युवाओं में बढ़ रहा लिवर फेलियर का खतरा:10 सालों में बदला हेपेटाइटिस का पैटर्न; डॉक्टरों के बीच चर्चा का विषय बनी

जयपुर में देशभर के अलग-अलग शहरों से पेट रोग (गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी) से जुड़े विशेषज्ञ डॉक्टर्स का सेमिनार हुआ। इसमें हेपेटाइटिस के बदलते पैटर्न और उससे यूथ में होने वाली बीमारियों पर मुख्य चर्चा हुई। डॉक्टरों ने बताया- पिछले 10-15 सालों में लिवर की गंभीर बीमारी सामने आने के पीछे कारण हेपेटाइटिस का बदलता पैटर्न है। इंडियन सोसायटी ऑफ गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी के राजस्थान चैप्टर की ओर से आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने बताया- बच्चों में कॉमन माने जाने वाला हेपेटाइटिस-ए अब वयस्क (यूथ) को अपनी चपेट में ले रहा है और इसके रिजल्ट भी गंभीर हैं। यूथ में हेपेटाइटिस-ए होने पर उसे गंभीर पीलिया या लिवर फेलियर तक हो रहा है। हेपेटाइटिस-ई का पैटर्न भी बदला है। कॉन्फ्रेंस के ऑर्गनाइजिंग कमेटी में शामिल डॉ. रमेश रूप राय और डॉ. संदीप निझावन ने बताया- इस कॉन्फ्रेंस में देशभर से 150 से अधिक एक्सपर्ट्स शामिल हुए, जो पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं के इलाज पर नवीनतम तकनीकों और गाइडलाइंस के बारे में जानकारियां साझा कर रहे हैं। डॉ. मुकेश कल्ला और डॉ. अनुराग गोविल ने बताया कि पहले दिन के वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों ने गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और लीवर रोगों के उपचार में हो रहे नवीनतम बदलावों पर चर्चा की। इसीलिए यूथ में गंभीर हो गया हेपेटाइटिस-ए
डॉ. आदर्श चौधरी ने बताया- हेपेटाइटिस-ए गंदे पानी के एक्सपोजर से होता है। पिछले कुछ समय में बच्चों में यह एक्सपोजर बहुत कम हो गया है। बच्चों में जब यह बीमारी नहीं हुई और बड़े होने पर अब उन्हें किसी कारण से हेपेटाइटिस-ए होता है तो बच्चों की अपेक्षा उनमें यह बीमारी ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। जितनी अधिक उम्र में हेपेटाइटिस-ए के केस देखने को मिल रहे हैं, लिवर फेलियर होने की संभावना उतनी अधिक है। वहीं हेपेटाइटिस-ई का पैटर्न बदला है। पहले ये सीमित क्षेत्र में ब्लास्ट की तरह होता था। अब लगातार इसके केस आ रहे हैं। प्रेगनेंट महिलाओं को इससे ज्यादा खतरा हो गया है। अंतिम तीन महीने में तो लिवर फेलियर से उनकी जान जाने की संभावना काफी बढ़ गई है। एसिस एक्स-1 से मालूम होगा पेट में ब्लीडिंग का सटीक स्रोत
अब तक पेट में होने वाली ब्लीडिंग के सोर्स का पता लगाना बेहद मुश्किल होता था। पेट में खून कहां से रिस रहा है यह पता नहीं लग पाता था। ऐसे में कई बार पेट में खून जमा हो जाता। इस परेशानी का सही डायग्नोस करने के लिए अब नई तकनीक का इजाद किया है। एसिस एक्स-1 एंडोस्कोपी सिस्टम नाम की इस मशीन से पेप्टिक अल्सर या खून की उलटी के मरीजों की परेशानी को पहचाना जा सकता है और उसका इलाज किया जा सकता है। इसमें एम्बरलाइट सेंसर होता है, यह पेट में जाकर उस हिस्से को पहचान लेता है जहां हिमोग्लोबिन स्तर काफी ज्यादा है। ब्लीडिंग का सही सोर्स की पहचान कर उसकी क्लिपिंग की जा सकती है और ब्लीडिंग को रोका जा सकता है।

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