रात में उतरी रालसा टीम:मॉडिफाइड स्लीपर बसें, चेसिस काट अवैध डिग्गी बनाई, 7 बसें सीज कीं
जैसलमेर बस अग्निकांड के बाद अक्टूबर में परिवहन विभाग ने अवैध बसों के खिलाफ 15 दिन के अभियान में 2400 से अधिक बसों पर कार्रवाई की। कई बसों को सीज किया था। इसके बाद अब फिर से हालात वैसे ही हो गए हैं। सड़कों पर ओवरहैंग, ओवरहाइट और मॉडिफाइड स्लीपर बसें दौड़ रही हैं। इसका खुलासा राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) के राज्यव्यापी विशेष जांच अभियान में हुआ है। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के नेतृत्व में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मोबाइल मजिस्ट्रेट, पुलिस और परिवहन अधिकारियों की टीम ने 15 जिलों में 295 बसों की जांच की। इनमें 119 बसें सीज की, 220 के चालान कर ~68 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया। अभियान राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के नेतृत्व और सदस्य सचिव हरिओम शर्मा अत्री के निर्देशन में चल रहा है। जयपुर एक्सप्रेस-वे पर बसें सीज, 6.50 लाख का जुर्माना
सोमवार को रात 9 बजे से 2 बजे तक जयपुर-अजमेर एक्सप्रेस-वे पर रालसा के सचिव पवन कुमार जीनवाल और जयपुर जिला के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवींद्र प्रताप सैनी के नेतृत्व में बसों की जांच की गई। इस दौरान परमिट, फिटनेस, टैक्स, ओवरलोडिंग और सुरक्षा मानकों की जांच में 7 बसें सीज की गईं और 6.50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। स्लीपर बसों में ये मानक जरूरी; इमरजेंसी एग्जिट निर्धारित ऊंचाई और आकार का हो। चेसिस और बॉडी में बिना अनुमति बदलाव नहीं हो। ओवरहैंग और ओवरहाइट निर्धारित मानकों के भीतर हों। ड्राइवर केबिन और यात्री हिस्से में केवल स्वीकृत डिजाइन हो। फिटनेस, परमिट, टैक्स और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य हों। बस का संतुलन प्रभावित करने वाला अतिरिक्त निर्माण नहीं हो।

