राजस्थान का हॉस्पिटल… डॉक्टर नहीं, रेडियोलॉजिस्ट इलाज करता है:गहलोत से कहा- जब से आप गए हैं..; 'खास मुखौटा' लगाकर आया चोर

नमस्कार, मोदीजी का मुखौटा लगाए हुए एक चोर CCTV में कैद हो गया। कविराज ने अशोक गहलोतजी को कविता सुनाई, जिसका उनवान यानी शीर्षक था- जब से आए गए हैं। अजमेर और नावां के अस्पतालों के हालात देखकर लगता है कि ढर्रा सुधरा नहीं। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. चेहरे पर कपड़ा ही बांध लेते चोर महोदय आपको चेहरा ही छुपाना था तो मुंह पर कपड़ा बांध जाते। वह भी मंजूर नहीं तो मार्केट में एक से बढ़कर एक मास्क आए हुए हैं। उदयपुर वाले चोरों से सबक लेते। उन्होंने लंगूर का मुखौटा लगाकर चोरी की कोशिश की थी। लेकिन यह क्या? आपने मोदीजी का मुखौटा लगाकर ताला तोड़ने की कोशिश की। कोशिश ही नहीं की बल्कि कामयाब हो गए। 35 मोबाइल चुरा ले गए। आपने चोरी को राजनीतिक रंग में रंग दिया। अब मार्केट में चोरी से ज्यादा आपके मुखौटे की चर्चा है। कुछ लोग कह रहे हैं कि आप उनके जबरा फैन हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह विरोधियों की साजिश है। हकीकत क्या है, यह तो तब पता चलेगा, जब आप पकड़े जाओगे और पुलिस डंडा फटकार पर पूछेगी- चोरी करने के लिए यही एक मुखौटा रह गया था? 2. पूर्व CM को सुनाई कविता कविराज ने मंच पर ही पर्चा खोल लिया। इस पर्चे से कविता लीक हुई। कविराज पूर्व मुखियाजी (अशोक गहलोत) की मौजूदगी से उत्साहित थे। कविता का उनवान था- जब से आए गए हैं। कविराज ने सुनाया- RGHS बंद है..जब से आए गए हैं। जनसेवा महज कविता का एक छंद है..जब से आप गए हैं। मुफ्त इलाज हो गया नानी-दादी की कहानी। प्रसूताओं को इंजेक्शन में लगाया जा रहा पानी। जब से आप गए हैं, जब से आप गए हैं। पूर्व मुखियाजी मंत्रमुग्ध होकर अपनी ‘विदाई’ की तुकबंदी सुनते रहे। कविराज का फोकस व्यवस्था की ओर था। लेकिन बारम्बार वे ‘गए हैं-गए हैं’ कहकर पूर्व मुखियाजी का दर्द कुरेदते रहे। वैसे पूर्व मुखियाजी जब मुखिया थे, तब कुछ लोग ‘मानेसर’ भी चले गए थे। मुखियाजी भी तब से आज तक कविता की तरह वे लाइनें दोहराते हैं- जब से आप गए हैं…जब से आप गए हैं। 3. चलते-चलते तो भैया कुल मिलाकर बात ये है कि हेल्थ विभाग की हालत पतली चल रही है। बीकानेर में तो विरोधियों ने कलेक्ट्रेट घेर लिया। टीकाराम जूली ने कहा- ये क्या व्यवस्था है? मजाक बना रखा है? अब सरकार शेखावाटी के लिए पानी लाने का रास्ता बना लाई तो उन्हें भी घेरने के लिए कुछ चाहिए। बाकी हेल्थ डिपार्टमेंट का यकीनन किसी की नजर लग गई है। बात अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल की है। यहां इमारत नई बन गई, लेकिन नर्सिंग स्टाफ का ढर्रा वही पुराना है। अटेंडेंट से एक महिला नर्सिंगकर्मी अबे-तबे करते हुए नजर आई। वह नंबर लगाकर बैठा था। लेकिन चौथा नंबर काफी देर से चौथे पर ही रुका था। कृपा कहां अटकी है, वह समझ नहीं पाया। समझने के लिए उसने स्टाफ से शिकायत की तो वह गरजी- तेरे जैसे यहां 315 आते हैं। बदतमीजी से बात करती महिला कर्मचारी ने अटेंडेंट से कहा- तमीज से रहो। ये हालात तो नई इमारत के थे। अब नए जिले की सुनो। डीडवाना-कुचामन जिले में नावां के सरकारी हॉस्पिटल की बात है। पत्रकार साहब पीक आवर्स में हॉस्पिटल पहुंच गए। वहां देखा कि मरीज डॉक्टर के इंतजार में बैठे हैं। फलां डॉक्टर साहब की कुर्सी- खाली। फलां डॉक्टर महोदय- गायब। फलां डागडर जी- नदारद। पत्रकारजी उस दिशा में बढ़े, जहां CMO बैठा करते हैं। CMO साहब की कुर्सी भी खाली। हालांकि उन्हीं की टेबल पर बराबर की कुर्सी पर एक डॉक्टर साहब मरीजों को चेक कर रहे थे। दवा की पर्ची लिख रहे हैं। उन्हें देख पत्रकार साहब भौचक्के रह गए, क्योंकि मरीज देख रहे साहब डॉक्टर नहीं, बल्कि रेडियोलॉजिस्ट थे। इनपुट सहयोग- मनीष जैन (भीलवाड़ा), प्रकाश तंवर (नागौर), भरत मूलचंदानी (अजमेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

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