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झुंझुनूं कलेक्ट्रेट पर स्टूडेंट्स ने कॉकरोच बनकर किया प्रदर्शन:बोले- पेपर लीक हों तो पढ़ाई का क्या मतलब, सिस्टम रोड पर आ गया है

झुंझुनूं में सोमवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA), लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और शिक्षा व्यवस्था के विरोध में 11वीं और 12वीं के स्टूडेंट्स कलेक्ट्रेट पहुंचे। स्टूडेंट्स कॉकरोच का प्रतीक लेकर, हाथों में मीम्स और मांगों वाली तख्तियां लेकर प्रदर्शन करते रहे। प्रदर्शन के दौरान एक महिला टीचर और स्टूडेंट्स के बीच बहस भी हुई। बाद में SFI कार्यकर्ताओं ने हस्तक्षेप किया। स्टूडेंट्स ने जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति और केंद्र सरकार के नाम अपनी तीन प्रमुख मांगें भी भेजीं। कॉकरोच का प्रतीक लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे स्टूडेंट्स नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली, लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के विरोध में 11वीं और 12वीं के स्टूडेंट्स कलेक्ट्रेट पहुंचे। स्टूडेंट्स हाथों में ज्ञापन और सिस्टम पर सवाल उठाने वाली मीम्स की तख्तियां लेकर प्रदर्शन करते रहे। प्रदर्शन की खास बात यह रही कि स्टूडेंट्स सांकेतिक रूप से कॉकरोच का रूप धारण कर या उसका प्रतीक लेकर पहुंचे। उनके हाथों में मौजूद तख्तियां रचनात्मक अंदाज में परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रही थीं। पोस्टर और नारों से जताया विरोध कलेक्ट्रेट के बाहर बैठे स्टूडेंट्स के पोस्टर लोगों का ध्यान खींचते रहे। एक पोस्टर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तस्वीर के साथ लिखा था- धर्मेंद्र प्रधान: “मेरे सब खिलाफ हो रहे हैं महादेव…” महादेव: “अरे यार, तू पहले इस्तीफा दे!” प्रदर्शन के दौरान स्टूडेंट्स “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” और “NTA को भंग करो” के नारे लगाते रहे। महिला टीचर पहुंचीं, स्टूडेंट्स से हुई बहस प्रदर्शन के दौरान एक स्कूल की महिला टीचर धरना स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने स्टूडेंट्स से पूछा, “कौन-कौन घर पर यह झूठ बोलकर आया है कि स्कूल वालों ने धरने पर बैठने के लिए कहा है?” इस पर स्टूडेंट्स ने एक साथ जवाब दिया, “हममें से कोई भी ऐसा झूठ बोलकर नहीं आया है।” महिला टीचर ने कहा, “तुम लोग स्कूल की पढ़ाई छोड़कर यहां कलेक्ट्रेट पर धरने पर बैठोगे?” इस पर स्टूडेंट्स ने जवाब दिया, “मैडम, ऐसी पढ़ाई करने का क्या मतलब, जब रात-दिन मेहनत करने के बाद भी पेपर ही लीक हो जाते हैं।” SFI कार्यकर्ताओं ने किया हस्तक्षेप महिला टीचर और स्टूडेंट्स के बीच बहस के दौरान मौके पर मौजूद SFI कार्यकर्ता सचिन चोपड़ा और योगेश कटारिया आगे आए। उन्होंने कहा कि प्रोटेस्ट करना बच्चों का फंडामेंटल राइट है और उन्हें अपनी मांगों तथा भविष्य के लिए आवाज उठाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा, “ये अपना दिन खराब नहीं कर रहे, बल्कि अपना हक मांग रहे हैं।” करीब पांच मिनट तक चली बहस के बाद आसपास मौजूद लोगों और स्टूडेंट्स ने भी महिला टीचर की टोका-टोकी का विरोध किया, जिसके बाद वह वहां से लौट गईं। मांग पत्र में रखीं तीन प्रमुख मांगें कलेक्ट्रेट पर पहुंचे 11वीं और 12वीं के स्टूडेंट्स ने जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) के माध्यम से राष्ट्रपति और केंद्र सरकार को मांग पत्र सौंपा। इसमें तीन प्रमुख मांगें रखी गईं। पहली मांग में परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही धांधली की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा देने की मांग की गई। दूसरी मांग में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को बंद कर पेपर लीक से सुरक्षित और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। तीसरी मांग में पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की रिहाई और दिल्ली में छात्रों को शांतिपूर्ण स्टूडेंट मार्च निकालने की अनुमति देने की मांग शामिल रही।

बुचावास सरकारी स्कूल के शिक्षक के तबादले पर विवाद:ग्रामीणों ने स्कूल पर ताला जड़ा, दूसरे पक्ष ने तोड़ा; तनाव बढ़ा

जिले के तारानगर तहसील के बुचावास गांव में गवर्नमेंट उच्च माध्यमिक स्कूल के एक शिक्षक के तबादले को लेकर विवाद गहरा गया है। सोमवार को ग्रामीणों के दो गुट आमने-सामने आ गए, जिससे स्कूल परिसर में तनाव का माहौल बन गया। सुबह शिक्षक जयनारायण सहारण के तबादले से नाराज कुछ ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। कुछ ही देर बाद गांव का दूसरा पक्ष मौके पर पहुंचा और उन्होंने ताला तोड़ दिया। ताला तोड़ने वाले ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्कूल में ताला लगाने वाले वे लोग हैं, जिनके बच्चे सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ते। उन्होंने कहा कि राजनीतिक रंजिश और निजी स्वार्थ के चलते गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। इस घटना और तीखी बयानबाजी के बाद स्कूल परिसर में दोनों पक्षों के बीच जमकर हंगामा और नोक-झोंक हुई। सूचना मिलने पर मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी बबलेश शर्मा मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। गौरतलब है कि अध्यापक जयनारायण सहारण के दूसरी जगह स्थानांतरण के विरोध में ग्रामीणों ने पहले भी प्रदर्शन किया था। ग्रामीणों ने ज्ञापन देकर 19 जुलाई तक स्थानांतरण रद्द करने का समय दिया था। समय सीमा बीतने के बाद भी स्थानांतरण रद्द नहीं होने पर सोमवार को यह घटना हुई।

अजमेर में 20 करोड़ की लागत से बनेगा गर्ल्स सैनिक-स्कूल:हॉस्टल से लेकर टेनिस कोर्ट तक कई सुविधाएं मिलेंगी; स्पीकर देवनानी ने किया शिलान्यास

अजमेर के हाथीखेड़ा क्षेत्र में 20.31 करोड़ की लागत से बालिका सैनिक स्कूल बनेगा। करीब 30 एकड़ में बनने वाले इस स्कूल में गर्ल्स हॉस्टल, खेल मैदान सहित कईं सुविधाएं होगी। सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शिलान्यास किया। बता दें कि इसका निर्माण कार्य करीब पन्द्रह माह में पूरा होगा। शिक्षा विभाग का प्रयास है कि अगले शिक्षा सत्र से स्कूल का संख्सलन शुरू हो जाए। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने कहा कि अजमेर को ये एक बड़ी शैक्षणिक सौगात है। इससे छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सैन्य प्रशिक्षण के अनुरूप आधुनिक वातावरण उपलब्ध होगा। यह संस्थान प्रदेश की बेटियों को अनुशासन, नेतृत्व क्षमता एवं राष्ट्रसेवा की भावना के साथ उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बालिका सैनिक स्कूल के लिए नया भवन करीब 30 एकड़ जमीन पर बनने जा रहा है। इसके निर्माण पर करीब 20 करोड़ रूपए की लागत आएगी। बालिका सैनिक स्कूल का नया परिसर आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा। निर्माण कार्य अगस्त 2026 से प्रारंभ होकर 15 माह में पूर्ण होने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें अत्याधुनिक एकेडमिक ब्लॉक, छात्रावास (हॉस्टल ब्लॉक), प्रशासनिक भवन, आवासीय क्वार्टर, कक्षा-कक्ष, इंडोर गेम्स हॉल, खेल मैदान, बास्केटबॉल कोर्ट, वॉलीबॉल कोर्ट, टेनिस कोर्ट, परेड ग्राउंड, बाउंड्री वॉल, आंतरिक सड़कें, पार्किंग, ट्यूबवेल सहित अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। कार्यक्रम में भाजपा शहर जिलाध्यक्ष रमेश सोनी, मंडल अध्यक्ष विक्रमसिंह, पंकज कुलियाना सहित अन्य लोग मौजूद रहे। ……. पढें ये खबरें भी… अजमेर में 75 बीघा जमीन से हटाया अतिक्रमण:सैनिक गर्ल्स स्कूल को आवंटित की गई थी, भारी पुलिस जाब्ता रहा मौजूद अजमेर विकास प्राधिकरण (एडीए) ने हाथीखेड़ा में सैनिक गर्ल्स स्कूल को आवंटित जमीन पर अतिक्रमण हटाया। यहां बने पक्के कमरे, कोयला बनाने की भटि्टयां व चारदीवारी तोड़ी गई। पूरी खबर पढें

60 टन अवैध गिट्टी से भरा हाइवा ट्रक जब्त:ड्राइवर गिरफ्तार, ऑपरेशन पृथ्वी डीग पुलिस की कार्रवाई

डीग जिले में अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन पृथ्वी’ के तहत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। डीग पुलिस ने करीब 60 टन अवैध गिट्टी से भरा एक हाइवा ट्रक जब्त किया और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर मामला दर्ज किया। पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ के निर्देश पर डीएसटी टीम और कैथवाड़ा थाना पुलिस ने यह संयुक्त कार्रवाई की। अमरूका पुलिस चौकी क्षेत्र में पहाड़ी तिलकपुरी की ओर से आ रहे हाइवा (आरजे-05 जीबी-8731) को रोका गया। जांच के दौरान वाहन में लगभग 60 टन 65 एमएम गिट्टी भरी मिली। ड्राइवर से रॉयल्टी, टीपी और अन्य वैध दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वह कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। पुलिस ने ड्राइवर सलीम (30), निवासी लेवड़ा, थाना कामां को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ कैथवाड़ा थाने में एमएमडीआर एक्ट की धारा 4/21 और बीएनएस की धारा 303(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस के अनुसार, अवैध खनिज परिवहन से राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा था। इस कार्रवाई में कैथवाड़ा थाना पुलिस और डीएसटी टीम के अधिकारियों व जवानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जर्सी के किसान ने खेत पर बना दिया इंटरनेशनल मैदान:जिमी परचार्ड के मैदान पर खेलती है जर्सी की नेशनल टीम; उन्हीं के बेटे कप्तान भी

साल 2005 क्रिकेट फैंस के लिए इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया की ऐतिहासिक एशेज सीरीज का साल था। लेकिन इसी दौरान यूनाइटेड किंगडम के पास स्थित छोटे से द्वीप जर्सी में क्रिकेट की एक अनोखी कहानी लिखी जा रही थी। यहां सेंट मार्टिन इलाके के किसान जिमी परचार्ड ने अपने घर के पीछे मौजूद आलू के खेत को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान में बदल दिया। आज यही मैदान फार्मर्स क्रिकेट ग्राउंड के नाम से जाना जाता है और जर्सी क्रिकेट का प्रमुख केंद्र है। इस मैदान की शुरुआत 1977 में हुई, जब स्थानीय किसान दिनभर खेतों में काम करने के बाद शाम को क्रिकेट खेलते थे। खेल खत्म होने पर अक्सर एक ही बात होती थी ‘काश, हमारा अपना मैदान होता।’ जिमी ने इस सपने को सच करने का फैसला किया। 2003 में उन्होंने अपने खेत में क्रिकेट पिच बनाने की अनुमति ली और दो साल बाद 2005 में इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक गैटिंग ने मैदान का उद्घाटन किया। शुरुआत बेहद साधारण थी। खिलाड़ियों के लिए सिर्फ एक अस्थायी चेंजिंग केबिन था। लेकिन जिमी के जुनून ने लोगों को प्रभावित किया। स्पॉन्सर्स जुड़े और धीरे-धीरे यहां पैवेलियन, साइटस्क्रीन, बाउंड्री और दूसरी आधुनिक सुविधाएं तैयार हो गईं। आज क्लब हाउस की दीवारों पर अमेरिका से लेकर वानुअतु तक की टीमों की कैप, तस्वीरें और यादगार चीजें सजी हैं। यह मैदान जिमी के लिए सिर्फ क्रिकेट ग्राउंड नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी का सपना है। यह सपना तब और खास हो जाता है, जब उनके बेटे चार्ल्स परचार्ड इसी मैदान पर जर्सी टीम के कप्तान के रूप में उतरते हैं। बचपन से इसी मैदान पर क्रिकेट सीखने वाले चार्ल्स 2010 में जर्सी के लिए डेब्यू कर चुके हैं और लंबे समय से टीम की कप्तानी संभाल रहे हैं। चार्ल्स कहते हैं, ‘अपने ही घर के मैदान पर कप्तान के तौर पर उतरना सबसे भावुक पल होता है। बाउंड्री के बाहर पिता और परिवार को मुझे चीयर करते देखना दुनिया का सबसे खास एहसास है।’ जर्सी फिलहाल आईसीसी टी20 रैंकिंग में 29वें स्थान पर है। टीम मामूली रन-रेट के अंतर से 2026 टी20 वर्ल्ड कप में जगह बनाने से चूक गई थी। अब उसकी पूरी नजर 2028 टी20 वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करने पर है। जब 4 हजार की आबादी ने 27 लाख को दी मात मैदान बनने के करीब दो दशक बाद, ‘फार्मर्स क्रिकेट क्लब’ ने बड़ा कारनामा किया। सेंट मार्टिन जैसे छोटे से इलाके (जिसकी आबादी महज 4,000 है) के इस क्लब ने यूरोपियन क्रिकेट लीग (टी10 टूर्नामेंट) का खिताब अपने नाम कर लिया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने इटली की राजधानी रोम (जिसकी आबादी 27.5 लाख है) की टीम को 42 रनों से शिकस्त दी। इतना ही नहीं, इसी मैदान पर जर्सी की राष्ट्रीय टीम ने इटली को हराकर पहली बार ‘वर्ल्ड कप ग्लोबल क्वालिफायर’ में भी अपनी जगह पक्की की थी।

पटवार भर्ती-2021: डमी से परीक्षा दिलवाकर पटवारी बनने वाला गिरफ्तार:प्रवेश पत्र पर फोटो बदली,जाली हस्ताक्षर किए; 5 लाख रुपए में तय हुआ था सौदा

पटवार भर्ती परीक्षा-2021 में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा करते हुए एसओजी ने डमी अभ्यर्थी से परीक्षा दिलवाकर पटवारी बने एक निलंबित कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। आरोपी दिनेश कुमार विश्नोई ने खुद परीक्षा देने के बजाय अपने स्थान पर डमी कैंडिडेट को बैठाया और चयन के बाद सिरोही जिले में पटवारी के पद पर नौकरी भी हासिल कर ली। प्रवेश पत्र पर फोटो बदली, जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि एसओजी को इस मामले में गोपनीय शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत की जांच के बाद एसओजी थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि मूल अभ्यर्थी दिनेश कुमार पुत्र तुलसीराम निवासी भादरूणा, तहसील सांचौर, जिला जालौर का रहने वाला है। उसने 23 अक्टूबर 2021 को उदयपुर स्थित परीक्षा केंद्र पर अपने स्थान पर डमी अभ्यर्थी से परीक्षा दिलवाई थी। इसके लिए प्रवेश पत्र पर डमी अभ्यर्थी की फोटो लगाई गई और जाली हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया। 5 लाख रुपए में तय हुआ था सौदा एसओजी की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने एक दलाल के जरिए डमी अभ्यर्थी को परीक्षा दिलाने के लिए 5 लाख रुपए नकद दिए थे। फर्जी तरीके से परीक्षा पास करने के बाद उसकी नियुक्ति सिरोही जिले की पिंडवाड़ा तहसील के मंगरीवाड़ा पटवार हल्के में पटवारी के रूप में हो गई। एसओजी ने मामले में दलाल की पहचान चौथाराम विश्नोई (गिला) निवासी लियादरा, थाना झाब, जिला सांचौर और डमी अभ्यर्थी की पहचान विक्रम विश्नोई निवासी मीरपुरा, थाना करड़ा रानीवाड़ा, जिला जालौर के रूप में की है। दोनों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। निलंबित पटवारी को किया गिरफ्तार एसओजी की टीम ने लगातार तलाश के बाद आरोपी दिनेश कुमार विश्नोई (34) को गिरफ्तार कर लिया। वह वर्तमान में निलंबित पटवारी है और उपखंड अधिकारी कार्यालय, पिंडवाड़ा (जिला सिरोही) में पदस्थापित था। आरोपी से पूछताछ जारी है और भर्ती परीक्षा में शामिल पूरे गिरोह की भूमिका की जांच की जा रही है।

बुढ़ली गांव में बुलडोजर से तोड़े अवैध कब्जे:नोटिस का समय खत्म होने के बाद एक्शन, ग्रामीणों की जुटी भीड़, कार्रवाई पर गरमाई राजनीति

डीग में सीकरी उपखंड के बुढ़ली गांव में प्रशासन बड़ी कार्रवाई की है। यहां रास्ते और घरों के आगे किए गए अवैध अतिक्रमणों पर बुलडोजर चलाया गया। अतिक्रमण हटाने से पहले करीब 12 लोगों को आधिकारिक नोटिस जारी कर खुद कब्जा हटाने की चेतावनी दी गई थी। नोटिस का समय समाप्त होने के बाद भारी पुलिस बल के साथ टीम मौके पर पहुंची और चस्पा किए गए नोटिस के आधार पर अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा रही। पूर्व विधायक ने जताया कड़ा ऐतराज
इस तोड़फोड़ की कार्रवाई को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्व विधायक वाजिब अली ने इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे प्रशासन की ‘द्वेषपूर्ण’ कार्रवाई बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन चुनिंदा लोगों को निशाना बना रहा है। वाजिब अली ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर प्रशासन वाकई अतिक्रमण के खिलाफ है, तो सबसे पहले मुख्य बाजारों और प्रमुख सरकारी जमीनों पर कुंडली मारकर बैठे रसूखदारों के अवैध कब्जे हटाए। उन्होंने कहा कि सिर्फ गरीब ग्रामीणों के आशियाने उजाड़ना पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण है। पूर्व प्रधान ने भी उठाए सवाल
वहीं इस मामले में पूर्व प्रधान जलिश खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट डालते हुए प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, “बुलडोजर राज को रोकने के बजाय यदि अधिकारी भी उसके सामने नतमस्तक नजर आएं, तो यह कानून के शासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।” जलिश खान ने आगे आरोप लगाया कि बुढ़ली में पुलिस अत्याचार की कहानी केवल पीड़ित लोगों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रही। उन्होंने भाजपा मंत्री पर व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के लिए सत्ता का दुरुपयोग करने और विशेषकर मेव समुदाय को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे किसी सरकार, राजनीतिक दल या सामाजिक सौहार्द के लिए अच्छा संकेत नहीं बताया।

नागौर में NEET-विवाद पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग:बोले- राष्ट्रीय भाषा, शिक्षा सुधार और युवाओं के लिए रोजगार बढ़ाओ

दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे CJP कार्यकर्ताओं के संसद मार्च के बीच सोमवार को नागौर जिले के युवाओं, स्टूडेंट्स, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय भाषा के सम्मान, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के लिए रोजगार बढ़ाने की मांग की गई। कलेक्टर को सौंपा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन युवाओं, स्टूडेंट्स, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें प्रधानमंत्री तक पहुंचाने की अपील की। यह ज्ञापन दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे CJP कार्यकर्ताओं के संसद मार्च के बीच सौंपा गया। NEET परीक्षा को लेकर उठाए सवाल ज्ञापन में कहा गया कि देश में लगातार NEET परीक्षा को लेकर सामने आ रही कथित गड़बड़ियों और विवादों से लाखों स्टूडेंट्स और अभिभावकों का भरोसा प्रभावित हुआ है। प्रतिनिधियों ने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की मांग की। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की। राष्ट्रीय भाषा और शिक्षा सुधार की मांग ज्ञापन में राष्ट्रीय भाषा को उचित सम्मान देने, शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और स्टूडेंट्स को समान अवसर उपलब्ध कराने की मांग रखी गई। इसके साथ ही शिक्षा नीति में जरूरी सुधार करने की भी बात कही गई। युवाओं के लिए रोजगार बढ़ाने की मांग प्रतिनिधियों ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री तक मांग पहुंचाने की अपील ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि उनकी सभी मांगों को प्रधानमंत्री तक पहुंचाया जाए, ताकि स्टूडेंट्स, युवाओं और अभिभावकों से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी निर्णय लिए जा सकें।

जेडी वेंस उपराष्ट्रपति रहते हुए चौथे बच्चे के पिता बने:अमेरिका में 150 साल में पहली बार ऐसा हुआ; ज्यादा बच्चों के पक्षधर हैं वेंस

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी पत्नी उषा वेंस के घर चौथे बच्चे का जन्म हुआ है। 19 जुलाई की सुबह उनके बेटे एलक नील वेंस का जन्म हुआ। 150 साल से ज्यादा समय बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी मौजूदा अमेरिकी उपराष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान उनके घर बच्चे का जन्म हुआ। टाइम मैगजीन के मुताबिक, इससे पहले ऐसा 1870 में हुआ था। उस समय राष्ट्रपति यूलिसिस एस. ग्रांट के कार्यकाल में उपराष्ट्रपति शायलर कोलफैक्स की पत्नी एलन कोलफैक्स ने बेटे शायलर कोलफैक्स तृतीय को जन्म दिया था। जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर चौथे बच्चे की खुशखबरी साझा करते हुए लिखा, उषा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। हमारे तीनों बच्चे अपने छोटे भाई से मिलकर बेहद खुश हैं। एलक नील वेंस, जेडी और उषा वेंस की चौथी संतान हैं। उनसे पहले उनके तीन बच्चे इवान (9 वर्ष), विवेक (6 वर्ष) और मिराबेल (4 वर्ष) हैं। भारतीय मूल की हैं उषा वेंस उषा वेंस का जन्म और पालन-पोषण कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में हुआ। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। उनके पिता मैकेनिकल इंजीनियर हैं, जबकि मां मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट हैं। उषा और जेडी वेंस की मुलाकात 2010 में येल लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान हुई थी। बाद में दोनों ने शादी की। ज्यादा बच्चों के पक्षधर रहे हैं वेंस जेडी वेंस ट्रम्प सरकार के उन प्रमुख नेताओं में रहे हैं, जो अमेरिका में जन्मदर बढ़ाने की वकालत करते रहे हैं। उनका मानना है कि अमेरिका में गिरती जन्मदर भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है। इसी वजह से उन्होंने टैक्स छूट, परिवारों के लिए आर्थिक मदद और बच्चों वाले परिवारों को अधिक समर्थन देने जैसी नीतियों की पैरवी की है। अपनी हाल ही में रिलीज हुई किताब कम्युनियन में वेंस ने अपनी निजी जिंदगी का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि वे कई साल से पत्नी उषा वेंस से चौथा बच्चा करने की बात कहते रहे, लेकिन उषा का मानना था कि तीन बच्चों के बाद उनका परिवार पूरा हो चुका है। सार्वजनिक जीवन में आने के बाद वह चौथा बच्चा नहीं चाहती थीं। चौथे बच्चे के लिए उषा को मनाया इस साल मिशिगन में व्हाइट हाउस के एक कार्यक्रम में जेडी वेंस ने मजाकिया अंदाज में बताया था कि उन्होंने उषा को चौथे बच्चे के लिए कैसे राजी किया। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने से पहले उन्होंने उषा से कहा था, “मैं चौथा बच्चा चाहता हूं।” इस पर उषा ने जवाब दिया, “ठीक है, लेकिन तुम्हें अमेरिका का उपराष्ट्रपति बनना है या चौथा बच्चा चाहिए, दोनों एक साथ नहीं मिल सकते।” वेंस ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं अपनी बात मनवाने में काफी अच्छा हूं, क्योंकि आज मेरे पास दोनों हैं।” वेंस के मुताबिक, यह सोच तब बदली जब 2025 में उनके करीबी दोस्त और एक्टिविस्ट चार्ली किर्क की हत्या हो गई। अंतिम संस्कार के दौरान उषा की मुलाकात चार्ली किर्क की पत्नी एरिका किर्क से हुई। वेंस लिखते हैं कि एरिका ने रोते हुए उषा से कहा कि उन्हें अफसोस है कि उनके और चार्ली के केवल दो ही बच्चे थे। इस बातचीत का उषा पर गहरा असर पड़ा और कुछ समय बाद उन्होंने चौथे बच्चे के लिए हामी भर दी। भारतीय मूल के ससुराल वालों की कर चुके हैं तारीफ जेडी वेंस कई बार अपने भारतीय मूल के ससुराल वालों की खुलकर तारीफ कर चुके हैं। इस साल एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि उनके सास-ससुर इस बात का उदाहरण हैं कि प्रवासियों ने अमेरिका को किस तरह समृद्ध बनाया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिकी नागरिक बनने के बाद देश के हितों को सबसे पहले रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा था, “मैंने भारत से आए प्रवासियों की बेटी से शादी की। मुझे अपने सास-ससुर से बहुत प्यार है। वे शानदार लोग हैं और उन्होंने अमेरिका के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।”

नूंह सड़क हादसे में महिला सहित 3 की मौत:3 साथी घायल, कंपनी मीटिंग के लिए जा रहे थे, अचानक ब्रेक लगाने से हादसा

नूंह जिले से गुजर रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सोमवार देर रात करीब 3 बजे एक भीषण सड़क हादसा हो गया। हादसा इतना भयावह था कि मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स (RJ60-CF-5419) में सवार एक महिला और 2 पुरुषों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 3 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, तीनों मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम शहीद हसन खान मेवाती (SHKM) मेडिकल कॉलेज, नल्हड़ में कराया गया। पुलिस को दी शिकायत में रामपाल मीणा ने बताया कि उसका छोटा भाई राम किशन मीणा एक निजी कंपनी में कार्यरत था। कंपनी की मीटिंग में शामिल होने के लिए वह अपने साथियों के साथ उत्तराखंड जा रहा था। उनके साथ अविनाश मीणा, अनीता शर्मा सहित अन्य लोग मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स कार में सवार थे। आगे चल रहे वाहन ने अचानक लगाए ब्रेक परिजनों के अनुसार, 19 जुलाई 2026 को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर गांव बनारसी और दहदोली कला के बीच उनकी कार पहुंची ही थी कि आगे चल रहे एक अज्ञात वाहन ड्राइवर ने अचानक ब्रेक लगा दिए। इससे कार ड्राइवर वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और तेज रफ्तार कार भीषण दुर्घटना का शिकार हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। महिला सहित 3 लोगों की मौके पर मौत हादसे में राम किशन मीणा, अविनाश मीणा और अनीता शर्मा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 3 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही नगीना थाना पुलिस, हाईवे पेट्रोलिंग टीम और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। सभी घायलों और मृतकों को तत्काल शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कॉलेज, नल्हड़ ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए गुरुग्राम के निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया। आरोपी ड्राइवर की तलाश कर रही पुलिस जांच अधिकारी वेद प्रकाश ने बताया कि शिकायत के आधार पर अज्ञात वाहन ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। हादसे के बाद आरोपी ड्राइवर अपना वाहन लेकर मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है। पुलिस एक्सप्रेसवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और दुर्घटना के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि तीनों मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जबकि घायलों का गुरुग्राम के निजी अस्पताल में उपचार जारी है।