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सीकर में रोडवेजकर्मियों का कॉकरोच पार्टी काे समर्थन:केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग; सोनम वांगचुक को उठाने का विरोध

सीकर के रोडवेज बस डिपो में आज वामपंथी संगठन सीटू के बैनर तले रोडवेजकर्मियों ने दिल्ली में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को समर्थन दिया है। सीटू के ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी श्योदान राम ने कहा कि पूरे देशभर के स्टूडेंट्स आज पेपर लीक और बेरोजगारी की समस्या से पीड़ित हैं। नीट पेपर लीक के बाद दर्जनों बच्चों ने सुसाइड कर लिया, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। इससे पहले सीटू के बैनर तले रोडवेज कर्मचारी बस डिपो के पोर्च में इकट्‌ठे हुए और नारेबाजी की। सीटू के नेताओं ने कहा कि दिल्ली में जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण चल रहे धरने से सोनम वांगचुक को बर्बरतापूर्वक उठाना बेहद कायराना हरकत है। सोनम वांगचुक कोई आम आदमी नहीं देश के युवाओं के आइडल हैं, ऐसे में उनके साथ विनम्रता से पेश आना चाहिए था। सीटू के श्योदान राम ने कहा कि सीकर जैसी शिक्षानगरी को पेपर लीक के लिए शर्मिंदा होना पड़ा। गांवों के बच्चे शहर में सफलता के सपने लेकर पढ़ने आते हैं। पेपर लीक जैसी घटनाओं से बच्चों का मनोबल टूटता है। केंद्र सरकार को मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर पेपर लीक के खिलाफ कड़ा संदेश देना चाहिए और भविष्य के लिए छात्रों का हौसला बढ़ाना चाहिए।

अलवर में मृत लोगों के नाम बनाए फर्जी पट्टे:पूर्व सरपंच बोलीं- मेरी मुहर चोरी कर पूर्व उप-सरपंच ने फंसाया, उप सरपंच बोले- दबाव बना रहे

अलवर जिले में देसूला गांव में करीब 100 करोड़ रुपए की गोचर (चारागाह) भूमि पर फर्जी पट्टे बनाकर कुछ लोगों ने करोड़ों रुपए का लोन उठा लिया। इसके अलावा मर चुके व्यक्ति के नाम भी पट्टे जारी कर दिए गए। इन पट्टों का पंचायत स्तर पर कोई रेकॉर्ड नहीं है, लेकिन सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में पट्टे रजिस्टर्ड करा लिए गए। इसके बाद उप-सरपंच देव कृष्ण मल्होत्रा ने 54 फर्जी पट्टे जारी करने की शिकायत सरकार के स्तर पर की। इसके बाद जांच में पट्टे फर्जी पाए गए, लेकिन सही कार्रवाई नहीं करने पर हाल ही 17 जुलाई को जिला परिषद सीईओ ने वीडीओ को सस्पेंड कर दिया था। वहीं अब पूर्व सरपंच सावित्री देवी और उसके पोते दीपक ने सोमवार को मीडिया के सामने आकर उप-सरपंच देव कृष्ण मल्होत्रा पर ही फर्जी पट्टे जारी करने के आरोप लगाए। कहा कि उप-सरपंच ने सरपंच की मुहर चुराकर पट्‌टे बनाए हैं और इसके लिए लोगों से रुपए भी लिए हैं। पूर्व सरपंच के पोते दीपक ने कहा- मुझसे भी उप-सरपंच ने 70 हजार रुपए लिए थे। मेरी मुहर चोरी हुई, फोरेंसिक जांच कराओ इधर, 81 वर्षीय निवर्तमान महिला सरपंच सावित्री देवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद को बेकसूर बताया। उन्होंने कहा- प्रशासक बनने के बाद मेरी फर्जी मुहर और फर्जी हस्ताक्षरों का गलत इस्तेमाल कर ये पट्टे जारी किए गए। उपसरपंच बलदेव मल्होत्रा पिछले 5-6 साल से मुझे प्रताड़ित कर रहे हैं। जेल भिजवाने की धमकी देकर मेरे पोते से 70 हजार रुपए भी बलदेव ने ऐंठ लिए। इस पूरे मामले में मेरे हस्ताक्षरों की फोरेंसिक (वैज्ञानिक) जांच कराई जाए, सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी। मृतक के नाम जारी किए पट्टे साल 2002 में दिवंगत हो चुके व्यक्ति के नाम पर साल 2025 में फर्जी पट्टा जारी कर दिया गया। कई पट्टों में पिता को पुत्र और पुत्र को पिता बना दिया गया था। पट्टा संख्या-18 समेत कई दस्तावेज कॉमन जानकारी के साथ अलग-अलग लोगों को जारी कर दिए गए। अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच जारी 54 विवादित पट्टों में से 7 पट्टे निवर्तमान सरपंच सावित्री देवी के बेटों, पोतों और पुत्रवधू के नाम पाए गए हैं। देसूला के बूटा सिंह के नाम से एक पट्टा बनाया गया, जबकि उन्हें मरे हुए 25 साल हो गए हैं। बूटा सिंह पूर्व उप सरपंच बलदेव मल्होत्रा के पिता हैं। यही नहीं एक-दूसरे पट्टे में बूटा सिंह को बलदेव का पुत्र बना दिया। सरपंच सावित्र देवी ने कहा- यह सब फर्जीवाड़ा उप सरपंच बलदेव ने किया है। वहीं बलदेव ने कहा- मैं करता तो गलत नाम-पते कैसे दर्ज होते। कोई रिकॉर्ड नहीं साल 2020 के बाद पंचायत रिकॉर्ड में इन पट्टों से संबंधित कोई फाइल ही मौजूद नहीं है। बिना आवेदन और बिना फीस जमा किए ही बैकडेट में पट्टे बनाकर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से रजिस्ट्रियां भी करवा ली गईं। शिकायत वापस लेने का दबाव, फंसाने के लिए मेरे नाम भी पट्टा बनाया- उपसरपंच मामले का खुलासा करने वाले पूर्व उपसरपंच बलदेव कृष्ण मल्होत्रा ने सीएमओ के बाद अब जिला कलेक्टर को नया परिवाद सौंपा है। मल्होत्रा का आरोप है कि मुझ पर शिकायत वापस लेने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है। मुझे और मेरे परिवार को झूठे मुकदमे में फंसाने के लिए मेरे नाम पर भी फर्जी पट्टे तैयार कर दिए गए।

यह खबर भी पढ़ें… 50 करोड़ की सरकारी जमीन पर भू-माफिया के 150-फर्जी पट्टे:पूर्व VDO के फेक साइन, 6 पट्‌टों पर सरपंच के परिवार का नाम; लोन भी उठाया अलवर जिले में करीब 50 करोड़ रुपए कीमत की सरकारी और गोचर भूमि को भू-माफिया ने हड़प लिया है। यह मामला अलवर के निकट रामगढ़ रोड पर देसूला का है। इस जमीन पर अलवर UIT (अरबन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट) की नई आवासीय योजना आनी है। इससे पहले ही भू-माफिया ने इस जमीन पर 150 फर्जी पट्टे बनाकर बैंक से करोड़ों रुपए का लोन उठा लिया। (पूरी खबर पढ़ें)

जैसलमेर में सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन:पैदल मार्च निकालकर शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका; राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

लद्दाख के जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में सोमवार को जैसलमेर की सड़कों पर भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। हनुमान चौराहा स्थित गांधी दर्शन के सामने बड़ी संख्या में छात्र और आम जनता इकट्ठा हुए। सभी लोगों ने वांगचुक की मांगों को जायज बताते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पैदल मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने देश की शिक्षा व्यवस्था में चल रही गड़बड़ियों को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला भी जलाया। इसके बाद प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला कलेक्टर के जरिए राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। सर्व समाज व स्टूडेंट ने किया प्रदर्शन इस प्रदर्शन में युवाओं और समाज के हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। गांधी दर्शन से शुरू हुआ यह पैदल मार्च जिला कलेक्ट्रेट दफ्तर पर जाकर खत्म हुआ। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सोनम वांगचुक जिन मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, वे पूरे देश के लिए बेहद जरूरी हैं। प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। सोनम वांगचुक का किया समर्थन यह पूरा आंदोलन बेहद शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हुआ। कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन कर रहे युवाओं और नागरिकों ने अपनी सहमति जताने के लिए ज्ञापन पर अपने हस्ताक्षर भी किए। प्रदर्शन में शामिल एक आंदोलनकारी हाकमदान ने कहा कि लद्दाख के पर्यावरण और देश के संवैधानिक अधिकारों को बचाने की यह लड़ाई अब सिर्फ लद्दाख तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश की जनता सोनम वांगचुक के साथ खड़ी है। जब तक उनकी जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, देश के अलग-अलग हिस्सों में इसी तरह आवाज उठती रहेगी।

श्रीगंगानगर अस्पताल से फरार चोरी का आरोपी गिरफ्तार:गोलूवाला पुलिस ने कैंचिया से दबोचा, खिड़की की जाली तोड़कर भागा था

श्रीगंगानगर जिला अस्पताल के कैदी वार्ड से फरार हुए चोरी के एक आरोपी को गोलूवाला थाना पुलिस ने कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी रविवार को अस्पताल से खिड़की की जाली तोड़कर भागा था। पुलिस के अनुसार आरोपी गौरव को रविवार को तबीयत खराब होने पर श्रीगंगानगर जिला अस्पताल के कैदी वार्ड में भर्ती कराया गया था। शाम करीब साढ़े पांच बजे उसने शौचालय जाने का बहाना बनाया और मौके का फायदा उठाकर खिड़की की जाली तोड़कर फरार हो गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान पुरानी आबादी, श्रीगंगानगर निवासी गौरव के रूप में हुई है। उसे चोरी के एक मामले में जवाहरनगर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गौरव पर 11 जुलाई को एसएसबी रोड स्थित एक मकान से सोने-चांदी के जेवर चोरी करने का आरोप है। कार्रवाई के बाद उसे शनिवार को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था। फरार होने के बाद पुलिस ने जिलेभर में उसकी तलाश शुरू की और आसपास के थानों को भी सूचना दी गई। गोलूवाला पुलिस को आरोपी के कैंचियां क्षेत्र में होने की जानकारी मिली। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने उसे कैंचियां स्थित एक मेडिकल स्टोर से दवा लेते हुए दबोच लिया। गोलूवाला थाना प्रभारी रजनदीप कौर ने बताया कि आरोपी को चोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया था और न्यायिक अभिरक्षा के दौरान अस्पताल ले जाया गया था, जहां से वह फरार हो गया था। आरोपी को श्रीगंगानगर पुलिस को सौंप दिया गया है। संबंधित थाने की पुलिस आगे की पूछताछ करेगी।

आईजी की जनसुनवाई में प्रार्थी बोला- मेरी 6-भैंसें ढूंढवा दीजिए:फार्म हाउस से 2 जर्मन शेपर्ड डॉग भी चोरी, चार महीने से तलाश रहा हूं

पाली जिले में पशु चोरी का एक गंभीर मामला सामने आया है। जनसुनवाई के दौरान जवड़िया गांव निवासी विक्रम पटेल ने आईजी सत्येन्द्र सिंह के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए बताया कि करीब चार महीने पहले उसकी 6 भैंसें चोरी हो गई थीं, जिनकी बाजार कीमत लगभग 6 लाख रुपए है। थाने में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक पुलिस कोई सुराग नहीं लगा सकी है। पीड़ित ने आईजी को दिए ज्ञापन में बताया कि वह शिव नगर, मंडिया रोड (पाली) का निवासी है और जवड़िया गांव के पास उसके फार्म हाउस पर पशुपालन का कार्य करता है। घटना के समय उसकी भैंसें खुले में चर रही थीं, तभी चोर उन्हें चोरी कर ले गए। उसने अपने स्तर पर भी काफी तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। विक्रम ने गांव के ही एक युवक पर संदेह भी जताया है। रखवाली करने वाले दो जर्मन शेपर्ड डॉग भी चोरी
विक्रम पटेल ने आईजी को बताया कि फार्म हाउस की सुरक्षा के लिए उसने दो जर्मन शेपर्ड डॉग पाल रखे थे। करीब डेढ़ महीने पहले चोर दोनों डॉग भी चोरी कर ले गए। इस मामले में भी शिकायत के बावजूद अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। आईजी ने दिए कार्रवाई के निर्देश
जनसुनवाई के दौरान आईजी सत्येन्द्र सिंह ने पीड़ित की शिकायत सुनकर संबंधित अधिकारियों को मामले में उचित कार्रवाई करने और जांच में तेजी लाने के निर्देश देने का आश्वासन दिया। पीड़ित ने पुलिस से जल्द से जल्द चोरी गई भैंसों और डॉग का पता लगाने की मांग की है।

डिप्टी CM, रोजगार मंत्री के जिले में सबसे ज्यादा बेरोजगारी:MP में 17 लाख बेरोजगार, OBC सबसे ज्यादा, सरकार का दावा-240 दिन में 8 लाख घटे

मध्य प्रदेश में 30 जून 2026 तक रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 17 लाख 71 हजार 132 रह गई है। सरकार का दावा है कि महज 6 महीने में 8 लाख बेरोजगार कम हो गए, जबकि इसी सरकार ने 2025 में 25 लाख 95 हजार बेरोजगार होने की जानकारी दी थी। अचानक 6 महीने में 8 लाख बेरोजगार कम बताने पर सवाल उठ रहे हैं। दैनिक भास्कर ने सरकार के विधानसभा में दिए दोनों जवाबों और रोजगार पोर्टल के आंकड़ों की पड़ताल की। इसमें रीवा, सागर, जबलपुर, सतना और छिंदवाड़ा सबसे ज्यादा पंजीकृत बेरोजगार वाले जिले मिले। रीवा सबसे टॉप पर है, जबकि पांढुर्णा में सबसे कम पंजीकृत बेरोजगार हैं। सबसे ज्यादा पंजीकृत बेरोजगार वाले जिलों में डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल का रीवा, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और राकेश सिंह का सागर भी शामिल है। वहीं, रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल के जिले राजगढ़ में भी 50 हजार से ज्यादा पंजीकृत बेरोजगार हैं। वर्गवार आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक ओबीसी वर्ग के 10 लाख से ज्यादा, सामान्य वर्ग के 6.51 लाख, एससी के 4.70 लाख और एसटी के 4.18 लाख युवा रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत थे। हालांकि सरकार ने यह नहीं बताया कि 6 महीने में किस वर्ग के कितने पंजीकृत बेरोजगार कम हुए। इस रिपोर्ट में विस्तार से पढ़िए कहां कितने बेरोजगार ? कांग्रेस विधायक के सवाल पर सरकार का जवाब दरअसल, कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने विधानसभा में राज्य सरकार से पूछा था कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने और ‘हर हाथ को काम’ उपलब्ध कराने के लिए क्या योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने निजी कंपनियों में रोजगार उपलब्ध कराने की योजना, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और विभागीय सचिव स्तर पर बनी रोजगार योजनाओं की पिछले 5 साल की स्थिति भी पूछी। इसके अलावा उन्होंने एमपी रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं की संख्या, रोजगार मेलों पर हुए खर्च और उनके जरिए स्थायी रोजगार पाने वाले युवाओं का ब्योरा भी मांगा। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग ने दिया यह जवाब इसके जवाब में कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने बताया कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जॉब फेयर योजना संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि बैठकों में लिए गए निर्णयों के आधार पर कार्रवाई की जाती है। मंत्री ने विधानसभा को बताया कि 30 जून 2026 की स्थिति में एमपी रोजगार पोर्टल पर 17 लाख 71 हजार 132 आकांक्षी युवा (पंजीकृत बेरोजगार) दर्ज हैं। 6 महीने में 25.95 लाख से 17.71 लाख पर पहुंचा आंकड़ा सरकार के दो विधानसभा जवाबों की तुलना करने पर पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या में बड़ा अंतर सामने आया है। फरवरी 2026 के बजट सत्र में विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल के लिखित जवाब में इसी विभाग के राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने 31 दिसंबर 2025 तक रोजगार पोर्टल पर 25 लाख 95 हजार 680 पंजीकृत बेरोजगार होने की जानकारी दी थी। अब 30 जून 2026 की स्थिति में यही संख्या 17 लाख 71 हजार 132 बताई गई है। यानी छह महीने में 8 लाख 24 हजार 548 पंजीकृत बेरोजगार कम दर्ज किए गए हैं। अब ग्राफिक्स के जरिए जानिए कहां कितने बेरोजगार ……………………………………….. ये खबर भी पढ़ें… UCC विधेयक सदन में पेश, चर्चा कल मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 पेश कर दिया। स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इस पर कल चर्चा कराई जाएगी। इसके बाद आगे की कार्यवाही होगी। उधर, विधानसभा का घेराव करने निकले ओबीसी महासभा के सदस्यों को भोपाल पुलिस ने रंगमहल चौराहे पर रोक लिया। पढ़ें पूरी खबर…

चीन में डिलीवरी ब्वॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान मिला:खाना पहुंचाते हुई लिखी कई कविताएं, ग्राहक की फटकार के बाद लेखक बने

चीन में फूड डिलीवरी का काम करने वाले 56 वर्षीय वांग जिबिंग को देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक लू शुन साहित्य पुरस्कार मिला है। उनकी कविता संग्रह ‘लो फ्लाइट’ को यह सम्मान दिया गया है। इस किताब की कई कविताएं उन्होंने फूड डिलीवरी के बीच मिले खाली समय में कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लिखी थीं। वांग 2019 के आसपास फूड डिलीवरी राइडर बने थे। उनकी कविताएं सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए। उनकी नई किताब ‘लो फ्लाइट’ डिलीवरी राइडर्स की रोजमर्रा की परेशानियों, संघर्ष और जीवन पर आधारित है। यह किताब उन्होंने 2024 में प्रकाशित की थी। इसके लिए उन्होंने करीब 200 डिलीवरी राइडर्स से बातचीत की और उनके अनुभवों को अपनी कविताओं में दर्ज किया। उनकी एक कविता की पंक्ति है- किसने कहा कि पंख फैलाने का मतलब सिर्फ ऊंची उड़ान भरना है? नीचे उड़ना भी उड़ान ही है। कस्टमर से मिली फटकार के बाद लिखी कविता- वायरल हुई वांग का जन्म चीन के जियांगसू प्रांत में हुआ था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें 14 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने निर्माण मजदूर, कबाड़ बीनने वाले और सड़क किनारे सामान बेचने जैसे कई छोटे-मोटे काम किए। बाद में वे फूड डिलीवरी राइडर बन गए। हालांकि, पढ़ने-लिखने का उनका शौक कभी खत्म नहीं हुआ। 2022 में उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। यह कविता 2019 की एक घटना से प्रेरित थी। उस समय वह जियांगसू के कुनशान शहर में फूड डिलीवरी का काम कर रहे थे। एक ग्राहक ने गलत पता दर्ज कर दिया था। सही घर ढूंढने के लिए वांग को तीन रिहायशी इमारतों में भटकना पड़ा और 18 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। जब वह आखिरकार खाना लेकर पहुंचे तो ग्राहक ने देर होने पर उन्हें डांट दिया। घर लौटते समय उन्होंने अपनी नाराजगी और दर्द को शब्दों में ढाल दिया। इसी से उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ जन्मी। यह कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। यही से उनके साहित्यिक सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 2023 में उनका पहला कविता संग्रह ‘मैन इन ए हरी: पोएम्स ऑफ ए फूड डिलीवरी राइडर’ प्रकाशित हुआ। इस किताब की एक कविता की एक पंक्ति है- सड़क पर दौड़ता हर आम इंसान अपने हाथ में एक छोटी-सी रोशनी लिए चलता है। यही रोशनी पहले हमें रास्ता दिखाती है और फिर धीरे-धीरे पूरी दुनिया को रोशन कर देती है। 6 हजार से ज्यादा कविताएं लिख चुके वांग अब तक वह 6 हजार से अधिक कविताएं लिख चुके हैं। उनकी कई रचनाएं प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वांग कहते हैं, “लोग शायद मुझे याद न रखें, लेकिन उन्हें तेज रफ्तार से गुजरता एक फूड डिलीवरी राइडर जरूर याद रहता है।” यही सोच उन्हें लाखों डिलीवरी कर्मियों की जिंदगी पर किताब लिखने की प्रेरणा बनी। वांग का कहना है, मैं चाहता हूं कि इस किताब को पढ़ने के बाद लोग डिलीवरी राइडर्स के प्रति ज्यादा समझदारी और धैर्य दिखाएं, ताकि उनके साथ होने वाले विवाद कम हों। पुरस्कार मिलने के बाद भी नौकरी नहीं छोड़ेंगे पुरस्कार जीतने के बाद वांग ने सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स से कहा कि पुरस्कार मिलने की खबर आने तक वे बेहद घबराए हुए थे। उन्होंने बताया कि मीडिया का बढ़ता ध्यान उनके लिए मानसिक दबाव भी लेकर आया। उन्होंने साफ किया कि पुरस्कार मिलने के बावजूद वे अपनी नौकरी नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि वे 60 साल की उम्र तक फूड डिलीवरी का काम जारी रखना चाहते हैं। वांग ने कहा, अब मुझे जीवनयापन के लिए इस नौकरी की जरूरत नहीं है, लेकिन मुझे यह काम पसंद है। इससे मैं सक्रिय और फिट रहता हूं। मैं जमीन से जुड़ी जिंदगी जीना चाहता हूं और यह पुरस्कार मुझे नहीं बदलेगा। चीन में बढ़ रही है मजदूर लेखकों की पहचान वांग जिबिंग उन ब्लू-कॉलर कामगारों की नई पीढ़ी का हिस्सा हैं, जिन्हें हाल के कुछ साल में उनके साहित्यिक लेखन के लिए पहचान मिली है। उनकी रचनाएं चीन की तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों लोगों के संघर्ष, दबाव और जीवन की सच्चाई को सामने लाती हैं। साल 2023 में पूर्व डिलीवरी कर्मी हू आनयान की आत्मकथा ‘आई डिलीवर पार्सल्स इन बीजिंग’ प्रकाशित हुई थी। यह किताब चीन में बेस्टसेलर बनी और विदेशों में भी चर्चा का विषय रही। पिछले साल इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ। इसी तरह 2017 में प्रवासी मजदूर फान यूसु का आत्मकथात्मक लेख ‘आई एम फान यूसु’ चीन में इंटरनेट पर जबरदस्त वायरल हुआ था। इसे इतनी बड़ी प्रतिक्रिया मिली कि लगातार मीडिया की भीड़ से बचने के लिए फान को कुछ समय के लिए अपना घर तक छोड़ना पड़ा। लू शुन चीन का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान वांग जिबिंग को जिस लू शुन साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, उसका नाम चीन के महान साहित्यकार लू शुन के नाम पर रखा गया है। उन्हें 20वीं सदी के चीन का सबसे प्रभावशाली लेखक माना जाता है। उन्होंने अपने व्यंग्यात्मक उपन्यासों और कहानियों के जरिए पारंपरिक चीनी समाज की कमियों और सामाजिक बुराइयों पर हमला बोला। लू शुन साहित्य पुरस्कार का आयोजन चाइना राइटर्स एसोसिएशन करता है। यह पुरस्कार हर चार साल में दिया जाता है और इसे चीन के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मानों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत समकालीन चीनी साहित्य की उत्कृष्ट रचनाओं को सम्मानित करने के लिए की गई थी। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यह पुरस्कार लंबे समय से चीन के मुख्यधारा के साहित्य का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता रहा है और साहित्य जगत में इसका खास महत्व है।

बांसवाड़ा में होटल संचालक से मारपीट:खाना खाने युवकों से हुई कहासुनी, बोले-बंद होने के बाद जबरदस्ती घुसे

बांसवाड़ा के जलसा रेस्टोरेंट में देर रात होटल बंद होने के बाद खाना खाने पहुंचे युवकों और होटल कर्मचारियों के बीच विवाद हो गया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट के आरोप लगाए हैं। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामला शांत कराया। अब होटल संचालक ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है, जबकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई कर रही है। संचालक बोले- होटल बंद था, युवक जबरन अंदर घुसे होटल संचालक प्रकाश रेबारी ने बताया- होटल रोज रात 10:45 बजे बंद कर दिया जाता है। युवक रात करीब 12 बजे होटल पहुंचे और जबरन गेट खोलकर अंदर घुस गए। युवकों ने होटल में धक्का-मुक्की की। मामले को लेकर उन्होंने सोमवार दोपहर को पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस कोतवाली थानाधिकारी नागेंद्र सिंह ने बताया – घटना की सूचना मिलते ही पुलिस जाब्ता मौके पर पहुंच गया था। शुरुआती जांच में सामने आया कि होटल पूरी तरह बंद होने के बाद कुछ युवक वहां खाना खाने पहुंचे थे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई। पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद स्थिति सामान्य हो गई।

जयपुर में टीन ब्यूटी पेजेंट का फिनाले:ऐश्वर्या, स्निग्धा और प्रसूची बनीं विजेता; अंतरराष्ट्रीय मंच पर करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व

देश की प्रतिष्ठित किशोर सौंदर्य प्रतियोगिताओं में शामिल मिस टीन दिवा 2026 का ग्रैंड फिनाले रविवार देर रात को जयपुर के जी स्टूडियो में आयोजित हुआ। देशभर से आई प्रतिभागियों के बीच हुए रोमांचक मुकाबले के बाद मेघालय की ऐश्वर्या मलंग ने मिस टीन अर्थ इंडिया 2026, असम की स्निग्धा भुयान ने मिस टीन ग्रैंड इंडिया 2026 और ओडिशा की प्रसूची पांडा ने मिस टीन यूनिवर्स इंडिया 2026 का खिताब अपने नाम किया। इन तीनों विजेताओं को अब मिस टीन अर्थ 2026, मिस टीन ग्रैंड 2026 और मिस टीन यूनिवर्स 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा। देशभर से आए सैकड़ों प्रतिभागियों में से विभिन्न चयन चरणों के बाद 37 प्रतिभागियों ने ग्रैंड फिनाले में जगह बनाई थी। फैशन, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, मंच संचालन, प्रतिभा और प्रश्नोत्तर जैसे कई राउंड के आधार पर विजेताओं का चयन किया गया। प्रतियोगिता में हरियाणा की दिया डांग सेकंड रनरअप रहीं, जबकि गोवा की वेदश्री ठाकरे फर्स्ट रनरअप चुनी गईं। पहले देखिए ब्यूटी पेजेंट फिनाले के PHOTOS…
ग्रैंड फिनाले में प्रतिभागियों ने पारंपरिक और वेस्टर्न राउंड, टैलेंट राउंड तथा इंटेलिजेंस राउंड में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पूरे आयोजन में आत्मविश्वास, व्यक्तित्व, संवाद कौशल और मंच प्रस्तुति का बेहतरीन प्रदर्शन देखने को मिला। भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई ब्यूटी क्वीन देने का मंच मिस टीन दिवा के संस्थापक एवं ग्लैमआनंद सुपरमॉडल के निदेशक निखिल आनंद ने कहा कि मिस टीन दिवा आज दुनिया की सबसे तेजी से लोकप्रिय हो रही टीनएज ब्यूटी प्रतियोगिताओं में शामिल है। यह मंच केवल सौंदर्य प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवतियों के व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास को निखारने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि ग्लैमआनंद ग्रुप ने अब तक भारत को कई अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी क्वीन दी हैं, जिन्होंने वैश्विक मंच पर देश का गौरव बढ़ाया है। उनका विश्वास है कि इस वर्ष की विजेता प्रतिभागी भी विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन करेंगी। देश-विदेश से पहुंचे 500 से अधिक प्रतिनिधि तीनों विजेताओं ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और उत्कृष्ट प्रदर्शन से निर्णायकों का दिल जीता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये प्रतिभागी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भारत के लिए शानदार प्रदर्शन करेंगी। ग्रैंड फिनाले में मिस यूनिवर्स इंडिया 2025 मनिका विश्वकर्मा, मिस चार्म इंडिया महक ढींगरा, मिस टीन यूनिवर्स 2024 तृष्णा रे, मिस टीन अर्थ तनिष्का शर्मा, ग्लैमआनंद के निदेशक निशांत आनंद सहित देश-विदेश से आए करीब 500 से अधिक डेलीगेट्स और फैशन एवं ब्यूटी इंडस्ट्री से जुड़े गणमान्य लोग मौजूद रहे।

भारत में पहली डेंगू वैक्सीन QDENGA को मंजूरी:बिना किसी जांच के 4 से 60 साल तक के लोग ले सकेंगे डोज, देश में ही बनेगी

भारत में पहली बार डेंगू की वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने ताकेदा बायोफार्मास्यूटिकल्स इंडिया की वैक्सीन QDENGA को बाजार में इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। कंपनी के मुताबिक, यह वैक्सीन चार से 60 साल तक के लोगों को लगाई जा सकेगी। इसे लगवाने से पहले यह जांच कराने की जरूरत नहीं होगी कि व्यक्ति पहले कभी डेंगू से संक्रमित हुआ था या नहीं। भारत में मिली मंजूरी ताकेदा के वैश्विक क्लीनिकल डेवलपमेंट प्रोग्राम के आधार पर दी गई है। इसके तहत फेज-I, फेज-II और फेज-III के कुल 19 क्लीनिकल ट्रायल किए गए, जिनमें 28 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। QDENGA की दो डोज दी जाती हैं। प्रत्येक डोज 0.5 मिलीलीटर की होती है और त्वचा के नीचे इंजेक्शन के जरिए लगाई जाती है। दोनों डोज के बीच तीन महीने का अंतर रखा जाता है। देश में ही होगा वैक्सीन का उत्पादन ‘क्यूडेंगा’ (TAK-003) असल में जापानी कंपनी ‘टाकेडा’ की खोज है, लेकिन हमारे लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन देश में ही होगा। इसके लिए टाकेडा ने हैदराबाद की जानी-मानी फार्मा कंपनी ‘बायोलॉजिकल ई’ के साथ करार किया है। भारत में ही बनने की वजह से इसकी सप्लाई तेज और बिना किसी रुकावट के होगी। अभी इसकी पक्की कीमत का ऐलान होना बाकी है, लेकिन क्योंकि यह हमारे अपने देश में ही बनेगी, इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि यह आम लोगों की जेब पर ज्यादा भारी नहीं पड़ेगी। बाजार में लॉन्च होने के बाद, एहतियात के तौर पर शुरुआती 6 महीनों तक लोगों पर इसके असर की पूरी निगरानी भी की जाएगी। भारत दुनिया में डेंगू से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल ताकेदा के मुताबिक, भारत दुनिया में डेंगू से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। देश के कई हिस्सों में डेंगू वायरस के चारों सीरोटाइप एक साथ फैल रहे हैं। कंपनी के मेडिकल अफेयर्स प्रमुख गोह चू बेंग ने कहा कि QDENGA को चारों सीरोटाइप से सुरक्षा देने के लिए तैयार किया गया है। यह मंजूरी भारत में डेंगू रोकथाम की रणनीति को मजबूत करेगी। इसके साथ मच्छर नियंत्रण, निगरानी, जनजागरूकता और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय भी जरूरी रहेंगे। कंपनी ने यह भी कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में QDENGA के इस्तेमाल की सिफारिश करता है। WHO का समर्थन है कि ज्यादा संक्रमण वाले इलाकों में इसे सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम में बिना प्री-वैक्सीनेशन स्क्रीनिंग के शामिल किया जा सकता है। 125 से ज्यादा देशों में डेंगू के मामले QDENGA को WHO की प्री-क्वालिफिकेशन भी मिल चुकी है। इसका मतलब है कि यह गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती है। इसके बाद UNICEF और पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (PAHO) जैसी वैश्विक एजेंसियां भी इसकी खरीदी कर सकती हैं। डेंगू मच्छरों से फैलने वाली वायरल बीमारी है, जिसके मामले 125 से ज्यादा देशों में सामने आते हैं। कंपनी के मुताबिक, दुनिया में डेंगू के कुल मामलों का करीब एक-तिहाई बोझ भारत पर है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और मच्छरों के बढ़ते प्रजनन के कारण संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… डायबिटीज पेशेंट को हफ्ते में एकबार लेना होगा इंसुलिन इंजेक्शन:भारत में पहली बार बेसल इंसुलिन लॉन्च डायबिटीज मरीजों के लिए राहत की खबर है। डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने बुधवार को भारत में Awiqli (इंसुलिन आइकोडेक) लॉन्च की। कंपनी का दावा है कि यह हफ्ते में एक बार दिए जाने वाला बेसल इंसुलिन है, जो टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के वयस्क मरीजों के लिए है। पूरी खबर पढ़ें…