ढूंढाड़ी कलम की विरासत से रूबरू होंगे युवा:जयपुर में तीन दिवसीय निःशुल्क पारंपरिक चित्रकला कार्यशाला की 24 जुलाई से होगी शुरुआत
भारतीय पारंपरिक चित्रकला की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और विलुप्त होती कला शैलियों के संरक्षण के उद्देश्य से जयपुर में तीन दिवसीय भारतीय पारंपरिक चित्रकला कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। वैशाली नगर की नेमी सागर कॉलोनी स्थित रंगरीत स्टूडियो में 24 से 26 जुलाई तक आयोजित होने वाली यह कार्यशाला पूरी तरह निःशुल्क होगी। कार्यशाला प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जाएगी। इसमें प्रतिभागियों को राजस्थान की पारंपरिक ढूंढाड़ी कलम (जयपुर शैली) के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण का लघुचित्र बनाना सिखाया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को पारंपरिक चित्रकला की बारीकियों से रूबरू कराया जाएगा, जिसमें रेखांकन, प्राकृतिक एवं पारंपरिक रंगों का प्रयोग, सूक्ष्म ब्रश तकनीक, अलंकरण और जयपुर शैली की विशिष्ट चित्रांकन विधियों का व्यावहारिक अभ्यास शामिल रहेगा। कार्यशाला का नेतृत्व राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ चित्रकार एवं कला गुरु रामू रामदेव करेंगे। उनके साथ उनकी कला परंपरा की सातवीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे युवा कलाकार राधिका रामदेव, यामिनी रामदेव और प्रतीक रामदेव भी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देंगे। आयोजकों के अनुसार यह कार्यशाला केवल चित्रकला सीखने का माध्यम नहीं होगी, बल्कि भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा और सात पीढ़ियों से चली आ रही पारिवारिक कला विरासत को समझने और अनुभव करने का भी दुर्लभ अवसर प्रदान करेगी। विलुप्त होती कला को मिलेगा नया मंच आयोजकों का कहना है कि आधुनिक समय में पारंपरिक भारतीय चित्रकलाएं धीरे-धीरे सीमित होती जा रही हैं। ऐसे में इस तरह की कार्यशालाओं का उद्देश्य युवाओं को अपनी सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत से जोड़ना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन प्राचीन कला शैलियों को सीखकर उन्हें आगे बढ़ा सकें। ढूंढाड़ी कलम, जिसे जयपुर शैली के नाम से भी जाना जाता है, अपनी सूक्ष्म रेखाओं, आकर्षक रंग संयोजन और धार्मिक व सांस्कृतिक विषयों के जीवंत चित्रण के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध रही है। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को इस पारंपरिक शैली की तकनीकी बारीकियां सीखने का अवसर मिलेगा।

