ब्रेकिंग न्यूज़
जोधपुर में बिजली विभाग और डिस्कॉम का एक्शन:दो बड़ी समस्याओं का हुआ स्थाई समाधान, एग्जीक्यूटिव कुंदन बने 'पब्लिक के स्टार'

जोधपुर। सूर्यनगरी को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के दावों के बीच शहर के कई रिहायशी इलाकों से प्रशासनिक तालमेल की कमी और बुनियादी अव्यवस्थाओं की गंभीर तस्वीरें सामने आई हैं। स्थानीय निवासियों की इन्हीं समस्याओं को पुरजोर तरीके से उठाने के लिए दैनिक भास्कर का ‘भास्कर समाधान’ एक सशक्त माध्यम साबित हो रहा है। इस बार शास्त्री नगर, बॉम्बे मोटर चौराहा, बिस्तियों का बास और चोपासनी रोड जैसे व्यस्त क्षेत्रों से नागरिकों ने नियमों के विरुद्ध बने स्पीड ब्रेकर, पेट्रोल पंप के पीछे लटकते हाईवोल्टेज तार, आवारा कुत्तों के आतंक और सरकारी विभागों में समन्वय की कमी के कारण बार-बार खोदी जा रही मुख्य सड़कों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। राहत की बात यह है कि ‘भास्कर समाधान’ के असर से कबीर नगर में डुंगरिया महादेव मंदिर के पास दिनों से रास्ते में पड़ा भारी-भरकम बिजली का पोल हटा दिया गया है। वहीं, विजय चौक में डिस्कॉम कॉल सेंटर के एग्जीक्यूटिव कुंदन ने अनुकरणीय मुस्तैदी दिखाते हुए अघोषित बिजली कटौती की तकनीकी खामी को तुरंत दुरुस्त करवाया है, जिससे वे ‘पब्लिक स्टार’ बनकर उभरे हैं। दूसरी ओर, शहर के अन्य प्रभावित इलाकों में लापरवाही के कारण लोग अब भी हादसों का शिकार हो रहे हैं। पीड़ित जनता ने प्रशासन से शेष जन-समस्याओं के भी त्वरित निस्तारण की मांग की है। भास्कर एप पर अपनी समस्या पोस्ट करने लिए यहां क्लिक कीजिए… गलत जगह बना स्पीड ब्रेकर
जोधपुर के शास्त्री नगर स्थित पत्रकार कॉलोनी क्षेत्र से एक अजीबोगरीब जन-समस्या सामने आई है, जिससे वाहन चालक बेहद परेशान हैं। कॉलोनी के रहने वाले कृष्णा शर्मा ने दैनिक भास्कर ऐप के ‘भास्कर समाधान’ पर अवैध स्पीड ब्रेकर का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में डीटीडीसी (DTDC) ऑफिस के ठीक सामने मुख्य सड़क पर बेहद गलत जगह पर एक स्पीड ब्रेकर बना दिया गया है। इस ब्रेकर का मापदंड भी यातायात नियमों के अनुसार सही नहीं है, जिसके कारण वहां से गुजरने वाले दुपहिया और चौपहिया वाहन चालकों को तगड़ा झटका लगता है।
ढीले पड़े तारों से क्षेत्रवासियों को हादसे का डर
जोधपुर के बॉम्बे मोटर चौराहा क्षेत्र से बिजली विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिससे स्थानीय निवासियों और राहगीरों की जान दांव पर लगी है। क्षेत्र के निवासी रमेश सिंह ने दैनिक भास्कर पर इस समस्या को पोस्ट करते हुए लिखा कि हाजी उमराव खान पेट्रोल पंप के ठीक पीछे बिजली के मुख्य तार काफी नीचे तक झूल रहे हैं। यह क्षेत्र पेट्रोल पंप के ठीक पीछे है और यहां लोगों की आवाजाही भी बनी रहती है, ऐसे में हवा में लटकते ये ढीले तार कभी भी किसी बड़े हादसे या शार्ट सर्किट का कारण बन सकते हैं।
विभागों के समन्वय की कमी से जनता परेशान
जोधपुर शहर के बिस्तियों का बास इलाके के रहने वाले अतुल पुरोहित ने मुख्य सड़क को बार-बार तोड़ने के बारे में समस्या पोस्ट की है। उन्होंने लिखा कि सरकारी विभागों के बीच आपसी तालमेल (समन्वय) की कमी और लापरवाही के कारण पिछले 5 महीनों के अंदर ही दूसरी बार रोड तोड़कर छोड़ दी गई है। कुछ समय पहले ही इस सड़क को सीवर लाइन डालने के लिए खोदा गया था। जैसे-तैसे सड़क दोबारा बनी, तो अब बिजली विभाग ने अपनी लाइन डालने के लिए इसे फिर से तुड़वा दिया। विभागों की इस मनमानी के कारण पूरी सड़क मलबे और गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, जिससे स्थानीय निवासियों और राहगीरों का निकलना दूभर हो गया है। क्षेत्रवासियों ने आक्रोश जताते हुए मांग की है कि दोनों विभाग आपस में तालमेल बिठाएं और इस खोदी गई सड़क को जल्द से जल्द दोबारा बनवाकर राहत प्रदान करें।
बच्चों का गलियों में निकलना हुआ दूभर
शहर के चोपासनी रोड स्थित इंद्रा चौक क्षेत्र से आवारा जानवरों के आतंक की समस्या सामने आई है। यहां के स्थानीय निवासी सुरेंद्र ने दैनिक भास्कर के ‘भास्कर समाधान’ पर इस समस्या को पोस्ट किया है। उन्होंने बताया कि उनकी गली में आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे स्थानीय निवासियों का जीना बेहाल हो गया है। स्थिति यह है कि कुत्तों के आक्रामक व्यवहार के कारण अब छोटे बच्चों और बुजुर्गों का अकेले घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, ये जानवर राहगीरों और दुपहिया वाहन चालकों के पीछे दौड़ते हैं, जिससे हर समय गंभीर सड़क हादसों का खतरा बना रहता है। क्षेत्रवासियों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का तुरंत संज्ञान लेकर आवारा पशुओं और कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जाए।
रास्ते में पड़े बिजली के पोल की समस्या का समाधान
जोधपुर के कबीर नगर स्थित डुंगरिया महादेव मंदिर के पास पिछले कई दिनों से रास्ते में पड़े बिजली के पोल की समस्या का आखिरकार समाधान हो गया है। स्थानीय निवासी हेमसिंह ने इस गंभीर समस्या को लेकर दैनिक भास्कर ऐप के ‘भास्कर समाधान’ पर एक पोस्ट साझा की थी। उन्होंने बताया था कि मुख्य रास्ते पर काफी दिनों से एक भारी-भरकम बिजली का पोल जमीन पर लावारिस हालत में पड़ा हुआ था, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को निकलने में भारी परेशानी हो रही थी और रात के अंधेरे में गंभीर हादसे का अंदेशा बना रहता था। राहत की बात यह है कि ‘भास्कर समाधान’ पर यह मामला प्रमुखता से उजागर होने के तुरंत बाद संबंधित बिजली विभाग हरकत में आया। विभाग ने बिना समय गंवाए मौके पर अपनी टीम भेजी और सड़क पर पड़े उस पोल को वहां से हटाकर व्यवस्था दुरुस्त कर दी। समस्या का स्थाई समाधान होने पर हेमसिंह और कबीर नगर के अन्य क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली है और त्वरित कार्रवाई के लिए आभार जताया है।
‘भास्कर समाधान’ से चमकी बिजली
जोधपुर के विजय चौक स्थित चतुर्भुज गहलोत मार्ग के निवासियों को पिछले कुछ समय से आ रही बिजली कटौती की गंभीर समस्या से आखिरकार राहत मिल गई है। यहां के स्थानीय निवासी महेंद्र भूटरा ने क्षेत्र में बार-बार हो रही अघोषित बिजली कटौती को लेकर दैनिक भास्कर पर अपनी शिकायत पोस्ट की थी। उन्होंने बताया था कि बार-बार बत्ती गुल होने से उमस और गर्मी में आम जनता, खासकर बच्चों और बुजुर्गों का जीना मुहाल हो गया था और रोजमर्रा के काम ठप हो रहे थे। समस्या पोस्ट होने के बाद डिस्कॉम (बिजली विभाग) प्रशासन हरकत में आया। डिस्कॉम कॉल सेंटर के एग्जीक्यूटिव ने मामले का तुरंत संज्ञान लिया और तकनीकी खामी को दुरुस्त करवाकर क्षेत्र में सुचारू बिजली आपूर्ति बहाल करवाई। समस्या का स्थाई समाधान होने पर महेंद्र भूटरा सहित क्षेत्र के अन्य नागरिकों ने राहत की सांस ली है और त्वरित कार्रवाई के लिए धन्यवाद जताया है।
कुंदन बने आज ‘पब्लिक के स्टार’
जोधपुर के विजय चौक स्थित चतुर्भुज गहलोत मार्ग पर बिजली कटौती की समस्या को दूर करने में डिस्कॉम कॉल सेंटर के एग्जीक्यूटिव कुंदन ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। दरअसल, स्थानीय निवासी महेंद्र भूटरा ने दैनिक भास्कर के ‘भास्कर समाधान’ मंच पर बार-बार हो रही अघोषित बिजली कटौती की शिकायत पोस्ट की थी, जिससे उमस और गर्मी के कारण बच्चों और बुजुर्गों का जीना मुहाल हो रहा था। यह मामला सामने आते ही डिस्कॉम एग्जीक्यूटिव कुंदन ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने न सिर्फ शिकायत का त्वरित संज्ञान लिया, बल्कि बिना समय गंवाए तकनीकी टीम को निर्देश देकर लाइन की खामियों को पूरी तरह दुरुस्त करवाया। कुंदन की इस तत्परता और कार्यशैली के कारण क्षेत्र में बिजली की सुचारू आपूर्ति बहाल हो सकी। समस्या का स्थाई समाधान करवाने के लिए महेंद्र भूटरा सहित सभी क्षेत्रवासियों ने डिस्कॉम एग्जीक्यूटिव कुंदन के इस सकारात्मक प्रयास की सराहना करते हुए उनका आभार जताया है।
पब्लिक की आवाज बना ‘भास्कर समाधान’ ‘भास्कर समाधान’ सेगमेंट देशभर में इकलौता ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां शहरवासी सीधे अपने इलाके से जुड़े सिविक इश्यू खुद पोस्ट कर सकते हैं। ये सेगमेंट जनता को अपने गली-मोहल्ले की परेशानियां सीधे विभाग के उच्चाधिकारियों के सामने रखने की सुविधा देता है। लोगों से मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद अब इसे और अधिक प्रभावी, सरल और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है। अब सीधे अधिकारियों तक पहुंच रहीं समस्याएं दैनिक भास्कर के इस सेगमेंट में अधिकारी भी अपने एक्शन के बारे में बता सकेंगे। शिकायत जिस विभाग से संबंधित है, वह अब सीधे उन्हीं अधिकारियों तक पहुंचेगी। इसके बाद अधिकारी उस लोकेशन को मैप पर देख सकेंगे। यदि उन्होंने समाधान कर दिया है तो शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी एप के जरिए ही दे सकेंगे या बता सकेंगे कि अभी काम जारी है। अधिकारी चाहें तो जिस यूजर ने शिकायत की है, उसे कॉल भी कर सकते हैं। ये खबरें भी पढ़िए… 1.जोधपुर के लक्ष्मण नगर में सीवर ब्लॉकेज खुला:जुनावो की ढाणी को मिली बिजली-पानी के संकट से मुक्ति, डिस्कॉम के सूर्यभान बने ‘पब्लिक के स्टार’ 2.भास्कर समाधान: कचरा हटा, रोड लाइट चालू; लोगों को राहत:गंदे पानी, जाम सीवर और खुले चैंबर की समस्या, दिव्या दैया बनी आज की ‘स्टार ऑफिसर’ 3.’भास्कर समाधान’ पर एक पोस्ट से हल:3 साल से 500 घर जी रहे अंधेरे में, सरकारी पाइपलाइन पर लगाए अवैध वॉल्व, सप्लाई में आ रहा गंदा पानी 4.भास्कर समाधान, कई दिनों से बंद पड़ी स्ट्रीट लाईट चालू:अजमेर में कहीं गंदा पानी, कही पेयजल संकट, सड़क और सीवरेज समस्याओं से जूझ रहे लोग 5.‘भास्कर समाधान’: एक पोस्ट से मिल रहा हल:अजमेर में अधिकारी शिकायतों पर ले रहे एक्शन, यूजर बोले 25 साल से नालियां ठीक नहीं हुईं तो दरगाह बाजार का 15 दिन से गड्‌ढा 6.‘भास्कर समाधान’: समस्याओं का हल एक पोस्ट से:अधिकारी शिकायतों का खुद करवा रहे समाधान, अजमेर में नाली, सफाई और पानी सबसे बड़ी बुनियादी समस्या 7.भास्कर समाधान का असर; बेसहारा पशुओं की समस्या का निस्तारण:हाईटेंशन लाइन और पानी लीकेज से लोग परेशान, देवेन्द्र सिंह बने आज के ‘स्टार ऑफिसर’ 8‘भास्कर समाधान’: अधिकारी खुद करवा रहे सॉल्यूशन:दरगाह बाजार में नहीं सुधर रही सफाई व्यवस्था, 6 महीने से खराब हैंडपंप

RGHS में 2 हजार तक की जांच बिना मंजूरी होगी:महंगी जांच के लिए पोर्टल से पहले परमिशन जरूरी, इमरजेंसी में छूट

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाली चिकित्सा सुविधा में सोमवार से बड़ा बदलाव लागू हो गया है। अब ओपीडी में 2 हजार रुपए तक की सामान्य जांच कराने के लिए पहले से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। वहीं, 2 हजार रुपए से अधिक लागत वाली जांच के लिए आरजीएचएस पोर्टल से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने जांचों के अनुमोदन की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 2 हजार तक की जांच सीधे कराई जा सकेगी
आरजीएचएस प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. निधि पटेल की ओर से जारी आदेश के अनुसार, डॉक्टर द्वारा लिखी गई सामान्य जांचों की कुल लागत 2 हजार रुपए तक होने पर उन्हें बिना पूर्व अनुमति के कराया जा सकेगा। इससे मरीजों को जांच के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उपचार शुरू करने में देरी भी नहीं होगी। महंगी जांच के लिए पूर्व अनुमति जरूरी
यदि डॉक्टर द्वारा लिखी गई सामान्य जांचों की कुल लागत 2 हजार रुपए से अधिक है, तो जांच कराने से पहले आरजीएचएस पोर्टल के माध्यम से अनुमति लेनी होगी। अनुमति मिलने के बाद ही ऐसी जांच कराई जा सकेगी। आपातकालीन मामलों को राहत
आपात स्थिति में अस्पताल या चिकित्सक बिना पूर्व अनुमति के जरूरी जांच तुरंत करा सकेंगे। हालांकि, बाद में जांच की आवश्यकता से जुड़े चिकित्सकीय दस्तावेज और उसका औचित्य आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य रहेगा। आज से लागू हुए नए नियम
यह नई व्यवस्था 13 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई है। यह नियम 13 जुलाई 2026 या उसके बाद आरजीएचएस पोर्टल पर प्रस्तुत किए जाने वाले सभी ओपीडी सामान्य जांच संबंधी अनुरोधों पर लागू होंगे।

जहां 5 मौत, वहां 6 बड़ी खामियां:जयपुर-अजमेर हाईवे पर 10 किमी में 40 से ज्यादा अवैध स्टॉपेज, रेलिंग कूदकर हाईवे क्रॉस कर रहे

जयपुर-अजमेर हाईवे पर लगातार 2 दिन 2 बड़े हादसे हुए। पांच लोगों को बेकाबू डंपर-ट्रकों ने कुचल दिया था। जिला कलेक्टर ने एक टीम बनाकर हादसे के कारणों की जांच के निर्देश दिए हैं। उससे पहले भास्कर टीम ने सबसे ज्यादा हादसे वाले स्पॉट पर पहुंचकर पड़ताल की। 200 फीट बाइपास से करीब 10 किलोमीटर के बीच 40 से ज्यादा अवैध स्टॉपेज मिले। सवारियां भरने की होड़ में अवैध तरीके से बसें-टैक्सियां यहां रुकती हैं। लोग जान जोखिम में डालकर रेलिंग कूदकर हाईवे क्रॉस कर रहे थे। ट्रेलर और ट्रक ओवर स्पीड में दौड़ रहे थे। चौंकाने वाली बात यह है 7 जुलाई को जहां ट्रेलर ने फुटपाथ पर खड़े एक परिवार के 5 लोगों को कुचला था, वहां यू-टर्न को अभी तक बंद नहीं किया गया है। न ही टूटी रेलिंग को ठीक किया गया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट….. नंबर-1 : पांच मौत वाला ‘यू-टर्न’ अब भी चालू हीरापुरा पुलिया के पास 7 और 8 जुलाई को दो अलग-अलग हादसे हुए। 7 जुलाई को फुटपाथ पर बस का इंतजार कर रहे एक ही परिवार के 5 लोगों को एक ट्रेलर ने कुचला दिया था। इसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी। इसके अगले ही दिन बाइक सवार दो लोगों को कुचला, जिसमें एक की मौत हो गई। पांच लोगों की मौत के बाद भी जिम्मेदार विभागों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। 7 दिन बाद जब भास्कर टीम वहां पहुंची तो फिर से वैसे ही हालात थे। पुलिया से उतरने वाले वाहन सर्विस लेन से रॉन्ग साइड में यू-टर्न लेते नजर आए। ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ ने भी अवैध बस स्टैंड पर खड़ी बसों के खिलाफ कुछ दिन केवल औपचारिक चालान कर कार्रवाई पूरी मान ली। एनएचएआई ने दुर्घटना में क्षतिग्रस्त रेलिंग की मरम्मत कर एक साइन बोर्ड और ब्लिंकर लाइट लगा दी है। लेकिन इससे तुरंत पहले जहां पुलिया खत्म होती है, वहां यू-टर्न बंद नहीं किया गया। पुलिया से उतरने वाले हिस्से पर स्पीड कंट्रोल के लिए रंबल स्ट्रिप्स (डंबल ब्रेकर) लगाने जैसी जरूरी कार्रवाई अब तक नहीं की गई। सर्विस लेन से यू-टर्न लेने वाले वाहन लगातार दुर्घटना को न्यौता दे रहे हैं। इससे महज एक किलोमीटर आगे चलते ही कमला नेहरू नगर पुलिया आती है। यहां पुलिया के नीचे ट्रैफिक पुलिस ने वाहन नहीं निकालने का साइन बोर्ड तो लगा दिया। लेकिन पुलिस की मौजूदगी में ही रॉन्ग साइड से वाहन निकल रहे हैं। नंबर-2 : रिंग रोड से पहले टूटी रेलिंग, न मरम्मत हुई, न लगा साइन बोर्ड एनएचएआई ने अजमेर से जयपुर आने वाले भारी वाहनों को रिंग रोड पर डायवर्ट करने के लिए लूप (लीफ) शुरू किया था। मुख्य सड़क से कटने वाले इस हिस्से पर लगाई गई रेलिंग करीब महीनेभर पहले एक भारी वाहन की टक्कर से क्षतिग्रस्त हो गई थी। एक महीने बाद भी रेलिंग की मरम्मत नहीं हुई और न ही यहां रिंग रोड की दिशा बताने वाला कोई साइन बोर्ड लगाया गया है। क्षतिग्रस्त रेलिंग भविष्य में बड़े हादसों की वजह बन सकती है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। इसके अलावा हाईवे पर कई साइन बोर्ड धुंधले या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे खासकर रात में वाहन चालकों को खासी परेशानी हो सकती है। नंबर-3 : सर्विस लेन पर साइन बोर्ड गायब, कई विज्ञापनों से ढके हीरापुरा चौराहे से लेकर बगरू तक करीब 20 किलोमीटर आबादी क्षेत्र इस हाईवे से लगता है। यहां सर्विस लेन पर पर्याप्त साइन बोर्ड नहीं हैं। वाहन चालकों को सर्विस लेन की एंट्री और एग्जिट समझने में परेशानी होती है। जहां साइन बोर्ड लगे हैं, वहां भी कई जगह स्थानीय लोगों ने अपने प्रतिष्ठानों के विज्ञापन लगाकर उन्हें ढक दिया है। नतीजतन तेज रफ्तार वाहन चालकों को समय पर दिशा की जानकारी नहीं मिलती और वे आगे जाकर सड़क पर ही वाहन रोक देते हैं। एनएचएआई और ट्रैफिक पुलिस की नियमित मॉनिटरिंग के अभाव में यह अव्यवस्था बनी हुई है। नंबर-4 : हाईवे पर बस, ऑटो, जीप और ट्रकों के 40 से ज्यादा अवैध स्टॉपेज जयपुर-अजमेर एक्सप्रेस-वे पर हीरापुरा से बगरू और बगरू से हीरापुरा के बीच करीब 40 अवैध स्टॉपेज बने हुए हैं। आसपास की कॉलोनियों से सवारियां उठाने की होड़ लगी रहती है। पड़ताल के दौरान कई वाहन चालक इन अवैध स्टॉपेज पर रोकर सवारियां उतारते-चढ़ाते मिले। कुछ जगहों पर चेतावनी के साइन बोर्ड लगे हैं। लेकिन प्रभावी कार्रवाई के अभाव में हालात जस के तस हैं। हाईवे के दोनों तरफ लोहे की मजबूत रेलिंग लगी है। लेकिन कई जगह लोगों ने रेलिंग तोड़कर अपनी कॉलोनियों के लिए रास्ते बना लिए हैं। प्रशासन और एनएचएआई ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। नंबर-5 : 10 किलोमीटर तक न फुटओवर ब्रिज, न अंडरपास जयपुर-अजमेर हाईवे पर हीरापुरा से बगरू के बीच करीब 10 किलोमीटर तक न कोई फुटओवर ब्रिज है और न ही पैदल यात्रियों के लिए अंडरपास। केवल कुछ जगह पुलिया हैं, जिनके बीच डिस्टेंस काफी ज्यादा है। हाईवे के दोनों ओर घनी आबादी होने के कारण लोग जान जोखिम में डालते हुए सीधे हाईवे पार करते हैं। 60 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ते वाहनों के बीच अचानक पैदल यात्री आने से लगातार हादसे हो रहे हैं। कई लोग सड़क पार करते समय जान गंवा चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग न रेलिंग दुरुस्त करा रहे हैं और न ही पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित पार-पथ बना रहे हैं। एक स्थानीय निवासी विनोद ने बताया कि कुछ दिन पहले सड़क पार करते समय एक व्यक्ति तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आ गया था। इसके बावजूद हालात में कोई बदलाव नहीं आया। नंबर-6 : लेन सिस्टम का पालन नहीं पुलिस मुख्यालय के निर्देश हैं कि भारी वाहन निर्धारित लेन में चलें, लेकिन हीरापुरा से बगरू तक कई ट्रक और अन्य भारी वाहन लेन सिस्टम का पालन करते नहीं मिले। गलत लेन में चलने के कारण छोटे वाहनों को बार-बार जिगजैग तरीके से ओवरटेक करना पड़ता है, जो दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन सकता है। नियमित मॉनिटरिंग नहीं होने से हाईवे पर लेन सिस्टम केवल कागजों तक सीमित नजर आता है। हाईवे का दौरा कर चुके एक्सपर्ट ने मानी कई खामियां PWD के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर और रोड इंजीनियरिंग एक्सपर्ट सीताराम शर्मा ने बताया कि उन्होंने खुद इस हाईवे पर कई खामियों को पॉइंट आउट किया है। नियमानुसार नेशनल हाईवे पर जहां सर्विस रोड बनी हुई है तो उस पॉइंट पर साइन बोर्ड लगे होने चाहिए। लेकिन जयपुर-अजमेर हाईवे पर अधिकांश जगह पर साइन बोर्ड नहीं हैं। जहां पर साइन बोर्ड लगे हैं, वहां पर लोगों ने अपने विज्ञापन लगा रखे हैं। इससे वाहन चालकों को पता ही नहीं चलता कि सर्विस रोड कहां से शुरू हो रही है। पैदल चलने वालों के लिए इस हाईवे पर कोई व्यवस्था नहीं की गई है। देखा गया है कि लोग चलते वाहनों के बीच रोड क्रॉस करके निकल रहे हैं। इससे वह खुद के साथ-साथ दूसरे लोगों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। सीताराम शर्मा ने बताया एनएचएआई को चाहिए कि जहां फुट ओवर ब्रिज की जरूरत है, वहां बनाया जाए। हाईवे पर टैक्सी, बसें और अन्य निजी वाहन बीच में रोकर ही सवारियां उतार रहे हैं, इस पर प्रभावी तरीके से रोक लगे। ऐसे पॉइंट्स को चिन्हित कर वहां नो-पार्किंग, नो-स्टॉपेज के बोर्ड लगाने चाहिए। फिर भी कोई वाहन रोकता है तो कार्रवाई करनी चाहिए। जयपुर पुलिस कमिश्नर बोले- खामियों को लेकर NHAI को पत्र लिखा गया है जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल कहते हैं- हीरापुरा चौराहे पर हुई दुर्घटना के बाद ट्रैफिक पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया था। दुर्घटना की परिस्थितियों को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस के डीसीपी योगेश गोयल ने एनएचएआई (NHAI) को पत्र लिखकर वहां मौजूद कई तकनीकी खामियों की ओर ध्यान दिलाया है। जयपुर ट्रैफिक पुलिस अपने स्तर पर भी सुधार को लेकर प्रयास कर रही है। हाईवे पर संचालित अवैध बस स्टॉपेज बंद कराए जा रहे हैं। पुलिया के नीचे बना यू-टर्न यातायात की दृष्टि से पूरी तरह अनुचित है। इसलिए उसे भी बंद करने की कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा करीब 100 मीटर लंबा खुला कट (लीफ) भी दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है, जिसे कम कर लगभग आधा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ——- यह खबर भी पढ़िए… जयपुर में परिवार पर चढ़ा ट्रेलर, 4 की मौत:बच्चों के शव टुकड़ों में नाले में गिरे, मां के पैर टूटे; ट्रेलर के 5 चालान पेंडिंग जयपुर में तेज रफ्तार ट्रेलर ने फुटपाथ पर बैठे एक परिवार के 5 लोगों को कुचल दिया। हादसे में तीन बच्चों और पिता की मौत हो गई। मां के दोनों पैर टूट गए। हादसा इतना भीषण था कि बच्चों के शवों के चिथड़े उड़ गए। एक बच्चे के शव के दो टुकड़े हो गए। सभी लोग नाले में गिर गए। पढ़ें पूरी खबर

सवाईमाधोपुर में मनचले को युवतियों ने पीटा:दुकानदारों ने पुलिस के हवाले किया; कोचिंग जाते समय करता था परेशान

सवाई माधोपुर शहर की न्यू मार्केट इलाके में युवतियों ने कमेंट करने वाले 17 साल के युवक की पिटाई कर दी। दुकानदारों ने आरोपी युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। तीन-चार दिन से कर रहा था पीछा
शहर पुलिस चौकी प्रभारी हरिलाल ने बताया- रविवार शाम कुछ व्यापारी युवक को पकड़कर चौकी पर लाए थे। युवतियों ने पुलिस को बताया कि युवक पिछले तीन-चार दिनों से उनका पीछा कर रहा था, जिसे वे लगातार नजरअंदाज कर रही थीं। इससे उसकी हिम्मत बढ़ती गई। कोचिंग से निकलते ही की अभद्र हरकत
युवतियों के अनुसार, रविवार शाम वे कोचिंग से बाहर निकलीं तो युवक ने अश्लील इशारे किए। इसके बाद उन्होंने युवक की पिटाई कर दी। युवतियों में से एक ने अपने दुकानदार पिता को घटना की जानकारी दी। पिता ने अन्य व्यापारियों के साथ मिलकर युवक को पकड़ लिया। बाजार में जुटी भीड़, शांति भंग में कार्रवाई
घटना के बाद बाजार में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। भीड़ पहले शहर पुलिस चौकी और बाद में कोतवाली थाने पहुंची। पुलिस ने युवक को शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

तेज रफ्तार स्कॉर्पियो डंपर में घुसी, 5 की मौत, VIDEO:जोधपुर में मंदिर से दर्शन कर घर लौट रहे थे, गाड़ी के अंदर बुरी तरह फंसे शव

बालोतरा में भीषण सड़क हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई। 3 लोग गंभीर घायल हैं। तेज रफ्तार स्कॉर्पियो आगे चल रहे डंपर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कॉर्पियो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। गाड़ी के अंदर घायल तड़प रहे थे। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और घायलों को निकाला। राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। सभी घायलों को राजकीय नाहटा अस्पताल, बालोतरा पहुंचाया गया। जहां डॉक्टरों ने 3 लोगों को मृत घोषित कर दिया। 5 गंभीर घायलों को जोधपुर रेफर कर दिया। जोधपुर में इलाज के दौरान दो लोगों की मौत हो गई। हादसा बाड़मेर-जोधपुर नेशनल हाईवे पर रात करीब 11:30 बजे पचपदरा थाना क्षेत्र के भाडिंयावास गांव के पास हुआ। मृतकों की पहचान बालोतरा जिले के कानोड गांव निवासी रेवांताराम (26) पुत्र गेनाराम जाट, स्वरूपाराम (27) पुत्र मेहराराम जाट, भरत (25) पुत्र बन्नाराम जाट किशन (27) पुत्र शेराराम जाट और भावेश पुत्र कलाराम जाट के रूप में हुई है। सभी लोग जोधपुर में भोमियाजी के दर्शन कर लौट रहे थे। हादसे की 6 तस्वीरें… 5 घायल जोधपुर रेफर हादसे में रेवांताराम, स्वरूपाराम , भरत की मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल किशन,भावेश,बाबू, मुकेश और हेमाराम को प्राथमिक उपचार के बाद जोधपुर रेफर कर दिया गया। जहां इलाज के दौरान किशन और भावेश ने दम तोड़ दिया।

दतिया उपचुनाव-बीजेपी की सभा में नरोत्तम के आंसू छलके:बोले- आशुतोष को जिताने एक-एक घर के सामने शीश नवाऊंगा, हम सब साथ खड़े

दतिया में बीजेपी की सभा में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की आंखें छलक गईं। उनका गला भर आया, आवाज भर्रा उठी। नरोत्तम ने कहा- कांग्रेस कहती है कि भाजपा में फूट है। देख लीजिए, हम सब यहां साथ खड़े हैं। मैं इस उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को जिताने दतिया के एक-एक घर के सामने शीश नवाऊंगा। नरोत्तम ने कहा- कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह यानी राजा साहब एक्सपायरी डेट की होम्योपैथी की गोली हैं। वो बहुत मीठी होती है, लेकिन असर कुछ नहीं होता। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- नरोत्तम, हम छोटे भाई आशुतोष तिवारी को आपके सुपुर्द कर रहे हैं। इनको पार लगाना अब आपका काम है। इससे पहले सोमवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने नॉमिनेशन फाइल किया। इस मौके पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती, सपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव और दूसरे नेता मौजूद रहे। वहीं, बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने दोपहर करीब ढाई बजे नामांकन भरा। मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा समेत दूसरे पार्टी नेता उनके साथ रहे। कांग्रेस की सभा में नहीं पहुंचे अवधेश नायक, बोले- मेरे साथ गलत किया उधर, दतिया में कांग्रेस की सभा से अवधेश नायक की गैर-मौजूदगी ने बीजेपी में उनकी वापसी की अटकलें शुरू कर दी हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर से फोन पर कहा- मुझे 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित किया था। फिर कांग्रेस के ही लोगों ने मेरे पुतले जलाकर अपमान किया। बाद में मेरा टिकट बदलकर राजेंद्र भारती को दे दिया गया। तत्कालीन प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने मुझसे कहा था कि आप पार्टी को जिताओ। अगली बार आपको टिकट मिलेगा। इस बार भी कांग्रेस ने मुझे टिकट नहीं दिया। मैं 20-25 दिन पहले दिग्विजय सिंह से मिलने गया था। उन्होंने मुझसे कहा था कि अवधेश जी, सर्वे में आपका फीडबैक अच्छा है। लेकिन आप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुराने कार्यकर्ता रहे हैं। बीजेपी सांसद वीडी शर्मा के करीबी रहे हैं। ऐसा न हो कि हम टिकट दें और आप जीतकर बीजेपी में चले जाओ। अवधेश नायक ने आगे कहा- मुझे कांग्रेस के प्रत्याशी घनश्याम सिंह से कोई दिक्कत नहीं हैं। लेकिन प्रदेश नेतृत्व ने मेरे साथ गलत किया है। बीजेपी के प्रत्याशी आशुतोष मेरे छोटे भाई हैं। क्या आप बीजेपी में वापस जाएंगे…इसके जवाब में नायक ने कहा- मेरे सामने सारे विकल्प खुले हैं। विचार मंथन चल रहा है। हालांकि, जब मीडिया ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से अवधेश नायक की वापसी पर सवाल किया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। दिग्विजय बोले- आपके टिकट का विरोध किया, माफी चाहता हूं दूसरी तरफ, कांग्रेस की सभा के मंच से दिग्विजय सिंह ने अवधेश नायक से माफी मांगी। दिग्विजय बोले- मैंने आप के टिकट का विरोध किया था। कारण था कि आप तभी भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। लेकिन आपने 2023 के विधानसभा चुनाव में दमदारी और ईमानदारी से काम किया। राजेंद्र भारती को जिताया। मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं। मैंने कहीं आपका अपमान किया हो तो मैं आपसे माफी चाहता हूं। उपचुनाव में नामांकन की 4 तस्वीरें… दतिया में चुनावी हलचल के मिनट टु मिनट अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से जरूर गुजर जाइए…

राजस्थान में ट्रांसपोर्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल:VLTD, परमिट और ई-डिटेक्शन के विरोध में थम गए 10 हजार ट्रकों के पहिए

राजस्थान में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD), परमिट और ई-डिटेक्शन चालान को लेकर ट्रांसपोर्टर रविवार रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेशभर में करीब 10 हजार ट्रकों के पहिए थम गए हैं। ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि सरकार ने नियम तो लागू कर दिए, लेकिन उन्हें लागू करने के लिए जरूरी व्यवस्था नहीं की, जिसका खामियाजा वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को भुगतना पड़ रहा है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन को प्रदेश के कई बड़े ट्रांसपोर्ट संगठनों का समर्थन मिला है। लॉजिस्टिक्स एंड ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन (LTOA), जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन, विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, जयपुर परचून ट्रांसपोर्ट यूनियन और ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस ऑपरेटर एसोसिएशन सहित कई संगठनों ने हड़ताल का समर्थन किया है। इन मुद्दों पर शुरू हुआ आंदोलन राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति ने तीन प्रमुख मुद्दों को लेकर चक्का जाम शुरू किया है। इनमें व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) की उपलब्धता, परमिट व्यवस्था में आ रही दिक्कतें और ई-डिटेक्शन के जरिए हो रहे चालान शामिल हैं। इसके अलावा ट्रांसपोर्टरों की मांग है कि प्रदेश के हर जिले में वाहन फिटनेस सेंटर खोले जाएं, ताकि वाहन मालिकों को दूसरे शहरों के चक्कर न काटने पड़ें। VLTD का विरोध नहीं, व्यवस्था की कमी का विरोध विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश चौधरी ने बताया कि ट्रांसपोर्टर व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) के विरोध में नहीं हैं। सरकार ने इसे अनिवार्य तो कर दिया, लेकिन अधिकृत कंपनियों के पास डिवाइस ही उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण हजारों ट्रकों का फिटनेस, परमिट और अन्य जरूरी काम अटक गए हैं। उन्होंने बताया कि ट्रांसपोर्टरों की मांग है कि पहले पर्याप्त संख्या में डिवाइस उपलब्ध कराई जाएं और पूरी व्यवस्था आसान बनाई जाए, उसके बाद ही नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। परमिट और टैक्स से बढ़ रही परेशानी ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि सरकार ने फिलहाल अस्थायी परमिट (TP) की व्यवस्था जारी रखी है, लेकिन इससे लंबी दूरी तक माल ढुलाई करने वाले ट्रकों की परेशानी कम नहीं होगी। यदि कोई ट्रक राजस्थान से केरल, चेन्नई, गुवाहाटी या अन्य राज्यों में जाता है, तो उसे अलग-अलग राज्यों का टैक्स देना पड़ता है। कई मामलों में टैक्स और परमिट का खर्च ही माल भाड़े के बराबर पहुंच जाता है। इसके साथ ही ई-डिटेक्शन चालानों का भी लगातार खतरा बना रहता है। ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स ने जारी किया समर्थन पत्र लॉजिस्टिक्स एंड ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन (LTOA) ने आंदोलन के समर्थन में पत्र जारी किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल आनंद और महासचिव नवीन शर्मा ने कहा कि ट्रांसपोर्ट कारोबार बढ़ते खर्चों, अव्यावहारिक नियमों और प्रशासनिक उदासीनता के कारण संकट में है। ऐसे में ट्रांसपोर्टरों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और संगठन इस आंदोलन का पूरा समर्थन करता है। बस ऑपरेटर एसोसिएशन का भी मिला साथ ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस ऑपरेटर एसोसिएशन ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। इसके अलावा जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन, विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, जयपुर परचून ट्रांसपोर्ट यूनियन समेत कई संगठनों ने संयुक्त रूप से हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है। माल ढुलाई पर पड़ सकता है बड़ा असर ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति का दावा है कि प्रदेशभर में करीब 10 हजार ट्रक इस हड़ताल में शामिल हैं। यदि सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच जल्द सहमति नहीं बनी, तो प्रदेश में सीमेंट, स्टील, किराना, कृषि उपज और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति (सप्लाई) प्रभावित हो सकती है। ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि सरकार जल्द वार्ता कर इसका स्थायी समाधान निकाले, ताकि परिवहन व्यवस्था सामान्य हो सके।

इंजीनियर्स का 2 लाख का खेल,चहेतों को 43.86-करोड़ का ठेका:पोल खुली तो 50 लाख के टेंडर देने वाला SE सस्पेंड, करोड़ों वालों पर एक्शन नहीं

अजमेर डिस्कॉम (14 जिलों) के अंदर एक बड़ा खेल सामने आया है। इंजीनियर्स ने पिछले दो सालों में 43.86 करोड़ के टेंडर अपने चहेते ठेकेदारों को दे दिए। इसके लिए उन्होंने एक नियम का फायदा उठाया, जिसमें 2 लाख से कम के काम के लिए ई टेंडर जारी करने की जरूरत नहीं होती। फर्मों से सिर्फ कोटेशन मंगवाकर काम दे दिया जाता था। सर्कल ऑडिट में इस बात का खुलासा हुआ है। इसकी पूरी जानकारी डिस्कॉम प्रबंधन को थी। इसके बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब इंजीनियर्स को बचाने की तैयारी की जा रही है। ऐसा हम नहीं, डिस्कॉम सचिव का एक आदेश कह रहा है। आदेश में 2 करोड़ से ज्यादा की खरीद करने वाले जिम्मेदार SE के खिलाफ कार्रवाई की जाए और 1 करोड़ से ज्यादा की खरीद करने वाले अन्य सभी लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात लिखी गई है। सूत्रों की मानें तो इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। भास्कर ने सचिव से बात की तो, उन्होंने ऐसे किसी भी आदेश के जारी होने से इनकार कर दिया। अब पढ़िए… अजमेर डिस्कॉम में कैसे चला पूरा खेल उदयपुर SE की गड़बड़ी की जांच में सामने आया मामला सूत्रों के अनुसार- प्रबंधन को नवम्बर 2025 में शिकायत मिली थी कि उदयपुर के SE ने नियमों की अनदेखी कर टेंडर में स्पीलिटिंग ऑफ पावर का उपयोग कर गड़बड़ी की। इस गड़बड़ी की जांच में राजस्थान सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता अधिनियम, 2013 (RTPP Act, 2013) के प्रावधान और स्वीकृत बजट से ज्यादा खरीद के लिए उत्तरदायी माना। इसके साथ ही लेखाधिकारी (OM) को भी लाइन केबल नेटवर्क के अंतर्गत बजट नियंत्रण और उपयोग में अनियमितता का दोषी पाया गया। सर्कल ऑडिट में करोड़ों की खरीददारी सामने आई जांच रिपोर्ट को प्रबंध निदेशक व सचिव (प्रशासन) को भेजा गया। साथ ही सर्कल की ऑडिट कराई गई, इसमें न केवल चालू वर्ष बल्कि पिछले साल 2024-2025 का डेटा भी तैयार किया गया। ये जांच रिपोर्ट जनवरी महीने तक मिल गई। इसमें बडे़ स्तर पर करोड़ों की खरीदारी करने की बात सामने आई है। इसके लिए CAO (ER-WM), एवीवीएनएल, अजमेर द्वारा 13 मार्च 2026 को आदेश जारी कर स्थानीय खरीद पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश दिए। गड़बड़ी सामने आई, लेकिन कार्रवाई लंबित उदयपुर एसई और अन्य सर्कल की रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रबंध निदेशक ने सभी सर्कल की जांच कराने के निर्देश दिए, ताकि अधीक्षण अभियंताओं की खरीद समितियों की ओर से की गई खरीद का आंकलन किया जा सके। इसके बाद सभी सर्कल की जांच हुई और ऑडिट ने रिपोर्ट सचिव प्रशासन को भेज दी लेकिन उच्च स्तर पर कार्रवाई अभी भी लम्बित चल रही है। जिम्मेदारों को बचाने के लिए नियम 1 करोड़ से ज्यादा की खरीद करने वालों को नोटिस का आदेश अजमेर डिस्कॉम की सचिव सीमा शर्मा ने 25 जून 2026 को एक आदेश जारी किया था। आदेश में बताया था कि डिस्कॉम प्रशासन ने निर्णय लिया है कि 2 करोड़ से ज्यादा की खरीद करने वाले जिम्मेदार अधीक्षण अभियंताओं के खिलाफ नियम 6 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। वहीं 1 करोड़ से ज्यादा की खरीद करने वाले अन्य सभी लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। सचिव सीमा ने ये आदेश तब जारी किया, जब डिस्कॉम के एमडी के.पी. वर्मा थे। आदेश जारी करने के 6 दिन बाद उनका कार्यकाल पूरा हो गया और उनकी जगह पर अतिरिक्त कार्यभार जोधपुर डिस्कॉम के एमडी आईएएस डॉ. भंवरलाल को सौंपा गया। अधिकारियों को बचाने के लिए आदेश तो नहीं? माना जा रहा है कि इस आदेश से चेहते इंजीनियर्स को बचाने की कोशिश की जा रही है। पिछले दिनों भीलवाड़ा एसई ओ.पी. महला ने एक ही दिन में 2-2 लाख के 25 वर्क ऑर्डर से 50 लाख की सामग्री खरीद कर ली थी। मामला सामने आने के बाद गड़बड़ी की गंभीरता को देखते हुए डिस्कॉम प्रबन्धन ने एसई महला को सस्पेंड कर दिया और उनके खिलाफ विभागीय जांच कराकर चार्जशीट दे दी है। फिलहाल मामले में कार्रवाई लम्बित है। अब सचिव की ओर से जारी आदेश के मुताबिक- एक करोड़ से कम की खरीद करने वालों पर कोई कार्रवाई का निर्देश नहीं दिया गया। इन्हें मिल सकता है नोटिस सचिव की ओर से जारी आदेश को माना जाए तो सीकर, राजसमंद, डीडवाना-कुचामन, उदयपुर को चार्जशीट दी जानी है। वहीं झुंझुनूं, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, ब्यावर को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे। इसी प्रकार भीलवाड़ा, नागौर, डूंगरपूर से कोई जवाब तलब नहीं होगा। भीलवाड़ा एसई को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है और विभागीय जांच चल रही है। पिछले दो साल में 43.86 करोड़ की खरीद, देखिए रिपोर्ट क्या है RTPP नियम 2 लाख से कम के वर्कऑर्डर का नियम 1- दो लाख रुपए तक की खरीद के लिए पूरा ई-टेंडर करने की जरूरत नहीं है। इसे “सीमित निविदा / कोटेशन” कहते हैं। विभाग कम से कम 3 रजिस्टर्ड सप्लायर्स और फर्मों से सील बंद कोटेशन मंगवाता है। सबसे कम L1 को काम दे दिया जाता है। 2- लिखित में या विभाग की वेबसाइट/नोटिस बोर्ड पर कुछ दिन का समय देकर कोटेशन मांगा जाता है। आए हुए कोटेशन की तुलना करके सबसे कम रेट वाले को आदेश देते है। 3- दो लाख तक की खरीद में EMD और टेंडर फीस नहीं लगती। खरीद पूरी होने के 7 दिन के अंदर sppp.rajasthan.gov.in पर “Contract Award Details” डालना अनिवार्य है। 2 लाख से ज्यादा के काम को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर कोटेशन से नहीं खरीद सकते।

हरियाणा-दरगाह पर चला बुलडोजर, रोतीं-चिल्लातीं रही महिलाएं, VIDEO:सेवादार के घर की दीवार भी तोड़ी; मंदिर के पुजारी को घसीट-घसीट कर मारा था

हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के अढ़ोनी गांव में शिव मंदिर के पुजारी योगीराज गिरी (74) पर हुए हमले में शामिल आरोपियों पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को भारी फोर्स के साथ पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने इसकी शुरुआत पुजारी को मफलर डालकर घसीटने वाले दरगाह के सेवादार पंकज के घर से की। टीम ने उसके मकान की दीवार को तुड़वा दिया। इसके बाद टीम दरगाह पर भी बुलडोजर चलवाया। उधर, आरोपी पंकज की मां परमजीत ने इस कार्रवाई का विरोध किया। बोलीं कि पूरे गांव में अवैध कब्जे हैं। सभी कब्जे हटवाए जाएं। घर टूट गया है, वे कहां जाएंगे। हमारे छोटे-छोटे बच्चे भी है। जैसे हमारा तोड़ा जा रहा है, वैसे ही पूरे गांव में तोड़ों। बता दें कि 9 जुलाई की सुबह शिव मंदिर के पुजारी योगीराज पर हमला हुआ था। आरोप है कि दरगाह के सेवादार पंकज ने पहले पुजारी से मारपीट की। इसके बाद गले में परना डालकर उन्हें सड़क पर घसीटा। इस दौरान उनकी टांग टूट गई और शरीर पर कई चोटें आईं। गंभीर हालत में उन्हें एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई के कुछ PHOTOS… आरोपी के घर, दरगाह पर कार्रवाई कर लौटी टीम सरपंच परमजीत सिंह ने बताया कि पंचायत ने वर्ष 2023 में गांव के रास्तों पर किए गए अवैध कब्जों की शिकायत प्रशासन को दी थी। इसके बाद अधिकारियों ने रास्तों की निशानदेही कराई। जांच में कई जगह सरकारी रास्ते पर कब्जा मिला। दरगाह का आगे की तरफ करीब 3.4 फीट हिस्सा सरकारी रास्ते में बना हुआ है। इसी तरह मुख्य आरोपी पंकज के घर का एक कॉर्नर का करीब 7 फीट हिस्सा भी रास्ते में आ रहा था। प्रशासन इन दोनों जगहों के साथ अन्य अवैध कब्जों को हटवा दिया। आरोपी के मकान और दरगाह के अलावा 16 अन्य अवैध कब्जे भी शामिल है, जिन पर कार्रवाई होनी है। फिलहाल, टीम ने दोनों जगह पर ही कार्रवाई की है। आरोपी की मां बोलीं-बहू की कोई गलती नहीं उधर, इस कार्रवाई के दौरान आरोपी पंकज की मां परमजीत ने गांव के सरपंच परमजीत सिंह को भी खूब खरीखोटी सुनाई। पुजारी को घसीटने के सवाल पर बोलीं कि बेटे की पत्नी की कोई गलती नहीं है। उसको लगा कि दरगाह में सांप घुस रहा है। इसलिए पंकज ने उससे लाठी मंगवाई है। वह लाठी देने गई थी। बताया कि उसके तीन छोटे-छोटे बच्चे है, जो अपनी मां के बिना नहीं रह सकते। मामले से जुड़ी खास बातें… प्रशासन की कार्रवाई से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाएं…

RGHS में कैंसर इलाज की नई गाइडलाइन:30 हजार से महंगी दवा पर मेडिकल बोर्ड की मंजूरी जरूरी, मरीज की जरूरत से तय होगा इलाज

RGHS में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए नई गाइडलाइन लागू कर दी गई है। अब डॉक्टर मरीजों को सीधे महंगी और ब्रांडेड दवाइयां नहीं दे पाएंगे। मरीज की जरूरत के हिसाब से किफायती इलाज चुना जाएगा। अगर मरीज को 30 हजार रुपए से ज्यादा कीमत की दवा, एक लाख रुपए से अधिक की सर्जरी के अलावा किसी खास थेरेपी की जरूरत है तो इसके लिए मेडिकल बोर्ड की मंजूरी लेनी होगी। इसके साथ ही RGHS पोर्टल पर जल्द कैंसर रेफरल मॉड्यूल भी शुरू किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और अधिक पारदर्शी बनेगी। मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए- मरीजों के कैंसर के इलाज के लिए नए नियम क्या हैं? क्यों पड़ी नई गाइडलाइन की जरूरत? कैंसर का इलाज जटिल और महंगा होता है। इसमें इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, उन्नत रेडियोथेरेपी और जटिल सर्जरी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता है। अब तक एक समान प्रोटोकॉल नहीं होने से कई बार इलाज में देरी, अनावश्यक खर्च और संसाधनों के गलत इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती थीं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी ने प्रदेश के कैंसर विशेषज्ञों के साथ मिलकर ऑन्कोलॉजी स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन तैयार की है। इनका उद्देश्य सभी अस्पतालों में एक समान व्यवस्था लागू करना और मरीजों को प्रभावी और किफायती इलाज उपलब्ध कराना है। इलाज कैसे तय होगा? सभी डॉक्टरों को इलाज के लिए NICE और ICMR की गाइडलाइंस का पालन करना होगा। यदि किसी बीमारी के लिए इन संस्थाओं की सिफारिश उपलब्ध नहीं है, तभी ESMO या NCCN जैसी अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस का सहारा लिया जा सकेगा। यदि कोई डॉक्टर निर्धारित प्रोटोकॉल से अलग उपचार लिखता है तो उसे लिखित रूप से कारण और उस इलाज की जरूरत के वैज्ञानिक प्रमाण देने होंगे। अब जानते हैं मेडिकल बोर्ड की मंजूरी कहां-कहां जरूरी होगी सर्जरी और दवाएं : सामान्य सर्जरी के लिए अलग मंजूरी की जरूरत नहीं। लेकिन एक लाख रुपए से अधिक लागत वाली सर्जरी के लिए RGHS के गठित मेडिकल बोर्ड की अनुमति जरूरी होगी। इसके अलावा जेनेरिक दवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। महंगी दवाओं के लिए मेडिकल बोर्ड की स्वीकृति अनिवार्य होगी। कीमोथेरेपी : रेडियोथेरेपी में कैंसर को खत्म करने वाली या दर्द कम करने वाली रेडिएशन तकनीक का चुनाव डॉक्टर मरीज की स्थिति देखकर करेंगे। टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी : ये कैंसर का सबसे महंगा इलाज माना जाता है। यह इलाज मरीज को RGHS में तभी मिल पाएगा जब उसकी रिपोर्ट में संबंधित बायोमार्कर पॉजिटिव होगा। यदि एक साइकिल या एक माह में खर्च 30 हजार रुपए से अधिक है तो मेडिकल बोर्ड की मंजूरी अनिवार्य होगी। हार्मोनल थेरेपी : थेरेपी ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर में जेनेरिक दवाओं को प्राथमिकता। महंगी दवाओं के लिए मेडिकल बोर्ड की अनुमति लेनी होगी। कैंसर के इलाज में मेडिकल बोर्ड की क्या भूमिका होगी नई गाइडलाइन में मेडिकल बोर्ड की भूमिका अहम रहेगी। सामान्य इलाज के लिए किसी तरह की परमिशन की आवश्यकता नहीं है। लेकिन 30 हजार रुपए से अधिक लागत वाली दवा, एक लाख रुपए से अधिक लागत वाली सर्जरी या फिर कोई ऐसी तकनीक जो लिस्ट में शामिल नहीं है, उस इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड की परमिशन लेनी होगी। गाइडलाइन में स्पष्ट निर्देश हैं कि मेडिकल बोर्ड को भी 10 से 15 दिन के भीतर निर्णय लेना होगा, ताकि मरीज के इलाज में किसी प्रकार की देरी न हो। इलाज की परमिशन के लिए मरीज को खुद बोर्ड के सामने उपस्थित होना होगा। हालांकि, ICU और वेंटिलेटर पर भर्ती मरीजों को इससे छूट रहेगी। मरीज की शारीरिक क्षमता के अनुसार मिलेगा इलाज कैंसर का मरीज कौन-कौन सी महंगी थेरेपी के लिए पात्र है, इसका निर्धारण ECOG (Eastern Cooperative Oncology Group) स्केल से किया गया है। ECOG एक अंतरराष्ट्रीय स्केल है, जिससे डॉक्टर यह आकलन करते हैं कि कैंसर मरीज शारीरिक रूप से कितना सक्रिय है और वह इलाज (जैसे कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या टारगेटेड थेरेपी) सहन कर पाएगा या नहीं। ECOG 1: सभी आधुनिक और उच्च-लागत वाली थेरेपी के पात्र हैं। ECOG 2: मेडिकल बोर्ड केस-दर-केस निर्णय लेगा। ECOG 3: आक्रामक उपचार की बजाय पैलिएटिव केयर को प्राथमिकता। ECOG 4: सक्रिय कैंसर थेरेपी नहीं, केवल सहायक देखभाल। मरीजों को क्या फायदा होगा? नई व्यवस्था से महंगी ब्रांडेड दवाओं के बजाय प्रभावी और किफायती विकल्पों को बढ़ावा मिलेगा। महंगे इलाज का फैसला अब किसी एक डॉक्टर के बजाय विशेषज्ञों का मेडिकल बोर्ड करेगा। इससे अनावश्यक खर्च कम होगा और ट्रीटमेंट अधिक पारदर्शी बनेगा। इसके साथ ही RGHS पोर्टल पर कैंसर रेफरल मॉड्यूल शुरू होने जा रहा है। इसके लागू होने के बाद कैंसर मरीजों को रेफर करना, मेडिकल बोर्ड की मंजूरी और उपचार की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी। मरीज को पहले क्या इलाज दिया गया और अब आगे क्या होगा, इसकी जानकारी भी अपडेट रहेगी। इससे कागजी कार्रवाई कम होगी और मरीज अपने केस की स्थिति पोर्टल पर देख सकेंगे। कैंसर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों की मदद से तैयार हुई गाइडलाइन राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी (RSHAA) के CEO हरजीलाल अटल ने बताया कि स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों की मदद से यह गाइडलाइन तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि RGHS पोर्टल में बदलाव किए जा रहे हैं। मेडिकल बोर्ड के गठन से लेकर उसकी रिपोर्ट तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। ऑफलाइन पत्राचार समाप्त होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और समय बचेगा। मरीज भी पोर्टल पर अपने केस की स्थिति देख सकेंगे। मामलों की रोजाना मॉनिटरिंग और साप्ताहिक समीक्षा भी की जाएगी, ताकि समयबद्ध निर्णय सुनिश्चित हो सके। —— यह खबर भी पढ़िए… RGHS में OPD जांच के लिए अब नए नियम:2 हजार रुपए तक की जांच के लिए मंजूरी जरूरी नहीं; जानें- और क्या बदलाव हुए सरकारी कर्मचारियों के लिए राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला किया है। RGHS के तहत OPD में रूटीन जांच को लेकर राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी (RSHAA) ने नई गाइडलाइन जारी की है, जो 13 जुलाई यानी सोमवार से लागू हो जाएगी। पढ़ें पूरी खबर…