिल करा सकती थी। क्योंकि अभी नामांकन में 2 दिन और बाकी थे। 10 और 13 जुलाई। …तो अभिषेक बंटी का टिकट क्यों कटा हमारी पड़ताल में मौटे तौर पर 3 बड़े कारण सामने आए हैं… 1. अभिषेक के पीछे सीनियर नेताओं की लॉबी लगी थी तारीख-7 जुलाई 2026। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जम्मू-कश्मीर के दौरे पर थे। तभी उन्हें जानकारी मिली कि उनकी अपनी सीट (बांकीपुर) पर कैंडिडेट के नाम का आज ही ऐलान होना है। वे जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे को बीच में ही छोड़कर दिल्ली लौट आए। दिल्ली लौटने के बाद नितिन नवीन ने बंटी का नाम फाइनल किया। इसके बाद पार्टी ने तुरंत इसका ऐलान कर दिया। बताया जा रहा है कि जैसे ही बंटी के नाम का ऐलान हुआ। पटना में तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई। अपनी पसंद के नेता को टिकट नहीं दिला पाने से निराश नेताओं की एक लॉबी एक्टिव हुई। दिल्ली में मजबूत पोजिशन में बैठे एक नेता के माध्यम से टॉप लीडरशिप को सीनियर नेताओं ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद टॉप लीडरशिप ने नितिन नवीन के पटना दौरे को रोक दिया। चूंकि नितिन नवीन को 9 जुलाई को बंटी के नामांकन कार्यक्रम में शामिल होना था। तब कहा गया कि अब नितिन नवीन 10 जुलाई को पटना आएंगे। 2. प्रशांत किशोर फैक्टर और खराब इमेज का फीडबैक सीनियर नेताओं की नाराजगी के फीडबैक के बीच पार्टी हाईकमान को बांकीपुर सीट की एक रिपोर्ट दी गई। इसमें बताया गया कि प्रशांत किशोर के खुद मैदान में उतरने से बांकीपुर का मुकाबला बेहद कड़ा और हाई-प्रोफाइल हो गया है। अभिषेक बंटी एक कमजोर उम्मीदवार हैं। बंटी की इलाके में इमेज कथित तौर पर बहुत साफ-सुथरी नहीं है। ना ही वह मैच्योर नेता हैं। इलाके में उनकी पहचान सिर्फ नितिन नवीन के कामों को मैनेज करने वाले की है। 3. बड़े नेताओं की लड़ाई में नीरज की चमकी किस्मत बताया जा रहा है कि लगातार मिल रहे फीडबैक पर टॉप लीडरशिप ने नितिन नवीन से बात की। उन्हें पुनर्विचार करने की सलाह दी गई। और अंतिम फैसला भी नितिन नवीन के ऊपर छोड़ दिया गया। चूंकि टॉप लीडरशिप नितिन नवीन के मर्जी के बिना प्रत्याशी नहीं बदलना चाहती थी। क्योंकि वह इलाका उनका है। चर्चा है कि इसके बाद नितिन नवीन ने पासा पलट दिया। उन्होंने अपने दूसरे भरोसेमंद नीरज कुमार सिन्हा को टिकट दिला दिया। वह जानते थे कि नीरज के नाम पर पार्टी को ज्यादा आपत्ति नहीं हो सकती है क्योंकि… नीरज को खुद नहीं पता था कि हमको टिकट मिलेगा। एक इंटरव्यू में नीरज ने बताया, ‘10 जुलाई की दोपहर हम बूथ पर पर्ची बांट रहे थे। तब दोस्तों का फोन आया कि तुम्हारा नाम टिकट की रेस में है। हमको भरोसा नहीं हुआ। कुछ देर बाद पार्टी के सीनियर नेताओं का फोन आया और पार्टी दफ्तर बुलाया गया। दफ्तर पहुंचे तो बताया गया कि आपको चुनाव लड़ना है। हम तो खानदानी जनसंघी हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भरोसा जताया है तो उनके भरोसे पर खरा उतरेंगे। उनके कामों का आगे बढ़ाएंगे।’

पंजाब में परिवार ने जहर क्यों निगला:मजार पर ₹55 लाख की कसम, SHO की धमकी; जज के सामने जिंदा बची पत्नी ने खोला हर राज

पटियाला में परिवार के जहर निगले के मामले में महिला ने जज के सामने पूरे राज खोले। ICU में भर्ती महिला तमन्ना ने जज को बताया कि ननद-ननदोई ने उनसे 55 लाख रुपए ठगे। पैसे वापस मांगे तो देने से मुकर गए। ननदोई रणबीर छिब्बर उर्फ लक्की ने अपने एसएचओ साढ़ू का रौब दिखाकर धमकाया। तमन्ना ने बताया कि पैसे लिए या नहीं इसका फैसला करने मजार पर गए तो वहां ननद-ननदोई ने झूठी कसम खाई। तमन्ना ने अपनी जेठानी पर भी गंभीर आरोप लगाए। तमन्ना ने बताया कि जेठानी उसके पति पर बुरी नजर रखती थी। जब उसने विरोध किया तो उसने व पूरे परिवार ने उस पर जादू-टोना करवाने का आरोप लगाया। इसके साथ पति विकास बातिश को उसके अफसरों ने बैंक में प्रताड़ित किया। महिला ने बताया कि चारों तरफ से घिरने की वजह से पति विकास और वह डिप्रेशन में आ गए थे। उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझा तो बच्चों के साथ जहर निगला। इससे पति विकास बातिश (45) और बेटी खुशी बातिश (13) की मौत हो गई। जबकि, तमन्ना बातिश (43) और बेटा कनव (11) बच गए। दोनों अभी अस्पताल में भर्ती हैं। सिलसिलेवार ढंग से जानिए, परिवार के जहर खाने का पूरा मामला ननद, ननदोई, जेठ और जेठानी पर केस दर्ज
इस बयान के आधार पर पटियाला पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए आरोपी ननद निधि छिब्बर उर्फ साक्षी, ननदोई रणबीर छिब्बर उर्फ लकी, जेठानी और जेठ पंकज के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत थाना में गैर-जमानती मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपियों को गिरफ्तारी के लिए कर रहे हैं रेड
एसएचओ इंस्पेक्टर विनरप्रीत सिंह ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए रेड की जा रही हैं। पीड़िता ने जज के सामने बयान दिए हैं उनके आधार पर ही एफआईआर हुई है। जांच में जो जो तथ्य सामने आएंगे उसके हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। ************* ये खबर भी पढ़ें: पटियाला में बैंक मैनेजर ने परिवार समेत जहर खाया: बाप और बेटी की मौत; मां-बेटे की हालत नाजुक, अस्पताल में भर्ती कराया गया पटियाला में एक ही परिवार के चार सदस्यों ने जहरीला पदार्थ खा लिया। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते सभी को राजिंदरा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान पिता और बेटी की मौत हो गई। जबकि, मां और बेटे का इलाज चल रहा है। (पढ़ें पूरी खबर)

गोल्डन टेंपल के बाहर सगी बहनें भिड़ीं, VIDEO:माथा टेकने से पहले दोनों में बहस, एक ने दूसरी को थप्पड़ मारे, फिर भाग निकली

अमृतसर में गोल्डन टेंपल में माथा टेकने आई सगी बहनें आपस में भिड़ गईं। दोनों के बीच पहले जोरदार बहस हुई। इसके बाद एक बहन इस कदर गुस्से में आई कि उसने दूसरी को थप्पड़ जड़ दिए। इस दौरान वहां पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। इसके बाद लोगों ने बीचबचाव कर उन्हें रोका। हंगामा और भीड़ देखकर थप्पड़ मारने वाली बहन वहां से भाग निकली। इसका वीडियो सामने आया है। जिसके बाद पुलिस भी मामले की जांच में जुट गई है। इसके लिए वीडियो में दिख रहे आसपास के लोगों की पहचान कर उनसे पूछताछ की तैयारी की जा रही है। सबसे पहले जानिए, वीडियो में क्या दिख रहा
वीडियो में सबसे पहले टी-शर्ट पहने लड़कियां पीले सूट वाली लड़की पर अचानक उसे मारने की नीयत से झपट पड़ती है और उसे दो-तीन थप्पड़ जड़ देती है। थप्पड़ खाने के बाद पीले सूट पहने लड़की भी जवाबी हमला करने के लिए उसकी ओर दौड़ती है, लेकिन तभी वहां मौजूद एक लड़का बीच-बचाव करते हैं। लड़का काफी देर तक पीले सूट वाली लड़की को पकड़कर रोकता है। इसके बाद हमला करने वाली लड़की वहां से जाने लगती है, लेकिन मौका मिलते ही पीले सूट पहने लड़की खुद को छुड़ाकर दोबारा उसके पीछे दौड़ पड़ी। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने दोनों को फटकार लगाई, जिसके बाद दोनों शांत हुईं। पढ़िए, क्या है पूरा मामला
पुलिस की जांच के मुताबिक यह घटना गोल्डन टेंपल के घंटाघर गेट के सामने स्थित फव्वारे के पास हुई थी। मामला शनिवार शाम करीब 6 बजे का है। दोनों लड़कियां अमृतसर की ही रहने वाली हैं। वह गोल्डन टेंपल में माथा टेकने साथ आईं थी। हालांकि गेट के पास ही उनके बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। पुलिस बोली- दोनों नाबालिग, कहासुनी के बाद मारपीट हुई
कोतवाली पुलिस स्टेशन के एसएचओ हरमनजीत सिंह ने बताया कि मारपीट करने वाली दोनों लड़कियां नाबालिग हैं। दोनों गोल्डन टेंपल में माथा टेकने आई थीं। इसी दौरान किसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। दोनों के बीच किस बात को लेकर बहस हुई, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ———- ये खबरें भी पढ़ें… गोल्डन टेंपल में युवकों की पिटाई, 2 सेकेंड में 3 थप्पड़ जड़े; मोबाइल चोरी की जांच कर रहे थे अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल के मंजी साहिब दीवान हाल के बाहर जांच के दौरान 2 युवकों के पासे से इंजेक्शन, तंबाकू और बीड़ी मिली है। इसके बाद वहां पर मौजूद लोग भड़क गए और उन्होंने दोनों को पीट दिया है। इस दौरान एक युवक आरोपी दोनों को करीब 2 सेकंड में 3 थप्पड़ जड़ देता है। इसका वीडियो भी सामने आया है। (पढ़ें पूरी खबर) गोल्डन टेंपल में निक्कर पहने विदेशी कपल को रोका, सिख बोला- पूरे कपड़े पहनकर आओ अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल में निक्कर पहन कर माथा टेकने जा रहे विदेशी कपल को सिख ने रोक दिया। महिला और युवक दोनों ने निक्कर पहनी हुई थी। सिख ने उन्हें गेट पर रोका और नियमों के बारे में बताया। सिख ने बताया कि निक्कर पहनकर अंदर जाना मना है। (पढ़ें पूरी खबर)