ब्रेकिंग न्यूज़
सिया-चेतन ने क्राइम पेट्रोल देख हत्या का तरीका सीखा:केतन मर्डर में केस में अलग-अलग बयान दे रहे, अब दोनों का पॉलीग्राफ टेस्ट होगा

पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड के मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी अलग-अलग बयान दे रहे हैं। पुलिस ने अब पॉलीग्राफ टेस्ट यानी लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बाद दोनों के बयान मिलाए जाएंगे। सिया ने टेस्ट की परमिशन दे दी है। वहीं, पुलिस सूत्रों के हवाले से जांच में पता चला है कि मुख्य आरोपी चेतन चौधरी और सिया ने वारदात से पहले टीवी सीरियल ‘क्राइम पेट्रोल’ के कई एपिसोड देखकर समझने की कोशिश की थी कि हत्या के बाद जांच एजेंसियों को कैसे चकमा दिया जा सकता है। 18 जून को लोहगढ़ किले से गिरकर 25 साल के केतन अग्रवाल की मौत हो गई थी। पुलिस का मानना है कि केतन, सिया और चेतन के रिश्ते में बाधा बन रहा था, इसलिए उसकी हत्या की साजिश रची गई। सिया के साथ क्राइम सीन रीक्रिएशन पुणे पुलिस ने गुरुवार को सिया गोयल के घर से घटना के दिन पहने गए कपड़े और कई डिजिटल सबूत बरामद किए हैं। पुलिस सिया को लेकर पुणे के लुल्लानगर इलाके में ले गई। यहां स्थित एक पहाड़ी पर सिया और चेतन ने केतन अग्रवाल को गिराने की रिहर्सल की थी। रिहर्सल वाली जगह का पंचनामा बनाने के बाद पुलिस सिया को उसके घर भी लेकर गई। वहां 30 मिनट घर की तलाशी ली थी। सगाई से प्री-वेडिंग फंक्शन तक सिया-केतन की 2 तस्वीरें… 31 मई को आइडिया, 18 जून को मर्डर 31 मई: सिया को केतन की हत्या का प्लान सूझा: 11 फरवरी को सगाई के बाद केतन, सिया को घर लेकर आता था, साथ घुमाने ले जाता था। उसे ट्रैकिंग यानी पहाड़ी चढ़ने का शौक था। उसने सिया से ट्रैकिंग के लिए लोहगढ़ किले चलने को कहा। यहीं सिया को केतन की हत्या की प्लान सूझा। 5 जून: किले पर जाने की जिद की, केतन नहीं गया: सिया ने 4 जून को केतन से दोबारा लोहगढ़ किला जाने की जिद की। केतन नहीं माना। 6 जून को केतन, उनकी बहन, एक दोस्त और सिया के इंडोनेशिया के बाली जाने के टिकट बुक थे। पुणे पुलिस के मुताबिक बाली न जाना पड़े, इसलिए सिया ने केतन का पासपोर्ट छिपा लिया। 14 जून: दूसरी कोशिश, धक्का दिया, लेकिन केतन बच गया: सिया ने केतन से दोबारा किले पर चलने को कहा। पुलिस के मुताबिक 14 जून को दोनों किले पहुंचे। सिया ने केतन को धक्का दिया। लेकिन पेड़ का सहारा मिलने से केतन बच गया। उसने पूछा- धक्का क्यों दिया? सिया ने कहा, ‘एक सांप था, तुम्हें उससे बचाने के लिए धक्का दिया।’ केतन ने घर आकर सबको बताया कि सिया की वजह से उसकी जान बच गई। 18 जून: तीसरी कोशिश में बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर धक्का दिया: 19 जून को सिया का जन्मदिन मनाने के लिए केतन ने महाबलेश्वर में एक लग्जरी रिजॉर्ट बुक किया था। सिया ने उससे पहले केतन को प्री-वेडिंग फोटोशूट की बात कहकर लोहगढ़ किले पर जाने के लिए मना लिया। इस बार पीछे-पीछे चेतन भी था। एक जगह जब केतन पहाड़ियों की तरफ देख रहा था, तभी दोनों ने उसे पीछे से धक्का दे दिया। ——————- ये खबर भी पढ़ें… सिया के सामने केतन मर्डर का सीन रीक्रिएट किया गया: पुलिस लोहगढ़ किला ले गई, दीवार से डमी गिराकर देखा पुणे मर्डर केस में पुलिस ने रविवार को केतन को लोहगढ़ किले से गिराने का सीन रीक्रिएट किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए पुलिस सुबह 6.30 बजे आरोपी सिया गोयल को लोहगढ़ किले लेकर पहुंची। टीम करीब 2.30 घंटे किले पर रही। पूरी खबर पढ़ें…

11 साल तक स्कूल नहीं आने वाली टीचर की पोस्टिंग:डायरेक्टरेट ने मांगी 3 दिन में रिपोर्ट, DEO पर कार्रवाई की तैयारी

बीकानेर में करीब 11 साल तक स्कूल से अनुपस्थित रहने के बाद महिला शिक्षक को दोबारा पोस्टिंग देने के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी किशनदान चारण की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पहले से जांच के दायरे में चल रहे इस मामले में अब प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं। निदेशालय ने मामले को गंभीर मानते हुए बीकानेर संभाग के संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा) से तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट और दोषी पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव मांगा है। शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोप शिकायतकर्ता संजीव यादव निवासी उदयरामसर ने आरोप लगाया है कि संबंधित अध्यापिका पिछले 11 वर्षों से बिना किसी सूचना के अनुपस्थित थी। नियमों के अनुसार इतने लंबे समय तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई या सेवामुक्ति की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। आरोप- कार्रवाई के बजाय शहर के स्कूल में कर दी पोस्टिंग शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई करने के बजाय जिला शिक्षा अधिकारी किशनदान चारण ने संबंधित अध्यापिका को राहत देते हुए बीकानेर शहर के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में पदस्थापित कर दिया। इस फैसले को लेकर पहले भी शिकायतें हुई थीं और जांच चल रही है। शासन सचिवालय के निर्देश पर फिर शुरू हुई जांच मामले की शिकायत शासन सचिवालय, जयपुर तक पहुंचने के बाद प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने संज्ञान लिया। इसके बाद बीकानेर संभाग के संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा) को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने के निर्देश जारी किए गए। इससे पहले भी इस मामले में जांच हो चुकी है, लेकिन अब नए सिरे से कार्रवाई शुरू की गई है। 3 दिन में रिपोर्ट और कार्रवाई का प्रस्ताव मांगा प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण कर तीन दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट भेजी जाए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव भी रिपोर्ट के साथ भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

पठानकोट में बची देहरादून के 55 श्रद्धालुओं की जान, VIDEO:अंडरपास के पानी में फंसी टूरिस्ट बस; देहरादून से जा रहे थे वैष्णो देवी

जालंधर-जम्मू नेश्नल हाईवे-44 पर सुजानपुर में बीती देर रात एक बड़ा हादसा टल गया। बता दें, पठानकोट में भारी बारिश के चलते जम्मू नेशनल हाईवे पर बने रेलवे अंडरपास (पुल नंबर-3) के नीचे अचानक जलभराव हो गया। इसी दौरान देहरादून से माता वैष्णो देवी की ओर जा रही श्रद्धालुओं से भरी एक टूरिस्ट बस इस गहरे पानी के बीचों-बीच जाकर फंस गई। बस में 13 बच्चों सहित 55 यात्री सवार थे, जो पानी बढ़ता देख बेहद घबरा गए। घटना की सूचना मिलते ही सड़क सुरक्षा फोर्स (SSF), पुलिस और क्षेत्र के युवाओं ने तत्परता दिखाते हुए एक संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और कड़ी मशक्कत के बाद सभी 55 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। महिला श्रद्धालु ऋितिका ने बताया कि वे देहरादून से माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में बस अचानक पानी में फंस गई। उन्होंने कहा कि पुलिस और एसएसएफ के जवानों ने देवदूत बनकर उनकी जान बचाई और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। रात 1:53 बजे मिली सूचना; महज 6 मिनट में पहुंची एसएसएफ
बस में फंसे यात्रियों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत कंट्रोल रूम से संपर्क साधा और रात ठीक 1:53 बजे बस के पानी में फंसने की जानकारी दी। सूचना मिलते ही सड़क सुरक्षा फोर्स की टीम ने मुस्तैदी दिखाई और महज 6 मिनट के भीतर, रात 1:59 बजे मौके पर पहुंच गई। इसके साथ ही सुजानपुर थाना प्रभारी अरुण शर्मा भी पुलिस बल के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। एसएसएफ की टीम में तैनात सिपाही रमनदीप सिंह, आदेश कुमार, लखबीर चंद और रोहित कुमार ने स्थानीय लोगों व युवाओं के साथ मिलकर तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और एक-एक कर सभी घबराए हुए यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। अंधेरा और तेज बारिश बनी मुसीबत; ड्राइवर नहीं भांप पाया पानी की गहराई
थाना प्रभारी अरुण शर्मा ने बताया कि इस पुल के नीचे अक्सर बरसात के दिनों में पानी भर जाता है। इसी वजह से नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा ट्रैफिक को ‘वन-साइड’किया गया था। रात के घने अंधेरे और मूसलाधार बारिश के कारण देहरादून से आ रही टूरिस्ट बस के ड्राइवर विनीत गुप्ता को पुल के नीचे जमा पानी की गहराई का बिल्कुल अंदाजा नहीं लगा। जैसे ही उसने बस को पुल के नीचे से पार निकालने का प्रयास किया, पानी अत्यधिक होने की वजह से इंजन में पानी घुस गया और बस बीच में ही बंद हो गई। हाइड्रा मशीन से निकाली बस
अधिकारियों के मुताबिक यात्रियों के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद, मौके पर हाइड्रा मशीन बुलाई गई और पानी में फंसी टूरिस्ट बस को भी खींचकर बाहर निकाला गया। आधी रात को संकट में फंसी जिंदगियों के लिए देवदूत बनकर पहुंची सड़क सुरक्षा फोर्स और सुजानपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई की यात्रियों ने दिल से सराहना की। प्रशासन ने भी अपील की है कि बरसाती मौसम में अंडरपास या पुलों के नीचे पानी भरा होने पर वाहन चालक सावधानी बरतें।

राजस्थान में सिरसा रोडवेज बस रोक कार सवारों का हंगामा:बूथ पर खड़ी करते वक्त पीछे से टकराई गाड़ी, ड्राइवर-कंडक्टर में बहस; रोड जाम

सिरसा रोडवेज की एक बस को राजस्थान में रोक लिया गया और लोग रोडवेज कर्मियों से उलझ गए। कुछ युवकों ने मिलकर रोड जाम कर लिया और बस को आगे जाने से रोक दिया। उन सभी ने रोडवेज ड्राइवर व कंडक्टर से काफी देर तक बहस की और करीब आधा घंटा तक ये हंगामा चला। कार सवार युवकों ने क्षतिग्रस्त कार ठीक करवाने को पैसे मांगे। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें युवक कर्मियों से बहस करते दिख रहे हैं। जानकारी के अनुसार, मामला राजस्थान के रावतसर बस स्टैंड का है। जहां रोडवेज ड्राइवर बस को बूथ पर लगा रहा था। उसी वक्त एक कार आई और बूथ पर लगाते समय बस के पीछे से गुजरने लगी। कार बस से टकराने के बाद क्षतिग्रस्त हो गई। इसी बात पर कार सवार युवक गुस्सा गए। जैसे ही ड्राइवर बस लेकर बस स्टैंड से बाहर आया, तो युवकों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर बस को वहीं रूकवा लिया और अन्य साथी व लोग बुला लिए। पुलिस ने रोड जाम खुलवाया इस दौरान कई देर तक रोड जमा रहा और हंगामा बढ़ता देख वहां से गुजर रही दूसरी रोडवेज बस को भी ड्राइवर ने रोक लिया। रोडवेज कर्मचारी मामला सुलझाने को वहां पर पहुंचे, परंतु कोई मानने को तैयार नहीं था। कुछ देर बाद राजस्थान पुलिस मौके पर पहुंची और उन्होंने भी प्रदर्शनकारी लोगों के समर्थन में उनसे कहा कि बस और ड्राइवर का नंबर नोट कर लो। अगर शिकायत करनी है तो थाने में दे देना, उस पर कार्रवाई करेंगे। सीसीटीवी में पता चल जाएगा, बस को न रोके। आखिर पुलिस ने रोड जाम खुलवाया और दोनों पक्ष शांत कराए। बस में सवार यात्री भी परेशान रहे झगड़ा बढ़ते देख बस स्टैंड के बाहर लोगों की भीड़ जुट गई। इस पर लोगों ने कार सवार युवकों को समझाने का प्रयास किया और ये भी कहा कि आपकी गलती है। बावजूद इसके वे नहीं माने। दोनों युवक बार-बार गाड़ी के काम का खर्च मांग रहे थे। रोडवेज ड्राइवर व कंडक्टर ने भी उनकी गलती बताई, पर वे विश्वास नहीं कर रहे थे। इसके चलते बस में सवार यात्री भी परेशान रहे। दरअसल, कार सवार युवक बोले, बस का कंडक्टर वहां पर नहीं था और ड्राइवर ही अकेले बस को बूथ पर बैक साइड से लगा रहा था। अगर कंडक्टर होता तो ये हादसा नहीं होता। वहीं, रोडवेज कर्मचारी बोले, बस स्टैंड के अंदर बूथ पर ये गाड़ी भिड़ी थी। उस समय कुछ नहीं कहा। अब पीछे से गाड़ी लेकर आए और आगे लगाकर बस को रूकवा लिया। ड्राइवर को नीचे उतारने की कोशिश प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बस के ड्राइवर को पकड़कर नीचे उतारने की कोशिश की और उनके बीच काफी तू-तड़ाक हुई। इससे विवाद बढ़ सकता था। विभाग के अनुसार, यह रोडवेज बस डबवाली बस स्टैंड से राजस्थान के पोकरण के लिएरावतसर रूट पर चलती है। डबवाली से इसकी दूरी करीब 6-7 से घंटे की है। यह बस रूटीन में पोकरण चलती है। मंगलवार से ये बस पोकरण गई हुई थी। वहां से आते समय ये मामला हुआ है। यहां आने पर बुधवार को इस बारे में कर्मियों ने यूनियन को भी अवगत करवा दिया है। यूनियन ने इसकी निंदा की है। कार लेकर बस स्टैंड में घुसे युवक- यूनियन मामले में रोडवेज यूनियन से जिला प्रधान पृथ्वी सिंह का कहना है कि यह झगड़ा रावतसर में रोडवेज कर्मियों के साथ हुआ है। कुछ युवक कार लेकर बस स्टैंड के अंदर घुसे हुए थे। जब बस बूथ पर लगाई जा रही थी तो युवक भी कार लेकर बस के पीछे से और बूथ के आगे से निकालने की कोशिश करने लगे। तभी बस से कार टकरा गई और आगे का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गई। ड्राइवर का कोई दोष नहीं है। युवक कार को बस स्टैंड के अंदर लेकर गया हुआ था, जोकि बस स्टैंड के अंदर कार ले जाने पर रोक है। इसके बावजूद वे कार अदंर लेकर गए हुए थे। उनको किसी ने अदंर जाने से नहीं रोका। इस बारे में ड्राइवर व कंडक्टर से बातचीत कर अगला कदम उठाया जाएगा। लिखित शिकायत पर करेंगे कार्रवाई- जीएम रोडवेज जीएम कुलदीप जांगड़ा ने बताया कि इस तरह कई बार झगड़े होते हैं। रोडवेज बस आमजन को सुविधा देने के लिए हैं और लोग बेवजह इस तरह की हरकतें करते हैं। इस बारे में रोडवेज बस कर्मियों से बातचीत की जाएगी। यदि उनकी ओर से कोई लिखित शिकायत दी जाएगी, तो उस पर कार्रवाई करेंगे। राजस्थान के स्टाफ से भी बात करेंगे।

दौसा में एक्सप्रेस-वे पर बस-ट्रेलर अग्निकांड,DNA से मृतकों की पहचान:6 शव परिजनों को सौंपे, दो बॉडी पहले सुपुर्द कर दी थी, 8 लोगों की हुई थी मौत

दौसा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर स्लीपर बस और ट्रेलर की भिड़ंत के बाद हुए भीषण अग्निकांड में जिंदा जलकर जान गंवाने वाले छह लोगों के शवों की डीएनए रिपोर्ट आने के बाद गुरुवार शाम पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिए गए। हादसे में कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। इनमें छह यात्री आग में जिंदा जल गए थे, जबकि दो अन्य की सिर में चोट लगने से मौत हुई थी। इन मृतकों के लिए भेजे गए थे DNA सैंपल हादसे में भूमि भौर निवासी बजरंग नगर (इंदौर), प्रियंका पांडे निवासी बड़वाह, दीपक तंवर निवासी बड़वाह (जिला खरगौन, मध्य प्रदेश) और निर्मला गुप्ता निवासी अन्नपूर्णा नगर (इंदौर) के शवों के डीएनए सैंपल बुधवार शाम जांच के लिए भेजे गए थे। जयपुर से रिपोर्ट आने के बाद शवों की पहचान हुई और पोस्टमॉर्टम के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया। ड्राइवर और एक अन्य मृतक की रिपोर्ट भी आई देवेंद्र सिंह निवासी रामपुरा कलां, सिद्धगंज (मध्य प्रदेश) तथा बस चालक रामअवतार के डीएनए सैंपल गुरुवार सुबह जांच के लिए भेजे गए थे। रिपोर्ट मिलने के बाद दोनों शवों का भी पोस्टमॉर्टम कराया गया और परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। दो शव पहले ही परिजनों को सौंप दिए गए थे सिर में चोट लगने से जान गंवाने वाले बस परिचालक कुलदीप का पोस्टमॉर्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया गया। वहीं धर्मसिंह निवासी भूतेड़ी, जिला झाबुआ (मध्य प्रदेश) का शव बुधवार शाम को ही परिजनों के हवाले कर दिया गया था। 22 घायलों को भी पहुंचाया गया था अस्पताल मंगलवार देर रात हुए इस भीषण हादसे के बाद पुलिस ने आठों मृतकों के शव और 22 घायलों को एंबुलेंस के जरिए दौसा जिला अस्पताल पहुंचाया था। आग में शव बुरी तरह झुलस जाने से उनकी पहचान संभव नहीं हो सकी थी, जिसके बाद डीएनए जांच कराई गई। रिपोर्ट आने के बाद सभी शवों की शिनाख्त कर उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया। — ये खबर भी पढ़ें… राजस्थान में बस-ट्रेलर भिड़े, 8 मौतें:DNA टेस्ट से पहचान होगी, आग में फंसे थे 40 पैसेंजर्स; दावा- डिक्की में सिगरेट बॉक्स भरे थे दौसा बस-अग्निकांड: ‘मेरी आंखों के सामने पत्नी जल गई साहब’:किसी ने मदद नहीं की; पैसेंजर बोलीं- मालूम नहीं पति कहां गिरे, लोग सीटों में फंसे थे बस में लोगों का मांस तक जल गया, हड्डियां बची:पैर पकड़कर पति को ढूंढने की गुहार लगाती रही पत्नी; देखिए दौसा बस अग्निकांड की तस्वीरें

पेंशन के लिए तपती सड़क पर हथेलियां टिकाकर पहुंचीं माताजी:जलदाय मंत्री ने 'अच्छे-अच्छों को पानी पिलाया'; किसान से 'आतंकी' जैसा सुलूक

नमस्कार, जालोर में पेंशन के लिए 82 साल की माताजी को अग्नि परीक्षा देनी पड़ी। टोंक में शिक्षा मंत्री ने जलदाय मंत्री की तारीफ अनोखे शब्दों में की और बाड़मेर में किसान को उसी की जमीन से बाहर निकलने की हुक्म दे दिया गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. पेंशन के लिए ‘अग्नि परीक्षा’ मशहूर शायर जिगर मुरादाबादी जी ने जो बात इश्क के लिए कही थी, वही बात सरकारी स्कीम से जोड़कर भी कही जा सकती है। जैसे- ये पेंशन नहीं आसां, बस इतना समझ लीजे, एक आग का रस्ता है और रेंग कर जाना है। बात मजाक की नहीं, जालोर की कोकू देवी पर बीती है। उनकी उम्र 80 पार। आंखों से दिखता नहीं। हालत ये कि खड़े होकर चल नहीं सकतीं। बैठकर रेंग सकती हैं। 5 साल पहले उनकी 1000 रुपए की पेंशन बंद हो गई। फिंगर प्रिंट नहीं मिल रहे थे। जमीन पर हाथ रखकर सरकने की स्थिति के कारण रेखाएं घिस गई। कई बार गुहार लगाई, लेकिन काम नहीं बना। थक-हार कर कोकू देवी भीषण गर्मी में दोपहर को तपती सड़क पर हथेलियां टिकाकर रेंगती हुईं कलेक्ट्रेट पहुंच गईं। प्रेमचंद वाली ‘बूढी काकी’ भी यह दृश्य देखती तो उनकी भूख मर जाती। कलेक्टर साहब को पता चला तो चेंबर से बाहर आए और खड़े रहकर कोकू देवी का काम कराया। 2. जलदाय मंत्री ने अच्छे-अच्छों को पानी पिलाया जलदाय मंत्री कन्हैया लाल ने दो महीने पहले जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार पर बड़ी बात कही थी। उन्होंने कहा था- हालात इतने नाजुक हैं कि भ्रष्ट अफसरों की जांच करने लगे तो मेरा पूरा विभाग ही खाली हो जाएगा। जलदाय मंत्री होने के नाते उन्हें पता है कि कौन कितने पानी में है। उन्होंने भ्रष्ट अफसरों को सख्त चेतावनी भी दी। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर जी ने जलदाय मंत्री की तारीफ कुछ अलग अंदाज में की। टोंक में समाज की एक सभा के दौरान दिलावर बोले- ये कन्हैया लाल कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है। इन्होंने अच्छे अच्छों को पानी पिलाया है। चाहे कोई दादा हो, परदादा हो। या कोई नेता हो। सबको अच्छा पानी पिलाया है। इनके सामने कोई टिकता नहीं। अब मंत्रीजी का तो काम ही है पानी पिलाना। पानी पिलाते रहना चाहिए और अपनी ही आस्तीनों को झाड़ते रहना चाहिए। इससे इर्द-गिर्द भ्रष्टाचार नहीं पनपता। 3. चलते-चलते.. पूर्व मंत्रीजी ने एक सभा में कहा था- एक दिन आएगा जब कलेक्टर का बेटा कहेगा कि बड़ा होकर मैं किसान बनूंगा। 100 प्रतिशत सही बात है। संभव है कि आने वाले समय में कलेक्टर का बेटा ही किसान बने। मंत्री का बेटा किसान बने। विधायक का बेटा किसान बने। अफसर का बेटा किसान बने। किसान बनकर सब्सिडी लेने में आसानी रहती है। बड़े प्रोजेक्ट मिल जाते हैं। खेत पैसा उगाने के कारखाने बन जाते हैं। सरकारी स्कीम में जल्दी नंबर आ जाता है। और भी हजार फायदे हैं। किसान का बेटा अगर किसान बनेगा तो उसे यूरिया के कट्‌टे के लिए लाठी खानी पड़ेगी। कृषि कनेक्शन के लिए चप्पल घिसनी पड़ेगी। फसल के मुआवजे के लिए गिरदावरों-पटवारियों को घूस खिलानी पड़ेगी। बच्चों को पढ़ाने के लिए कर्ज लेना पड़ेगा। बाड़मेर के बीसूकलां गांव में सीताराम की ढाणी है। किसान गोरख दान अपने खेत पर पहुंचा तो खाकी वर्दी पहने सुरक्षाकर्मियों ने दूर से ही उसे हड़काया। बोले- अरे ओ, बाहर निकलो यहां से। कई सुरक्षाकर्मी गोरख दान को घेरने पहुंच गए। जैसे वह बॉर्डर लांघ कर घुस आया हो। प्राइवेट कंपनी गोरख दान के खेत को काम में ले रही थी लेकिन मुआवजा नहीं दे रही थी। गोरख दान खेत का मालिक होने के बावजूद हाथ जोड़कर बोला- साहब, मैं आपसे यही निवेदन करने आया हूं कि आप मेरे खेत में काम मत करवाओ। इनपुट सहयोग- भरत सांखला (जालोर), महावीर बैरवा (टोंक), विजय कुमार (बाड़मेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

देश का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल है विक्रम-1, जल्द लॉन्चिंग संभव:स्काईरूट फाउंडर पवन बोले- अंतरिक्ष तक तेजी से पहुंचने वाला AI-6जी, स्पेस इकोनॉमी में आगे होगा

भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ अब लॉन्च के लिए तैयार है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने इसकी पहली टेस्ट फ्लाइट के लिए 12 जुलाई से 4 अगस्त तक की लॉन्च विंडो घोषित की है। यह भारत की प्राइवेट स्पेस क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा है। इसकी सफलता से छोटे उपग्रहों को जरूरत के मुताबिक और ज्यादा तेजी से अंतरिक्ष में भेजा जा सकेगा। इससे खेती, संचार, नेविगेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसी सेवाएं और मजबूत होंगी। अगर विक्रम-1 सफल रहता है तो भारत निजी क्षेत्र के दम पर ऑर्बिट तक पहुंचने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा। विक्रम-1 की लॉन्चिंग से पहले स्काईरूट एयरोस्पेस के फाउंडर पवन कुमार चंदाना ने भास्कर से बातचीत की। उन्हीं के शब्दों में पढ़ें पूरा इंटरव्यू… लेकिन उससे पहले देखें विक्रम-1 की झलक… स्पेस से पूरी हो रहीं रोजमर्रा की जरूरतें अगर आप फोन पर मैप्स चलाते हैं या डिजिटल पेमेंट करते हैं, तो उसके पीछे भी अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट काम कर रहे होते हैं। मैप्स आपकी सटीक लोकेशन सैटेलाइट से मिले नेविगेशन सिग्नल के आधार पर बताते हैं, जबकि यूपीआई जैसी सेवाएं इंटरनेट और संचार नेटवर्क पर चलती हैं, जिन्हें दूरदराज के इलाकों में सैटेलाइट भी मजबूती देते हैं। सैटेलाइट बढ़ेंगे तो हर क्षेत्र में सुविधाएं भी बढ़ेंगी अंतरिक्ष में बढ़ते सैटेलाइट नेटवर्क के साथ लॉन्च की मांग भी कई गुना बढ़ेगी। अभी भारत में ज्यादातर सैटेलाइट इसरो लॉन्च करता है। लेकिन आने वाले सालों में सैटेलाइट की संख्या तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में इसरो चंद्रयान, गगनयान और अंतरिक्ष स्टेशन जैसे बड़े मिशनों पर ध्यान देगा। स्काईरूट जैसी निजी कंपनियां छोटे सैटेलाइट को बार-बार और जरूरत के मुताबिक कक्षा में पहुंचाने का काम करेंगी। इससे मौसम, इंटरनेट, खेती, आपदा प्रबंधन और संचार जैसी सेवाएं पहले से ज्यादा तेज और सटीक हो सकेंगी। स्पेसएक्स से अलग, ‘कैब मॉडल’ पर स्काईरूट स्काईरूट की तुलना स्पेसएक्स से होती है, लेकिन दोनों का मॉडल अलग है। इसे ट्रेन और कैब से समझ सकते हैं। ट्रेन तय समय पर तय स्टेशन तक ही ले जाती है। लेकिन अगर आपको किसी खास समय पर किसी खास जगह पहुंचना हो, तो कैब बेहतर विकल्प है। स्पेस में भी यही फर्क है। स्पेसएक्स का रॉकेट ट्रेन की तरह तय कक्षा में सैटेलाइट छोड़ता है, जबकि विक्रम-1 ‘कैब’ की तरह जरूरत के मुताबिक मनचाही कक्षा में सैटेलाइट पहुंचा सकेगा। अब ऐसे ‘ऑन-डिमांड लॉन्च’ की मांग तेजी से बढ़ेगी। भारत स्पेसएक्स वाले मोड पर, अब तेजी से सीखने की जरूरत भारत आज उसी दौर में है, जहां करीब 15-20 साल पहले अमेरिका था। उस समय स्पेसएक्स और रॉकेट लैब जैसी कंपनियों ने लगातार परीक्षण कर अपनी लॉन्च क्षमता विकसित की थी। रॉकेट साइंस में सबसे बड़ा सबक है कि तकनीक सिर्फ जमीन पर नहीं, उड़ान के दौरान सीखने से विकसित होती है। इसलिए बार-बार टेस्ट, तेजी से सुधार और फिर लॉन्च का सिलसिला ही आगे बढ़ने का रास्ता है। इसरो बड़े मिशन करेगा, निजी कंपनियां बढ़ाएंगी लॉन्च की रफ्तार भारत का स्पेस मॉडल अब बदल रहा है। इसरो ने छह दशक में जो तकनीकी आधार तैयार किया है, अब वही निजी कंपनियों को आगे बढ़ने में मदद कर रहा है। आने वाले समय में इसरो चंद्रयान, गगनयान और अंतरिक्ष स्टेशन जैसे बड़े मिशनों पर ज्यादा ध्यान देगा, जबकि स्काईरूट जैसी निजी कंपनियां लगातार और कम लागत में सैटेलाइट लॉन्च करने का काम संभालेंगी। यही मॉडल दुनिया के विकसित स्पेस देशों में अपनाया जाता है। समस्या सैटेलाइट बनाने की नहीं, समय पर लॉन्च कराने की है दुनिया में छोटे सैटेलाइट तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें अंतरिक्ष तक पहुंचाने की क्षमता उतनी तेजी से नहीं बढ़ी। यही वजह है कि कई ऑपरेटरों को लॉन्च के लिए महीनों, कई बार सालों तक इंतजार करना पड़ता है। स्काईरूट का फोकस इसी समस्या को हल करना है, ताकि जरूरत पड़ने पर तय समय में लॉन्च उपलब्ध कराया जा सके। आने वाले समय में स्पेस सामान्य सुविधा बन जाएगा अगले 10-15 साल में अंतरिक्ष लोगों को किसी बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सामान्य सुविधा के रूप में दिखाई देगा। समुद्र में मछुआरों की कनेक्टिविटी, बाढ़ की समय रहते चेतावनी, बेहतर मौसम पूर्वानुमान, एआई के लिए डेटा और गांवों तक इंटरनेट (6जी) जैसी कई सेवाएं सामान्य होंगी, लेकिन इनके पीछे अंतरिक्ष में काम कर रहे सैटेलाइट होंगे। बदलती स्पेस टेक्नोलॉजी का नया चेहरा हैं छोटे सैटेलाइट स्काईरूट और फाउंडर से जुड़ी खास बातें… स्काईरूट एयरोस्पेस प्राइवेट स्पेस कंपनी है, जो छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए रॉकेट बना रही है। यह भारत की पहली निजी कंपनी है जिसने सफलतापूर्वक एक रॉकेट अंतरिक्ष में लॉन्च किया। स्काईरूट की स्थापना 2018 में हैदराबाद में हुई थी। फाउंडर्स पवन कुमार चंदाना और नगा भारत डाका हैं। दोनों पहले ISRO में वैज्ञानिक और इंजीनियर रह चुके हैं। 18 नवंबर 2022 को स्काईरूट ने विक्रम-S का सफल प्रक्षेपण किया। मिशन का नाम ‘प्रारंभ’ था। यह भारत के प्राइवेट स्पेस जोन के इतिहास का पहला सफल रॉकेट लॉन्च था। कंपनी विक्रम-1 के अलावा विक्रम-2 और विक्रम-3 ऑर्बिटल बना रही है। इनका नाम विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। भास्कर नॉलेज… दुनिया में प्राइवेट स्पेस क्षेत्र की शुरुआत को नई ऊंचाई स्पेस X जैसी कंपनियों ने दी। भारत में 2020 के बाद अंतरिक्ष क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खोला गया, जिसके बाद स्काईरूट, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सेल और बेलास्ट्रिक्स एयरोस्पेस जैसे स्टार्टअप तेजी से उभरे। इससे भारत ग्लोबल न्यू स्पेस इकोनॉमी में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

चित्तौड़गढ़ और बांसवाड़ा में भारी बारिश, सड़कें जाम, गाड़ियां फंसीं:डूंगरपुर में बिजली गिरने से बच्चे की मौत, बीसलपुर बांध में 2CM बढ़ा पानी

लेट आया मानसून राजस्थान में जमकर बरस रहा। राजधानी जयपुर में गुरुवार रात तेज बारिश हुई। चित्तौड़गढ़ जिले 12 घंटे में ढाई इंच तक पानी बरसा है। जिले के निंबाहेड़ा और कपासन में भारी बारिश से हालत बिगड़ गए हैं। बांसवाड़ा शहर में शुक्रवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश के बाद कई इलाकों में पानी भर गया है। टोंक में भी बारिश हुई। यहां चांदसेन रेन गेज सेंटर पर 24 घंटे में 64 MM बारिश दर्ज की गई। बीसलपुर बांध के कैचमेंट एरिया में बारिश से बांध में 24 घंटे में 2 सेंटीमीटर पानी बढ़ा है। सुबह 6 बजे तक बांध का जलस्तर 313.57 आरएल मीटर पहुंच गया। मौसम विभाग ने कोटा, बारां और झालावाड़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, जैसलमेर को छोड़कर पूरे राजस्थान में यलो अलर्ट है। राज्य में अगले दो सप्ताह बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण दिन के तापमान में 4 डिग्री तक की गिरावट हुई है। इससे पहले गुरुवार को 16 से ज्यादा जिलों में 2 इंच तक बरसात हुई। तेज बारिश के बीच डूंगरपुर में बिजली गिरने से दो नाबालिग भाई झुलस गए। इनमें एक भाई की इलाज के दौरान मौत हो गई। बारिश से जुड़े बड़े अपडेट्स शहरी इलाकों में पानी भरा, रास्ते जाम, बिजली गिरी: तेज बारिश के कारण चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसमंद के शहर इलाकों में सड़कों पर पानी जमा हो गया है। इन जिलों के कई गांव भी पानी जमा होने से लोगों को परेशानी हो रही है। चित्तौड़गढ़ की कपासन और निंबाहेड़ा तहसील में रातभर हुई बारिश के कारण कई रास्ते जाम हो गए हैं। गाड़ियां फंसने से लोग परेशान हो रहे हैं। वहीं, डूंगरपुर में गुरुवार शाम को बिजली गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई। पहले ही दिन 2 इंच से ज्यादा बरसात: गुरुवार को एंट्री करने के बाद मानसून का असर जोरदार रहा। पहले दिन ही अलवर, झुंझुनूं, सीकर, उदयपुर, भरतपुर, करौली, अजमेर के कई इलाकों में दो इंच से ज्यादा बरसात हुई है। झालावाड़, बारां में तेज बारिश हुई। वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा टोंक, जयपुर और अलवर से होकर गुजर रही है तथा अगले चार दिन में यह पूरे राजस्थान को कवर कर लेगा। लगातार बारिश से तापमान में 4 डिग्री तक गिरावट हुई है। मानसून की एंट्री तेज बारिश के साथ: दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार पूर्वी राजस्थान के भरतपुर, कोटा, बारां समेत 13 जिलों के कुछ हिस्सों तक पहुंचा है। पिछले 13 वर्षों में यह तीसरी बार है, जब मानसून ने जुलाई में प्रदेश में प्रवेश किया है। इससे पहले वर्ष 2014 और 2019 में भी मानसून ने जुलाई में प्रदेश में प्रवेश किया था। हालांकि, जुलाई में एंट्री के बावजूद वर्ष 2014 में 518.6 मिमी और वर्ष 2019 में 747.24 मिमी बारिश दर्ज हुई थी। अब देखिए- राजस्थान में बारिश की PHOTOS… मानसून की पल-पल की अपडेट के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

पंजाब में 3 बच्चों की हत्या कर मां का सुसाइड:पहले खाने में जहर दिया, फिर गला घोंटा, उसके बाद खुद पंखे से लटक गई

पंजाब के मानसा में मां ने 3 बच्चों की हत्या कर खुद भी सुसाइड कर लिया। उसने पहले 2 बेटियों और एक बेटे को जहर दिया। वह जिंदा न बच सकें, इसके लिए उनका गला भी घोट दिया। इसके बाद खुद भी घर के कमरे में लगे फंदे से लटक गई। बच्चों के पिता की पहले मौत हो चुकी है। जिस वक्त उसने यह वारदात की, वह घर पर अकेली थी। उसकी सास रिश्तेदारी में गई हुई थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत वहां पहुंची। जिसके बाद चारों डेडबॉडी पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भिजवाईं। पुलिस इसकी वजह की जांच के लिए परिजनों के बयान दर्ज कर रही है। किराए के कमरे में रहती, पति की मौत हो चुकी
पुलिस के मुताबिक संदीप कौर (35) मानसा के वार्ड नंबर 3 में गुरुद्वारे के पास किराए के कमरे में रहती थी। उसके 3 बच्चे कालो (12), मोटो (7) और विश्वास (2) थे। 4 साल पहले बीमारी की वजह से संदीप के पति निक्का सिंह की मौत हो गई थी। इसके बाद घर में वह सास और बच्चों के साथ रहती थी। पति की मौत के बाद मजदूरी करने लगी
पुलिस के मुताबिक पति की मौत के बाद 3 बच्चों और सास की जिम्मेदारी संदीप कौर पर आ गई। वह मजदूरी करने लगी लेकिन उससे इतनी कमाई नहीं होती थी कि पूरे परिवार का पेट पाल सके। तीनों बच्चे बड़े हो रहे थे और उनकी पढ़ाई के खर्च का भी इंतजाम करना था। मजदूरी से यह जिम्मेदारी पूरी नहीं हो पा रही थी। सास रिश्तेदारी में गई, कुंडी लगा बच्चों को खाने में जहर दिया
पुलिस के मुताबिक गुरूवार दोपहर संदीप अपने तीनों बच्चों के साथ घर पर थी। उसकी सास कहीं रिश्तेदारी में थी। संदीप कौर ने घर का दरवाजा बंद कर अंदर से कुंडी लगा दी। इसके बाद पहले तीनों बच्चों को खाने में जहर दे दिया। जब जहर का असर हुआ तो बच्चे नींद आने की बात कहकर बिस्तर पर लेट गए। बच्चे बेसुध हुए तो एक-एक कर गला घोंट दिया
जहर के असर से बच्चे बेसुध हो गए। संदीप कौर ने खौफनाक तैयारी कर रखी थी। उसने खुद भी सुसाइड करना था लेकिन उसे डर था कि अगर तीनों में से कोई भी बच्चा जिंदा बच गया तो उसकी देखभाल कौन करेगा। इसलिए उसने पहले तीनों बच्चों का एक-एक कर गला घोंट दिया। जिससे तीनों ने दम तोड़ दिया। बच्चों की मौत के बाद खुद भी फंदा लगाया
बच्चों की मौत कन्फर्म होने के बाद संदीप कौर ने चुन्नी से फंदा बनाया। इसे कमरे में लगे पंखे पर टांग दिया। इसके बाद उसे गले में फंसाकर उस पर लटक गई। जिससे उसकी भी मौत हो गई। गुरूवार दोपहर में पूरी वारदात हुई लेकिन आसपड़ोस में किसी को इसके बारे में पता नहीं चला। रिश्तेदार घर पहुंचा तो कुंडी बंद मिली
इसके बाद गुरूवार शाम को एक रिश्तेदार उनके घर आया। वह घर पहुंचा तो दरवाजे को अंदर से कुंडी लगी हुई थी। उसने काफी देर तक कुंडी खटखटाई लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद उसने आसपास के लोगों को इकट्‌ठा किया। जिसके बाद दरवाजे को धक्का देकर खोला गया। बिस्तर पर बच्चों की लाश, मां फंदे पर लटक रही थी
जब रिश्तेदार और आसपड़ोस के लोग अंदर गए तो वहां तीनों बच्चों की लाश बिस्तर पर पड़ी थी। वहीं संदीप कौर की लाश फंदे से लटक रही थी। उन्होंने तुरंत बच्चों की सांस चेक की तो तीनों की मौत हो चुकी थी। इसके बाद संदीप कौर को तुरंत फंदे से नीचे उतारा लेकिन तब तक वह भी दम तोड़ चुकी थी। पुलिस बोली- बच्चों के गले पर निशान मिले
पुलिस के मुताबिक मृतक बच्चों के गले पर निशान मिले हैं। इससे ऐसा लग रहा है कि उसने पहले बच्चों को कोई जहरीली चीज खिलाकर बेहोश किया। इसके बाद तीनों का गला घोंट दिया। थाना सिटी-2 के जांच अधिकारी कुलवंत सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में आर्थिक तंगी की बात सामने आ रही है, जिससे संदीप कौर मानसिक रूप से परेशान हो गई थी। आर्थिक तंगी से मानसिक परेशान रहती थी
थाना प्रभारी कुलवंत सिंह ने ये भी कहा कि रिश्तेदारों का कहना है कि संदीप कौर के लिए दिन-रात मजदूरी करके भी घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। 3 बच्चों के साथ बूढ़ी सास की जिम्मेदारी भी उसी पर थी। इसी वजह से वह काफी परेशान रहती थी।

सांवली थी, इसलिए 10 लड़कों ने रिजेक्ट कर दिया:गोरी-पतली लड़की क्यों चाहते हैं लड़के, खूबसूरती क्या है; मुजफ्फरपुर में लड़की ने किया सुसाइड

मुजफ्फरपुर की 22 साल की अंशु ने सिर्फ इसलिए फंदे पर लटककर जान दे दी, क्योंकि वह सांवली थी। लड़के वाले बार-बार देखने के बाद उससे शादी करने से मना कर दे रहे थे। खूबसूरती को काले और गोरे से जोड़कर क्यों देखा जाता है, सुंदरता आखिर है क्या, कैसे बदलते रहते हैं खूबसूरती के पैमाने; जानेंगे बूझे की नाही में… सवाल-1ः मुजफ्फरपुर में लड़की के सुसाइड करने का पूरा मामला क्या है? जवाबः मुजफ्फरपुर के गायघाट थाना क्षेत्र के मकरंदपुर गांव की रहने वाली 22 साल की अंशु कुमारी बीते तीन साल से अंदर ही अंदर परेशान थी। परिवार वाले उसकी शादी के लिए लगातार कोशिशें कर रहे थे। पिछले तीन सालों में 10 से अधिक लड़के वाले अंशु को देखने आए, लेकिन हर बार बात बनते-बनते बिगड़ जाती या रिश्ता तय ही नहीं हो पाता था। परिवार वालों का कहना है कि लगातार टूटते रिश्तों ने अंशु के मन में यह गहरा विश्वास पैदा कर दिया कि उसके सांवले रंग की वजह से उसे बार-बार ठुकराया जा रहा है। समाज के इस नजरिए ने उसके भीतर एक गहरी हीन भावना पैदा कर दी थी, जिसे वह चुपचाप सह रही थी। परिजनों के मुताबिक, 1 जुलाई को एक बार फिर अंशु को देखने के लिए एक नया परिवार आने वाला था। शायद बार-बार रिजेक्ट होने का डर और समाज के सामने फिर से खुद को साबित करने का दबाव उस पर हावी हो चुका था। अंशु मानसिक रूप से इतनी परेशान थी कि उसने 30 जून की रात का खाना भी नहीं खाया और चुपचाप अपने कमरे में सोने चली गई। सुबह यानी 1 जुलाई को काफी देर तक अंशु के कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। परिजनों ने खिड़की से झांककर देखा तो अंशु का शव पंखे से लटका मिला। फिलहाल, पुलिस इस संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले को दर्ज कर गहराई से जांच कर रही है। सवाल-2ः भारत में खूबसूरती को काले और गोरे से जोड़कर क्यों देखा जाता है? जवाब: हिंदू परंपरा में पुरुषों की सुंदरता का प्रतीक भगवान ‘कृष्ण’ को माना जाता है। वो श्याम वर्ण के थे। वाल्मीकि रामायण के मुताबिक, भगवान राम का रंग भी सांवला था और वो बेहद सुंदर माने जाते हैं। मध्यकाल में भारत आए कई यात्रियों ने भी इस बात को लिखा है। 1292 में भारत आए इतालवी व्यापारी मार्को पोलो ने अपनी किताब ‘द ट्रैवल्स’ में लिखा है- ‘यहां सबसे काले इंसान को सबसे ज्यादा सम्मान मिलता है। ये लोग अपने देवताओं और मूर्तियों को काला और शैतानों को बर्फ की तरह सफेद दिखाते हैं।’ 16वीं शताब्दी के बाद मुगल शासन के दौरान भारत के लोगों में गोरे रंग की ओर आकर्षण बढ़ा। मुगल शासक और उनके दरबार में सेंट्रल एशिया और फारसी मूल के लोग थे, जिनकी त्वचा अपेक्षाकृत गोरी थी। उनकी कला, साहित्य और जीवनशैली ने गोरेपन को शाही और अमीर वर्ग से जोड़ा। यह प्रभाव धीरे-धीरे समाज में फैलने लगा। भारत में ब्रिटिश हुकूमत आई तो उसने काले-गोरे में भयंकर विभाजन शुरू कर दिया। क्योंकि सभी अंग्रेज गोरे थे, इसलिए उन्होंने गोरे रंग को बेहतर बताया और काले रंग को गुलामी, अज्ञानता और हीनता से जोड़ दिया। उनकी देखा-देखी भारत के उच्च वर्ग ने भी इस विचार को अपना लिया, क्योंकि वो अंग्रेजी शासकों के करीब रहना चाहते थे। इस दौरान गोरे रंग को लेकर एक मानसिकता बनी, जो आज भी कायम है। आजादी के बाद यह धारणा और मजबूत हुई। खासकर फिल्म उद्योग और विज्ञापनों के जरिए। 1978 में ‘फेयर एंड लवली’ जैसी क्रीम की शुरुआत ने गोरेपन को बड़ा बिजनेस बना दिया। बॉलीवुड ने भी गोरे कलाकारों को खूबसूरत बताया, जिससे आम लोगों में यह चाहत बढ़ी। ‘द इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इंडियन साइकोलॉजी’ ने दिल्ली-NCR में 18 से 30 साल के 100 युवाओं पर स्टडी की। इस रिसर्च में पता चला कि लोग अपने रंग के हिसाब से ही सुंदरता की पसंद तय करते हैं। हालांकि, इसमें गोरे रंग की ओर झुकाव ज्यादा दिखा। सवाल-3: सुंदरता आखिर होती क्या है? जवाबः कहा जाता है कि ‘Beauty lies in the eyes of the beholder’ यानी सुंदरता देखने वाले की आंखों में होती है। सुंदरता की कोई एक परिभाषा नहीं है। दुनिया में सुंदरता से जुड़ी अलग-अलग थ्योरीज हैं। इसमें एक थ्योरी रिप्रोडक्शन यानी प्रजनन की बायोलॉजी से जुड़ी है। विकासवादी जीवविज्ञानी मानते हैं कि कोई महिला या पुरुष बच्चे पैदा करने के लिए प्राकृतिक रूप से जितना सक्षम और उपयोगी है, वो उतनी ही आकर्षक और सुंदर लग सकती है। इसी वजह से महिलाओं में सुंदरता के लिए सुडौल स्तन, लंबे बाल, सुराही जैसी गर्दन, चेहरे की सिमेट्री, बड़ा पेल्विक जैसे पैरामीटर इवॉल्व हुए हैं। इसी तरह पुरुषों में लंबा कद, गठीला शरीर, भारी आवाज, घने काले बाल और चेहरे की सिमेट्री जैसे पैमाने इवॉल्व हुए। इस थ्योरी के मुताबिक… सवाल-4: समय के साथ खूबसूरती के पैमाने कैसे बदलते रहते हैं? जवाब: खूबसूरती के कुछ पैमाने और मानक लगातार बदलते रहते हैं। यह बदलाव समाज के सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों के साथ होता रहा है… सवाल-5ः क्या गोरा दिखना ही असल खूबसूरती है। अगर नहीं, तो इस पर बात क्यों नहीं होती? जबावः मगध महिला कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर निधि सिंह का कहना है, ‘हमें ब्यूटी की परिभाषा को बदल देने की जरूरत है। हमें ब्यूटी यानी खूबसूरती की विविधता को समझना चाहिए। उसको उभारना चाहिए। भारत में खूबसूरती का पैमाना कभी भी किसी का कलर नहीं रहा है। यह वेस्टर्न कल्चर का दिया हुआ है। आज इसको बढ़ावा देने में सबसे बड़ा योगदान ब्यूटी प्रोडक्ट्स का है। वे खूबसूरती के झूठे स्टैंडर्ड सेट करते हैं, ताकि उनका प्रोडक्ट आसानी से बिक सके। इसके अलावा इसे बढ़ाने में सोशल मीडिया का योगदान भी है।’ निधि सिंह का मानना है कि गोरी त्वचा को खूबसूरत समझने की सोच इतनी मजबूत और विकसित हो गई है कि इस पर बात या बहस होती ही नहीं। अगर कोई जन्म से गोरा है तो वो पैदाइशी खूबसूरत है, लेकिन अगर कोई जन्म से काला होता है तो उसे खूबसूरत बोलने की बजाय गोरा करने के नुस्खों पर काम शुरू कर दिया जाता है।