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अमेरिकी हमले में मृत आदित्य के परिजन CM से मिले:पिता बोले-बच्चों की हत्या की जांच नहीं दबा दी गई, केंद्र से मामला उठाया जाए

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी हमले में जान गंवाने वाले हमीरपुर के आदित्य शर्मा (23) के परिजनों ने सोमवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात कर मामले में न्याय दिलाने की मांग की। आदित्य के पिता राजेश शर्मा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि उनके बेटे की असामयिक मौत का मामला केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाए, क्योंकि अब तक इस मामले में केंद्र स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है। उन्होंने परिवार को आश्वस्त किया कि वह इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे, ताकि परिवार को न्याय मिल सके। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आदित्य शर्मा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की। इस दौरान आदित्य की माता सुषमा शर्मा भी मौजूद रहीं। ‘MT सेत्तेबेल्लो’ पर डेक कैडेट के रूप में तैनात थे आदित्य आदित्य शर्मा हमीरपुर जिले की ग्राम पंचायत हड़ेटा के गांव भालू के रहने वाले थे। वह तेल टैंकर ‘MT सेत्तेबेल्लो’ पर डेक कैडेट के रूप में तैनात थे। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुए हमले के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इससे दो अन्य समेत आदित्य शर्मा की भी मौत हो गई थी। हालांकि जहाज पर सवार 24 भारतीय क्रू सदस्यों में से अधिकांश को सुरक्षित बचा लिया गया था इकलौती संतान थे आदित्य आदित्य अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। उन्होंने जालंधर से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद स्कॉटलैंड से नॉटिकल इंजीनियरिंग और मर्चेंट नेवी का प्रशिक्षण लिया था। 24 नवंबर 2025 को वह मर्चेंट नेवी में शामिल हुए थे और प्रशिक्षण अवधि के दौरान ही इस जहाज पर तैनात थे। परिजनों ने कंपनी पर लगाए थे उत्पीड़न के आरोप परिजनों का दावा है कि आदित्य ने कुछ समय पहले जहाज पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कथित उत्पीड़न की शिकायत की थी और वह अप्रैल में जहाज छोड़ना चाहते थे। परिवार का कहना है कि उनके पास इससे जुड़ी बातचीत का रिकॉर्ड भी मौजूद है। अब परिवार चाहता है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इससे पहले भी मुख्यमंत्री सुक्खू ने आदित्य के निधन पर गहरा शोक जताते हुए परिजनों से फोन पर बात की थी और हरसंभव सहायता का भरोसा दिया था। अब परिवार की सीधी मुलाकात के बाद राज्य सरकार ने एक बार फिर मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया है।

कर्नाटक में जिपलाइन राइड के दौरान सेफ्टी लॉक खुला, VIDEO:पर्यटक 40 फीट नीचे गिरा, हाथ-पैरों में कई फ्रैक्चर; परिवार ने रिजॉर्ट प्रबंधन पर लगाए आरोप

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के एक एडवेंचर रिजॉर्ट में जिपलाइन राइड के दौरान सेफ्टी लॉक हवा में खुल गया। इससे पर्यटक करीब 40 फीट नीचे गिर गया। यह पूरी घटना मौके पर मौजूद लोगों के कैमरे में कैद हो गई। पर्यटक की पहचान विजयपुरा निवासी कुबेर सुरपुर के रूप में हुई है। हादसे में कुबेर के हाथ और पैरों में कई फ्रैक्चर हुए हैं। इसके अलावा उन्हें नसों में भी गंभीर चोट आई है। घटना के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। घटना के 2 वीडियो… कुबेर के परिवार ने प्रबंधन पर आरोप लगाए हादसे के बाद कुबेर के परिवार ने रिजॉर्ट प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया और जवाबदेही तय कर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जिपलाइन का सेफ्टी लॉक हवा में ही खुल गया, जिससे यह हादसा हुआ। परिजनों का यह भी आरोप है कि जिपलाइन में जंग लगा हुआ था और उसका सही तरीके से रखरखाव नहीं किया गया था। उनका कहना है कि यदि समय पर उपकरणों की जांच और रखरखाव किया गया होता, तो यह हादसा टाला जा सकता था। रिसॉर्ट मैनेजर बोले- पर्यटक से मिलेंगे रिसॉर्ट मैनेजर ने स्वीकार किया है कि जिपलाइन दुर्घटना हुई थी। उन्होंने कहा कि हादसा, कर्मचारियों की लापरवाही के कारण नहीं हुई थी। यह एक तकनीकी वजह से होने वाली घटना थी। हम अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट रहे हैं, हम जल्द ही विजयपुरा जाएंगे और व्यक्तिगत रूप से पर्यटक के परिवार के साथ इस समस्या पर चर्चा करेंगे। ———————— ये खबर भी पढ़ें… 12 साल के बच्चे को मगरमच्छ जिंदा खा गया, VIDEO:बहराइच में पैर जबड़े में दबाकर खींच ले गया, बच्चा तड़पता रहा…चाचा चिल्लाते रह गए यूपी के बहराइच से रोंगटे खड़े करने वाली घटना सामने आई है। यहां मगरमच्छ 12 साल के बच्चे को जिंदा खा गया। धान की रोपाई करने के बाद बच्चा नदी में हाथ-पैर धोने गया था, तभी मगरमच्छ ने उस पर हमला कर दिया। उसे जबड़े में दबोच लिया। बच्चे ने खुद को छुड़ाने के लिए हाथ-पैर मारे। पूरी खबर पढ़ें…

दावा- पेड्री ने स्पेन की जीत की भविष्यवाणी की थी:13 महीने पहले इंस्टाग्राम पर लिखा- 19 जुलाई 2026, अब बोले- यह पहले से तय था

स्पेन ने फुटबॉल वर्ल्ड कप जीत लिया है। उसने रविवार रात को न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में अर्जेंटीना को 1-0 से हराया। टीम दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनी है। 23 साल के स्पेनिश मिडफील्डर पेड्री ने सोशल प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि उन्होंने इस जीत की भविष्यवाणी 13 महीने पहले कर दी थी। पेड्री ने ट्रॉफी चूमते हुए फोटो पोस्ट की और लिखा- ‘यह पहले से लिखा था! 190726… वह दिन, जब पूरे देश का सपना सच हुआ। वह दिन, जब हम वर्ल्ड चैंपियन बने।’ जीत के बाद पेड्री की पोस्ट दरअसल, 10 जून 2025 को पेड्री ने इंस्टाग्राम पर सिर्फ ‘190726’ पोस्ट किया था। उस समय इसका कोई मतलब स्पष्ट नहीं था। अब फैंस ने इसे 19 जुलाई 2026, यानी फीफा वर्ल्ड कप फाइनल की तारीख से जोड़कर देखा, जिस दिन स्पेन ने खिताब जीत लिया। पूरे टूर्नामेंट में निभाई अहम भूमिका पेड्री ने पूरे टूर्नामेंट में स्पेन के लिए हर मैच खेला। मिडफील्ड में उनके नियंत्रण, रचनात्मक खेल और संयम ने कोच लुइस डे ला फुएंते की टीम को लगातार सफलता दिलाई। एक्स्ट्रा टाइम में टूटा अर्जेंटीना का सपना न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में खेला गया फाइनल 90 मिनट तक गोलरहित रहा। अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने कई शानदार बचाव किए, जबकि इंजरी टाइम में एंजो फर्नांडेज़ दूसरे पीले कार्ड के बाद बाहर हो गए और टीम 10 खिलाड़ियों के साथ रह गई। एक्स्ट्रा टाइम में स्पेन को पहले निको विलियम्स के गोल से बढ़त मिलती दिखी, लेकिन फाउल के कारण गोल रद्द कर दिया गया। आखिरकार 106वें मिनट में निको विलियम्स के हेडर पर फेरान टोरेस ने जोरदार शॉट लगाकर गेंद जाल में पहुंचाई और स्पेन को 1-0 की ऐतिहासिक जीत दिला दी। 16 साल बाद फिर वर्ल्ड चैंपियन बना स्पेन इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार फीफा वर्ल्ड कप का खिताब जीता। साथ ही कोच लुइस डे ला फुएंते के नेतृत्व में टीम ने अपना लगातार 38वां अंतरराष्ट्रीय मैच बिना हार के पूरा किया, जो किसी भी यूरोपीय टीम का रिकॉर्ड है। UEFA यूरो 2024 जीतने वाली स्पेनिश टीम का हिस्सा रहे पेड्री ने अब अपने करियर में वर्ल्ड कप ट्रॉफी भी जोड़ ली। खास बात यह रही कि यह उपलब्धि ठीक उसी तारीख पर मिली, जिसका संकेत उन्होंने 13 महीने पहले अपनी रहस्यमयी पोस्ट में दिया था। ——————————————————————

आज सोना ₹756 और चांदी ₹3493 महंगी हुई:10 ग्राम गोल्ड ₹1.42 लाख पर और 1 किलो चांदी की कीमत ₹2.19 लाख पहुंची

सोने-चांदी की कीमतों में आज तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 3,493 रुपए बढ़कर 2,18,967 रुपए पर पहुंच गई है, जो शुक्रवार को 2,15,474 रुपए पर थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 756 रुपए चढ़कर 1,41,915 रुपए आ गया है। इससे पहले 17 जुलाई को यह 1,41,159 पर था। सोना के दाम इस महीने 283 रुपए बढ़े हैं, जबकि चांदी के दाम 6,463 रुपए गिरावट रही। 1 जुलाई को सोना 1,41,632 रुपए की 10 ग्राम और चांदी 2,25,430 रुपए किलो थी। अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें सोना इस साल ₹9 हजार महंगा हुआ इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 9 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.42 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 11 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.19 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें…

सरकार ने हाईकोर्ट में बताई पंचायत-निकाय चुनाव की तारीख:ओबीसी आयोग 5 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट देगा, जानें- कब से हो सकती है वोटिंग

राजस्थान में लंबे समय से पंचायत-निकाय चुनाव की घोषणा को लेकर इंतजार किया जा रहा था। वो इंतजार आज खत्म हो गया है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद आज सरकार ने पंचायत और निकाय चुनाव की डेट और शेड्यूल को कोर्ट के सामने रखा। इसके अनुसार अगस्त में प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हाईकोर्ट ने सरकार के जवाब पर कहा कि हमें चुनाव की तारीख जाननी है। इस पर सरकार ने कहा कि 17 अगस्त को निकाय चुनाव की घोषणा कर देंगे और 23 सितंबर को पंचायत चुनाव की घोषणा हो जाएगी। पहले निकाय चुनाव होंगे और उसके बाद पंचायत चुनाव होंगे। ओबीसी आयोग 5 अगस्त तक सब्मिट करेगा रिपोर्ट स्वायत्त शासन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ने कोर्ट मे जवाब पेश करते हुए कहा- कोर्ट के 16 जुलाई के आदेश की पालना में शनिवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित हुई। इसमें राज्य चुनाव आयोग के सचिव, ओबीसी आयोग सचिव, स्वायत्त शासन विभाग और पंचायतीराज विभाग के सचिव शामिल हुए। बैठक में तय किया गया कि ओबीसी आयोग 5 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सब्मिट करेगा। इसके बाद स्वायत्त शासन विभाग और पंचायतीराज विभाग 15 अगस्त तक एससी-एसटी, ओबीसी और महिला आरक्षण की लॉटरी निकालेंगे। लॉटरी निकालने की डेट से राज्य चुनाव आयोग 90 दिन में प्रदेश में पंचायत-निकाय चुनाव करा लेगा। अगर हाईकोर्ट इस शेड्यूल को स्वीकार कर लेता है तो 15 नवंबर तक अलग-अलग चरणों में वोटिंग हो सकती है। बता दें कि प्रदेश में पंचायत चुनावों में देरी को लेकर गिर्राज सिंह देवंदा और निकाय चुनाव में देरी को लेकर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने जनहित याचिका दायर की थी। … यह खबर भी पढ़ें… राजस्थान में सितंबर-नवंबर के बीच हो सकते हैं पंचायत-निकाय चुनाव:हाईकोर्ट ने 31 जुलाई तक कराने को कहा था; सरकार ने मांगा समय

बारिश के लिए पुरुषों के वेश में निकलीं महिलाएं:गांव की गलियों में निकाला जुलूस, मंदिर में गाए भजन कीर्तन और लोकगीत

डूंगरपुर जिले में अच्छी बारिश की मनोकामना को लेकर अनूठी परंपरा ‘धाड़’ निभाई गई। इसके तहत जिले के मोरा सारण, डूंगरवाड़ा, कुआं सहित आसपास के गांवों में महिलाओं ने पुरुषों का वेश धारण कर गांव की गलियों में जुलूस निकाला और इंद्रदेव से अच्छी वर्षा की कामना की। सफेद धोती-कुर्ता, सिर पर साफा, हाथों में लाठी, तलवार और कृषि उपकरण लिए महिलाओं के इस पारंपरिक जुलूस में ग्रामीण संस्कृति और लोक विश्वास का अद्भुत संगम नजर आया। जुलूस के दौरान महिलाएं भजन-कीर्तन करती हुई पूरे गांव में भ्रमण करती रहीं। वातावरण में गूंजते लोकगीत और वर्षा की प्रार्थना से पूरा गांव श्रद्धा और आस्था के रंग में रंग गया। इन फोटोज में देखिए अनूठी परंपरा ‘धाड़’ की झलकियां… अब पढ़िए क्यो निकालते है धाड़

खून की कमी से किडनी डैमेज हुई, प्रसूता की मौत:नॉर्मल डिलीवरी के बाद बिगड़ गई थी तबीयत, 25 दिन से वेंटिलेटर पर थी

कोटा, बीकानेर, बांसवाड़ा के बाद अब जोधपुर में भी एक प्रसूता की मौत हो गई। महिला की 24 जून को तिंवरी हॉस्पिटल में नॉर्मल डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के बाद खून नहीं रुका तो उसे उम्मेद हॉस्पिटल रेफर किया गया था। 4 दिन उम्मेद हॉस्पिटल में इलाज चला। इसके बाद 27 जून को महात्मा गांधी हॉस्पिटल में रेफर किया गया था, जहां वह वेंटिलेटर पर थी और लगातार डायलिसिस चल रहा था। 14 जुलाई से दोबारा उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और रविवार देर रात उसकी मौत हो गई। तिंवरी में हुई थी नॉर्मल डिलीवरी, बच्ची को दिया था जन्म महात्मा गांधी हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट डॉ. फतेह सिंह ने बताया- तिंवरी में समू की नॉर्मल डिलीवरी हुई थी। उसने बच्ची को जन्म​ दिया था। डिलीवरी के बाद उसका खून रुकना बंद नहीं हुआ। इस पर उसे जोधपुर रेफर किया गया। महिला को उम्मेद हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, तब तक उसका काफी खून बह चुका था। उसकी बच्चेदानी से लगातार खून बह रहा था। इस कारण बच्चेदानी को निकाला गया था। उसे ब्लड, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स चढ़ाए गए। खून की कमी के चलते उसकी किडनी डैमेज हो गई। खून की कमी के कारण हाइपोवॉलेनिक शॉक लगा डॉ. फतेह सिंह ने बताया- महिला की तबीयत में सुधार नहीं होने पर उसे महात्मा गांधी हॉस्पिटल रेफर किया गया था। वह वेंटिलेटर पर थी। 14 जुलाई को उसे उल्टियां होने लगी और तबीयत बिगड़ने लगी। डॉक्टर ने बताया- खून की कमी की वजह से हाइपोवॉलेनिक शॉक लगा था। इस कंडीशन में ब्लड सप्लाई आर्गन तक प्रभावित हो जाते हैं। इसके साथ ही प्लेटलेट्स और प्लाज्मा कम हो जाते हैं। खून की कमी को पूरा करने के लिए 6 यूनिट ब्लड, 14 यूनिट प्लाज्मा और 10 यूनिट क्रायोसिपिटेड चढ़ाए गए थे। एक महीने में 16 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी, 7 ​अभी भी एडमिट जोधपुर में पिछले एक महीने में 16 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी है। इनमें से ज्यादातर प्रसूताओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। एक प्रसूता धापू की तबीयत गलत खून चढ़ाने की वजह से 13 जुलाई को उम्मेद हॉस्पिटल में बिगड़ी थी। धापू की 11 जुलाई को बावड़ी में नॉर्मल डिलीवरी हुई थी, लेकिन एनीमिया की वजह से उसे रेफर करना पड़ा। फिलहाल उम्मेद हॉस्पिटल में 5 और महात्मा गांधी हॉस्पिटल में 2 प्रसूताओं का इलाज चल रहा है। इनमें एक धापू भी है। — ये खबर भी पढ़िए- उम्मेद हॉस्पिटल में भर्ती दो प्रसूताओं की स्थिति में सुधार:सिजेरियन डिलीवरी के बाद 5 प्रसूताओं की बिगड़ गई थी तबीयत; एक मरीज वेंटिलेटर पर जोधपुर में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 5 प्रसूताओं की ​तबीयत बिगड़ी है। इन सभी का इलाज उम्मेद हॉस्पिटल में चल रहा है। (पढ़िए पूरी खबर)

एंडी बर्नहैम ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बने:10 साल में सातवें PM; पाकिस्तानी मूल की शबाना महमूद वित्त मंत्री बन सकती हैं

ब्रिटेन में सोमवार को एंडी बर्नहैम ने नए प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया। वह पिछले 10 साल में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बने हैं। उन्होंने देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव का वादा करते हुए कहा है कि उनकी सरकार लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं, जैसे महंगाई और खराब सार्वजनिक सेवाओं पर सबसे ज्यादा ध्यान देगी। पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर विदाई भाषण देने के बाद किंग चार्ल्स को अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम ने किंग से मुलाकात की और औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। 56 वर्षीय बर्नहैम ऐसे समय सत्ता में आए हैं, जब ब्रिटेन कई चुनौतियों से जूझ रहा है। इनमें धीमी आर्थिक वृद्धि, खराब प्रदर्शन करने वाली सार्वजनिक सेवाएं और बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं प्रमुख हैं। सरकार संभालने के साथ ही उन्हें अपनी नई कैबिनेट का भी गठन करना है। नई कैबिनेट पहली चुनौती होगी प्रधानमंत्री बनने के बाद बर्नहैम की पहली बड़ी चुनौती अपनी कैबिनेट का गठन होगी। खास तौर पर वित्त मंत्री की नियुक्ति पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि पहले भी प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के बीच मतभेद कई सरकारों के लिए मुश्किल बने हैं। ऊर्जा सुरक्षा मंत्री एड मिलिबैंड को पहले इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन अब गृह मंत्री शबाना महमूद का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। शबाना पाकिस्तानी मूल की नेता हैं। हालांकि बर्नहैम ने कहा है कि उन्होंने अभी अपनी टीम पर अंतिम फैसला नहीं लिया है और अटकलों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। पहला फैसला- डिजिटल पहचान पत्र लागू करने का फैसला रद्द किया बर्नहैम सरकार के शुरुआती फैसलों पर भी सबकी नजर रहेगी। सरकार ने पहले ही एक अहम कदम उठाते हुए सभी कर्मचारियों के लिए डिजिटल पहचान पत्र लागू करने की योजना रद्द कर दी है। इस की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सरकार ने सितंबर 2025 में की थी। इसका मकसद यह था कि देश में काम करने वाले हर कर्मचारी की पहचान और उसके काम करने के कानूनी अधिकार की डिजिटल तरीके से पुष्टि की जा सके। सरकार का मानना था कि इससे फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कम होगा और अवैध प्रवासन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। हालांकि इस योजना का शुरुआत से ही विरोध होने लगा। आलोचकों का कहना था कि इससे सरकार नागरिकों की निजी जानकारी पर जरूरत से ज्यादा कंट्रोल हासिल कर सकती है। डेटा सुरक्षा और निजता को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। बर्नहैम के सामने 5 बड़ी चुनौतियां 1. सुस्त अर्थव्यवस्था को रफ्तार देना ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पिछले कई वर्षों से कमजोर बनी हुई है। 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी, ब्रेक्जिट और कोविड-19 महामारी के कारण लोगों का जीवन स्तर लगातार प्रभावित हुआ है। बर्नहैम ने वादा किया है कि वह आम लोगों की जिंदगी में वास्तविक सुधार लाएंगे। उन्होंने टैक्स न बढ़ाने का भी वादा किया है। 2. यूक्रेन, मिडिल ईस्ट और अमेरिका के साथ रिश्तों में संतुलन बर्नहैम घरेलू मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात उन्हें ऐसा करने की पूरी छूट नहीं देंगे। यूक्रेन युद्ध अभी जारी है और मिडिल ईस्ट में भी तनाव बढ़ा हुआ है। माना जा रहा है कि इन दोनों मुद्दों पर ब्रिटेन की विदेश नीति में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा, क्योंकि NSA जोनाथन पॉवेल अपने पद पर बने रह सकते हैं। साथ ही अमेरिका के साथ ब्रिटेन के रिश्ते भी नई सरकार के लिए अहम होंगे। पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ अच्छे संबंध बनाने की कोशिश की थी, लेकिन ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों का खुलकर समर्थन नहीं करने के कारण दोनों नेताओं के बीच तनाव पैदा हो गया था। 3. रक्षा बजट बढ़ाना और उसके लिए पैसा जुटाना रक्षा खर्च बढ़ाने को लेकर मतभेद की वजह से पिछले महीने कीर स्टार्मर सरकार के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने इस्तीफा दे दिया था। उनका कहना था कि सेना के लिए प्रस्तावित बजट बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। इसके कुछ हफ्तों बाद स्टार्मर ने अगले चार वर्षों में रक्षा बजट में 15 अरब पाउंड (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) की बढ़ोतरी का ऐलान किया। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि एक्स्ट्रा पैसा कहां से आएगा और किन सरकारी विभागों के बजट में कटौती कर इसकी भरपाई की जाएगी। 4. इमिग्रेशन पर सख्त नीति और राजनीतिक संतुलन हाल के वर्षों में ब्रिटेन में शुद्ध प्रवासन (नेट माइग्रेशन) में काफी गिरावट आई है। इसकी वजह पिछली कंजर्वेटिव सरकार द्वारा लागू की गई सख्त इमिग्रेशन नीतियां हैं। इसे लेबर सरकार ने भी जारी रखा है। मई में एंडी बर्नहैम ने माना था कि इमिग्रेशन में कमी आई है, लेकिन उन्होंने कहा कि इसे और कम करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह पूर्व गृह मंत्री शबाना महमूद की सख्त इमिग्रेशन नीति को बड़े पैमाने पर जारी रखेंगे। हालांकि लेबर पार्टी के कई सांसद और उदारवादी समर्थक इसका विरोध करते रहे हैं। ऐसे में बर्नहैम के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पार्टी के भीतर विरोध के बीच संतुलन बनाना होगी। 5. बढ़ता कल्याण और पेंशन खर्च ब्रिटेन में सरकार का सामाजिक कल्याण (वेलफेयर) पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसकी एक बड़ी वजह कामकाजी उम्र के उन लोगों की बढ़ती संख्या है, जो मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के आधार पर सरकारी सहायता ले रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या युवाओं की है, जो बेरोजगार हैं। हालांकि सामाजिक सुरक्षा पर होने वाले कुल सरकारी खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा सेवानिवृत्त लोगों पर जाता है। सरकारी पेंशन और दूसरी सहायता योजनाओं पर कुल सामाजिक सुरक्षा बजट का आधे से ज्यादा हिस्सा खर्च होता है। अगर बर्नहैम इस खर्च को नियंत्रित कर पाते हैं, तो उनके पास सामाजिक आवास जैसी दूसरी योजनाओं पर ज्यादा पैसा खर्च करने का मौका मिलेगा। लेकिन यह आसान नहीं होगा। कीर स्टार्मर ने भी वेलफेयर खर्च घटाने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी ही पार्टी के सांसदों के विरोध के बाद उन्हें अपने फैसले वापस लेने पड़े थे। यही वजह है कि बर्नहैम के लिए यह आर्थिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी सबसे कठिन चुनौतियों में से एक होगी।

चीथवाड़ी श्रवण माता मंदिर में 7वीं बार चोरी:कंबल ओढ़कर घुसा चोर-दानपात्र उठाकर ले गया, घटना CCTV में हुई कैद

चौमूं उपखंड क्षेत्र के चीथवाड़ी स्थित प्रसिद्ध श्रवण माता मंदिर में एक बार फिर चोरी की घटना सामने आई है। रविवार देर रात चोर मंदिर परिसर में रखा दानपात्र चुराकर ले गए। अनुमान लगाया जा रहा है कि दानपात्र में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई हजारों रुपए की नकदी थी। मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों में चोरी की पूरी वारदात कैद हो गई है। फुटेज में एक अज्ञात व्यक्ति कंबल ओढ़कर मंदिर परिसर में प्रवेश करता और दानपात्र उठाकर फरार होता दिख रहा है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान और तलाश में जुटी है। एक ही मंदिर में चोरी की 7वीं घटना
यह श्रवण माता मंदिर में चोरी की 7वीं घटना है। घटना की सूचना मिलते ही जाटावाली चौकी प्रभारी बाबूलाल मीणा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू की। बढ़ती चोरियों को लेकर लोगों में आक्रोश
इस दौरान मंदिर समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर जमा हो गए। ग्रामीणों ने पुलिस को ज्ञापन सौंपकर लगातार हो रही चोरियों पर नाराजगी व्यक्त की और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की।
चौकी प्रभारी बाबूलाल मीणा ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले का शीघ्र खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है और आसपास के अन्य सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।

भाई की मौत का सदमा नहीं सकी बहन:खबर मिलते ही तबीयत बिगड़ी, एक घंटे बाद ही दम तोड़ा

सवाई माधोपुर में 87 साल के भाई की मौत की खबर सुनते ही सदमे में 83 साल की बहन ने भी दम तोड़ दिया। भाई के निधन की सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद बहन की भी मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि भाई की मौत के बाद उन्हें संभालने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ देर बाद उन्होंने भी अंतिम सांस ले ली। एक घंटे के अंतराल में हुई दोनों की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों को घटना की जानकारी मिली। मामला सवाई खंडार तहसील के कटार और सोनकच्छ गांव का है, जहां 11 जुलाई सुबह करीब 7 बजे यह घटनाक्रम हुआ। पढ़िए … पूरा घटनाक्रम 1. सुबह 7 बजे भाई की अचानक मौत हुई
11 जुलाई की सुबह करीब 7 बजे खंडार तहसील के कटार गांव निवासी हरफूल गुर्जर (87) घर के आंगन में नहाने के बाद खाट (चारपाई) पर बैठे थे। इसी दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार वह पूरी तरह स्वस्थ थे और किसी तरह की बीमारी नहीं थी। 2. भाई के निधन की खबर मिलते ही लगा सदमा
हरफूल गुर्जर की मौत की सूचना करीब 5 किलोमीटर दूर सोनकच्छ गांव में रहने वाली उनकी बहन फूला देवी (83) को दी गई। भाई के निधन की खबर सुनते ही वह गहरे सदमे में चली गईं। परिवार और रिश्तेदार उन्हें लगातार संभालने और सांत्वना देने की कोशिश करते रहे। 3. एक घंटे में बहन ने भी दम तोड़ दिया
रिश्तेदार रामजीलाल ने फूला देवी को लूगड़ा भेंट किया, जबकि रामप्रसाद ने उन्हें भगवद्गीता का 12वां अध्याय सुनाया। उस समय वह सामान्य नजर आ रही थीं, लेकिन भाई के निधन की सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद दम तोड़ दिया। 4. परिवार में शोक का माहौल
भाई-बहन की एक घंटे में मौत की खबर से कटार और सोनकच्छ सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट भी दोनों परिवारों के घर पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने रामायण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान राम के वनवास जाने के बाद राजा दशरथ ने भी पुत्र वियोग में प्राण त्याग दिए थे। आज के समय में भाई-बहन के बीच ऐसा भावनात्मक रिश्ता विरले ही देखने को मिलता है। 5. पांचों भाई-बहनों का हो चुका है निधन
परिजनों ने बताया कि हरफूल गुर्जर और फूला देवी सहित परिवार में कुल पांच भाई-बहन थे। समय के साथ सभी का निधन हो चुका है और अब इस पीढ़ी का कोई भी भाई-बहन जीवित नहीं बचा है।