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गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का 5वां राज्य बनाने की तैयारी:विधानसभा में प्रस्ताव पास, संसद से संविधान संशोधन की मांग

पाकिस्तान ने अपने अवैध कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान को देश का पांचवां राज्य (प्रांत) बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गुरुवार को गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संविधान में संशोधन करके इस क्षेत्र को राज्य का दर्जा देने की मांग की। प्रस्ताव में कहा गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों को पाकिस्तान के दूसरे राज्यों के नागरिकों की तरह समान संवैधानिक, राजनीतिक और लोकतांत्रिक अधिकार दिए जाएं। इसके साथ ही इस क्षेत्र को नेशनल असेंबली, सीनेट और अन्य संघीय संवैधानिक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व देने की भी मांग की गई है। प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, नेता विपक्ष और दो निर्दलीय विधायकों के हस्ताक्षर हैं। अब इसे आगे की मंजूरी के लिए पाकिस्तान की संसद भेजा जाएगा। प्रस्ताव में क्या-क्या है? फिलहाल पाकिस्तान में चार ही राज्य हैं- पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा। गिलगित-बाल्टिस्तान अब तक सीमित स्वशासन के तहत संचालित होता रहा है और उसे पाकिस्तान के अन्य राज्यों जैसा संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं है। प्रस्ताव में कहा गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान को अभी स्थायी नहीं, बल्कि अस्थायी (प्रोविजनल) तौर पर राज्य बनाया जाएगा। अगर भविष्य में जम्मू-कश्मीर विवाद का कोई समाधान निकलता है, तो उसके अनुसार इस क्षेत्र की स्थिति दोबारा तय की जा सकेगी। इसके साथ ही प्रस्ताव में यह भी मांग की गई है कि जब तक गिलगित-बाल्टिस्तान को राज्य का दर्जा नहीं मिलता, तब तक पाकिस्तान की केंद्र सरकार और चारों राज्य यह सुनिश्चित करें कि इस क्षेत्र को भी सरकारी फंड और राष्ट्रीय संसाधनों में उचित हिस्सा मिले। यानी गिलगित-बाल्टिस्तान को भी दूसरे राज्यों की तरह विकास के लिए धन दिया जाए। गिलगित-बाल्टिस्तान का राज्य बनना कितना मुश्किल? पाकिस्तान लंबे समय से कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर विवाद का अंतिम समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों के अनुसार जनमत संग्रह (प्लेबिसाइट) के जरिए होना चाहिए। पाकिस्तान के मुताबिक, गिलगित-बाल्टिस्तान भी इसी विवादित क्षेत्र का हिस्सा है। इसी वजह से विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा से प्रस्ताव पास होने के बावजूद गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का स्थायी पांचवां राज्य बनाना आसान नहीं होगा। ऐसा करने पर पाकिस्तान के उस पुराने रुख पर सवाल उठ सकते हैं, जिसमें वह कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताता रहा है। यही कारण है कि प्रस्ताव में केवल अस्थायी (प्रोविजनल) राज्य बनाने की बात कही गई है। गिलगित-बाल्टिस्तान को 2009 में पहली बार मिली विधानसभा 1947 से लेकर कई दशकों तक गिलगित-बाल्टिस्तान का प्रशासन सीधे पाकिस्तान की केंद्र सरकार के हाथ में रहा। यहां न तो प्रांत का दर्जा था और न ही लोगों को अपने प्रतिनिधियों के जरिए शासन चलाने का अधिकार मिला था। 2009 में पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान एम्पावरमेंट एंड सेल्फ-गवर्नेंस ऑर्डर लागू किया। इसके तहत पहली बार यहां विधानसभा चुनाव कराए गए और स्थानीय सरकार बनाई गई। हालांकि विधानसभा के अधिकार सीमित थे और बड़े फैसले केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के हाथ में ही रहे। इसके बाद 2018 में गिलगित-बाल्टिस्तान ऑर्डर-2018 लागू किया गया, जिसके तहत स्थानीय विधानसभा और मुख्यमंत्री को पहले से ज्यादा अधिकार दिए गए। इसके बावजूद गिलगित-बाल्टिस्तान आज तक पाकिस्तान का संवैधानिक राज्य नहीं बन सका। गिलगित-बाल्टिस्तान और भारत का क्या संबंध है? गिलगित-बाल्टिस्तान ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में कश्मीर घाटी के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। यह कभी जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा था। उस समय रियासत पांच हिस्सों में बंटी थी- जम्मू, कश्मीर, लद्दाख, गिलगित वजाहत और गिलगित एजेंसी। आज पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर क्षेत्र का करीब 85% हिस्सा गिलगित-बाल्टिस्तान (नॉर्दर्न एरियाज) में है, जबकि लगभग 15% हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) कहलाता है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) भी इसी इलाके से होकर गुजरता है। पाकिस्तान की जीवनरेखा मानी जाने वाली सिंधु नदी भी सबसे पहले इसी क्षेत्र में प्रवेश करती है। गिलगित-बाल्टिस्तान भारत से अलग कैसे हुआ? पाकिस्तान ने इसे संविधान में क्यों शामिल नहीं किया? 2009 के बाद प्रशासनिक व्यवस्था कैसे बदली? साल 2000 के बाद, खासकर अमेरिका में 9/11 हमलों और चीन के वन बेल्ट वन रोड (अब बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव) परियोजना में इस इलाके की बढ़ती रणनीतिक अहमियत को देखते हुए पाकिस्तान ने यहां प्रशासनिक बदलाव शुरू किए। 2009 के ऑर्डर के तहत नॉर्दर्न एरियाज लेजिस्लेटिव काउंसिल (NALC) की जगह गिलगित-बाल्टिस्तान लेजिस्लेटिव असेंबली बनाई गई और नॉर्दर्न एरियाज का नाम बदलकर गिलगित-बाल्टिस्तान कर दिया गया। हालांकि विधानसभा बनने के बाद भी अंतिम अधिकार इस्लामाबाद के पास ही रहे। नई विधानसभा में 24 सदस्य सीधे चुने जाते हैं और 9 सदस्य नामित किए जाते हैं। 2010 के बाद से हर चुनाव में इस्लामाबाद में सत्ता में रहने वाली पार्टी ही यहां सरकार बनाती रही है। नवंबर 2020 के चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने 33 में से 24 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी।

अवैध-खनन से बने गड्ढे में डूबने से चचेरे-भाइयों की मौत:एक का पैर फिसला तो दूसरा बचाने बचाने कूदा था, एक घंटे बाद निकाले जा सके शव

बाड़मेर में अवैध खनन से बने गहरे गड्ढे में पैर फिसलने से एक भाई गिर गया, उसे डूबता देख दूसरा भाई बचाने कूदा। मौके पर मौजूद तीसरे साथी ने शोर मचाया, लेकिन तब तक दोनों चचेरे भाई डूब चुके थे। शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और सेना को सूचना दी। एक घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों चचेरे भाइयों को बाहर निकाला जा सका। उन्हें जिला हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना बाड़मेर जिले के ग्रामीण थाना क्षेत्र के दरूड़ा गांव में शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के पास संचालित स्टोन क्रेशरों द्वारा अवैध खनन किया जाता है। खनन के कारण जमीन में गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिनमें पानी भर जाता है। इसी कारण हादसा हुआ। घर से आधा किलोमीटर दूर हुआ हादसा
मृतक के चाचा सुरताराम ने बताया कि दरूड़ा गांव निवासी देवराम(18) पुत्र किशनाराम, उसका चचेरा भाई किरताराम(20) पुत्र गणेशकुमार और गांव का ही एक अन्य युवक प्रवीण किसी से मिलने के लिए घर से निकले थे। घर से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित स्टोन क्रेशर के पास पानी से भरे गहरे गड्ढे हैं। वहां से गुजरने के दौरान देवराम का पैर फिसल गया और वह गड्ढे में गिर गया। उसे बचाने के लिए किरताराम ने भी छलांग लगा दी, लेकिन वह भी डूब गया। दोनों को डूबता देख प्रवीण ने परिजनों और आसपास के लोगों को सूचना दी। इसके बाद जसाई से आर्मी को बुलाया गया। अवैध खनन से बने हैं 50–100 फीट गहरे गड्ढे
सुरताराम ने बताया कि दरूड़ा गांव में करीब 20–30 स्टोन क्रेशर संचालित हैं। क्रेशर संचालकों ने अवैध खनन कर जगह-जगह 50–100 फीट गहरे गड्ढे कर दिए हैं। इनमें पानी भरा रहता है। गांव जाने का रास्ता भी इन गड्ढों के पास से होकर गुजरता है, जिससे हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। करीब एक घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलने पर आर्मी के जवान गहरे गड्ढे में उतरे और करीब एक घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों युवकों को बाहर निकाला गया। इस बीच ग्रामीण थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। दोनों को जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दोनों के परिवार किसान है। पुलिस बोली- दोनों के शव जिला हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाए हैं
ग्रामीण थाना के एएसआई ज्ञानसिंह ने बताया कि दो युवकों के डूबने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। सिविल डिफेंस और आर्मी की टीम ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चलाया। दोनों शवों को जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

रेप-पीड़ित बच्ची का इलाज नहीं किया, सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा:कहा- आपको डॉक्टर लिखने का हक नहीं; गाजियाबाद में चली गई थी जान

गाजियाबाद में 4 साल की बच्ची के साथ रेप और हत्या केस की शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने इलाज नहीं देने पर दो प्राइवेट अस्पतालों और उनके डॉक्टरों को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने दोनों अस्पतालों से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने को भी कहा है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘अगर आप अपनी ड्यूटी नहीं निभाते हैं तो आपको डॉक्टर कहलाने का कोई अधिकार नहीं है। अगर अस्पताल में सुविधा नहीं थी तो बच्ची को दूसरे अस्पताल पहुंचाना चाहिए था। क्या इसलिए इलाज नहीं किया, क्योंकि परिवार गरीब था और आपकी फीस नहीं दे सकता था?’ मामले की सुनवाई अब अगले हफ्ते होगी। पीड़िता के पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में SIT या CBI से कराने की मांग की है। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि पीड़िता और उसके परिवार की पहचान गोपनीय रखी जाए और उन्हें किसी तरह से परेशान न किया जाए। अब विस्तार से पढ़िए… बेहोशी हालत में मिली थी बच्ची, खून से लथपथ थी ये मामला 16 मार्च, 2026 का है। आरोप है कि पड़ोस में रहने वाला एक युवक चॉकलेट दिलाने के बहाने 4 साल की बच्ची को अपने साथ ले गया। जब बच्ची काफी देर तक घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। बाद में बच्ची खून से लथपथ और बेहोशी की हालत में मिली। परिजन उसे पहले 2 निजी अस्पतालों में लेकर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि दोनों अस्पतालों ने भर्ती करने से इनकार कर दिया। इसके बाद बच्ची को गाजियाबाद के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस की भूमिका पर भी जताई थी नाराजगी सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान गाजियाबाद पुलिस के रवैये पर भी सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था- पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने और जांच शुरू करने में अनावश्यक ढिलाई दिखाई। साथ ही दोनों निजी अस्पतालों- खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर और सेंट जोसेफ (मरियम) अस्पताल से आरोपों पर हलफनामा दाखिल करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड़ और नंदग्राम थाना प्रभारी को तलब किया था। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच एसआईटी कर रही है। एसआईटी में तीन वरिष्ठ महिला अधिकारी शामिल हैं। इनमें एक आईजी रैंक की अधिकारी, एक एसपी रैंक की अधिकारी और एक डीएसपी रैंक की अधिकारी हैं। रेप केस में पुलिस ने नहीं लिखी थी FIR पीड़ित पक्ष के वकील का कहना है कि घटना के बाद पुलिस ने मदद करने के बजाय बच्ची के पिता को डरा-धमकाकर चुप रहने को कहा था। FIR भी 17 मार्च को दर्ज हुई, जबकि घटना 16 मार्च की रात की थी। रेप के आरोप के बावजूद पुलिस ने शुरुआती FIR में सिर्फ हत्या की धारा लगाई। न रेप की धारा जोड़ी गई, न ही पॉक्सो एक्ट लगाया गया। 19 मार्च को मुठभेड़ में आरोपी के दोनों पैरों में लगी थी गोली मुकदमा लिखे जाने के अगले दिन 18 मार्च को पुलिस ने आरोपी गौरव प्रजापति को गिरफ्तार किया था। 19 मार्च को जब पुलिस उसे घटनास्थल पर रिकवरी के लिए ले गई थी। तभी आरोपी ने झाड़ियों में जो तमंचा छिपाकर रखा था, उससे पुलिस पर फायर किया। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की। आरोपी के दोनों पैरों पर गोली लगी थी। वह घायल होकर गिर पड़ा था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को अस्पताल में भर्ती कराया। ……………………………. संबंधित खबर पढ़िए… SIT करेगी 4 साल की बच्ची से रेप-हत्या की जांच:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जांच निष्पक्ष होनी चाहिए; 3 महिला अफसरों को जिम्मेदारी गाजियाबाद में 4 साल की बच्ची का रेप और हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने यूपी के डीजीपी को SIT गठित करने के निर्देश दिए हैं। यहां पढ़ें पूरी खबर

जापान की मशहूर गेमिंग कंपनी:घाटा हुआ तो कोर बिजनेस बेचा; अब प्रतिद्वंद्वी को ही सॉफ्टवेयर बेचती है गेमिंग कंपनी सेगा

1993, हार्वर्ड के कुछ वैज्ञानिकों ने मानव भ्रूण के विकास के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण जीन की खोज की और नाम रखा ‘सोनिक हेजगॉग’। यह नाम सेगा कॉमिक बुक के कैरेक्टर ‘सोनिक’ पर रखा गया था। यह वही जापानी गेम है, जिसकी 2024 तक 177 करोड़ से ज्यादा यूनिट्स बिक चुकी हैं। गेमिंग सॉफ्टवेयर के मामले में सेगा आज दुनिया की शीर्ष कंपनियों में शामिल है, लेकिन 1997 से 2001 के बीच एक ऐसा दौर भी आया जब सेगा का वजूद ही खत्म होने की कगार पर आ गया था। सेगा का कंसोल ‘सैटर्न’ सोनी के प्लेस्टेशन के सामने बुरी तरह पिट चुका था। फिर सेगा ने 1998 में पूरी ताकत झोंककर एक क्रांतिकारी कंसोल ‘सेगा ड्रीमकास्ट’ लॉन्च किया। यह दुनिया का पहला कंसोल था, जिसमें इंटरनेट और ऑनलाइन गेमिंग के लिए इन-बिल्ट मोडेम था, लेकिन साल 2000 में सोनी ने इन-बिल्ट डीवीडी प्लेयर के साथ ‘प्लेस्टेशन-2’ की घोषणा कर दी। इसने ड्रीमकास्ट के बाजार को पूरी तरह खत्म कर दिया। कंपनी पांच वर्षों तक भारी घाटे में डूबी रही। स्थिति इतनी बदतर हो गई कि जनवरी 2001 में सेगा को घोषणा करनी पड़ी कि वह गेमिंग हार्डवेयर (कंसोल) बनाने का काम हमेशा के लिए बंद कर रही हैं। कंपनी ने गेमिंग सॉफ्टवेयर बनाने शुरू किए। वर्तमान स्थिति- करीब 30 हजार करोड़ रु. की कंपनी है सेगा सेगा वर्तमान में करीब 30 हजार करोड़ रुपए की कंपनी है। सेगा ने 2023 में फिनलैंड की एंग्री बर्ड्स बनाने वाली कंपनी रोवियो का करीब 7 हजार करोड़ रुपए में अधिग्रहण किया, जिससे मोबाइल गेमिंग सेगमेंट में उसकी पकड़ मजबूत हुई। कंपनी अमेरिका और यूरोप में क्षेत्रीय मुख्यालयों-सेगा ऑफ अमेरिका और सेगा-यूरोप के जरिए अपना व्यापार चलाती है। कंपनी ने एनएसई में सूचीबद्ध कंपनी प्रमारा प्रमोशंस के साथ भारत में रणनीतिक साझेदारी की है। इसके तहत क्रेयान शिनचैन सहित सेगा के लाइसेंस्ड कैरेक्टर अब भारत में भी बनाए जांएगे। यूं संकट में फंसी थी… अनावश्यक प्रयोग – सफल कंसोल ‘सेगा जेनेसिस’ के बाद सेगा सीडी और 32एक्स जैसे महंगे पर कम गुणवत्ता वाले पेरिफेरल्स लॉन्च किए। इससे गेम डेवलपर्स नाराज हो गए। आम ग्राहक भी भ्रमित हुए। सैटर्न कंसोल का विनाशकारी लॉन्च – 1995 में कंसोल ‘सेगा सैटर्न’ को अचानक लॉन्च किया। रिटेलर्स के पास स्टॉक नहीं था। तभी सोनी ने प्लेस्टेशन की कीमत सेगा से 100 डॉलर कम कर दी। सोनी प्लेस्टेशन-2 की सुनामी भांपने में नाकामी – सोनी ने प्लेस्टेशन 2 में डीवीडी प्लेयर की सुविधा भी दी थी। ग्राहकों ने सेगा का ड्रीमकास्ट खरीदने के बजाय प्लेस्टेशन 2 को वरीयता दी। भयंकर वित्तीय घाटा और नकदी संकट – कंपनी को हर महीने करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा था। कर्ज इतना हो गया कि दिवालिया होना तय माना जा रहा था। इस तरह की वापसी… प्योर सॉफ्टवेयर पब्लिशर मॉडल में बदलाव – सेगा ने खुद को एक थर्ड-पार्टी सॉफ्टवेयर पब्लिशर के रूप में स्थापित किया। इसका फायदा यह हुआ कि अब वह गेम्स को पूर्व प्रतिद्वंद्वियों के प्लेटफॉर्म पर बेचने लगी। सेगा-सैमी का ऐतिहासिक विलय – 2004 में सेगा ने जापानी गेमिंग और पैचिनको जायंट ‘सैमी कॉर्पोरेशन’ के साथ मर्जर कर लिया। सैमी के पास नकदी का भारी भंडार था। इसने कर्ज के बोझ को खत्म कर दिया। चेयरमैन ओकावा का बलिदान – जब 2001 में सेगा डूब रही थी, तब तत्कालीन चेयरमैन इसाओ ओकावा ने कंपनी को दिया गया करीब 3200 करोड़ रु. का व्यक्तिगत कर्ज माफ कर दिया। शेयर दान कर दिए। ग्लोबल स्टूडियोज का अधिग्रहण – सेगा ने केवल ‘सोनिक’ पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया भर के बेहतरीन गेमिंग स्टूडियोज को खरीदा। पहुंच बढ़ाई। शुरुआत – अमेरिकी व्यवसायियों ने रखी थी इस गेमिंग कंपनी की नींव 1940 में होनोलूलू, अमेरिका में 3 अमेरिकी व्यवसायियों-मार्टिन ब्रोमली, इरविंग ब्रॉम्बर्ग और जेम्स हम्पर्ट ने ‘स्टैंडर्ड गेम्स’ के रूप में नींव रखी। उद्देश्य अमेरिकी सैनिकों के मनोरंजन के लिए सिक्कों से चलने वाली स्लॉट मशीनें उपलब्ध कराना था। 1951 में, जब इन मशीनों पर पाबंदी लगी तो संस्थापकों ने बिजनेस टोक्यो शिफ्ट कर दिया। विरासत – पारंपरिक प्रीमियम कंसोल को ही बढ़ाने की तैयारी कंपनी का पूरा फोकस पारंपरिक प्रीमियम कंसोल को ही आगे बढ़ाने पर है। इसी के तहत मई 2026 में सेगा ने बहुप्रतीक्षित एक अरब डॉलर की ‘सुपर गेम’ परियोजना को रद्द कर दिया है। साथ ही प्रीमियम कंसोल-पीसी गेम्स पर फोकस लौटाने का ऐलान किया है। वित्त वर्ष 2026-27 में 30 हजार करोड़ रु. से अधिक की बिक्री का अनुमान है। ऐसे पड़ा नाम – जापान पहुंचने पर इसका नाम servic games of Japan पड़ा। फिर सर्विस और गेम्स के दो-दो शब्द मिलाकर नाम SEGA कर दिया गया। सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी – गेमिंग इतिहास में इसका सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी निनटेंडो रहा है। सोनी के प्ले स्टेशन ने भी सेगा सैटर्न और ड्रीमकास्ट को बाजार से बाहर किया।

फुटबॉल वर्ल्ड चैंपियन को पहली बार मिलेंगे ₹490 करोड़:फीफा रिकॉर्ड ₹8,400 करोड़ की इनामी राशि बांटेगा, इस बार मेडल के साथ चैंपियनशिप रिंग भी

इस बार फुटबॉल वर्ल्ड कप चैंपियन को 51 मिलियन डॉलर करीब 490 करोड़ रुपए मिलेंगे। पहली बार विश्व चैंपियन को इतनी बड़ी रकम मिलेगी। FIFA ने इस बार 871 मिलियन डॉलर यानी करीब 8,400 करोड़ रुपए की इनामी राशि बांटने का ऐलान किया है। वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करने वाले हर देश को कम से कम 12.5 मिलियन डॉलर यानी करीब ₹120 करोड़ रुपए मिलेंगे। फाइनल मुकाबले से पहले FIFA ने ऐलान किया कि विजेता टीम के खिलाड़ियों को मेडल के साथ चैंपियनशिप रिंग भी दी जाएगी। टॉप-4 टीमों को मिलेगी सबसे बड़ी इनामी राशि FIFA वर्ल्ड कप 2026 में अंतिम चार में पहुंचने वाली टीमों को सबसे ज्यादा इनामी राशि मिलेगी। उपविजेता टीम को करीब 317 करोड़ (33 मिलियन डॉलर) मिलेंगे। तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को करीब 279 करोड़ (29 मिलियन डॉलर), चौथे स्थान पर रहने वाली टीम को करीब 259 करोड़ (27 मिलियन डॉलर) की पुरस्कार राशि दी जाएगी। मेडल के साथ पहनाई जाएगी चैंपियनशिप रिंग स्पेन-अर्जेंटीना में खिताबी भिड़ंत वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल यूरोपियन चैंपियन स्पेन और मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन अर्जेंटीना के बीच खेला जाना है। स्पेन ने सेमीफाइनल में मजबूत मानी जा रही फ्रांस की टीम को हराकर फाइनल में जगह बनाई है। वहीं, अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार और कुल सातवीं बार वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा है। अर्जेंटीना ने दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड को 2-1 से शिकस्त दी थी। 2022 में चैंपियन को मिले थे 348 करोड़ फीफा वर्ल्ड कप 2022 की चैंपियन अर्जेंटीना को 348 करोड़ रुपए (42 मिलियन डॉलर) की प्राइज मनी मिली थी। फाइनल हार कर रनर-अप रहे फ्रांस को भी 248 करोड़ रुपए मिले। टूर्नामेंट में भाग लेने वाली 32 टीमों में कुल 3600 करोड़ रुपए से ज्यादा की इनामी राशि बांटी गई थी। ———————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… कोहली ने विवियन रिचर्ड्स की बराबरी की:रोहित के साथ 8 हजार साझेदारी रन पूरे इंग्लैंड ने दूसरे वनडे में भारत को 4 विकेट से हरा दिया। कार्डिफ के सोफिया गार्डन्स में खेले गए इस मैच में विराट ने इंग्लैंड के खिलाफ अपना 14वां 50+ स्कोर बनाकर वेस्टइंडीज के सर विवियन रिचर्ड्स की बराबरी कर ली। पूरी खबर…

देश में जल्द चलेंगे प्लास्टिक-नोट, RBI ने जारी किया टेंडर:₹10 और ₹20 के नोटों से शुरू होगा ट्रायल, 2027 में फुल-स्केल लॉन्च की उम्मीद

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जल्द ही देश में प्लास्टिक यानी पॉलीमर से बने नोटों का पहला पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह देश में नए जनरेशन की करेंसी लाने की RBI के प्लान का अगला कदम है। ₹10 और ₹20 के नोटों से शुरू होगा ट्रायल रिजर्व बैंक शुरुआती फेज में सबसे पहले छोटी वैल्यू के नोटों पर इसकी टेस्टिंग करेगा। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पहला पायलट प्रोजेक्ट ₹10 और ₹20 वैल्यू के छोटे नोटों के साथ शुरू होने की उम्मीद है। इस ट्रायल के नतीजों और अनुभवों के आधार पर ही RBI आगे का फैसला लेगा। अगर यह टेस्टिंग पूरी तरह सफल रही, तो आरबीआई साल 2027 से देश में इन पॉलीमर नोटों का फुल-स्केल लॉन्च शुरू कर सकता है। नए नोट के साथ पुराने कागजी नोट भी चलेंगे भारतीय बाजार में पॉलीमर नोटों के आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट तुरंत चलन से बाहर हो जाएंगे। RBI ने साफ किया है कि नई करेंसी पुराने पेपर नोटों की जगह नहीं लेगी। RBI ने जारी किया ग्लोबल टेंडर इस पूरे प्रोजेक्ट की तैयारियां तब तेज हो गईं, जब आरबीआई की नोट-प्रिंटिंग यूनिट ने ग्लोबल लेवल पर ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EOI) जारी किया। यह टेंडर विशेष प्रकार की ‘पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट’ की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई के लिए मंगाया गया है, जिसका इस्तेमाल इन नोटों को छापने के लिए किया जाता है। डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, दुनिया भर के मैन्युफैक्चरर को एडवांस सेफ्टी फीचर्स से लैस पॉलीमर सबस्ट्रेट की सप्लाई के लिए इनवाइट किया गया है। इस टेंडर के तहत बोलियां जमा करने की आखिरी तारीख 18 अगस्त तय की गई है। नए नोट फटेंगे नहीं, पानी-धूल से भी सुरक्षित रहेंगे पॉलीमर से बने बैंकनोट ट्रेडिशनल कागजी नोटों की तुलना में बहुत ज्यादा टिकाऊ होते हैं। यह नोट पानी, गंदगी और धूल में भी सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा यह नोट आसानी से फटते भी नहीं हैं। इस वजह से ये बाजार में लंबे समय तक बिना फटे और साफ-सुथरे बने रहते हैं। पॉलीमर शीट का सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें एडवांस सेफ्टी फीचर्स को आसानी से जोड़ा जा सकता है। इससे नकली नोट बनाने वाले जालसाजों के लिए इनकी नकल करना लगभग नामुमकिन हो जाता है, जिससे देश का सेफ्टी सिस्टम और मजबूत होगा। दुनिया के कई बड़े देशों में पहले से चल रहे पॉलीमर नोट पॉलीमर बैंकनोट का इस्तेमाल दुनिया के कई विकसित देशों में बहुत समय से किया जा रहा है। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं। RBI ने पहले भी देश में चलने वाले नोटों की लाइफ बढ़ाने और उनकी क्वालिटी सुधारने के लिए पॉलीमर नोट लाने की इच्छा जताई थी। अब जल्द शुरू होने वाला यह पायलट प्रोजेक्ट पहला वास्तविक टेस्ट होगा। हालांकि, RBI की ओर से इस पर अब तक कोई ऑफिशियल बयान सामने नहीं आया है। क्या होते हैं पॉलीमर बैंकनोट? ये नोट कागज के बजाय एक खास किस्म के प्लास्टिक मटेरियल यानी पॉलीमर सबस्ट्रेट पर छापे जाते हैं। ये छूने में तो सामान्य नोटों जैसे ही हल्के होते हैं, लेकिन पानी में भीगने पर भी नहीं गलते और लंबे समय तक चलते हैं। क्या होता है एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट? यह एक तरह का ग्लोबल टेंडर डॉक्यूमेंट होता है, जिसके जरिए रिजर्व बैंक दुनिया भर की अनुभवी और योग्य कंपनियों को प्रोजेक्ट के लिए अपनी क्षमता, तकनीक और कीमतों के साथ प्रस्ताव भेजने का न्योता देता है। ये खबर भी पढ़ें… एयर इंडिया का नया एप लॉन्च: फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर होम स्क्रीन पर फ्री होटल-कैब की डिटेल मिलेगी, पेमेंट भी आसान होगा एअर इंडिया ने सफर आसान बनाने के लिए अपने मोबाइल एप को नए फीचर्स के साथ अपडेट किया है। अब इस एप के जरिए न केवल टिकट बुकिंग पहले से कहीं ज्यादा तेजी से होगी, बल्कि फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर यात्रियों को एयरपोर्ट पर परेशान नहीं होना पड़ेगा। पूरी खबर पढ़ें…

NEET में श्रीगंगानगर के सूर्यांश की AIR 465वीं रैंक:बोले- 10वीं और 12वीं की बुक्स पढ़ने से काफी मदद मिली

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET UG का रिजल्ट गुरुवार रात को जारी किया गया। श्रीगंगानगर के सूर्यांश मल्होत्रा की आल इंडिया 465 वीं रैंक आई है। सूर्यांश ने 720 में से 671 अंक हासिल किए हैं। कैटिगिरी में सूर्यांश की 289वीं रैंक है। सूर्यांश परफेक्ट एज्युकेशन का छात्र है। हर रोज पढ़ाई जरूरी सूर्यांश ने कहा- वह 6 से 7 घंटे रेगुलर स्टेडी करते थे। इसके साथ 10th-12th की किताबों और परफेक्ट एजुकेशन से मिले वर्कशीट और नोट्स से पढ़ने में काफी मदद मिली। जिसकी वजह से उसने एग्जाम पास कर लिया। सूर्यांश के पिता ऋषिराज मल्होत्रा सेशन कोर्ट में एलडीसी हैं और माता पूनम मल्होत्रा श्रीगंगानगर सेशन कोर्ट में क्रिमिनल एडवोकेट हैं। वहीं, नोजगे पब्लिक स्कूल की छात्रा जिया मित्तल ने ऑल इंडिया 1851वीं रैंक हासिल की है। जिया ने 645 नंबर हासिल किए हैं। इसके साथ ही आकाश इंस्टीट्यूट, श्रीगंगानगर के छात्र राघव सोएन ने 1074वीं रैंक हासिल की है। राघव के 720 में से 656 नंबर आए हैं। नीट में 11.21 लाख स्टूडेंट मेडिकल, डेंटल, AYUSH और अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए क्वालिफाई हुए हैं। जबकि 10 लाख स्टूडेंट 213 नंबर (कटऑफ) भी नहीं ला पाए। इस बार कटऑफ में 69 नंबर की बढ़ोतरी हुई है। राजस्थान के रहने वाले 2 स्टूडेंट टॉप-10 में हैं। उपलक्ष्य गोयल ने तीसरी और अलवर के गौरव सिंह ने 9वीं रैंक हासिल की है। पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया टॉप किया। कोटा में रहकर कोचिंग करने वाले बिहार के आयुष बालोटिया की चौथी रैंक है। नीट का एक्जाम क्रैक करने वाले स्टूडेंट्स की दैनिक भास्कर फोटो पब्लिश करेगा। इन नंबरों पर भेजें अपनी फोटो-9413166980

स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 30 बच्चे बीमार:उल्टी, पेट दर्द और घबराहट की शिकायत के बाद अस्पताल में कराया भर्ती

बारां जिले में मिड-डे मील खाने के बाद 30 स्कूली बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। उल्टी, पेट दर्द और घबराहट होने पर बच्चों को तत्काल एंबुलेंस और निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत में सुधार है। मामला अटरू ब्लॉक स्थित केरवालिया देवपुरा के सरकारी स्कूल का है। डीईओ सीताराम गोयल ने बताया- गवर्नमेंट प्राथमिक स्कूल केरवालिया देवपुरा में शुकवार दोपहर को 43 बच्चों में से 38 ने मिड-डे मील खाया था। भोजन के बाद करीब 30 बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और घबराहट की शिकायत हुई, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही अभिभावक भी बड़ी संख्या में स्कूल पहुंच गए। बच्चों को तुरंत एंबुलेंस और निजी वाहनों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोठपुर पहुंचाया गया। डीईओ और एडीएम मौके पर पहुंचे घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। जिला शिक्षा अधिकारी सीताराम गोयल और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) भंवरलाल जनागल ने स्थिति का जायजा लिया और बच्चों के इलाज की जानकारी ली। प्रशासन ने मिड-डे मील के सैंपल जांच के लिए सुरक्षित रखवाए हैं। संभवतया मिर्ची तेज होने के कारण बिगड़ी तबीयत जिला शिक्षा अधिकारी सीताराम गोयल ने प्रारंभिक तौर पर बताया कि खाने में मिर्ची तेज होने के कारण बच्चों की तबीयत बिगड़ी हो सकती है। मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कालूलाल मीणा और डॉक्टर ओमप्रकाश सुमन ने पुष्टि की कि सभी बच्चों का अस्पताल में प्राथमिक इलाज कराया गया। तबीयत में सुधार होने पर सभी को घर भेजा इलाज के बाद बच्चों की स्थिति सामान्य होने पर उन्हें घर भेज दिया गया है। वर्तमान में कोई भी बच्चा अस्पताल में भर्ती नहीं है और सभी स्वस्थ हैं। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने का कारण भोजन था या कोई अन्य वजह। वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

जापान में 780 साल पुराना पारंपरिक उत्सव:1 हजार किलो की झांकी उठाकर दौड़े युवा; 10 लाख पर्यटक जुटे

जापान के फुकुओका शहर में महामारियों से बचाव के लिए ‘हाकाता गियन यामाकासा’ उत्सव हुआ। इसकी शुरुआत 1241 में मानी जाती है। मान्यता है कि महामारी के दौरान बौद्ध भिक्षु शूइची कोकुशी (एन्नी) ने पूरे शहर में पवित्र जल का छिड़काव किया, जिसके बाद बीमारी थम गई। उसी घटना की स्मृति में यह परंपरा शुरू हुई। यह उत्सव यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में दर्ज है। इसे देखने के लिए करीब 10 लाख पर्यटक जुटे। उत्सव में दो तरह की झांकियां होती हैं। काजारीयामा करीब 10 मीटर ऊंचे, भव्य और सजावटी झांकी होती हैं, जिन्हें केवल प्रदर्शन के लिए रखा जाता है। वहीं काकियामा करीब 1 टन वजन की झांकी होती है, जिन्हें पुरुषों के समूह कंधों पर उठाकर शहर की सड़कों पर दौड़ते हैं। इन्हें बनाने में 55 लाख से 2 करोड़ रुपए तक खर्च होते हैं। इसके अलावा पारंपरिक पोशाक और अन्य व्यवस्थाओं पर भी लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। गर्मी की वजह से रास्ते में खड़े लोग धावकों पर ठंडा पानी डालते हैं। इससे शरीर ठंडा रहता है और धावकों का उत्साह भी बढ़ता है। दौड़ में हिस्सा लेने वाले पुरुष केवल पारंपरिक सूती जैकेट (मिजू-हैप्पी) और शिमेकोमी नामक विशेष लंगोट पहनते हैं। ऐसा इसलिए ताकि पानी पड़ने के बाद कपड़े भारी न हों और दौड़ने में आसानी रहे।

सुपारी किलर ने केतन को मारने से मना किया था:अब वही सिया-चेतन के खिलाफ गवाह बनेगा, पुलिस के पास तीनों की मुलाकात के फुटेज

पुणे की सिया गोयल और चेतन चौधरी ने केतन अग्रवाल की हत्या के लिए एक सुपारी किलर से भी कॉन्टेक्ट किया था। केतन अग्रवाल मर्डर केस की जांच में यह खुलासा हुआ है। केतन के बारे में जानने के बाद सुपारी किलर डर गया था। उसने सुपारी लेने से मना कर दिया था। सिया और चेतन ने इस शख्स को पुणे की एक होटल में बुलाया था। पुलिस ने उस होटल का सीसीटीवी फुटेज भी बरामद कर लिया है। अब इसी सुपारी किलर को पुलिस कोर्ट में गवाह के तौर पर पेश करेगी। पुलिस से बचने के लिए देखे थे जापानी वीडियो पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान एक और खुलासा हुआ है कि गिरफ्तारी की खतरा को देखते हुए सिया और चेतन ने करीब दो घंटे लंबे जापानी वीडियो देखे थे। इन वीडियो में पुलिस पूछताछ के दौरान शांत रहने, हाव-भाव नियंत्रित रखने और सवालों के जवाब किस तरह देने हैं, इसकी जानकारी दी गई थी। दोनों आरोपियों की वेब हिस्ट्री से इन वीडियो के लिंक भी बरामद कर लिए गए हैं। आरोप है कि 18 जून को सिया और चेतन ने केतन को पुणे के लोहगढ़ किले से 400 फीट गहरी खाई में धक्का दे दिया था। केतन की मौके पर ही मौत हो गई थी। फिलहाल सिया और चेतन 16 जुलाई तक येरवदा जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। केतन अग्रवाल के पिता बोले- रिश्ता कराने वाले की भी जांच हो केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- हम इस दुख से उबरने के बारे में सोच भी नहीं सकते। यह दुख समंदर से भी बड़ा है। मैंने अपने इकलौते बेटे की शादी करने और उसके लिए बहू लाने का सोचा था। लेकिन आज मेरा बेटा चला गया और बेटे के जाने के सदमे के साथ ही मेरे पिता भी चले गए। उन्होंने कहा- केतन और सिया का रिश्ता उनके करीबी मित्तल परिवार ने कराया था। उन्होंने कहा था, यह लड़की हमारी है, यह बहुत संस्कारी है, तुम इसे मत देखो, हमें देखो। हमने यह शादी उनकी गारंटी पर ही तय की थी। इस मर्डर के लिए मित्तल परिवार भी बराबर का जिम्मेदार हैं। उनकी भी जांच कराई जाए। सिया ने दोस्त से कहा था- शादी जो होने नहीं वाली सिया की स्नैपचैट पर एक दोस्त से की गई बातचीत वायरल हुई थी। इसमें लिखा है- ये शादी नहीं होने वाली है। 25 मई की चैट में सिया अपनी एक दोस्त से शादी की बुकिंग के लिए आधार कार्ड मांगती है। लेकिन इसके बाद लिखा गया एक मैसेज सबसे ज्यादा चर्चा में है- ‘शादी की टिकट के लिए आधार कार्ड फ्रंट-बैक भेज दे, जो होने नहीं वाली लेकिन फिर भी भेज दे। सगाई और प्री-वेडिंग फंक्शन, सिया-केतन की 2 तस्वीरें… प्लानिंग से मर्डर तक 19 दिन में घटना को अंजाम दिया 31 मई: सिया को केतन की हत्या का प्लान सूझा: 11 फरवरी को सगाई के बाद केतन, सिया को घर लेकर आता था, साथ घुमाने ले जाता था। उसे ट्रैकिंग यानी पहाड़ी चढ़ने का शौक था। उसने सिया से ट्रैकिंग के लिए लोहगढ़ किले चलने को कहा। यहीं सिया को केतन की हत्या का प्लान सूझा। 5 जून: किले पर जाने की जिद की, केतन नहीं गया: सिया ने 4 जून को केतन से दोबारा लोहगढ़ फोर्ट जाने की जिद की। केतन नहीं माना। 6 जून को केतन, उनकी बहन, एक दोस्त और सिया के इंडोनेशिया के बाली जाने के टिकट बुक थे। पुणे पुलिस के मुताबिक बाली न जाना पड़े, इसलिए सिया ने केतन का पासपोर्ट छिपा लिया। 14 जून: पहली कोशिश, धक्का दिया, लेकिन केतन बच गया: सिया ने केतन से दोबारा किले पर चलने को कहा। पुलिस के मुताबिक 14 जून को दोनों लोहगढ़ पहुंचे। सिया ने केतन को धक्का दिया, लेकिन पेड़ का सहारा मिलने से केतन बच गया। उसने पूछा- धक्का क्यों दिया? सिया ने कहा, ‘एक सांप था, तुम्हें उससे बचाने के लिए धक्का दिया।’ केतन ने घर आकर सबको बताया कि सिया की वजह से उसकी जान बच गई। 18 जून: दूसरी कोशिश में बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर धक्का दिया: 19 जून को सिया का जन्मदिन मनाने के लिए केतन ने महाबलेश्वर में एक लग्जरी रिजॉर्ट बुक किया था। सिया ने उससे पहले केतन को प्री-वेडिंग फोटोशूट की बात कहकर लोहगढ़ किले पर जाने के लिए मना लिया। इस बार पीछे-पीछे चेतन भी आया। एक जगह जब केतन पहाड़ियों की तरफ देख रहा था, तभी दोनों ने उसे पीछे से धक्का दे दिया। मर्डर से पहले सिया का मंगेतर के साथ डांस, रोमांस; 3 तस्वीरें केतन के मर्डर करने से पहले सिया ने सोशल मीडिया अकाउंट पर केतन अग्रवाल (26) के साथ कई रोमांटिक पोस्ट किए थे। कभी प्रपोजल की तस्वीरें, कभी फूल देकर प्यार जताने वाले पल, तो कभी डांस और गले मिलने के वीडियो। दोनों की नवंबर में होने वाली शादी की तैयारियां भी सोशल मीडिया पोस्ट का हिस्सा थीं। इस साल फरवरी में सगाई के बाद सिया ने इंस्टाग्राम पर एक केक की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था- मेरे दिल को उसका घर मिले एक महीना पूरा हुआ। 19 मई को सिया ने अपने जन्मदिन के काउंटडाउन की स्टोरी पोस्ट की, जिसमें दोनों एक रोमांटिक गाने पर डांस करते नजर आ रहे थे। एक पोस्ट में दोनों कार के अंदर बैठकर गले लगते दिखे। केतन ने अपने कार के अंदर और बाहर फूलों की सजावट की थी। ————————– केतल अग्रवाल मर्डर केस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… दावा-सिया ने चेतन से 4 महीने पहले सीक्रेट मैरिज की:गवाह बनी दो सहेलियों से पूछताछ जारी, पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस में सिया और चेतन को लेकर नई जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सिया गोयल ने केतन से सगाई के बाद अपने प्रेमी चेतन चौधरी से गुपचुप शादी कर ली थी। दावा है कि शादी करीब चार महीने पहले पुणे के रजिस्ट्रार ऑफिस में हुई थी। पूरी खबर पढ़ें…