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युवक बोला- धीरेंद्र शास्त्री के भाई ने पीटा, गोली मारी:वीडियो में हथियार लेकर भागता दिखा सालिग्राम; बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर ने कहा- मेरा उससे संबंध नहीं

छतरपुर में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई सालिग्राम गर्ग पर एक युवक को गोली मारने का आरोप लगा है। गोली युवक के सीने में लगी और पसलियों में जा फंसी। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर गोली निकाली। युवक की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायल मोतीलाल कुशवाहा राजनगर थाना इलाके के कोड़ा गांव का रहने वाला है। उसने पुलिस को बताया- सालिग्राम गर्ग मेरी जमीन छीनना चाहते हैं। वे सतीश सिंह घोष, तुलसी मिश्रा, आशीष और दूसरे साथियों के साथ आज सुबह मेरे घर पहुंचे। मुझे घर से बाहर खींच लाए। सभी ने लाठी-डंडों से हमला किया। इसके बाद सालिग्राम ने तीन-चार राउंड फायर किया। एक गोली मेरे सीने में लगी। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें सालिग्राम और उसके साथी भागते दिख रहे हैं। घायल युवक के परिजन उनका पीछा कर रहे हैं। एक शख्स गाली देते हुए कह रहा है- मार…कितनी गोली मारेगा। वीडियो के एक फ्रेम में सालिग्राम के हाथ में हथियार दिख रहा है। फिलहाल, पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। देखिए, 4 तस्वीरें… धीरेंद्र शास्त्री बोले- दोषी को कानून कठोर दंड दे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि सालिग्राम गर्ग से उनका कोई संबंध नहीं है और यह बात वे तीन साल पहले भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने अपील भी की है कि घटना से उनका नाम नहीं जोड़ा जाए क्योंकि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है। दोनों पक्षों ने की थाने में शिकायत उधर, सालिग्राम के साथी सतीश सिंह घोष और तुलसी मिश्रा ने वीडियो जारी कर आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा- मोतीलाल कुशवाहा और उसके साथियों ने हम पर हमला किया। रास्ता रोककर मारपीट की। गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। बयान दर्ज, सबूत जुटा रही पुलिस छतरपुर एसपी रजत सकलेचा ने बताया- दोनों पक्षों की शिकायत के आधार पर जांच कर रहे हैं। बयान दर्ज कर साक्ष्य जुटाए हैं। खजुराहो एसडीओपी मनमोहन सिंह बघेल को मौके पर भेजा गया है। मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। वहीं, ओबीसी महासभा से जुड़े दामोदर यादव, आरडी प्रजापति, कुशवाहा समाज के जिला अध्यक्ष शंभू कुशवाहा सहित अन्य नेताओं ने सालिग्राम गर्ग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पहले भी विवादों में घिरा रहा सालिग्राम ये खबर भी पढ़ें… धीरेंद्र शास्त्री के भाई पर ₹55 लाख हड़पने का आरोप छतरपुर जिले में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के चचेरे भाई पर 55 लाख की ठगी करने का आरोप लगा है। राजस्थान की महिला एसपी ऑफिस पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। उसका आरोप है कि धीरेंद्र शास्त्री के चचेरे भाई दीपेंद्र गर्ग और उनके साथियों ने फर्जी जमीन की रजिस्ट्री कराकर पैसे हड़प लिए। पढे़ं पूरी खबर…

दिव्यांगों पर टिप्पणी- कॉमेडियन समय रैना समेत 5 पर जुर्माना:सुप्रीम कोर्ट बोला- हमने आजादी दी ताकि सुधरें पर कुछ नहीं हुआ, हमें गुमराह किया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्टैंड-अप कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना, रणवीर अलाहाबादिया, विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर, निशांत जगदीश तंवर पर 3 लाख रुपए जुर्माना लगाया है। अदालत ने दिव्यांगों पर विवादित टिप्पणी के केस में यह आदेश दिया है। इसकी सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने की। बेंच ने कहा कि हमारे आदेश के बावजूद रैना ने अपने शो पर किसी दिव्यांग को नहीं बुलाया। अदालत ने कहा- हमें लगता है कि रैना ने अदालत को गुमराह किया और हमारे आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया। हम उन पर जुर्माना लगाते हैं, जिसे 2 हफ्ते में जमा करना होगा। अदालत क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें रैना के शो पर स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के इलाज के खर्च पर असंवेदनशील टिप्पणी करने और दिव्यांगों का मजाक उड़ाने का आरोप है। फाउंडेशन की वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि रैना ने अपने किसी भी शो में शामिल होने के लिए उनसे या किसी अन्य दिव्यांगजन से कभी संपर्क नहीं किया। दिव्यांग की गरिमा के उल्लंघन का आरोप, कोर्ट के निर्देश याचिकाकर्ता और रैना की दलील रैना के वकील ने कहा कि शो के जरिए हमने 9 लाख रुपए का फंड जुटाया है। दिव्यांगों को बुलाया गया था। शो पर उनकी फोटो भी थी। अगर दिव्यांग संस्था की वकील अपराजिता के क्लाइंट तक हम नहीं पहुंच पाए तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। दिव्यांग संस्था की वकील अपराजिता सिंह ने कहा- हमें उनसे पैसे नहीं चाहिए। यह अहंकार है और हम इसके सामने नहीं झुकेंगे। इस पर समय के वकील ने कहा कि यह घमंड नहीं है। सुप्रीम कोर्ट बोला- आजादी दी ताकि सुधरें CJI सूर्यकांत ने कहा- एक कलाकार के रूप में आप सार्वजनिक जीवन में होते हैं। यहां आप जितना ज्यादा दूसरों का सम्मान करते हैं, उतना ही ज्यादा आपका इन्वेस्टमेंट होता है। हमने लंबे समय तक इन्हें आजादी दी। हमें लगा कि ये अच्छे घर के लड़के हैं और यह सुधार लाएंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। हम जुर्माना लगाते हैं और अगर इसे नहीं भरा तो बढ़ाकर 30 लाख कर देंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर आप अपने तौर-तरीकों को सुधारना या समाज के सदस्यों की भावनाओं का सम्मान करना नहीं जानते हैं, तो आपको इसके नतीजे भुगतने होंगे। सॉलिसिटर जनरल बोले- युवाओं के पास उनसे बेहतर यूथ आइकॉन सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- हाल ही में, रैना ने एक नया शो शुरू किया जिसमें उन्होंने किसी का नाम लिए बिना सिस्टम का मजाक उड़ाया। उन्होंने शुरुआत में कहा, ‘मैं कुछ ऐसा कर रहा हूं जो मैंने पिछली सीरीज में नहीं किया था।’ तुषार मेहता बोले- “वे नींबू-मिर्च लटकाते हैं। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह साफ दिख रहा था। मैं इस मामले में पड़ना नहीं चाहता था, लेकिन अगर रैना SMA फाउंडेशन या पीड़ित लोगों से संपर्क नहीं किया है, तो यह उनके अहंकार को दिखाता है।” 2025 में शो के दौरान रणवीर के कमेंट से शुरू हुआ विवाद फरवरी 2025 में रणवीर अलाहाबादिया समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट में बतौर गेस्ट जज पहुंचे। उन्होंने एक प्रतियोगी से माता-पिता के यौन संबंधों से जुड़ा बेहद आपत्तिजनक सवाल पूछा। इस क्लिप के वायरल होने के बाद पूरे देश में भारी विरोध शुरू हो गया। इसके बाद महाराष्ट्र और असम समेत कई राज्यों में FIR दर्ज हुई। शिकायतों में समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया और अन्य पैनलिस्टों के नाम शामिल किए गए। आरोप लगाए गए कि शो में अश्लील और अभद्र सामग्री परोसी गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है। सार्वजनिक मंच पर शालीनता और सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी है। कुछ युवा खुद को “बहुत ओवरस्मार्ट” समझते हैं। भास्कर नॉलेज दिव्यांगों का मजाक… कानून क्या कहता है? भारत में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 दिव्यांग लोगों की गरिमा, समानता और भेदभाव से सुरक्षा की गारंटी देता है। वहीं, संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार देता है। इसलिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसा मजाक, जो दिव्यांगों का अपमान करे या उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाए, कानूनी जांच और न्यायिक कार्रवाई के दायरे में आता है। क्या ऑनलाइन कॉमेडी के लिए नए नियम बन सकते हैं? याचिका में मांग की गई है कि दिव्यांगों की गरिमा का उल्लंघन करने वाले ऑनलाइन कंटेंट पर स्पष्ट गाइडलाइन बनाई जाए। फिलहाल भारत में ऐसा कोई नियम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूब जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस और सजा का प्रावधान तय करे।

परिवार का दावा, बिहारीजी मंदिर में चढ़ाया हीरा गायब:1 साल से जांच की मांग कर रही व्यापारी की मां; अधिकारी बोले- कांच है या डायमंड हमें नहीं पता

भरतपुर के बिहारी जी मंदिर में ऑयल मिल व्यापारी की मां का दान किया हीरा गायब है। दावा है कि उन्होंने मंदिर में हीरा दिसंबर 2024 में चढ़ाया था। इसके बाद उन्हें 6 महीने बाद पता चला कि मूर्ति पर हीरा नहीं कांच का टुकड़ा लगा है।
महिला का दावा है कि उन्होंने कई बार देवस्थान विभाग से अपने भेंट किए हीरे की स्लिप मांगी लेकिन, उन्हें नहीं दी गई। महिला का आरोप है कि उन्हें यह कहा गया कि क्या पता आपने कांच का टुकड़ा चढ़ाया हो। इसके बाद से लगातार वो अपनी बहू के साथ हीरे की जांच की मांग कर रही हैं।
मामले को लेकर देवस्थान विभाग के आयुक्त मुकेश मीणा ने कहा- मैं उस वक्त यहां तैनात नहीं था। ऐसे में, मैं बता नहीं सकता कि वह हीरा है या कांच का टुकड़ा। समझिए पूरा मामला … दिल्ली से खरीदा था हीरा मीरा बंसल की बहू कृपाली ने बताया- सास मीरा बंसल ने बिहारीजी की भक्त हैं। उनकी इच्छा थी कि एक हीरा बिहारीजी की मूर्ति पर भी हो। ऐसे में, 2024 दिसंबर में दिल्ली के करोल बाग स्थित कुंदन लाल एंड संस के यहां से हीरा खरीदा था। ये हीरा 3 लाख 64 हजार रुपए में खरीदा था।
जून 2025 से यहां आने वाले भक्तों और हमारे मिलने वाले लोगों ने कहा कि ये हीरा तुम्हारा दिया हुआ नहीं लग रहा। इसकी चमक वैसी नहीं है। पहले जैसी चमक नहीं रही कृपाली ने बताया- इसके बाद वहां जाकर हमारे परिवार ने हीरे को देखा तो, वहां पर पहले जैसे हीरे की चमक नहीं थी। इसके बाद देवस्थान विभाग के आयुक्त मुकेश मीणा से बात की गई लेकिन, उन्होंने संतुष्टि पूर्वक कोई जवाब नहीं दिया। हीरा चढ़ाने के बाद कई बार हीरा दान के लिए देवस्थान विभाग से स्लिप मांगी लेकिन, नहीं दी। मामला रफा-दफा करने की कोशिश कृपाली ने दावा किया कि इसी दौरान देवस्थान विभाग से दो कर्मचारी सूरजभान और पुष्पेंद्र घर आए। मामले को रफा-दफा करने की बात कही। लेकिन, हमने कहा कि हीरे की जांच करवा दीजिए। इसके बाद हमने देवस्थान विभाग उदयपुर, भरतपुर विधायक सुभाष गर्ग, सीएम भजन लाल शर्मा से लिखित में इसकी शिकायत की है। अधिकारी बोले- कांच का टुकड़ा कृपाली ने आरोप लगाया कि अब देवस्थान विभाग के अधिकारी कहते हैं कि क्या पता तुमने बिहारीजी पर कांच का टुकड़ा चढ़ाया हो। जब हमने हीरा दान किया था उस समय देवस्थान विभाग ने हीरे की जांच नहीं की थी। उन्हें उस समय जांच करनी चाहिए थी। देवस्थान विभाग ने हीरा गायब किया और अब उसे वह कांच का टुकड़ा बता रहे हैं। हमारे पास हीरे का बिल, उसका नंबर और सर्टिफिकेट भी है। हमने पुलिस में शिकायत नहीं की है, हम केवल हीरे की जांच करवाना चाहते हैं। आयुक्त बोले- हीरे दान की डेट अलग मामले को लेकर देवस्थान विभाग के आयुक्त मुकेश मीणा ने कहा- जब हीरा दान किया गया था। उस समय में कहीं और तैनात था। अब वह हीरा है या कांच का टुकड़ा उसके बारे में मैं नहीं बता सकता। मुझे नहीं पता कि उस समय कौन अधिकारी था या कौन कर्मचारी था। रसीद किसने नहीं दी इसके बारे में मैं कैसे बता सकता हूं। हमारे रिकॉर्ड में हीरा दान 15 नवंबर को किया गया था। मीरा बंसल का कहना है कि उन्होंने 10 दिसंबर को हीरा दान किया था। हीरा वेरीफाई नहीं हुआ है। हीरे की जांच के लिए कमेटी बनाई हुई है। जो कर्मचारी बंसल के घर गए थे उनके बारे में मुझे पता नहीं है।

IDBI बैंक में 61% हिस्सेदारी बेचेगी सरकार और LIC:कनाडा की फेयरफैक्स और दुबई की एमिरेट्स NBD के साथ एक महीने में हो सकती है डील

भारत सरकार और लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया मिलकर IDBI बैंक में अपनी 60.7% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं। इस स्ट्रैटेजिक डिसइनवेस्टमेंट यानी विनिवेश के लिए कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और दुबई की एमिरेट्स NBD ने बोलियां लगाई हैं, जो अभी वैल्यूएशन के दौर में हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह पूरी डील अगले एक महीने के भीतर फाइनल हो सकती है। डील के रिव्यू के लिए ब्यूरोक्रेट्स की मीटिंग बैंक में हिस्सेदारी बिक्री की प्रोसेस तेजी से आगे बढ़ रही है। सूत्रों ने बताया कि सोमवार को ब्यूरोक्रेट्स के एक पैनल ने एक मीटिंग की थी, जिसमें इस ट्रांजैक्शन को आगे बढ़ाने के लिए रिव्यू किया गया था। अभी कंपनियों की रिवाइज बोलियों की जांच की जा रही है। सरकार और LIC के पास है 94.72% शेयर यह प्रस्तावित ट्रांजैक्शन केंद्र सरकार के स्ट्रैटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट प्रोग्राम का एक अहम हिस्सा है। वर्तमान शेयरहोल्डिंग पैटर्न की बात करें तो IDBI बैंक में भारत सरकार की हिस्सेदारी 45.48% है। वहीं सरकारी बीमा कंपनी LIC के पास बैंक के 49.24% शेयर हैं। दोनों मिलकर अपनी कुल हिस्सेदारी में से 60.7% हिस्सा बेच रहे हैं। रेस में शामिल हैं दो बड़ी विदेशी कंपनियां IDBI बैंक में कंट्रोलिंग स्टेक खरीदने के लिए दो मुख्य दावेदार मैदान में हैं। इनमें पहला नाम भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्सा की कंपनी ‘फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स’ का है। वहीं दूसरा दावेदार दुबई का प्रमुख बैंकिंग ग्रुप एमिरेट्स NBD है। भारत के बैंकिंग सेक्टर में सबसे बड़ा विदेशी निवेश मौजूदा मार्केट प्राइज के हिसाब से इस प्रस्तावित अधिग्रहण की कुल वैल्यू लगभग 5.7 बिलियन डॉलर आंकी गई है। जानकारों के मुताबिक, यदि यह डील पूरी हो जाती है, तो यह भारत के बैंकिंग सेक्टर के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े विदेशी निवेशों में से एक होगा। महीने भर में पूरी हो सकती हैं प्रक्रियाएं सरकारी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि वैल्यूएशन की प्रोसेस लगातार आगे बढ़ रही है। सभी जरूरी और निर्धारित प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद अगले एक महीने के भीतर हिस्सेदारी बिक्री की प्रोसेस को फाइनल किए जाने की पूरी उम्मीद है। खबर के बीच IDBI बैंक के शेयर 3% चढ़े इस विनिवेश प्रक्रिया से जुड़ी खबरों के बीच IDBI बैंक के शेयरों में आज तेजी देखी गई। बैंक का शेयर 3% की बढ़त के साथ 86.48 रुपए प्रति शेयर के स्तर पर बंद हुआ। स्ट्रैटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट क्या होता है? जब सरकार किसी सरकारी कंपनी या बैंक में अपनी हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा (50% या उससे ज्यादा) किसी निजी या बाहरी कंपनी को बेच देती है और इसके साथ ही उस कंपनी का मैनेजमेंट कंट्रोल भी खरीदार को सौंप देती है, तो इसे रणनीतिक विनिवेश या स्ट्रैटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट कहा जाता है। इसका उद्देश्य सरकारी कंपनियों में निजी निवेश और ‌वर्क एफिशिएंसी को बढ़ावा देना होता है। ये खबर भी पढ़ें… खाने-पीने और रोजाना जरूरत के सामान महंगे: जून में थोक महंगाई 9.81%, 44 महीने में सबसे ज्यादा; रिटेल महंगाई भी 6 महीने से लगातार बढ़ रही जून में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई है। यह पिछले महीने 9.68% पर थी। जून में महंगाई 44 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 14 जुलाई को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

प्रिंसिपल को धक्का दिया, कॉलर पकड़कर नीचे गिराया, VIDEO:धरने पर बैठे पेरेंट्स से कहासुनी हुई; दीवार फांदकर स्कूल में जाना पड़ा

बाड़मेर में सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल के पेरेंट्स ने धक्का दिया और कॉलर पकड़कर नीचे गिरा दिया। स्कूल में एंट्री करने के लिए प्रिंसिपल दीवार फांदकर गए। प्रिंसिपल का 7 महीने पहले ट्रांसफर हो गया था। हालांकि वे रिलीव नहीं हुए थे। लोग स्कूल के तालाबंदी कर प्रिंसिपल को रिलीव करने की मांग कर रहे थे। मामला नोखड़ा के आडेल गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल का मंगलवार सुबह 11 बजे का है। बच्चे और पेरेंट्स स्कूल में शिक्षा व्यवस्था को लेकर मेन गेट पर ताला लगाकर धरने पर बैठे थे। प्रिंसिपल भैराराम थोरी आए और चाबी के बारे में पूछा। जवाब नहीं मिलने पर पत्थर से स्कूल के मेन गेट का ताला तोड़ने लगे। इस दौरान एक युवक खड़ा हुआ। उसने प्रिंसिपल की कॉलर पकड़कर धक्का दे दिया और नीचे गिरा दिया। स्कूल के बाहर मौजूद लोगों ने भी प्रिंसिपल से धक्का-मुक्की की। जब बात नहीं बनी तो प्रिंसिपल दीवार फांदकर स्कूल में घुस गए। पहले 4 फोटोज में देखिए पूरा घटनाक्रम… रिलीव नहीं हो रहे प्रिंसिपल सदर थानाधिकारी देवीचंद ढाका ने बताया- प्रिंसिपल भैराराम का ट्रांसफर उदयपुर हो गया था। गांव के सारे लोग, स्टूडेंट प्रिंसिपल के खिलाफ है। ऑनलाइन टीसी दे नहीं रहे हैं। इससे बच्चों को परेशानी हो रही है। यहां से रिलीव होकर जा नहीं रहे हैं। नोखड़ा तहसीलदार दिनेश विश्नोई ने कहा- भैराराम के ट्रांसफर को 7-8 महीने हो गए। कोर्ट से स्टे ऑर्डर भी खारिज हो गया। इसके बावजूद भी यह यहां से रिलीव नहीं हो रहे हैं। बच्चे कह रहे हैं कि जब प्रिंसिपल भैराराम का ट्रांसफर हो गया है तो उसको यहां से हटाया जाए। प्रिंसिपल भैराराम थोरी ने बताया- शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मेरी शाला दर्पण आईडी को 7 महीने से हाईजैक करके बंद कर रखी है। विभाग के अधिकारी गांव वालों और बच्चों को भड़काकर मुझे प्रताड़ित कर रहे हैं। मेरे पास आईडी ही नहीं है। विभाग ने जिसको जिम्मेदारी दे रखी है, वो ही कर सकता है। इस वजह से बच्चों को ऑनलाइन नहीं कर पा रहे हैं। स्कूल में 13 टीचरों का स्टाफ है। जब सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है तो मेरे को रिलीव भी ऑनलाइन किया जाए। …… ये खबर भी पढ़ें… टीचर का ट्रांसफर हुआ बच्चे बोले- भूख हड़ताल करेंगे:4 दिन लगे या 5, सर को वापस बुलाओ; सरकारी स्कूल के गेट पर ताला जड़ा भीलवाड़ा में हिंदी और संस्कृत पढ़ाने वाले टीचर का ट्रांसफर हुआ तो स्कूल के बच्चे नाराज हो गए। स्कूल के बाहर बैठ गए और प्रदर्शन करने लगे। बोले- जब तक टीचर को वापस नहीं लाया जाएगा वे धरने से नहीं उठेंगे। चाहे 4 दिन लगें या 5 दिन, हम भूखे-प्यासे बैठे रहेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

सुप्रीम कोर्ट का 3 लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से इनकार:कहा- कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता; CBSE ने इसी सेशन से पॉलिसी लागू की

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता है। साथ ही इसे लागू करने में आने वाली चुनौतियों को लेकर सरकार और सीबीएसई से 10 दिन में जवाब मांगा है। अब 14 दिन बाद 29 जुलाई को इस मामले में सुनवाई होगी। दरअसल, थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी मौजूदा 2026-27 सेशन से लागू कर दी गई है। नई पॉलिसी के मुताबिक स्टूडेंट्स को 2 भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। ऐसे में उन्हें वे भाषाएं छोड़नी पड़ेंगी, जिन्हें वे क्लास 5 से लगातार पढ़ रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने तैयारी के बिना तीन-भाषा नीति लागू कर दी है। स्कूलों में पर्याप्त टीचर, किताबें और जरूरी एकेडमिक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है, जिससे स्टूडेंट-टीचर को परेशानी हो रही है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े सवाल-जवाब, जो आपको जानना जरूरी है 1. मामला क्या है?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है।
हालांकि, CBSE ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर 6 जून को यूटर्न लिया और नई गाइडलाइन जारी की थी। इसके मुताबिक, इस साल 10वीं में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी होगी। 7वीं, 8वीं और 9वीं के वे छात्र, जिन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे अपनी वही भाषाएं जारी रख सकेंगे। हालांकि, उन्हें इसके साथ एक भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी। पूरी खबर पढ़ें 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है?
जवाब: पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच, जर्मन) पढ़ते थे। अब नियम कहता है कि तीन में से कम-से-कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही ली जा सकेगी। 3. याचिकाएं किसकी तरफ से लगाई गई थीं?
जवाब: याचिकाएं छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी ने दायर की थीं। याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर, सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने सुनवाई की। 4. याचिकाकर्ताओं की आपत्ति क्या है?
जवाब: नियम अचानक लागू कर दिया गया। कई भाषाओं की किताबें अभी उपलब्ध नहीं हैं। स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक नहीं हैं। इससे छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. कोर्ट में किताबों को लेकर क्या दलील दी गई?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने पर रोक लगनी चाहिए। सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर, सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से अभी केवल 3 भाषाओं की किताबें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं में पढ़ाई कैसे शुरू होगी? 6. शिक्षकों को लेकर क्या समस्या बताई गई?
जवाब: वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि अगर किसी स्कूल में नई भारतीय भाषा पढ़ानी होगी, तो उसके लिए प्रशिक्षित शिक्षक चाहिए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इतने कम समय में शिक्षक और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषा पूरी तरह बंद हो जाएगी?
जवाब: नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन पहले उन्हें दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. तीसरी भाषा (R3) का बोर्ड एग्जाम होगा?
जवाब: नहीं। CBSE ने कहा है कि कक्षा 10 के बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। 10. अभी आगे क्या होगा?
जवाब: केंद्र, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि इस नीति पर आगे क्या आदेश देना है। 34 साल बाद नई शिक्षा नीति 2020 लाई गई नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) को भारत सरकार ने 29 जुलाई, 2020 को मंजूरी दी थी। यह 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव है। इससे पिछली नीति 1986 में बनाई गई थी, जिसे 1992 में अपडेट किया गया था। इसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार ढालना है, ताकि छात्र व्यावहारिक ज्ञान मिले और वे स्किल सीखें। नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए केंद्र ने 2030 तक का लक्ष्य रखा है। शिक्षा संविधान में समवर्ती सूची का विषय है, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों का अधिकार होता है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि राज्य सरकारें इसे पूरी तरह अप्लाई करें। टकराव होने पर दोनों पक्षों को आम सहमति से विवाद सुलझाने का सुझाव दिया गया है। ——————- ये खबर भी पढ़ें: CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पेरेंट्स:9वीं क्लास में लागू किए जाने का विरोध, जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच करेगी सुनवाई CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में 19 लोगों के एक ग्रुप ने चुनौती दी। इनमें स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर्स शामिल हैं। ये याचिका क्लास 9वीं में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू किए जाने के विरोध दायर की गई। इसके खिलाफ SC अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। CBSE ने 15 मई को एकेडमिक सेशन 2026-27 से थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का सर्कुलर जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें…

लिस्टिंग के बाद मस्क ने की लाखों करोड़ की डील:देर से समझ आई रॉकेट-एआई की कहानी; लिस्ट होने के पहले ही महीने 35% गिरे शेयर

12 जून की वो शाम याद कीजिए, जब एलन मस्क की स्पेसएक्स पहली बार शेयर बाजार में उतरी थी। कंपनी ने शेयर का दाम 135 डॉलर तय किया था। लेकिन बाजार खुलते ही भाव 150 डॉलर तक पहुंच गया। दिन भर में यह 176 डॉलर तक चढ़ा और आखिर में 160.95 डॉलर पर बंद हुआ। यह इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बन चुका था। अगले हफ्ते तो हद ही हो गई- शेयर 225 डॉलर तक पहुंच गया। इसके साथ ही स्पेसएक्स मार्केट कैप के मामले में अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट को भी पीछे छोड़ चुकी थी। बीबीसी वर्ल्ड की एक रिपोर्ट में निवेश रिसर्च कंपनी सीएफआरए के विश्लेषक कीथ स्नाइडर ने कहा है, ‘मस्क जिस भी कंपनी को छूते हैं, लोग उत्साहित हो जाते हैं। लेकिन यह पहला मौका था जब लोगों को लगा कि वे किसी ऐसी चीज में निवेश कर रहे हैं जिसे एआई प्रोजेक्ट के तौर पर पेश किया जा रहा था।’ दरअसल, इसी साल स्पेसएक्स ने मस्क की ही एआई कंपनी एक्सएआई को खरीदा था, जिसे अब स्पेसएक्स एआई नाम दिया गया है और जो चैटबॉट ग्रोक के लिए जानी जाती है। लेकिन असलियत सामने आते ही तस्वीर बदलने लगी। स्पेसएक्स की असली कमाई तो रॉकेट बनाने, उन्हें लॉन्च करने और स्टारलिंक सैटेलाइट सर्विस से होती है। जैसे ही स्टारलिंक ने अमेरिका के मेम्फिस इलाके में डेटा सेंटर को लेकर स्थानीय विरोध के बीच कीमतें घटाने का ऐलान किया, उस दिन शेयर 8% तक गिर गया। 7 जुलाई को जब स्पेसएक्स को नैस्डैक-100 इंडेक्स में शामिल किया गया, तब भी पूरा इंडेक्स 1.7% गिरा, लेकिन स्पेसएक्स का शेयर 4.4% टूटा। पहले महीने के आखिर तक शेयर का भाव करीब 145 डॉलर रह गया। यानी पहले दिन के उच्चतम स्तर से 18% और अब तक के सबसे ऊंचे स्तर से 35% नीचे। मतलब जिन रिटेल निवेशकों ने लिस्टिंग के शुरुआती पांच दिनों में शेयर खरीदे, वे अभी भारी घाटे पर बैठे हैं। स्नाइडर तो यहां तक कहते हैं कि यह गेमस्टॉप और वेंडीज जैसे ‘मीम स्टॉक’ की तरह व्यवहार करने लगा था, जहां सिर्फ ऑनलाइन उत्साह से कीमतें उछलती हैं। यह एक हद तक सही भी है। पिछले साल स्पेसएक्स ने 18 अरब डॉलर (1.7 लाख करोड़) की कमाई की थी और अब भी यह घाटे में चल रही है। बिना कैश चुकाए खरीदी 5.7 लाख करोड़ की कोडिंग कंपनी 16 जून को जब स्पेसएक्स का शेयर उछाल पर था, ठीक उसी दिन कंपनी ने कोड लिखने वाले एआई बॉट स्टार्टअप कर्सर को 60 अरब डॉलर (5.7 लाख करोड़) में स्पेसएक्स के शेयर चुकाकर खरीद लिया। चूंकि उस वक्त स्पेसएक्स के शेयर की कीमत आसमान पर थी, मस्क ने असल में बिना नकद खर्च किए ही यह कंपनी हासिल कर ली। विश्लेषक सैमुअल कर इसे बाजार की ऐसी समझ बताते हैं जो शायद ही किसी अन्य कंपनी के पास हो।

PM की मौजूदगी में किशाऊ परियोजना का MOU जल्द:हिमाचल CM ने हाई पावर कमेटी की मीटिंग ली; कहा-बिना निवेश 600 करोड़ की होगी कमाई

422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बहुउद्देश्यीय जलविद्युत परियोजना का समझौता ज्ञापन (MOU) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में भारत सरकार और साझेदार राज्यों के बीच जल्द हस्ताक्षरित होगा। MOU पर हस्ताक्षर से पहले केंद्र ने इसका प्रारूप परियोजना से जुड़े सभी राज्यों को भेजकर सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। इसी सिलसिले में सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी मंगलवार को एमओयू के प्रारूप की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना के क्रियान्वयन में हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में हुई बैठक में 422 मेगावाट किशाऊ परियोजना के क्रियान्वयन पर सहमति बनी है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश को परियोजना में कोई वित्तीय निवेश नहीं करना होगा, जबकि राज्य को हर वर्ष लगभग 600 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने पूर्व में तैयार एमओयू के प्रारूप को अस्वीकार कर प्रदेश के हितों को सुरक्षित रखने वाली नई शर्तों और प्रावधानों को सभी हितधारकों से मंजूरी दिलाई। इससे राज्य के दीर्घकालिक हित सुरक्षित हुए और परियोजना के क्रियान्वयन का रास्ता भी साफ हुआ। हरियाणा-दिल्ली-राजस्थान उठाएंगे बिजली कंपोनेंट खर्च मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सभी साझेदार राज्यों (हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान) को बिजली और पानी में उनका वैध हिस्सा मिलेगा। वहीं हिमाचल को अपनी जरूरत के अनुसार जलाशय से पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य ने यमुना बेसिन में 378 मिलियन घन मीटर पानी पर अपना अधिकार भी सुरक्षित किया है। बीबीएमबी के बकाया वसूली के प्रयास तेज: CM सुक्खू ने कहा कि किशाऊ परियोजना पर हुआ यह समझौता हिमाचल के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे राज्य का वैध हिस्सा और दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित होंगे। राज्य सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की परियोजनाओं से हिमाचल को मिलने वाली 13,066 मिलियन यूनिट बिजली के लंबित बकाये की वसूली के प्रयास भी तेज कर रही है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद यह मामला करीब 15 वर्षों से लंबित है। आठ साल से चला आ रहा गतिरोध समाप्त मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के प्रयासों से किशाऊ परियोजना में हिमाचल के वित्तीय योगदान को लेकर पिछले आठ वर्षों से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हुआ है। इससे राज्य पर पड़ने वाला भारी वित्तीय बोझ टल गया। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने परियोजना में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में लगभग 800 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसका विरोध करते हुए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की, जिसके तहत हिमाचल को परियोजना में कोई पूंजीगत निवेश नहीं करना होगा और राज्य को उसके सभी वैध लाभ मिलते रहेंगे। सीएम के अलावा ये अधिकारी रहे मौजूद मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम, प्रधान सचिव देवेश कुमार और हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन सादिक उपस्थित रहे। मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

देश में 60 करोड़ गेमर:कैजुअल, फ्री गेम्स छोड़कर शूटर, स्ट्रैटजी जैसे गेम्स की तरफ भारतीयों का रुझान; सालाना 14.5% बढ़ रहा बाजार

मोबाइल गेमिंग मार्केट करवट ले रहा है। ‘मिक्सी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गेमर अब कैजुअल, फ्री गेम्स छोड़कर शूटर, स्ट्रैटजी जैसे प्रतिस्पर्धी गेम्स खेल रहे हैं। इससे इन-एप खरीदारी तेजी से बढ़ रही है। रियल मनी गेमिंग यानी सट्टा आधारित गेम्स पर सख्ती के बाद गेमर का रुख गैर-सट्टा गेमिंग की तरफ मुड़ गया है। नॉन-आरएमजी गेमिंग बाजार 2025 में 10,527 करोड़ का रहा, जो इस साल 14,350 करोड़ और 2029 तक 23,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। देश में 60 करोड़ सक्रिय गेमर हैं। मुफ्त गेम पसंद, पर पिछले 5 साल में इन-एप खरीदारी से कमाई दोगुनी से भी ज्यादा 7,656 करोड़ हुई सबसे तेज ग्रोथ – 2025 में देश में 795 करोड़ मोबाइल गेम डाउनलोड हुए, जो पूरे एशिया में सबसे ज्यादा है। गेमर भी सालभर में 9% बढ़कर 60 करोड़ हो गए। कीमत पर जोर- भारत मुनाफे के लिहाज से पीछे है। बीते साल इन-एप खरीदारी से 7,656 करोड़ कमाई हुई। इस मामले में हम एशिया में छठे स्थान पर रहे। दाम को लेकर संवेदनशीलता इसकी वजह बताई गई है। फ्री गेम्स पसंद – भारतीय गेमर ज्यादातर मुफ्त गेम्स पसंद करते हैं। विज्ञापन कमाई का बड़ा जरिया है। 2025 में इन-गेम विज्ञापन से कंपनियों को 2,871 करोड़ की कमाई हुई। खर्च बढ़ा रहे गेमर- पिछले पांच साल में मोबाइल गेमिंग आय सालाना 17 फीसदी से भी ज्यादा दर से बढ़ी है, जबकि इसी दौरान इन-एप खरीद से कमाई दोगुनी से ज्यादा हो गई। यानी गेमर अब धीरे-धीरे खर्च करना शुरू तो कर रहे हैं। तेज ग्रोथ – हर साल ढाई गुना तक बढ़ रही गेमिंग से कमाई
गेम कैटेगरी आय वृद्धि
एमओबीए 234%
कार्ड बैटलर 92%
4X स्ट्रैटजी 77%
(स्रोत: मिक्सी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स) देश का पूरा गेमिंग मार्केट इस साल 48,000 करोड़ तक 2026 – 48,000 करोड़ का बाजार (RMG मिलाकर) 2031 – 94,000 करोड़ से ऊपर जाने का अनुमान सालाना बढ़ोतरी- 14.52%
गेमिंग स्टार्टअप्स -2,364 बड़ी कंपनियां गरेना/फ्री फायर, कृष्णा गेम्स/बीजीएमआई-क्राफ्टन, नजारा टेक्नोलॉजीज, ड्रीम11, गेम्सक्राफ्ट (स्रोत: मोरडोर इंटेलिजेंस, ट्रैक्सन) शूटर कैटेगरी से कमाई में 94% हिस्सेदारी 2 कंपनियों की – डाउनलोड में सिमुलेशन, आर्केड गेम्स आगे, आय में शूटर गेम्स अव्वल। – फ्री फायर मैक्स और बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया मिलकर भारती गेम मार्केट में शूटर कैटेगरी की कुल कमाई में 94% हिस्सेदारी रखते हैं। – हाई-एंड शूटर एक्सपीरियंस की मांग बढ़त रही है। यानी गेमर अब सिर्फ हल्के-फुल्के गेम्स नहीं, बल्कि ज्यादा ग्राफिक्स और गहराई वाले शूटर गेम्स भी पसंद कर रहे हैं। – स्नाइपर गेम्स भारत में सबसे तेजी से बढ़ती कैटेगरी बनकर उभरे हैं। अब स्थानीय भाषा, थीम वाले गेम का बोलबाला बढ़ रहा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय गेमिंग अब भी कम कमाई वाला बाजार बना हुआ है। लेकिन बेहतर लोकलाइजेशन, भारत-केंद्रित टूर्नामेंट और बदलते उपभोक्ता व्यवहार से आगामी वर्षों में खर्च बढ़ने की उम्मीद है। लूडो किंग और क्रिकेट लीग जैसे स्थानीय गेम्स सांस्कृतिक जुड़ाव के दम पर कई ग्लोबल गेम्स को डाउनलोड में पीछे छोड़ रहे हैं। जो बताता है कि आगे स्थानीय भाषा और थीम वाले गेम्स भारतीय बाजार में बड़ी भूमिका निभाएंगे। हर ऑनलाइन गेम सट्टा नहीं होता, इनमें फर्क समझें सामान्य गेम (जैसे शूटर, स्ट्रैटजी, आर्केड) में जीत या हार खिलाड़ी के कौशल और रणनीति पर निर्भर करती है। पैसा सिर्फ गेम के अंदर हथियार, कैरेक्टर या लेवल जैसी चीजें खरीदने में खर्च होता है। ‘रियल मनी’ जीतने का कोई दावा नहीं होता। वहीं रियल मनी गेमिंग (आरएमजी) गेम्स में खिलाड़ी असली पैसा दांव पर लगाते हैं और नतीजे के आधार पर पैसे जीतते या हारते हैं। इस पर भारत में 2025 में सख्ती की गई है।

नासिक में महिला पर्यटक पर हमला, 20km तक पीछा किया:चलती कार पर पत्थर-रॉड मारे, पीड़ित परिवार ने छेड़छाड़ का विरोध किया था

महाराष्ट्र के नासिक जिले में भावली डैम के पास महिला पर्यटक से कथित छेड़छाड़ और उसके परिवार पर हमले के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। घटना के दो दिन बाद मंगलवार को गिरफ्तारी की गई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ छेड़छाड़, हत्या के प्रयास और डकैती सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, 44 वर्षीय महिला अपने पति, बेटे, बेटी, देवर और दो भतीजों के साथ रविवार को भावली डैम के पास स्थित झरने पर घूमने गई थीं। शिकायत के मुताबिक, वहां मौजूद दो युवकों ने महिला पर फब्तियां कसीं और उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। जब परिवार के सदस्यों ने विरोध किया तो आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की। शिकायत में कहा गया है कि हमलावरों ने महिला के कपड़े फाड़ दिए और उसका मोबाइल फोन छीन लिया। जब महिला के पति ने मोबाइल वापस लेने की कोशिश की तो उनकी 20 ग्राम सोने की चेन भी छीन ली गई और उनके साथ भी मारपीट की गई। करीब 15 किमी तक पीछा किया नासिक पुलिस के मुताबिक, नासिक में ही रहने वाली पूनम भागवत 12 जुलाई की शाम अपने परिवार के साथ भावली वाटरफॉल घूमने गई थीं। इसी दौरान परिवार की लड़की के साथ कुछ स्थानीय युवकों ने छेड़छाड़ की। इस पर उन्होंने और उनके पति ने विरोध जताते हुए कहा कि आपको पता है यह पब्लिक प्लेस है। इतना सुनते ही दोनों युवकों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। इसका विरोध करने के बाद वे मौके से फरार हो गए। शिकायत के अनुसार, परिवार जब वहां से SUV में निकलने लगा तो आरोपियों ने कार और मोटरसाइकिल से उनका करीब 15 किमी तक पीछा किया। उन्होंने वाहन को ओवरटेक कर रास्ता रोक लिया। इसके बाद 8-9 लोग लाठी, लोहे की रॉड और बेसबॉल बैट लेकर आए, SUV का विंडशील्ड तोड़ दिया और महिला को जबरन बाहर खींच लिया। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उसके साथ छेड़छाड़ की और एक आरोपी ने बेसबॉल बैट से उसके सिर पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन वह बच गई। किसी तरह परिवार वहां से निकलकर पुलिस थाने पहुंचा और घटना का वीडियो पुलिस को सौंपा। आरोपियों के खिलाफ गंभीर मामले दर्ज : डॉ. स्वामी नासिक ग्रामीण SP डॉ. स्वामी ने बताया कि इगतपुरी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने मंगलवार को 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी गिरनारे, नांदगांव साडो, माणिकखांब और आसपास के गांवों के रहने वाले हैं। आरोपियों के खिलाफ छेड़छाड़, हत्या के प्रयास और डकैती सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इनमें से एक आरोपी भोइर के खिलाफ वर्ष 2020-21 में हत्या का मामला भी दर्ज हो चुका है। मामले की आगे की जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम ——————- ये खबर भी पढ़ें… ऋषिकेश में पर्यटकों पर हमला करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार:काले की ढाल क्षेत्र में मारपीट और तोड़फोड़ ऋषिकेश के काले की ढाल क्षेत्र में हरियाणा से आए पर्यटकों के साथ मारपीट, जानलेवा हमला और वाहन में तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पीड़ितों की तहरीर पर 5 नामजद समेत अन्य अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पूरी खबर पढ़ें…